Apradh Unmoolan Ke Baad Part 4

अपराध उन्मूलन के बाद

( पार्ट 4 )

【प्रथम अध्याय◆हवेली में प्रवेश】

सभी सुपर हीरोज़ डरे हुए खड़े थे और उनके पैर काँप रहे थे ध्रुव के चेहरे पर भी डर साफ़ नज़र आ रहा था, उन्हे यकीन नही हो रहा था की यह नागराज है क्योंकि नागराज तो नागद्वीप गया था और मान लो अगर नागराज नागद्वीप से आ भी गया था तो वो तुरन्त यहाँ कैसे पहुँच गया और सबसे बड़ी बात उसे यहाँ के बारे में मालूम कैसे हुआ। अभी सब यही सोच रहे थे की तभी डोगा हंसा और बड़ी ज़ोर से हंसा

डोगा : हा हा हा हा हा हा हा ।

तिरंगा : ( फुसफुसा कर)ए भाई अब तू ऐसे भूतों की तरह क्यों हंसने लगा बुहुहु।

डोगा फिर भी हंसता रहा और फिर तभी अचानक नागराज भी हंसने लगा

नागराज : हा हा हा हा हा ।

परमाणु कांपते कांपते ध्रुव के कान में फुसफुसाता है

परमाणु : अबे यार हम फंस गए हैं,मुझे तो लगता है यह दोनों भूत हैं बुहुहु।

ध्रुव अपना थूक निगलते हुए डोगा से बात करने की कोशिश करता है उसके मुंह से शब्द कांपते हुए निकलते हैं

ध्रुव : अ ब ब…बोगा म मेरा मतलब डोगा…ए भाई डोगा क्या बात है…ता तू हंस क्यों रहा है।

ध्रुव डोगा के कन्धे पर हाथ रखता है डरते डरते, तभी डोगा उसके हाथ को झटकार देता है

डोगा : अबे हट यार-तुमलोग न-अच्छे से हंसने भी नही देते गुर्रर्रर्रर्र।

कहकर डोगा फिर नागराज की तरफ ताकता है-और फिर-नागराज बोल पड़ता है

नागराज : चलो डोगा शांत हो जाओ अब बहुत ले लिया गया इन लोगों का मज़ा हा हा ।

ध्रुव और बाकी सब अभी कुछ समझ पाते की तभी-डोगा उनसे बताना शुरू कर देता है

डोगा : अबे तुमलोग झूठमूठ का डर रहे हो-यह अपना नागराज है – असली वाला। दरअसल बात यह है की जब मैंने तुमलोगों को मैसेज किया था ब्रह्माण्ड रक्षकों की फ्रीक्वेंसी पर तब नागराज नागद्वीप से निकल चुका था उसने मुझसे मैसेज करके बताया की आधे घण्टे में महानगर पहुँच जायेगा और फिर हैडकवार्टर पर आएगा, तो मैंने इसे मना कर दिया,क्योंकि जबतक यह वहां पहुंचता तबतक तो हमलोगों की मीटिंग खत्म हो जाती-और वैसे भी कोई ज़रूरी मीटिंग तो थी नही,की सबका होना ज़रूरी था,तो मैंने नागराज को यहाँ का पता दे दिया और कहा की एक एकलौती हवेली तुमको इस इलाके में मिलेगी तुम वहीँ आ जाना अभी हम सब वहीँ रवाना होंगे, ।

डोगा एक पल सांस लेने को रुका

डोगा : हाँ लेकिन मुझे यह नही पता था की यह महाराज, इतनी जल्दी यहाँ आ जायेंगे।

ध्रुव और बाकी सब ने बड़ी गौर से यह बातें सुनी, और जब डोगा की बात समाप्त हुई इंस्पेक्टर स्टील डोगा पे कूद पड़ा

स्टील : ( डोगा का गला पकड़कर नचाते हुए) अबे भूतिये तो हमसब को यह बात बताने के बजाए और हंस हंस कर हमारा डर क्यों बढ़ा रहा था बे। बेचारे तिरंगा की चड्ढी गीली होते होते बची है और कोबी की पीली होते होते गुर्रर्रर्रर्र ।

तिरंगा और कोबी झुककर अपनी अपनी चड्डियाँ निहारने लगते हैं

डोगा : ( गला छुड़ाते हुए ) गला छोड़ बे साले टीन के-क्या-क्या मैं हंस नही सकता क्या, और तुम सब कैसे ब्रह्माण्ड रक्षक हो रे, नागराज को देखकर डर गए अगर सच का भूत देख लिया तब क्या होगा।

परमाणु भी बोल पड़ता है

परमाणु : अबे तो ऐसे कौन हंसता है बे। साला ऐसे हंस रहा था जैसे शोले का मोगैम्बो। ऐसे हंसेगा तो हम डरेंगे नही।

स्टील : शोले में मोगेम्बो कहाँ था बे??

तिरंगा : गब्बर था-गब्बर-डाकू गब्बर सिंह।

परमाणु : अरे हाँ भूल गया। डाकू बब्बर सिंह हीही।

स्टील : अबे गब्बर ।

परमाणु : ओ स सॉरी सॉरी-गब्बर-हीहीही।

तिरंगा : हाँ मुझे भी लगा की इस डोगे के अंदर गब्बर का भूत घुस आया है।

तभी कोबी की गुस्सा भरी आवाज़ सुनाई दी। लग रहा था कोबी ने अभी उनलोगों की बात चीत पर ध्यान दिया था

कोबी : अबे गुर्रर्र, गब्बर को कोनो कुछ बोलिस,तो टँगरि धई के चीर देब ।

परमाणु : अबे हम शोले के गब्बर की बात कर रहे हैं। तुझे क्यों प्रॉब्लम हो रही है।

कोबी : उ हमारे फेरवेट हैं।

तिरंगा : फेरवेट नही फेवरेट।

कोबी : अब तू हमके सिखैबे अंगरूजि।

परमाणु : अबे अंग्रेज़ी। अंगरूजि नही ।

कोबी : गुर्रर्रर चुप रह बे।

स्टील : अबे लेकिन कोबी गब्बर तेरा फेवरेट कैसे हो गया बे-कबसे हो गया बे…

परमाणु : हाँ कहाँ देख लिया तूने गब्बर को।

कोबी एक अलग मुस्कान लेकर अपनी चड्ढी के पिछले साइड से कुछ निकालता है, और सबको दिखाते हुए कहता है

कोबी : हई देखो सब-मोबाइर-एही में देखलि रहली हीहीही।

परमाणु आँखें फाड़कर ताकता हुआ बोलता है

परमाणु : अबे तेरे पास मोबाइल कहाँ से बे????

कोबी कुछ नही बोलता है सिर्फ अजीब ढंग से मुस्कुराता है

तिरंगा : (मोबाइल हाथ में लेते हुए) ओ-तो इसी में देखि तुमने शोले।।

परमाणु : कौनसी मोबाइल है बे।

तिरंगा आगे पीछे करके देखता है

तिरंगा : पता नही कुछ लिखा तो नही है। सिर्फ आधा कटा हुआ सेब बना हुआ है हीहीही।

स्टील : गुर्रर्रर्रर्र जाहिल तिरंगे।अबे आई फ़ोन है यह।

इस बार डोगा चौंककर उनकी तरफ लपकता है

डोगा : क्या?? क्या बोला बे??आई फ़ोन। किसके पास।

नागराज और ध्रुव भी वहीँ आ जाते हैं उन सबके पास

ध्रुव : किसके पास आई फ़ोन है भाई।

तिरंगा : यह देखो अपने कोबी भाई आई फ़ोन चला रहे हैं।

तिरंगा सबको दिखाता है कोबी की मोबाइल

नागराज : अबे!!! हमारे पास सैमसंग नही। और यह मियां एप्पल चलावत बाटे!!

ध्रुव : कहाँ मिला?? किसने दिया??

डोगा : क्यों बे जंगली। तूने भी जेब काटनी सीख ली..

कोबी : गुर्रर्रर्रर्र! आपन तरह समझले है क्या बे पिल्ले ।

डोगा : पिल्ला किसको बोला बे!!

कोबी : तै जंगली के के बोलले बे।

डोगा : जंगली को जंगली नही बोलूंगा तो क्या शहरी बोलूंगा बे गुर्रर्र!!

कोबी : हम भी कुत्ता को कुत्ता नही बोलूंगा तो क्या गधा बोलबा!!

डोगा : लेकिन तूने कुत्ता नही बोला।

कोबी : ठीक है अब बोल देइत है, कुत्ते!

डोगा : गुर्रर्र!! अबे तेरे बम में बम डाल दूंगा-मुझसे बेअंदाजी मत बतिया।

कोबी : बेअंदाजी ते बतियते बाड़े!!

ध्रुव बीच बचाव करता है

ध्रव : शांत हो जाओ शांत हो जाओ दोस्तों। कोबी! तुम्हे नही बताना-मत बताओ की यह मोबाइल कहाँ से मिली। और डोगा! तुम भी शांत हो जाओ।… एक तो अन्धेरा घिरता चला जा रहा है और तुमसब यहाँ बाहर खड़े होकर बकवास कर रहे हो-चारों तरफ जंगल है,अजीब अजीब जानवरों की आवाज़ें आ रही है हमे जल्द से जल्द हवेली में प्रवेश कर जाना चाहिए।

डोगा और कोबी शांत हो जाते हैं, डोगा जल्दी जल्दी गेट का ताला खोलता है, और सब अंदर घुस जाते हैं-हवेली के आगे एक बड़ा मैदान था। वो सब घास पर चलते हुए जा रहे थे घास में चलने से उन सबके पैरों से घस घस की आवाज़ आ रही थी, तभी कोबी ज़ोर से चीखने लगा

कोबी : आह काट लिहिस बे काट लिहिस।

सब वहीँ रुक गए,कोबी अपनी एक टांग पकड़कर वहीँ कूदने लगा

परमाणु : अबे क्या हुआ बे कोबी! कौनसी भाषा में चिल्ला रहा है बे??

तिरंगा : अबे यह कह रहा की किसी चीज़ ने इसकी पैर में काँट लिया है।

स्टील : वाह बे तिरंगे। कोबी चाहे जिस भी भाषा में बोले तुझे तुरन्त समझ आ जाता है।

कोबी अब अपने एक पैर को पकड़े पकड़े ही ज़मीन में लोटने लगा, अँधेरे में किसी को कुछ दिख नही रहा था इसलिए यह पता नही चल पा रहा था की किस चीज़ ने काटा है

ध्रुव : एक काम करो। कोबी को उठाकर सब अंदर हवेली में ले चलो वहां देखते हैं इसे किस चीज़ ने काटा है।

●प्रथम अध्याय समाप्त●

【द्वितीय अध्याय◆झगड़ा झगड़ा माफ़ करो】

और फिर सब कोबी को उठाकर अंदर ले आते हैं, डोगा जल्दी जल्दी सारी लाइटें ऑन कर देता है-तभी परमाणु डोगा को एक सवाल दागता है

परमाणु : अबे लेकिन डोगा यहाँ यह लाइटें कैसे जल गयीं, क्योंकि यह तो शहर से बाहर है और यहाँ चारो तरफ जंगल है तो यहाँ बिजली कहाँ से आई?

डोगा के बोलने से पहले ही स्टील जवाब दे देता है

स्टील : अबे एटॉमिक लफंगे। यहाँ सोलर सिस्टम लग रखा है-बोले तो यह बत्तियां सौर ऊर्जा से जल रही है।

परमाणु : ओह अच्छा यह बात,एक मिनट!! तूने लफंगा किसे बोला बे इस्पात के ठुल्ले गुर्रर्र।

डोगा : अभी को गौर किया क्या बे हा हा हा, चलो आओ देखते हैं क्या हुआ है उस कोबी को।

उधर नागराज और ध्रुव कोबी के दायें पैर को देख रहे थे

नागराज : इसे किसी जहरीले सांप ने काँटा है।

ध्रुव : यकीन नही होता, आखिर कौनसा सांप था वो जिसके कांटने से कोबी जैसा शक्तिशाली भी लोटने लगा।

नागराज : यकीन तो मुझे भी नही हो रहा है, ऐसा सांप तो मेरे शरीर में भी नही है जो कोबी को काटकर ज़मीन सुंघा दे।

डोगा परमाणु स्टील भी वहां आ गए, कोबी अब तक बेहोश हो चुका था

नागराज : (ध्रुव से) और सबसे हैरानी वाली बात है, उस सर्प ने इसके शरीर में ज़हर नही छोड़ा।

डोगा भुनभुनाता है

डोगा : “यह तो बहुत बुरी खबर है”।

तिरंगा : डोगा कुछ कहा तुमने!

डोगा : अ ब ब नही तो हे हे।

नागराज : टेंशन लेने की ज़रूरत नही है दोस्तों अभी कुछ ही देर में इसे होश आ जायेगा, क्योंकि सांप ने इसके अंदर ज़हर नही छोड़ा।

डोगा : “टेंशन तो अब होगी-गुर्रर्र साला वो संपोला मुझे मिल जाये गर्दन मरोड़ दूँगा साला ज़हर की बचत कर रहा था क्या गुर्रर्र”

तिरंगा : डोगा क्या बड़बड़ा रहे हो तुम ??

परमाणु : मुझे लगता है बेचारे का दिमाग चल निकला है पता नही क्या क्या बड़बड़ा रहा है ।

डोगा : अबे एटॉमिक कीड़े चुप कर बे वरना-मुंह दे विच्च ग्रेनेड डाल दूंगा गुर्रर्र।

परमाणु : हाँ और मैंने जैसे चूड़ियाँ पहन रखी हैं गुर्रर्रर्रर्र।

ध्रुव इस बार चीख पड़ा

ध्रुव : अबे चुप करो बे!!!!! तुम सब कभी मिल कर नही रह सकते हो क्या, जब देखो तब मार पीट करने को तैयार रहते हो,हम यहाँ मौज मस्तियाँ करने आएं हैं कुछ दिन चैन से गुज़ारने आएं हैं और तुम सब आपस में ही झगड़ रहे हो गुर्र। मुझे और नागराज को देखो हम कभी लड़ते हैं क्या आपस में।

नागराज : हाँ देखो मैंने अभी तक एक बार भी ध्रुव को काढ़ा पुरूष कहा? नही न। और तुम सब ने पता नही क्या क्या नाम रख लिया है एक दुसरे का।

नागराज ने ध्यान दिया सब एकदम सन्न मार खड़े थे-मानो की अभी तूफ़ान आने वाला है-फिर नागराज ने ध्रुव की तरफ देखा , ध्रुव के जबड़े भींचे हुए थे

ध्रुव : काढ़ा पुरूष किसे कहा बे संपोले !!!

नागराज : अबे मैं तो उदाहरण दे रहा था, तू फमिया क्यों रहा है।

ध्रुव : क्या कहा मैं फमिया रहा हूँ!! छोड़ूंगा नही तुझे अब।

ध्रुव नागराज के ऊपर कूद जाता है, और उसकी गर्दन पकड़ लेता है और नागराज ध्रुव की गर्दन पकड़ लेता है दोनों में युद्ध शुरू होने जा रहा था की तभी तिरंगा ने बीच बचाव किया

तिरंगा : शांत हो जाओ भाई लोग। तुम दोनों टीम लीडर हो तुम्ही लोग आपस में लड़ोगे तो हम कैसे सही रह सजते हैं।

नागराज और ध्रुव एक दुसरे का गला छोड़ देते हैं

ध्रुव : गलती हो गयी यार ।

नागराज : मुझसे भी यार। हम दोनों भूल गए थे की हम ही आपस में लड़ने लगेंगे तो फिर तो हमारी टीम ही तबाह हो जायेगी।

तभी उनसब ने दो लोगों की लड़ने की आवाज़ें सुनी

“छोड़ दे बे गला फिर बताता हूँ”
“मैं तेरे दांत तोड़ दूंगा मारके”
“अबे छूकर तो दिखा-मुंह दे विच ग्रेनेड डाल दूंगा”

कुछ ही दुरी पर डोगा और परमाणु, एक दुसरे से भिड़े हुए थे, नागराज ध्रुव और सबने मिलकर ज़ोर से खंखारा-डोगा और परमाणु ने चौंककर उधर देखा और फिर एक दुसरे छोड़ कर दांत दिखाने लगे

परमाणु : नागराज और ध्रुव की फाइट खत्म हो गयी क्या?हीही

डोगा : बड़ी जल्दी खत्म हो गयी? हीहीही।

ध्रुव : ( गुस्से में ) हम लड़ ही कब रहे थे जो खत्म हो गयी!

डोगा : ( परमाणु को बाज़ुओं में दबोचकर) हम भी कहाँ लड़ रहे थे, हम तो बस मज़ाक कर रहे थे हे हे (दांत भींचते हुए )

परमाणु : हाँ हाँ हम तो बस मज़ाक कर रहे हैं।

कह कर परमाणु ने डोगा के पैरों को अपने पैरों से ठोकर दी, और डोगा परमाणु को लिए लिए ही ज़मीन पर गिर पड़ा

परमाणु : ( बच्चों की तरह खिलखिलाकर) हीहीही देखो डोगा मैंने तुम्हे गिरा दिया।

डोगा : हाँ लेकिन फिर अपने गले को मेरे बाज़ुओं से नही छुड़ा पाये देखो हीहीही।

कहकर डोगा उसका गला भींचना शुरू करता है

ध्रुव : बस बहुत हुआ अब क्या तुमलोग शांत हो गे? की मैं चटाई बम निकाल कर तुम लोगों की चड्डी में डाल दूं?

स्टील : भाई लोग लड़ाई लड़ाई माफ़ करो कुत्ते की…

स्टील की आवाज़ को उसके गले में ही रोक दिया तिरंगा ने अपना हाथ उसके मुंह पर रखकर। फिर ध्रुव और नागराज ने परमाणु और डोगा को समझा कर लड़ाई शांत कराई, और फिर सब आकर एक जगह सोफे पर बैठ गए, कोबी को भी अब होश आ चुका था

●द्वितीय अध्याय समाप्त●

【तृतीय अध्याय◆घर निकाला】

ध्रुव : कोबी। कैसा लग रहा है, कैसा फील कर रहे हो?

कोबी : (लार चुआते हुए) भूखा।

सचमुच अब रात ज़्यादा हो गयी थी, और अब सबके पेट में चूहे कूदना शुरू हो चुके थे

नागराज : अरे यार हम लोगों ने खाने का तो कुछ इंतज़ाम ही नही किया है।

डोगा : मैंने सब इंतज़ाम कर रखा है। सब कुछ मौजूद है।

कहकर डोगा किचन में पहुंचता है। वहां डोगा ने हर सामान मंगवा रखा था

डोगा : ( किचन से ही चिल्लाता है) कहो दोस्तों , क्या खाया जाए? बिरयानी बनाई जाए यह चिकन लेगपीस भून कर खाया जाए मिर्च मसाला लगा कर।

तिरंगा जीभ लपलपाते हुए बोला

तिरंगा : मैं तो कहता हूँ लेगपीस ही खाई जाए,स्लर्प।

ध्रुव : चलो भाई जैसा तिरंगा चाहे, चलो-आज लेगपीस की पार्टी करते हैं।

और फिर सबने मिलकर मुर्गों की टंगरियां फ्राई की थोड़ी ही देर में खाना तैयार था, डोगा ने फ्रीज़ में कोल्ड्रिंक की बोतलों की दुकान लगा रखी थी और नागराज के लिए कई साड़ी दूध की बोतलें भी थीं-सब डाइनिंग टेबल पर आये कोबी पांच पांच कोल्डड्रिंक्स की बोतलें लेकर बैठा था

डोगा : अबे कोबी के बच्चे एक ही दिन में ख़तम कर देगा क्या सारी कोल्डड्रिंक्स गुर्रर्रर्रर्र।

कोबी उसकी बात पर ध्यान दिए बगैर खाये जा रहा था, ध्रुव टँगरि नोचते हुए नागराज से बोला

ध्रुव : नागराज!

नागराज : हाँ!

ध्रव : तुमने बताया नही नागद्वीप में क्या क्या हुआ? और तुम्हारे साथ तो कोई प्रॉब्लम नही है फिर तुम यहाँ क्यों रहने आ गए?

नागराज : प्रॉब्लम नही है मेरे साथ!! सबसे बड़ी प्रॉब्लम है मेरे साथ, भारती ने मुझे घर निकाला दे दिया है।

सबके मुंह से एक साथ निकला : क्या!!!!!!!

नागराज : (सर झुकाते हुए) हाँ । उसने मुझे घर से बाहर निकाल दिया है और कहा है की दोबारा अपनी शकल मत दिखाना।

ध्रुव : क्या? लेकिन कैसे ? कब ? क्यों?

नागराज : बताता हूँ।

कहकर नागराज अपनी आपबीती उन्हें सुनाने चला-की तभी किसी आदमी के गाना-गाने की आवाज़ आई

## : छम्मक छल्लो-ओ मेरी छम्मक छल्लो-कहाँ है तू ज़रा सामने तो आ रे जानेमन।

कोबी : अबे यह कौन बेसुरा गावत बा? और कहाँ गावत बा??

नागराज : मुझे लगता है यह आवाज़ हवेली के पीछे से आ रही है।

ध्रुव : हाँ पीछे की ओर से ही आ रही है।

और तभी किसी औरत के पायलों की आवाज़ें आने लगी वो भी हवेली के पीछे की और से ही आ रही थी, और फिर वो औरत भी गाने लगी

## : ओ मेरे राजा आजा-इधर आजा।

परमाणु : बुहु अबे यह क्या हो रहा है बे यहाँ राजा रानी कहाँ से आ गए।

●तृतीय अध्याय समाप्त●

क्रमशः

और अन्त में पेश है, हवेली की ओर से आने वाले एक अनोखे सुपर हीरो की कहानी के किसी भाग से हल्का सा अंश

वो सब चलते चले जा रहे थे अभी ना जाने और कितना अंदर जाना था, ऐसे घने जंगल में ‛फ्रैडि’( उम्र’ लगभग 13 साल जो की एक दुबला पतला बेहद डरपोक लड़का है) को बहुत ज़्यादा डर लग रहा था

फ्रैडि : (अपने एक दोस्त से ) भाई मुझे बहुत डर लग रहा है, यह जंगल बहुत ही डरावना है और घना भी, मुझे यह सब पता होता तो मैं कभी भी पापा से जादू सीखने की ज़िद न करता।अगर मुझे पता होता की जादू सीखने में इतना खतरा है।

प्रोफ़ेसर खोजबीन( हालाँकि इनका नाम प्रोफ़ेसर खोजबीन नही था लेकिन कुछ शैतान बच्चों ने उनका यह नाम पूरे स्कूल में मशहूर कर दिया था। प्रोफ़ेसर खोजबीन’ बच्चों को नयी नयी खोज के बारे में बताते थे उनका काम था बच्चों को नयी नयी चीज़ों की खोज करना सिखाना, खासकरके उन दुर्लभ जानवरों की खोज जो दुनियां में अब छुप कर रहने पर मजबूर हो गए हैं जिनकी जातियां अब लुप्त होने की कगार पर पहुँच चुकी हैं

(अवन्या प्रकाश) एक बेहद ही प्यारी और मिलनसार लड़की जिसकी उम्र भी 13 के आस पास ही थी, उसकी आँखें नीली नीली और रंग गोरा था बाल काले घने और लम्बे थे वो ज़्यादातर अपने बालों की चोटी बनाकर रखती थी हालाँकि बोलती कम थी पर जब बोलना शुरू करती तो सामने वाले के कान पक जाते

और छात्र छात्राओं की भीड़ में एक लड़का ऐसा भी था जो सबसे अलग लगता था, वो बीच में चल रहा था और अपने होंटों को ऐसे चला रहा था मानो कुछ बड़बड़ा रहा हो तभी उसकी नज़र अवन्या पर पड़ी, वह उसे घूर रही थी, जैसे ही दोनों की नज़रें टकराई दोनों ने अपना चेहरा दूसरी ओर घुमा लिया-और उस लड़के का दोस्त जिसका नाम उत्कर्ष था जो एक मज़ाकिया किस्म का लड़का था उसने यह देख लिया

उत्कर्ष : वो तुम्हे हमेशा घूरा क्यों करती है, बोलो तो सुना दूं खरी खोटी, और किसी की तरफ तो नज़र भी नही उठाती और तुम्हे पता नही क्यों ताकती रहती है…

तभी प्रोफेसर खोजबीन की रौबीली आवाज़ गूंजती है(हालाँकि वह शांत किस्म के इंसान है उन्होंने आजतक किसी बच्चे के ऊपर हाथ नही उठाया है लेकिन फिरभी उनकी आवाज़ सुनकर बच्चे डर जातें हैंl) प्रोफेसर एक अजीब से दिखने वाले पेड़ के पास खड़े थे वो पेड़ बहुत ज़्यादा ऊंचा नही था, लेकिन उसका फैलाओ बहुत ज़्यादा था उसने अकेले न जाने कितने पेड़ों की जगह घेर रखी थी-और सबसे अजीब बात उसकी पत्तियां एकदम गहरे काले रंग की थी और उस पेड़ पर पक्षी बैठे थे, वो भी एकदम काले थे और पत्तियों मे छुपे हुए नज़र नही आ रहे थे सिर्फ उनकी अजीब कर्कश आवाज़ें सुनाई दे रही थीं। प्रोफेसर उस पेड़ के पास रुककर बच्चों से कह रहे थे

प्रोफेसर : बच्चों यह जो पेड़ तुमलोग देख रहे हो असल में यह एक आयाम द्वार है। ऐसा नही है की यह पेड़ तुम्हे किसी भी आयाम में ले जा सकता है-न-यह पेड़ सिर्फ एक ही आयाम से जुड़ा हुआ है वो आयाम जहाँ पर ग्रिफिन्स ने अपनी दुनिया बना ली है। पृथ्वी से जितने भी ग्रिफिन्स वापस गए वो सब अब वहीँ रहते हैं। हाँ लेकिन उनका पता किसी को नही मालूम इसीलिए उन्हें खोजना मुश्किल है, मैं बस इतना जानता हूँ की वो इसी आयाम में हैं जिसका रास्ता इस पेड़ से होकर जाता है…

तभी एक अजीब भारी आवाज़ गूंजी

### : बातें हो गयी हों तो अब आगे बढ़े प्रोफेसर-मेरे ऊपर बैठे पक्षी इन बच्चों की वजह से परेशान हो रहे हैं।

प्रोफ़ेसर ने पीछे मुड़ कर देखा, वो पेड़ जो अभी तक शांत खड़ा था, उसके अब मुंह निकल आया था और वो बोलने लगा था-बच्चे यह दृश्य देखकर विस्मय से अपनी आँखें बाहर निकालने लगे, सभी आपस में बोलने लगे

“बोलने वाला पेड़!!”
“हाँ यार मैंने भी पहली बार देखा”
“मेरी आँखें तो यकीन मानने को तैयार ही नही“
“तो मत यकीन करो”
किसी ने उसका मज़ा लिया

प्रोफ़ेसर ने उन शैतान बच्चों को डांटा जो अभी भी पेड़ पर बैठे पक्षियों पर ढेला चला रहे थे-और फिर प्रोफेसर ने सबसे कहा

प्रोफेसर : तो बच्चों चलो आओ अब हमे चलना है उस दुनिया जहाँ शायद हमें मिल जाएँ ग्रिफिन्स

तो आगे क्या होगा?
क्या उन्हें ग्रिफिन्स मिले?
और आगे क्या हुआ?
शुरुआत कैसे हुई इस श्रृंख्ला की?

ऐसे बहुत सारे सवाल हैं जिनका जवाब समय देगा। ऐसे हर सवालों के जवाब मिलेंगी जब हवेली के इस सुपर हीरो की सुपर श्रृंखला का होगा
आरम्भ

रिव्यू ज़रूर दें। आपके रिव्यूज़ हमारे मार्गदर्शक हैं

धन्यवाद😊😊😊

Written By – Talha Faran for Comic Haveli

 

Disclaimer – These stories are written and published only for entertainment. comic haveli and writers had no intent to hurt feeling of any person , community or group. If you find anything which hurt you or should not be posted here please highlight to us so we can review it and take necessary action. comic haveli doesn’t want to violent any copyright and these contents are written and created by writers themselves. the content doesn’t carry any commercial profit, as fan made dedications for comic industry.  if any name , place or any details matches with anyone then it will be only a coincidence.

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8 Comments on “Apradh Unmoolan Ke Baad Part 4”

  1. Hihihi
    Aadmi ka mood hi change kar deti hai ye series
    Mujhe to ye nagraj hi bhoot lag raha tha pahle to
    Par ye besure gawaiye tapak pade jane kaha se
    Pata ni kisne kaat liya tha kobi ko
    Story me clear hi nahi kiya
    Parmanu aur doga ki fight achhi lagi
    Isse ye idea aaya k RC ne kabhi sirf in dono ko leke koi achhi comic, ya series nahi banai
    Sirf ek DEAL thi
    New story wali review bad me dunga
    Talha faran k dialogues mujhe bade ache lagte hain
    Full desi aur humor se bhara hua
    Islye inki stories me kafi attachment hoti hai
    Thoda jaldi laiye bhai parts
    Is series ko to bhul hi gye the warna
    Now there are so many questions to be covered
    Whose haveli is this?
    Doga ko kisne haveli di?
    Nagraj k sath nagdweep me kya hua?
    Ye dono aashiq ki jodi kaun the?
    Most important thing
    In heroes k bhagne k bad inki family, girlfriends kya kar rahi hain?
    Kafi sawal hain man me
    Shayd agle part me clear ho
    Kyun ki abhi to bhooto ko entry bhi nahi hui h

  2. Hahaha abhi bhi has hi rahi hu ise padhne ke baad
    Dhruva ka gussa oh god most hillarious part.
    Nagraj aur doga ha hasna bhi mast tha

  3. खूब भालो…… Kahani kafi achi jaa rahi h….. Hope aage or achi ho…. Aur naye superhero ka welcome…. Hope jald hi ye story b aayegi

  4. Bahut bdhiya talha bhai…
    Comedy +suspence jonor ki aisi kahani maine aj tak ni padhi..
    Apne favourite superheroes ko pyar se ladte jagate hue dekh kar bahut maza aa raha.

  5. Best part of the story parmanu aur Doga ki ladai aur uske baad suspense ki kobi ko kisne kata aur last me Jo naya superhero aana h uska sneak peak, bahut badiya ati uttam

  6. raat me koi horror story padh kr hasse to kaisa lagega…
    Yr bahut acchi ja rhi he ye series ab miss kr rha hu ki mene pahle kyu nhi padha…
    Chalo next part pr milte he

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