अपराध उन्मूलन के बाद 【पार्ट – 5th】

अपराध उन्मूलन के बाद 【पार्ट ■ 5th】

【प्रथम अध्याय◆हवेली में पहली रात】

रात का गहरा सन्नाटा फैला हुआ है।जंगल जैसे इलाकों में तो और भी ज़्यादा सन्नाटा होता है। ये स्थान शहर से बाहर है । आसपास सिर्फ घने पेड़ हैं । और जंगल के शुरुआती छोर पर ही एक हवेली नजर आ रही है। आसमान काली चादर की तरह ऊपर फैला हुआ है और उसपर सितारे छोटे छोटे बिंदुओं की तरह चमक रहे हैं। हल्की ठंडी और सुंगधित हवा चल रही है। हवेली इस वक़्त पूरी काले साये की तरह नज़र आ रही है, बिल्कुल काली। आकाश में पूरा गोल चाँद इस वक़्त हवेली के पीछे से आधा झांक रहा है। वातारण बिल्कुल शांत और अंधकारमय है। कभी कभी एक दो जुगनू उड़ते हुए नज़र आ रहे हैं। हवेली के एक कोने से रौशनी दिख रही है,शायद किसी कमरे में लाइट जला रखी है किसी ने।

“गुर्रर्र ! ओये तल्हा ! ये क्या कर रिया है।”

“क क कौन है??”

“तेरी अंतरात्मा”

“हु हु हुआ क्या?”

“ओये क्या हुआ क्या ! ये क्या कर रहा है तू?? अरे कॉमेडी स्टोरी लिख रहा है तू ! ऐसे हॉरर सीन क्यों क्रिएट कर रहा है? बहूहू। इतना भयानक ! मैं खुद डर गया। इसलिए मुझे रोकना पड़ा तुझको।”

“लेकिन अभी तो मैंने शुरू किया। और मुझे तो कहीं डर नही लगा।”

“अच्छा तो लिखते वक्त तेरे हाथ क्यों कांप रहे थे?”

“बाहर ठंडी हवाएं चल रही हैं न।”

“जब हवा बाहर चल रही है तो तू क्यों कांप रहा है??”

“मैं तो यही सोचकर कांप रहा हूँ कि हवा अंदर आ गई तो क्या होगा??”

“ओये चल बकवास बन्द कर। इतनी अच्छी खासी कॉमेडी जा रही थी। तू इसे भूतहा क्यों बनाना चाह रहा है?”

“अंतरात्मा जी। ये स्टोरी कॉमेडी+हॉरर है। यानी की इसमे हंसी होगी तो डर भी होगा।”

“ओये तो कॉमेडी पहले है, डर बाद में है न?”
“जी नही। दोनो एक साथ है।”

“गुर्रर्र। ओये तो जब दोनों एकसाथ है तो सिर्फ डरा क्यों रहा है। हंसा भी ।”

“माफ कीजिये। लेकिन मैं एकसाथ हंसा और डरा कैसे सकता हूँ?”

“गुर्रर्र। ओये तूने ही तो कहा।”

“कहना अलग बात है, करना अलग बात।”

“गुर्रर्र। बहुत हो गया। अब हंसा वरना तेरी पैंट गीली हो जाएगी।”

“आपको नही हंसाउंगा तो मेरी पैंट क्यों गीली होगी??”

“ओये बानर है क्या?? मैं तेरी अंतरात्मा हूँ, और अगर तू मुझे ऐसे ही डराता रहा तो पैंट किसकी गीली होगी?”

“मेरी !”

“हाँ समझ तो गया। बहुत समझदार है तू।”

“भैं वैं वैं। अच्छा तो मैं अब डराने की कम और हंसाने की ज़्यादा कोशिश करूँगा।”

“शाबाश।”

तो जैसा की आपलोग देख रहे हैं, मतलब पढ़ रहे हैं। इस वक़्त रात बहुत ज़्यादा हो चुकी है। और हवेली बाहर से ही….

“गुर्रर्र !! ओये क्या बाहर से ही हवेली हवेली कर रहा है !! हवेली के अंदर भी तो घुस।”

“घुस रहा हूँ अंतरात्मा जी। इतने उतावले क्यों हुए हो आप?”

आइये भाईलोग। अब हमलोग मेरी अंतरात्मा के बेहद अनुरोध पर बिना टाइम खराब किये जल्दी से हवेली के भीतर हल जाते हैं।

नोट : यहां “हल” से तात्पर्य “घुसना” है। कोई बन्दा इस “हल” को हल वाला हल न समझ ले। (हीहीही)
हवेली के अंदर भी गहरा सन्नाटा है। कई कमरों में एकदम अंधेरा दिख रहा है। लेकिन एक बड़े से हॉल जैसे कमरे से रौशनी आ रही है। आइये वहीं चलते हैं।……..

ब्रह्मांड रक्षक एकदम सन्न मारकर एक जगह इकट्ठे होकर खड़े हैं। जैसे किसी चीज़ को सूंघने या सुनने की कोशिश कर रहे हैं।

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“गुर्रर्र। अरे ओ बरमण्ड रक्षकों!! कबतक खड़े रहोगे ऐसे ही?? मैं क्या पूरी स्टोरी में सिर्फ दृश्यों के बारे में ही बताता रहूँ लोगों को।”

[ बरमण्ड=खोपड़ी।(हीहीही)]

नागराज : अरे तल्हा ! पहले एक्शन तो बोलो। तब न हम एक्शन में आएं ।

“एक्शन !!!”

डोगा की आवाज़ पहले आई।

डोगा : उन्होंने गाना बन्द कर दिया।

नागराज : बड़ा ही भयानक गा रहे थे।

ध्रुव : हमे चलकर देखना चाहिए वो आदमी और औरत कौन हैं जो इतनी रात को सड़े हुए सुर में गाना गा रहे थे?

परमाणु : लेकिन अब वो शांत हो चुके हैं। लगता है वो चले गए हैं।

ध्रुव : फिर भी। चलो चलकर देख ही लेते हैं।

तिरंगा : न भइया मत जा। इतनी रात को हवेली से बाहर मत निकल, बहूहू।

तिरंगा : मेरे ख्याल से वो कोई चोर उचक्के रहे होंगे । जो चोरी करने के बाद यहाँ रोमांस करने चले आये होंगे।

ध्रुव : गुर्र। लड़कियां कबसे चोरी करने लगीं बे?

नागराज : क्यों ?? लड़कियों को चोरी करने का अधिकार नही है क्या??

परमाणु : अबे जाएन दो ध्रुव भाई। अब शांत हो चुकी है उनकी आवाज़ । और तिरंगा सही कह रहा है। हमे इतनी रात को हवेली से बाहर नही जाना चाहिए।

कोबी : कहीं कौंनो भूत बूत भिटाई गयो तो सबकी छुच्छी खुल जाई।

परमाणु : छुच्छी ???

तिरंगा : अबे इसके कहने का मतलब है, सबकी हवा निकल जायेगी।

डोगा : बेटा तिरंगे। तू इस कोबी की कोड भाषाओं को तुरंत समझ कैसे जाता है?

तिरंगा : अपना अपना हुनर है भइया।

सभी सुपर हीरोज़ वापस से सोफे पर आकर बैठ गए।

ध्रुव : क्या सभी एक ही कमरे में सोएँगे ??

परमाणु : नही !!!

नागराज : अबे तू चिल्ला क्यों रहा है ??

परमाणु : मैं अलग कमरे में अकेला सोऊँगा।

डोगा : क्यों भइया। ये हवेली क्या तेरी ताऊ की है??

परमाणु : नही तो क्या तेरे ताऊ की है ?

डोगा : ताऊ की नही मेरी है।

परमाणु : हाँ खैरात में मिली है तुझे।

डोगा : मैंने जान बचाई थी उसकी।

डोगा और परमाणु ने नज़रें मिलाई। ऐसा लगा जैसे वे एक दूसरे की आंखों में हल जाने की कोशिश कर रहे हैं।

तभी ध्रुव ने परमाणु से पूछा।

ध्रुव : लेकिन तुम अकेले क्यों सोना चाहते हो परमाणु??

परमाणु ने ध्रुव की तरफ नज़र घुमाई। और फिर अपनी उंगली कोबी की तरफ कर दी।

परमाणु : इस–इस जानवर की वजह से।

ध्रुव ने आंखे फैला कर कोबी को देखा।
फिर परमाणु की तरफ पलटा।

ध्रुव : क्या हुआ ??

परमाणु : क्योंकि मैं इसके पास नही सोना चाहता।

स्टील : ऊँहहू। लाहौल वला कूवत।

डोगा : (परमाणु से) क्या हुआ बे?? माना कि ये जानवर है पर उस जमात का नही है जो तू समझ रहा है।

स्टील : ला….हौल वला कूवत।हीहीही।

परमाणु : (डोगा से) अबे कहने का मतलब वो नही है। गुर्रर्र। घटिया लोगों की घटिया सोच।

ध्रुव अब परमाणु से कहता है।

ध्रुव : ठीक है तो फिर कोबी तिरंगा के बगल में सो जाएगा।

परमाणु : गुर्रर्र। मेरे कहने का मतलब है, मैं एक अलग कमरा चाहता हूँ क्योंकि जहां ये कोबी सोयेगा, उस कमरे में मैं नही सोना।

ध्रुव : लेकिन क्यों??

परमाणु : क्योंकि ये बन्दा, दिन भर ढेर सारा भोजन हूर हूरकर अपने पेट मे दस किलो हवा जमा कर लेता है। और फिर रात को सोते वक्त उन सारी हवाओं को रिलीज़ करना शुरू करता है।

परमाणु ने कोबी की ओर उंगली दिखाते हुए आँखें लाल करके कहा

कोबी : हीहीही। परमाणु तैंने वो घटना याद है के??

परमाणु : बिल्कुल अच्छी तरह से याद है !! और साले तू तो बोल मत । वरना श्रिंक होकर तेरे भीतर घुस जाऊँगा और जो तूने गैस जमा कर रखी है न अपने पेट मे, उसमे चिंगारी छुला कर निकल लूँगा। फिर सोच क्या हाल होगा तेरा।

तिरंगा : क्या बात है यार परमाणु!, पहले क्यों नही बताया कि कोबी ज्वलनशील गैस भी जमाकर रखता है अपने पेट मे।

परमाणु : गुर्रर्र।

स्टील : परमाणु । हुआ क्या था? हमे भी तो बताओ।

परमाणु से पहले कोबी ही बोल पड़ता है।

कोबी : अरे यो बर्मानु के बतायोगा। मैं बतावत हौं। ई कापी शमय पइले की बाट ऐ। बरमानु हमरे जंगलवा में आये रहा…

स्टील : गुर्रर्र। अबे एक लैंग्वेज में बोल। रीमिक्स भाषा में मत बोल । समझ नही आ रहा ।

कोबी : चुप कड़ बे सटील की औलाड ।

तिरंगा : सटील नही स्टील नाम है उसका। और, औलाड नही औलाद होता है।

कोबी : तै भी चुब ढ़ह ड़े धड़ंगा ।

तिरंगा : गुर्रर्र। तिरंगा हूँ मैं, धड़ंगा नही।

कोबी : अच्चा नँगा-धड़ंगा जी।

तिरंगा : गुर्रर्र।

तभी डोगा को ज़ोर की जम्हाई आती है।

डोगा : देखो बे, तुमलोगों को जहाँ सोना है वहां सोओ। जाकर किचन में सो जाओ या टॉयलेट में पैर पसार लो जाकर, या कोबी के सर पे सो जाओ। या भाssड़ में जाओ। मैं तो चला सुतने, आई मीन, सोने।

कहकर डोगा पलटा और लहराते कदमों के साथ एक रूम की ओर बढ़ गया।

डोगा ने रूम का दरवाजा खोला और घुसते ही भड़ाsssक की आवाज़ के साथ दरवाज़ा बन्द कर लिया।

सभी मुंह खोलकर उस ओर देख रहे थे।

परमाणु : गुर्रर्र। हम लोगों की समस्या सॉल्व किये बिना जाकर आराम से सुत गया!

नागराज : अरे तुम सब टेंशनिया क्यों रहे हो भिड़ू लोग? हमलोग इस बड़ी हवेली में हैं। तिरंगा के घर मे थोड़ी न हैं कि सोने के बारे में टेंशन लें…

स्टील : हीहीही। तिरंगा जहाँ रहता है उसे हम घर नही कह सकते।

कोबी : हाँ ई तो बस एक ठु कमड़े में रहत है। हा हा हा।

तिरंगा : गुर्रर्र।

परमाणु : न। उस जगह को कमरा मत कहो। वरना “कमरा” नाम की बेइज़्ज़ती हो जाएगी , हीहीही।

स्टील : सही कहा, उसे कमरा नही, कोठरी कहना सही होगा। हीहीही।

तिरंगा : गुर्रर्र, गुर्रर्र।

परमाणु : (स्टील से ) नही नही, अब कोठरी भी न कहो । इतना भी छोटा नही है।

स्टील : तब फिर कोठरा!

परमाणु : हाँ सही है।

तिरंगा : 💭गुर्रर्रर्र। चलो, कम से कम कोठरी से कोठरा पर तो आये ।💭

और तभी परमाणु भी जम्हाई लेता हुआ बोला।

परमाणु : अरे यार ! हमलोगों को कहां सोना चाहिए?

नागराज : इस हवेली में बहुत सारे कमरे हैं इसलिए चिंता मत करो कोई लोग। हम एक एक कमरा ले लेते हैं।

परमाणु : यही तो मैं पहले कह रहा था । खामख्वाह इतना बहस हुई। गुर्रर्र।

ध्रुव : चलो फिर। परमाणु तुम डोगा के बगल वाले रूम में घुस जाओ….

ध्रुव के आगे बोलने से पहले ही एक और “भड़ाssक” की आवाज़ आई। परमाणु उस कमरे में घुस चुका था।

ध्रुव : तिरंगा तुम इस रूम में जाओ।

ध्रुव ने अपने पीछे वाले रूम की तरफ इशारा किया।

अगले ही पल तिरंगा भी वहाँ से निकल लिया।

ध्रुव उस तरफ घूमा जिधर कोबी खड़ा था।

ध्रुव : और कोबी तुम…

परंतु कोबी तो वहाँ था ही नही।

ध्रुव : अबे ये किधर गया!?

नागराज ने, जो कि ध्रुव के बगल में खड़ा था, “पता नही” वाले अंदाज़ में सर हिलाया। –अचानक एक चीख सुनाई दी। “आsssह, मम्मी बचाsssओ।”

अगले ही पल ध्रुव और नागराज परमाणु के कमरे की तरफ दौड़े। और जैसे ही दरवाज़े तक पहुंचे, दरवाज़ा सट् से खुल गया और अगले ही पल कोई ध्रुव, नागराज से तेज़ी से टकराया और तीनों फ्लैट हो गए।

नागराज ने परमाणु को अपने ऊपर से पलटा। परमाणु का चेहरा दहशत से नीला पीला हो रखा था।

नागराज : अबे क्या हुआ बे ! मरे हुए बन्दर जैसा मुंह क्यों बना रखा है।

परमाणु की आवाज़ लहराती हुई निकली।

परमाणु : ज-ज-ज-ज-ज-ज-ज

नागराज : अबे इतनी रात को कहाँ जाऊँ ?? गुर्रर्र।

ध्रुव : मुझे लगता है डर गया है बेचारा किसी चीज़ से , इसलिए इसके मुंह से स्वर नही फूट रहे हैं।

नागराज परमाणु का कन्धा पकड़कर हिलाते हुए बोला।

नागराज : अबे क्या हुआ बे? कुछ बोल तो।

परमाणु : ज-ज-जैसे ही, म म मैं लाइट बुझाकर बेड पर लेटा। कि-कि-कि किसी ने मेरा मास्क प पकड़कर नोचने की कोशिश की।

नागराज, ध्रुव : अच्छा !

परमाणु : हाँ । बहूहू। भाई मेरे साथ कुछ भी करे कोई , चाहे मेरे सर पर सरिया दे मारे , चाहे मेरे पीछे पागल कुत्ते को दौड़ा दे या–या चाहे तो बीच बाज़ार में मेरी चड्ढी उतार दे–मगर–जब कोई मेरा मास्क उतारने की कोशिश करता है तो, कसम बता रहा हूँ मैं धोतर बाबा की, मेरे कलेजे का कलेजा भी मुंह को आ जाता है। भैंssss । भाई ये मास्क ही तो है, मेरा सबकुछ । इसीकी वजह से तो हूँ मैं हीरो, इसकी ही वजह से तो छुपती है मेरी पहचान ।

नागराज : अबे लेकिन ध्रुव भी तो मास्क नही पहनता , उसे देख। उसकी पहचान तो नही छुपाता वो।

परमाणु : इसके पास पहचान ही कहाँ है , जो छुपायेगा।

ध्रुव : गुर्रर्र।

नागराज : अबे लेकिन तेरे कमरे में है कौन ? किसने ये करने की कोशिश की ?

परमाणु : प पता नही। यही तो और डर का कारण है।

नागराज : चल आ देखते हैं ।

नागराज , ध्रुव और परमाणु बढ़े उस कमरे की ओर।

तीनो उस कमरे में घुसे, परमाणु ने बोर्ड टटोल कर स्विच ऑन किया, कमरे में रौशनी भर गई। और सामने बेड पर उन्हें दिखा।

नागराज , ध्रुव ,परमाणु : कोबी !!!!

कोबी परमाणु के बेड पर लेटा हुआ था, पीठ के बल । और उसने दोनों टांगे एकदम सीधा ऊपर उठा रखी थी, और खर्राटे भी मार रहा था।

उसे अपने बेड पर देखकर परमाणु के कानो और नाक से धुंवे का आदान प्रदान होने लगा।

परमाणु : गुर्रर्रर्र ! तो यह था वो । लोमड़ी का !

परमाणु बावले लंगूर की भांति कूदकर कोबी की ओर बढ़ा पर तभी ध्रुव ने उसे रोक दिया।

ध्रुव : जाएन दो परमाणु । इतनी रात को कोई हंगामा न शुरू करो अब। जाकर दूसरे कमरे में सो जाओ तुम।

फिर दोनों परमाणु को घसीट कर बाहर लाये और उसे दूसरे कमरे का रास्ता पकड़ा दिया।

परमाणु खुंदक में बड़बड़ाता और कोबी को बद्दुआएं देता हुआ चला गया।

ध्रुव नागराज की तरफ मुड़ा।

ध्रुव : और अब सिर्फ हम दोनों बचे हैं।

नागराज : चल-चल बे मुझपे आर्डर मत झाड़ियो। मैं चला ऊपरवाले कमरे में सोने।

कहकर नागराज मुड़ा और सीढ़ी की तरफ बढ़ गया।

ध्रुव ने मुंह से दबी हुई गुर्राहट निकाली और फिर वो भी अपने कमरे की तरफ चल दिया।

सब सो गए । और सबने अपने अपने कमरों की लाइटें भी बुझा ली थीं। हॉल में जल रही लाइट भी बुझा दी गईं थीं । अब हवेली पूरी तरह से अंधेरी हो गई थी। और बाहर से देखने मे भयावह लग रही थी।

●प्रथम अध्याय समाप्त●

【 द्वितीय अध्याय◆ ऍंथोनी आया】

अगली सुबह हुई सूरज की पहली किरण के साथ। जब सूरज की किरणों ने उस भयंकर हवेली के छत को छुआ तो ( “तो” से क्या मतलब? चुपचाप कहानी पढो। गुर्रर्र) । खैर (आपकी न हो)। हवेली को बाहर से देखना छोड़ते हैं और एक बार फिर्र……. हलते हैं , हवेली में।

सन्नाटा है अंदर अब भी। लगता है ब्रह्मांड रक्षक अभी तक सपनो के ब्रह्मांड में खोए हुए हैं। एक मिनट कहीं से आवाज़ आई अभी–आपको सुनाई दी? नही सुनाई दी? कोई बात नही, कान टनटना रहे हैं मेरे सुबह सुबह।

और तभी कहीं पानी की टोटी खुलने और उसमें से तेज़ी से बहते पानी की आवाज़ सुनाई देने लगी

डोगा : साला ये सुबह सुबह ब्रश करने का रिवाज़ पता नही किसने बना दिया , गुर्रर्र। आह जबड़े छिल गए रे।

“खजर खजर खजर खजर”

डोगा : अबे कौन है बे खज खजा रहा है?

डोगा की नज़र कोबी पर पड़ीं और फट पड़ीं।

डोगा : अबे!!!!

कोबी : का भुवा ?

डोगा : ये क्या कर रिया है बे।

कोबी : बड़स कड़ ड़हा हूँ ।

डोगा : अबे वो कपड़े धोने वाला ब्रश है । गुर्रर्र।

कोबी : अभे कछु भी हो। अपने को बड़स कड़ने से मटलब है।

डोगा : अच्छा ?

कोबी : आँ ।

डोगा : हिहि। इसी ब्रश से मैंने अपनी अंडर वियर धोइ थी।

कोबी : अंदर बिअर ?

डोगा : गुर्रर्र। अंडर वियर।

कोबी : उ का होत है।

डोगा : बहूहू। हे ऊपर वाले , सुबह सुबह किसका मुंह देख लिया मैंने।

क्रमशः

दोस्तों कैसी लगी आपको ये स्टोरी बताना मत भूलियेगा ।

अगले पार्ट में होगी अन्थोनी की एंट्री। तबतक के लिए अलविदा।

 

धन्यवाद

Written By – Talha for Comic Haveli

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11 Comments on “अपराध उन्मूलन के बाद 【पार्ट – 5th】”

  1. bhut mst lgi…..bus abi isky phly ky parts ko pdny ki jarurt hy…..and haan yeh adwika ki pik kyun lgaayi hy …story m …uska kya roll ……aap bi khin rajniti tho nhi khyl rhy

  2. oops
    …suru ky 4 parts pdny ky baad tho issi story ka tho mjaa hi alg ho gyaa….comedy punch ki tho jitni taarif ki jaaye utni km…..aur vo hevli ka writier …such m is sy jaayada bdiyaa seen tho or koi ho hi nahi saktaa….aur vaha py itnaa mjaa aaya ki usy words m bi nhi likhaa ja saktaa….kobi ki lungvess bi maanni pdegi bhut hi jbrdst hy…aur prmaanu ky mask ko toch hona bi amazing seen hy…..bus abi tk bhoot ki entry hona baaki hy ….usky baad kyaa hoga yeh dhykhnaa aur bi interesting hy …agr khani ko point dene ki baat khi jaaye tho isy 100 m syy 99 point diye jaayngy …

  3. kafi time baad padhne ko mili comedy…
    mast maja aaya…
    talha ji khud ko story me le aaye waah gajab..
    wo bhi brahmand rakshako ke sath..
    antaratma wala part achcha tha..
    kobi hmesha ki tarah ajib samvad ke sath achcha lag rha hai…
    anthony ko dekhne ka bada maja aayega… bhokal ko bhi le aao bechara kabhi najar nhi aata kisi story me ..
    bahut majedar… all d bst

  4. Aman aj, moni didi, और देवेन्द्र भाई। आप तीनो का बहुत बहुत धन्यवाद रिव्यु के लिए। देवेन्द्र भाई आपने जो कहा भोकाल को भी इस स्टोरी में लाने को। इस बात पर मैं विचार करूंगा।

  5. बहुत दिनों से इस कहानी का इंतेजार था। , अब जाकर वह पूरा हुआ।
    तल्हा की कॉमेडी कहानियों का मैं फैन हूँ।
    अंतरात्मा वाला पार्ट बहुत ही मस्त था, पर शायद उसकी वजह से कहानी थोड़ी छोटी लगी।
    कोबी औऱ उसकी भासा का मैं फैन हो जा रहा हूँ।
    अगले भाग का इंतेजार रहेगा

  6. Best part to vo antaraatma wala Hi tha, uske baad kobi sabse jyada hasa raha h, ab Anthony ki entry ka intezaar h

  7. Hahahaha… Life me prob chal rahi hai.. Frustration hai.. Man nahi lag raha, bore ho gye ho? Here’s your one stop solution
    Bhai main baitha baitha daant chiyar raha tha aur sare log mujhe hi dekh rahe the… Mere tiranga ki itni beizzati gurrr… Kobi ka to had role hai… Anthony ki entry nhi hui to is part me aisa likhna nhi chaiye tha
    Par events bahut kam ho rahe hain aur sirf conversation ho raha h
    Jaise raat me sab sirf soye aur subah ho gayi aur story khatm
    Koi significant event hua hi nhi
    Baki chhota nagraj sahi likh raha h as always
    Congrats and all the best

    1. बहुत बहुत धन्यवाद प्रदीप भाई। मई बता नही सकता इतने दिन बाद आपका रिव्यू देखकर मुझे अच्छा लग रहा है । आपने सही कहा इस पार्ट में इवेंट कम हुए । अब मई उसी पर ध्यान दे रहा हूँ। नेक्स्ट पढ़िए । अब स्टोरी जल्दी जल्दी आगे बढ़ा रहा हूँ।
      बहुत बहुत शुक्रिया रिव्यू के लिए।

  8. Late hone ka sabse bekar baat ye he ki sab tarif to sab kr hi chuke hote he ..
    Waise to pichle sabhi part acche se the lekin ye part awsm tha bhai ab chalte he next part ki aur

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