Apradh Unmoolan Ke Baad Part 3

श्रृंखला : अपराध उन्मूलन के बाद

( Part 3)

【अज्ञात रिश्तेदार】
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दोस्तों जैसा की आप लोग इस श्रृंखला के 2 पार्ट पढ़ ही चुके हैं, और अगर नही पढ़ा तो अभी पढें और अपने विचारों से अवगत भी कराएं, तो अब मैं (तलहा फरान अली) आपको बताता हूँ की इस 3rd पार्ट में क्या हुआ तो चलिए मेरे साथ👇

【 प्रथम अध्याय : बेचारा नागराज 】

समय : 11 : 30 Am
स्थान : महानगर

नागराज अपने रूम में अपने बेड पर बैठा है, और उसके हाथ में एक ख़त है

नागराज : बुहुहु आज एक और ख़त भेजा है विसर्पी ने , इसमें भी ज़रूर कुछ जहर ही उगला होगा उस नागिन ने गुर्रर्रर्रर्र ।

नागराज खत खोलता है, और पढ़ना शुरू करता है

नागराज : (✉ मेरे प्रिय जहरीले नागराज, उम्मीद है तुम जैसे भी होगे बर्बाद ही होगे, मुझे बर्बाद करके तुम आबाद रह ही कहाँ सकते हो ✉ ) गुर्रर्र मुझे खुद बर्बाद कर रखा है और कहती है मैंने उसे बर्बाद कर दिया है,
(✉ मैं तुमसे बहुत नाराज़ हूँ मैंने तुम्हे इतने खत भेजे लेकिन तुमने जवाब एक का भी नही दिया और न ही खुद आये मैं आज यह आखिरी ख़त तुम्हे लिख रही हूँ क्योंकि महात्मा कालदूत ने अब मेरी शादी कराने की ठान ली है, अब अगर तुम चाहते हो की मेरी शादी किसी और से न हो तो जल्द से जल्द आकर कालदूत से मिल लो, मैंने बहुत ज़िद की तब उन्होंने एक मौका दिया है जल्द ही आकर मिलो वरना वो मेरी शादी किसी और से कर देंगे उन्होंने लड़का भी देख लिया है ।
तुम्हारी जहरीली,
विसर्पी….✉)

नागराज : अर्रे यार अब मैं क्या करू, वो भारती मुझे जाने नही देगी नागद्वीप, बुहुहु,….. क्या करूं क्या करूँ….. हाँ एक रास्ता है, “नागू बाहर निकल” ।

नागू : निकल आया जी हीही।

नागराज : अब सुन, तुझे मेरा रूप लेकर यहाँ रहना होगा, मैं कुछ ही घण्टों में नागद्वीप होकर आता हूँ और हाँ कोई गड़बड़ मत करियो, बस कुछ ही घण्टों की बात है ।

नागू : ओके जी, आप शौच से जाओ, म मेरा मतलब शौक से जाओ हीही।

नागराज : हो गयी मेरी समस्या हल ।

नागू : लेकिन तुम्हारे दिमाग में यह आईडिया पहले क्यों नही आया ?

नागराज : अबे मैंने ग़ौर से अभी सोचा है इसलिए ये आईडिया अभी आया ।

नागू : लेकिन ध्रुव के दिमाग में तो बिना ग़ौर से सोचे आइडियाज आ जाते हैं ।

नागराज : गुर्र उसकी बात मत कर, उसने बचपन में काढ़ा पी रखा है, और उसके दिमाग में तरकीबें,जब वो ग़ौर से सोचता है तब आती हैं…., बिना ग़ौर से सोचे कब आती हैं बे ( ग़ुस्से में ) ज़्यादा बड़ाई मत कर उसकी वरना बत्तीसी बाहर कर दूंगा ।

नागू : माफ़ कर दो नागराज लेकिन यह काढ़ा वाला मामला समझ नही आया ।

नागराज : चल समझाता हूँ…, दरअसल बात यह है की ध्रुव ने बचपन में एक हकीम जी का दिया हुआ काढ़ा पी रखा है जिससे उसके दिमाग की शक्ति दिन पर दिन बढ़ती हुई बहुत ज़्यादा बढ़ गयी, समझा अब ।

नागु : हाँ हाँ समझ गया, वो काढ़ा पुरूष है हीहीही ।

नागराज : हाँ तो दे ताली ।

नागू : लो गाली.. म् मम मेरा मतलब ताली बुहु हीही।

नागराज : अच्छा तो अब मैं चलता हूँ, सब कुछ सम्भाल लियो ।

नागू : हाँ आप जाओ बेफिक्र होकर ।

नागराज निकल लेता है

●प्रथम अध्याय समाप्त●

【 द्वितीय अध्याय ◆ बेचारा ध्रुव 】

स्थान : राजनगर
समय : 12 : 00 pm

ध्रुव अपनी बाइक भगाता हुआ बहुत तेज़ी से उस ओर बढ़ रहा था जहाँ उसे वह चिड़िया ले जा रही थी, ध्रुव की बाइक सनसनाते हुए चलती चली जा रही थी….कुछ ही देर में ध्रुव की बाइक शहर के बाहर निकल चुकी थी और पहाड़ी इलाकों में पहुँच गयी थी, और उस इलाके में पहुँचते ही ध्रुव की बेचैनी और बढ़ गयी थी थोड़ी ही देर में ध्रुव की बाइक एक पहाड़ पर चढ़ने लगी थी उसे कोई परेशानी नही हुई क्योंकि ऊपर जाने के लिए रास्ता बना हुआ था ….. ध्रुव बाइक चलाता हुआ ऊपर पहुँच चुका था, चारों तरफ हरी हरी घास फैली हुई थी पेड़ पौधे भी थे पर कम ही थे, ध्रुव ने अपनी बाइक वहीँ एक पेड़ के नीचे खड़ी की और पहाड़ी के पिछले भाग की ओर दौड़ लगा दी, पहाड़ी के पीछे एक बहुत ही गहरी खायी थी, ध्रुव दौड़ता हुआ जा रहा था तभी उसे वो दिखी जो उस पहाड़ पर से खायी में कूदने की तैयारी कर रही थी, ध्रुव लपक कर उसके पास पहुंचा और चप्प से उसका हाथ पकड़ लिया।

ध्रुव : यह क्या कर रही थी नताशा दिमाग खराब हो गया है क्या तुम्हारा ।

नताशा : (गुस्से में ) तुम यहाँ कैसे आये ।

ध्रुव : बाइक से ।

नाताशा : मेरा मतलब क्या करने आये हो ।

ध्रुव : मैदान करने आया हूँ, गुर्रर्र , दिखता नही क्या करने आया हूँ, तुम्हे यह बेवकूफी करने से रोकने आया हूँ जो तुम अभी करने जा रही थी, अच्छा हुआ उस चिड़िया ने तुम्हे इस ओर आते हुए देख लिया था।

नताशा : मैं कोई भी बेवकूफी करूँ तुम्हे इससे क्या फर्क पड़ता है।

ध्रुव : वाह, नही नही वाह, मैं कुछ करूँ तो इन्हें फर्क पड़ता है और यह मरने चली हैं तो मुझे कोई फर्क न पड़े ।

नताशा : तो जाओ करो न जो करना है, मुझे कोई फर्क नही पड़ेगा अब………., क्योंकि मैं रहूंगी ही नही ।

कह कर नताशा फिर से कूदने के लिए जाती है, लेकिन तभी ध्रुव उसे खींच लेता है और अपनी बाहों में भर लेता है।

ध्रुव : नताशा तुम समझती क्यों नही हो, आखिर ऐसा क्या हो गया है तुम ऐसा क्यों कर रही हो ?

नताशा : ( थोड़े नरम स्वर में ) तुमने मुझे ऐसा करने पर मजबूर किया है ।

ध्रुव : मैंने ?

इस बार नताशा खुदको ध्रुव की बाहों से आज़ाद करते हुए बोलती है

नताशा : हाँ तुमने, तुम हमेशा उस रिचा के साथ 5 स्टार हवेलियों  में मौज उड़ाया करते हो ।

ध्रुव : क्या बक रही हो तुम, तुम्हारा दिमाग सच में खराब हो गया मैं तुम्हे कई बार बता चुका हूँ की रिचा सिर्फ मेरी दोस्त है, और उसने मुझसे एक शर्त लगा रखी थी जो मैं हार गया तो उसने 5 स्टार होटल में खाना खिलाने को बोला था, तो मैं उसको होटल की जगह हवेली में ले गया ,बस, मैं हमेशा कहाँ उसके साथ 5 स्टार होटलों में जाता हूँ ?

नताशा : अच्छा सिर्फ दोस्त समझते हो उसे ?

ध्रुव : हाँ, वो सिर्फ मेरी दोस्त ही है ।

नताशा : ( अपनी जीन्स की जेब में हाथ डालते हुए ) अच्छा…। तो जनाब उसकी आँखों में आँखें डालकर क्या कर रहे थे ।

ध्रुव : (💭ओ गॉड,इन लड़कियों की आँखें होती हैं या कैमरा उतनी दूर से भी इसने देख लिया गुर्र जानबूझकर अनजान बन रही थी💭)

नताशा : ( ध्रुव की आँखों के आगे चुटकी बजाते हुए ) क्या हुआ ? चुप क्यों हो गए ?

ध्रुव : अरे यार तो क्या कोई अपने दोस्तों की आँखों में नही देख सकता है क्या….

नताशा : ( नताशा आँखें फाड़ कर ध्रुव को देखती है ) तो जाओ उसी की आँखों में देखो, चाहे जहां मन करे वहां देखो, लेकिन मुझे छोड़ दो मैं चली , इस दुनिया में मेरा कोई नही है (सुबुक)।

ध्रुव : नताशा यह क्या ज़िद लगा रखी है तुमने बच्चों की तरह, मैंने कहा न मैं रिचा को सिर्फ अपनी दोस्त मानता हूँ ।

नताशा : तभी, तभी उसके लिए तुम्हारे पास हमेशा टाइम होता है, और मेरे लिए टाइम ही नही होता ।

ध्रुव : ( आँखें फाड़ते हुए ) तुम्हारे लिए टाइम नही होता ?, अच्छा…. मेरे पास तुम्हारे लिए टाइम नही होता या मेरे लिए तुम्हारे पास टाइम नही होता । मैं तो खुद हमेशा तुमसे कहता रहता हूँ चलो आज यहाँ चलते हैं आज वहाँ चलते हैं (चल वहां जाते है) । लेकिन तब तुम भाव में आ जाती हो कहती हो, (मुंह बनाते हुए) मेरे पास टाइम नही है…

नताशा : हाँ तो तुम पूछते ही ऐसे टाइम पे हो जब मेरे पास टाइम ही नही होता ( गुस्से में ) ।

ध्रुव : चलो छोडो अब यह बताओ क्या करू मैं जिससे तुम्हारी नाराजगी दूर हो जाये?

नताशा : मुझसे वादा करो की तुम कभी उस कलमुंही के साथ कहीं भी मुझे नज़र नही आओगे ( ध्रुव के कन्धों पर हाथ रखकर उसकी आँखों में आँखें डाल कर नताशा ये बात बोलती है )

ध्रुव : (💭अरे यार इन लड़कियों की प्रॉब्लम्स क्या होती है गुर्रर्र💭) मैं वादा करता हूँ डियर, मैं उसके साथ कहीं नही घूमूँगा, और अगर कभी मजबूरी में कहीं जाना भी पड़ा उसके साथ तो तुम्हे बता दूंगा या फिर तुम्हे भी साथ लेता चलूँगा….

नताशा ध्रुव को घूरने लगती है

ध्रुव : अरे म म मेरा मतलब मैं…..। ( गहरी सांस लेकर ) अब उससे दूर रहने की कोशिश करूंगा Ok…

नताशा : Ok ( मुस्कराते हुए )

और फिर नताशा ध्रुव से लिपट जाती है, ध्रुव ने गहरी साँस ली की अब मुसीबत टली, लेकिन मुसीबत तो अभी शुरू हुई थी हीही,….
ध्रुव नताशा से लिपटा ही हुआ था की तभी किसी के खखारने की आवाज़ आई, ध्रुव ने देखा तो बुरी तरह चौंक गया……., वो रिचा थी वो भी कूदने की तैयारी कर रही थी खाई में, उसने ध्रुव और नताशा को देख लिया था इसलिए जानबूझ कर ज़ोर से खंखारी थी …… ध्रुव ने उसे देखा और नताशा को छोड़कर उसकी तरफ लपक पड़ा। और इससे पहले की रिचा कूद जाती ध्रुव ने उसे पकड़ लिया।

ध्रुव : ( 💭यह यहाँ कब पहुँची बुहु 💭) रिचा तुम यह क्या करने जा रही थी?

रिचा : वही जो करना चाहिए ।

उधर नताशा हक्की बक्की खड़ी थी आग बबूला होकर

ध्रुव : क्या मतलब क्या करना चाहिए ?

ऋचा : ( ज़ोरदार आवाज़ में ) मरने जा रही थी! कोई प्रॉब्लम !

ध्रुव : लेकिन क्यों…..

इससे पहले की रिचा कुछ बोलती ध्रुव को नताशा की खांसने की आवाज़ सुनाई दी, वो फिर से खाई में कूदने जा रही थी…….बेचारा ध्रुव उसकी तरफ फिर से लपक पड़ा ।

ध्रुव : ( नताशा को अपनी तरफ खींचते हुए ) अब तुम्हे क्या हुआ ?

नताशा : हुआ नही हुआ था….. दिमाग खराब हुआ था मेरा अब सही हो चुका है, जा रही हूँ मरने अब ।

ध्रुव : (💭हे भगवान क्यों भेज दिया मेरी ज़िन्दगी में इन दोनों को बुहुहु💭) हे मेरी माँ मैं तेरा आगे हाथ जोड़ रहा हूँ। आखिर हुआ क्या है तुमको ।

नताशा : ( गुस्से में ) वो मर रही थी तो मरने दो न उसे, बचाया क्यों ?, इसका मतलब की तुम उसे चाहते हो तुम चाहते हो की उसे कुछ न हो…है न।

ध्रुव : अरे यार वो मेरी दोस्त है, और अपने दोस्तों को कोई अपनी आँखों के सामने कैसे मरने दे सकता है ।

नताशा : दोस्त है तो क्या हुआ ! उसकी ज़िन्दगी है वो चाहे जो करे उसके अपने फैसले हैं…..मर रही है तो मरने दो ।

अब रिचा भी जो की वहां से कुछ ही दूरी पर खड़ी थी बोल पड़ती है

रिचा : ( तंज कसते हुए ज़ोरदार आवाज़ में) यही मैं भी तुमसे कह रही हूँ ध्रुव, मरने दो उसे उसकी अपनी लाइफ है अपने फैसले हैं ।

नताशा मारे गुस्से के लाल हो जाती है

नताशा : तेरी हिम्मत कैसे हुई। ध्रुव मेरा बॉयफ्रेंड है ।

रिचा : हाँ तो वो तो मेरा भी है ।

इस बार नताशा ध्रुव की तरफ वापस पलटती है और आँखें लाल करके पूछती है

नताशा : यह क्या बक रही है ?

ध्रुव : आ व वो कह रही है की मैं उसका दोस्त हूँ, बॉयफ्रेंड का संधि विच्छेद करो हीही, बॉय + फ्रेंड = बॉय फ्रेंड, मतलब वो लड़का जो दोस्त हो हीही।

नताशा : दांत मत दिखाओ मैं सीरियस हूँ गुर्रर्र । और अब चाहते हो की मैं न कूदूं तो ज़ोर से बोलकर मुझे प्रपोज़ करो ।

कहकर नताशा हाथ बाँध कर खड़ी हो जाती

ध्रुव : अरे यार दिन में 200 बार तो प्रपोज़ करता हूँ….

नताशा : ( ख़ौरिया कर ) करो !……

ध्रुव : ओके ओके, करता हूँ,

और फिर ध्रुव न चाहते हुए भी ज़ोरदार आवाज़ में बोलता है

ध्रुव : I Love You

ध्रुव के इतना बोलते ही नताशा उसे तुरन्त गले लगा लेती है, और रिचा को इशारों में चिढ़ाती ह, रिचा उस सीन को देखकर आग बबूला हो जाती है, और फ़ौरन ही कूदने की लिए झुकती है साथ ही साथ खँखारती भी है, और ध्रुव तुरन्त उसकी तरफ देखता है और फिर दौड़ पड़ता है, बेचारा हीहीही। नताशा उसे रोकने के लिए आवाज़ लगाती है मगर ध्रुव नही सुनता है

ध्रुव : रिचा रुक जाओ प्लीज़ ।

ध्रुव उसका हाथ पकड़ लेता है

रिचा : अब मैं नही रुकने वाली, छोड़ दो मुझे ।

ध्रुव : अब तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है बोलो मुझे मैं उसे भी दूर कर दूं ( बुहुहु)

रिचा नताशा को कुछ ज़्यादा ही जलाना चाह रही थी इसलिए उसने ध्रुव से वो कह दिया जो वो कर ही नही सकता था हीहीही

ध्रुव : क्या ?????

ध्रुव का मुंह खुला रह गया वो सुन कर

ध्रुव : मैं यह नही कर सकता प्लीज़ रहम खाओ मेरे ऊपर ।

रिचा : बस एक पप्पी लेने को तो बोला है वो भी गाल पर हीहीही।

कहकर रिचा अचानक से ही ध्रुव का गाल चूम लेती है। यह देखकर नताशा के कानों से धुआँ निकलने लगता है। और इस बार वो कूदने के बजाए लपक कर ध्रुव के पास पहुंचती है और रिचा के सामने ही ध्रुव के दायें गाल पर ज़ोरदार पप्पी ले डालती…….ध्रुव हकबका जाता है, तभी उसे दोबारा हकबकाना पड़ता है क्योंकि तुरन्त ही रिचा उसके बाएं गाल पर ज़बरदस्त ले डालती है पप्पी।….अबकी बार नताशा कहाँ पीछे रहने वाली थी तुरन्त ही उसने ध्रुव का गाल दो बार चूम डाला वो भी ज़बरदस्त…….और फिर, फिर हीहीही, खेल शुरू हो गया पप्पियों का इधर से रिचा बाएं गाल को लाल कर रही थी तो उधर से नताशा दायें। ध्रुव बेचारा फंसा हुआ छटपटा रहा था……मगर वो दोनों एक दुसरे की ज़िद में बेचारे पर बुरी तरह पिल पड़ी थीं

ध्रुव : (💭हे भगवान बचा ले कुछ दो कर, यह कहाँ फसा दिया है💭)

ऊपर से भगवान का जवाब आता है

भगवान : “तू ही न चला था रोमियो बनने ले भुगत अब, मैं नही कुछ करने का, बड़ा आया था लड़कियां पटाने वाला”

ध्रुव : बुहुहु अब मैं क्या करूँ, हे भगवान कोई सुपर विलेन ही भेज दे ताकि मेरा इन दोनों से पीछा छूटे बुहुहुहुहुहु।

और तभी एक तेज़ फटाफटाहट की आवाज़ आने लगती है, किसी हैलीकॉप्टर की आवाज़ थी वो ध्रुव ने ऊपर देखा, वो ग्रैंड मास्टर रोबो का हैलीकॉप्टर था । अपने बाप को आया देखकर नताशा ध्रुव को छोड़ देती है , और फिर रिचा भी छोड़ देती है ध्रुव गहरी साँस लेता है लेकिन बेचारा ध्रुव बुरी तरह बेहाल हो चुका था उसके गाल फूल कर गुब्बारा हो गए थे हीही, नताशा और रिचा ने मिलकर उसे मुंह दिखाने लायक नही छोड़ा था हिहिहिहिहिहिहिहिहि……। रोबो का हैलीकॉप्टर थोड़ी ही दूरी पर उतरा और उसमे से रोबो निकल कर उनकी तरफ बढ़ने लगा, और उनके पास पहुँच कर…

रोबो : नताशा मेरी बच्ची, कहाँ है वो ध्रुव का बच्चा कहाँ है, और यह लड़की कौन है तुम्हारे साथ और ये मोटू कौन है?

ध्रुव : ( लाचारी भरी आवाज़ में ) मैं ही ध्रुव हूँ ।

रोबो : क्या ??? यह तेरे गालों को क्या हुआ, क्या मधुमक्खियों ने काट खाया है ?

ध्रुव : नही उनसे भी बुरी चीजों ने यह हाल किया है।

नताशा ध्रुव को कुहिनी मारती है

ध्रुव : ( रोबो से ) आ…. वैसे तुम मुझे क्यों ढूंढ रहे थे ?

रोबो : हाँ तो सुन बे काढ़े मैं तुझे क्यों ढूंढता फिर रहा था ।

ध्रुव : देखो बोबो म मेरा मतलब रोबो, जो बात करनी है करो मगर इज़्ज़त से ।

रोबो : अबे ससुर को इज़्ज़त सिखाएगा ।

रिचा बोल पड़ती है

रिचा : ससुर हो तो क्या मेरे ध्रुव को कुछ भी बोलोगे, और वैसे भी अभी ससुर बने नही हो और न ही कभी बनोगे ।

नताशा : तू चुप कर कलमुंही बीच में मत बोल ।

रिचा : क्या कर लेगी ।

नताशा : अभी बताती हूँ ।

तभी ध्रुव बीच में आ जाता है

ध्रुव : नताशा साइड हटो। रिचा प्लीज़ तुम शांत हो जाओ ।

रिचा : (मुस्कुरा कर) ठीक है तुम कहते हो तो शांत हो जाती हूँ ।

नताशा : (आग बबूला होकर) क्या???? मुझे साइड हटने को बोल रहे हो, और इसे इतना प्यार से शांत करा रहे हो ।

नताशा रोबो की तरफ पलटकर कहती है

नताशा : देखा पापा देखा। मैं कहती थी न यह एकदम बदल गया है, मुझे कुछ नही समझता (सुबुक)

बेटी की आँखों में आंसू देखकर रोबो को गुस्सा आ गया

रोबो : इसीलिए, इसीलिए मैं तुझे ढूंढता फिर रहा था, तूने मेरी बेटी को परेशान कर रखा है । दो दिन , सिर्फ दो दिन का टाइम दे रहा हूँ तुझे, दो दिन बाद मेरी बेटी से शादी करले नही तो अंजाम बहुत बुरा होगा । चल नताशा ।

और फिर रोबो नताशा को लेकर अपने हैलीकॉप्टर से रवाना हो जाता है, ध्रुव उन्हें जाता हुआ देखता है तभी

रिचा : ध्रुव…..

ध्रुव : क्या??

रिचा : मैं भी तुम्हे टाइम दे रही हूँ सिर्फ दो दिन का, दो दिन के अंदर मुझसे शादी करो वरना मेरा मरा हुआ मुंह देखने के लिए तैयार रहो।

कहकर रिचा एक पल भी नही रूकती है और वहां से रवाना हो जाती है !

ध्रुव : (💭बुहुहु काश मैं अपना मरा हुआ मुँह देख पाता पर अपना मरा हुआ मुंह कौन देख पाता है बहुहु दोनों दो दिन का टाइम देकर निकल लीं……हुंह, दो दिन बाद मिलूंगा तब न अंडर ग्राउंड हो जाऊँगा गुर्रर्रर*।

●द्वितीय अध्याय समाप्त●

【 तृतीय अध्याय ◆ झंडू तिरंगा】

स्थान : दिल्ली का एक सिनेमा हॉल
समय : 2 : 00 PM

दोस्तों आपको तिरंगा के पास ले चलने से पहले आइये एक बार परमाणु का हाल चाल दिखा दूं…………

परमाणु उर्फ़ विनय क्षिप्रा के साथ सिनेमा हॉल से बाहर निकल रहा था

विनय : गुर्रर्र गुर्रर्र क्या बेहूदा मूवी थी जस्टिस लीग गुर्र गुस्सा आ रहा है इससे अच्छी मूवीज़ तो मार्वल वाले लाते हैं, साला सुपर मैन की वजह से मैं यह मूवी देखने को तैयार हो गया था मगर वो साला भी कुछ ख़ास नही कर पाया, ऊपर से इस क्षिप्रा की बच्ची ने पकर पकर करके मेरा दिमाग खा डाला है बुहुहुहु गुर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर।

भाइयों तो जैसा की आपने देखा परमाणु जी फुल खुन्दक में हैं अब आइये चलते हैं तिरंगा के पास

स्थान : दिल्ली का एक व्यस्त बाज़ार
समय : 2 : 05 PM

भारत ने इस वक़्त अपनी तिरंगा वाली ड्रेस पहन रखी है और वो मच्छर दानी खरीदने के लिए अच्छी दूकान ढूंढ रहा है, तभी तिरंगा एक दूकान में घुस जाता है

दुकान क मालिक : आइये आइये, बोलिये क्या चाहिए।

तिरंगा : मुझे बढ़िया सी मच्छरदानी चाहिये।

दुकानदार : अभी दिखाते हैं ।

और फिर वो दुकानदार तिरंगा को कई तरह की मच्छरदानी दिखाने लगता है, तिरंगा उसमे से एक अच्छी वाली पसन्द कर लेता है

तिरंगा : भाई इसका दाम कितना है ?

दुकानदार : सिर्फ 3000 रुपीज़ ।

तिरंगा बेहोश होते होते बचा

तिरंगा : क्या ??, 3000…. इतना महंगा ?

दुकानदार : क्या यह आपको महंगा लगता है, यही तो सबसे सस्ता वाला है ।

तिरंगा : गुर्रर्र यह सस्ता है ।

दुकानदार : और नही तो क्या, मेरे पास 50000 तक की मच्छरदानियां हैं ।

तिरंगा : प प पप पचास हजार !!!

इस बार तिरंगा चकरा गया

तिरंगा : भाई सोने के धागों के बनाया है क्या ।

दुकानदार : बिलकुल सही पकड़े हैं, यह सोने चांदियों से बनी हुई हैं, इन्हें एक ख़ास तरीके से बनाया जाता है, यह मच्छरदानियां सिर्फ Vip लोगों के लिए हैं हीही।

तिरंगा : ऐ.. भाई…मुझ गरीब के लायक भी कोई मच्छरदानी दिखाओ यार ।

दुकानदार : गरीब?…. एक मिनट आप तिरंगा ही हो न ?

तिरंगा : क्या दिख रहा हूँ। तिरंगा ही हूँ भाई।

दुकानदार : इसीलिए तो मैंने आपको यह मच्छरदानियां दिखाई थीं, मैंने सोचा आप सुपर हीरो हो इसलिए आप सोने चांदी की मच्छरदानियां लेंगे ।

तिरंगा : भाई इस वक़्त गरीबी चल रही है बुहुहुहु ।

दुकानदार : सुनकर बहुत अफ़सोस हुआ ।

तिरंगा : तो फिर दिखाइए सस्ती मच्छरदानियां

दुकानदार : माफ़ कर दीजिये तिरंगा जी पर मेरे पास इसके अलावा और कोई मच्छरदानी नही है,सस्ती तो एकदम नही ।

तिरंगा : कोई बात नही ।

कहकर तिरंगा मुंह लटकाकर बाहर निकल जाता है……..
थोड़ी देर बाद वो एक दूसरी दुकान पर पहुँच जाता है..

दुकानदार : आवा आवा कऊन सी नाटक कंपनी से हवा हो ।

तिरंगा : गुर्रर्रर्रर्र तिरंगा हूँ मैं ।

दुकानदार : तिरंगा ???

तिरंगा : हाँ……… पहचाना नही ?

दुकानदार : अजी हटावा तिरंगा हो चाहे कुच्छो हमसे का मतलब, ई बतावा तुके चाहि का ।

तिरंगा : मच्छरदानी चाहिए बढ़िया मगर सस्ती वाली ( 💭 गुर्रर्र साला जबसे अपराध खत्म हुआ है साला कोई हमें पहचानता ही नही बुहु💭)

थोड़ी ही देर में तिरंगा के सामने वो दुकानदार कई सारी मछरदानियां निकाल कर रख देता है

तिरंगा : ( एक बढ़िया मच्छरदानी देख कर) यह कितने की है ??

दुकानदार : खाली 500 सौ रुपिया ।

तिरंगा : (💭अरे बाप रे 500 रूपए, यानी मेरे पास एक रुपया भी नही बचेगा बुहु फिर मैं कार्गोलि कैसे लूँगा भूख भी लगी है ज़ोर की क्या खाऊंगा घर में कुछ भी नही है, बुहुहुहुहुहुहुहुहुहुहुहुहुहुहु 💭)

बेचारे तिरंगा की ज़िन्दगी तो पूरी तरह झंड हो चुकी है बुहुहुहु ( मुझे भी रुलाई आ रही है )

तिरंगा : भाई कुछ कम नही करेंगे क्या ??

दुकानदार : चलो भाई अब तुम इतना कहत हो तो एक रूपिया कम कर देइत है,लाओ दो 499 रुपिया ।

तिरंगा : हैं……..भाई साहब क्या मज़ाक कर रहे हैं?

दुकानदार : देखो भाई इससे जादा कम न हो पाई ।

बेचारा तिरंगा लाख हाथ पैर जोड़ता रहा लेकिन उस गंवार बिहारी दुकानदार ने उससे कम नही किया, बेचारा तिरंगा हारकर आखिर कार ले ही लेता है 499 की मच्छरदानी……और फिर 1 रुपया लेकर वो बेचारा मुँह लटकाकर बाहर आ जाता है, और एक टॉफियों की दुकान पर पहुंचता है

तिरंगा : भाईसाहब एक एक्लेयर्स देना ।

दुकानदार : 2 रुपया दो ।

तिरंगा : क्या 2 रूपए की हो गयी ?

दुकानदार : और नही तो क्या, Gst लग गया है।

तिरंगा : भाईसाहब एक रूपए का कोई सामान नही है ।

दुकानदार : हैं……??? हाँ है यह लो ।

कहकर दुकानदार उसे एक रूपए वाली पपड़ी थमा देता है, तिरंगा लेकर जाने लगता है, तभी दुकानदार का ताना उसके कानों में पड़ता है

दुकानदार : गुर्रर्र पता नही कहाँ कहाँ से आ जाते हैं जेब में 2 रूपए भी नही रहते गुर्रर्रर्रर्र।

तिरंगा बेचारा मुंह लटकाकर वहाँ से निकल लेता है, तिरंगा अभी थोड़ी ही दूर पहुंचता है की तभी ब्रह्माण्ड रक्षकों की फ्रीक्वेंसी पर एक मैसेज आता है डोगा के द्वारा, तिरंगा ध्यान से सुनता है ।

डोगा : ( ब्रह्माण्ड रक्षकों की फ्रीक्वेंसी पर ) सभी ब्रह्माण्ड रक्षक एक ज़रूरी सूचना सुनें , मैं डोगा, आप सभी को ब्रह्माण्ड रक्षकों के हेडक़्वारटर पर तशरीफ़ लाने की विनती करता हूँ यहाँ एक ज़रूरी मीटिंग करनी है, जल्द से जल्द पधारें ।

तिरंगा : ( गहरी सांस लेकर ) फू… अब हो सकता है शायद वहां कुछ खाने को मिले।

●तृतीय अध्याय समाप्त●

【 चतुर्थ अध्याय ◆ अज्ञात रिश्तेदार】

तिरंगा फ़ौरन रवाना हो जाता है, यह मैसेज सभी सुपर हीरोज़ के पास पहुँच चुका था
नागद्वीप में नागराज
राजनगर में ध्रुव, इंस्पेक्टर स्टील
दिल्ली में परमाणु, तिरंगा
असम में सिर्फ कोबी क्योंकि भेड़िया मूर्छित पड़ा हुआ था
रूपनगर में, एन्थोनी के पास भी मैसेज पहुँच चुका है पर चूंकि इस वक़्त दिन है इसलिए उसने मैसेज नही सूना क्योंकि वो अपनी कब्र के अंदर सो रहा है हीहीही,…….जल्दी ही तिरंगा हैडक्वार्टर पहुँच गया जहां ध्रुव, इंस्पेक्टर इंस्टील,परमाणु,कोबी, पहले से मौजूद थे।

तिरंगा : (अपनी सीट पर बैठते हुए) हैल्लो गाईज़ और क्या हाल चाल है ।

परमाणु : वही जो तेरा है हीही।

तिरंगा : बुहुहु मुझसे बुरा हाल किसी का नही होगा बुहुहुहुहुहुहुहुहुहुहुहु।

परमाणु : अरे अरे अरे रोने क्यों लगा आखिर क्या हुआ है ?

तिरंगा : दो दिन से खाना नही खाया हूँ,एक रूपए वाली पपड़ी खानी पड़ रही है, ऊपर से मच्छरों ने काट काट कर शरीर से आधा खून ही निकाल दिया है ।

इंस्पेक्टर स्टील : तब तो तेरा सबसे बुरा हाल है।

कोबी : हाँ बहुते बुरा हाल ।

ध्रुव : घबराओ मत तिरंगा, अपने यार डोगा ने 10 किलो बिरयानी और साथ में कोल्डड्रिँक्स का इंतजाम कर रखा है ।

तिरंगा : ( लार टपकाते हुए ) क्या किस ख़ुशी में ।

ध्रुव : यह तो वही बताएगा, हम सबको यहाँ बुला लिया है और खुद पता नही कब आएगा ।

कोबी : ( तिरंगा से भी ज़्यादा लार टपकाते हुए ) बिरयानी कऊन चीज की है, खरगोश की हई न ।

परमाणु : ( कोबी की तरफ देखते हुए ) साला जानवर कहीं का ।

तिरंगा : भाईलोग लेकिन यह नागराज कहाँ है ।

ध्रुव : वो नागद्वीप गया हुआ है ।

परमाणु : क्या करने ।

ध्रुव : अरे वो कालदूत विसर्पी की शादी करवा रहा है न….

तिरंगा : (बीच में ही) क्या ???? नागराज शादी कर रहा है हम सब को क्यों नही बुलाया?

ध्रुव : अरे पूरी बात तो सुनो, कालदूत ने विसर्पी के लिए दूसरा लड़का देखा है उसी से उस्की शादी करवा रहा है। वही नागराज गया है ताकि उसे रोक सके ।

तभी इंस्पेक्टर स्टील बोलना शुरू कर देता है

स्टील : ध्रुव । मैंने सुना है की रोबो ने तुम्हे दो दिन का टाइम दिया है नताशा से शादी करने के लिए, और रिचा ने भी ।

ध्रुव : तुमने कहाँ से सुन लिया ??

स्टील : अरे भाई सुपर हीरो हूँ, इतना तो जानकारी रखूँगा ही अपने शहर की ।

परमाणु : अरे बाप रे। ध्रुव अब क्या करोगे तुम ?

ध्रुव : गायब हो जाऊँगा कुछ दिनों के लिए, जब वो दोनों थकहार कर किसी और से शादी कर लेंगी तब वापस आऊंगा ।

तिरंगा : लेकिन जाओगे कहाँ तुम?

ध्रुव : वही तो सोच रहा हूँ ।

कोबी : हमरे गुफ़वा में चले अइयो ।

सब कोबी को घूरकर देखने लगते हैं

कोबी : क्या भुआ ?

परमाणु : अरे यार बेचारे ध्रुव की लगी पड़ी है और तू मज़ाक उड़ा रहा है ।

कोबी : मजाक नाही हम सच बोल रहा हूँ…

तभी दरवाज़ा भड़ाक की आवाज़ के साथ खुलता है, और डोगा प्रवेश करता है, और चलता हुआ आकर अपनी सीट पर बैठ जाता है

ध्रुव : हाँ तो फरमाइए जनाब आपने क्यों बुलाया हमें?

डोगा : अरे पहले आप लोग दावत तो उड़ा लें, पहली बार दावत दी है।

कहकर डोगा ताली बजाता है, और दो सेवक एक बड़ा सा बिरयानी से भरा देकचा लेकर प्रवेश करते हैं साथ में स्प्राइट और माज़ा की कई बोतलें भी थी, वो सभी के आगे प्लेट लगा कर और कोल्डड्रिँक्स की एक एक बोतलें रख कर निकल लेते हैं

डोगा : हूरना शुरू कीजिये , ऐं… मेरा मतलब दावत शुरू कीजिये ।

कोबी पहले ही देकचे पर कूद पड़ता है और जल्दी जल्दी ढेर सारी बिरयानी अपनी प्लेट में डालना शुरू कर देता है

तिरंगा : ( गुर्रर्र) हूर ले बे हूर ले पूरी 10 किलो बिरयानी अकेले हूर ले गुर्रर्रर्रर्र, अबे मुझ भूखे को भी तो लेने दे ।

परमाणु : कोबी हिसाब से ले, देख तेरी प्लेट में जगह ख़त्म हो गयी है अब क्या सारी बिरयानी बेंच पर पलट लेगा गुर्रर्र।

ध्रुव : कोबी शांत शांत, पहले उतना तो खत्म करो जितना तुम्हारी प्लेट में है ।

डोगा : अबे इस जानवर को किसने बुलाया था ??

इंस्पेक्टर स्टील : ( डोगा की तरफ तिरछी नज़र करके ) मेरे ख्याल से मैसेज तुम्ही ने किया था सबके पास ।

डोगा : अबे मुझे क्या पता था की इस गंवार को भी तुम लोगों ने ट्रांसमीटर थमा रखा है ।

और फिर ध्रुव कोबी को समझाता है, कोबी फिर शांत हो जाता है और अपनी सीट पर बैठ जाता है अब सभी हूरना शुरू करते हैं म मम मेरा मतलब खाना शुरू करते हैं, कुछ देर बाद जब वो सभी खा पी कर टुन्न हो जाते हैं, तब डोगा शुरू हो जाता है

डोगा : हाँ तो दोस्तों अब आपलोग सुने की मैंने आप लोगों को क्यों बुलाया है।

कहकर डोगा अपनी जेब से वो चिट्ठी निकालता है जो उसे उस अनजान व्यक्ति ने दी थी जो डोगा को ढूंढता फिर रहा था।

ध्रुव : यह क्या मज़ाक है डोगा एक चिट्ठी दिखाने के लिए हमें यहाँ बुलाया था क्या ?

डोगा : अरे भाई मज़ाक क्यों करूंगा मैं सुबह सुबह ।

स्टील : शाम के चार बज रहे हैं ।

डोगा : हाँ तो मेरी सुबह चार बजे शाम को ही तो होती है हीही, सॉरी, लो अब तुम लोग ज़रा इसे पढ़ो तो।

कहकर डोगा वो चिट्ठी ध्रुव की तरफ बढ़ा देता है, ध्रुव उसे पढ़ना शुरू करता है

ध्रुव : ✉ प्यारे डोगा,
तुम्हारे अहसान की वजह से अभी
तक मैं जीवित था पर अब मेरा
टाइम पूरा हो चुका है अब मैं इस
दुनिया से जाने ही वाला हूँ और मैं
सोच रहा हूँ की जाते जाते तुम्हारा
अहसान उतारता जाऊं इसलिए मैं
अपनी एकलौती विशाल हवेली
तुम्हारे नाम कर रहा हूँ,
मैं तुम्हारा एक पुराना रिश्तेदार हूँ मेरा
और तुम्हारा खून का रिश्ता है और
यह खून का रिश्ता तुमने ही बनाया था…

परमाणु : ( बीच में ही ) खून का रिश्ता तुमने ही बनाया था , डोगे कौन सा काण्ड करके बैठा है तू ?।

डोगा : कसम बारूद की मैं कोई काण्ड नही किया मेरे भाई ।

तिरंगा : चुप करो भाईलोग, ध्रुव तुम आगे पढ़ो।

ध्रुव फिरसे पढ़ना शुरू करता है

ध्रुव : ✉ बस मैं अब और नही लिख सकता
मेरे हाथ कांपने शुरू हो चुके हैं, बस
इस चिट्ठी के साथ मैं उस हवेली के
कागज़ात भेज रहा हूँ वो हवेली बहुत
बड़ी है तुम उसमे मौज करोगे बस अब
मेरे सर से एक बड़ा बोझ उतर गया
अब मैं चैन से मर सकूंगा,
तुम्हारा रिश्तेदार ..✉

उसने आगे अपना नाम लिखने की कोशिश की होगी पर तभी वो दम तोड़ गया होगा ।

स्टील : बेचारा…… ऐसे ऐसे लोग भी हैं दुनिया में जो मरते वक़्त भी दूसरों का अहसान उतारने की कोशिश करते हैं ।

तभी परमाणु बोल पड़ता है

परमाणु : डोगा तो अब तुम इन्तिज़ार क्या कर रहे हो ले चलो हमें भी वहीँ पर मौज मस्ती करेंगे कुछ दिन ।

डोगा : हाँ हाँ क्यों नही मैं वो हवेली देख आया हूँ बहुत ही शानदार हवेली है। कुछ आदमियों को भेजकर मैंने साफ़ सफाई भी करवा डाली है, लेकिन यह बात मुझे खाए जा रही है की आखिर मेरा वो अनजान रिश्तेदार कौन था जिसके पास इतनी बड़ी हवेली थी…

तिरंगा : अरे यार छोडो वो, पहले चलो हवेली पर वहां पहुँच कर यह बात भी हो सकता है मालूम चल जाए ।

डोगा : ठीक है चलो चलते हैं ।

और फिर शाम 7 बजते बजते वो सब अपना अपना सामान पैक करके निकल लेते हैं, कुछ ही देर में वो सभी उस हवेली के गेट के सामने खड़े थे, वो हवेली शहर से बहुत दूर एक बहुत ही बियाबान इलाके में थी और वहां दूर दूर तक किसी जानदार चीज़ का नामों निशाँन तक न था चारों तरफ सिर्फ जंगल थे, हालांकि डोगा ने साफ़ सफाई करवा दी थी पेंट भी करवा दिया था पर इस वक़्त वो हवेली फिर भी डरावनी लग रही थी क्योंकि अन्धेरा हो चला था, वो सब गेट के सामने खड़े थे डोगा ताला खोल रहा था, की तभी तिरंगा थर थर कांपने लगा

तिरंगा : जय हनुमान ज्ञान गुण सागर…….

भूत पिशाच निकट नही आवें महावीर जब नाम सुनावें……

तभी कोबी भी कांपने लगा

कोबी : जय भेड़िया देवता…..
भूत पिसाच नकट नाही आवें भेड़िया देवता जब नाम सुनावें ।

डोगा : अबे अभी तो हमने हवेली में प्रवेश भी नही किया और तुम दोनों की चड्डियाँ फट कर हाथ में आ गयीं ।

और तभी उन्होंने किसी के आने की आहट सुनी, वो सन्न से पीछे मुड़े……पीछे नागराज खड़ा था

परमाणु : अरे बाप रे मैं तो डर गया था की कौन है, यह तो तुम हो नागराज ।

ध्रुव : लेकिन नागराज तुम तो नागद्वीप में थे, और तुम यहां कैसे आ गए, तुम्हारे पास तो यहाँ का पता भी नही होगा फिर तुम यहाँ कैसे आगये ???????

ध्रुव के ये प्रश्न करते ही सबकी सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी

【चतुर्थ अध्याय◆समाप्त】

क्रमश : : : :

हा हा हा दोस्तों अब शुरू होने वाला है भूतहा सफर बस आपलोग साथ देते रहें। आपलोगों से एक बात और कहनी है, हम लेखक लोग इतनी मुश्किल से टाइम निकाल कर यह स्टोरियां लिखते हैं इसमें हमारा दिमाग भी खपत होता है पर हम लिखते है। क्योंकि हमें मनोरंजन करना है आपका, किसी इंसान के चेहरे पर मुस्कुराहट भिखेर देना भी एक नेकी है हम इसलिए लिखते हैं, हम आपलोगों के लिए लिखते है वरना हमें खुद के लिए लिखने का थोड़ी न कोई शौक है , और कभी कभी तो दो दो दिन का टाइम लग जाता है स्टोरी लिखने में सोचने में अलग दो दिन लग जाते हैं, और फिर इतनी मेहनत करने के बाद हम स्टोरी पूरी करते है और फिर हमारी स्टोरियां इस वेबसाइट पर पब्लिश होती हैं और बदलें में हमें मिलता क्या है सिर्फ चन्द लोगों के reviews वो भी दो दो तीन लाइन की एक या दो लोग ही ऐसे हैं जो लम्बा review देते हैं, बाकी दो चार लोग एक या दो लाइन लिखते हैं और कट लेते हैं, और कुछ लोग तो वो भी नही लिखते सिर्फ स्टोरी पढ़ते और निकल लेते हैं।
मेरे भाइयों और बहनों मैं आपलोगों से यही कहना चाह रहा हूँ के आप सब लोग reviews दिया करें और कम से कम 10 लाइन की review दिया करें । कितना टाइम लगेगा इसमें ? सिर्फ दो या तीन मिनट ही तो लगेंगे हम लोग आप लोगों के लिए चार चार दिन का टाइम निकाल कर आपलोगों के लिए लिखते हैं और आपलोग बदले में हमारे लिए चार या पांच मिनट निकाल कर रिव्यू नही लिख सकते। अगर आपको समझ में नही आ रहा है की आप क्या लिखें क्या रिव्यू दें तो आपलोग उस स्टोरी में से ही कुछ मेन पॉइंट्स छाँट लें और फिर उसपे ही रिव्यू लिख दें मगर 10 लाइन से कम न हो उससे ज़्यादा हो जाए तब तो और अच्छा है, हम स्टोरियां लिखते हैं और बदले में सिर्फ आपलोगों के रिव्यूज़ का इंतज़ार करते हैं। आशा है आप लोग मेरी बात को समझ गए होंगे। मिलता हूँ आपसे अपनी अगली स्टोरी में तब तक खाइये पीजिये मौज कीजिये अपना ख्याल रखिये ठण्ड बढ़ गयी है। और हाँ , इस नाचीज़ को दुआओं में याद रखियेगा।

विदा 🙏

Apradh Unmoolan Ke Baad Part 2

अपराध उन्मूलन के बाद  भाग – 2  ●●●●●●●●●●●●●●● सूरज को मिली चिट्ठी✉✉✉✉✉✉●●●●●●●●●●●●●●● ************* रात का गहरा अन्धेरा छाया हुआ है पूरी सड़क पर सन्नाटा बिखरा हुआ है हर कोई अपने …

Written By – Talha Faran for Comic Haveli

 

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17 Comments on “Apradh Unmoolan Ke Baad Part 3”

  1. kahani ab kuchh judti hui najar aa rahi hai .
    jaise ki dhruv natasha aur richa se bachne ke liye gayab hona hi chahta tha , parmanu bhi kshipra se tang hai , toh shayad ab voh wakai me kahin gayab hone wale hain.
    tiranga ki gareebi ne hume bhi rula diya ,
    dhruv ka haal halanki sabse bura hai lekin tiranga se bura nahi nahi hai phir bhi.

  2. Super hero ki story about bhutha hone wali hai maza and wala hai agle parts main. Tiranga ki halat bahut hu kharab lag rahi Hai lagta Hai kharab halat ki wajah see koi Ulta kand na Kar de apnee personality ke hisab se. Nagraj haveli aaya ya uska rup dhar Kar koi but aa gaya sabki band bajane pata chalega agle part main.

      1. आपने बहुत ही बेहतरीन स्टोरी लिखी है जब आज 3 महीनों से कोई नई कॉमिक पढ़ने को नहीं मिल रही आपके ये लेखन मुझे बहुत ही ज्यादा मजा देते है

        धन्यवाद मजा आ गया

  3. Jabardast chal rhi h story… Maja aa rha h… Dhruv ki gadi sahi ja rhi h aise hi naagraj ki b n sabki… Tiranga ko to … Bahut sarahniy kahani

  4. काफी अच्छा लिखा है मजेदार स्टोरी है10 आउटऑफ 10
    बेचारे तिरंगा के तो बहुत बुरे दिन आ गए 1 rs की पपड़ी से गुजारा करना पड़ रहा है
    अगले पार्ट का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा ताल्हा भाई

  5. Bahut hi dhansu
    Tiranga ki haalat dekhi nahi ja rahi thi
    Bechare ko kam se kam khana to mila
    Doga bhi dildar nikla
    Bande ne biryani khila kar sabka dil jeet liya aur tiranga ka pet.. Hihihi
    Ab aate hain story me
    Bilkul hi naye mod par story aa chuki hai
    Ye nagraj kaun hai aur kaise pahucha?
    Nagu ka kya hua
    Aur agar yahi asli nagraj hai to bhai nagdweep me kaun hai
    Richa aur natasha ka cat fight maza aa gaya
    Bechara apna captain pis gaya… Hihihi… Buhuhu
    Bhediya bhi behosh pada hai
    Uff bahut kuch baki hai abhi to
    Filhal to ye haveli kiski hai wahi nahi pata chal raha hai
    Talha ji jaldi hi agla part laiye aur chahe kuch bhi likhna par bechare bhukhe tiranga ka pet bharte rahna….

  6. आप सब लोगों का तहे दिल से शुक्रिया, इतना प्यार देने के लिए

  7. gazab ka twist diya bhaijaan main to jabra fan ho gya….. 😀
    Tiranga ki gareebi ka rona SCD aur Parmanu ki dual love life… hehehe….
    oh.. Sanpole ka to bhul gya tha…. hehehe…
    steel ko aur space dedo bhai aap b RC na bano…
    par is story mein Doga ki to khub chaandi huyi h…
    phle Suraj k roop mein Monica k saath normal life
    aur ab Haveli…..
    kaun h woh ajnabi ???
    badiya jaa rhe ho ama miyan
    ese hi likhte rho….

  8. शानदार स्टोरी है।
    नागराज को विशर्पि से मिलने नागदीप चला जाता है।
    और अपने जगह नाग को महानगर में रहने को कहता है
    ध्रुव बेचारा दोनों के बीच पिस रहा है।
    नताशा को मनाता है तो ऋचा नाराज हो जाती है।
    ऋचा को मनाता है तो नताशा रुठ जाती है।
    उसकी हालत खराब है।
    दोनों उसे 2 दिन का टाइम देती है शादी करने के लिए
    तिरंगा की भी हालत खराब है।
    1rs की पपड़ी खाकर दिन गुजरना पड़ रहा है।
    ऐसे समय मे डोगा आकर सबको बिरयानी की दावत देता है।
    अब डोगा के अनजान रिस्तेदार कौन है।
    जिसने उसको हवेली गिफ्ट दिया।
    सभी हवेली देखने चले जाते है।
    हवेली देखकर सबको होश उड़ा जाता है।
    वो एक भूतिया हवेली थी।
    लास्ट में नागराज की एंट्री सबको सस्पेन्स में डाल दिया है।
    वो तो नागदीप में था यहाँ कैसे आ गया है
    अब इस हवेली में आगे क्या होता है।

  9. ary baap ry…..comedy hi comedy….aur punch bi eyshy ki hssi rukny ka naam hi nhi ly rhi…..ab tho bus yeh mn krta hy ki kaash yeh story motion picture m hoti….agr eyshaa hotaa tho aur bi mjaa aa jata..lekin aapki taarif krni pdegii….hr ik seen eyshaa lg rha thaa jese vo aankhy ky saamny hi ho raha hy …aur yeh baat such m kaabily taarif hy

  10. Is part me shuru me nagraj ne khub beijjati ki kadha purush ki ..
    Fir dharu ke halat ne bhi bahut beijjati kr di kadha purus ki …
    Lekin tiranga ki beijjati ke level tak nhi pahuch paya he wo abhi tak…
    Aage ka review janne ke liye padhe next part ka review ..
    Apka apna lazy

  11. भाई बहुत जोरदार स्टोरी है। मजा आ गया पढकर।ध्रुव का प्रेम त्रिकोण बहुत मजेदार रहा।रोबो और रिचा की धमकी। ये सब किसी फिल्म की तरह चल रहा है।
    और फिर तिंरगा की गरीबी को भी बहुत बढिया तरीके से दिखाया गया है।कुल मिलाकर स्टोरी जोरदार है।

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