Apradh Unmoolan Ke Baad Part 2

अपराध उन्मूलन के बाद 

भाग – 2

 ●●●●●●●●●●●●●●● सूरज को मिली चिट्ठी✉✉✉✉✉✉●●●●●●●●●●●●●●●

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रात का गहरा अन्धेरा छाया हुआ है पूरी सड़क पर सन्नाटा बिखरा हुआ है हर कोई अपने अपने घरों में रजाइयों में मुंह ढके सोया हुआ है, और बाहर सड़क पर किसी की भी रूह फना कर देना वाला सन्नाटा फैला है , रौशनी के नाम पर केवल एक खम्बा है जिसपर बल्ब लगा हुआ है, और उसकी रौशनी सिर्फ उस खम्बे के इर्द गिर्द ही फैली हुई है,कि तभी उस अँधेरी सड़क पर एक साया दिखता है जो बहुत ही धीरे धीरे चलता हुआ अपनी मंज़िल की तरफ जा रहा है… उसके कंधे पर शायद कोई पक्षी 🐦बैठा हुआ है …….
यह शख्स है कौन??
ओ… …..यह तो एन्थोनी है।
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एन्थोनी : बुहुहु 😰प्रिंस मुझे बहुत ज़्यादा डर लग रहा है, बाप रे कितना अँधेरा है यहां।

प्रिंस : काँव काँव °एन्थोनी तुम टेलीपोर्ट हो कर क्यों नहीं चल रहे हो°

एन्थोनी : यार प्रिंस लगता है तेरा दिमाग भी खराब हो गया है , अरे जब मुझे कुछ दिखेगा तब तो टेलीपोर्ट होऊंगा न… एक तो साला इतना अन्धेरा है ऊपर से ये कोहरा…. कुछ दिख ही नही रहा है, यार प्रिन्स मैं कह रहा हूँ इतनी रात को मारिया के घर जाना सही होगा!, चलो वापस चलते हैं बुहुहु 😰मुझे डर लग रहा है कहीं किसी भूत💀 वूत से टक्कर न हो जाए।

प्रिंस : काँव काँव काँव ° तो लड़ लियो उसी से हीही°

एन्थोनी : भूत से….! न बाबा न , मेरी बहुत ज़्यादा फटती है भूतों से 😟।

प्रिंस : काँव काँव °लेकिन फिर तब तुम अपराध उन्मूलन के लिए रातों को कैसे निकलते थे?°

एन्थोनी : अरे तब मेरे अंदर जूनून होता था, अपराध को उखाड़ फेंकने का जुनून..😡.. अपराधियों की नाक में धनिया बो देने का जुनून और तब मुझे इस जुनून के आगे कुछ नही दिखता था, मैं हर रोज़ यही सोच कर निकलता की आज मेरी अपराध के खिलाफ बड़ी जंग है मुझे अपराध को, समाज में फ़ैल रहे अपराध के कीड़ों को ख़त्म करना है। और इसी जुनून के साथ मैं रोज़ निकलता था अपनी कब्र से बाहर और तब मेरे अंदर किसी भी चीज़ का डर नही होता था, बहूहू लेकिन जबसे यह अपराध और अपराध के कीड़े ख़त्म हुए हैं तबसे मेरे अंदर का जुनून भी ख़त्म हो गया है, क्योंकि अब तो अपराध ही नही रहा तो फिर उसे ख़त्म करने का जुनून कैसे रहेगा, और जबसे जुनून ख़त्म हुआ है तबसे मेरे अंदर के डर ने ज़ोर पकड़ लिया है…😥
भूतों से तो मुझे पहले भी डर लगता था पर तब मैं इसपर ध्यान नही देता था, पर अब जब मैं रातों को निकलता हूँ तो… न चाहते हुए भी मेरे मन में भूतों का ख्याल ही आता है, बुहुहुहु😰😰 किट्ट किट्ट।

प्रिंस : काँव काँव काँव °डरो मत एन्थोनी मैं हूँ न तुम्हारे साथ, और ये देखो हम मारिया के घर के करीब आ चुके हैं °…।
काँव काँव °आओ देखते हैं क्या हाल है उन सबका°

एन्थोनी : प्रिंस तुझे तो मारिया और किंग की चिंता मुझसे भी ज़्यादा रहती है।😊

प्रिंस : काँव काँव °क्यों नही होगा आखिर वो तुम्हारी बेटी है और उसका बेटा तुम्हारा नाती है, काँव काँव °और चूंकि मै तुम्हारा दोस्त हूँ इस नाते तुम्हारी बेटी मेरी भी बेटी है और तुम्हारा नाती मेरा भी नाती है हीहीही°😊

एन्थोनी : वाह बेटा….. तू तो फ्री में बाप और नाना दोनों बन गया।😁

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एन्थोनी और प्रिंस कुछ ही देर में मारिया के घर के सामने होते हैं।
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एन्थोनी : बहुत दिनों बाद आया हूँ आज मैं अपनी बेटी के घर ।

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दोनों भीतर प्रवेश कर जाते हैं ,
अंदर घर में सन्नाटा फैला हुआ था लाईटे बुझी हुई थी, सिर्फ उस रूम की लाइट जल रही थी जिसमे मारिया और किंग सोये हुए थे शायद मारिया लाइट ऑफ करना भूल गयी थी, एंथोनी खिड़की से टेलीपोर्ट होकर रूम में अंदर घुस जाता है पीछे से प्रिन्स भी प्रवेश करता है,
वो दोनों जाकर थोड़ी ही दूर रखी टेबल के पास खड़े हो जाते हैं , टेबल पर कॉमिक्स रखी होती हैं।
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प्रिंस : काँव °अरे वाह कॉमिक बुक्स°😃

एन्थोनी : किंग ने कॉमिक्स पढ़नी शुरू कर दी हैं, तब तो ये रोज़ मारिया के हाथों मार खाता होगा….हीही😂
याद है प्रिंस बचपन में जब मैं कॉमिक्स लाया करता था तुम भी तब बहुत छोटे थे, तुम्हारी माँ ने मेरे घर के आँगन में लगे आम के पेड़ पर अपना घोसला बनाया था और जब वो कहीं गयी हुई होती थीं तब तुम अकेले अपने घोसले में पड़े चिंचियाया करते थे……😁
और फिर मैं पेड़ पर चढ़ कर तुम्हे बांकेलाल और हवलदार बहादुर की कॉमिक्स पढ़ कर
सुनाया करता था और तुम कहानियाँ सुनकर खूब हंसा करते थे, और फिर अचानक कहीं से तुम्हारे पिताश्री आ जाया करते थे और चोंच मार मारकर मुझे लहूलुहान कर देते थे…😢 बुहुहुहु और फिर मरहम पट्टी करवाने के बाद मेरे पापा मुझे लतियाना शुरू कर देते थे, और मम्मी से कहते थे, मना करता था साले से कॉमिक्स वोमिक्स मत पढ़ा कर दिमाग खराब हो जाएगा दिमाग खराब हो जायेगा, अब देखो, खराब हो गया दिमाग, साला दिनभर पेड़ पे चढ़कर कॉमिक्स पढ़ा करता है और कव्वों से मार खाया करता है गुर्रर्र 😠।

प्रिन्स : काँव काँव °फिर क्या होता था हीही°😁

एन्थोनी : फिर क्या, फिर मैं छुप छुपाकर कॉमिक्स पढता था कभी रजाई में घुसकर तो कभी स्कूल की किताबों में छुपाकर ।

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उसी वक़्त मारिया करवट बदलती है, एन्थोनी सन्न से टेलीपोर्ट होकर निकल जाता है खिड़की से बाहर , और मारिया उठकर बैठ जाती है, एन्थोनी और प्रिंस बाहर ही खिड़की के पास छुप जाते हैं।
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मारिया : (💭यह सुगंध… यह सुगंध तो… इसका मतलब आज बहुत दिनों बाद पापा आये थे💭) पापा पापा… कहाँ हैं आप सामने आइये,पापा !
लगता है वो चले गए हैं, मुझसे मिले बिना ही चले गए (सुबुक) 😞, पापा आप ऐसा क्यों करते हैं (सुबुक सुबुक)
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एन्थोनी खिड़की के बाहर खड़ा सब कुछ सुन रहा था और उसकी आँखों में आंसू छलक आये थे
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एन्थोनी : (💭मुझे माफ़ कर देना मेरी बच्ची मैं मजबूर हूँ, काश मैं ज़िंदा होता 💭) चल प्रिंस वापस चलते हैं, तेरी ही वजह से मैं यहाँ आया था अब देख मेरी बच्ची की आँखों में आंसू।😓

प्रिंस : काँव ° लेकिन मुझे क्या पता था की ये जाग जायेगी°

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और तभी अचानक चिड़ियों की चहचाहट शुरू हो जाती है, जो इस बात का संकेत है की भोर होने वाली है, और अब एन्थोनी को लौटना था वापस अपनी कब्र में
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समय : 6 : 00 AM
स्थान : राजनगर

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राजनगर.. एक हाईटेक सिटी, राजनगर की ख़ूबसूरती देखती ही बनती है, और भोर के वक़्त तो राजनगर और भी खूबसूरत लगता है जब सूर्य की किरणे 🌇राजनगर की धरती पर पड़ती हैं,ये एक मनोरम दृश्य होता है…
और यही राजनगर कार्यक्षेत्र है सुपर कमांडो ध्रुव और सुपर कॉप इंस्पेक्टर स्टील का, लेकिन इस वक़्त सुपर कमांडो ध्रुव के तारे गर्दिशों में हैं, हीहीही।😁😁😁
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【राजन मेहरा का घर】

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और ये देखिये घर के गार्डेन में एक पौधे के पास बैठकर, श्रीमान ध्रुव ब्रश कर रहे हैं और ना जाने कहाँ खोये हुए हैं , और उसके पीछे श्वेता टहल रही है और वो भी ब्रश कर रही है।
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ध्रुव : (💭 गुर्रर्रर्रर्र 😠 क्या ज़िन्दगी है दो दो गर्लफ़्रेंड्स थीं दोनों छूट गयीं है, वो नागराज का बच्चा पता नही कैसे चार चार को संभालता है, मुझसे तो एक नही संभलती बुहुहु😰💭)

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तभी पीछे से श्वेता की आवाज़ आती है ।
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श्वेता : क्यों श्रीमान ध्रुव जी, क्या हुआ , कहाँ खोये हुए हैं ? नताशा की याद आ रही है या रिचा की ? हीही😁

ध्रुव : तू चुप कर बंदरिया

श्वेता : ए…. जनाब ज़बान संभाल कर बात करें।

ध्रुव : क्या कर लेगी

श्वेता : मम्मी से कह दूँगी।

ध्रुव : जा कह दे जा ।

श्वेता : ठीक है अब तुम कहते हो तो कह ही देती हूँ ।

ध्रुव : अरे नही नही यार मैं तो मज़ाक कर रहा था, हेहेहे  मेरी प्यारी बहना ।😂

श्वेता : अब मक्खन मत लगाओ

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तभी बाहर से राजन मेहरा घर में दाखिल होते हैं उनके हाथ में न्यूज़ पेपर📰 था
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राजन मेहरा :(गुस्से में) अरे रजनी यह देखो तुम्हारे बेटे की एक और न्यूज़ छपी है आज, पूरी मिर्च मसाले लगाकर और वो भी फ्रंट पेज पर ।

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तभी ध्रुव और श्वेता भी वहां पहुंच जाते हैं ।
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श्वेता : क्या हुआ पापा?

राजन मेहरा : (ध्रुव को घूरते हुए) क्या हुआ….😠
यह न्यूज़ पेपर का फ्रंट पेज पढ़ो जान जाओगी

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श्वेता पढ़ना शुरू करती है
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श्वेता : दिया है …. कल दोपहर को 3 बजे सुपर कमांडो ध्रुव को राजनगर 5 स्टार होटल में एक अनजान लड़की के साथ देखा गया, उन दोनों में कोई बहस हो रही थी शायद.. (और भी ऊंची आवाज में पढ़ते हुए ) हमारे रिपोर्टर उनकी वॉइस रिकॉर्ड नही कर सके क्योंकि यह रिस्की काम था अगर ध्रुव देख लेता तो गड़बड़ हो सकती थी , हीहीही, खैर अब आप पूरी खबर सुनिए मेरा मतलब पढ़िए…. कल दोपहर 3 बजे जब हमारा एक रिपोर्टर राजनगर के एक फाइव स्टार होटल में चाय पीने गया तो उसने वहां पर ध्रुव को एक लड़की के साथ बैठे देखा और दूर से उनकी तस्वीरें उतारने लगा, तभी थोड़ी ही देर में वहां ध्रुव की गर्लफ्रेंड नताशा आ गयी और नताशा को देखते ही ध्रुव ने अपना मुंह छुपा लिया लेकिन नताशा ने उसे देख लिया और फिर उसने ध्रुव के ऊपर गुस्सा उतारा और फिर वहां से बाहर चली गयी ध्रुव उसे रोकने के लिए पीछे लपका मगर उसने ध्रुव की बात नही सुनी और वहां से चली गयी, और तभी उधर वो दूसरी लड़की ध्रुव की बाइक लेकर भाग गयी हीही, माना जा रहा है की नताशा और ध्रुव का अब पूरी तरह से ब्रेकअप हो चूका है …..

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श्वेता ने पूरी खबर एक ही सांस में पढ़ डाली थी , ध्रुव खिसियाया हुआ साइड में खड़ा था
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रजनी : हे भगवान, क्या क्या अंट शंट छापते रहते हैं यह न्यूज़ पेपर वाले मेरे लाल के बारे में।

राजन मेहरा : तुम बस इसे लाल पीला करती रहो गुर्रर्र,😠 झूठ थोड़ी न छापे वो, यह देखो साथ में तस्वीर भी छपी है, कुल मिलाकर 9 तस्वीर इसमें छपी है तुम्हारे लाल की, गुर्रर्र, 😠आज से इसका घर से बाहर निकलना बंद, कहे दे रहा हूँ मैं हाँ नहीं तो ।

रजनी : अजी लड़की है जो घर में बैठा रहेगा, लड़का है… और लड़के बाहर ही अच्छे लगते हैं, कोई लड़की तो है नही जो घर में बैठकर हड़िया बर्तन करेगा…।

ध्रुव : (💭 शुक्र है मम्मी तो मेरी तरफ हैं💭)

राजन मेहरा : तुम चुप रहो तुमने ही इसे सर पर चढ़ा रखा है, मैंने कह दिया यह घर से बाहर नही जायेगा तो नही जाएगा, गुर्रर्रर्रर्र😡😡।

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कहकर राजन मेहरा तनतनाते हुए अपने रूम में चले जाते हैं।
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रजनी : चलो बच्चों नाश्ता कर लो, तुम्हारे पापा का दिमाग आज सनका हुआ है।

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थोड़ी ही देर बाद ध्रुव नाश्ता करके अपने रूम में आकर लेट जाता है…
तभी पीछे से श्वेता आ जाती है।
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ध्रुव : तू यहाँ क्या करने आयी है चल भाग जा यहाँ से।

श्वेता : ज़्यादा बोलो मत मैं तो बस तुम्हारा हाल चाल जानने आई थी, पर अब जा रही और तुमसे बात नही करूंगी अब।😠

ध्रुव : हाँ ठीक है जा जा,😠

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श्वेता चली जाती है तुनतुनाते हुए
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ध्रुव : हाँ… नई तो, एक तो इधर मेरा दिमाग खराब है ऊपर से इस बंदरिया ने परेशान कर रखा है, गुर्रर्र,😠 बस एक बार मालूम चल जाए वो रिपोर्टर कौन है, मैं उसकी दुम में धागा बाँध दूंगा, गुर्रर्र..😠… अभी निकलता हूँ मैं जहाँ से वो अखबार छप कर आता वहीं जाकर पता लगाउँगा ।

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ध्रुव पिछली खिड़की से कूद कर बाहर आता है अपनी बाइक🏍 स्टार्ट करता है और निकल लेता है, ध्रुव अपनी सुपर हीरो वाली पोशाक नही पहनता है ब्लैक पैंट और ब्लैक शर्ट पहन कर निकल लेता है,
कुछ ही देर में ध्रुव वहां पहुँच जाता है जहाँ से वो पेपर छप कर आता है… ध्रुव धड़धड़ाता हुआ डायरेक्ट वहां के मालिक के ऑफिस में घुस जाता है…. वहां का मालिक Mr. खोलपोल 👴🏾 अपनी गंजी टांट के साथ अपनी चेयर पर बैठा रहता है, ध्रुव जाकर उसके सामने वाली चेयर पर बैठ जाता है।
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खोलपोल : अरे अरे आप कौन….

ध्रुव : (गुस्से में) वही जिसकी आपने आज के न्यूज़ पेपर में खोल पोली है मेरा मतलब पोल खोली है, गुर्रर्र।😡

खोलपोल : अजी किसकी बात कर रहे हो तुम हम समझे नाही।

ध्रुव : अपने आज के न्यूज़ पेपर का फ्रंट पेज देखो गुर्रर्रर्रर्र।😡

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खोलपोल पास ही पड़ा पेपर उठा कर देखता है ।
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खोलपोल : अरे सुपर कमांडो ध्रुव आप, माफ़ कीजियेगा हमने आपको पहचाने नाही, बैठिये बैठिये।😅

ध्रुव : मैं बैठा हुआ ही हूँ।

खोलपोल : ( खिसियाई हंसी) हीहीही, 😅😅हाँ जी तो बोलिये आप का लेंगे जलेबी, समोसा, पकौड़ा, या….

ध्रुव : पता…

खोलपोल : आएं…. क्या बोला जी ‘पता’ ई कऊन मिठाई है,

ध्रुव : पता चाहिए मुझे उसका जिसने आपको मेरी ये पिक्स दि थी।

खोलपोल : अच्छा जी, लेकिन माफ़ करना उसका पता हम नही दे सकते ये गुप्त है।

ध्रुव : ठीक है मत दो , आज पूरे शहर के कुत्तों🐕🐕🐕 को आर्डर दे दूंगा तुम्हे देखते ही काट खाने का, एक भी हड्डी तुम्हारी नही बचेगी।

खोलपोल : अजी माफ़ कर दो, लेकिन मै उसका पता नही दे सकता हूँ ।

ध्रुव : क्यों?

खोलपोल : क्योंकि उसका कोई पता ही नही है , वो पता नही कौन है कहाँ से आता है, बस हर सुबह मेरे घर के दरवाज़े नामी गिरामी लोगों के बेइज़्ज़ती करने वाले फोटोग्राफ्स रखकर निकल लेता है, इसके पैसे भी नही लेता वो।

ध्रुव : अच्छा…. तब लगता है वो कोई सिरफिरा है, क्या इसके अलावा वो कुछ और देकर नही जाता है, कुछ भी।

खोलपोल : हाँ कल तुम्हारी फोटोज के साथ एक ‘ चिट्ठी ‘ दी थी उसने, उसमे बस इतना लिखा था की, यह लो ध्रुव की जमकर बेइज़्ज़ती करो।

ध्रुव : 😡😡गुर्रर्र, और तुमने छाप दी मेरी बेइज़्ज़ती ।

खोलपोल : अजी इ हे हमारी रोज़ी रोटी है, और तुम जानत ही हो की अब कोई समाचार मिल ही नही रहा है क्योंकि पता नही क्यों अपराध का समूल विनाश हो चूका है , इसलिए कोई न्यूज़ मिलती ही नही।

ध्रुव : हाँ तो पेट पालने के लिए किसी की भी बेइज़्ज़ती कर दो गुर्रर्रर्रर्र,😡 खैर चलो ये बताओ वो ‘ चिठ्ठी ‘ ✉कहाँ है?

खोलपोल : एक मिनट मेरी जेब में होगी…….. हाँ , यह लो।

ध्रुव : ( चिट्ठी पकड़ते हुए) अब मेरा काम हो सकता है ।

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और फिर ध्रुव बाहर निकल आता है और सड़क में टहल रहे एक आवारा कुत्ते🐕 को रोकता है।
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ध्रुव : वुफ वुफ…. ये ले, ये चिट्ठी सूंघ और पता लगा कौन है ये, और बाकियों को भी इस काम पे लगा दे।

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और फिर ध्रुव् अपनी बाइक पर बैठ जाता है, और बाइक स्टार्ट करता ही है की तभी एक चिड़िया🕊 आ जाती है और ध्रुव से कुछ कहती है
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चिड़िया : चु चू चिं चीं।

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ध्रुव के होश उड़ गए उसकी बात सुनकर
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ध्रुव : 😲क्या!!!!! नही ऐसा हुआ तो मैं मर जाऊँगा, जल्दी ले चल मुझे ।

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और फिर ध्रुव उस चिड़िया के पीछे हो लेता है
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आइये अब किसी और का हाल चाल जानते है क्योंकि ध्रुव को तो अभी वहां पहुँचने में टाइम लगेगा

समय : 11 : 00 Am
स्थान : दिल्ली, विनय का घर

विनय अपने घर में

विनय : जल्दी जल्दी सामान पैक करू और निकल लूँ, कुछ दिन अपने मामा की undrground लैब में रहूँगा, जबतक की सबकुछ ठीक नही हो जाता बुहुहु।😰

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विनय अपना सारा सामान पैक कर लेता है, अपने सारे कपड़े सूटकेस में भर लेता है की तभी उसकी Doorbell बजती है।
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विनय : कौन है, घर में कोई नही है….

बाहर से अवाज़ आती है : तो तुम क्या भूत हो।

विनय : अरे बाप रे ये आवाज़ तो क्षिप्रा की है, मर गया ये क्यों आ टपकी है ।

क्षिप्रा : अरे दरवाज़ा खोलना है या नही।

विनय : नही खोल सकता, toilet में हूँ ।😅

क्षिप्रा : जब मैं आती हूँ तभी तुम toilet रहते हो।

विनय : क्या करु तुम आती ही ऐसे टाइम पे हो , ही ही। 😅

क्षिप्रा : नाटक मत करो खोल दो मैं जान रही हूँ तुम नहा नही रहे हो ।

विनय :(💭 शिट्ट यार खोलना ही पड़ेगा, वरना ये बाहर ही खड़ी हो कर कान पकाएगी💭)

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विनय को आखिर दरवज़ा खोलना ही पड़ता है
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क्षिप्रा : ( अंदर दाखिल होते हुए) दरवाज़ा क्यों नही खोल रहे थे…. अरे वाह कहाँ की तैयारी है ।

विनय : आ…. कुछ नही मैं अपने मामा के घर जा रहा हूँ ।

क्षिप्रा : कब आओगे ?

विनय : पता नही

क्षिप्रा : लो यह क्या बात हुई, मैं आज जस्टिस लीग की दो टिकेट लायी थी, सोचा था साथ चलकर देखेंगे अब मेरा पैसा बर्बाद हो जायेगा ।

विनय : हाँ तो मैंने कहा था क्या की मेरी भी टिकेट ले लेना,

क्षिप्रा : क्या ?

विनय : मेरा मतलब किसी और को लिवा कर चली जाओ।😅

क्षिप्रा : मैं तुम्हारे अलावा किसी और को ले कर नही जाउंगी।😬

विनय : ( 💭 हे भगवान जाना ही पड़ेगा वरना ये मेरा दिमाग चाटती रहेगी खड़ी होकर, आज दिन फिर एकदम खराब जाएगा💭)

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विनय बेचारा हारकर उसके साथ जाने को तैयार हो जाता है
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आइये अब चलते हैं असम के जंगलों में

समय : 11 : 30 Am
स्थान : अरे यार अभी तो बताया है असम का जंगल।🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳

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अरे यह मैं क्या देख रहा हूँ कोई शख्स पूरी तरह पट्टियों में लिपटा पड़ा हुआ है, उसके बगल में फुजो बैठा है और जेन बैठ कर रो रही है
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जेन : (सुबुक) भेड़िया यह क्या हाल कर दिया है तुम्हारा कोबी ने (सुबुक सुबुक) 🙍🏼, बाबा कब तक ठीक हो जायेगा भेड़िया?

फूजो : पता नही मेरी बच्ची मैं पूरी कोशिश कर रहा हूँ पर पता नही इसे होश कब आएगा या आएगा भी की नही।

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ओ… तो ये भेड़िया श्रीमान हैं और इनकी ये हालत कोबी ने की है, अच्छा हुआ , सही किया कोबी , ने बड़ा दिमाग की ताक़त दिखाता था, अबे भेड़िये तेरा दिमाग कोबी की गदा से ज़्यादा ताक़तवर है क्या, हीही😁
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इधर कोबी अपनी गुफा में

कोबी : वाह… अब दिल🖤 में ठंडक मालूम पड़ रही छे, वो भेड़िया का बच्चा ज़िन्दगी और मौत के बीच झूला झूल रहल है, जल्लि मरे साला, उसके मरने के बाद जेन कहाँ जायेगी लऊट कर हमरे ही पास आएगी, गुर्रर्रर्रर्र😡 लेकिन साला मैं यहाँ अपनी गुफा में पड़े पड़े सड़ रिया हूँ, कोनो साधन ही नही छे मनोरंजन के, गुर्रर्रर्रर्र।😡😡

अब आइये चलते हैं सीधा *मुम्बई सूरज उर्फ़ डोगा के पास*

समय : 12 : Pm
स्थान : मुम्बई , लॉयन जिम

दोस्तों जैसा की आपने पढ़ा है बाकी सारे सुपर हेरोज़ अपने अपने घरों में पड़े सड़ रहे हैं, और बोर हो रहे हैं क्योंकि सुपर हेरोगिरि ही उन सब का काम है पर सूरज के साथ ऐसा नही है, वो कभी डोगा बनना ही नही चाहता था हालात और मजबूरी ने उसे डोगा बनने पर मजबूर कर दिया था, पर अब उसकी ज़िन्दगी खुशियों से भर गयी थी अब उसे डोगा बनने की कोई ज़रूरत नही थी अब वो अपना सारा वक़्त मोनिका को देता था, आज भी तैयार हो रहा था उसे मोनिका को मूवी दिखाने ले जाना था

सूरज : (तैयार होने के बाद ) मैं जा रहा हूँ अदरक चाचा ।

अदरक : अरे बेटा नाश्ता तो करता जा, सुबह से तैयार ही हो रहा है।

सूरज : नही चाचा देर हो जायेगी।

अदरक चाचा : अच्छा ठीक है जा जा।

सूरज : अच्छा चाचा चलता हूँ अल्लाह हाफ़िज़

अदरक चाचा : अफि अमानिल्लाह, बेटा अच्छे से जाना

सूरज : जी ।

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थोड़ी ही देर में सूरज चीता के घर पहुँच जाता है, मोनिका दरवाज़ा खोलती है, सूरज उसे देखकर दंग रह जाता है वो पूरी तरह सज संवर कर तैयार क़यामत ढा रही थी हीहीही, 😁😁सूरज अपना दिल पकड़ कर लुढकने लगता है, मोनिका डर जाती है।
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मोनिका : सूरज क्या हुआ….. सूरज!

सूरज : ( मज़ाकिया लहज़े में) हा हा कुछ नही तुम्हे देखकर हार्ट अटैक आ गया था।😍

मोनिका : बद्तमीज़।

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और फिर सूरज मोनिका को लेकर सिनेमा हॉल की तरफ चल देता है………..

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शाम 4 बजे तक मूवी ख़त्म हो चुकी थी सूरज और मोनिका वापस घर की तरफ आ रहे थे।
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मोनिका : मज़ा आ गया मूवी बहुत ही अच्छी थी।

सूरज : हाँ मुझे भी बहुत मज़ा आया ।

मोनिका : लास्ट में बेचारा हीरो मर जाता है।

सूरज : सच में ! मम मेरा मतलब, हाँ ।

मोनिका : आयीं….क्या तुम सो रहे थे क्या, तुमने पूरी मूवी नही देखी।

सूरज : कैसे देखता , मैं तो सिर्फ तुम्हे देख रहा था😍💑 ।

मोनिका : तुम आजकल कुछ ज़्यादा वो हो गए हो ।

सूरज : क्या ….

मोनिका : कुछ नही।

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तभी सूरज की बाइक के आगे से एक बन्दा, दनदनाता हुआ निकल जाता , सूरज तुरंत ब्रेक लगा देता है।
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सूरज : अबे अबे अबे परलोक पहुंचने की जल्दी है गुर्रर्र।😡

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सूरज बाइक रोक देता है।
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सूरज : मोनिका तुम घर जाओ , यहाँ से थोड़ी ही दूर रह गया है घर मैं देखता हूँ ये बन्दा राकेट क्यों बना हुआ है।

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मोनिका को उतारने के बाद सूरज उस बन्दे के पीछे जाता है और उसके आगे जाकर बाइक रोक देता है, वो बन्दा तुरंत पॉवर ब्रेक लगाता है।
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सूरज : क्यों बे ऐसे क्यों भाग रहा था चड्ढी में चूहे घुस गए हैं क्या, या किसी ने लाल मिर्च डाल दी है पिसी हुई।

वो शख्स : हटो मेरे आगे से वो कुत्ता मुझे काट लेगा ।

सूरज : कौन कुत्ता?

वो शख्स : अरे वही जो अभी मुझे दौड़ाये हुए था ( कहकर वो पीछे देखता है) अरे कहाँ गया 😟।

सूरज : क्यों दौड़ाये हुए था वो कुत्ता तुम्हे ?

वो शख्स : वो जी बात ये है की यह देखो ( कहकर वो शख्स एक चिट्ठी निकालता है और सूरज को दिखाते हुए कहता है) यह मेरे मालिक ने मुझे मरते वक़्त दिया था और कहा था की डोगा को दे देना ये चिट्ठी मैं तो अब बचूंगा नही आखिरी वक़्त में डोगा का अहसान उतारना चाहता हूँ इसलिए ये काम तुम्हे सौंप रहा हूँ……
यह कहकर मेरा मालिक तो टपक गया लेकिन मेरी मुश्किलें बढ़ा गया😰, डोगा को ढूढ़ना इतना आसान काम नही था और अब तो डोगा नज़र ही नही आता है, ऐसा लगता है जैसे डोगा दुनिया से विलुप्त हो गया है हीही।😁😁

सूरज : ( 💭 हीही साले को पता नही है की डोगा इसके सामने ही खड़ा है हीहीही😁😁💭) हाँ तो फिर क्या।

वो शख्स : फिर क्या, फिर मैं डोगा को ढूँढने के लिए रातों को मुम्बई की ख़ाक छानने लगा, लेकिन 15 दिन हो गए हैं डोगा कहीं नही मिला तो मैंने सोचा, क्यों ना ये चिट्ठी किसी कुत्ते के हवाले कर दूँ और वो ले जाकर डोगा को दे देगा और मैंने एक कुत्ते को पुचकारकर बुलाना चाहा चिट्ठी देने के लिए लेकिन वो गुर्राता हुआ मुझे दौड़ा🏃🏿🐕 लिया , और दौड़ाता हुआ रोड तक ले आया बुहुहु😢।

सूरज : अच्छा ज़रा वो चिट्ठी मुझे दिखाना ।

वो शख्स : यह लो ।

सूरज : अब तुम जाओ और हमेशा के लिए सो जाओ… मेरा मतलब चैन की नींद सो जाओ ये चिट्ठी मैं डोगा तक पहुंचा दूंगा😎।

वो शख्स : तुम जानते हो क्या डोगा कहाँ रहता है।

सूरज : अरे मेरा मतलब कुत्तों के हाथों, मेरा मतलब दाँतो भेजवा दूँगा, हीहीही😁😁 कुत्ते मेरे दोस्त हैं वो क्या है मैं खुद बहुत बड़ा कुत्ता हूँ (💭अरे बाप रे यह क्या बोल गया 💭)।

वो शख्स : आपका बहुत बहुत शुक्रिया जी, आपने मेरी समस्या दूर कर दी इसकी वजह से न जाने कई दिनों से मैं सोया नही था , अब जाऊंगा लंबी तानकर सोऊंगा ।

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कहकर वो शख्स निकल लेता है। सूरज चिट्ठी खोलता है…..
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क्रमशः

😁😁😁हीहीही चिट्ठी में क्या लिखा था अगले पार्ट में बताऊंगा, और दोस्तों अब यह कहानी उस मोड़ पहुँच रही है जिसका आप सभी को इंतज़ार है…..
बस अपनी राय देते रहें ।

धन्यवाद 🙏

Apradh Unmoolan Ke Baad Part 1

अपराध उन्मूलन के बाद  आधार खंड  ****** आरम्भ ***** दोस्तों कुछ समय पूर्व पूरे हिन्दुस्तान में अपराधिक गतिविधियाँ कम होनी शुरू हो गयीं थीं और अब धीरे धीरे इतनी कम हो चुकी हैं की …

Written By – Talha Faran for Comic Haveli

 

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12 Comments on “Apradh Unmoolan Ke Baad Part 2”

  1. Hihihi… Mast story
    Ek rahasyamay kirdar
    Kaun hai ye shaksh
    Aur dhruv ki beizzati karne k liye kis shaksh ne chitthi pahuchai thi
    Ye sab jaanne k liye kaafi utsuk ho utha hu
    Apradh khatm hone k bad ab superheroes ki beizzati ne sir utha liya hai
    Doga ki to life set hai
    Aaj dhruv ka din khrab chal raha h
    Kyun ki uski to personality pahle se hi real thi
    Wo bina mask wala hero aise hi kafi social tha
    But apradh khatm k bad bechare ki life boring ho gayi
    Anthony to pahle se hi berojgar tha
    Gin chun k kuch apradhi roopnagar aate the ab wo bhi ni
    Parmanu ka sahi hai
    Aaram se justice league dekh k gaali deta hua aayega… Hihihi
    Kafi lamba review ho gaya lagta h
    Bas agli story aa jaye to review k naam par main hi story dal du….

    1. प्रदीप जी, मोबाइल फ़ोन का ज़माना है लेकिन डोगा का नंबर तो नही है न किसी के पास, हीही। और अगला पार्ट जल्द लाने की कोशिश करूंगा धन्यवाद

  2. Aur ye mobile phone k jamane me chitthi se kaun hamla kar raha h
    Talha ji as usual aapki story bahut hi dhansu hai… Thoda kam busy hoke jaldi hi next part daliye
    Fans are waiting
    Tab tak k liye
    Hihihi….chichichichuchuchi… woof woof… Hiss fuss…

    1. प्रदीप जी, मोबाइल फ़ोन का ज़माना है लेकिन डोगा का नंबर तो नही है न किसी के पास, हीही।

    1. धन्यवाद
      पार्था जी, नेक्स्ट पार्ट जल्द ही लाऊंगा

  3. waah janab… ek doga hi h jo apni suraj wali zindagi se khush h baaki to behaal huye jaa rhe h ….. ek reporter aur ab yh dusra anjaan in dono mein koi connection to hoga hi…. bahot hi acha likh h bhai…… but kobi ne acha nhi kiya Bhediya k saath…. overall story mein maza bahot aa rha h…

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