Adwika ( Adwitya Shakti ) Part – 5

अष्टम अध्याय : संधि

स्थान : दिल्ली के पास हरियाणा का एक गाँव… माता का जागरण चल रहा है…

पावन है सबसे ऊँचा है साँचा है ये दरबार,

कलयुग में भी होते है यहाँ रोज़ चमत्कार

ले अम्बे नाम चल रे चल वैष्णो धाम चल रे, ले अम्बे नाम चल रे चल वैष्णो धाम चल रे

अब बात सुनो त्रेता युग की बात पुरानी, इतिहास है ये अम्बे माँ की सच्ची कहानी…

माँ ने कहा है दानव जब सिर उठाएँगे तब तब मेरे हाथ से वो मुँह की खाएँगे…

 ……………….

जागरण में गायक अपनी मधुर आवाज़ में माता के भजन से एक जादुई माहौल बनाए हुए था… सभी लोग वहाँ भक्ति रस में डूबे हुए थे… स्टेज के ठीक सामने हवन कुंड के समक्ष बैठे यजमान के पास एक व्यक्ति बड़ी ही तेज़ी से भागा हुआ आता है.. और उनके कान में कुछ बोलता है… ध्यान में लीन बैठे हुए उनकी आँखे खुलती है… चेहरे पर कठोर भाव, रोबदार ढाढी मूँछ,  गठा हुए बलिष्ठ शरीर के स्वामी… सफ़ेद धोती और केसरिया अंगवस्त्र में स्वयं भीम समान लग रहे थे…

उन्होंने उस से कहा, “उन्हें बोलो हम अभी अपनी पूजा में व्यस्त है… जागरण के बाद हम स्वयं वहाँ  उपस्थित होंगे….”

वो वहाँ से निकल कर अपने रिसीवर पर मेसिज भेजता है.. अंजनी को इन्फ़ोर्म कर दिया वो ख़ुद पहुँच जाएँगे… मूव टू नेक्स्ट…..

वहाँ के काफ़ी दूर… UK Manchester united के फूटबाल स्टेडियम में मैच चल रहा था MU vs Liverpool… रात के 12 बजे stadium के चारों तरफ़ लाइट जल रही थी… लोगों की काफ़ी भीड़ थी... स्टेडियम houseful था…. दोनो टीम एक दूसरे को काँटे की टक्कर दे रही थी…  उस मैच को एंजोय कर रहा था फ़र्स्ट row में बैठा हुआ एक शख्स… उम्र में लगभग 50 के ऊपर.. देखने में बुज़ुर्ग पर कमाल की एनर्जी जो उसके मैच के हर पल को एंजोय करते हुए देख सकते थे… कुछ देर बाद एक अनजान व्यक्ति वहाँ आकर उसके कान में कुछ फुसफुसाता है और बदले में वो थोड़ी देर के लिए मैच को भूलकर उसे देखता है और बोलता है… “ठीक है मैं समय से पहले पहुँच जाऊँगा… “

उसके बाद वो व्यक्ति स्टेडियम से बाहर निकल कर एक वैन के पास आकर transmitter पर बोलता है… सर मिस्टर विल्यम को इंफ़ोर्म कर दिया वो टाइम पर पहुँच जाएँगे…..

वहाँ से काफ़ी दूर आसमान में एक aircraft से कोई बाहर निकल कर जम्प लगाता है… नीचे गिरते हुए हवा में अपनी कलाबाज़ियो का प्रदर्शन करते हुए काफ़ी नीचे तक आता है… फिर एक निश्चित ऊँचाई पर पहुँचकर वो अपना पैरशूट खोलता है… और एक एक्स्पर्ट जम्पर की तरह ग्राउंड पर बने निर्धारित स्थान पर लैंड करता है….

लैंड होने के बाद अपने पैरशूट को अलग करते हुए… जैसे ही हेल्मेट उठता है… पीछे से ऑरेंज कलर के लम्बे घुंघराले बाल निकलते है.. जो सूरज की रोशनी में चमक रहे थे… चेहरे से देखने में बहुत ख़ूबसूरत, रंगत दूध जैसे रंग की और आँखे लाइट ग्रे थी…. जैसे ही वो लड़की बेस स्टेशन पर पहुँचती है… एक व्यक्ति उसके पास पहुँच कर उसे कुछ बोलता है… और वो रेस्पॉन्स में उसे थम्ज़-अप करके उसे कन्फ़र्म करती है… और वो वहाँ से निकल जाता है…. कुछ दूर आकर अपने ट्रांसमीटर पर बोलता है…. “जफरीना को भी बता दिया… वो पहुँच जाएगी….., सिर्फ़ एक बचा है… पर शायद अब उसकी ज़रूरत ना पड़े…. “

(भूतकाल में)

गुरु शुक्राचार्य, पाशा और रक्तकूट एक साथ पाशा के कक्ष में थे….

पाशा : रक्तकूट…. हमें गुरुदेव के आदेशानुसार आयाम यात्रा पर जाना होगा… लेकिन जाने से पूर्व हमारा आदेश है… आज से गुरुदेव जो भी बोले उसे हमारा आदेश समझ कर अमल किया जाए…

रक्तकूट : जो आज्ञा महाराज.. आपका पुनः आगमन कब होगा…?

पाशा : वो तो हमें भी नहीं पता.. पर हम कोशिश करेंगे जल्दी ही हो…

शुक्राचार्य : रक्तकूट अब तुम्हें यहाँ और भी ज़रूरी कार्य पूर्ण करने है…

रक्तकूट : आज्ञा गुरुदेव…

शुक्राचार्य : सबसे पहले तो तुम अपने इस मानव रूप को त्याग कर वापिस अपने असली असुर रूप में आ जाओ…

पूर्ण असुर सेना को धरती पर ले आओ….

(सुनकर रक्त कूट के चेहरे पर आश्चर्य के भाव थे)  

रक्तकूट : क्या आप देवताओ पर आक्रमण करने का विचार कर रहे है महाराज…?

पाशा : नहीं रक्तकूट, परन्तु एक विशाल युद्ध की तैयारी कर रहे है… तुम इसपर अधिक विचार न कर आज्ञा का पालन करो

शुक्राचार्य : रक्तकूट, सिर्फ सेना को ही नही लाना , बल्कि धरती के गर्भ में सदियों से सो रहे हमारे राक्षस वीरो को भी जगाना है … और ये कार्य भी तुम्हे शीघ्र अतिशीघ्र करना है… इसलिए अविलम्ब प्रस्थान करो ..

रक्तकूट : जो आज्ञा गुरुदेव …

शुक्राचार्य : राजन अब आप भी प्रस्थान कीजिये… आपको भी अपनी यात्रा शीघ्र ही पूर्ण करनी होगी…

 (वर्तमान में)

अमित अपने पिता की ओर देखता है, उसकी आँखों में काफी प्रश्न थे,  भानु उसकी जिज्ञासा का भाँप आगे की कहानी शुरु करते है …

भानु : तो पुत्र, कहानी का एक सिरा तो हमारे अस्तित्व के इस गृह पर आने का था.. परन्तु इस कहानी में उस समय हमारे साथ लाये हुए बक्से का भी काफी योगदान है … जब उसे हमारे हवाले किया गया था.. उस समय हमें बताया गया था की जब अद्विका का आगमन होगा तब इसकी जरुरत पड़ेगी..  उसके बाद हमने पीढ़ी दर पीढ़ी उस महाशक्ति का इंतजार किया परन्तु धरती के अंत तक कोई नहीं आया… हम अपनी जिम्मेदारी समझ बक्से को अपने साथ यहाँ ले आये.. परन्तु यहाँ आकर हमारे साथी ही अब अद्विका के वापिस आने की उम्मीद खो चुके थे … जब वो उस धरती पर नहीं आई तो अब तो हम एक अंजान गृह पर थे , उसका आना किसी भी हाल में संभव न था…  सबकी सहमति पर हमने उसे घने जंगलो के बीच एक गहरे गड्ढे में दफ़न कर दिया ताकि वो किसी के हाथ न लगे…
हालाँकि सबको यकीन नहीं था परन्तु फिर भी हम अग्नि तत्वधारियो ने बक्से की सुरक्षा को अपना कर्त्तव्य माना और हम regularly समय समय पर देखते रहे की वो सुरक्षित है या नहीं…|

कई सदियों तक ये जिम्मेदारी हमारे वंश में पीढ़ी दर पीढ़ी एक दूसरे को मिलती रही…और वो सुरक्षित रहा.. परन्तु १ साल पहले वो बक्सा वहाँ से गायब हो गया .. मैंने दिन रात साधना में बैठ कर अपने मानस रूप में धरती के चारो ओर चक्कर काटे पर मैं उसे ढून्ढ न पाया..| लेकिन कुछ दिनों पूर्व इस धरती की उर्जा क्षेत्र में बदलाव महसूस किये.. ये बदलाव अपने आप नहीं हो सकते थे केवल किसी शक्तिशाली उर्जा स्रोत से संभव थे.. मैं अपने कक्ष में बैठ अपने मानस रूप की सहायता से इसकी जानकारी इक्कठा करने लगा, इतना बड़ा बदलाव् डिफेंडर्स के सर्विलेंस से न बच पाया और विधि ने भी एक टीम इसके पीछे लगा दी.. साथ ही beasts भी इसके पीछे पीछे आ गए.. इतनी ऊर्जा शायद उनके लिए वरदान के सामान थी…|

जब मैं इसकी गहराई में गया तो मेरी समझ में आया की समय अपनी चाल चल गया.. और उस बक्से से अद्विका के बाल किसी तरह अनन्या के सर तक पहुच गए थे… सबसे पहले तो उन बालो ने अद्विका के सर पर खुद की जडे बनायीं.. उसके बाद ऊर्जा का प्रवाह ब्रह्माण्ड से उसके शरीर में होने लगा… अनन्या को कैंसर था और उसकी मृत्यु कैंसर से ही होनी थी, परन्तु अद्विका के बालो की वजह से जो ऊर्जा इसके शरीर में प्रवाहित हुई उसने इसके शरीर की सारी बीमारी ठीक कर दी, परन्तु इसका मृत्यु का समय तो निश्चित हो चुका था, और कल रात जब ये तुम्हारे साथ जा रही थी उस समय इसकी मृत्यु हो गयी… साथ ही बिना आत्मा के शरीर में उर्जा का प्रवाह बढ गया फिर अद्विका का आगमन उसके बाद कल तुमने स्वयं देखा था..

अमित : तो इसका मतलब ये अनन्या नहीं है..

भानु : हाँ बेटा अनन्या का अंत हो चुका है… यही उसका प्रारब्ध था…

(भूतकाल में)

रक्तकूट अपने घोड़े पर बढा चला जा रहा था तीव्र गति से, पश्चिम दिशा की ओर सूरज डूबने की तैयारी कर रहा था… जैसे जैसे सूरज नीचे आता उसके घोड़े की टापों की आवाज और तेज हो जाती.. जैसे उसे समय से पहले कहीं पहुचना हो… वो एक के बाद एक कस्बो को पार करता हुआ.. जंगलो के बीच से होता हुआ.. एक पुराने किले के खंडहर के अन्दर पहुच कर अपने घोड़े से नीचे उतरता है…

घोड़े से उतरकर वो अंदर की तरफ चलता है और एक कक्ष के मध्य पहुच कर एक बड़ी आसन रूपी शिला पर जाकर खड़ा होता है.. जिससे कक्ष के वहां मध्य में से जमीन खुलकर एक बड़ी शिला बाहर आती है… उसपर एक सोने का प्याला रखा है जिसके चारो ओर विभिन्न रत्न जड़े हुए है… उस प्याले को देख रक्तकूट की आंखे चमक उठी और आगे बढ कर उसने अपने पास रखे थैले में हाथ डाला, अन्दर से एक कटा हुआ सर निकला.. देखकर लगता था की जैसे कुछ समय पहले ही कटा हो… उसने उससे निकलते हुए रक्त को प्याले में इकट्टा करना शुरु कर दिया और कुछ देर बाद सर को फेंककर प्याला उठा लिया…

दोनों हाथो से उसे पकड़ कर.. उसे अपने मुह के पास ले आया.. धीरे धीरे एक एक घूँट कर उसे पीने लगा…. जैसे जैसे वो उसे पी रहा था वैसे वैसे आसमान में बिजली कड़कने लगी ओर उसका रूप भी बदल कर एक भयंकर असुर के समान हो गया था…

उसने प्याले को वापिस उसके स्थान पर रख दिया और वो शिला पुनः जमीन में लोप हो गयी…

सेनापति रक्तकूट अब एक असुर बन चुका था… अगले ही पल उसने एक जोरदार आवाज में पुकारा…. “आ जाओ मेरे सदियों से सोये हुए सैनिको आ जाओ… आज तुम्हारे जागने का समय आ गया है… , जागो और जगाओ अपने बाकी साथियों को भी… मैं पूरी पाताल सेना का आह्वान करता हूँ|”

फिर देखते ही देखते वहाँ दीवारों से कई सारे हथियारबंद राक्षस निकलने लगे… एक के बाद एक, बाहर मैदान में इकट्ठे होने लगे.. देखते ही देखते, सौ, हज़ार, लाख, दस लाख, या करोडो असुर सैनिक वहां जमा हो गए…

अपनी पूरी सेना को देख रक्तकूट के चेहरे पर एक शैतानी हँसी आती है और वो उन्हें आदेश देता है…

“जाओ और जाकर महाराज पाशा के राज्य की सीमा पर मेरी प्रतीक्षा करो.. अभी मुझे जाकर कुछ आवश्यक कार्य निपटाना है पाताल में…”

(वर्तमान में)

भानु अमित को कहानी सुनाने में इतने व्यस्त थे कि उन्हें पता ही नहीं चला, अन्दर अनन्या के जिस्म में हरकत शुरु हो गयी… और अचानक अनन्या के शरीर से फिर वही रौशनी फूटने लगी , वो वहाँ बेड से खड़ी होगयी… जैसे ही दरवाजें से तेज रौशनी आई भानु और अमित ने अंदर देखा.. तब तक अनन्या ने कमरे के पीछे की दीवार को खंडित कर दिया और वहाँ से बाहर जम्प करके सीधे एक चलती हुयी सड़क के बीच में जा खड़ी हुई… तेज स्पीड में आती गाड़िया संभल न पाई और कुछ गाड़ियाँ एक के बाद एक आकर टकराई… टकराने से गाड़िया टूट गयी काफी जान-माल का नुकसान हुआ पर वो वहीँ खड़ी रही…. जैसे कुछ हुआ ही नहीं… आसपास ऐसे देख रही जैसे वो जिंदगी में पहली बार ये सब देख रही थी.. गाड़ियां.. ऊंची ऊँची बिल्डिंग्स…

उसे बीच सड़क में देख और रास्ता ब्लाक हुआ देख काफी गाड़िया हॉर्न भी बजाने लगी… जिसके रेस्पोंस में उसे कुछ समझ नहीं आया तो उसने गाडियों को कोई जानवर समझ हांथो से और लातो से इथर उधर फेंकना शुरु कर दिया..

इधर भानु और अमित गेट खोलकर जैसे ही कमरे की टूटी दीवार पर पहुचे, वो समझ चुके थे कि अब देर हो चुकी है और अनन्या को रोकना जरुरी है… लेकिन इस से पहले वो कुछ एक्शन ले पाते.. उन्होंने देखा अनन्या द्वारा फेंकी गयी गाड़ियां एक दम हवा में रुक गयी और आराम से नीचे आ रही है , उनमे सवार लोग भी सुरक्षित है..

वहां खड़ी दूसरी लडकी को देख भानु बोलते है,  “बिलकुल समय पर आई हो जफरीना…”

भानु जफरिना को मानसिक सन्देश से बोलते है… ध्यान रहे ये यहाँ से ज्यादा दूर न जाये.. इसे वापिस हेडक्वार्टर ले जाना होगा.. ये वो ही है…

ये सुन जफरिना की आंखे थोड़ी चमकती है.. और एक हाथ का इशारा कर अनन्या की ओर देखती है.. जैसे उसने कोई आदेश दिया हो…  अनन्या के आसपास हवा काफी तेजी से चलने लगती है… फिर चक्रवात बना कर उसे रोकने का प्रयास करती है…

कुछ समय के लिए अनन्या चक्रवात में भ्रमित होती है, फिर अंपने हाथो को चक्रवात में डाल कर उसे उल्टा घुमाती है और चक्रवात वहीँ ख़तम हो जाता है…  जिसे देख जफरिना के पैरो तले जमीन निकल जाती है.. और अनन्या अपनी राह पर आगे बढ़ने लगती है..

ठीक उसी पल धरती से मिटटी निकल कर उसे जकड़ने लडती है , देखते ही देखते उसे पूरा ढक लेती है, जैसे एक पहाड़ उसके ऊपर बन गया हो…

जफरिना के बगल में विलियम खड़ा था , उसने मौका न गंवाते हुए डायलॉग मार दिया…. “अभी बच्ची हो काफी कुछ सीखना बाकी है… अपनी प्रैक्टिस पर थोडा ज्यादा ध्यान दो…”

जफरिना ने कुछ नहीं कहा बस do not care टाइप attitude दिखा कर साइड हो गयी.. पर इतनी तस्सल्ली थी की अनन्या को रोक लिया.. लेकिन कुछ ही समय तक.. जब तक विलियम कुछ समझ पाता उसका बनाया हुआ मिटटी का पहाड़ एक मटके की तरह टूट कर बिखर गया .. और अनन्या वापिस बाहर आ चुकी थी..

इतनी देर में भानु औरअमित भी बाहर आ गए थे.. वो चारो अब एक साथ थे..

जफरिना : हमने अपनी अपनी शक्तिया try करके देख ली पर लगता है इस पर उनका कोई असर नहीं है… कुछ idea बाकि दोनों कब तक आएंगे..?

भानु : दो नहीं एक, अग्नि ने अमित को चुन लिया है पर इसका अभी अपनी शक्तियों पर नियंत्रण नहीं है…

तभी पीछे से आवाज आई.. “पर हमारा तो है…” पीछे अंजनी खड़े थे…

अंजनी : आप लोग भी क्या मूर्खता कर रहे हो… औरभानु मुझे तुमसे ये उम्मीद नहीं थी…, जो स्वयं सभी तत्वों की आराध्य है तुम उन्हें इन्ही तत्वों से बांधना चाहते हो.. ये मत भूलो.. इन तत्वों में हमें चुना है.. हमारी शक्तियां इनके आधीन है , और ये स्वयं आदिशक्ति के अधीन है..  तुम आदिशक्ति के अंश को इन्ही से बांधना चाह रहे हो..?

भानु : आप सही कह रहे है.. पर आपके पास अभी कोई उपाय है इन्हें रोकने का..?

अंजनी : उसके लिए हमें इनसे बात करनी होगी…

अंजनी वहां खड़े होकर ध्यान लगाते है और स्वयं जल में परिवर्तित होकर अनन्या के पास जाते है , उसके शरीर से मिल जाते है… एक दम अनन्या के चलते चलते पैर रुक जाते है , काफी समय तक वो एक ही स्थान पर खड़ी रही, जैसे किसी गहन चिंतन में हो.. लगभग २-३ घंटे के बाद.. अनन्या के जिस्म से रौशनी निकलनी कम होकर बंद हो गयी, वो वापिस मुड़कर भानु की तरफ आती है..

 अंजनी भी अपने रूप में वापिस आ जाता है..

जैसे ही वो वहां पहुचती है.. अमित उसे देख कर बोलता है.. “अनन्या”

वो अमित को देखती है और बोलती है…

“मेरा नाम अद्विका है….”

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Written By- Sonya Singh

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15 Comments on “Adwika ( Adwitya Shakti ) Part – 5”

  1. वाह बहुत ही अद्भुत लिखा है आपने।
    जितनी सराहना की जाए कम है।
    अनन्या का ही अद्विका होना बहुत अच्छा है।
    एक युद्ध की तैयारी चल रही है लेकिन क्या होने वाला है युद्ध में वाह कल्पना मात्र ही बहुत आनंद दे रहा है।
    अद्विका आदिशक्ति का रूप अर्थात बहुत ही शक्तिशाली होगी ये तो निश्चित है।
    लेकिन उससे भी अधिक देखने लायक बात होगी कि आखिर पाशा गया कहाँ हैं?
    अद्विका का इतने सालों बाद जागने का कारण क्या है?
    और अद्विका जागी तो वर्तमान में है तो ये घटनाएं भूतकाल में घटित क्यों हो रही है?
    मुझे कहानी पसंद आयी बल्कि बहुत ही अधिक पसंद आई लेकिन पार्ट छोटा लगा शायद पढ़ते पढ़ते ध्यान ही नही दिया।

    अंत में आपको आगे के लिए शुभकामनाएं

    1. Thanks for the detailed review.. ummeed hai age ki kahani bhi acchi bane or apno pasand aaye.. baki jo questions apke mind me hai unhe Abhi sambhale rakhiye… Apke parts me apko unke answers milenge…

  2. kahani pdi ..yeh wala part accha lgaa ..pr jayda smj m nhi aaya ..becuse abi mene pichly part nhi pde pr ykin maaniye is pdne ke baad m pichle saary part pdne ja raha hu
    .
    nice working

      1. but ik problam he ..phli tho ye ki pichle part mene phle hi bdi muskil se dunde the. aur ab dobaara unhe dundna..ye tho aur bi muskil hoga
        aur dusri problam ye ki aapki story ke part aane m time bhut lagta he ..jese ki pichla part lgbg 2 month phle ka he ..
        iss liy m yhi bta deta hu ki khaani behtreen he …bus thoda jaldi jaldi agle part leker aaye ..kyunki jb jayada time ke baad pichly hisse dimaag se nikal jaate he

  3. nice …aapki kahaani bhut bdiyaa ja rhi hy …pura plote bna chukaa hy …jis karan kahaani m mjaa bi bhut aa raha hy …kahani ka claims abi bi bnaa huya hy …jo ki bhut rochak hy …aur kahani ki trf bnaaye rktaa hy …hope …agla part jaldi aaygaa…aana bi chahihy …kyunki ..hmsy itna wait nhi hota

      1. agly part m ho sky tho ..pichly sbi oarts ki link bi daaliygaa..kyunki ..mujy bi pichly part dundne m bhut problam huyi …but ab tho.mene pad liye

    1. where is part no 3,4 and 1 , 2 link ..aapny kaha tha story ky end m daal diye jaayngy ..ik part mila nhi mujy abi tak

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