An Old Debt To Settle Part-1

अभय बदहवास सा भागा जा रहा था। जैसे कोई अनहोनी होने से रोकनी थी उसे। वो दौड़ता हुआ विश्वविद्यालय के कुछ दूरी पर बनी उस बिल्डिंग के पास पहुँचा। पर उसके करने लायक अब कुछ नहीं था। बिल्डिंग जल के ध्वस्त हो चुकी थी और उसके साथ ही उन दरिन्दों के ख़िलाफ़ सारे सबूत भी।
वो सड़क पर ही घुटनों के बल बैठ गया। उसके महीनों की मेहनत सब एक झटके में खत्म हो गयी थी। तभी उसे अचानक कुछ याद आया और वो लगभग उड़ता हुआ भंगार बन चुकी बिल्डिंग के पास पहुँचा। मलबे को इधर उधर फेकने लगा।

“नहीं नहीं नहीं।।।।
अब और नहीं।
नहीं मानसी तुम नहीं जा सकती ऐसे।
पहले मेरा परिवार और अब तुम नहीं।”

मानसी की क्षत विक्षत लाश पड़ी हुई थी अभय के सामने।
कुछ भी तो नहीं कर पाया था वो। जो तिरंगा बन के पूरी दिल्ली का संरक्षक बना घूमता है आज वो कुछ भी नहीं कर पाया था अपनी सबसे अज़ीज़ इंसान को बचाने के लिए।

ये सब उस पहेली के साथ शुरू हुआ था जो तिरंगा के लिए छोड़ी गई थी लाल किले के गेट के पास। कोई था जो तिरंगा की असलियत जानता था। जो न सिर्फ ये जानता था कि अभय ही तिरंगा है बल्कि वो उसके पूरे वजूद को खत्म करने की आकांक्षा भी रखता था। उस पहेली के साथ एक धमकी भरा पत्र संलग्न था। आगे तिरंगा न बनने की धमकी। अन्यथा ऐसे ही उसके नए परिवार को भी खत्म कर दिया जाएगा।

ब्रह्मांड रक्षक हैड्क्वाटर्स।

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तिरंगा: इस सिचुएशन में क्या करूँ ध्रुव?

ध्रुव: क्या तुम चाहते हो इस जगह ब्रह्मांड रक्षक हस्तक्षेप करें?

तिरंगा: नहीं बस यहाँ आने का कारण सिर्फ ये बताना था कि अब परमाणु और शक्ति को और भी ज्यादा सजग रहना होगा। क्योंकि अगले कई दिनों तक मैं सक्रिय नहीं हो पाऊंगा। या हो सकता अब तिरंगा दिल्ली की सड़कों पर नज़र ही न आये।

ध्रुव: तिरंगा सिर्फ एक ही बात कहूंगा कि तुम्हारे बारे में सिर्फ एक इंसान जानता है और उसने तुम्हारे परिवार को खत्म करने की धमकी दी है। मेरा परिवार तो हमेशा निशाने पर रहता है। अभी अलकेमिस्ट वाला केस सबसे बड़ा उदाहरण है। तो क्या हर सुपरहीरो केवल इस डर से क्राइम फाइटिंग छोड़ दे कि उसके परिवार के ऊपर ख़तरा है? फिर बाकी लोगों के परिवारों का क्या होगा?

तिरंगा: मैं समझ गया ध्रुव। थैंक्स। अब मैं शांत दिमाग से कुछ सोच पाऊंगा।

तिरंगा वापस अभय के रूप में कहीं निकल गया। वो एक ऐसी जगह जा रहा था जहाँ वो वापस कभी भी नहीं आना चाहता था।

X-Squad Headquarters

कर्नल एक्स-रे: आओ अभय उर्फ भारत। या यूं कहूं कि आओ तिरंगा। ये सालों बाद कैसे याद किया X-squad को?
अभय: मुझे पता था एक्स-रे के दुनिया में मेरी असलियत के बारे में कोई जान सकता है तो वो है सिर्फ ये संगठन। और मेरी सारी याददाश्त आने के बाद मुझे सब कुछ याद आ चुका है। एजेंट देशभक्त तो खत्म हो चुका था पर तुमने सालों अपने अंडरकवर एजेंट्स लगा रखे थे मुझपर नज़र रखने के लिए। पर तुम्हें इतनी नीच हरकत करने की ज़रूरत क्यों पड़ी। तूने मानसी को मार डाला कमीने।

अभय ने एक्स-रे की गर्दन दबोच ली थी। उसने किसीे तरह अपनी गर्दन छुड़ाई।

एक्स रे: होश में आओ अभय। तुम्हारे बारे में हमें सालों से पता था। अगर कुछ करना रहता तो हम पहले ही कर चुके होते। पर हम किसी की व्यक्तिगत ज़िन्दगी में हस्तक्षेप नहीं करते। हमारा काम बस देश के दुश्मनों को ख़त्म करना है।

अभय: तो किसने किया है ये काम? अभय आज सब कुछ भूल के उस दरिंदे को ये एहसास दिलाएगा के दरिंदगी क्या होती है।

एक्स रे: मैंने कहा ना हमें किसी की व्यक्तिगत ज़िन्दगी से कोई लेना देना नहीं। पर अगर तुम कह रहे हो तो हम पता लगाने की कोशिश करते हैं। और तब तक तुम चाहो तो वापस X Squad में शामिल हो सकते हो।

अभय: नहीं इस घिनौने संगठन से मैं हमेशा के लिए नाता तोड़ चुका हूँ। याद रखना एक्स रे अगर किसी भी तरह मेरे जीवन में जो हो रहा है उसमें तुम्हारा हाथ हुआ तो इस संगठन को जड़ सहित उखाड़ फेंकेगा अभय।

कहकर अभय निकल गया।

एक्स रे: उफ्फ बला गयी। अब तुम बाहर आ सकते हो अजनबी।

एक मास्क लगाए अजनबी बाहर आता है।
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स्थान- दिल्ली।

एक बूढ़ा बड़ी दाढ़ी वाला हट्टा कट्टा इंसान करोल बाग के पास एक उजाड़ हो चुके खंडहर की तरफ बढ़ रहा था। वो खुद में बड़बड़ा रहा था, “मेरी लैब, मेरा सब कुछ तो जल कर खाक हो गया। और अभी मैं तिरंगा भी नहीं बन सकता। सबसे पहले मुझे शिखा और आँटी को सुरक्षित करना होगा तब मैं शांत दिमाग से कुछ सोच पाऊंगा। मैं ब्रह्मांड रक्षकों को बोल सकता था इनको सुरक्षा प्रदान करने लिए पर उससे मेरी सीक्रेट आइडेंटिटी को खतरा था। सारी चीज़ें मुझे ही करनी होगी। और इसलिए मैंने इस जगह को ढूंढा है। यहाँ कोई भी आता जाता नहीं है इसलिए इस जगह को बैकअप के लिए रखा था मैंने।” वो बूढ़ा अभय ही था।
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अभय खंडहर के अंदर पहुँचता है। बहुत से चमगादड़ उड़ते हुए बाहर निकले। अभय टोर्च की सहायता से बढ़ते जा रहा था। अचानक उसके बढ़ते कदम ठिठक गए। उसने बायें रखी शिवाजी की मूर्ति घुमाई और एक बेआवाज़ तरीके से एक तहखाने का दरवाजा खुला। अभय उसमे उतरता चला गया।
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तहखाना एक पूरी आधुनिक लैब लग रहा था। और पास में एक शीशे के कमरे में तिरंगा की ड्रेस, बेल्ट और ढाल रखे थे। और उसके पास रखा था न्याय स्तम्भ।
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“मुझे कुछ तैयारियां करनी होंगी। मैं तिरंगा बन नहीं सकता तो क्या हुआ वो देशभक्ति का जज़्बा सिर्फ मेरी यूनिफार्म से नहीं है।” कहकर अभय ने न्याय स्तम्भ को एक साधारण बूढ़े की लाठी का स्वरूप दिया।
वो उसी बूढ़े के रूप में अपने घर पहुँचा। दरवाजा खटखटाने पर शिखा ने दरवाजा खोला।
शिखा: जी कहिये अंकल क्या चाहिए?
अभय: बेटा बहुत प्यास लगी है थोड़ा पानी मिल सकता है?
शिखा: जी अंदर आइये।
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दरवाजा बंद कर के अंदर बैठते ही, “ये क्या है अभय भैया? क्या वैसा ही कुछ हो रहा है जैसा आपको डर था?” शिखा बोली। अभय ने कोड लैंग्वेज व्यवहार किया था जिससे शिखा समझ गई थी कि ये अभय है।
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अभय: पहले ये बताओ आँटी कहाँ है?
शिखा: माँ! इधर आओ।
अभय: आँटी मुझे आप दोनों को खुद के बारे में कुछ बताना है।
आँटी: यही के तुम तिरंगा हो?
अभय: (चौंकते हुए खड़ा हो गया) आपको कैसे पता?
आँटी: बेटा मैं भी तुम्हारी माँ हूँ। मुझे बहुत पहले से पता था। पर मेरे लिए ये महत्वपूर्ण है कि तुम मेरे बेटे हो। बाकी तुम जो भी हो मुझे उससे मतलब नहीं।
अभय ने आँटी को गले लगाते हुए कहा,”आँटी मैं बहुत ही मुश्किल में फंसा हुआ हूँ। पर उससे निकलने के लिए आप दोनों को सुरक्षित करना ज्यादा जरूरी है।”
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स्थान- करोल बाग का वही खंडहर।
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“यहाँ आप दोनों सुरक्षित हैं। ये जगह मेरा नया बेस ऑफ ऑपरेशन्स होगा। यहाँ दो महीने तक का सारा खाने पीने का इंतज़ाम कर दिया है।,” कहकर अभय दोनों को लेके अंदर तहखाने में पहुँच गया।
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शिखा: wow अभय भैया। आपने तो मिलिट्री तक से निपटने के साधन जुटा रखे हैं।
अभय: और मैं तुझसे थोड़ी मदद चाहता हूँ शिखा। तुझे बस यहाँ से इस बेस को कंट्रोल और ऑपरेट करना है। और समय समय पर मेरी मदद भी करनी है वो भी यहीं से। और चाहे कोई भी सिचुएशन आये यहाँ से तुमलोगों को नहीं निकलना है। वादा करो मुझसे।
शिखा: वादा करती हूँ भैया।
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अगले 4-5 दिन अभय पूरे बेस का कंट्रोल सिस्टम सेट करता रहा और कुछ ज़रूरी गैजेट्स और न्याय स्तम्भ ले लिया। अपनी तिरंगा यूनिफॉर्म और ढाल को कुछ देर गौर से देखा और उन्हें पहन कर तिरंगा निकल पड़ा अपनी ज़िंदगी के सबसे बड़े केस को सुलझाने। शिखा और उसकी माँ को सुरक्षित करने के बाद अब वो आराम से तिरंगा बन सकता था।

Written By- Pradip Burnwal

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39 Comments on “An Old Debt To Settle Part-1”

    1. Thank you moni ji… Bas main bhi reader hi hu.. ye pahli koshis hai hopefully thik thak taiyar ho jaye story

  1. सर्वप्रथम लेखक बनने की बधाई प्रदीप भाई।
    तिरंगा के जीवन और उसके अतीत को छूने का प्रयास कर रहे हैं, इसके लिए बधाई।
    तिरंगा एक जबरदस्त हीरो है और आप उसे अच्छे तरीक़े से निखारेंगे ये आशा है।
    अभय, तिरंगा भारत के कशमकश की कहानी है तो मजा आएगा।
    कहानी की शुरुआत में ही मानसी मर गयी है, लेकिन कैसे मरी? किसने मारी? ये देखना लाजवाब होगा।
    शिखा और आंटी लैब से कैसी मदद दे पाएंगे अभय को देखना होगा।
    X स्क्वाड का क्या रोल है इन सब में देखना होगा।
    ये ब्लैक मास्क धारी कौन है?
    क्या ये कफन है? क्या ये तिरंगा का कोई पुराना दुश्मन है?
    और xsquad क्यों मदद कर रहा है इसकी?
    तिरंगा अभय है और बहुत से ये लोग जान रहे हैं इस बात को, तो अब कैसे बचायेगा ये राज बाकी दुनिया से और क्या करेगा तिरंगा?
    उफ्फ सवाल कई हैं और जवाब बस एक दूसरा पार्ट। बहुत अच्छा सस्पेंस है।
    लेखन की बात करें तो पहली बार लिखा है तो awesome लिखा है।
    कहानी बुलेट ट्रेन की रफ्तार पर है।
    Scene थोड़ा अच्छे से एक्सप्लेन किये जा सकते हैं।
    संवाद भी काफी दिए जा सकते हैं।
    वैसे शुरुआत में इतना अच्छा लिखा है तो आगे तो गजब होगा ही।
    आल द बेस्ट भाई।

    1. Dev bhai thanks for such a Pradip style review… Wo mask dhari kaun hai ye janna sabke liye mazedaar hoga..Aur mujhe actually length ka idea nahi tha itna to koshish karunga optimum amount of dialogue delivery bhi karu taki readers bhi bore na ho aur story ka maza bhi bana rahe…

  2. Bahut hi umdaa likha hai aapne dhanyawaad aapka aisi kahaniya hamare liye lane ke liye CH ek achha platform ha sab story writers ke liye..

    1. Ji gaurav ji bahut bahut dhanyawad… Ye mera pahla prayas hai.. Par comic haveli me ek se ek behatreen lekhak hain aur unki gajab kahaniya bhi hain.. Asha karta hu aaplogo ki nazro me khara utrunga…

  3. गज्जब।। सर्वप्रथम तो बड़े भाई प्रदीप जी को छोटे भाई की ओर से शुभकामनाएं और ढेरों बधाइयां। आपने भी लेखन के मुहल्ले में अपना कदम रख दिया है। देखकर बहुत अच्छा लगा।
    बहुत दिन हो गए थे……..न ही Rc तिरंगा पर उतना ध्यान दे रही थी और न ही कोई और। बल्कि हम सब भी नागराज ध्रुव तथा डोगा के पीछे लगे हुए होते हैं।पाठक तो हैं ही। उन्हें जो मिलेगा पढ़ेंगे। पर , कुछ ज़बरदस्त तिरंगा फैन्स भी हैं जिनके लिए ये कहानी लिखी गई। और गज्जब बात तो ये है कि तिरंगा के इस ज़बरदस्त शुरुआत करवाने वाले प्रदीप बर्नवाल जी खुद ध्रुव के फैन हैं। पर इन्होंने तिरंगा के साथ जो इंसाफ किया है ऐसा Rc भी न कर पाए।

    एक जबरदस्त कहानी की शुरुआत हो चुकी है और कई तिरंगा फैन्स के लिए ये खुशी की बात होगी।

    कहानी की शुरुआत अच्छी है।
    बस सुधार के लिए ये बात कहना चाहूंगा। ज़्यादा हड़बड़ी न करें । ऐसी कहानियां जितनी धीरे आगे बढ़ती हैं रोमांच उतना ही बढ़ता जाता है। उदाहरण के तौर पर आकाश भाई की स्टोरी Death pattern ही ले लीजिए।
    तो बस यही कहना चाहूंगा कि संवाद और दृश्यों को जीतना ज़्यादा अच्छे से लिख सकते हैं लिखिए। खासकर दृश्यों पर ध्यान दिया जाए तो और भी अच्छा होगा।
    बाकी कहानी एकदम फाडू है बॉस! देखना व्यूज़ छपर पहाड़ के आएंगे।
    बस अब अगले पार्ट का इंतज़ार है।
    इस कहानी को मेरी ओर से ।
    10 में से 9 नंबर।

    अगले पार्ट का इंतज़ार रहेगा।
    धन्यवाद। इतनी मस्त स्टोरी के लिए।

    1. Bahut bahut dhanyawad talha… Yaar tumlogo jaisa kaha se likh paunga… Likhte time yahi kahani lambi lag rahi thi aur abhi padh raha hu to actually chhoti lag rahi hai… Aage se dhyan rakhunga. Aur dialogues ko thoda interesting aur story ko thoda suspenseful banane ki koshis karunga.. Desh ka sabse bada detective tiranga… Uske sath insaaf to karna hi tha.. Ek bahut hi umda character nazro se ojhal ho raha tha aur isme khud RC ka bhi dosh tha aur pathako ka bhi.. Koshis yahi rahegi k kahani aur character k sath sahi insaaf kar pau..

    1. Thanks abhilash.. Yaar kuch damdar characters judne wale hain aur trust me tumlogo se jyada mujhe maza aa raha h aur romanchit ho raha hu main.. hopefully tumlogo ki aashao par khara utru

    1. We’ll make sure you become a comic reader after reading all these fantastic stories on this website… Thanks garima

  4. बहुत बढिया भाई। आज कितने दिनों बाद तिंरगा की स्टोरी पढ रहा हु।अगले भाग का इंतजार रहेगा।

  5. जबरदस्त कहानी जबरदस्त लेखन और जबरदस्त सस्पेंस प्रदीप भाई आप ने पहले ही प्रयास में कहर ढा दिया है और कैरेक्टर की बात करे तो तिरंगा जैसा कैरेक्टर लेकर आपने बहुत ही अच्छा किया इसमे जो पोटेंशियल है उसको RC तक नही भुना पाई अब ये देखना और भी अच्छा रहेगा कि आप इसे कैसे निभा पाते हैं।

    आगे के पार्ट्स के लिए अग्रिम शुभकामनाएं

    1. Thank you chandan bhai.. Tiranga ko select karne ka main reason yahi tha bhi k isme bahut potential hai but RC me last kuch comics k alawa isko wo jagah nhi mil payi.. Hopefully jyada pathak jud payenge is kirdar se

  6. Sabse pahle to Pradeep bhai ka ham lekhko ki is behya duniya me swagat hai. Ji sahi baat hai. Hamse bada behya koi nahi hota hai. Koi padhna chahe na padhna chahe ham padhwa ke hi dam lete hai.

    Ab aate hai kahani par. Pahle positive baaton par gaur dalenge. Kahani ki shuruaat jis dhang se ki uski me tareef karna chahunga. Bilkul suspense ke saath napi tuli shuruaat thi. Ham sab ko sochne par mazboor kar diya gaya ki aakhir aisa kya hua abhay ke saath. Uske baad ek aisi condition banai gayi ki Abhay bilkul hi buri awastha main hai. Uski poori duniya ulti ho chuki hai. Badhiyaan tareeka Hero ka human side dikhane ka. Uske baad rahasy banaya gaya ek ajnabi insaan ko lekar. Uski identity janne ki utsukta badh chuki hai.

    Ab aate hai un baaton par jahan sudhaar ki jarurat hai.

    Sabse pahle to ye kahna chahunga ki is bhaag ki lambai bahut hi jyada choti thi. Kahani kab shuru hui kab khatam hui pata hi nahi chala. Abhi thoda romanch banna aarambh hua tha ki kahani khatam. Ispar dhyaan dene ki jarurat hai. Doosri baat ye aapko apne shabdo ke chayan par bahut dhyaan dene ki jarurat. Akash Pathak ne bhi apni pahli kahani me yahi galti ki thi . Maine usko bhi ye baat batai thi. Aap ek jaise shabdo ka hi chayan kare hamesha. Agar aap shudhh hindi ke shbdo ke saath saath Hinglish ka bhi prayog karenge to padhne me mazaa nahi aati hai. Ya to aap Hinglish shabdo ka hi prayog kare ya shudhh hindi ke shabdo ka. Teesri baat ye ki aapko drishyo ko thoda explain karke likhna chahiye. Isse kya hota hai ki paathk apne aap ko us kahani ka hissa maan paata hai aur padhne ka mazaa duguna ho jaata hai. Chauthi baat ye ki koshish kariyega ki Tiranga ke dialogue thode aur jyada prabhavi lage.

    Bas. Abhi ke liye itna hi. Baaki ye aapka pahla prayaas hai to ye sab baatein bhool kar kahna chahunga ki ek prabhavi shuruaat ki hai aapne.

    1. Tripathi ji meri kahani se jyada to aapke review par reviews aane chahiye… Hahaha… Thanks a lot… Mujhe actually likhte time ye part hi lamba lag raha tha but padhne k bad sach me ye chhota lag raha h… Main koshis karoonga k kahani ko boring banaye bina drishyon ko thoda describe karu… Aur aapka bahut bahut dhanyawad bhai sahab.. Gaaliyan nhi padi usi me khush hu main to.. Dialogues mujhe thode thik rakhne padenge aur conversation prabhavi ye sach me lag raha h… Kahani main hindi me hi rakhunga aur english words main sirf wahi use karne ki koshis kar raha tha jaha par hindi word boring ho jati.. But shayd ye experiment sahi nhi h… I’ll try better… Ajnabi aap sabke hosh udane wala h to uske liye taiyar rahiye aap… Very soon I’ll be getting second review of yours

  7. Sbse pehle to badhaayi ho … Aap lekhak bn gye

    Ab baat krte h story ki ….
    Aapne tiranga ko chuna jo wakayi kaabil-e-taarif hai…
    Story bahot hi badiya shuru huyi h ….
    I hope ese hi suspense aage dekhne ko milenge ….
    Tiranga ki history jaane ko betaab hun…
    Uski life k baare mein koi khaas info nhi h kisi k paas….
    I hope ki aap is character k saath nyaay krenge …
    Vese to SCD ka fan hn… Pr is jagh uska cameo utna pasand nhi aaya mujhe ……
    Dusri baat ki yh story bahot hi zyada choti lagi mujhe ….
    Thodi aur lambi ho skti thi…

    Good luck for the next part. Gurudev.

    1. Thank you chamgadad manush.. Sabse pahli baat SCD ka koi role nahi hai story me… Wo bas tiranga ko sirf ye ehsaas dilane k liye tha k family k upar dhamki k dar se koi superhero banna nahi chhodta… Jo ki maine dusre comments me clarify kiya hai. Tiranga k sath insaaf karna wakai kathin hai kyun ki wah khud hi insaaf ka yoddha hai.. part chhota bana ye mujhe khud feel ho raha h.. Next part aisa nahi hoga.. suspense bahut mazedaar hai aur main parte dar parte kholne wala hoon.. tiranga k atit k kuch scenes dekhne milenge is kahani me to shayad kafi help ho jayega is character k bare me janne me.
      Thanks for such review.. I’ll try better

  8. बहुत बढ़िया प्रदीप भाई।
    शानदार कहानी जो कि अगले भाग में क्या होगा ये जानने को विवश करती है।
    तिरंगा को लेकर कहानी लिखना वाकई एक बेहतरीन आईडिया है।
    पर मैं चाहता हूँ कि तिरंगा की प्रेम कहानी भी इसमें दिखाई जाये।
    बात करें कमियों की तो सबने उस बारे में बता ही दिया है।
    बस मुझे एक बात अजीब लगी इस कहानी में ,ध्रुव का होना।
    तिरंगा एक बहुत दृढ़ इच्छा शक्ति वाला इंसान है,अपने जीवन मे उसने भी बहुत कुछ खोया है। बिना ध्रुव के भी वो अपने आप को संभाल सकता था या परमाणु से भी बात कर सकता था जो कि दिल्ली में ही रहता है
    बाकी अगले भागो के लिए शुभकामनाएं।

    1. Tiranga ki prem kahani? Bahut tough hai ye to.. Mansi ko maar diya maine to…. Aur dhruv mera favorite character h but usko bhi is chiz ka ehsaas uske pita ne karaya tha k apno ko khone k dar se crime fighting nhi chhod sakte… Reference gupt comics.. To tiranga ko bhi pad hi sakti h plus use ye inform brahmand rakshak headquarters me karna tha to wahi gya tha… Parmanu se wo sirf Delhi me mil sakta tha… Dhruv wala example badhiya tha isliye use kiya maine uska aur koi role nhi h.. Aur baki chize main koshis karunga pathak ji manage karne ki.. Debut me thodi chhut to mil hi sakti h

  9. ऐसी कहानी मैने आजतक नही पढ़ी…. किसी नये लेखक की !!
    शानदार शुरुआत प्रदीप जी
    आगे के लिये शुभकामनाएं

    1. Aawara bhai aapke is comment ne to mujhe ful kar kuppa kar diya hai.. Hopefully aage k part me insaaf kar pau.. Bahut bahut dhanyawad

  10. To ab hamaare bhai sahab writer bn gye hain…aur hmein force bhi kiya gaya hai acha review likhne ke liye to ye lijiye..:p
    Story ka concept behtareen hai, story reality ke kaafi kareeb hai. Ek superhero ka is tarah se toot jaana, aur toot kar fir vaapas aana ye vo cheezein hain jo ise kids fiction se upar uthaati hain. RC ke narration style me hi ise likha gya hai, dehi ki famous jaghon ka narration sb acha hai. second part me chaahe kuch bhi ho par is concept ko sochne bhr ke liye hi badhaai.
    PS: ye sb achi baatein isiliye likh rha hu ki pradeep apni comics nikaale to usme artist ki naukri mujhe mil jaaye :p

    1. Hahaha bhai sari pole tumne yahi khol di meri to… P.S. artist to tu hi banega
      Bina pay kiye kaam nikalwaunga
      Thanks for the review vikas
      Next part padho waha kafi chize niklegi bahar
      Ye to bas shuruwat h

  11. शानदार जबरदस्त जिंदाबाद।
    तीसरी कड़ी की बेसब्री से प्रतीक्षा हैं|

  12. Bht hi acha likha hai aapne pradip ji… lag nhi rha ye apki pehli koshish hai… ap to majhe hue writer pratit hote hai.. all the best sir..

    1. Bhai aapka bahut bahut dhanyawad. Parantu wo legend hain unse tulna karna galat h
      Ha main koshis karunga aur bhi achha likhne ka

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