Adwika ( Adwitya Shakti ) Part – 7

अद्विका (अद्वित्या शक्ति)

सप्तम खंड

दशम: अध्याय : ट्रैव्लर

भानु अंधेरे गलियारे में आगे बढ़ रहा है… एक के बाद एक उसके पास से कई सारे साये निकलते जाते हैं, और वो सबको एक के बाद एक देखता हुआ जाता है , पर जो वो ढूंढ रहा है वो उसे नहीं मिलता। वो कई दिनों से इन्हीं अंधेरों में घूम रहा है पर उसे सिर्फ निराशा ही हाथ आई, अब जब वो थक कर वापिस जाने के लिए निकलता है तो थोड़ी दूर चलने के पश्चात उसके कानों में स्वर पड़ता है… “ईश्वर क्या है, एक छलावा… है भी या नहीं पता नहीं.., दुनिया ने चू?*# बना रखा है…”

भानु आवाज की ओर जाता है और उसे देखता है, हालांकि वो उससे पहचान नहीं पाता पर फिर भी एक चांस लेने की सोचता है और उससे बात करने का प्रयत्न करता है, पर जैसे ही वो उसके पास जाता है , वो देखता है उसका ध्यान कहीं और है।  जैसे वो अपने आसपास किसी से बात कर रहा है पर भानु उसके आसपास किसी को नहीं देख पाता। वो उसी समय अंजनी को मानसिक संदेश भेजता है और इसी के साथ जफरीना उसे ढूंढने का काम शुरू कर देती है , लगभग १ घंटे की मेहनत के बाद वो बोलती है,” मिल गया।”  भानु अपनी योग निद्रा से बाहर आकर पूछता है, “कहां?”

जफ्रीना : गुड़गांव में इस समय किसी बार में बैठा दारू पी रहा है।

भानु : ठीक है तुम उस पर ध्यान रखो और उसकी लोकेशन की पूरी जानकारी हमें देती रहो , हम उसके पास पहुंचतेहैं।

जाफ्रिना : ठीक है।

भानु और अंजनी वहां से निकल लेते है,

स्थान गुड़गांव , समय रात ११ बजे , मचान पर

बैठा एक बंदा (आर्या) बुरी तरह दारू में धुत्त.. बैठा हुआ अपने साथियों को उपदेश दे रहा था

आर्या : बेंचो@# यहां सब माद@#₹# है साले… चू@## समझ रखा है।

फ्रेंड : अबे तमीज से बात कर , हम यहां तेरी बकवास सुनने नहीं बैठे … साले एक तो दिन भर बॉस गा## मारता है ऊपर से इसकी बकवास

आर्या : चुप भोस@#₹# तेरे से कौन बोल रहा है , मै तो…  चल छोड़ तेरी समझ से बाहर की बात है।

फ्रेंड : हां देखो ये ही एक समझदार यहां है और हम सब चू#&*, चल भाई अब मेरे से और नहीं सहा जाएगा

आर्या वहां से निकल कर एक तरफ चल देता है, वहीं उस पर अंधेरे में नजर रख रहे भानु और अंजनी के साए दिखाई दे रहे थे,

अंजनी : तुम्हे अभी भी लगता है ये वही है

भानु : संदेह तो है , चलो देखते है इसमें कितना दम है

उसी के साथ भानु एक इशारा करता है और आर्या को चारो ओर से काफी लोग घेर लेते है

आर्या सबको देखता है

आर्या : ए भाई क्या हाल है.. भाई ये फेस 3 जाना है रास्ता कहां से है..

वो बिना कुछ बोले एक तरफ सरक जाता है और आर्या फिसल कर गिरते गिरते बचता है

आर्या : बेंच@###@ तू जानता नहीं मैं कौन हूं  …..

फिर वो देखता है कि वहां एक के बाद एक 15 – 20  एक जैसे दिखने वाले लोग उसके सामने खड़े हो जाते हैं

आर्या : अरे यार तुम लोग तो बुरा मान गए , मैं तो कह रहा था तुम जानते नहीं मैं चू@# हूं , मुझे जाने दो कल टाइम पर ऑफिस नहीं पहुंचा तो बॉस मेरी मार लेगा

आर्या थोड़ा पास आकर  बोलता है .. भाई है तू मेरा चल बाद में  मिलेंगे अगली बार दारू मेरी तरफ से

अंजनी और भानु ये सब ध्यान से देख रहे थे और अंजनी भानु की ओर देख हल्की सी मुस्कान देता है, पर भानु अभी देख रहा होता है

आर्या थोड़ा आगे जाने की कोशिश करता पर सभी उसका रास्ता रोके रहते है

फिर एक जोर से एक घूंसा मारता है तभी आर्या नीचे गिर जाता है और उसका हाथ हवा में खाली निकल जाता है, जैसे सही समय पर उसका गिरना हुआ, दूसरा वहां गिरे आर्या पर पैर से मारता है तभी आर्या की करवट बदल लेता है,.

एक  बाद एक सब उस पर अटैक करते है पर आर्या किसी  किसी तरह उनसे बचता रहता है और अंत में भानु सबको रुकने का और वहां से जाने के लिए इशारा करता है उसी के साथ सब वहां से निकल जाते है तथा आर्या अपने रास्ते निकल जाता है..

अगले दिन सुबह सुबह आर्या सोकर उठता है और आंख खोलते ही भानु और अंजनी को अपने रूम में बैठे हुए देखता है,

आर्या : अरे यार तुम दोनों बुड्ढों को कोई काम नहीं कल रात से मेरे पीछे पड़े हो?

भानु : अच्छा तो तुम्हें ज्ञात है हम तुम्हारे ऊपर अपनी दृष्टि रखे हुए थे..

आर्या : क..क्या रखे हुए थे, ताऊ हिंदी में बोल ले के कहना चाहवे सै ?

भानु : हमारा मतलब था नजर

आर्या : हां तो नू केह ने , इब बता के तम तड़के तड़के अडे मने अपने ब्याह का न्योता देंण आए होके, वो तो ठीक से पर एक बात बता ताऊ इस बुढापे में तेरे ताई छोरी दे किसने दी?

अंजनी : एक बार कहूंगा पाधरा होले… दूसरी बार कोनी बोलू ..

आर्या : ठीक से ताऊ बता

भानु : कल रात क्या हुआ कुछ याद है।

आर्या : मुझे कल रात ही नहीं बल्कि सारी रातें  याद है , औेर मुझे आगे क्या होना है वो भी पता है.. पर मै आपकी कोई सहायता नहीं कर पाऊंगा

भानु : ठीक है बेटा.. पर अगर तुम्हे याद हो भले ही कुछ दिन के लिए सही पर पर हमारा गुरु शिष्य का रिश्ता रहा है.. एक बार उस रिश्ते के लिए गुरूदक्षिणा  समझ कर हमारी सहायता कर दो

आर्या : अगर करना  चाहूं तो भी आपकी सहायता नहीं कर पाऊंगा, एक तो ये शक्ति मेरे वश में नहीं है और दूसरा जिस काम में मुझे खुद को  दांव पर लगाना पड़े उसे क्यों करू जबकि मेरे बाद मेरे परिवार का कोई और वारिस भी नहीं है

भानु : कोई नहीं बेटा अभी तुम्हे माया के चक्कर से निकलने में समय लगेगा , अभी हम जा रहे है पर जब भी तुम्हारा विचार बदले बस हमें पुकारना हम मिल जाएंगे

(वहीं दूसरी ओर हेडक्वार्टर में )

अद्विका अभी अन्तर्ध्यान थी , जफरीना अमित को अपनी शक्तियों को कंट्रोल करने के लिए कुछ टिप्स दे रही है , हालाकि पिछ्ले कई दिनों में उसने काफी कुछ सीख लिया है।

ठीक उसी समय बाहर से आती हुई आवाज़ों से दोनों का ध्यान बाहर की ओर जाता है , वो देखते है वहां बाहर बीस्ट की एक पूरी फौज खड़ी है ,हाथों में  लोहे केअस्त्र लिए हुंकार रही थी…

अमित : ये क्या है?

जेफ्रीना : तो तुम ने इन्हे पहले कभी नहीं देखा?

अमित : एक बार देखा है , जब उन्होंने अनन्या पर हमला किया था, पर अब ये यहां क्या कर रहे है?

जेफ्रना : वहीं जो पिछली बार करने आए थे , परन्तु सफल नहीं हो पाए।

तभी बाहर बीस्ट के सामने धरती में कुछ हलचल होती है और वहां से एक विशाल काए बीस्ट निकल कर बाहर आता है इतना बड़ा की बाकी बीस्ट उसके सामने बकरी जैसे लगे और वो बकरी इंसानों के आगे एक विशालकाय भालू के समान थे

बाहर निकलते ही उसने बाकी सब को इशारा करते हुए हुंकारा और इसी के साथ वो सब हेडक्वार्टर पर हमला बोल देते है ..

अमित और जफरीना उन्हें आगे बढ़ते हुए देखते है तभी रास्ते में एक विस्फोट होता है तथा कई बीस्ट वहीं जख्मी होकर गिर जाते है .. ऊपर से विधि जंप करके नीचे आती है और बाकी बीस्ट पर अटैक बोल देती है..

अंदर जफरिना अमित से बोलती है, हमें उसकी हेल्प करनी होगी, वो अकेली सबका मुकाबला नहीं कर पाएगी,और दोनों बाहर आकर युद्ध में शामिल हो जाते है..

कुछ बीस्ट विधि को घेर कर उस पर हावी होने वाले थे तभी अमित ने अपनी ज्वाला से उन पर आक्रमण कर उन्हें दूर कर दिया.. वहीं मौका पाकर कुछ बीस्ट अंदर घुसने जाने लगे तभी जफ्रीना ने उन्हें हवा में उड़ा कर दूर किया और इधर अमित की ज्वाला उन्हें वापिस उठने के काबिल नहीं छोड़ रही थी। विधि का एक एक वार उन्हें बराबर की टक्कर दें रहा था।

अपनी सेना की ऐसी दुर्गति होती देख विशाल बीस्ट भी युद्ध में कूद पड़ा और उसके आते ही जैसे पांसा पलट गया हो… अमित ने उस पर अग्नि से वार करने का प्रयास किया पर उसने मैदान से 2 बीस्ट को उठा कर सामने कर दिया जैसें की ढाल हो और अमित के पास पहुंचकर उसे उठा कर जफ्रीना पर जोर से फेक मारा जिससे वो दोनों अपने होश खो बैठे, विधि ने उस पर अटैक करने की कोशिश की पर वो भी उसके आगे टिक नहीं पाई हालाकि विधि की बॉम्ब ने उसे एक पल के लिए स्तब्ध किया पर वो भी उस पर सिर्फ एक हवा के झोंके के समान था।

तब तक बाकी बीस्ट अंदर जा चुके थे जहाँ अद्विका अकेली अपनी योग निद्रा में थी.. एक दिव्य प्रकाश उसके चारो ओर बिखरा हुआ था… कुछ बीस्ट को तो उस प्रकाश को पार करना है संभव नहीं था.. लेकिन उस विशालकाय प्राणी को वो प्रकाश रोक ना पाया और उसने अद्विका को जगा दिया।

(भूतकाल में)

रकतकूट महिषी को गुरु शुक्राचार्य का सन्देश देकर वहाँ से निकल पड़ता है अपने अगले लक्ष्य की ओर, और अपने घोड़े से बोलता है.. “चल दोस्त हमें समय रहते हमें पाताल के बाकी 3 और संरक्षकों को शुक्राचार्य का आदेश देना है, अपनी गति को तीव्र कर”

वो जल्दी ही महिषी की सीमा को पार कर अगले इलाके में पहुच जाते है, जहाँ हर जगह ज्वालामुखी का लावा बिखरा हुआ है.. वो बिना रुके एक विशाल धधकते हुए ज्वाला मुखी की ओर बढ़ा जा रहा है…

(वही दूसरी ओर )

किसी ओर आयाम में पाशा एक युद्धक्षेत्र के बीचोबीच खड़ा हुआ है.. उसके चारो ओर लाशे ही लाशे पड़ी है उसके सामने एक और पाशा है… अगर हम ऊपर और ऊपर जाकर आसपास का नजारा देखें तो लगभग १०० – २०० मील तक उन दोनों के अलावा कोई भी जीवन के चिन्ह नहीं दिखेंगे ,जैसे की वो सारे उस युद्ध की बलि चढ़ गए हो, पाशा हल्के से बुदबुदाता है.. तेरी मृत्यु के बाद ४ हो जायेंगे ,फिर बस २ और फिर मुझे सर्व शक्तिमान बनने से कोई नहीं रोक सकता।

 

(वर्तमान में)

अद्विका तथा विशाल बीस्ट के बीच युद्ध चालू था पर परिणाम बीस्ट के पक्ष में बिलकुल न था, उसके एक एक वार को अद्विका आराम से रोक रही थी परन्तु अद्विका के एक भी वार को वो रोक नहीं पा रहा था बल्कि अद्विका एक एक प्रहार से वो कई मीटर दूर जाकर गिरता…

अपने को हारता हुआ देख उसने जोर जोर से आवाज करना शुरू कर दिया फलस्वरूप कुछ ही समय में धरती में से उस जैसे २-३ बीस्टऔर निकल आये..

हालाँकि अद्विका अभी भी उन्हें आराम से टक्कर दे रही थी पर चारो तरफ से आक्रमण से थोड़ी विकेन्द्रित हो जाती थी…

उसी समय विलियम वहां पहुचते हैं ..

अमित : आप कहाँ चले गए थे?

विलियम : वो लेने जो देवी की अमानत है

विलियम एक खडग को अद्विका की ओर उछालता है ओर जोर से बोलता है..

“ये लो देवी आप की अमानत चंद्रहास खडग , एक समय ये शिव ने वरदान स्वरुप रावण को दी थी, उन्ही के आदेश पर आज मैं ये आपके सुपुर्द करता हूँ ”

उस खडग के हाथ में आते ही जैसे अद्विका की ताक़त कई सौ  गुना बढ़ गयी हो.. युद्ध का पूरा पलड़ा एक ही पल में भारी हो गया .. उनको परास्त करके देवी वापिस आ गयी।

Written By- Sonya Singh for Comic Haveli

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3 Comments on “Adwika ( Adwitya Shakti ) Part – 7”

  1. such m ….kahani ky 5 part tak tho mujy ik ik line yaad hy

    par usky baad kya huya kuch smj nhi aaya ..shaayd puri kahani ko ik baar dubaara hi pdnaa pdegaa..

    kahani pdny par horror thril ka ehsaas dy rhi hy ..jo such m bhut mjydaar hy …par kahani ko dimaag m bitha pana muskil ho rhahy …..pasha and adwika ki timeline phly sy hi uljan bri he aur ab dusry aayam bi ismy shaamil ho gye…jis sy umeed ki ja sakti hy ki aany valy time m khani smjny m bhut muskily aany vali hy ….suru m adwika ky behave ky baary m tho sb pta hy lekin is nyi adwika ka behave kesa he kuch amj nhi aa rha…vo sbky sath acchy sy gul mil gyi hy aur usy nyi duniya sy bi koi hyraani nhi huyi …yeh baat sochny vali hy …aur m iss baat sy bi hyraan hu ki adwika ny abi tak yeh jaany ki bi kosis nhi ki….ki vo yahan kese aayi, pasha ka kya huya…usky ma baap uski preza k kya huya….agr pasha us vkt bch gya tha tho usny puri drti par raz kyun nhi kiya ..aakhir eysha kya huya tha ki past ky sbi raksh maary gye ya unka namonishan mit gyaa…agr pasha mra nhi tho vo kahan he ..aur agr zinda he tho isi timeline m kyun aaya he…..abi kafi kuch baaki he……jo janna hy

    1. For most of questions.. Part 6 dhyan se pado.. Adwika ne anjani ki puri memory copy ki hai… Jisse usse wo sab pata hai Jo baki sab ko pata hai… Adwika kafi tehra Hua character hai to wo ascharya me bahut Kam aati hai… Pasha ka sirf progress update diya hai.. Is story me Mai baki ayamo ko nahi la rahi bus abhi 2 time line per he focus rahega..

  2. सोन्या जी, आपकी कल्पना शक्ति भी हर बार और बेहतर होती जा रही है , बांध के रखा हुआ है आपने कहानी में,।
    बधाईयां

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