अद्भुत पहाड़ी भाग – 1

जिज्ञासा

कहानी शुरू होती है तीन किरदारों के साथ। यश(योशी) विक्रम (विकी) और राकेश (रॉकी)। तीनों ही बडे जिगरी दोस्त थे। परन्तु योशी और रॉकी की शौक और रूचियाँ एक जैसी होने के कारण दोनों एक-दूसरे के काफी करीब थे। दोनों के परिवार संपन्न,सुसंस्कृत और उच्च शिक्षित होने के वजह से दोनों को किसी बात की कमी नहीं थी। वहीं दूसरी ओर विकी एक छोटे शहर के साधारण से परिवार से था, इसलिए दोनों से काफी अलग विचारधारा रखता था। योशी और रॉकी के पास मॉडर्न बाईक्स थी, तो विकी के पास उसके पापा का पुराना स्कूटर। पर दोनों दोस्त भी विकी को किसी बात की कमी ना हो इसका खास ध्यान रखते थे। योशी और रॉकी को जहां अंग्रेजी फिल्में, विडियोगेम्स का शौक था, विकी को घूमने का और पढने का शौक था। तीनों दोस्तों की एक सहेली भी थी निकिता। निकिता तीनों को अपनी जिन्दगी के सबसे बेहतरीन दोस्त मानती थी। पर जब भी योशी और रॉकी अपने शौक में व्यस्त हो जाते थे तब विकी का निकिता एकमात्र सहारा होती। इसी कारण विकी और निकिता दोनों एक दूसरे के अधिक करीबी बन गए।

एक दिन कॉलेज द्वारा आयोजित किये गये कल्चरल प्रोग्राम के एक डरावने ड्रामे को देखकर तीनों दोस्तों में बहस छिड़ गई कि कौन भुत-प्रेत आत्मा इनमें विश्वास रखता है? ये बात बहस का मुद्दा बन गई। विकी की मानें तो उसका कहना था कि, जिस चीज का ज्ञान नहीं उस बात पर बहस कर के क्‍या प्राप्त होगा? रॉकी की मानें तो उसका कहना ये था कि, ऐसे बातों से और चीजों से जितना दूर रहा जाए उतनाअच्छा है, क्योंकि रॉकी भूत प्रेतात्माओ से काफी डरता है। और योशी का कहना था कि जब तक वो खुद अपनी आँखों से भूत प्रेतात्मा जैसी कोई चीज देख नहीं लेता तब तक उसके लिए ये सब बातें एकअंधविश्वास और मनगढंत ही रहेंगी। पर मन ही मन में योशी थोडा बहुत इन चीजों से डरता भी था। परअपने दोस्तों में अपनी जगह बनाए रखने के लिए वो ऐसा दिखाता था, जैसे वो किसी से नहीं डरता। बहस इस बात पर खत्म हो गई कि रॉकी थोडा सा निराश हो कर वहां से निकल गया।

कुछ देर बाद योशी ने दोनों दोस्तों को कॉल कर के ये बताया कि उसे एक ऐसे पहाड़ी के बारे में जानकारी मिली है जहाँ उनके बहस का जवाब मिल सकता है। वह जगह काफी करीब होने के कारण तीनों शाम को जाकर सुबह तक वापस आ भी जाएंगे। योशी ने दोनों दोस्तों के सामने ये शर्त रखी कि अगर कोई ना भीआए तो भी वह अकेला उस पहाड़ी पर जाएगा।उसकी ये ज़िद देख रॉकी तो साथ आने के लिए मान गया पर विकी ने साथ आने से साफ इनकार कर दिया। दो दिन बाद अमावस वाले दिन पहाड़ी पर जाने का निर्णय लिया गया। वैसे तो वह पहाड़ी एक टूरिस्ट स्पॉट होने के कारण दिन भर वहां लोगों का जमावड़ा लगा रहता था पर अंधेरा होते ही पहाड़ी एकदम शांत सुनसान हो जाती थी। वहां के लोगों का कहना था कि, अमावस की रात में जो भी पहाड़ी पर जाता है वो वापस लौट कर नहीं आता।

 सफ़र

 योशी और रॉकी दोनों भी तैयारी में जुट गए। टार्च,स्विस नाईफ, जिप्पो लाइटर,रस्सी, पानी,थोडा बहुत खाने का सामान, कुछ फल सब साथ मे रख लिया।दोनों ने अपने मोबाइल्स को पूरा चार्ज करने के साथ ही पावरबैंक भी साथ रख ली। दूसरी तरफ विकी अपने दोस्तों के ज़िद से काफी बेचैन हो रहा था। हमेशा की तरह उसने अपनी फिक्र निकिता के सामने जाहिर की। जिस पर निकिता ने यह राय दी कि, विकी को अपने दोस्तों को किसी भी हालात में अकेले नहीं जाने देना चाहिए। अगर वह उनका इरादा नहीं बदल सकता तो उनका साथ तो देना ही होगा। यह सुनकर विकी काफी हद्ग तक निश्चिन्त हो गया और वह भी तैयारियों मे लग गया। पहाड़ी पर जाने वाली सडक अच्छी ना होने के कारण योशी और रॉकी ने वहां जाने के एकमात्र विकल्प ट्रेन से जाने का निर्णय लिया। तय वक्त के अनुसार दोपहर बाद ४ बजे दोनों स्टेशन पर पहुंच गए। रॉकी बार बार पीछे मुड़कर देखता रहा इस आशा में कि कहीं से विकी आ जाए। 

योशी ने यह बात जान कर उसे कहा… “अरे विकी नहीं आएगा और तुझे भी डर लग रहा हो तो तू भी वापस जा सकता है। “

इतने में विकी को टैक्सी से उतरते देख रॉकी एकदम से उछल पड़ा। “मुझे पता था विकी, तू जरूर आएगा !!” और उसे गले लगा लिया।

विकी को देखकर योशी कहता है, “अरे विकी, तुने तो मना कर दिया था आने के लिए फिर कैसे आ गया तू??”

यह सुनकर विकी ने योशी को जवाब दिया, “मैं तुम्हारी ज़िद के वजह से नहीं बल्कि अपनी दोस्तों के लिए आया हूँ, उन्हें शायद मेरी जरूरत पड़ सकतीहैं।”

यह बोल कर विकी ने योशी की तरफ अपना हाथ बढाया और योशी ने भी खुशी से हाथ मिलाया,पर विकी का हाथ एकदम ठंडा था।

चौंक कर योशी अपना हाथ पीछे लेते हुए कहा,”इतना ठंडा क्‍यों है भाई हाथ तेरा??? डर लग रहा है तो वापस जा सकता है तू।”

विकी ने कहा “अरे मैं टैक्सी में ७.0. के एकदम करीब बैठा हुआ था और ठंडी पानी की बोतल पकड़े हुए था।”

योशी को थोडा अटपटा सा लगा विकी का जवाब, पर उस पर गौर ना करते हुए तीनों दोस्त आगे बढ़ने लगे। हंसी मजाक करते हुए तीनों दोस्त एक अंजान खतरे की तरफ बढ़ रहे थे। लगभग शाम होते होते तीनों गंतव्य स्टेशन पर पहुंच गए। स्टेशन से कुछ ही दूरी पर एक छोटे से कस्बे को पार करते ही पहाड़ी का रास्ता शुरू हो रहा था। कुछ देर पैदल चलकर तीनों दोस्त कस्बे मे पहुंच गए। कस्बे में पहुंचने पर तीनों दोस्त पहाड़ी की मालूमात इकटठा करने में जुट गए। पूछताछ करने पर उन्हें ये जानकारी मिली कि, पहाडी का नाम काली पहाड़ी है। पहाडी के तीनों तरफ घना जंगल था और  एक तरफ कई हजारों फीट गहरी खाई। कस्बे के लोगों का कहना था कि रात में पहाड़ी सेअजीबोगरीब आवाज़ें आती हैं और जो भी इंसान रात के वक्त पहाड़ी पर गया वो कभी लौट कर नहीं आया। कस्बे के कई लोग ऐसे ही पहाड़ी पर गए और आज तक लौट कर नहीं आए।

राज़  कस्बे के बुजुर्गों ने बताया कि, ” किसी जमाने में पहाड़ी पर एक आलिशान किला हुआ करता था, जहाँ के “महाराजा तिलकराज” अपनी ताकत,विलक्षण बुद्धि और दरियादिली के लिए जाने जाते थे। अपने साहस,बाहुबल और भव्य सेना के वजह से वे कोई युद्ध कभी हारे नहीं थे। एक रात अचानक जंगल में आग लग गई। आग ने भयानक विकराल रूप धारण कर लिया और किसी के कुछ समझने से पहले सैनिकों की  नजरों के सामने देखते ही देखते उस प्रचंड आग ने आलिशान किले को बेचिराग कर दिया। किले के लोग, कई सैनिक आग की बलि चढ गए। कुछ लोग आग में जल कर मर गए और कई लोगो नेआग के डर से गहरी खाई में कूद कर अपनी जान दे दी। महाराजा तिलकराज का क्या हुआ कभी पता ही नहीं चल पाया। उसी रात से ये जंगल जैसे आधा जला हुआ है। ना पूरा भस्म हुआ और ना कोई पेड़ पौधे उगे। और आलिशान किले के जगह पर रह गया एक वीरान खंडहर। कुछ लोगों का यह मानना है कि जंगल इतना बड़ा है कि, अंदर के पेड पौधे अभी भी जल रहे हैं,ना जल के भस्म होते है और ना ही पूरी तरह से बुझते है। टूरिस्ट इस आधे जले और आधे उगे जंगल को देखने के लिए दूर दूर से आते हैं।  आज के आधुनिक युग में भी पहाड़ी के इस रहस्य को जानने में सभी असफल रहे हैं ।”

इतनी बातें जानते हुए वक्त तेजी से बीत रहा था। करीब ६:२० के आसपास तीनों दोस्त पहाड़ी कीतरफ चल पडे। कस्बे के लोगों के काफी रोकने के बावजूद तीनों पहाड़ी के रास्ते की  तरफ चल दिए। इस बात से तीनों भी अंजान थे कि, कोई साया कस्बे से उनका पीछा कर रहा है। धीरे धीरे तीनों दोस्त पहाड़ी की तरफ बढ रहे थे और उनके पीछे एक अंजान रहस्यमयी साया। एकदम शांत सुनसान से जंगल में सिर्फ़ सूखे पत्तों पर चलनेकी आवाज़ आ रही थी। तीनों ही पूरी तरह खामोश थे और जंगल के इलाके से वाकिफ होने की कोशिश कर रहें थे। अंधेरा होने लगा और तीनों ने अपने टॉर्च निकाल लिए। तभी पीछे से पत्तों की सरसराहट हुई और तीनों के शरीर में सिहरन दौड़ गई। तीनों पीछे मुड़े पर उन्हें कुछ नजर नहीं आया। तीनों एक दूसरे को देखने लगे पर कुछ बोले नहीं। इसबार रॉकी ने सोचा कि मैं ही कुछ बोलना शुरू करताहूं।

और उसने दोनों को पूछा,  “क्या लगता है तुम दोनों को सच में पहाड़ी पर ऐसा कुछ होता होगा जैसा कस्बे वाले बोल रहे है??”

विकी कहता है, “ये तो पहाड़ी पर पहुंच कर ही पता चलेगा तब तक कुछ कह नहीं सकते क्या सच है और क्या झूठ?”

इस पर रॉकी ने कहा, “कस्बे वाले झूठ क्‍यों बोलेंगे?”

विकी ने कहा, “क्या बोला जा सकता है, किसी का क्या मतलब होगा  ये सब बातें फैलाने के पीछे या फिर सच में ऐसा कुछ हो जो कस्बे वाले बता रहे थे। तुझे क्या लगता है योशी? तू चुपचाप क्यूं है?”

योशी ने मन की बात बताई,” मैं ये सोच रहा हूं कि हम लोग अंदर तो जा रहे है पर वापस आते वक़्त रास्ता कैसे याद  रहेगा ?? ये बात मुझे खाए जा रही है क्योंकि यहां इस घने जंगल में वापसी का रास्ता ढूंढ़ना मुश्किल होगा।”

विकी ने दोनों को आश्वस्त किया “मैंने कहा था ना मेरी ज़रूरत पड़ेगी मेरे दोस्तो को, इसलिए मैं इन बातों के लिए तैयार होकर आया हूं।”

ऐसा कहते हुए विकी अपने बैग में से एक स्प्रे पैंट का कैन निकालते हुए कहा, “ये रंग हमें रास्ता बतायेगा और सिर्फ हमें ही नहींअगर सच में कोई समस्या हो जाती है तो हमें ढूंढनेआने वाले को भी ये हम तक पहुंचने में मदद करेगा। ऐसा कहते हुए विकी स्प्रे कैन से पेड़ो पर और बड़े पत्थरों पर रंग से निशान बनाने लगा। 

यह देख योशी बहुत खुश हो गया और कहने लगा, “जब तक हम तीनों ऐसे ही साथ है कोई हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। हम आराम से सुबह इसी रास्ते से घर वापस चले जाएंगे!”  

सब हंसते हंसाते जंगल में और अंदर जाने लगे, तभी वापस पीछे से फिर एक बार पत्तों की सरसराहट होने लगी। तीनों भी रुक गए पर पलट के किसी ने नहीं देखा,तीनो ने एक दूसरे को देखा और पास आकर फुसफुसाते हुए कहा, “लगता है कोई हमारा पीछा कर रहा है?”

विकी ने योशी की बात से सहमत होकर कहा, “मुझे भी ऐसा ही लग रहा है। “

रॉकी ने थोड़ा सा सतर्क होकर कहा, “हो सकता है कोई छोटा जानवर या हमारा भ्रम हो?”

योशी ने उसे जवाब दिया, ” भ्रम दो बार नहीं हो सकता और कोई जानवर होता तो हमारे रुकते ही वो रुकता नहीं। पक्का कोई हमारा पीछा कर रहा है।हम अपने टॉर्च बंद करके पेड़ के पीछे छुप जाते है और देखते है की आगे क्या हरकत होती है।”

ऐसा कहते ही तीनों अपने टॉर्च बंद करके एक बडे पेड़ के पीछे छुप गए। उनके छुपते ही तीनों उस दिशा में गौर से देखने लगे, जहां से उन्हें वो आवाज़ आई थी।काफी देर रुकने के बाद भी कोई हलचल ना होने पर ये सोच कर तीनों आगे बढ़े कि वापस कोई आवाज़आए तो पीछे जाकर देखेंगे और तसल्ली करने के बाद ही आगे बढ़ेंगे।

तभी योशी ने कहा, “क्या कोई कुछ हथियार साथ लाया है? अगर है तो हाथ में रख लो। यदि ज़रूरत पड़े तो ढूंढने में वक़्त जाया ना हो।”

विकी ने मुस्कुराते हुए कहा “चिंता ना करो, मैंने कहा ना मैं सब तैयारी करके आया हूं।”

ऐसा कहते हुए विकी ने अपने बैग में से एक बड़ा सा चाकू निकाल कर योशी को दिया “ये तुम्हारे लिए” फिर एक और चाकू निकाल कर रॉकी को दिया “और ये तुम्हारे लिए” योशी ने खुश होकर विकी को पूछा, “सब हमारे लिए  विकी बैग में से एक बड़ा सा चाकू निकाल कर योशी को दिखाया और एक और छोटा चाकू निकाल करअपनी जेब में रख लिया।

फिर उसने योशी से कहा, “हमारे टॉर्च का उजाला कम है। इस घने अंधेरे में हमें और रोशनी का इंतज़ाम करना होगा। तुम आसपास से दो तीन डंडे या लकड़ी के मजबूत टुकड़े लेकरआओ।”

योशी ने तुरंत एक लकड़ी का टुकड़ा लाकर उस के तीन हिस्से कर दिए।  विकी ने हर टुकड़े पर एक कपड़ा लपेटा और तीनों लकड़ियों पर थोड़ा थोड़ा पेट्रोल जो उसने एक बोतल में लाया था, वो छिड़क कर लकडियों को मशाल बना दिया। ये देख दोनों दोस्त खुश हो जाते है और विकी के दिमाग की दाद देने लगे। योशी ने हाथ मिलाया पर फिर एक बार उसके ठंडे हाथ के स्पर्श से सिहर गया।

“अब तो ना तू एसी में है और ना ही हाथ में ठंडीबोतल है अब तेरे हाथ ठंडे क्यूं है?”

विकी थोड़ा सा हड़बड़ाया और बोला “अरे पेट्रोल ठंडेबोतल के साथ रखा था तो पेट्रोल भी ठंडा हो गया और कपड़े पे डालते हुए हाथ पे गिर गया था थोड़ा सा इसलिए हाथ एकदम ठंडा पड़ गया। ऐसा कहते हुए विकी ने अपने बैग से ग्लव्स निकाल कर पहन लिए और योशी को दिखाकर कहा कि “अब तुझे मेरे हाथ ठंडे नहीं लगेंगे।” योशी फिर एकबार विकी की बातो पर गौर न करते हुए हंस करआगे बढ़ गया और दोनों उसके पीछे चलने लगे।   काफी देर पहाड़ी चढ़ने के बाद आखिरकार तीनों किले के सामने खडे थे। अब तीनों ये सोचने लगे कि आगे क्‍या किया जाए? अभी रात के ११:३० हो चुकेहै। वो सोचते है कि एक बार किले के पास जाकर आएंगे, फिर वापस आकर कुछ खाने के बाद किले में जाकर रात बिताएंगे।

Written By– Harsh Suhas  for Comic Haveli.

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4 Comments on “अद्भुत पहाड़ी भाग – 1”

  1. Bhai ek baar ko bho nahi laga ki mai koi story read kar raha hu lag raha tha koi movie scene chal raha ho…..ek shabd me kahu to….waah

  2. Brilliant. Just brilliant
    Full thriller ekdam
    Kahi bhi reader ko rukne nhi deti ye story
    Ek hi issue hai
    Petrol kitni bhi garmi rahe uska sparsh aise hi thanda rahta hai
    To thande pani ki bottle k sath petrol tha wo bhi train se bhi pahle ka safar jiske bad bhi itni der kasbe walo k sath the, itni der pani ka thanda effect kaise rah sakta hai
    To ye btane ki zarurt nhi thi
    But baki puri ki puri story dhakad hai
    The imaginations, the scenes, the simple but effective dialogues
    Everything was great
    The story ended on a simple note too unlike other stories or series that we’re used to reading or watching
    Waiting for the next part
    All the best

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