अपराध उन्मूलन के बाद 【पार्ट – 6th】

अपराध उन्मूलन के बाद 【 पार्ट ◆ 6】

प्रथम अध्याय » ☆ हवेली में भोकाल ☆

डोगा : अबे गधा है तू और गधा ही रहेगा।

कोबी : अउर तू कुक्कुर का पिल्ला है, पिल्ला ही रहेगा।

डोगा : गुर्रर्र। सुबह सुबह कोई पंगा लेने का मूड नही है मेरा।

कहकर डोगा पैर पटकता हुआ वहाँ से चला गया।

कोबी : हीही । भाग गवा डर के ससुरा।

तभी परमाणु वहाँ आया। उसने अपनी परमाणु वाली ड्रेस उतार रखी थी, लेकिन मास्क पहना हुआ था और चड्डी भी, तथा कंधे पर तौलिया रखे हुए और हाथ में लोटा लिए हुए था।

कोबी उसे देखते ही बोला।

कोबी : का हो भइया, जंगल जात हौ का?

परमाणु कोबी को देखते ही बिफर उठा।

परमाणु : तू !!!

कोबी : तू का होवत है।

परमाणु : अभी बताता हूँ बिना क्लोरोफिल के पत्ते !

परमाणु झपटा कोबी पर और कोबी तेज़ी के साथ अपने स्थान से हट गया । परमाणु का मुंह सीधा आईने में जा लड़ा और एक तेज़ खनाक की आवाज़ के साथ आईना अमर हो गया। कोबी पेट पकड़कर हंसने लगा।

कोबी : हीहीही। अब तो डोंगा थारो हड्डियां तोड़ोगा। तन्ने उसकी हवेली का आइनो तोड़ो है।

कोबी का कहना सही था क्योंकि तभी किसी के भागते कदमों की आवाज़ सुनाई देने लगी। कोई जल्दी जल्दी चलता हुआ इस ओर आ रहा था ।

डोगा अचानक से आकर उन दोनों के सामने प्रकट हुआ।

डोगा : किसने क्या तोड़ा बे !

कोबी : बर्मानु तुमरा अइना तोर दिहिस।

कोबी आईने की तरफ इशारा करता हुआ बोला।
आईने का हाल देखर डोगा के कान और नाक से धुंवा बहने लगा।

परमाणु : इ इ इस कोबी ने किया है ये ।

डोगा : पर थोबड़े से तो तेरे खून बह रहा है। मेरे प्यारे आईने का काम पैंतीस कर दिया तूने। मुंह दे विच ग्रैनेड घुसेड़ दूँगा,पिन खींच के । गुर्र ।

कोबी : 💭 हीहीही। 💭

डोगा ने फौरन AK47 उतार ली। और परमाणु की तरफ तान कर बोला।

डोगा : आज तो तुझे मच्छरदानी बनाकर छोडूंगा।

परमाणु : अबे अबे क्या कर रहा है भाई। लग जायेगी यार । अबे रुक जा। मैंने अपनी बेल्ट भी उतार दी है मैं ट्रांसमिट भी नही हो सकता।

कोबी : 💭 ससुरा बेल्ट पहिना करत है टेरान्समिट होवे खातिर। हम तो इसलिए पहिनता हूँ ताकि हमरी चड्ढी न सरक जावे।💭

डोगा ने ट्रिगर दबा दिया । ऐन समय पर परमाणु अपने स्थान से कूदा और गोली दीवार पे जा लगी । दीवार की पपड़ी उखड़ गई। इसी तरह न जाने कितनी गोलियां दीवार पर लगकर फालतू में शहीद हो गईं और साथ मे दीवार की खूबसूरती भी। परमाणु तौलिया एक ओर फेंककर अपनी चड्डी पकड़कर दौड़ा , डोगा की गोली से बचने के लिए ।

परमाणु : अरे बाप रे ! कैसे बचूं मैं ? आज तो पड़ गई मेरे ‘मौत पीछे पीछे’।

डोगा की बन्दूक की गोलियां एक बार फिर परमाणु का पीछा करती हुई निकलीं और टोटी पे जा लगीं तत्काल ही टोटी के टोटे-टोटे हो गए। पानी तेज़ी के साथ बहने लगा। कोबी सरक कर अपने स्थान से जल्दी से हटा क्योंकि परमाणु उसी की ओर आ रहा था। इतनी गोलियां चलाने के बाद डोगा का गुस्सा और बढ़ गया इसलिए उसने खुंदक में अपनी Ak47 का रुख छत की ओर कर दिया । एक जोरदार शोर हुआ। गोलियों के बन्दूक से निकलने का भी और छत से जाकर टकराने का भी। बाहर जंगल मे पेड़ों पर बैठे हुए परिंदे गाली बकते हुए उड़ गए।

नागराज अपने रूम में मीठी नींद सोया हुआ था कि तभी वो हड़बड़ाकर उठ बैठा।

नागराज : मम्मी बचाओ। नताशा ने विसर्पी को Ak47 पकड़ा दिया है। हफ्फss हफ्फss

उसी समय ध्रुव अपने रूम में। सोते सोते अचानक उठ बैठा।

ध्रुव : हफ्फ हफ्फ ।अरे बाप रे नताशा और ऋचा दोनों ने मिलकर तो मुझे Ak47 से भून दिया होता। थैंक गॉड मैं सही समय पर उठ गया।

उसी समय तिरंगा भी हड़बड़ाकर उठा।

तिरंगा : हफ्फ । बचाओ ! मच्छरों ने आक्रमण कर दिया Ak47 लेकर ! हूssह शुक्र है सपना था।

तभी डोगा की गन एक बार फिरसे गरजी। “ जिंग जिंग जिंग जिंग ”

नागराज : अरे बाप रे..

ध्रुव : सच मे गोलियां..

तिरंगा : चल रही हैं।

नागराज, ध्रुव, तुरंगा बिस्तर से कूदकर नीचे उतरे और नहान घर की तरफ दौड़ लगा दी उन्होंने। तिरंगा और ध्रुव आमने सामने अपने अपने रूम से निकलकर दौड़ पड़े। तिरंगा की नज़र ध्रुव पर और ध्रुव की नज़र तिरंगा पर पड़ी।

ध्रुव : ( तिरंगा से ) तुम कहाँ दौड़ते हुए जा रहे ?

तिरंगा : तुम कहाँ जा रहे हो?

तभी सामने सीढ़ी से नागराज उतरा और दोनों को धक्का देता हुआ भागा।

नागराज : हटो बे । सुबह सुबह रास्ता जाम कर दिया।

और फिर तीनो दौड़ते हुए एक साथ नहान घर मे पहुंचे ।
नहान घर इस वक़्त wwe का अड्डा लग रहा था। डोगा ने परमाणु को चांप रखा था और परमाणु ने डोगा को, और कोबी फुदक फुदक कर चिल्ला रहा था।

कोबी : फोर दे ,फोर दे ससुरा बर्मानु का सरवा फोर दे डोंगा, आज थारे को बुम्बई के सारे कुत्तन की कसम।

ध्रुव , तिरंगा और नागराज कूद के वहाँ पहुंचे ।

नागराज और ध्रुव मिलकर डोगा और परमाणु को अलग करने की कोशिश करने लगे। तिरंगा ने शायरी चेंपी।

तिरंगा : बन्द करो ये छोटी मोटी हाथापाई।
इस हाथापाई से किसी को कुछ नही मिला है।
जिसको भी जो कुछ मिला है भयंकर युद्ध से मिला है।

नागराज : गुर्र । गधे आकर लड़ाई छुड़ाने के बजाए और चढ़ा रहा है। चल आकर छुड़ा।

ध्रुव : डोगा-परमाणु बन्द करो । क्या हुआ है। तुमलोग इतनी सुबह सुबह एक दूसरे की जान लेने पर क्यों तुले हुए हो।

डोगा : इस ससुरे परमाणु ने आईना तोड़ दिया । और इसकी ही वजह से मेरी Ak47 की सारी गोलियां खत्म हो गईं। मैं नही छोडूंगा। मुंह दे विच ग्रैनेड घुसेड़ दूंगा,पिन खींच के।

परमाणु : हाँ तो मैं भी तेरे को कोनसा छोड़ने वाला हूँ। बस एक बार कोई मेरी बेल्ट मुझे लाकर दे दे फिर तुझे बन कर दिखाऊंगा ‘भीम परमाणु’ ।

डोगा : गुर्र । मर्द का बच्चा है तो बेल्ट का सहारा क्यों लेता है। ऐसे ही लड़।

डोगा और परमाणु एक दूसरे पर बुरी तरह पिले पड़े थे । आज इन दोनों में से एक का काम पैंतीस ज़रूर होना था।
तभी नागराज चिल्ला उठा।

नागराज : बस! बहुत हो गया तुम नीले पीले गधों का हंगामा !!! शांत हो जाओ वरना चड्डी में नागफनी सर्प छोड़ दूँगा ।

लेकिन नागराज के चिल्लाने का उनपर कोई असर नही पड़ा । खुंदक में अब नागराज भी आ चुका था।

नागराज : गुर्र । तुमलोग ऐसे नही मानोगे। सर्वाकार !

तत्काल ही एक चार इंच का संपोला नागराज की कलाई से बाहर निकला।

नागराज : बन जा हथौड़ा । लेकिन ज़रा छोटा वाला बनियो।

आज्ञा का तत्काल पालन किया सर्वाकार ने। वो चार इंच का संपोला अब तेज़ी के साथ विशालकाय हुआ और उसने हथौड़े का आकार ले लिया।
अब घड़ी आ चुकी थी। दूर कहीं बादल गरजा । और इधर नागराज के हाथों में हथौड़ा बना सर्वाकार । डोगा और परमाणु आपस मे भिड़े हुए इस बात से अनजान थे कि अभी उनका टकला बजने वाला है। नागराज ने हतौड़ा उठाया और दोनों हाथों में पकड़ कर तेज़ी के साथ ऊपर किया । तिरंगा और ध्रुव की सांस अटक गई ( अरे दोनों के मुंह मे मक्खी घुस गई थी इसलिए। ) नागराज ने हतौड़ा चला दिया । परमाणु और डोगा के बरमुंडों से टकराने से एक सेकंड पूर्व वहां एक चकाचौंध रौशनी हुई और फिर धम्म की आवाज़ आई। सर्वाकार ने डोगा और परमाणु का टकला बजा दिया था शायद। एक जोरदार चीख सुनाई दी।

** : आह !!! मार डाला रे !!!

परन्तु ये क्या ? ये राग अलापने वाली आवाज़ तो सिर्फ एक ही सुनाई दी थी। जबकि दो सुनाई देनी चहिए थी। नागराज ने सर्वाकार को वापस खींचा।

नागराज : ( सर्वाकार से ) ये बता , तूने ये चकाचौंध चमक कैसे उतपन्न की थी ?

सर्वाकार : गुर्र । मइने कोई चकाचौंध नही उतपन्न कियो। पते नई कहाँ से इतनी भेयानक चकाचौंध हुई। मेरी आँख खुदे अभी तक अंधी हुई पड़ी है।

तभी वो चकचौंध गायब होने लगी और सामने डोगा और परमाणु एक दूसरे पर अभी भी पिले पड़े दिखे । और उनके बगल में फर्श पर पड़ा हुआ एक शख्स भी नज़र आने लगा जो लगभग नँगा था उसने बस एक लाल रंग की चड्ढी पहन रखी थी और शरीर पर कपड़े के नाम पर पट्टियाँ लपेट रखी थीं और कंधे पर हरे रंग का कवच था और उसकी पीठ पर एक ढाल चिपकी हुई थी। और कमर में एक तलवार थी । अरे ! एक मिनट ! ये तो भोकाल है।

नागराज, ध्रुव और तिरंगा के मुंह से लहराती हुई आवाज़ निकली ।

नागराज : भोकाल !!!

ध्रुव : भोकाल !!!

तिरंगा : भो भो भोकाल !!

कोबी ने भी दीदे फाड़कर भोकाल को टीपा।

कोबी : भौंककाल !!!!

नोट : कोबी को ये बात नही पता है कि भोकाल उसका गुरु है। बल्कि सिर्फ भेड़िया को पता है।

डोगा और परमाणु ने अचानक से एक दूसरे को छोड़ा। और दोनों के मुंह से एकसाथ निकला।

डोगा , परमाणु : भोकाल !!!!

भोकाल चकरा गया था । सर्वाकार सीधा उसकी खोपड़ी पर टकराया था।

सर्वाकार : 💭 आरे बाप रे ! इस बन्दे कै पास तो तलवार हे । निकल लै बेटे सर्वाकार नई तो इ बन्दा तुझे टोटे टोटे कर देइगा।💭

सर्वाकार तत्काल ही फूट लिया नागराज की कलाई में ।
भोकाल सर पकड़ कर धीरे धीरे उठा । सब उसे आंखें फाड़े टीप रहे थे। डोगा और परमाणु अपनी लड़ाई भूल चुके थे और एक दूसरे के कंधे पर हाथ रख कर भोकाल को ऐसे टीप रहे थे जैसे ज़ू में चिंपैंज़ी देखने आए हुए हैं। भोकाल लड़खड़ाता हुआ उठा और इधर उधर लुढ़कने लगा। सब लपके उसे सम्भालने के लिए। डोगा और परमाणु ने जल्दी से उसके दोनों हाथ पकड़ लिए और तिरंगा तथा ध्रुव ने एक-एक टांगे । और उसे लेकर नहानघर से बाहर चल दिये।

कोबी भी आगे बढ़ा भोकाल की हेल्प के लिए पर उसे समझ नही आया कि वो कहाँ से पकड़ कर उठाये भोकाल को।

कोबी : अबे हम कहाँ पकड़ूँ ?

डोगा : एक काम कर तू इसका झोटा पकड़ ले। गुर्र ।

नागराज आगे बढ़ा और दरवाज़ा खोला ( खुद के लिए । हीहीही। )

नोट : नागराज और भोकाल के बीच सवा छत्तीस का आंकड़ा चलता है। दोनों एक दूसरे को देखना भी पसन्द नही करते।

नागराज जहां एक तरफ हैरान था वहीं मन ही मन ख़ुश भी हो रहा था।

नागराज : ससुरा न जाने कहाँ से टपक पड़ा। लेकिन ऐन समय पर ऐन जगह पर टपका। हीहीही।

सब मिलकर भोकाल को बड़े गोल तथा हवादार हॉल में लेकर आये और सोफे पर लिटा दिया। भोकाल कराह रहा था उसका चेहरा इस वक़्त किसी पियक्कड़ जैसा हो रखा था।

ध्रुव : हाँ तो बताओ भोकाल, क्या हाल है ? अब ठीक महसूस हो रहा है ? तुम यहाँ कलियुग में कैसे टपक पड़े और वो भी इस हवेली में।

भोकाल जो अब लगभग होश में आ चुका था अचानक गुर्रा उठा।

भोकाल : गुर्र । नही छोडूंगा ! नही छोडूंगा !

नागराज : 💭अबे पहले पकड़ तो ले। 💭

ध्रुव : अरे किसे नही छोड़ोगे । किसके बारे में बात कर रहे हो तुम ?

भोकाल चेहरे पर खूँखारपना भरकर बोला।

भोकाल : उस बोदी वाले को।

तिरंगा : बोदी वाला ?

परमाणु : बोदी वाला ?

डोगा : बोदी वाला ?

कोबी : गोदी वाला ? इ का होवत है ?

ध्रुव : समझ गया मैं।

【 प्रथम अध्याह समाप्त 】

द्वितीय अध्याय : ☆ भेड़िया की चिता ☆

आइये अब आपको ले चलता हूँ हवेली से बाहर की दुनियां की घटनाएं दिखाने । सबसे पहले हम चलते हैं सीधा असम के जंगल क्योंकि सबसे भयंकर घटना वहीं घटित हुई है ।

असम का जंगल , आज असमान्य से भी ज़्यादा असमान्य लग रहा था। हमेशा जो खुशहाली यहां छाई रहती है वो आज मातम में बदली हुई दिख रही थी । जंगल के अलग अलग हिस्से से अलग अलग कबीलो के आदिवासी तथा हर ओर से वन्य जीव एकसाथ चलते चले आ रहे थे। कारण।

कारण यहां है। श्मशान घाट । आज कोई खास है जो अपनी चिता पर लेटा हुआ है। आज कोई खास है जो दुनिया को टाटा बाई बाई करके चल दिया है। कौन है ये ? किसकी चिता सजी हुई है ?

अरे ये तो जेन थी जो उस चिता से लिपट कर फूट-फूटकर रो रही है।

जेन : भेड़िया!!! मेरा भेड़िया!!! मुझे छोड़ कर चला गया। आsss

पास में ही खड़ा खाटू कबीले का सरदार खटुआ।

खटुआ : 💭पहले कौनसा हमेशा पकड़े ही रहता था जो छोड़ के चला गया।💭

भेड़िया आज सच मे मर चुका था । चिता पर लेटा हुआ भेड़िया का शव साफ साफ दिख रहा था। कोबी ने उसकी कुछ ज़्यादा ही भयंकर ठुकाई कर दी थी।

तभी फूजो बाबा आगे बढ़े ।

फूजो : जेन बेटी हट जाओ अब चिता को अग्नि देने का समय हो गया।

जेन : नही भेड़िया नही मर सकता–

खटुआ : 💭मर गया है ससुरा । ज़ी टीवी के सीरियलों वाले डायलॉग मत मार। जल्दी से हट यहां से, चिता में आग धरा के निकलें हमसब । फालतू में टाइम फोकट कर रही है गुर्र। 💭

फूजो बाबा जेन के पास पहुंचे ।

फूजो : बेटी हट जाओ कबतक ऐसे ही लिपट कर बैठी रहोगी चिता से।

जेन : जबतक भेड़िया उठकर न बैठ जाये ।

खटुआ : 💭 ये लो । साउथ की मूवी देखकर आई है ये लगता है। 💭

फूजो बाबा फिर जेन से विनती करते हुए बोले।

फूजो : जेन । हट जाओ बेटी। देखो सूरज ने डूबना शुरू कर दिया है। हमे रात होने से पहले चिता को आग देनी होगी।

जेन : नही मैं नही हटूंगी। चाहे कुछ भी हो जाये । आप मुझे भी इस चिता के साथ जला दीजिये।

ये शब्द सुनकर फूजो का फ्यूज़ उड़ गया।

फूजो : अरे बेटी ये क्या बक..कह रही हो।

जेन : मैं नही हटूंगी, नही हटूंगी, नही हटूंगी, मुझे भी मेरे पति की चिता के साथ जला दिया जाए।

फूजो बाबा झुककर जेन के करीब आये।

फूजो : क्या तुम यही चाहती हो बेटी?

जेन : 💭 गुर्र। बुड्ढा एक्टिंग भी नही करने दे रहा है। अरे मैंने तो अपनी चूड़ियां तक उतार कर रख दीं, ताकि जब हाथ पटकने का अभिनय करूं तो चूड़ियां टूटें न। मैं भला खुद को आग में क्यों जलवाऊंगी। भेड़िया मर गया लेकिन कोबी तो अभी ज़िंदा है, उसके पास तो इस भेड़िया से भी ज़्यादा ताक़त है, हैंडसम भी है हीहीही। बस कुछ दिन से शक्ल नही दिखाई है उसने पर जल्द ही मेरे पास भागता हुआ आएगा। अबे बुड्ढे समझ जा। मुझे चार पांच लोगों से खिंचवा कर हटा यहाँ से। 💭

काफी देर से जेन को यूं ही चुप बैठे देखकर फूजो समझ गए कि ये यहाँ से नही सरकने वाली ।

फूजो : चलो बेटी जैसी तुम्हारी इच्छा।

जेन : हैं !!!

फूजो ने ऐलान किया ।

फूजो : मिट्टी का तेल डालने की क्रिया शुरू की जाए और जेन पर भी मिट्टी का तेल डाला जाए। 💭 हीहीही। भेड़िया के मरने के बाद ये आफत मेरे ही सर आने वाली थी। साला कोबी तो निकम्मा है । इस लौंडिया को मुझे ही पालना पड़ता। पर अब अच्छा है, ये भी अपने पति के साथ जलना चाहती है। वाह! पत्नी हो तो ऐसी। हीहीही।💭

जेन के तो तोते उड़ गए ।

जेन : 💭 नही ये क्या हो गया! अबे बुड्ढे। एक बार भी मना नही किया। और जंगलवासियों ने भी बुड्ढे की बात मान ली। अब तो सब सच मे मुझे जलाकर रहेंगे।💭

और फिर भेड़िया की चिता के साथ साथ जेन पर भी मिट्टी का तेल गिरने लगा।

【द्वितीय अध्याय समाप्त】

तृतीय अध्याय : 【 एंथोनी आ गया 】

अब हम वापस फिरसे हवेली आते हैं । मुझसे वो दुखद सीन नही देखा जाएगा भाई। बेचारी जेन ज़िंदा जलने वाली है।

इस वक़्त सूरज लगभग डूब चुका है । सूरज की हल्की लाली में इस वक़्त बादल भी लाल लग रहे थे और जंगल मे भी हल्की लाल रौशनी फैली हुई थी। और काली हवेली भी इस वक़्त हल्की लाल नज़र आ रही थी। बाहर जितना सन्नाटा और खामोशी है क्या वो अंदर भी होगी ? आइये देखते हैं।

हॉल में सभी एकसाथ जमा होकर बैठे हुए थे । भोकाल इस वक़्त सो रहा है । नागराज ने भोकाल को ऐसा हतौड़ा मारा था कि बेचारा भोकाल सुस्त पड़ गया है।

डोगा : साला जबसे आया है सुत्ता पड़ा है।गुर्र। सही से बताया भी नही की यहां कैसे टपका ।

परमाणु : सिर्फ “ नही छोडूंगा उस बोदिवाले को ” कहकर सुत गया और तबसे सुत्ता ही पड़ा है।

ध्रुव अपनी चेयर पर से उठा और जम्हाई लेता हुआ बोला।

ध्रुव : अब ये सीधा सुबह ही उठे तो अच्छा है।

नागराज : उठे ही न साला तो ज़्यादा अच्छा है । गुर्र।

अचानक तिरंगा नागराज को टीपते हुए ध्रुव से बोला।

तिरंगा : एक मिनट । भोकाल ने नागराज को देखा या नही ?

ध्रुव : मुझे तो लगता है..नही, उसने हम लोगों को ठीक से नही देखा।

तिरंगा : मतलब उसने नागराज को नही देखा ?

डोगा अपनी बन्दूक साफ करता हुआ बोला।

डोगा : तभी तो शांति से सो गया। वरना अबतक यहां दंगल चल रहा होता। हीहीही।

तभी एक जबरदस्त गुड़गुड़ाहट सुनाई दी । परमाणु उछलकर चेयर से नीचे गिरा।

कोबी : भैंssss । महारो पेठ खाना मांग रिया है।

परमाणु : तो साले अपने पेट को संभाल कर रख वरना पेट और पीठ एक कर दूंगा।

तिरंगा : वैसे बन्दा कोबी सही कह रहा है। मेरा भी पेट खाना मांग रहा है।

डोगा नज़रें तिरछी करके तिरंगा को घूरने लगा ।

तिरंगा : (डोगा से) क्या हुआ भाई ?

डोगा : बेटा तू तो एक बजे रात को खाना खाता है। शहर का आधा चक्कर लगाने के बाद । जबसे फ्री फंड में बढ़िया बढ़िया खाने को मिलने लगा है तेरे पेट की मांग कुछ ज़्यादा ही बढ़ गई है। समझा ले अपने पेट को वरना हाजमोला खिला दूंगा।

डोगा अपनी गन की तरफ इशारा करता हुआ बोला।

तिरंगा : अरे भइया । काहे को इतना भयंकर मजाक करते हो, दिल कमज़ोर है मेरा।

नागराज : वैसे भूख तो मुझे भी लग गई है।

तिरंगा और कोबी ने झट्ट से नागराज की तरफ नज़र घुमाई । और फिर डोगा की तरफ घूमे।

डोगा : (नागराज से) जाओ नागराज भईया जाओ देखो फ्रिज में रखा होगा बर्गर वगैरह ।

नागराज किचन की तरफ लपक लिया ।

डोगा : और हाँ तुम्हारे लिए बढ़िया शुद्ध दूध भी है।

डोगा ने थोड़ी तेज़ आवाज़ में नागराज को पीछे से कहा ।

नागराज किचन में से धन्यवाद देने वाले अंदाज़ में बोला।

नागराज : वाह मेरे छोटे भाई। तू ही तो है एक मेरा सगा वाला।

तिरंगा और कोबी, डोगा को अब भी मासूमियत से टीप रहे थे ।

डोगा : क्या हुआ बे ? तुम दोनों मुझे ऐसे क्यों घूर रहे हो । प्यार हो गया है क्या ?

तिरंगा : प्लीज़ हमे भी कुछ दे दो भाई।

कोबी : पलीज।

डोगा : कुछ होगा तब तो दूंगा न ।

तिरंगा : क्या मतलब ?

डोगा : मतलब अभी समझ आ जायेगा।

और तभी नागराज तुनतुनाता हुआ पैर पटकता हुआ वापस आया। और डोगा के सर के पास आकर खड़ा हो गया।

नागराज : गुर्र। साले कुत्ते की नाक। मुझसे मजाक करता है। फ्रिज़ में तो कुछ भी नही है।

डोगा : होगा कैसे । कल तुमसब भूखे बंदरों की भांति हर एक चीज़ पर टूट पड़े थे ।

डोगा, ध्रुव की तरफ देखते हुए नागराज की तरफ इशारा करके बोला।

डोगा : सवा आठ लीटर दूध जनाब एक ही टाइम में पी गए।

नागराज : अबे तू ही तो दारू की तरह निकाल निकाल कर देता गया तो मैं भी पीता गया।

डोगा : अबे बस नही बोल सकता था क्या।

नागराज : गुर्र। तमीज़ से बात कर वरना अभी सर्वाकार को बुलाऊंगा।

डोगा : क्यों ? नागफनी सर्प अब किसी काम के नही रहे क्या।

नागराज : उन निकम्मो का नाम मत ले। गुर्र। और तू कुछ ज़्यादा ही बोल रहा है । लगता है तुझे नहाए हुए बहुत दिन हो गए हैं। अभी तुझे धोता हूँ बेटा रुक।

परमाणु और ध्रुव ने अपना माथा पीट लिया। अब इस वक़्त फिर लड़ाई शुरू होने जा रही थी। नागराज डोगा की ओर बढ़ा । कोबी और तिरंगा इस होने वाली लड़ाई को बहुत मज़े से देखने के मूड में लग रहे थे। लेकिन लड़ाई हुई नही। क्योंकि डोगा ने निकाल लिया वो पावरफुल हथियार जिसके आगे नागराज को भी रुक जाना पड़ा।

तिरंगा : (कोबी से) ये डोगा, नागराज को मोबाइल फोन क्यों दिखा रहा है।

परन्तु कोबी ने जवाब नही दिया क्योंकि वो डोगा के हाथ मे थमे उस मोबाइल को बड़ी गौर से टीप रहा था ।

डोगा : (नागराज से) जहाँ हो वहीं रुक जाओ। मुझे मारने से पहले दस हज़ार बार सोच लो क्योंकि तुम्हे तो पता ही है कि मेरे पास विसर्पी भाभी का नम्बर है। अभी एक कॉल जाएगी और तुम्हारी लंका लग जायेगी । हिहिहि।

तिरंगा : ओsss तो इसलिए डोगा नागराज से कभी नही डरता और निडर होकर बात करता है। लेकिन उसे विसर्पी भाभी का नम्बर कहाँ से मिल गया?

तिरंगा, कोबी की तरफ देख कर बोला। लेकिन कोबी इस वक़्त अपनी चड्ढी में कुछ ढूंढ रहा था ।

तिरंगा : ओए कोबी ये क्या हरकत कर रहा है ?

कोबी : गुर्र ।

और अचानक कोबी झपट पड़ा डोगा पर।

कोबी : साले ये मेरी मोबाइल तेरे पास कैसे आई। चोर ।

नोट : जब कोबी गुस्से में होता है तो उसके मुंह से हर एक वाक्य शुद्ध निकलता है। हीहीही।

कोबी ने डोगा का बायां हाथ कसकर पकड़ लिया और मोबाइल छीनने की कोशिश करने लगा। डोगा ने मोबाइल बाएं से दाएं हाथ मे ले लिया।

कोबी : मेरी मोबाइल मेरे हवाले कर दे डोगा।

डोगा : मोबाइल नही ये आई फोन है। और ये तू क्या करेगा लेकर, साले जाहिल। मैंने तुझे इतना खिलाया पिलाया उसके बदले में ये आई फोन मुझे नही दे सकता।

कोबी : नही! उसमे मेरी व्यक्तिगत चीजें हैं उसे मेरे हवाले कर दे। गुर्र ।

डोगा : आएं क्या कहा ? व्यक्तिगत । अब तो एकदम नही दूंगा मैं । हीहीही ।

कोबी : गुर्र । गदा मारकर सर फोड़ दूंगा।

कोबी ने गदा का आव्हान किया ।

कोबी : हे भेड़िया देवता मद..

तभी अचानक से हवेली में अंधेरा छा गया । सारी बत्तियां भुक भुक करके बन्द होती चली गईं। एकदम स्याह अंधेरा हो गया हवेली में। और बाहर बादलों के गड़गड़ाने की आवाज़ें सुनाईं देने लगीं। तभी ज़ोरदार बिजलियां कड़कीं और खिड़कियों से दिखाई दी । एक पल को वहां उजाला हुआ और तत्काल फिर अंधेरा हो गया।
तिरंगा की कांपती हुई आवाज़ निकली।

तिरंगा : ए भाईलोग । ये लाइट कैसे चल गई ?

डोगा : गुर्र । अबे लाइट थी ही कब जो चल जाएगी। वो तो सोलर सिस्टम से चल रही थी।

परमाणु : डोगा अपनी मोबाइल का टॉर्च ऑन कर बहुत अंधेरा है मेरे को कुछ नही दिख रहा है।

डोगा: तो मेरे को कौनसा दिख रहा है।

परमाणु : भाई टॉर्च ऑन कर न प्लीज़ ।

डोगा : हाँ करता हूँ रुक । अरे! ये क्या ये मोबाइल को क्या हुआ ? ये तो खुल ही नही रही है।

कोबी : गुर्र । साले मेरी मोबाइल खराब कर दी,दाड़ वसूलूँगा मैं।

ध्रुव : क्या किसी और के पास मोबाइल नही है क्या। मैंने तो अपनी चार्ज में लगाकर छोड़ी है रूम में ।

तिरंगा : मेरे पास है । नोकिया। हिटलर के ज़माने की । बहूहू। इसमें टॉर्च नक्को।

ध्रुव : लेकिन ये सोलर सिस्टम अचानक खराब कैसे हो गया ? बड़ी अजीब बात है।

परमाणु : डोगा तूने नया लगवाया था न? किस कम्पनी का था ?

डोगा : गुर्र । नही चोर बाजार से खरीद कर लाया था।

तिरंगा : इसीलिए खराब हो गया।

डोगा : गुर्र। खोपड़ी खराब मत करबे तिरंगे। कल जाऊंगा उस साले के मुंह मे ग्रैनेड घुसेड़ने। साले ने इतना घटिया सोलर सिस्टम थमा दिया मुझे,गुर्र ।

अचानक बादल ने एक बार फिर हल्ला मचाया एक बार फिर बिजली कड़कीं और फिर शांति हो गई। लेकिन। नही– शांति तो अब भंग हुई थी। हवेली के पीछे से आने लगी वो आवाज़ ।
“ अनजान है कोईsss, गुमनाम है कोई ।
आजाssओsऊ आजाsss । ”

अंदर हवेली में सभी की नानी मर गई।

तिरंगा : बहूहू। इससे ज़्यादा फटा हुआ बाँस तो मैंने आजतक नही सुना।

ध्रुव : वही कल वाली आवाज़ ।

नागराज : लेकिन आज आवाज़ एक ही आ रही है ।सिर्फ आदमी की ।

परमाणु : हाँ । उस लड़की की आवाज़ नही सुनाई दे रही आज।

नागराज : परमाणु मेरा हाथ पकड़।

परमाणु : क्यों ?

नागराज : अबे पकड़ न ।

परमाणु : लेकिन तुम तो मुझे नज़र ही नही आ रहे मैं तुम्हारा हाथ कैसे पकड़ूँ।

नागराज : अबे तेरे बगल में ही तो खड़ा हूँ।

परमाणु : हैं !! तुम्हे दिख कैसे रहा है।

नागराज : सर्प इंद्रियों से।

परमाणु ने नागराज का हाथ पकड़ लिया।

नागराज : अब अपना हाथ तिरंगा को पकड़ा , वो तेरे बगल में ही है । और तिरंगा तुम अपना हाथ ध्रुव को पकड़ाओ और ध्रुव तुम अपना डोगा को और डोगा तुम कोबी को ।

डोगा : अब इतनी रात को चटनी-चटाई खेलने का मूड है क्या ?

नागराज : जो कहता हूँ वो कर । गुर्र ।

और फिर सब ने एक दूसरे का एक एक हाथ पकड़ लिया और तैयार हो गई मानव-रेलगाड़ी। हीहीही।

नागराज : अब सब मेरे पीछे पीछे आओ।

ध्रुव : लेकिन हम जा कहाँ रहे हैं ?

नागराज : हवेली के पीछे।

तिरंगा : क्या!!!

नागराज : हाँ। हम हवेली के पिछले दरवाजे से पीछे निकलेंगे। आज तो मैं इस गवइये को पकड़ कर रहूँगा। साला दिनभर का सही मूड इतनी वक़्त खराब हो जाता है इसका गाना सुनकर ।

तिरंगा : लेकिन मैं नही जाऊंगा । बहूहू।

डोगा : एक काम कर तू यही खड़ा होकर हमसब का इंतज़ार कर ठीक है।

तिरंगा : नही नही। मैं चल रहा हूँ चल रहा हूँ। हीहीही।

सब एक दूसरे का हाथ पकड़े पकड़े चलते रहे जल्द ही उस विशाल हवेली के एक दो मोड़ मुड़ने के बाद वे एक लंबे गलियारे में पहुंच गए जिसके आखिर में एक बड़ा दरवाज़ा दिख रहा था। जल्द ही नागराज सबको लेकर उस दरवाज़े के पास पहुंच गया । तभी उस व्यक्ति की आवाज़ फिर सुनाई दी। “ यूं ही तुम मुझसे बात करती होss, या कोई प्यार का इराssदाss है। ”

नागराज गुस्से मे फुंफकारता हुआ जल्दी जल्दी दरवाज़ा खोलने लगा । जल्द ही नागराज ने कुंडी खोल ली और एक झटके के साथ उसने दरवाज़ा पूरा खोल दिया। अपनी सर्प इंद्रियों की मदद से दरवाज़े के उसपार का सीन देखकर नागराज अंदर तक कांप गया।

डोगा : नागराज क्या हुआ रुके हुए क्यों हो? चलो ।

डोगा और ध्रुव सहित सभी लोग दरवाज़े पर एकसाथ खड़े हो गए और अचानक एक जोरदार बिजली कड़की और उसकी पांच सेकंड की रौशनी में सबने देख लिया वो–कब्रिस्तान ।

सबकी घिग्घी एक साथ बन्ध गई तिरंगा के गले मे थूक अटक गया और कोबी के गले में भी ।

नागराज : 💭अब क्या करूं अब अगर मैंने कहा चलो वापस चलते हैं । तो ये सब मुझे फट्टू बोलना शुरू कर देंगे। 💭

ध्रुव : 💭अगर मैंने यहां से वापस जाने की बात की तो सब मिलकर मुझे डरपोक कहने लगेंगे और जो थोड़ी बहुत भौकाली है मेरी वो भी खत्म हो जाएगी।💭

डोगा :💭 अगर मैं वापस गया तो मेरे ‘ रात का रक्षक ’ नाम पर कलंक लगा दिया
जाएगा।💭

परमाणु : 💭बहुत बुरी तरह फंस गया रे मैं तो।💭

कोबी : 💭है भेड़िया देबता ई का हुई गवा। हम तो यहाँ से वापस भी नही जा सकता हूँ।💭

तिरंगा : 💭ये दृश्य देखकर तो मेरी पैन्ट लगभग गीली हो चुकी है। अब अगर मैं इनलोगों के साथ आगे गया तो भी मरूंगा और नही गया तो ये लोग मुझे छोड़कर चल देंगे।💭

नागराज : 💭 हिम्मत मत हार बेटे चल दे आगे 💭

नागराज ने अपने जगमग सर्पों को निकाल लिया और उन सर्पों ने वहां के अंधेरे वातवरण में हल्की रौशनी भर दी । और लगभग आधा कब्रिस्तान नज़र आने लगा। ये कब्रिस्तान इस वक़्त बहुत ही भयावह लग रहा था । बहुत ही पुराना कब्रिस्तान मालूम पड़ रहा था ये, जिसकी गवाही वहां की धंसी हुई कब्रें दे रही थीं। थोड़ी थोड़ी दूरी पर पेड़ लगे हुए थे जो मंज़र को और भयावह बना रहे थे । रह रहकर बिजलियां कड़क रही थीं और कब्रिस्तान और भयावह लगने लग जा रहा था। नागराज ने हिम्मत करके एक कदम आगे बढ़ाया उसके पीछे ध्रुव ने भी ऐसा ही किया और फिर डोगा परमाणु भी आगे बढ़े । तिरंगा और कोबी एक दूसरे का हाथ पकड़े पकड़े चलने लगे। नागराज अपने जगमग सर्पों को अपने कंधों पर बिठाए हुए था।

परमाणु ने अपनी लहराती आवाज़ को सीधा रखने की कोशिश करते हुए कहा।

परमाणु : व वो आवाज़ तो अब नही आ रही।

“ तू ही तो है करार मेराsss ”

डोगा : (परमाणु को घूरकर) साले काली ज़बान । ले अब खुशा हो गया।

नागराज : ये आवाज़ उस पीपल के पेड़ के पीछे से आ रही है।

नागराज ने अपने जगमग सर्पों को ऊपर उठाया और उनकी रौशनी में सभी को लगभग 20 कदम पर वो पीपल का पेड़ दिखा जो बहुत ही डरावना दिख रहा था।

तिरंगा : क क क कहीं उस पेड़ पे भूत तो नही बैठा हुआ ?

नागराज ने बनावटी जोश से कहा।

नागराज : कुछ भी हो आज देख लूंगा मैं । भूतों से भी निपट लिया जाए आज । 💭 हे राम उठा ले उस पीपल तक पहुंचने से पहले । बहूहू💭

नागराज जानबूझकर धीरे-धीरे कदम बढ़ाने लगा। ध्रुव ने उसे पीछे से धक्का दिया।

ध्रुव : नागराज जल्दी जल्दी चलो न
।कहीं वो भूत भाग न जाये । साला आज उसकी चटनी बनाउंगा मैं गुर्र 💭बहूहू💭।

नागराज : 💭 बेटा मैं जान रहा हूँ तुम सबकी भी फटी हुई है वरना मुझे धक्का देने के बजाए तू खुद आगे निकल जाता । 💭

ज्यों-ज्यों वो पीपल के करीब पहुँचते जा रहे थे उनका दिल धाड़-धाड़ करके बजता जा रहा था। आखिरकार बस पांच कदम की दूरी पर रह गया पीपल का वो पेड़। सब ने सहमी हुई निगाहों से उसे देखा और उनके सर के पीछे के बाल खड़े हो गए।

अब सब उस पेड़ के बिल्कुल करीब पहुंच गए थे । नागराज रुक गया। उसके पीछे बाकी सब भी रुक गए।

डोगा : क्या हुआ नागराज ? रुक क्यों गए? बढ़ो आगे।

नागराज : 💭 तू ही आजा आगे, मरने की इतनी जल्दी है तो।💭 कुछ नही । मैं तो बस सोच रहा था कि अब क्या किया जाए।

परमाणु : हवन किया जाए । गुर्र । आगे बढ़ो और इस पेड़ के पीछे चलो।

नागराज : अच्छा सबलोग तैयार हो जाओ हम खामोशी से बिल्कुल दबे पांव चलेंगे अब ।

और फिर सब नागराज के साथ दबे पांव चलते हुए जाकर उस पेड़ के तने से सट गए। और फिर धीरे धीरे नागराज ने खिसकना शुरू किया उस पेड़ के पीछे की ओर । बाकी सब भी नागराज के पीछे थे। नागराज तने के पिछले कोने पर आकर रुक गया । और उसने डरते डरते अपनी मुंडी धीरे धीरे कोने पर से आगे सरकानी शुरू की (झांकने के लिए।)और आंखें बंद कर ली । फिर हिम्मत करके उसने धीरे धीरे आंखें खोलनी शुरू की और उसने देखा वो, वो , वोउsss । –रोमांटिक सीन चल रहा था वहां तो । एक शख्स एक स्त्री की गोद मे सर रखकर लेटा हुआ था । और गा रहा था। “ तेरी मेरी , मेरी तेरी प्रेम कहानी है मुश्किल। दो लफ़्ज़ों में ये बयां न हो पाए। ”

डोगा : अरे बाप रे! फिर गाना शुरू हो गया। और ये आवाज़ तो सच मे इस पेड़ के पीछे से आ रही है। नागराज क्या कर रहे हो।

अचानक डोगा ने ध्रुव को धक्का दे दिया । ध्रुव नागराज से लड़ा और नागराज फौरन उस प्रेमी जोड़े के आगे जा गिरा । और जगमग सर्पों ने वहाँ रौशनी फैला दी । तत्काल ही नागराज को नज़र आया वो शख्स ।

नागराज आंखें फाड़कर चिल्लाया ।

नागराज : एंथोनी!!!

एंथोनी : न न नागराज !

उस स्त्री की गोद मे सर रखकर सोने वाला वो व्यक्ति एंथोनी ही था।

नागराज के मुंह से एंथोनी का नाम पेड़ के पीछे छुपे बाकी लोगों ने भी सुन लिया और फिर सबका डर गायब हो गया और वे सब भी कूद कर एंथोनी के आगे आ गए ।
ध्रुव, डोगा, परमाणु, तिरंगा और कोबी हैरान होकर एकसाथ चिल्लाय। “ एंथोनी!!!!!!! ”

और तभी एक और ज़ोरदार चीख सुनाई दी जिसने सभी के कानों के पर्दे फाड़ दिए। वो स्त्री जो एंथोनी के साथ बैठी हुई थी इतने सारे लोगों को देखकर डर गई और चिल्लाते हुए भाग खड़ी हुई ।

एंथोनी : नही रुक जाओ एन्नाबेला ! मत जाओ ! प्लीज़ ।

लेकिन तबतक वो गायब हो चुकी थी।
एंथोनी वापस पलटा।

एंथोनी : गुर्र गुर्र गुर्र । तुमलोगों की वजह से ही वो भाग गई। और अब वो दुबारा कभी मेरे पास नही आएगी।

नागराज : एक बात बता। कल भी तू ही यहां गाना गा रहा था?

एंथोनी : हाँ कल मैं दूसरी वाली को लेकर आया था । वो भी छोड़कर चली गई। बहूहू।

नागराज : बेटा तू पहले हमारे साथ चल ।

इतना कहकर नागराज ने आंखों से सबकी तरफ इशारा किया। और सबने मिलकर टांग लिया एंथोनी को।

एंथोनी : अबे कहाँ ले जा रहे हो मुझे ।

डोगा : तेरी खातिरदारी करने । 💭 साले तेरी वजह से मेरी नानी मर गई थी। छोडूंगा नही तुझे मैं ।💭

एंथोनी : छोड़ दो मुझे । नीचे उतारो। बचाओ बचाओ । प्रिंस बचा ले मुझे। 💭 बहूहू प्रिंस को तो मैंने ही भगा दिया था। कवाब में हड्डी बन रहा था इसलिए। भैंssss।💭

【 तृतीय अध्याय समाप्त 】

हीहीही। दोस्तों कैसा लगा आपको ये पार्ट । आशा करता हूँ अच्छा ही लगा होगा। अब फटाफट कॉमेंट कर डालिये ताकि मुझे भी अच्छा लगे। धन्यवाद।

 

धन्यवाद

Written By – Talha for Comic Haveli

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12 Comments on “अपराध उन्मूलन के बाद 【पार्ट – 6th】”

  1. बहुत बढ़िया तल्हा भाई।

    सुपर हीरोज का डायलाग पढ़ के बहुत हँसी आती है।
    ये भोकाल तो गयो।
    ये देखना ज्यादे इंट्रसेटिंग होगा कि वो कलियुग में कैसे आया।
    कोबी की भाषा, परमाणु और डोगा की लड़ाई, तिरंगा की अधूरी शायरी सब मस्त है।
    और लास्ट में भेड़िया का मरना जहाँ रहस्य पैदा करता है वही भूतों वाली कहानी में मुर्दा एंथोनी का आगमन इस मजे को दुगना कर देता है।

    1. धन्यवाद आकाश भाई। परन्तु भेड़िया का मरना कहाँ रहस्य पैदा करता है। कोबी ने उसे लथेड़ लथेड़ कर मारा था इसलिए मर गया बेचारा

      1. मतलब …क्या भेड़िया और जेन सचमुच मर जाएँगे?
        या होगा कोई चमत्कार।

  2. Bht hi h mazedaa
    Hansi ruk hi nahi rahi hai.
    Kobi oye hoye
    Nagraj aur uske naag .
    ROFL
    Waiting for next part

  3. मैं हर उस शख्स को चैलेंज दे रहा हूँ । जो जो इस स्टोरी को पढ़ रहा है। मुझे इस पार्ट का एक बहुत बड़ा मिस्टेक बताओ । वैसे वो मिस्टेक नही अगले पार्ट में पता चलेगा
    पर मैं देखना चाहता हूँ कि किसका ध्यान जाता है इस ओर किस किस के भेजे में है दम । हीहीही। और जिसने पहले बताया उसे मैं इस स्टोरी के अगले भाग में रोल दूंगा।

  4. हाहाहा क्या लिखा है तल्हा भाई जबरदस्त।
    हँसी रुक नही रही है मजा आ गया।
    भोकाल को ला कर आपने स्टोरी में 4 चाँद लगा दिए।
    सर्वाकर को एक बार देखकर मजा ही आ गया।

    भेड़िया मर गया?
    जेन भी सती होने चल गई है बेचारी मजबूरन हाहाहा।

    फुज़ो और जेन के संवाद बहुत मस्त थे।
    अपना एंथोनी तो रंगीन मिजाज निकला । हाहाहा

    लेकिन फूटी किस्मत के साथ।

    तिरंगा बेचारा ही रह गया। कोबी हमेशा की तरह मस्त।
    परमाणु और डोगा की लड़ाई मस्त थी।
    एन्थोनी तक सभी हीरोज का पहुंचना हर एक संवाद मस्त था। अन्थोनी इतना बेसुरा गायेगा ये आज पता चला। हाहाहा।

    बहुत मस्त मजा आ गया।
    नेक्स्ट पार्ट के लिए आल द बेस्ट

  5. aly hahahah….mst mst …number 1 …isy dhykty vkt ..i mean pdthy vkt ptaa nhi kese kese seen dimaag m aa rhy thy…jese sbi ka nagraj ky pichy chlnaa…aur doga ka parmaanu pr goliyaa barsaana..aur parmanu ka chdii m gumna…hr ik jgha pr itni hssi ..shubaan alhaa..eysha lag raha tha jese ki ik movie aankho ky saamny chl rhi hy….mst …nice story writing skills bhaijaan…such m aap bhut aagy tak jayogy

  6. Main to gir gir k has raha hu
    Pet pakad kar hase ja raha hu

    Kya likha h hahaha
    Matlab had kar diya
    Kobi ka iPhone bhi kharab ho gya ab to
    Tiranga ko to itna darpok bana diya main uske next part ko likhte time hasunga ya likhunga samjh nhi pa raha
    Bahut hi jabardast talha
    Superb

  7. Are yaar har part me ab comment chahiye kahne ke liye shabd nhi he mere pass sirf hassi he…. Hi hihihi..
    Or ha mene kaha tha na last part me ki wo best part he shayed me galat tha ye best part he… Or mujhe pata he next part me main fir se galat hounga to next part me milte he

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