Adwika ( Adwitya Shakti ) Part – 3

अद्विका (अद्वित्या शक्ति )

पंचम अध्याय : अश्वमानव

पाशा अपने कक्ष में विश्राम कर रहा है तभी वहाँ एक सेवक आता है,

सेवक : महाराज की जय हो, एक गुप्तचर आप के दर्शन के लिए आज्ञा चाहता है

पाशा : ठीक है उसे हमारे कक्ष में भेज दो

सेवक : जो आज्ञा महाराज

कुछ देर बाद गुप्तचर कक्ष में प्रवेश करता है

पाशा : बताओ क्या ख़बर लाए हो?

गुप्तचर : महाराज आपके आदेश पर मैं पंचव राज्य में हालात का जाएजा लेने के लिए रुका हुआ था, प्रजा उनके राजा और राजकुमारी के वध से काफ़ी दुखी है, परंतु उनके पास आपसे विद्रोह करने का साहस भी नहीं है, अभी तक मुझे वहाँ कुछ ऐसा नहीं दिखा जो हमारी चिंता का कारण हो|

पाशा : ठीक है, पर इसे हम ऐसे ही नहीं छोड़ सकते, तुम अभी वहीं रहो और मुझे पूरी जानकारी देते रहना|

गुप्तचर : जो आज्ञा, महाराज अगर आज्ञा हो तो एक और जानकारी देनी थी

पाशा : बोलो

गुप्तचर : महाराज अभी मुझे ज्ञात नहीं की कितना सच है और कितना झूठ, पर आजकल पंचव नगर में किसी अश्व मानव के देखे जाने की अफ़वाह फैली हुई है

पाशा सुनकर हल्की सी हंसी हँसता है और बोलता है, अच्छा ठीक है तुम इसकी भी छानबीन करो

गुप्तचर के जाने के बाद पाशा सेवक को भेजकर रक्तकूट को बुलावा भिजवाता है|

रक्तकूट आता है

रक्तकूट : महाराज की जय हो

पाशा : आओ रक्तकूट, हमने तुम्हें यहाँ कुछ वार्तालाप के लिए बुलावा भेजा है

रक्तकूट : कहिए महाराज, किस विषय पर आपको सेवक की ज़रूरत पड़ गयी?

पाशा: हम जानना चाहते है, अभी संसार में कितने अश्वमानव होंगे?

रक्तकूट : महाराज अश्वमानव तो एक विलुप्त हो चुकी प्रजाति है, अब तो उनका अस्तित्व बस कहानियो में ही है

पाशा : अभी अभी गुप्तचर ने ख़बर दी है कि पंचव राज्य में अश्वमानव देखे जाने  की अफ़वाह है, और हम भी इच्छुक हैं  उस अश्वमानव को देखने के लिए!!!

रक्तकूट : बताइए महाराज मेरे लिए क्या आदेश है?

पाशा : सेनापति, हमने काफ़ी दिनो से कोई मनोरंजक कार्य नहीं किया है, आप सेना की एक टुकड़ी तैयार करो, हम उस अश्वमानव का शिकार करेंगे

रक्तकूट : जो आज्ञा महाराज

(वर्तमान में)

समीर अपनी टीम के साथ control panel के सामने बैठा हुआ है और वो सब किसी video clip को चेक कर रहे हैं |

समीर : कहीं तुमने सपना तो नहीं देखा, 2 घंटे से टेप में ढूँढ रहे हो पर कुछ नहीं दिखा?

एजेंट : सर मुझे याद है मैंने देखा था, मैं अभी आपको दिखाता हूँ

कुछ  देर बाद एक धुँधली सी आकृति पर इशारा करते हुए बोलता है

एजेंट : ये देखो ये रही, आकृति एक लड़की की तरह है पर उसमें से ये रोशनी निकल रही है, रोशनी के सिवाय कुछ दिख ही नहीं रहा

समीर : ये कुछ कैमरा इशू भी तो हो सकता है?

एजेंट : ठीक है मानता हूँ कैमरा इशू  होगा पर ये इशू बाक़ी लोगों पे नहीं हो रहा बाक़ी सब तो क्लियर कैप्चर हो रहे हैं, और ये अकेली क्लिप नहीं है, ऐसी और भी क्लिप्स हैं पिछले 2-3 दिनो से मैं इसे नोटिस कर रहा हूँ!

समीर : ठीक है, तुम वहाँ ख़ुद जाकर देखो कि क्या है, और आकर रिपोर्ट करो, ध्यान रखना तुम्हें ख़ुद से कोई ऐक्शन नहीं लेना है, अभी हमें पता नहीं है वो क्या है, और कितना ख़तरनाक है|

(सुबह 5 बजे )

पूरब दिशा से सूरज उग रहा है, पंछी आसमान में निकल पड़े है, आसमान में चारो तरफ़ हलचल शुरु  होने लगी है, सूरज की हल्की किरणें बिखरने लगी है, वहीं एक बिल्डिंग की छत पर एक लड़की उल्टी पड़ी हुई है, एक बार देखने से लगता है जैसे बेहोश पड़ी हो, जैसे जैसे पास जाते हैं , वो जाग रही होती है, जैसे सोकर उठी हो, ये तो अनन्या है,

अनन्या उठ कर आशचर्य से आस पास देखती है, फिर भागते हुए नीचे आती है, अपने कमरे में जाकर सीधे बाथरूम में घुसती है, और अपने चेहरे पर पानी डालकर धोती है , फिर शीशे में देखती है फिर पानी डालती है, और फिर अपने चेहरे को आइने में घूरती है और अपने आप से बोलती है “यह मैं नहीं हूँ”  इतनी देर में दरवजे की घंटी बजती है, वो जाकर दरवाज़ा खोलती है, बाहर अमित खड़ा था |

अनन्या : अमित तुम यहाँ?

अमित : और कोंन आएगा, और किसी को तुम्हारा ऐड्रेस भी पता है क्या?

अनन्या : अच्छा बाबा, कैसे आना हुआ ?

अमित : अब ये मत बोलना की तुम्हें याद भी नहीं, मैडम जी आज आपने प्रॉमिस किया था मेरे साथ पिक्चर देखने का, ये रही दोपहर के शो की 2 टिकट्स अब जल्दी तैयार हो जाओ, हमें निकलना होगा, ब्रेकफास्ट बाहर ही करते हैं|

अनन्या : ओके बाबा थोड़ा वेट करो, अभी तैयार होती हूँ |

अमित : ठीक है जल्दी करो, by the way nice lens, ये आँखो का कलर भी तुम्हें सूट करता है|

अनन्या : मैने तो कोई lens नहीं लगाए

अमित : अब जैसे मुझे तुम्हारी आँखो का रंग पता नहीं, any way जल्दी करो हमें जाना भी है,

वही वहाँ से कुछ दूर इन पर नज़र रखे और अपनी ख़ास टेक्नॉलजी से इनकी बात सुनते हुए, एक एजेंट समीर को फ़ोन करता है, “सर इसके साथ मैने अभी अमित को देखा है, हमें विधि मेम को रिपोर्ट करना होगा”

(भूतकाल में)

पाशा अपने साथ सेना की एक टुकड़ी लेकर निकल पड़ता है, शिकार करने अश्वमानव का, कुछ दिनो के सफ़र के बाद वो पंचव राज्य की सीमा पर अपना शिविर लगाते हैं, और पाशा के आदेश पर कुछ सेवक शहर में जाकर अश्वमानव के बारे में जानकारी इकठ्ठा करने जाते हैं | वहाँ कुछ लोगों को पता ही नहीं किसी अश्वमानव के बारे में, परंतु कुछ लोग कहानियाँ सुनाते है|

रात्रि का समय, पाशा अपने शिविर के बाहर बैठा है, अग्नि प्रज्वलित है, उसपर मृग को बाँध कर भुनने के लिए टांगा हुआ है, मृग के मांस की भुनने की गंध वातावरण में फैली हुई है,

पाशा मृग के माँस का जायज़ा करके देखता है एक टाँग का माँस पक चुका है, एक झटके से वो उसे तोड़कर अलग करता है, फिर वो अपने दाँतो से एक बुड़कि लेकर उसे चबाते हुए खुले आसमान की ओर देखता है…. धीरे धीरे वो पूरा माँस खाकर बची हुई हड्डी को आग में फेंक देता है और मृग की देह से एक ओर माँस का टुकड़ा तोड़ता है तभी एक सैनिक वहाँ आया….

सैनिक :महाराज की जय हो

पाशा : बोलो क्या ख़बर लाए हो

सैनिक : महाराज, हमने कुछ छानबीन की है, अभी तक ख़बर की पुष्टि नहीं हुई, पर जितना भी पता चला, अश्वमानव इसी इलाक़े में रात्रिकाल ही देखा गया है |

इससे पहले की सैनिक ओर कुछ बोल पता, एक भाला ठीक पाशा को निशाना बनाते हुए बिजली की सी गति से आता है, हमला अचानक था उसके बावजूद भी पाशा एक चमत्कारी फुर्ती से भाले को एक हाथ से ठीक अपने चेहरे से पहले रोक लेता है, जैसे ही भाले की दिशा में देखने की चेष्टा करता है, वहाँ कोई पशु समान आकृति देख, अपनी सेना को एक हुंकार में आदेश देकर, उस ओर भागता है

(वर्तमान में)

विधि तेज़ी से उसके पिता के कमरे में एंटर करते हुए बोलती है….

विधि : पिताजी आपको जल्दी अमित से बात करनी पड़ेगी… लगता है वो किसी मुसीबत में पड़ने वाला है

भानु : बेटा तुम बेकार चिंता ना करो, मैने तुम्हें पहले ही बताया था अब घटनाए आकार लेना शुरु कर चुकी हैं, अमित भी आने वाले समय में अपनी भूमिका निभाएगा|

विधि : पर dad इसमें अमित का क्या काम, उसने तो हमारे काम में ध्यान भी नहीं दिया, और वो किसी अनजान शक्ति के साथ है?

भानु : बेटा अमित उसकी दोस्त के साथ है, और तुम उस शक्ति के बारे में जानकारी इकट्ठी करो, हम यहाँ मानव जाति की रक्षा का दयित्व लिए हुए है, अब तुम्हारे भाई को भी अपने भाग्य को अपनाना होगा…. तुम तैयारी करो… उसे भी जल्दी ही हेड्क्वॉर्टर में एंट्री देनी होगी…

विधि : मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा…

तभी विधि का फ़ोन बजता है….

विधि : हेलो… हाँ ठीक है मैं पहुँचती हूँ अभी…. तुम उसपर नज़र रखना…

भानु : मैं तुम्हें हेड्क्वॉर्टर में मिलूँगा…

विधि : ओके डैड

(भूतकाल में)

जंगल के अंदर पाशा अपने घोड़े पर बैठा अपनी सेना की टुकड़ी के साथ तेज़ी से भागते हुए उसका पीछा कर रहा है, सभी सैनिक पीछा करने के साथ साथ तीरों से आक्रमण भी करते हैं….

जंगल में पेड़ और पत्तों के बीच से निकलते हुए, तीर उसके आसपास से बचकर जा रहे थे, तीरों की मारक क्षमता का अंदाज़ा उनके पेड़ों से टकराकर आरपार होने से ओर पेड़ों के टूटने से लग रहा था… , पत्तों और टहनियो के बीच से ज़मीन पर टाप मारते हुए घोड़े के पैर… तूफ़ानी रफ़्तार से भागते हुए उसके शरीर की माँसपेशियां एक मशीन की तरह चल रही थी… थोड़ा ऊपर देखने पर वहाँ घोड़े के मुख की जगह इंसानी धड़ शुरु हो जाता है…. जो भागने के साथ-2 एक धनुष से बाण भी छोड़ रहा था… और वार एक दम सटीक… एक सैनिक को लगता है और उसके गले के आरपार होकर वो ज़मीन पर गिरता है… पाशा भी अपने धनुष पर बाण चढाकर वार करता है, पाशा का पहला बाण अश्वमानव के बाएँ हाथ को छूता हुआ निकल जाता है… जैसे ही पाशा दूसरा बाण छोड़ता है… अश्वमानव हवा में एक छलाँग लगा कर उसे अपने हाथ में पकड़ लेता है, और घूम कर पाशा की तरफ़ मुड़कर खड़ा हो जाता है, और अपने पीछे टँगी तलवार को निकाल कर युद्ध की मुद्रा में खड़ा हो जाता है.. वहीं पाशा भी अपने चेहरे पर क्रूर भाव लिए वहाँ उसके सामने खड़ा था… एक टुकड़ी सिपाही अभी पाशा के पीछे ही थे…..

शिकार का खेल अब युद्ध बन चुका था …..

Adwika ( Adwitya Shakti ) Part – 2

अद्विका (अद्वित्या शक्ति ) भाग – 2 तीसरा अध्याय : वर्तमान (वो कौन थी) एक ऊँची बिल्डिंग की छत पर बैठी उसकी निगाह अभी भी नीचे किसी को देख रही …

Written By –  Sonya Singh for Comic Haveli 

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4 Comments on “Adwika ( Adwitya Shakti ) Part – 3”

  1. Lekhan badhiya hai…..
    Kahani judati huyi nahi lag rhi hai….
    Aapka ek sath do kaalo ko jodna acha laga…..
    Ye vidhi kon hai iska priwar kya hai ab bhi rahata bana hua hai….

    Hope agle part me sabhi sawalo ke jawab milenge or samjh payenge ye adwika akhir hai kon?

  2. बुहुहु भैं वैं वैं वैं। इतनी मस्त स्टोरी है पर सस्पेन्स इतना ज़्यादा बना दिया की मुझे सही से समझ में न आ रही ऊपर से इतनी छोटी स्टोरी गुर्रर्रर्रर्र 18 बार (प्रदीप बर्नवाल जी की तरह) और यह पाशा क्या कर रहा है भूतकाल में अश्वमानव ला शिकार! लेकिन भूतकाल, अश्मानव, से वर्तमान काल का क्या कनेक्शन है यह जानने के लिए बहुत उत्सुक हो गया हूँ। एक और बात है जिसने कन्फ्यूज़ कर दिया है बुहु। तीन तीन हीरोइन इनमे से असली हीरोइन कौन है। जल्दी जल्दी अगले पार्ट्स लाइए। और पार्ट्स थोड़े बड़े लिखिए हीहीही।

  3. Story achi to ja rahi h but connect nahi ho rahi h, kisi purane suspense ka jawab nahi mila aur naye suspense jud rahe h lagta h ek sath hi khulasa hoga

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