Bhairav

दोस्तों भूत प्रेत तंत्र मंत्र आज के जमाने मे कोई भी इन बातों को नही मानता और जाहिर है जब नही मानता तो ये तांत्रिक लोगों को तरह तरह का डर दिखाकर अपना उल्लू सीधा करते हैं लेकिन ? ये कहानी है एक ऐसे तांत्रिक की जो सचमुच आत्माओं को सिद्ध कर सकता था और यही इसके पतन का कारण बन गया ।

एक छोटा सा गांव था रुद्रपुर जिसमे सभी ग्रामवासी बड़े ही प्रेम से रहते थे। उन्ही में से एक था तांत्रिक भैरव जो ना केवल दिन में बल्कि कभी कभी रातभर अपने घर मे बैठ कर तांत्रिक क्रियाएँ करता रहता था। उसी के पड़ोसी थे डॉक्टर चढ्ढा, तांत्रिक भैरव पूरे गांव में सबसे ज्यादा इनको ही मानते थे, और सिर्फ इन्हीं को ये अधिकार था कि ये कभी भी भैरव के घर पर आ सकते थे। कभी कभार भैरव भी इनके यहाँ आ जाता था, बाकी पूरे गावँ में भैरव की किसी से नही पटती थी। इसी तरह गांव का जीवन चल रहा था ।
फिर एक दिन डॉक्टर चढ्ढा को ये खबर मिली कि तांत्रिक भैरव कोई तंत्र साधना करते हुए चल बसे , वो तुरन्त भैरव के घर पहुचे तो देखा गांव के सभी लोग घर के बाहर ही हैं कोई अंदर नही जा रहा था । तब डॉक्टर साहब ने जाकर भैरव को देखा और देखते ही चौंक पड़े भैरव की आंखे खुली थी और उनमें अजीब सी चमक थी, डॉक्टर ने ध्यान से देखा तो आंखों की चमक देखकर उनके रौंगटे खड़े हो गये और शरीर मे सिहरन दौड़ गयी, फिर डॉक्टर साहब ने जल्दी जल्दी चेक किया और बाहर आकर गांव वालों को वापस भेज दिया भैरव के अंतिम संस्कार की तैयारी करने के लिए , क्योकि भैरव का कोई नही था वो इस दुनिया मे अकेला था ।
शाम को सभी लोग पूरी तैयारी करके जब भैरव के घर पहुचे तब डॉक्टर साहब चार पांच लोंगों को लेकर घर के अंदर गए और अंदर जाकर देखा कि भैरव की लाश गायब है फिर सभी लोगों ने मिलकर पूरा घर और उसके बाद पूरा गांव भी छान मारा लेकिन भैरव की लाश का कुछ भी पता नही चला ।
फिर गांव वालों ने मिलकर भैरव के घर को ताला लगा कर बन्द कर दिया l फिर कुछ दिनों तक गांव में इस बात की चर्चा रही और धीरे धीरे दिन बीतने के साथ गांव वाले इस बात को भूल गए ।
इधर कुछ दिनों से गांव में अजीब सी घटना होने लगी थी पहले गांव में जितने आवारा जानवर थे कुत्ते, बिल्लियां और फिर कुछ लोगों ने मुर्गी पालन किया था, उनकी मुर्गियां धीरे धीरे कम होने लगी और फिर बकरियां, गाय और भैस के बच्चे भी कम होने लगे लगता था जैसे कोई उन्हें चुरा रहा है और सारी घटनाएं रात को ही होती थी ।
फिर गांव में एक चौपाल बुलाई गई वहां पर विचार विमर्श किया गया फिर थोड़ी देर बाद गांव के सरपंच ने गांववालों से कहा-

सरपंच :- गांववालों पिछले कुछ दिनो से हमारे गांव में ये जो घटनाएं हो रही हैं जानवरों की चोरी हो रही हैं उसको रोकने के लिए हमे कुछ ना कुछ तो करना पड़ेगा ।

एक आदमी विरजू बोला :- लेकिन सरपंच जी हम भी करें तो क्या करें ?

सरपंच :- मुझे लगता है हमे कुछ लोगों का दल बना कर बारी बारी से पहरा देना चाहिए ।

तब डॉक्टर साहब ने कहा :- जी सरपंच जी यही ठीक रहेगा ,

फिर चार-चार लोगों  के तीन दल बनाये गये तीनो दल बारी बारी से गांव में पहरा देने लगे, जबसे लोग पहरा देने लगे तब से इस गांव में तो चोरी की घटनाएं कम हो गयी लेकिन आस पास के गांवों में ये घटनाएं होना शुरू हो गयी ऐसे ही दो साल बीत गये लेकिन चोर का कुछ पता नही चला आस पास के गांवों में भी पहरा शुरू हो चुका था।

फिर एक दिन रात को लगभग 8:00 बजे डॉक्टर साहब अपने घर के आंगन में बैठ कर कोई पत्रिका पढ़ रहे थे, अचानक उनके घर के दाहिनी तरफ एक बगीचे के पास से एक आवाज आई…

म्याऊ …… म्याऊ,
थोड़ी देर बाद जोर की आवाज हुई
म्याsssऊ
फिर आवाज आनी  बन्द हो गई डॉक्टर साहब ने सोचा क्या हुआ जो बिल्ली इतनी तेज चिल्लाई और फिर चुप हो गयी? वो आंगन से उठ कर बाहर आये तो देखा एक साया तेजी से दौड़ते हुए बगीचे में घुस गया | फिर क्या था डॉक्टर साहब का माथा ठनका की कही ये वो जानवरों का चोर तो नही फिर ये सोचते ही आंगन में पड़ी लाठी उठाकर डॉक्टर साहब भी भागते हुए बगीचे में पहुच गए ,तभी उन्हें बगीचे के बीच मे सबसे घने आम के पेड़ के पास आहट सुनाई दी ,वो उसी तरफ बढ़ने लगे तभी उन्होंने देखा पेड़ के पास कुछ चमक रहा है|  उन्होंने सोचा ये शायद चोर की आंखे हैं लेकिन किसी इंसान की आंखे इतना नही चमकती फिर उन्होंने पूछा-

डॉक्टर साहब :- कौन ?? कौन है वहाँ ???

जो चमक उन्होंने देखी  थी  वो और बढ़ गयी लेकिन कोई आवाज नही आई

डॉक्टर साहब :- मैने पूछा कौन है वहां ?

उधर से जानवर की हुंकार सुनाई दी और फिर आवाज आई
हर्रर्रर्रर्र हर्रर्रर्रर्र …
डॉक्टर ! डॉक्टsssर!!

आवाज सुनते ही डॉक्टर साहब के शरीर मे सिहरन दौड़ गयी

फिर डॉक्टर साहब ने सोचा ये मुझे जानता है और उन्होंने हिम्मत करके फिर से पूछा

डॉक्टर :- कौन है वहाँ ?

और डॉक्टर साहब धीरे धीरे आगे बढ़ने लगे तभी उधर से फिर जानवर के हुंकार के साथ आवाज आई
हर्रर्रर्रर्र
डॉक्टर ! बस अब और आगे मत बढ़ो,तुरन्त भाग जाओ! जाओ!! भाग जाओ!

डॉक्टर साहब ने फिर पूछा

डॉक्टर :- कौन हो तुम ?

उधर से गरजती हुई आवाज आई

मैं …. मैं भूखा हूँ सालों से भूखा हूँ और मेरे बारे में कुछ और जानने की जरूरत नही है

तब डॉक्टर साहब ने कहा

डॉक्टर :- तुम बाहर आओ मैं तुम्हे देखना चाहता हूँ

उधर से गुस्से से जानवर के हुंकार के साथ आवाज आई

“हर्रर्रर्रर्र …….हर्रर्रर्रर्र
मुझे देखने का विचार मन से निकाल दो मैं मौत हूँ साक्षात मौत जाओ भाग जाओ ! जाओ!! और हाँ रात को कभी भी बाहर मत निकलना वरना मुसीबत में पड़ जाओगे ”

डॉक्टर साहब ने फिर चिल्लाना शुरू किया धीरे धीरे गांव वाले वहाँ जुटने लगे तब डॉक्टर ने उन्हें बताया

डॉक्टर :- वहां बड़े पेड़ के पीछे वो जानवर चोर छिपा है जो गांव से जानवर चोरी करता था ।

सभी लोगों ने उस तरफ जाकर देखा तो वहां कोई नहीं था तभी एक अट्टहास गूज उठा

ईहाहाहाहाहाहाहा …… हाहाहाहा

ईहाहाहाहाहाहाहा ….. हाहाहाहा

ये हँसी की आवाज सुनकर सभी के शरीर मे सिहरन दौड़ गयी फिर डॉक्टर साहब घर पर आकर सोचने लगे
कौन था ये, चोर या कोई और , और इसके कहने का क्या मतलब है , और अगर ये चोर ही है तो अचानक से कहाँ भाग गया जबकि किसी ने भी उसके भागने की आवाज नही सुनी । यही सब सोचते सोचते डॉक्टर साहब सो गए ।

अगले दिन सभी की जुबान पर कल की घटना का ही जिक्र था लेकिन कोई भी किसी भी नतीजे पर नही पहुच पा रहा था ,फिर धीरे धीरे दिन बीतने लगा और सबकी जिंदगी पहले की तरह चलने लगी लेकिन अब एक और विचित्र और चिंताजनक बात हुई|  अब जानवरों के साथ साथ इंसान भी गायब होने लगे फिर तो गश्त  और भी बढ़ा दी गयी लेकिन फिर भी जब भी कोई रात को अकेला बाहर निकलता तो गायब हो जाता फिर उसका कोई पता नही चलता।
फिर एक दिन एक आदमी का आधा धड़ मिलता है , देखने से ऐसा लग रहा था जैसे किसी जानवर ने खाया हो उसे, फिर तो और दहशत फैल गयी अब शाम होते ही गांव के गांव वीरान हो जाते थे सभी अपने अपने घरों में बंद हो जाते थे, कोई भी अकेले कही आने या जाने की हिम्मत नही करता था। ऐसे ही एक दिन डॉक्टर साहब किसी दोस्त के यहाँ गए थे और उन्हें लौटते लौटते रात हो गयी गांव के पास आकर सवारी छोड़ने के बाद हाथ मे टॉर्च लेकर पैदल ही अपने घर की तरफ चल दिये और ये सोचते हुए जा रहे थे कि ‘ किसी तरह सही सलामत घर पहुँच जायें ‘ | और जल्दी जल्दी चलते हुए घर के करीब पहुच चुके थे एक छोटा सा मैदान पार करके जैसे ही घर के पास वाले बगीचे के पास पहुँचे तभी एक भयानक आवाज गूंज उठी
हर्रर्रर्रर्र …….
डॉक्टssर …..डॉक्टss र ….
तुम फिर रात को बाहर निकले…. हर्रर्रर्रर्र?

ये सुनकर डॉक्टर साहब की घिघ्घी बंध गयी किसी तरह डरते डरते पूछ ही लिया

डॉक्टर :- क क कौन है ?

फिर से वही भयानक आवाज आई

हर्रर्रर्रर्र …..
भूखा हूँ मैं … बहुत भूखा हूँ
मांस चाहिए मुझे, हड्डी चाहिए, खून चाहिए….हर्रर्रर्रर्र
तुम दे सकते हो , नही दे सकते …..हर्रर्रर्रर्र
इहा हा हा हा हा हा..
येह हा हा हा हा हा हा हा …

‘कितनी भयानक हँसी और भयानक आवाज है
क्या यही है इंसानों का हत्यारा …’
अभी डॉक्टर साहब ये सोच ही रहे थे कि अचानक फिर से वही भयानक आवाज गूँज उठी

हर्रर्रर्रर्र… डॉक्टर तुम डरो मत मैं तुम्हारा दुश्मन नही हूँ इसीलिए फिर से तुम्हे आगाह कर रहा हूँ ……हर्रर्रर्रर्र
कभी भी रात को मत निकलना, वरना क्या पता कब मेरी भूख भड़क जाय हर्रर्रर्रर्र
भूखा हूँ मैं सालों से भूखा हूँ ……हर्रर्रर्रर्र
भागो डॉक्टर! जल्दी भागो! जाओ यहाँ से, जाओ!!

डॉक्टर साहब ने डरते डरते उसी दिशा में टॉर्च जला दिया जिस दिशा से आवाज आ रही थी और देखते ही डर से कांपने लगे क्योकि सामने भैरव बैठा था और उसके मुह से भेड़ियों जैसे दांत बाहर निकले थे और मुह पर ताजा खून लगा था, अचानक डॉक्टर साहब ने देखा भैरव एक इंसान की लाश पर बैठा है जो अधखाई है और ये देखते ही डॉक्टर साहब चिल्लाते हुए गांव की तरफ भागे

डॉक्टर :- गांववालों !!!! जल्दी बाहर आओ ! गांववालों !!!!

इतनी देर में भैरव वहाँ से भाग चुका था ।
फिर गांव में जंगल की आग की तरह ये बात फैल गयी अगले दिन सभी लोग फिर से चौपाल पर जमा हुए और तब सरपंच जी ने कहा-

सरपंच :- अब तो ये पक्का हो गया कि ये सब किया धरा भैरव का है ।

तभी डॉक्टर साहब ने कहा

डॉक्टर :- अब हम लोगो को क्या करना चाहिए सरपंच जी ?

सरपंच :- अब ये भी पक्का हो गया है कि ये भूत-प्रेत , तंत्र मंत्र का मामला है ।

तब डॉक्टर साहब ने कहा

डॉक्टर :- सरपंच जी अब आप ही कुछ कर सकते हैं इस बारे में ।

तब सरपंच जी ने कुछ सोचते हुए कहा

सरपंच :- गांववालों डरो मत मैं एक सिद्ध महात्मा को जानता हूँ वो जरूर हमारी मदद कर सकते हैं ।

फिर सबको समझा बुझा कर सरपंच जी निकल पड़े उन महात्मा की खोज में फिर तीन दिन के बाद वो महात्मा जी को लेकर गांव लौटे , गांव तक पहुचते पहुचते शाम हो गयी थी तो सरपंच जी ने महात्मा जी को अपने घर पर ठहरा दिया|  फिर सबके सो जाने के बाद रात के करीब 11 बजे गांव में भयानक हँसी गूंजने लगी

“इह ही ही ही ही ही

इह ही ही ही ही ही

इहाहाहाहाहाहाहा

गांववालों ! तुम लोग क्या समझते हो कि मुझे भगाने के लिए एक महात्मा को लेकर आओगे और मुझे पता भी नही चलेगा ।
इहहीहीहीहीही
पर एक बात कान खोल कर सुन लो मुझसे छुटकारा पाना इतना आसान नही है
हर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्र ………..हर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्र
मैं फिर वापस आऊंगा , मैं जरूर आऊंगा , फिर से वापस आऊंगा”

किसी तरह डरते डरते रात बीत गयी फिर अगले दिन महात्मा जी ने सरपंच से सारी बात पता कर ली फिर उसी मैदान में जाकर आसन लगा कर बैठ गए जहाँ रात को भैरव लाश के साथ दिखा था ।
फिर हाथ मे जल लेकर कोई मन्त्र पढ़कर उसी पेड़ के पास जल को फेक दिया जहाँ भैरव बैठा था थोड़ी देर के बाद भैरव वहां चीखता हुआ आया

भैरव :- ऐ साधु मुझे छोड़ दे नही तो तेरी एक एक हड्डी चबा जाऊंगा …..हर्रर्रर्रर्र कट कट कट कट
भूखा हूँ मैं हर्रर्रर्रर्र सालों से भूखा हूँ

अभी वो कुछ और कहता तभी महात्मा ने फिर से कोई मन्त्र पढ़ कर जल भैरव की ओर फेका वो तुरन्त जड़ हो गया ।
थोड़ी देर ध्यान लगाने के बाद महात्मा जी ने गांववालों की तरफ मुखातिब होकर कहा

महात्मा :- गांववालों मैने इसके अंत का रहस्य पता कर लिया है चूँकि इसकी लाश गायब हो गयी थी और इसका अंतिम संस्कार नही हो पाया था इसलिए इसकी आत्मा आज तक भटक रही है और इस स्थिति में सिर्फ एक उपाय है वो ये की कोई ऐसा इंसान जो भैरव का करीबी हो ,गया जाकर भैरव का श्राद्ध व पिंडदान करे तभी भैरव और उस आत्मा की मुक्ति हो सकती है जिसने तंत्र साधना के दौरान भैरव के शरीर पर कब्जा कर लिया था और भैरव इस असह्य पीड़ा को नही सह पाया और चल बसा था ।

फिर महात्मा ने आगे बताया

महात्मा :- मैने इसे अपनी मन्त्रशक्ति से बांध दिया है और ये अधिक से अधिक सात दिन तक बंधा रह सकता है और इन्ही सात दिनों में इसका पिंडदान हो जाना चाहिए वरना अगर पिंडदान नही हो पाया तो आठवे दिन ये इस बन्धन से मुक्त हो जाएगा और तबाही मचा देगा ।

फिर महात्मा जी ने गांव से विदा ली और चले गए । पूरे गांव में भैरव का एक ही करीबी था और वो थे डॉक्टर चढ्ढा तब सरपंच जी ने डॉक्टर चढ्ढा को गया जाने के लिए तैयार कर लिया | फिर डॉक्टर चढ्ढा निकल पड़े गया के लिए धीरे धीरे पांच दिन बीत गए लेकिन अभी तक कुछ नही हुआ था भैरव जस का तस बैठा था और गुस्से से आने जाने वाले लोंगो को घूरता रहता था फिर छठवे दिन ठीक शाम को 6 बजे एक भयानक चीत्कार से पूरा गांव थर्रा गया सभी लोग भाग कर बगीचे के पास पहुचे तो देखा भैरव का शरीर धूँ धूँ करके जल रहा था और भैरव चीत्कार कर रहा था |
इयाआआआआ
छोड़ दो मुझे
नहीहीहीहीही
जाने दो मुझे
असहनीय पीड़ा हो रही है
जाने दो मुझे
और देखते देखते भैरव राख का ढेर हो गया फिर एक तेज आंधी का झोंका आया और गांववालों ने एक अद्भुत नजारा देखा भैरव की राख एक छाया मूर्ति में परिवर्तित होकर हवा में विलीन हो गयी।

✴✴✴समाप्त ✴✴✴

Written By- Chandan Sikdaar

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2 Comments on “Bhairav”

  1. सुपर स्पीड में चली गयी स्टोरी।
    मुझे ये लघु कथा ज्यादा लगी।
    घटनाएं बहुत अधिक तीव्रता से घटती गयीं।
    जब तक कुछ सही लगता नया आ गया था।
    डॉक्टर को रोल कुछ जमा नहीं।
    बहुत जल्दी डॉक्टर पिंडदान भी कर आया।
    भैरव का तांत्रिक होना और उसका भूत बनना कुछ कनेक्शन नहीं जोड़ पाया।
    खैर all over कहानी में काफी कुछ किया जा सकता था।
    कहानी अच्छी है लेकिन आप काफी समय से लिख रहे हैं तो आपसे उम्मीदे ज्यादा हो गयी हैं।

    आशा है आपसे आगे भी अच्छी कहानियां मिलती रहेगी।

  2. कहानी को पसन्द करने के लिए धन्यवाद और सही कहा आपने की कहानी बहुत तेजी से बढ़ती है और जल्द ही खत्म हो जाती है लेकिन अभी इसका अगला भाग भी आएगा जिसमे सब विस्तार से बताया जाएगा और भैरव के तंत्र और उसके भूत बनने के बीच का कनेक्शन भी विस्तार से बताया जाएगा ।
    धन्यवाद!

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