Apradh Unmoolan Ke Baad Part 8

श्रृंखला :- 【अपराध उन्मूलन के बाद】[पार्ट » 8]

प्रथम अध्याय ☆एंथोनी की आप बीती☆

तो दोस्तों….कैसे हैं आप लोग। मुझे पता है अच्छे ही हैं। तभी तो कहानी पढ़ रहे हैं। हीही

इस पार्ट की शुरुआत हम पास्ट से करते हैं। क्योंकि एक बार आप पास्ट जान लेंगे तो प्रेजेंट भी आपके दिमाग में जल्द ही प्रेजेंट हो जाएगा।

उस रात, जब ब्रह्माण्ड रक्षकों को एंथोनी मिला:-

सभी ने मिलकर एंथोनी को टाँगा हुआ था। एंथोनी भैं-भैं कर के चिल्ला रहा था।

एंथोनी : अबे छोड़ दो मुझे! भगवान तुम्हे सदा सुहागन रखेगा ।

तिरंगा : सुहागन !

परमाणु : इसकी Gf इसे छोड़कर भाग गई है न। इसलिए दिमाग खराब हो गया है इसका। हीहीही।

डोगा (एंथोनी से) : इन लोगों ने अगर तुझे छोड़ भी दिया तो मैं तो पक्का नही छोड़ूंगा।

एंथोनी : अबे मैंने आखिर तुम लोगो का लिया क्या है? मेरा मतलब किया क्या है?

नागराज : वो तो हम तुझे हवेली में पहुंचकर बताएंगे।

एंथोनी : हवेली! अरे! ये हवेली का पता तुमलोगों को कहाँ से पता हुआ?

ध्रुव : डोगा को मिली है। गिफ्ट में।

एंथोनी : क्या!! लेकिन…

पर पूरा बोल पाने से पहले ही एंथोनी ज़ोरदार धम्म की आवाज़ के साथ फर्श पर गिर पड़ा। उसकी तशरीफ़ पूरी हिल गई। अब वो हवेली के अंदर हॉल में था। एक कोने में फैले हुए सोफे पर भोकाल फैला हुआ था।

एंथोनी : अइ अम्मा….हिला दिया बे! हिला दिया!

परमाणु : क्या हिला दिया बे?

एंथोनी : तशरीफ़ हिल गई मेरी। गुर्र ।

कोबी : थारी तशड़ीफ की माँ की आँख! सारे! कबर पिज्जु।

परमाणु : कबर पिज्जु?

तिरंगा : बिज्जू बोलना चाह रहा था बेचारा।

परमाणु : ओह अच्छा। हीहीही।

अचानक डोगा ने अपनी गन एंथोनी की तरफ तान दी।

डोगा : अब बता बे! तुझे राग-बेरागी अलापने के लिए इसी हवेली का पिछवाड़ा मिला था!

एंथोनी : अबे ओ! मेरा तो पुराना रिश्ता है इस जगह से। बचपन में गुल्ली-डंडा खेलता था मैं उस कब्रिस्तान में।

नागराज : यानी बचपन से ही भूत प्रकृति का है तू।

एंथोनी : गुर्र।

ध्रुव : ये सब सवाल छोड़ो। मुझे तो यह जानना है कि एंथोनी को गर्ल-फ्रेंड्स कहाँ से मिलीं ?

नागराज : क्यों, सारी लौंडियों को भगवान ने तेरे लिए ही बना कर भेजा है क्या दुनिया में ?

एंथोनी : लेकिन वो लौंडियें नही थीं।

ध्रुव : क्या! फिर क्या थीं?

एंथोनी : चुड़ैल।

सभी के बुक्के एक साथ खुल गए।

परमाणु : अबे हम लोग गर्ल-फ्रेंड रखते हैं । ये साला चुड़ैल-फ्रेंड रखता है।

तिरंगा : मुझे तो यकीन नही हो रहा। हम लोगों से डर कर चुड़ैल भाग गई। हीहीही।

एंथोनी : सालों ! तुमलोगों की वजह से ही वो छोड़ गई मुझे । तुम्हारे बमों में बड़े बड़े फोड़े! गुर्र।

डोगा : अबे हम लोगों की वजह से तो सिर्फ एक ही छोड़कर भागी है! पहली वाली ने कैसे छोड़ा ये तो बता?

डोगा ने एंथोनी के दिल का वो तार छेड़ दिया था जिसकी वजह से बेचारा एंथोनी तार-तार हो गया।

एंथोनी : भैंssss

ध्रुव : अबे रोने क्यों लगा?

नागराज : बचपन में लॉलीपॉप गायब हो गया था इसका। वही याद कर के रो रहा है। गुर्र। अबे सुना नही डोगा ने क्या पूछ लिया इससे।

परमाणु : अबे, अबे , अबे। जाने दे छोड़ इस बात को । और डोगा अब ऐसे सवाल मत पूछियो इससे।

एंथोनी : अब जब पूछ ही लिया है, तो जान लो।

एंथोनी अपनी आप-बीती सुनाने लगा।

एंथोनी : उस रात मैं प्रिन्स के बहुत कहने पर अपनी बेटी मारिया का हालचाल जानने उसके घर गया। जब मैं वहां से वापस आने लगा तब मैं एक पार्क के पास से गुज़रा। मैंने पार्क में एक बहुत ही खूबसूरत लड़की को बेंच पर बैठे देखा। मैं उसे देखते ही लट्टू हो गया…

तिरंगा : …फिर तो चक्कर आ गए होंगे तुझे?

एंथोनी रुक गया। और तिरंगा को घूरने लगा।

तिरंगा : क्या??

एंथोनी (नागराज से) : इससे कह दो चुपचाप सुने।

नागराज : चुपचाप कहानी सुन बे तिरंगे!

लेकिन अब एंथोनी नागराज को घूरने लगा।

नागराज : अब क्या हुआ बे भूतनी वाले?

एंथोनी : कहानी नही। सच्चाई है ये!

नागराज : अच्छा! चुपचाप सच्चाई सुन बे तिरंगे!

एंथोनी : हाँ तो मैं कहाँ था?

कोबी : पारक मा।

एंथोनी : हाँ…अबे! मैं कहाँ पार्क में था । मैं तो पार्क के बाहर था। पार्क में तो वो खूबसूरत बला बैठी हुई थी।

कोबी : हाँ बे, उहे। चुपचाप कहाणी सुणा।

एंथोनी : फिर मैं भी उस पार्क में घुस गया। और जाकर उस लड़की के करीब बेंच पर बैठ गया। काफी देर तक मैंने देखा उस लड़की ने मेरी तरफ ताका भी नही। बस अपने ही ख्यालों में ग़ुम हो कर बैठी हुई थी। मैं उसे बगल से टीप रहा था। आखिरकार, लगभग एक घण्टे तक उसे ताड़ने के बाद मुझे उससे बात करने का मन करने लगा। मैं सरक कर थोड़ा उसके पास गया। मैंने उससे पूछा। क्या हुआ? आप इतनी रात में इस अँधेरे पार्क में क्यों बैठी हुई हैं। पर…पर…उस लड़की ने जवाब देने के बजाए वो अप्रत्याशित हरकत कर डाली। उसने अपनी बाहें मेरे गले में डाल दीं। हीहीही। वाह कितना मज़ा आया था। हीहीही।

परमाणु : 💭साला लफंगा। मरने के बाद भी चैन नही है। गुर्र।💭

एंथोनी : वो लड़की मुझसे लिपटे-लिपटे ही रोने लगी। मैंने उससे पूछा, क्या हुआ तुम रो क्यों रही हो? उसने रोते हुए मुझसे कहा। “मैंने सोचा था अब इस दुनिया में मेरा कोई नही है। मैं अकेली हो गई हूँ। पर तुम मुझे देख सकते हो इसका मतलब मैं अकेली नही हूँ अब।”  मैंने चौंककर पूछा। “देख सकते हो,मतलब?” तब उसने जवाब दिया। “मैं एक चुड़ैल हूँ। मैं मर कर चुड़ैल बन गई हूँ।” सुन कर मुझे कुछ अजीब लगा। लेकिन फिर मैंने सोचा इतनी खूबसूरत तो अप्सराएं नही होतीं जितनी ये चुड़ैल है। और फिर एक ही रात में हम दोनों को एक दुसरे से प्यार हो गया। दुसरे  रात में मैं उसे रेस्तरां में ले कर गया, जो बन्द हो चुका था। मैं ट्रांस्मिट हो कर जंगले से अंदर घुसा और वो गेट से ही पार हो कर अंदर घुस गई। हम दोनों एक कुर्सी पर जा बैठे। मैंने उससे पूछा “क्या लोगी? बर्गर, पिज़्ज़ा..” उसने कहा मुझे कुछ खाना नही है। मैंने पूछा। “तो फिर कुछ पीना चाहोगी? मैंगो शेक, बनाना शेक या सन्तरे का जूस”  सन्तरे के जूस का नाम लेते ही अचानक वो शांत हो गई और किसी सोच में पड़ गई। मैंने पूछा “क्या हुआ? तुम ऐसे उदास हो कर क्यों बैठ गई?” तब उसने बताया “सन्तरे की वजह से ही मैं मरी थी। सन्तरे के छिलके पर मेरा पाँव फिसल गया था।” मुझे अचानक हंसी आ गई। मैं अपनी हंसी दबा गया परन्तु उसने मुझे मुस्कुराते देख लिया था इसलिए अपनी भौंहें सिकोड़ने लगी। मैंने अपना बचाव करते हुए कहा “गलती तो उस साले कमीने की थी जिसने सन्तरे का छिलका वहां फेंका था।” पर पर…मैं अभी अपनी बात पूरी कर भी नही पाया था की उसने मुझे एक चाँटा जड़ दिया। मैं हकबका गया । मैंने पूछा “तुमने मुझे चाँटा क्यों जड़ा?”

उसने गुस्से में जवाब दिया “क्योंकि तुमने मेरे छोटे भाई को कमीना कहा।” मैं सोचने लगा मैंने इसके भाई को कमीना कब कहा…

कोबी : खी…खी.. खी

एंथोनी : फिर वो खुद ही मुझे बताने लगी। “जिसने सन्तरे का छिलका फेंका था वो मेरा छोटा भाई था। उसने सन्तरा खा कर उसका छिलका सीढ़ियों पर फेंक दिया था। और उन्ही पर फिसल कर मैं गिरी, उसके बाद मुझे याद नही क्या हुआ।”   मैंने सोचा इस बार कुछ अच्छा बोलकर इसकी नाराज़गी खत्म कर दूं। फिर मैंने कहा “च्…च्…च् इसमें तुम्हारे भाई की कोई गलती नही थी। गलती तो उसकी थी जिसने तुम्हारे भाई को वो सन्तरे दिए।” ये सुन कर वो बोली “हाँ…मेरे भाई को वो सन्तरे मेरे मंगेतर ने दिए थे।” ये सुन कर मैं समझ गया की अब ये फिर मुझसे नाराज़ होने वाली है। इसलिए मैंने झट से बात पलट दी। “नही जी। इसमें तो उस बेचारे की भी कोई गलती नही थी।”  अचानक मेरे दूसरे गाल पर फिर एक चाँटा पड़ा..

कोबी : खी…खी…खी।

एंथोनी : गुर्र । ज़्यादा खिखिया मत बे जानवर की औलाद। वर्ना मैं नही सुनाने का।

नागराज : अबे कोबी! चुपचाप पटा के बैठा रह। एंथोनी, तू सुना, सुना। 💭हीहीही💭।

एंथोनी : मैंने अपना गाल सहलाते हुए उससे पूछा अब क्यों मारा। उसने कहा “क्योंकि इस बार गलती थी। मेरा मंगेतर सुड़कु सिंह जो कि ठाकुर नेटा सिंह का बेटा था। मुझसे शादी नही करना चाहता था। उसके बाप ने ज़बरदस्ती उसकी शादी मुझसे लगा दी थी। बेचारे बहुत भले इंसान थे। हम बहुत गरीब थे इसलिए नेटा सिंह ने अपने बेटे की शादी मुझसे फिक्स कर दी थी। वो गरीबों का भला चाहने वाले इंसान थे। पर उनका बेटा मुझसे शादी नही करना चाहता था। फिर एक दिन उसने मेरे मर्डर का प्लान बनाया। वो जानता था की मैं रोज़ शाम को छत पर जाती हूँ , कपड़ा उतारने के लिए। उसने मेरे भाई को बुला कर सन्तरे थमा दिए और उसे सिखा दिया, इसे शाम को खा कर छिलका सीढ़ियों पर फेंक देना। मेरा मासूम सा भाई उसकी बातों में आ गया और उसने वही किया। मैं छत पर कपड़े उतार रही थी और नीचे सीढ़ियों पर मेरा भाई छिलके फेंक चुका था। ज्यों ही मैं नीचे आने लगी , सीढ़ियों पर फिसल पड़ी। और मर गई।”    मुझे उसकी पूरी कहानी सुन कर बड़ा दुःख हुआ मैंने उससे कहा। “बहुत कमीना था वो सुड़कु सिंह। एक बार मेरे हाथ लग जाए उसके टोटे-टोटे कर के मुर्दा खोरों को खिला दूंगा। और उस कमीने को भी, जिसने उससे सन्तरे बेचे।” और…और..

नागराज : …तीसरा चाँटा तुझे लगा।

एंथोनी : हाँ।

नागराज : मैं जानता था। 💭हीहीही💭

एंथोनी : मैंने इस बार अपने लाल हो चुके गाल को सहलाते हुए उससे पूछा। “अब क्यों मारा?”  उसने कहा “क्योंकि सुड़कु सिंह को सन्तरे बेचने वाला मेरा बाप था।”

मेरे मुंह से निकला “क्या!!!”

उसने फिर कहा “हाँ। मेरा बाप सन्तरे बेचता था नाले के किनारे बने फुटपाथ पर। और सुड़कु ने उन्ही से सन्तरे खरीदे थे।”   मैं अब शर्मिंदा हो चुका था। और दुखी भी। मैंने उसके कन्धे पर हाथ रखकर कहा। “मुझे माफ़ कर दो मुझसे गलती हो गई। असल में गलती तुम्हारे बाप की भी नही थी। गलती तो उस हरामखोर की थी जिसने तुम्हारे बाप को सन्तरे बेचने का काम दिया। मतलब कोई और काम नही दे सकता था? लेकिन इस…

नागराज : …बार तुझे तीन-चार झापड़ एक साथ रसीद किये गए।

एंथोनी : हाँ।

एंथोनी अपना गाल सहलाता हुआ बोला।

नागराज : समझ गया था मैं। 💭हीहीही💭

एंथोनी : मैंने कांपते कांपते उससे पूछा । “अब क्यों मारा??”   इस बार वो गुस्से से फुफकारती हुई बोली “क्योंकि तुमने मेरी माँ को हरामखोर कहा। गुर्र गुर्र।”   मैं आश्चर्य चकित हो कर चिल्लाया “क्या!!!”

“हाँ । क्योंकि मेरे बाप को सन्तरे बेचने का काम मेरी माँ ने ही दिलाया था।” इतना कहते ही वो तेज़ी से बाहर जाने लगी। मैं उसके पीछे लपका। उसने फुफकारते हुए मुझसे कहा। “खबरदार! जो मेरा पीछा किया अब। तुमने मेरा दिल बहुत दुखाया है। अब अगर मेरे पीछे आए तो कच्चा चबा जाउंगी। गुर्रर्र।”    फिर मेरी हिम्मत न हो सकी उसके पीछे जाने की।

सभी अब तक एक दम सन् मार कर एंथोनी की दर्द कथा सुन रहे थे। कथा समाप्त होते ही एंथोनी फिर से पेपा बाने लगा।

परमाणु उसके कन्धे पर हाथ रखकर उसे समझाने लगा।

परमाणु : चुप हो जा भाई। मेरे भाई चुप हो जा।

एंथोनी ने उसका हाथ झटक दिया।

एंथोनी : गुर्र। भाई नही तुम लोग मेरे। क्योंकि दूसरी वाली तुम लोगों की वजह से ही भागी है।

परमाणु : अबे लेकिन हम ने जानबूझकर थोड़े न भगाया उसको। इसमें उसकी गलती है कि वो भाग गई।

एंथोनी :  नही । जानबूझकर भगाया है तुम लोगों ने उसे। अगर तुम लोग न आते तो वो न भागती। उसे पटाने में तो मुझे बहुत टाइम लग गया था। गुर्र। तुमसब की वजह से मेरी मेहनत बेकार चली गई।

ध्रुव : अच्छा! ज़रा हमे भी बताओ की उसे पटाने में इतना टाइम क्यों लगा?

एंथोनी : क्योंकि वो एक नंबर की सर्व-शर्मीली थी।

तिरंगा : सर्व-शर्मीली?

एंथोनी : हाँ। दुनिया भर की सारी शरम उसी के अंदर समाई हुई थी। उसकी मौत ही शर्म के मारे हुई थी। तुमलोगों ने वो कहावत तो सुनी ही होगी “शर्म के मारे मर जाना।”

डोगा : अच्छा, लेकिन उसकी मौत शर्म के मारे कैसे हुई थी?

एंथोनी : उसके माँ-बाप ने ज़बरदस्ती उसकी शादी करा दी थी। बिना उसकी इजाज़त के। वो शादी नही करना चाहती थी। क्योंकी वो बहुत शर्मीली थी। पर उसके माँ-बाप ने उसकी शादी करा ही दी। फिर शादी की रात जब दूल्हा उसके कमरे में आया,जैसे ही उसने उसका घूँघट उठाया, वो इतनी ज़्यादा शर्मा गई की बैठे-बैठे ही टपक गई। हीहीही।

नागराज : काश विसर्पी इतना शर्माती। बुहुहु ।

ध्रुव : और नताशा भी।

परमाणु : और शीना भी।

कोबी : अउर जेन भी। गुर्र । लेखिन उसखे सरमान्हे न सरमान्हे का कौन्हो फायधा नाही। गुर्रह।

तिरंगा : काश मच्छर और चूहे भी इतना शर्माने लगें। कम्बख्तों से पीछा तो छूटे। बुहुहु!

एंथोनी : यही कारण था की मुझे उसे पटाने में बहुत समय लगा। गुर्र। इतनी मेहनत से मैंने उसे शर्मीली से बेशर्म बनाया था। पर तुमलोगों को देखकर वो फिर शर्मा कर भाग गई। अब पता नही कहाँ चली गई होगी।

नागराज : हुम्म…. तेरी आत्मकथा खत्म होते होते रात का आधा पहर भी खत्म हो गया। हीही।

अचानक एंथोनी की नज़र भोकाल पर पड़ी।

एंथोनी : ये पुरातन-लफंगा यहां कैसे आया?

ध्रुव : पता नही । कल से ही बेसुध पड़ा हुआ है। जागे तब तो पता चले यहाँ कैसे आया।

एंथोनी : और स्टील कहाँ है?

एंथोनी ने मानो कोई पटाखा फोड़ दिया था। अब सब का ध्यान इस ओर गया की स्टील काफी देर से उनके बीच नही है।

परमाणु : अबे हाँ! कहाँ गया स्टील?

कोबी : कहाँ गवा ससुरा?

डोगा : देख किसी कोने में बैठकर जंग छुड़ा रहा होगा।

ध्रुव : ये मज़ाक का समय नही है डोगा। स्टील कल शाम से ही हमारे बीच नही है।

नागराज : और हमारा ध्यान अब तक इस ओर गया ही नही था। चलो ढूंढते हैं स्टील को।  

डोगा : हाँ। चलो देखते हैं कहीं टॉयलेट सीट में उसका पैर तो नही फंस गया। हीही।

ध्रुव : मुझे लगता है उसकी बैटरी अचानक से डिसचार्ज हो गई होगी। वो कहीं कोने में पड़ा होगा। हमे उसे जल्द से जल्द ढूंढकर चार्ज करना होगा। हम सब अलग अलग उसे ढूँढने जाएंगे।

अचानक एंथोनी बोल उठा।

एंथोनी : तुम सब ढूंढो उसे । मैं तो चला। कहीं भोर न हो जाए।

डोगा ने उसका झोटा पकड़कर खींच लिया।

डोगा : कहाँ भागता है बे! चल तू भी उसे ढूँढने में हमारी मदद कर।

एंथोनी : छोड़ दे डोगा! गुर्र।

डोगा : मुझे तुझे पकड़े रखने का शौक भी नही है। छोड़ दूँगा। पर तुझे भी स्टील को ढूंढना होगा।

एंथोनी : तू बहुत कमीना है डोगा। गुर्र।

डोगा : हीहीही। तभी तो डोगा नाम है मेरा। जो भी समझे मुझे थोड़ा, उसके बम में बड़ा-बड़ा फोड़ा। हीहीही।

एंथोनी : पर मैं तेरे साथ मिलकर नही खोजूंगा उसे।

नागराज एंथोनी को खींचता हुआ बोला।

नागराज : तू मेरे साथ आ बेटे।

डोगा : देखियो नागराज कहीं भाग न जावे ससुरा । इसने हमे दो रात बहुत टॉर्चर किया है, हीही गुर्र। हम भी इसे दो रात परेशान कर लें। हीहीही।

नागराज : नागराज के चंगुल से तो मौत भी बचकर नही निकल पाती। ये एंथोनी क्या चीज़ है। हीहीही।

फिर सभी हवेली में इधर-उधर निकल लिए स्टील को ढूँढने के लिए।

लेकिन कोबी उन सब से विपरीत दिशा में जाने लगा।

परमाणु : अबे तू किधर जा रहा है?

कोबी : बम-पुलिस। गुर्र!

परमाणु : ऐं! ये कौन सी पुलिस है ? और हवेली में कब आई?

तिरंगा : अबे वो टॉयलेट जा रहा है, हीही।

परमाणु : गुर्र। तिरंगे तू समझ कैसे जाता है, कोबी जो बोलता है? मुझे तो कभी कभी लगता है तुम और कोबी कुम्भ के मेले में बिछड़े हुए जुड़वा भाई हो।

तिरंगा : अबे नही ऐसी बात नही है! बस सबका अपना अपना हुनर होता है।

परमाणु : और तेरा हुनर है कोबी की बात समझना । हीहीही। बढ़िया हुनर है।

तिरंगा : गुर्र।

फिर तिरंगा और परमाणु भी स्टील को ढूँढने लगे। हवेली काफी बड़ी थी, इसलिए सबको अलग अलग जाना पड़ा। पर नागराज एंथोनी के साथ था ताकि एंथोनी भाग न जाए।

           ★प्रथम अध्याय समाप्त★

द्वितीय अध्याय ☆दम☆

वर्तमान में।

एक टैक्सी आकर महानगर के एक भीड़-भाड़ वाली रोड पर रुकी। टैक्सी का दरवाज़ा खुला और उसमे से निकला भेड़िया। भेड़िया को छोड़ने के बाद टैक्सी आगे बढ़ गई। भेड़िया चकरा गया। काफी कुछ बदल चुका था। भेड़िया एक फुटपाथ पर आ कर खड़ा हो गया ।

भेड़िया : 💭 हे भेड़िया देवता! कितना बदल गया है ये महानगर । इतनी ऊंची ऊंची इमारतें ! इन्हें देखने के लिए तो पूरी की पूरी मुंडी ऊपर करनी पड़ रही है। कहीं हड्डी न टूट जाए गर्दन की! नीचे कर लेता हूँ मुंडी । बुहुहु। जंगल से बड़े जोश में निकला था मैं । मगर यहाँ आकर तो अब याद ही नही आ रहा नागराज का घर किधर है। किसी से पता पूछता हूँ उसका। 💭

भेड़िया ने उधर से गुज़र रहे एक आदमी को रोका। जो पहले ही काफी परेशान सा लग रहा था और अपने बिन बालों वाले बेल को खुजाता हुआ जा रहा था।

भेड़िया : ओ…भाईसाब क्या आप मुझे बता सकते हैं नागराज का घर किधर है।

उस आदमी ने रुक कर पहले भेड़िया को ऊपर से नीचे तक घूरा फिर चिड़चिड़ाहट भरी आवाज़ में पूछा ।

आदमी : किसका नाम लिया तुमने?

भेड़िया : नागराज।

आदमी : ओ। अच्छा वो हरा प्राणी जो दिनभर केवल चड्ढी पहन कर महानगर में इधर से उधर आवारगर्दी किया करता था। उसका पत्ता तो महानगर से कब का कट चुका है। बहुत दिन से नज़र नही आ रहा है वो। गुर्र, लफंगा। अच्छा हुआ नज़र नही आ रहा। आए भी न। मेरी लड़की मुझसे ज़िद किया करती है मैं शादी करूंगी तो सिर्फ नागराज से वरना और किसी से नही। गुर्र ! पर मैं ऐसे प्राणी को अपना दामाद नही बनाने वाला जो सिर्फ चड्ढी पहन कर घूमता है। बद्तमीज़ । गुर्र। उसका पता किसी को नही पता। तुम परेशान मत हो झूठ मूठ में।

कहकर वो चलता बना । भेड़िया परेशान सा खड़ा हुआ था।

भेड़िया : अब क्या करूं ? कैसे ढूँढूँ नागराज को?

तभी भेड़िया को पास के ही एक पार्क से लोगों की चीख पुकार सुनाई दी। कई सारे बन्दे और बन्दियां पार्क से भेड़-बकरी की तरह भागते हुए बाहर आ रहे थे।

भेड़िया : अरे बाप रे! क्या हो रहा है वहां? ये सब लोग ऐसे क्यों भाग रहे हैं ? मुझे देखना होगा।

हड़बड़ी में भेड़िया ज़ेब्रा क्रासिंग से न जा कर बीच सड़क से पार्क की तरफ बढ़ने लगा। अचानक एक कार उसे ठोकती हुई आगे बढ़ गई। भेड़िया को मानो कुछ हुआ ही नही। वो उठकर फिर से भागा । कार वाला कुछ दूर जाकर रुक गया था।

कार वाला : अबे मरना है क्या बे पियक्कड़ की औलाद!! तू तो मर जाएगा, मैं तो टँगा जाऊँगा!! गुर्र!

भेड़िया जल्दी जल्दी कूदता फांदता हुआ पार्क के गेट पर पहुँचा। अब तक पूरा पार्क खाली हो चुका था। भेड़िया फटाक से अंदर घुसा। अब पार्क में केवल एक ही व्यक्ति बचा था जो एक झूले पर बैठा हुआ झूल रहा था और अजीब पागलों वाली हंसी हंस रहा था। भेड़िया उस शख्स के पास पहुँचा।

भेड़िया : ए भाई! यहाँ क्या हुआ था? लोग बावले बन्दरों की भांति क्यों भाग निकले। और तुम क्यों नही भागे।

### : हिहिहिहिहिंsss । क्योंकि मैंने ही उनलोगों को भगाया है। मेरा नाम दम है। और मुझे लोगों की नाक में दम करने में बड़ा मज़ा आता है।

कहकर वो शख्स झूले पर से कूद कर नीचे उतरा।

उसने अजीब तरह की कॉस्ट्यूम पहन रखा था। पीली शर्ट और पीली पैंट । चेहरे पर नीला मास्क जिसने सिर्फ उसकी आँखों को घेरा हुआ था। बाल इधर उधर मुड़े तथा खड़े हुए थे, मानो कुछ देर पहले उसके सर पर आग लगी हो। उसके पीले कॉस्ट्यूम पर बीचों बीच, सीने के पास एक लाल-मिर्च का चित्र बना हुआ था जिसपर लिखा हुआ था D । और इन सब के अलावा उस शख्स के चहरे पर फैली पागलों वाली मुस्कुराहट उसे और अजीब बना रही थी।

भेड़िया : 💭ये तो कोई सिरफिरा मालूम होता है, जो अपना सिर फिरा कर इधर चला आया है। ख़ैर कोई भी हो। इसे मैं अब इस दुनिया से फिरा दूंगा। लोगों को बेवजह परेशान करना भी एक तरह से अपराध ही है। और अपराधी, अपराधी होते हैं चाहे वो जंगल में हों या शहर में। और ऐसे लोगों की टोटी कसता है,भेड़िया।💭

भेड़िया ने कड़क आवाज़ में उससे पूछा।

भेड़िया : 💭 तुमने लोगों को यहाँ से क्यों भगाया?💭

दम : कहा न । मज़ा आता है मुझे। हीहीही। पर तूने मुझसे बदतमीज़ी से बात कर के अच्छा नही किया। अब तू भी गया।

दम दौड़ा भेड़िया की ओर । भेड़िया दो बार घूमकर अपने स्थान से हट गया। दम आगे निकल गया। भेड़िया ने बड़ी ही फुर्ती से एक लम्बी छलांग लगाई और पास के ही पेड़ से एक मोटी टहनी तोड़ ली। दम फिर बड़ी तेज़ी से भेड़िया की ओर बढ़ रहा था। भेड़िया ने वो मोटी टहनी पूरी ताकत से दम की ओर फेंकी। टहनी सीधा जा कर उसके थोबड़े पर पड़ी और दम पीछे की ओर पलटी खा गया। भेड़िया ने एक ज़बरदस्त हमले से शुरुआत कर दी थी। दम गुर्राया।

दम : गुर्र ! मैं तुझे सिर्फ हाथ और पैर की मार से ठिकाने लगाना चाहता था। पर अब मुझे अपनी पावर्स का इस्तेमाल करना ही होगा।

दम ने एक लम्बी छलांग लगाई और भेड़िया के पास पहुँच गया। इससे पहले की भेड़िया कुछ करता । दम ने एक ज़ोरदार फूंक भेड़िया की ओर मारी और दम के मुंह से लाल-लाल धुंवा सा निकला। भेड़िया ने फ़ौरन अपनी आँखें बन्द कर लीं। पर धुवां भेड़िया की नाक में तो घुस ही चुका था। भेड़िया को भयानक छींकें आने लगीं। अब भेड़िया समझ चुका था। वो कोई धुंवा नही बल्कि पिसी हुई लाल मिर्चें थीं।

भेड़िया : 💭 असंभव! कोई शख्स अपने मुंह में इतनी सारी पिसी लाल मिर्च रख ही नही सकता।💭

दम : क्यों बे! चौंक गया न। तू यही सोच रहा होगा की मेरे मुंह में लाल मिर्च का पाउडर कहाँ से आया? तो सुन। बचपन में , जब मैं एक साल का था तभी से मुझे लाल मिर्च बहुत पसन्द थी। मैं मिर्च को इस तरह से खाता था जैसे लोग ड्रग्स लेते हैं। और पांच साल का होते होते मैं एक एक पैकेट पिसी लाल मिर्चें खाने लगा। और फिर धीरे-धीरे मेरे अंदर ये पॉवर आ गई। मैं उन्हें अपने पेट में जमा कर के रख सकता हूँ और एक ज़ोरदार फूंक से अपने पेट में जमा लाल मिर्च पाऊडर को बाहर निकाल सकता हूँ। हीहीहीहिंsss । और अब तू अपने बारे में सोच । क्योंकि छींकते-छींकते तुझे पसीने आने लगे हैं । और अब जब मैं दूसरी फूंक मारूंगा…

कहकर दम ने एक बार फिर फूंक मारी। भेड़िया पूरा पाउडर में नहा गया।

दम : …तो सारा लाल मिर्च पाऊडर तेरे पसीने में जा कर बैठ जाएगा और रोम छिद्रों के जरिये तेरे शरीर में घुसेगा। और फिर तुझे होगी ज़ोरदार जलन । हिहिहिहिहिं।

भेड़िया तड़पने लगा। उसका शरीर बुरी तरह जलने लगा।

भेड़िया : 💭आह !!! ऐसा लग रहा है जैसे मैं जल रहा हूँ। भयंकर जलन हो रही है । क्या करू कुछ समझ में नही आ रहा। अब मैं समझा इसकी कॉस्ट्यूम पर मिर्ची क्यों बनी हुई है और लोग इससे डर कर क्यूं भाग गए। आहsss! 💭

एक ज़ोरदार घूँसा आकर भेड़िया के पेट में पड़ा था जिससे भेड़िया चीख उठा। दम ने भेड़िया की कॉलर पकड़ कर उसे खड़ा किया और कूद कर ज़ोरदार किक मारी उसने भेड़िया के सीने पर। भेड़िया छटक कर एक पेड़ के तने से जा टकराया।

भेड़िया : 💭 उफ़! ये तो कुछ सोचने का भी मौक़ा नही दे रहा है। 💭

इससे पहले के भेड़िया उठकर खड़ा होता, दम ने उसे घूँसा मारा । भेड़िया फिर से पेड़ से टकराया । और इस बार उसके मुंह से पहले से ज़्यादा भयंकर चीख निकली। पेड़ की एक नुकीली टहनी भेड़िया की पीठ में घुस चुकी थी।

दम ने भेड़िया को खींचा और नचा कर एक ओर फेंक दिया। भेड़िया की पीठ से तेज़ी से खून बह रहा था। दम खिलखिलाता हुआ भेड़िया के पास पहुँचा।

दम : अरे बाप रे! खून! मैंने आजतक कोई अपराध नही किया। पर तूने मेरे हाथों अपना खून करवाकर मुझे खूनी बना दिया। अब तो मैं तुझे और नही छोड़ूंगा। हिहिहिहिंsss ।

भेड़िया को अपनी आँखों के आगे का दृश्य धुंधला होता लग रहा था। अचानक दम भेड़िया के करीब आकर बैठ गया और फिर उसने भेड़िया की पीठ पर हुए घाव के पास मुंह झुकाया, अचानक उसे छींक आ गई । भेड़िया के मुंह से ज़ोरदार चीख निकल गई।

दम : हिहिहिहिहिंsss । मेरी दूसरी पॉवर कैसी है? मैं जब भी छींकता हूँ मेरी नाक से  नमक बाहर आता है। वो ही नमक तेरे घाव पर पड़ा और तू कराह उठा। हिहिहिहिहींsss । मज़ा आ गया। मैं जब छः साल का था तब मुझे नमक खाने का भी बड़ा शौक था। पर मुंह से नही नाक से, हिहिहिहिहिंss । जैसे लोग ड्रग्स सूंघते हैं। फिर धीरे-धीरे मेरे अंदर ये शक्ति भी आ गई । मैं जब भी छींकता हूँ । मेरी नाक से नमक निकलता है। मुझे अपने दुश्मनों के जले कटे पर नामक छींकने में बड़ा मज़ा आता है। हिहिहिहिहिंsss।

भेड़िया : आह! 💭 बड़ा ही खतरनाक विलेन से इस बार सामना हुआ है। इसकी तो एक के बाद एक शक्तियां सामने आती जा रही हैं पर मेरे पास तो कोई शक्ति नही है । बुहुहु ।💭

भेड़िया ने अपने शरीर की पूरी ताकत समेटी और खड़ा हुआ।

दम : हिहिहिहिहिंssss। खड़ा हो गया। अब भी तेरे अंदर बहुत दम लगता है। पर दम तेरा दम निकालकर रहेगा।

दम का घूँसा हवा को चीरता हुआ भेड़िया की ओर बढ़ा। भेड़िया ने झुककर वार बचाया परन्तु अगला वार न बचा सका क्योंकि दम ने बड़ी ही फुर्ती से उसकी ठुड्डी पर किक जड़ दी थी। भेड़िया बैकफ्लिप खा कर नीचे गिरा। पर भेड़िया ने भी नीचे गिरने का फायदा उठाया। उसने एक किक-अप मारा और उसकी किक सीधा दम की ठुड्डी पर जा लगी। दम तलमिलाता हुआ पीछे गिरा। भेड़िया खड़ा हो चुका था। जैसे ही दम खड़ा हुआ। भेड़िया ने एक ज़ोरदार फाइव-फोर्टी किक लगाई । दम हवा में तिरछा नाचकर गिरा । दम अपना होठ छूता हुआ उठा ।

दम : गुर्र। तूने मेरा थोबड़ा फोड़ दिया! अब मैं पिसी-मिर्च नही छोड़ सकता । पर नमक तो छींक ही सकता हूँ। हिहिहिहिहिंsss।

भेड़िया : तेरे नमक का मुझपर तभी असर होगा न । जब वो मेरी पीठ पर पड़ेगा।

ये सुनकर दम की आँखें उल्लू की तरह चौड़ी हो गईं। भेड़िया उसकी ओर बढ़ा परन्तु उससे पहले ही दम गिड़गिड़ाने लगा।

दम : नही नही , मुझे माफ़ कर दो। छोड़ दो। मुझसे गलती हो गई। अब ऐसी गलती नही होगी।

भेड़िया और दम की नज़रें एक दुसरे से मिली हुई थीं। दम हाथ जोड़कर भेड़िया के सामने खड़ा था। अचानक कुछ हुआ। भेड़िया एक आह के साथ अपनी आँखें मलने लगा।

भेड़िया : 💭 आह! मेरी आँखों को क्या हुआ? इतनी जलन हो रही है मानो एक गिलास प्याज़ का रस पड़ गया हो। 💭

जवाब दम के पास था।

दम : हिहिहिहिहिंssss। तेरी आँखों में क्या हुआ बे? मैं बताता हूँ। जब तू मेरी आँखों में आँखें डालकर खड़ा था तब मेरी आँखों से हवा के रूप में निकला प्याज़ का रस तेरी आँखों में जा घुसा। हिहिहिहिहिंsss। जब मैं सात साल का था तब मुझे प्यास का रस पीने का बहुत शौक था। मैं प्याज का रस इस तरह पीता था जैसे बेवड़े दारु पीते हैं। और अब मेरी रगों में खून नही प्याज़ का रस दौड़ता है। जिसे मैं जब चाहे तब आँखों के रास्ते निकाल सकता हूँ और अपने दुश्मन की आँखों में पहुँचा सकता हूँ। अब यही लागे तू मेरी आखिरी शक्ति भी देख ही ले। हिहिहिहिहिंssss । अचानक जैसे कहीं पटाखा फूटा। भेड़िया और दम के चारों ओर एक हल्का भूरे रंग का धुंवा फ़ैल गया। भेड़िया बेचारा अपनी आँखों को इतना मल चुका था की अब सब कुछ उसे एकदम ब्लर नज़र आ रहा था। अब जैसे ही वो धुंवा भेड़िया की नाक के पास पहुँचा। भेड़िया को उलटी सी आ गई। उसकी तबियत गड़बड़ाने लगी।

भेड़िया : 💭 उफ़ । कितनी भयानक बदबू है ये।💭

भेड़िया ने अपनी नाक दबा ली।

दम : हिहिहिहिहिंssss । बेटे ये है सड़ा चना। जब मैं आठ साल का था तब मुझे चना बड़ा पसन्द था। परन्तु सड़ा हुआ। मैं सड़े चने बचपन से लेकर पचपन तक खाता चला आ रहा हूँ। अब जब भी मैं हवा पास करता हूँ , मेरे पेट में गेट इन हुआ सड़ा चना, गेट आउट होकर हवा के साथ-साथ पास होता है। हिहिहिहिहिंssss ।

भेड़िया : 💭उफ़! ये इंसान है या बनिए की दुकान। साला प्याज, मिर्चा , चना । क्या क्या भरे हुए है। कैसे लड़ूं मैं इससे। ऐसे बन्दे से तो मेरा आजतक सामना नही हुआ। बुहुहु💭

भेड़िया अभी कुछ सोच भी नही पाया था की तभी उसे अहसास हुआ जैसे वो हवा में उठ रहा है। दम ने उसे उठा रखा था।

भेड़िया :💭 बाप रे ! इसके अंदर तो शारीरिक ताकत भी बहुत ज़्यादा लगती है। 💭

भेड़िया के कुछ कर पाने से पहले ही। दम उसे उछालकर फ़ेंक चुका था।

भेड़िया पार्क में ही कुछ दूर बने स्विमिंग पूल में जा गिरा।

भेड़िया : 💭 गुलुप् । पानी में कैसे आ गिरा मैं? पानी यहाँ कहाँ से आया?💭

पानी भेड़िया की आँख में भी घुस चुका था। उसकी की आँखों की जलन ठीक हो गई और उसे नज़र आने लगा।

भेड़िया 💭 ओह। याद आया मुझे। स्विमिंग पूल कहते हैं इसे। पर मुझे इस स्विमिंग पूल में फेंककर दम ने अपनी ही हार को दावत दी है क्योंकि अब इस…💭

भेड़िया ने पास आ चुके दम को स्विमिंग पूल में खींच लिया ।

भेड़िया 💭…दम नामक गन्दगी को मैं स्विमिंग पूल में ही धोऊंगा। अब बेटा निकाल ले अपने शरीर से जो निकालना है। पर इस पानी में वो बेअसर होगी।💭 दम! तूने अपनी इतनी शक्तियां दिखा लीं। अब मेरी बस एक शक्ति देख। जब मैं सात या आठ…

भेड़िया ने प्रचण्ड घूँसा दम के पेट में मारा ,दम के मुंह से ढेर सारे बुलबुले बाहर आये।

भेड़िया : …साल का था तब…

दम छटपटाने लगा था।

भेड़िया : …मेरे गुरु भाटिकी ने मुझे…

भेड़िया का एक ज़ोरदार  पंच दम के थोबड़े पर पड़ा और दम स्विमिंग पूल के तल से जा टकराया।

भेड़िया : …पानी में युद्ध करने की कला सिखाई थी ।

भेड़िया दम के सीने पर सवार था और भीषण प्रहार पे प्रहार किये जा रहा था। दम लाल मिर्च नही फूंक सकता था क्योंकि तब उसे सांस खींचनी पड़ती, नमक नही छींक सकता था, तब भी सांस खींचनी पड़ती। उसका प्याज़ का रस पानी में घुलकर गायब हो जा रहा था। हाँ एक काम दम अब भी आराम से कर सकता था। दम पानी में ज़्यादा से ज़्यादा हवा पास करने की कोशिश कर रहा था। परन्तु उसका भी अब कोई असर नही हो रहा था भेड़िया पर क्योंकि पानी में भेड़िया ने अपनी सांस रोकी हुई थी। हीहीही। भेड़िया अपनी पूरी ताकत लगा कर वार किये जा रहा था। उसकी पीठ से बहता खून पानी को लाल कर रहा था । अचानक भेड़िया की भी ताकत जवाब देनी लगी। लेकिन अब तक दम बेहोश हो चुका थी।

भेड़िया दम को अपने कन्धे पर टाँगे हुए स्विमिंग पूल से बाहर निकला। उसे पास ही घास पर पटक दिया और खुद भी वहीँ पसर गया। अचानक उसके कानों में पुलिस वैन के सायरन की आवाज़ें पड़ीं।

कई पुलिस वाले धड़धड़ाते हुए पार्क में आ घुसे। भेड़िया अपनी जगह पर खड़ा हो गया।

इंस्पेक्टर विष्णु : हैंड्सअप! कौन हो तुम? हमे खबर मिली थी इस पार्क में एक सिरफिरा है जिसने लोगों को नुक्सान पहुंचाने की कोशिश की थी।

तभी उसके पीछे खड़ा हवलदार खुद बोल उठा।

हवलदार : सर ये आदमी वो नही हैं। वो जो नीचे पड़ा हुआ है वही वो सिरफिरा है। मैं पहचानता हूँ उसे।

हवलदार ने दम की ओर इशारा करते हुए कहा था।

इंस्पेक्टर विष्णु : गिरफ्तार कर लो उसे !💭हीहीही। इतने दिनों बाद कोई तो अपराधी मिला। बावला ही सही।💭 लेकिन तुम कौन हो?

इंस्पेक्टर ने भेड़िया से पूछा।

भेड़िया : मैं…मैं…अ मैं इसी शहर का एक नागरिक हूँ । मेरा नाम भे…भेदी सिंह है।

इंस्पेक्टर विष्णु : भेदी सिंह! बड़ा अजीब नाम है!

भेड़िया : हीहीही। घर वालों ने रखा था।

इंस्पेक्टर विष्णु : अबे मेरा क्या बाहर वालों ने रखा था। गुर्र! खैर । यहाँ क्या हुआ था बताओ।

भेड़िया उसे सारी बात बताता चला गया सिर्फ अपने कुछ राज़ छुपा गया। अंत में भेड़िया ने इंस्पेक्टर को समझाया। सारी बातें समझने के बाद इंस्पेक्टर ने हवलदार से टेप मंगाया।

जल्द ही दम का मुंह टेप से चिपकाया जाने लगा। दम को अब होश आने लगा था । अपना मुंह टेप से चिपकता देखकर वो चिल्लाया।

दम : अबे मेरा मुंह चिपका दोगे तो मैं खाना कैसे खाऊंगा!

भेड़िया : खाने की तुझे क्या ज़रूरत। तेरे अंदर तो खुद इतना मटेरियल भरा हुआ है। बस आग जलाकर उसपे बैठ जाइयो तेरे पेट में ही खाना पक जाएगा। हीहीही।

इंस्पेक्टर विष्णु ने अपने साथियों से कहा।

इंस्पेक्टर विष्णु : सब जने चश्मा पहन लियो बे! ताकि इसकी आँखों से निकला प्याज़ का ड्रिंक तुम्हारी आँखों में न जाए। और जब भी ये छींकने की कोशिश करे। एक रहपट खींचकर लगाना। और जब हवा पास करे तो रुमाल रख लियो नाक पर। बाकी सब ठीक है।

इंस्पेक्टर विष्णु  ने भेड़िया को धन्यवाद कहा। भेड़िया ने सर झुकाकर अभिवादन किया। पुलिस वाले दम को लेकर निकल लिए।

भेड़िया : 💭 अब मैं कहाँ जाऊं। पीठ से अब भी खून बह रहा है। मुझे कमज़ोरी…💭

भेड़िया भड  से ज़मीन पर गिर पड़ा । उसके होश जाते रहे। अचानक उसे अपने से कुछ ही दूरी पर धुंधली रौशनी सी प्रकट होती दिखी। दो लोग धीरे-धीरे भेड़िया की ओर ही बढ़ रहे थे। भेड़िया के होश अब बॉर्डर पार करने वाले थे। वो दोनों शख्स आ कर भेड़िया के आगे खड़े हो गए। उनमे से एक ने कहा―“टांग ले चलो इसे। ये मेरा सेनापति बनेगा। हीहीही”

अचानक भेड़िया को टांग लिया गया। भेड़िया कुछ न कर सका क्योंकि अब वो होश की दुनिया के बॉर्डर को पार कर के बेहोशी की दुनिया में पहुँच गया था।

         

     

          ★द्वितीय अध्याय समाप्त★

क्रमशः

अब अंत में मैं आप सभी पाठकों से यही कहना चाहूँगा। “रिव्यूज़ दें। ताकि मैं अगला पार्ट जल्द से जल्द लेकर आ सकूं। आपके रिव्यूज़ ही हमे लिखने की शक्ति देते हैं”।

ये पार्ट भी पढ़ने के लिए।

               ।।।।।।।।।धन्याद।।।।।।।।।

Written By – Talha Faran for Comic Haveli

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5 Comments on “Apradh Unmoolan Ke Baad Part 8”

  1. kahaani bhut bhut jayada lmbi thi …..suru sy leker end tak bhut mjaa aaya …..aur sbsy jayada mjaa aaya anthony ki khaani sun kar …i mean anthony ki succhai sun kar … सच में एंथनी की प्रेमलीला तो बहुत गजब की है । भेड़िए और दम का मिलन बहुत जबरदस्त था । कहानी के पार काफी देरी से आ रही है इसलिए मुझे अब तक यह भी याद नहीं कि मैंने पिछला कौन सा पार्ट पढा था । वैसे वह छठा पार्ट था । हि हि हि । आप की कहानी हर किसी का मूड फ्रेश कर दे । मेरे ख्याल से इस कहानी को एक नोबेल के रूप में होना चाहिए एक ही बुक के अंदर सभी पार्ट

  2. हाहाहा।
    क्या लिखा है तल्हा जी खतरनाक हाहाहा।
    एंथोनी की कहानी बड़ी मस्त थी।
    भेड़िया का विलेन हाहाहा क्या चुना है भाई गजब मजा आ गया।
    इस स्टोरी में भी हंसने के बहुत सारी जगह है शायद अगर गिनाने में आ जाऊं तो पूरी स्टोरी कॉपी करनी पड़ जाएगी।
    भोकाल बाबू कब उठेंगे अपनी शैय्या से?
    बेचारा लेटे लेटे पक गया होगा।
    भेड़िया कब पहुंचेगा जंगल?
    वाह मस्त
    सबसे बड़ी बात ये है कि स्टील कहाँ गया।। क्या अपने लिए स्टीलाइन ढूंढने हाहाहा।
    जितनी घटनाएं हो रही हैं उस हिसाब से लगता है कि अब मोनिका भी आएगी और शीना क्षिप्रा भी।
    हाहाहा मजा आ जायेगा फिर तो।
    बहुत धन्यवाद इतनी अच्छी स्टोरी देने के लिए तल्हा जी उर्फ छोटा नागराज साहब

  3. Ye chhutku lekhak kya kya likhta hai.. Hahaha
    Bahut hi mazedaar story
    Sab kuch dhansu
    Villains to jaise ye pata nhi kaha kaha se dhundh dhundh k lata hai
    Anthony ka dukh haar bhartiya ladke ka dukh hai
    Hame usse puri sahanubhuti hai
    Mahabali bhokal abhi mahabali nhi lag rahe
    Bhediya ko utha k kaun le gya wo bhi mahanagar me?
    I was expecting bharti in mahanagar
    Par wo dikhi nhi
    Ek issue hai bas
    Kahani to sahi h comedy hai badhiya ja rahi h
    But events bahut kam ho rahe hain
    8 parts ho gye but kuch itna significant nhi hua
    Ekta kapoor mat bano chhote
    Kyun ki kahani ka na aim samjh aa raha na ending
    8 parts me to khatm ho jati hain stories

  4. Ohh god dum villain me bht dum tha
    Maza hi aa gaya
    Bhediya sahi bola aag me baith jayega to kuch na kuch ban hi jayega
    Lol

  5. बहुत बढ़िया तल्हा भाई।
    ये पार्ट बहुत शानदार था।
    खासकर इसमें जितने भी कैरेक्टर्स थे सब गजब के थे।
    जैसे एंथोनी की गर्ल फ्रेंड्स और दम।
    और बेचारा स्टील कहाँ गायब हो गया।
    इस पार्ट में बड़ी हँसी आयी और अगले भाग का इंतेजार रहेगा।

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