Apradh Unmoolan Ke Baad Part 1

अपराध उन्मूलन के बाद 

आधार खंड 
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आरम्भ
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दोस्तों कुछ समय पूर्व पूरे हिन्दुस्तान में अपराधिक गतिविधियाँ कम होनी शुरू हो गयीं थीं और अब धीरे धीरे इतनी कम हो चुकी हैं की कहीं भी कोई भी अपराध होता नही दिखता। इक्का दुक्का जो छोटी मोटी चोरिया वगैरह होते हैं उन्हें पुलिस हैंडल कर लेती है लेकिन अब यह भी धीरे धीरे कम हो रहे हैं। कारण क्या है यह तो किसी को नही पता लेकिन हिन्दुस्तान की जनता अब खुश है, अब किसी को कोई परेशानी नही है सब आपस में मिल जुल कर ख़ुशी से रह रहे हैं अब किसी को किसी भी प्रकार के रक्षक की ज़रूरत नही है। चाहे वो पुलिस हो और चाहे ब्रह्माण्ड रक्षक । ना ही महानगर में किसी को नागराज की जरूरत है, न ही राजनगर में किसी को ध्रुव और इंस्पेक्टर स्टील की, न मुंबई में मुँबई को अपने बाप की मेरा मतलब डोगा की ज़रूरत है, न दिल्ली में परमाणु,शक्ति,तिरंगा की किसी को ज़रूरत है और ना ही रूपनगर में किसी को ज़िंदा मुर्दा एन्थोनी की। यहां तक की असम के जंगलों में अब किसी को भेड़िया और कोबी की भी कोई ज़रूरत नही है। सभी ब्रह्माण्ड रक्षक अब एकदम नल्ले हो चुके हैं और अपने अपने घरों में बैठे बोर हो रहे हैं। आइये उनका हाल चाल जानते हैं।


आइये सबसे पहले आपको ले चलता हूँ नागराज के पास।

समय : 1:10 pm
स्थान : महानगर

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नागराज अपने घर में मेज के सामने बैठा हुआ है मेज पर दूध का गिलास रखा है नागराज चम्मच से एक चम्मच चीनी निकाल कर उसमे मिलाता है और चलाना शुरू कर देता है।
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नागराज : 💭😡😡गुर्रर्र गुर्रर्र साला पता नही क्या हो गया है , अपराध और अपराधी नाम की तो चीज़ ही खत्म हो गयी है, कई दिनों से घर में बैठा रोटियां तोड़ रहा हूँ पहले आये दिन कोई न कोई कलमुंहा टपक पड़ता था , और उनसे लड़कर अपनी बोरियत तो दूर होती थी😧 पर अब तो इंतज़ार कर रहा हूँ की कब कोई सुपर विलेन टपक पड़े और अपना टाइम पास हो या फिर वो नागपाशा का बच्चा फिर से कोई षड्यंत्र बनाये और हम सभी ब्रम्हांड रक्षक को उसमे फंसाये मगर साला वो भी लगता है कहीं मरा पड़ा है। 😡गुर्रर्रर्रर्र पता नही बाकियों का क्या हाल होगा। 😭बुहुहु, उधर वो विसर्पी रोज़ रोज़ ख़त भेजती है की कालदूत मेरी शादी किसी और से करना चाहते हैं,उनका कहना है की नागराज तुमसे प्रेम 💕नही करता है भारती से करता है , अगर तुम चाहते हो की मेरी शादी किसी और से ना हो तो आकर कालदूत से मिल कर कह दो की तुम मुझसे प्यार करते हो और मुझसे ही शादी करोगे। लेकिन जब मैं घर से बाहर निकलता हूँ नागद्वीप जाने के लिए तो भारती सवाल दाग देती है। कहाँ जा रहे हो? अब तुम्हे घर से बाहर निकलने की ज़रूरत नही है अब कोई अपराध नही घट रहा है। कभी बहाना बनाता हूँ की घूमने फिरने जा रहा हूँ तो कहती है मैं भी चलूँगी। अब बताओ उसे लेकर मैं नागद्वीप कैसे जाऊँगा। गुर्रर्रर्रर्र ज़िन्दगी एकदम झंड हो गयी है। एक तरफ कुंआ है तो दूसरी तरफ खाई है, और जो भी इस चक्कर में पड़ा है उसने अपनी जान गंवायी है। बुहुहुह😭💭

भाइयों तो नागराज जी का यह हाल है, अब आईये चलते हैं ध्रुव जी का हाल चाल जानने

समय : 2 : 30 pm
स्थान : राजनगर , राजन मेहरा का घर।

घर के अंदर=
रजनी : अरी ओ श्वेता तेरा भैया कहाँ है ? खाना वाना नही खाना है क्या 2 : 30 बज रहे हैं ।

श्वेता : (अपने कमरे में से) मम्मी मुझे नही पता, भैया सुबह से ही गायब हैं ।

रजनी : हे भगवान । कहाँ रहता है यह लड़का अब अपराध होने भी बंद हो गए हैं, अपना कमांडो हेडक्वार्टर भी उसने बंद कर दिया है फिर कहाँ रहता है, दिन भर!😮

श्वेता : किसी नुक्कड़ पर खड़ा होकर सिगरेट पी रहा होगा, आपका लाडला बेटा ।😁

रजनी : हे भगवान् सिगरेट कबसे पीने लगा वो ?

श्वेता : (सीढ़ियों से नीचे आते हुए) हीही मज़ाक कर रही हूँ मम्मी ।😂

रजनी : लेकिन वो रहता कहाँ है क्या करता है?😮

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तभी राजन मेहरा का प्रवेश होता है ।
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राजन मेहरा : लखैरा हो गया है तुम्हारा लौंडा 😠

रजनी : क्या बक रहे हो जी ।

राजन मेहरा : बक नही रहा हूँ अपनी आँखों से देखकर आ रहा हूँ । 😡

रजनी : क्या देखा आपने ?

राजन मेहरा : मैं अपनी जीप से घर की तरफ आ रहा था की तभी तेरे लाडले को देखा, बाइक से था और पीछे ऋचा बैठी हुई थी और वो भी चिपक कर, उन दोनों ने मुझे नही देखा पर मैने उन दोनों को देख लिया था।

रजनी : हे भगवान यानी दिन दिन भर वो ऋचा के साथ घूमता है, अरे लोग देखेंगे तो क्या कहेंगे, यह तो सिर्फ हम जानते हैं की वो उसकी दोस्त है, लेकिन बाहर वाले तो कुछ और ही समझेंगे न, पहले ही बाहर उसकी और नताशा की चर्चाएं होती रहती हैं।
आने दो आज उसे बताती हूँ।

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इधर ध्रुव अपनी बाइक एक फाइव स्टार होटल के सामने लाकर रोकता है।
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ध्रुव : (बाइक से उतरते हुए) ऋचा तुम्हारी ज़िद के आगे मैं हमेशा हार जाता हूँ , चलो अब अंदर।

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दोनों जाकर एक टेबल पर बैठ जाते हैं।
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ध्रुव : हाँ तो तुम क्या खाना पसन्द करोगी?

ऋचा : कुछ भी खिला दो खा लूँगी, बस शर्त यह है की अपने हाथों से खिलाना।

ध्रुव : मैं हाथ वाथ से नही खिलाऊंगा तुम को जो खाना है बोलो।

ऋचा : ok एक काम करो मेनू में जितनी भी चीजें हैं सब मंगा लो ।

ध्रुव : क्या ….. पागल हो क्या तुम इतना सब कुछ खा लोगी , पेट फट जायेगा।

ऋचा : फट जाने दो तुम्हे इससे क्या, जब तुम अपने हाथों से नही खिलाओगे तो मैं कुछ भी खाऊं।

ध्रुव : यार ऋचा मज़ाक मत करो ये मज़ाक का वक़्त नही है, फटाफट कुछ आर्डर करते हैं और खा कर निकल लेते हैं वरना अगर किसी ने हमें देख लिया तो कल के न्यूज़ पेपर में front page पर आएंगे ।

ऋचा : मैं मज़ाक कभी नही करती, तुम ही मेरी बातों को मज़ाक समझते हो।

ध्रुव : तुम चाहती क्या हो ?

ऋचा : अपने हाथों से कुछ भी खिलाओ या फिर…….

ध्रुव : यह नही हो सकता ऋचा बात को समझा करो।

ऋचा : क्यों नही हो सकता क्या तुम मुझसे प्यार नही करते हो ?

ध्रुव : 💭आईं….💭 ऋचा मैं तुमसे हमेशा कहता हूँ की मैं तुम्हे सिर्फ अपनी दोस्त मानता हूँ।

ऋचा : दोस्ती के बाद ही तो प्यार होता है ।

ध्रुव : लेकिन मुझे तुमसे प्यार व्यार नही है ।

ऋचा : यही बात मेरी आँखों में आँखें डाल कर कह दो ।

ध्रुव : (ऋचा की नज़रों से नज़रें मिलाते हुए) मुझे तुमसे प्यार……

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तभी ध्रुव की नज़र ऋचा के पीछे होटल के गेट पर जाती है ।
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ध्रुव : अरे बाप रे ….

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ध्रुव बगल वाली टेबल पर पड़ा न्यूज़ पेपर उठा कर उससे अपना मुंह छुपा लेता है।
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ऋचा : क्या हुआ ?अपना चेहरा क्यों छुपा रहे हो ?

ध्रुव : चुप रहो ऋचा , और अपने पीछे मत देखना ।

ऋचा : क्यों ?…..

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कहते हुए ऋचा पूरी पीछे घूम जाती है , पीछे नताशा एक टेबल पर बैठने जा रही होती है की तभी वो ऋचा को देख लेती।
ऋचा तुरंत ध्रुव की तरफ वापस पलट जाती है।
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ऋचा : अरे बाप रे ये तो नताशा है! यह यहाँ क्या करने आई है ?

ध्रुव : (पेपर के पीछे मुंह छुपाये हुए) भरने आई होगी, गुर्रर्र। लेकिन तुम क्यों डर रही हो , डरना तो मुझे चाहिए, और तुम्हे पीछे मुड़कर देखने के लिए किसने कहा था, कहीँ उसने तुम्हे देखा तो नही ?

ऋचा : शायद देख लिया है।

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तभी नताशा वहाँ आ जाती है ।
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नताशा : अरे ऋचा तुम यहाँ कैसे ।

ऋचा : यही तो मैं तो मैं तुमसे पूछने वाली थी ।

नताशा : वो मैं पास से ही गुज़र रही थी तो सोचा कुछ खा पी लूँ। इसलिए इधर चली आई।

ध्रुव : 💭 हुंह खबोड़ी , जब मैं कहता हूँ चलो कहीं कुछ खा पी आया जाए , तो कहती है मेरे पास टाइम नही है😠💭

नताशा : (ध्रव की तरफ इशारा करते हुए) 👉 यह कौन हैं जो अपना मुंह पेपर से छुपाये हुए हैं।

ऋचा : ओह ये….
ये मेरा दोस्त है इसे न्यूज़ पेपर पढ़ने का बहुत शौक है जब यह पेपर पढ़ रहा होता है तो आस पास क्या हो रहा है इसकी इसे कोई खबर नही होती।

नताशा : क्या ये पेपर उल्टा पकड़ कर पढ़ते हैं ? और यह न्यूज़ पेपर तो कल का है।

ध्रुव : 💭 अरे बाप रे मुझसे ऐसी गलती कैसे हो गयी💭

नताशा : रुको मैं अभी इन्हें आज का न्यूज़ पेपर देती हूँ , मेरे पर्स में रखा हुआ है।

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इससे पहले की ऋचा कुछ बोलती नताशा ने झट से अपने पर्स से न्यूज़ पेपर निकाला और ध्रुव के हाथ में थमा न्यूज़ पेपर खींच लिया ।
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नताशा : ध्रुव!……..
मुझे पहले ही शक था की तुम ही हो, धोखेबाज़ ….

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नताशा गुस्से में तुरन्त वहां से वापस पलट जाती है,ध्रुव उसके पीछे लपकता है।
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ध्रुव : नताशा रुको मेरी बात तो सुनो !

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ध्रुव नताशा के पीछे भागता है की तभी ऋचा उसका हाथ पकड़ लेती है।
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ऋचा : ध्रुव जाने दो उसे तुम मेरे साथ आओ ।

ध्रुव : ऋचा छोड़ो मेरा हाथ

ऋचा : नही छोड़ूंगी ।

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ध्रुव झटककर अपना हाथ छुड़ा लेता है
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ध्रुव : गुर्रर्रर्रर्र ऋचा की बच्ची सब तेरी वजह से हुआ है।

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कह कर ध्रुव तुरन्त नताशा के पीछे चला जाता है
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ऋचा : 💭 गुर्रर्रर्रर्र ध्रुव ने उस नताशा के लिए मुझसे इतनी बदतमीज़ी से बात की💭

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इधर ध्रुव
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ध्रुव : नताशा रुक जाओ मेरी बात तो सुन लो ।

नताशा : अब सुनने के लिए कुछ नही रह गया है ध्रुव , तुम धोखेबाज़ हो तुमने मेरे साथ धोखा किया है,गुर्रर्र।

ध्रुव : मेरा यकीन करो नताशा ऐसी कोई बात नही है।

नताशा : मुझे अब कुछ नही सुनना मैं जा रही हूँ तुमसे बहुत दूर , जाओ उस कलमुंही के साथ खुश रहो।

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नताशा अपनी स्कूटी स्टार्ट करती है और निकल लेती है , ध्रुव देखता रह जाता है
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ध्रुव : नताशा…नताशा रुको ! शिट्ट यार।

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तभी ध्रुव के कानो में bike स्टार्ट करने की आवाज़ आती है। घर्रर्र घर्रर्रर्र
ध्रुव पलट कर देखता है ऋचा बाइक स्टार्ट कर रही होती है।
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ध्रुव : ऋचा……

ऋचा : मत लो अपनी ज़बान से मेरा नाम , मैंने कभी सपने में भी नही सोचा था की तुम मुझसे ऐसे बात करोगे, आज से तुम्हारी मेरी दोस्ती ख़त्म।

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कहकर ऋचा बाइक स्टार्ट करती है और निकल लेती है
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ध्रुव : अरेरेरेरे , मेरी बाइक तो देती जाओ । शिट्ट , आज का दिन मेरे लिए बहुत ही खराब निकला , अब कैसे मनाऊंगा मैं इन दोनों को…..
नही मनाऊंगा भाड़ में जाएँ दोनों मैं तो चला घर पे दिन भर टीवी देखूंगा।

दोस्तों ध्रुव का हाल भी कुछ कुछ नागराज जैसा ही है, अब आइये चलते थोड़ी ही दूरी पर स्थित इंस्पेक्टर स्टील के पास

स्थान : राजनगर, डॉ अनीस राज़ निवास।
समय : 2 : 51

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स्टील अपने कमरे में बैठा अपनी बैटरी चार्ज कर रहा है |
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स्टील : गुर्रर्र क्या ज़िन्दगी हो गयी है दिन भर घर में पड़े रहो खुद को चार्ज करते रहो, अनीस भी नही है अपने काम से बाहर गया हुआ है, सलमा भी अपनी फ्रेंड की शादी में पेरिस गयी हुई है, और मैं साला यहाँ अकेला बैठ कर तेल पी रहा हूँ …..
लाइफ में बोरियत के अलावा और कुछ रह ही नही गया है , बुहुहुहुहु

दोस्तों स्टील का हाल भी बुरा है बेचारा अकेला अपने घर में बैठा बोर हो रहा है, अब आपको सीधे ले चलता हूँ दिल्ली के पुलिस स्टेशन में जहाँ ड्यूटी करता है , इंस्पेक्टर विनय उर्फ़ परमाणु

नोट : एक बात मैं आपको Clear कर दूं की डोगा की एन्ट्री सबसे आखिर में होगी, क्योंकि इस कहानी की शुरुआत डोगा से ही होती है। इसलिए डोगा को आखिर में दिखाना ज़रूरी है

स्थान : दिल्ली,पुलिस स्टेशन
समय : 3 : 10 PM

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इंस्पेक्टर विनय अपनी चेयर पर बैठा जम्हाई ले रहा है
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विनय : 💭अरे यार हम पुलिस वालों की बोरियत तो कुछ ज़्यादा ही बढ़ गयी है , कोई केस ही नही आता है , बस दिन भर थांने में बैठे बैठे अंडे देते हैं💭

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तभी एक हवलदार की आवाज़ गूंजती है
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हवलदार : (विनय से) साहब यह देखिये आज के न्यूज़ पेपर में क्या दिया है , दिया है , सरकार देशभर में स्थित तमाम पुलिस स्टेशन बंद करवाने वाली है क्योंकी अब किसी को पुलिस की कोई ज़रूरत नही रह गयी है।

विनय : क्या!……… तो हम सब क्या करेंगे? सड़कों पर छोले बेचेंगे क्या गुर्रर्रर। अपना पेट कैसे पालेंगे

हवलदार : अरे नही इसमें यह भी दिया है की पुलिस कर्मियों को उनकी तनख्वाहें मिलती रहेंगी…

विनय : हाँ यह हुई न बात ।

हवलदार : अरे पहले पूरी बात तो सुनिए साहब, तनख्वाह मिलेगी मगर जितनी इस वक़्त मिल रही हैं उसकी आधी ।

विनय : क्या…! गुर्रर्रर यह क्या बकवास है! सरकार पागल हो गयी है क्या?

हवलदार : साहब आपको तो फिर भी अच्छा खासा तनख्वाह मिलेगा, लेकिन हमार का होइ, भैं वैं वैं वैं ।

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उस हवलदार के रोने की आवाज़ सुनकर सारे पुलिसकर्मी वहां इकट्ठा हो जाते हैं
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एक पुलिस कर्मी : का हुआ , पैंट दे विच्च चूहा बड़ गवा है का, काहे रो रहे हो?

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तभी दूसरा पुलिस कर्मी बोल उठता है
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दूसरा पुलिसकर्मी : टट्टी अटक गईल बा का?

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सारे पुलिसकर्मी उसकी बात पर हंसने लगते है
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विनय : शटअप…!!

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सारे बन्दे सन्न मार लेते हैं
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विनय : ये न्यूज़ पेपर पढ़ लो तुम सबकी भी टट्टी अटक जायेगी, हीहीही, गुर्रर्रर्रर्र।

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और फिर उस खबर को पढ़ने के बाद सबके कुत्ते फेल  हो गए
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हवलदार : बुहुहुहु इब हमारा क्या होगा रे भैय्या बुहुहुहु

विनय : अबे तुम लोग का छोड़ो, मेरा क्या होगा। (💭 कमबख्त अब तो और बोर होऊंगा,घर में तो मैं रहना ही नही चाहता क्योंकि जब भी घर में रहता हूँ वो क्षिप्रा की बच्ची आ जाती हैं, कभी मूवी की टिकट लेकर तो कभी क्रिकेट के तो कभी कुछ तो कभी कुछ, ऊपर से पकर पकर करके मेरा दिमाग चाट डालती है बुहुहुहु, शीना के पास तो इस वक़्त जाने लायक नही कमबख्त इस समय उसके ऊपर भूत सवार है मेरी असली शक्ल देखने का, इसलिए अभी उससे मिलना खतरे से खाली नही बुहुहुहुहुहु। अब तो कहीं underground रहना पड़ेगा जब तक सारी समस्या का हल न मिल जाए। बुहुहु💭)

परमाणु का भी हाल आपने देख लिया, आइये अब चलते हैं यहाँ से कुछ ही दूरी पर तिरंगा के पास

नोट : इस स्टोरी में शक्ति का कोई रोल नही है , क्योंकि शक्ति इस वक़्त अपने असली रूप यानि चंदा के रूप में है,और वो खुश है उसे कोई बोरियत परेशानी नही है, हीहीही।

स्थान : अरे यार बार बार स्थान जानकर क्या करोगे।
समय : हाँ समय बता दे रहा हूँ । 4 : 30

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तिरंगा , अपने असली रूप यानि भारत के रूप में अपने रूम में सोया हुआ है, और तभी सोये हुए ही वो अपने बाएं गाल पर चांटा मारता है, चट्ट…..
फिर थोड़ी देर बाद दायें गाल पर, चट्ट।
कुछ ही देर बाद माथे पर,चट्ट।
फिर बाएं बाजु पर,चट्ट।
फिर दायें बाजु पर,चट्ट।
और फिर अचानक उठ कर बैठ जाता है।
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भारत : गुर्रर्र गुर्रर्र कमबख्त, मच्छरों ने परेशान कर रखा है, डंक घुसा घुसा कर रोम छिद्रों को 2×2 कर दिया है, और साला चूहों ने भी मच्छरदानी काट डाली है, लोग अपने घर में बीवी और बच्चों से परेशान रहते हैं, मैं साला चूहों और मच्छरों से परेशान हूँ, जेब भी खाली है कई दिनों से कोई केस भी हाथ नही लगा है, आल आउट खरीदने का भी पैसा नही है, गुर्रर्रर्रर्र बुहुहुहु।

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भारत उठकर फ्रीज़ के पास जाता है और फ्रीज़ खोल कर पानी निकालता है
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भारत : भैं भैं भैं भैं …… कमबख्त फ्रीज़ भी खराब पड़ी है, पैसे नही हैं बनवाने के लिए, भैं……वैं……

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भारत उर्फ़ तिरंगा, रोता हुआ छत पर आकर बैठ जाता है,
अचानक उसे आसमान में सुरक्षा चक्र रोशन होता हुआ दिखता है
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भारत : आएं….. आज सुरक्षा चक्र रौशन करने की नोबत कैसे आ गयी कमिश्नर साहब को…
चल के देखता हूँ ।

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और फिर भारत तिरंगा बनकर रवाना हो जाता है कमिश्नर के पास….
कुछ ही देर में वो वहां पहुँच जाता है
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तिरंगा : और बताइये कमिश्नर साहब कोई प्रॉब्लम है।

कमिश्नर : नही तो!

तिरंगा : तो फिर आपने सुरक्षा चक्र क्यों रौशन किया ?

कमिश्नर : सुरक्षा चक्र? ओह…..ओह.. वो दरअसल बात यह है की वो मैंने नही मेरे नाती राजा ने गलती से उसे ऑन कर दिया था, हेहेहे।

तिरंगा : (💭गुर्रर्रर्रर्र मैं साला गच्च हो गया था की अब कोई केस मिलेगा और अपना टाइम पास होगा तिरंगा के रूप में ही सही💭)

कमिश्नर : क्या हुआ तिरंगा क्या सोच रहे हो ?😕

तिरंगा : आ… कुछ नही, क्या आपके पास 500 रुपीज़ हैं ।😂

कमिशनर : हाँ हाँ… हैं क्या हुआ चाहिए क्या ।☺

तिरंगा : जी…. वो क्या है की मेरी मच्छरदानी चूहों ने कुतर डाली है, नयी लेनी है 😂।

कमिश्नर : हाँ हाँ लो लो..☺

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कहते हुए कमिशनर साहब ने 500 की एक नोट पकड़ा दी तिरंगा को
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तिरंगा : थैंक यू कमिश्नर साहब, अब सबसे पहले जाकर मैं एक मच्छर दानी खरीदूंगा और पैसे बचेंगे तो कारगोली भी खरीदनी है चूहे मारने के लिए।😂

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कहकर तिरंगा उड़ चलता है, मेरा मतलब लटक चलता है। हीही। 😁
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तिरंगा : अच्छा कमिशनर साहब चलता हूँ, ज़िंदा रहा तो आपके पैसे लौटा दूंगा, अगले जनम में ।😁

कमिशनर : अरे अरे अरे😂

दोस्तों तिरंगा से भी आपकी मुक्कालात मेरा मतलब मुलाकात हो गयी अब आइये चलते हैं कोबी के पास, असम के जंगलों में

स्थान : असम का जंगल
समय : 5 : 30

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कोबी अपनी गुफा में लेटा हुआ है, और कुछ सोच रहा है, जेन के बारे में ही सोच रहा होगा और क्या😜
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कोबी : (💭 गुर्रर्रर्रर्र ऊ जेन की बच्ची अपने पति को छोड़कर उस छीछोड़े भेड़ियावा के साथ रहा करत ही हरदम, और उसका पति अड़थात मैं इंहा ई गुफा में लेट के अंडा देत हूँ, इस भेड़िया का तो एक न एक दिन गदा मारकर सर ज़रूर फाड़ूंगा…..😣
बुहुहु बहुते जोर की भूक लगी है का करू गुफा से बाहर निकलन का मन नही कर रिया है, भेड़िया फौज को बुलाकर खरगोश पकड़वाता हूँ,😀
चले आओ चले आओ मेरी भेड़िया फौज के कुत्ते कमीने सिपाहियों…..
चले आओ चले आओ……

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थोड़ी देर बाद ।
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कोबी : आएं अभी तक कोनो नई आवा ।

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कोबी फिरसे आवाज़ लगाता है
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कोबी : चले चले आओ चले आओ..मेरी भेड़िया फौज के नामुराद गधों चले आओ…

आयीं कौनो आ क्यों नही रहे हैं, गुर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्र😠😡😡😡

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कोबी गुस्से में बाहर निकल आता है, और भेड़ियों को ढूँढने लगता है, कि तभी उसे जेन की आवाज़ सुनाई देती है
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जेन : हा हा छोड़ों भेड़िया तुम भी न..

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कोबी का तो खून उबल गया देखकर, आँखों में भी खून उतर आया….
हीहीही 😁बात ही कुछ ऐसी थी
वहां से कुछ ही दूरी पर एक पेड़ के नीचे भेड़िया और जेन बैठे थें।
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कोबी : (💭गुर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्र 😡अपने पति को छोड़कर गैर मर्द के साथ रोमांस कर रही है बेवफा जेन, आज नही छोड़ूंगा इन दोनों को ही नही छोड़ूंगा💭।)

नोट : जब कोबी गुस्से में होता है तो उसके मुंह से हर एक वाक्य शुद्ध निकलने लगता है, हीही😁 ।

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कोबी उन दोनों के पास पहुँच जाता है जेन हड़बड़ा कर उठ जाती है।
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भेड़िया : क्यों बे तुझे कुछ तमीज़ है भी की नही, आवाज़ देकर आना चाहिए न।😠

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कोबी का गुस्सा और भड़क जाता है
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कोबी : आज मैं तुझे नही छोड़ूंगा भेड़िये।
हे भेड़िया देवता मदद।

जेन : कोबी रुक जाओ मेरी बात सुनो

कोबी : तू हट बीच में से मक्कार औरत !😠

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कोबी के हाथ में उसकी गदा आ जाती है, और फिर एक बहुत ही भयानक युद्ध शुरू हो जाता है
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दोस्तों इन दोनों का युद्ध तो अब जल्दी खत्म होगा नही तो आइये तब तक जो बाकी है उसका हाल चाल जान लेते हैं, जब इन दोनों के युद्ध का परिणाम निकल जायेगा तब देखेंगे। अब कौन बचा है कौन बचा है… हाँ रूपनगर का रक्षक बचा है अभी

स्थान : रूपनगर का कब्रिस्तान
समय : अर्रे यार्रर समय जानकर क्या करोगे समय तो वैसे भी खराब चल रहा है ब्रह्माण्ड रक्षकों, बस इतना जान लो रात हो चुकी है।

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अरे एन्थोनी तो पहले से ही बाहर आकर अपनी कब्र पर बैठा हुआ है, अरे ये उकड़ू क्यों बैठा है कहीं वो तो नही न कर रहा है?
नही नही अपनी कब्र पर कोई वो थोड़ी न करता है, हीही।
आइए देखते हैं क्या कर रहे हैं मिस्टर मुर्दा
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एन्थोनी : प्रिंस तू कर्कशाया क्यों, अब तो न जाने कई दिन हो गए अपराधिक गतिविधियाँ बंद हो गयीं हैं, मुझे याद भी नही है आखिरी बार मैने किसकी पुंगी बजाई थी।😕

प्रिन्स : कांव  कांव बोर हो रहा था एन्थोनी…°

एन्थोनी : इसीलिए मुझे भी जगा दिया ताकि मैं भी बोर होऊं😂 ।

प्रिन्स : कांव  कांव °हीहीही°😁

एन्थोनी : वैसे बोर तो मैं अपनी कब्र में भी हो रहा था, हीहीही।😁😁

प्रिन्स : कांव  कांव °आओ कहीं टहल कर आते हैं°

एन्थोनी : हाँ आओ चलो मारिया के घर का एक चक्कर लगा आते हैं, उसके घर में सबकुछ ठीकठाक है या नहीं ।

दोस्तों..जैसा की आपलोग जान ही गएँ हैं की एन्थोनी का भी वही हाल है जो बाकियों का है, अब बचे हैं डोगा जी तो उनका हालचाल हम अगले पार्ट में जानेंगे, तो अब आप से लेता हूं विदा…और हाँ कमेंट ज़रूर कीजियेगा वरना दूसरा पार्ट मैं नही पोस्ट करने का, हीहीही।😁😁

क्रमशः

Apradh Unmoolan Ke Baad Part 2

अपराध उन्मूलन के बाद  भाग – 2  ●●●●●●●●●●●●●●● सूरज को मिली चिट्ठी✉✉✉✉✉✉●●●●●●●●●●●●●●● ************* रात का गहरा अन्धेरा छाया हुआ है पूरी सड़क पर सन्नाटा बिखरा हुआ है हर कोई अपने …

Written By – Talha Faran for Comic Haveli

 

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11 Comments on “Apradh Unmoolan Ke Baad Part 1”

  1. Bhai maza aa gaya
    Bahut time bad itni mazedaar kahani
    Aapki sari kahaniya mazedaar rahti hain but ye thodi aur bhi high level ki hai
    Lagta h turant hi dusra part mil jaye
    Hihihi

  2. bas beech majhdhaar me rah gaye agla part jaldi aa jaye toh maja aa jaaye
    lekin ab dharu ka kya hoga soch sochkar hansi aa rahi hai.

  3. भाई कहानी तो घनी मस्त लागे से इब इन्तजार ना होवे । रे छोरा फटाफट अगला पार्ट ले के आओ

  4. ek achi starting….. bahot badiya attempt but socha tha ki doga ki entry ho jaayegi pr agle part mein hogi….. koi nhi isme b maza aaya… ab dekhna h ki Doga kisko maarta h pin khich k hehehe…..

  5. Bahut behtareen shuruaat ki hai aapne kahani ki. Plot to achha chuna hi hai ki. Superheros ke nallepan se accha kya comedy topic milega. Ek ek Superhero ke nallepan ka aapne acche se byora diya hai. Steel ke saath nainsaafi jarur hui hai. . Sabse jyada maza lekin Tiranga ke nallepan aur gareebi ko dekh kar aaya. Pata nahi kyun magar usko gareeb aur fatehaal dekhne me sabse jyada mazaa aata hai jo ko is kahani me bharpoor aaya. Aapne uski gareebi ko describe bhi achhe se kiya. Padhkar bahut mazaa aaya. Khaaskar machhar maarne wala drishy padhkar. Ab Doga ka haal janne ki utsukta hai. Aage padhte hai.

  6. Shayed 3ri baar padh rha hu ye part…
    Lekin abhi bhi mazedar he apki kahani…
    Har baar ki tarah ye bhi bahut hi acchi comedy ki he apne talha bhai……
    Apke comedy me galati to koi nhi nikal sakta…
    Or apke punch line har baar gajab hote he..

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