Adwika ( Adwitya Shakti ) Part – 6

नौवाँ अध्याय : पहला बीज

सृष्टि के आरम्भ में ऋषि कश्यप की 2 पत्नियाँ थी दिति और अदिति, अदिति के गर्भ से देवों का जन्म हुआ और दिति के गर्भ से असुरों ने जन्म लिया..

पिता होने के नाते ऋषि कश्यप ने इनकी शिक्षा दीक्षा के लिए उपयुक्त गुरु के सुझाव के लिए भगवान विष्णु से आग्रह किया.. विष्णु ने उन्हें गुरु ब्रहस्पति और गुरु शुक्राचार्य का सुझाव  दिया और अंतर्ध्यान हो गए…

ऋषि कश्यप ने देवों की शिक्षा का दयित्व गुरु ब्रहस्पति को और दैत्यो का गुरु शुक्राचार्य को दिया… तथा उस दिन से शुक्राचार्य ने अपना पूरा जीवन असुरों के उत्थान के लिए लगा दिया..

शुक्राचार्य ने सभी शिष्यों को बुलाया.. हिरण्यकश्यप, सिवि, अश्वा , अश्वपति,सराभा, चंद्र तथा अन्य सभी असुर शुक्राचार्य के समक्ष प्रस्तुत हुए, और कहा.. आदेश गुरुदेव….

शुक्राचार्य : आज मैंने देखा कैसे छला है देवों ने तुम्हें.. स्वर्ग पर स्वयं का एकाधिकार कर तुम्हें पाताल दे दिया भिक्षा के समान…

हिरण्यकश्यप  : गुरुदेव हम इसका प्रतिशोध लेंगे… हम सभी देवों का अंत कर देंगे…

शुक्राचार्य : अवश्य वत्स, तुम उसके लिए पूर्ण सक्षम हो.. पर आज मैंने तुम सबको किसी अन्य कार्य के लिए बुलाया है…

सिवि : आदेश गुरुदेव

शुक्राचार्य : इससे पहले तुम सब ब्रह्मचर्य आश्रम से बाहर निकलो.. मैं तुम सबसे तुम्हारे वीर्य की प्रथम बूँद की माँग करता हु.. सभी दैत्यों का प्रथम बीज मुझे चाहिए.. असुरों के भविष्य के लिए ये बहुत आवश्यक है…

सभी दैत्यों ने अपने प्रथम बीज को गुरु शुक्राचार्य को दिया.. शुक्राचार्य ने सभी बीजों को मिलाकर एक महाबीज का निर्माण किया और उसे एक तंत्र में सुरक्षित रखा ताकि समय की रफ़्तार उस पर कोई असर ना डाल पाए और वो कई युगों तक सुरक्षित रहे..

तंत्र में क़ैद उस बीज को देख शुक्राचार्य की आँखों में ग़ज़ब की चमक थी… और चेहरे पर एक विजेता की सी मुस्कान.

(वर्तमान में)

अद्विका अंजनी और भानु के समक्ष खड़ी थी, आज की घटना ने इस शांत बैठे शहर में जैसे कोई तूफ़ान सा ला दिया हो… आसपास के सभी लोग वहाँ उन्हें आश्चर्य से देख रहे थे.. तभी अंजनी बोलते है… “हमें यहा से चलना चाहिए लोगों कि भीड़ बढ़ रही है…

भानु : हाँ आप इन्हें लेकर हेड्क्वॉर्टर पहुँचो.. मैं ये सब क्लियर करवा कर आता हूँ…

भानु वहाँ किसी को कॉल पर कुछ इन्स्ट्रक्शन देकर.. टीम को गाइड करके हेड्क्वॉर्टर पहुँचता है..वहाँ अद्विका (अनन्या) के साथ अंजनी, जफरिना, विलियम और अमित थे..

अद्विका : ये सब क्या है.. कहाँ हूँ मैं… पाशा कहाँ है?

भानु : आदिशक्ति के अंश को मेरा नमन…

अद्विका : क्या मैं आप सब को जानती हूँ ?

भानु : आप में और हम में युगों का अंतर है देवी…

अद्विका –अर्थात ! क्या कहना चाहते हो.. ये कोनसा युग चल रहा है?

भानु : ये कलियुग है, देवी…

अद्विका :कलियुग !!… 2 युग बीत गए…, मुझे बताओ इस बीच क्या क्या हुआ?

अंजनी : देवी, हमारी जानकारी बहुत सीमित है, परंतु फिर भी जो कुछ हमारे मस्तिष्क में है वो आप अंतरित कर सकती है,

अद्विका : ठीक है… आप ध्यान मुद्रा में बैठो में आपके मस्तिष्क से जानकारी को ग्रहण आरम्भ करती हूँ।

इसी दौरान जफरिना हेड्क्वॉर्टर के रूम में चारो तरफ़ घूम कर सब चीज़ों को ध्यान से देख रही थी।

भानु : तुम काफ़ी दिनो बाद यहाँ आयी हो…

जफरिना : दूसरी बार…. पहली बार तब आयी थी जब वायु में मुझे चुना था… मुझे याद है किस तरह आपने और विधि ने मुझे ट्रेन किया था… वैसे विधि कहाँ है?

भानु : पता नहीं.. वैसे वो कभी इस तरह ग़ायब नहीं होती… और इस तरह का ऐक्शन मिस करना तो इम्पॉसिबल है.. मै उसे तब से ढूंढ़ रहाहूँ जब अद्विका को होश आया…

(ठीक इसी समय किसी दूसरे स्थान पर)

एक लड़की का साया अंधेरे में सड़क पर चलता जा रहा था,… एक टनल के पास पहुँच कर वो लेफ़्ट राइट देखती है.. और अंदर एंटर करती है… और थोड़ी दूरी पर जाते ही वहां एक गेट आता है.. तो उस पर ठक ठकाती है.. अंदर से 2 बीस्ट बाहर आते है… वो उसे देख कर साइड हो जाते है और वो अंदर एंटर करती है… एक के बाद एक वो सिक्यरिटी गेट्स क्रॉस करती है.. कोरिडोर में उसके हील्ज़ की टक टक सुनाई पड़ रही है.. वो फ़ाइनल गेट से अंदर जाती है वहाँ कमरे में चारो ओर धुआँ था जैसे अभी कोई हवन हुआ हो … वो कमरे के मध्य बैठे हुए व्यक्ति के पास जाती है और उसे एक पेकेट देती है.. वो शख्स पीछे से काफ़ी वृद्ध तथा काफ़ी लम्बे बाल वाले  थे… पीछे से लड़की की शक्ल दिखती है, जैसे ही वो हुड को उठाती है… वो विधि थी….

विधि : जो आपने बोला था मैं वो ले आयी…

वृद्ध साधु : बहुत अच्छे… अब तुम वापस जाओ और सही समय की प्रतीक्षा करो…

 

इधर हेड्क्वॉर्टर में अद्विका ने वो सब देख लिया था जो अंजनी के मस्तिष्क में था…

अद्विका : कुछ पता है पाशा का क्या हुआ… उसका वध कैसे हुआ.. किसने किया..

भानु : इसकी ना तो हमें कोई जानकरी है ना ही हमारे किसी पूर्वज को इसकी जानकारी थी…, लगता है जैसे इतिहास के इस पहलू से दुनिया में कोई भी अवगत नहीं है…

अंजनी : या शायद जो भी हुआ वो दुनिया से छुपा हुआ है… या जो होगा वो अब होगा…

अमित : मतलब!!

अंजनी : मतलब जब हमारे पूर्वजों ने हमें बॉक्स की ज़िम्मेदारी दी थी तब हमें ये भी बोला था कि देवी के वापिस जाने का प्रबन्ध भी हमें ही करना होगा…

अद्विका : मुझे वापिस जाना होगा…, पाशा सिर्फ़ मेरे ही हाथो मरेगा… उसने मेंरा सबकुछ तबाह कर दिया, मेरा प्रतिशोध अधूरा नहीं रह सकता… अगर मैं वापिस आयी हूँ तो इसका सिर्फ़ एक ही मकसद है और वो है पाशा का अंत…

जफरिना : तो हमने कोई रास्ता ढूंढ निकाला अभी तक…

अंजनी : इसका जवाब भानु ही दे सकते है…

भानु : एक रास्ता तो है, परंतु….

(भूतकाल में)

रक्तकूट असुर रूप में, अपनी सेना को पाशा के क़िले की और जाने का आदेश देने के पश्चात् पुनः अपने घोड़े पर सवार होकर एक दीवार की तरफ अपने घोड़े को हांकता है जहां अभी भी धरती से पाताल जाने का एक बड़ा द्वार बचा हुआ था… इस दुनिया से वो घोड़े सहित उस द्वार में प्रवेश करता है.. जैसे ही वो अंदर जाता है.. उसके घोड़े की दुम के अंदर जाते ही द्वार वहाँ से ग़ायब हो जाता है…

दूसरी ओर वो निकलता है जहाँ का दृश्य एक नरक के समान था… आकाश में स्याह बादल सूरज की किरणो को आने से रोक रहे थे…यहाँ रोशनी नहीं पर एक लालिमा बिखरी हुई थी.. जो ख़ून के समान फैली थी… अपने घोड़े पर सवार वो धरती पर पड़े नरमुंडों को कुचलते हुए बढ़ता जा रहा है.. रास्ते में सूखे पेड़ जिनपर कोई पत्ता नहीं था ,उनके ठूंठ भी काले पड़े हुए थे… रास्ते में मृत शरीरों पर माँस नोंचते हुए गिद्ध हर कहीं दिख जा रहे थे… वहाँ कुछ दैत्य रक्तकूट को आते देख साइड में हो जाते है और धरती पर नतमस्तक गिर जाते है…उसके वहाँ से निकलने के पश्चात् उठ कर वहाँ से चले जातेहैं।

घोड़े पर सवार रक्तकूट अपनी मंजिल की ओर चला जा रहा था और नरक का दृश्य और भी भयावह होता जा रहा था, और वो उस का जैसे आनंद लेते हुए आगे बढता जा रहा हो। एक साधारण पशु इस तरह का दृश्य देख शायद अपनी जगह पर जड़ हो जाये परन्तु रक्तकूट का अश्व बिना भय बिना किसी हिचक के आगे बढता जा रहा था.. राह पर पड़े नरमुंडो को इस तरह अपने पैरो तले रौंदते  हुए जैसे कि कोई घासफूंस हो.. मदमस्त हो वो भी अपनी दिशा की ओर बढ़ा चला जा रहा था…

लगभग एक प्रहर का सफ़र तय करने के उपरांत वो एक विशाल महल के सामने पंहुचा , वो महल दिखने में बहुत भव्य और सुन्दर प्रतीत होता था परन्तु अंधकार में अपनी सुन्दरता को  प्रदर्शित नहीं कर पा  रहा था, वहां द्वार पर पहुचकर द्वारपाल को देखा , रक्तकूट को देखते ही उसने द्वार को खोलकर  अंदर जाने का मार्ग खोल दिया,वो सीधा वहां से होते हुए महल के अंदर सिंहासन पर बैठे एक विशाल और भयानक दैत्य के समक्ष आकर अपने घोड़े की लगाम को जोर से खींचता है … गति अधिक होने के कारण एक दम सीधे न रुककर  घोडा अपने आगे के पैरो को उपर उठा देता है … उसी पल रक्तकूट बोलता है, “असुरराज पाशा ने तुम्हारा आह्वाहन किया है महिषी…”

महिषी वहां अपने आसन से खड़ा हो… अपने हाथ में थामे प्याले को मुंह से लगा एक बार में खत्म कर, एक तरफ फेंक कर जोर जोर से हँसता है.. “हा हा हा हा हा”  साथ ही एक जोरदार बिजली कड़कती है…

(वर्तमान में)

भानु : परंतु मुझे ज्ञात नहीं अब वो कहाँ है…

भानु के इतना बोलते ही सब आश्चर्य से देखते हैं … पर अद्विका अभी भी शांत मुद्रा में भानु को देखते हुए पूछती है.. “और वो क्या है?”

भानु : वो एक बालक था जब मैं उससे मिला था… वो मुझे आस्ट्रल प्लेन पर भटकता हुआ मिला.. पहले कुछ दिन तो मैंने उसेऑब्ज़र्व कियाकि वो वहाँ आया कैसे लेकिन जब मुझे पता चला कि ये शक्ति उसे जन्म के साथ ही  मिली है तो मैंने आस्ट्रल प्लेन में ही उसके साथ वक़्त बिताना शुरू किया.. मैंने उसे वहाँ शक्तियों के उपयोग के बारे में जानकारी दी.. और उसे उड़ना भी सिखाया… जो उसने बहुत जल्दी ही सीख लिया.. फिर वो मुझे वहाँ नहीं मिलता था परंतु वो एक नए प्लेन पर चला गया था जहाँ समय धाराएं बहती रहती है.. जहाँ जाना सबके लिए वर्जित है.. पर वो दायरा उसके लिए स्वयं ही  खुल जाता था।

बस उस के बाद मैंने उसे नहीं देखा…

अंजनी : तो अब उसे कहाँ ढूँढा जाए?

विल्यम : वही जहाँ उसे लास्ट टाइम ढूँढा था…

अंजनी विल्यम से, “वो कैसे…” अपने चेहरे पर एक प्रश्न चिन्ह के साथ…

विल्यम : वैसे आसान तो नहीं है पर एक तरीका है… जिसमें सबसे पहले तो क़िस्मत का सहारा है… तुम फिर से ध्यान मगन हो आस्ट्रल प्लेन पर उसे ढूँढना शुरू करो… वैसे वो तुम्हें किस समय मिलता था…?

“रात में… हर बार ”

“इसका मतलब वो सोने के बाद यहाँ आता है… इसलिए ये हमें रात को ही करना होगा, और मैं लगातार आप पर नज़र रखूँगा जैसे ही आप उससे मिलो… मैं जफरिना को इन्फ़ोर्म करूँगा..

जफरिना : पर इसमें मैं क्या करूँगी…?

“सबसे ज़रूरी काम तो तुम्हारा ही है जफरिना…, जैसे ही मैं बोलू… तुम्हें अपनी वायु शक्ति को प्रयोग कर भानु की सिल्वर कॉर्ड को ट्रैक करना होगा जहाँ इनका मानस रूप होगा वही दूसरा मानस रूप उस का ही होगा… फिर तुम्हें उस मानस रूप की सिल्वर कॉर्ड के ऑरिजिन का पता लगाना है…

जैसे ही विल्यम ने ये बताया.. वैसे ही सबके चेहरे पर एक हल्की सी उम्मीद की झलक उभर आयी…

भानु : ठीक है हम आज रात से ही ये शुरू करते हैं …

अद्विका : अवश्य इसके उपरांत हम भी अपने कुछ प्रश्नों के उत्तर ढूंढते हैं … हम यही ध्यान में जा रहे है… कुछ जानकारी मिले तो अवश्य हमें ज्ञात कराना..

सब लग जाते है किसी को ढ़ूढने में, और दिन ब दिन बीतते जाते हैं …

Written By- Sonya Singh for Comic Haveli

Disclaimer – These stories are written and published only for entertainment. comic haveli and writers had no intent to hurt feeling of any person , community or group. If you find anything which hurt you or should not be posted here please highlight to us so we can review it and take necessary action. comic haveli doesn’t want to violent any copyright and these contents are written and created by writers themselves. The content is as fan made dedications for comic industry. if any name , place or any details matches with anyone then it will be only a coincidence.

Facebook Comments

4 Comments on “Adwika ( Adwitya Shakti ) Part – 6”

  1. ptaa nhi kyuun …par kahani ka yeh wala part pichly parts ki trh apni shaap nhi shod paya…padny sy saaf lg rhaa hy ki khhaani ka yeh wala part jbrdsti likha gya hy …ya fir story late aany ki wjha sy bi eysha ho sakta hy .. kahaani ky pichly part m adwika ki entry huyi thi so umeed thi ki is waly part m adwika ka lmbaa screen time dhykny ko milyga ..par eysha huya nhi …adwika ik nyi duniya m aayi hy eyshaa khin bi nhi lgaa ….kahani m.kuch unknown fact bi daaly gye jinka pta tho filhaal aagy ky part m legegaa…dusry checter bi kaafi thky thky legy …unka kirdar khin bi pichly part sy match nhi huya….. story line kafi high level hy ..yeh manna pedega .

  2. बहुत धाँसू, ज़बरदस्त स्टोरी। मज़ा आया पढ़कर परन्तु थोड़ा। मैंने सोचा था इस बार अद्विका का अच्छा रोल देखने को मिलेगा पर वो तो दिखा ही नही। बुहुहु। इस पार्ट में काफी कुछ ऐसा था जो समझ में नही आया। ये भाग मेरे सर के ऊपर से भाग गया। बुहुहु। अब ये नया छिछोरा कौन है जिसे सब जाने मिलकर ढूँढने वाले हैं? ऊपर से मैं पिछले पार्ट्स की कहाँनी भूल गया बुहुहु। आपको रिकैप देना चाहिए था सोन्या मैम। कहानी काफी अच्छी है। अच्छी जा रही है। परन्तु इस में मेन कैरेक्टर यानी अद्विका को अच्छे से दिखाया ही नही। मुझे इस पार्ट का बेसब्री से इंतज़ार था परन्तु अद्विका का इतना छोटा रोल देखकर मन नही भरा बुहुहु। प्लीज़ नेक्स्ट पार्ट जल्दी दें और हाँ। अगले पार्ट में पिछले सभी पार्ट्स के रिकैप ज़रूर दीजियेगा।

    इस कहानी को मेरी ओर से ।

    8 आउट ऑफ 10

    1. Waise hi story post karne ke likhi thi kisi technical issue ki wajah se usse adha he post karna pada.. next part already editing me hai.. read that ye sare complaints nahi hongi

  3. काफी सधी हुई स्टोरी लगी।
    ज्यादा लिखने लायक तो नहीं है क्योंकि घटनाएं अभी कुछ साफ नही हो पायी हैं।
    अद्विका अभी भी अपने भूतकाल में मगन है अर्थात उसको वर्तमान का भान नहीं है तो अभी उसका अधिक सक्रिय न होना समझ आता है।
    पाशा अभी भी पहेली बना हुआ है वो युद्ध की तैयारी कर रहा है पंर क्यों? देखना होगा।
    ये अनजान बाबा कौन है? ये भी पता करना अच्छा रहेगा।
    वो लड़का कौन था ये भी पता नहीं।
    और अब स्टोरी याद नही है तो समस्या आ रही है फिर से सारे पार्ट पढ़ने पड़ेंगे लगता है।
    मुझे जो स्टोरी में पसंद नहीं आया वो है कि स्टोरी की दिशा का कोई अंदाजा नही लग पा रहा है जिससे स्टोरी बांध नहीं पायी।
    अच्छाई ये है कि स्टोरी में घटनाएं विस्तृत हैं भले छोटे छोटे सेगमेंट रहे।
    आगे के लिए all the best

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.