Bhediya Aatank Part 3

भेडिया आतंक
पार्ट 3

वुल्फानो के महल के अंदर एक विशाल भवन में…

भेड़िया देव की मूर्ति लगी है…

जिसके सम्मुख गुरुराज भाटिकि तपस्या में मग्न थे उनके ठीक आगे जीवक मणि रखी थी।

तपस्या के बाद अशरीरी भेड़िया देव क्रूराक्ष प्रकट होते हैं।

क्रूराक्ष- कहो भाटिकि मुझे निंद्रा से क्यों जगाया। क्या चाहते हो?

भाटिकि- हे भेड़िया देव। संसार मे अब कोई भी भेड़िया जाति की पीढ़ी नही बची है, संसार को आवश्यकता है फिर से भेड़िया जाति की।

क्रूराक्ष- हूँ। तो मुझसे क्या सहायता चाहते हो?

भाटिकि- ब्रह्म देव की जीवक मणि की सहायता से मैं फिर से भेड़िया जाति को संसार मे जन्म देना चाहता हूँ और चाहता हूँ आप इसमें मेरी सहायता करें।

क्रूराक्ष- भाटिकि। तू भटक गया है। जीवक मणि का प्रयोग इतना सरल नही है और जैसा कि मैं महसूस कर रहा हूँ, अभी भी भेड़िया जाति का एक भेड़िया मानव जीवित है, कोबी। जो वुल्फानो में नही है।

भाटिकि- हे भेड़िया देव वो भटक गया है और उसी के लिए मुझे सेना तैयार करनी है और फिर से वुल्फानो को बसाना है।

क्रूराक्ष- भाटिकि तूने मुझे प्रसन्न किया है और बुलाया है, इसीलिए तेरी सहायता हेतु प्रतिबद्ध  हूँ अन्यथा तेरे इस कार्य में मैं कदापि सहयोग नहीं देता।

क्रूराक्ष के हाथ से एक किरण निकलती है और गुरुराज भाटिकि के सिर में प्रवेश कर जाती है।

क्रूराक्ष- भाटिकि तुझे ये ज्ञान हो गया है कि जीवक मणि का प्रयोग कैसे करना है किंतु ध्यान रहे इसका प्रयोग सोच समझ कर ही करना।  मुझे आशा है तू इसका प्रयोग लोकहित में ही करेगा।

इतना कहकर भेड़िया देव अदृश्य हो जाते हैं।

अब भाटिकि प्रसन्न हो जाता है।

वहीं कुछ दूर महानगर में-

भेड़िया बाधापहाड़ से लड़ रहा था।

या यूँ कहें केवल बाधा पार करने की कोशिश कर रहा था लेकिन सफल नही हो पा रहा था।

भेड़िया- 💭अवश्य ही यह किसी न किसी तंत्र मंत्र से जुड़ा है इसीलिए ये निर्जीव होकर भी सजीव जैसा व्यवहार कर रहा है।💭

💭इसको देखने से तो लग रहा है इसे बाहर से खत्म नही किया जा सकता, किसी तरह मुझे इसके अंदर जाना होगा, जहाँ अवश्य ही इसका कोई केंद्र होगा💭

भेड़िया पूरे बल के साथ अपनी गदा से मार्ग बनाते हुए पहाड़ के अंदर पहुंचता है, बाधापहाड़ भी भेड़िया की इस चाल पर कोई प्रतिक्रिया नहीं करता।

भेड़िया बाधा पहाड़ के केंद्र तक पहुँचता है लेकिन उसे वहाँ कुछ प्राप्त नही होता और वो बाहर निकल जाता है।

बाहर निकलते ही उसे नागराज और फेसलेस नजर आते हैं।

नागराज- भेड़िया! तुम यहाँ क्या कर रहे हो?

भेड़िया अभी तक आश्चर्यचकित था, उसने इधर उधर देखा तो सब सामान्य से था, ऐसा लग रहा था कि मानो वहां कोई हलचल भी नही थी।

नागराज भेड़िया के ख्यालों को तोड़ता है।

नागराज- भेड़िया…. भेड़िया ssss

भेड़िया- अ… ह…हां… हाँ नागराज।

नागराज- (चकित होकर) तुम यहाँ ये कर क्या रहे हो?

भेड़िया- मैं बाधापहाड़ से लड़ रहा था, वो मेरा मार्ग रोके खड़ा था…ले…ले…लेकिन वो अब यहां नही है!

नागराज- भेड़िया तुम यहाँ किसी से नहीं लड़ रहे थे बल्कि तुम यहाँ महानगर की सीमा पर रोड़ पर हो और कई लोगों को घायल कर चुके हो। देखो।

नागराज इशारा करता है, भेड़िया चारों तरफ नजर दौड़ाता है।

रोड़ पर कई वाहन खड़े थे और लोग वाहनों से बाहर निकलकर भाग रहे थे। लेकिन नागराज को देखकर अब लोग कुछ दूरी पर खड़े थे।

भेड़िया- ओह। मुझे माफ़ करना नागराज।

नागराज- कोई बात नहीं भेड़िया। सबको अस्पताल पहुंच दिया जाएगा जो घायल हैं और आओ वापस वेदाचार्य धाम चलते हैं।

भेड़िया- नहीं नहीं मुझे जाना होगा असम के जंगल को मेरी जरूरत है।

नागराज- इस दशा में तुम्हारा जाना ठीक नहीं होगा। आओ कुछ समय आराम करो ।फिर स्वस्थ होते ही चले जाना।

भेड़िया मान जाता है और नागराज भेड़िया को लेकर वेदाचार्य धाम की तरफ निकल पड़ता है।

फेसलेस वहीं रुकने का फैसला करता है।

वहीं दूर असम के जंगलों में-

महात्मा कालदूत के चीरचला ने किरिगी को मिट्टी के सख्त खोल से बाहर निकाला।

कालदूत ने अपने तंत्र वार से दलदला को पूरी तरह सुखा दिया और किरिगी के खड्ग ने दलदला को खील खील कर दिया।

दलदला अब समाप्त हो चुका था।

किरिगी- महात्मा कालदूत आप यहाँ कैसे?

कालदूत- निंजा किरिगी। मुझे आभास हुआ कि यहाँ असम में कुछ तंत्र और योग ऊर्जा की क्रियाएं हो रही हैं और मैं यहाँ चला आया, यहाँ जैसा कि देख रहा हूँ एक तंत्र से बना दानव आप से लड़ रहा है तो आपकी सहायता के लिए यहीं रुक गया।

किरिगी- मुझे भी यहाँ से तीव्र ऊर्जा का प्रवाह नजर आया तो यहां चला आया किन्तु यहां दलदला नामक इस दानव से टकरा गया।

कालदूत – चलिए, अब जंगल मे देखते हैं कि ये क्या हो रहा है।

महात्मा कालदूत और अमर निंजा किरिगी असम के जंगल मे प्रवेश कर देते हैं।

वहीं कुछ दूर-

नगीना-(गुस्से में) ये कालदूत कहाँ से आ गया किरिगी कब्जे में आने ही वाला थ, कम से कम एक मुसीबत से तो पीछा छूटता। अब ये गुरुराज कहाँ गए अब मैं अकेले क्या कर सकूँगी।

तभी गुरुराज का आगमन होता है।

भाटिकि- चिंता मत करो तंत्र सम्राज्ञी नगीना मैं आ गया हूँ और जीवक मणि से अभी सेना का निर्माण कर देता हूँ। यही सेना जिसने राक्षसों का तक संहार कर दिया था तो ये मामूली तुच्छ मानव क्या बिसात हैं।

नगीना- जल्दी करिए गुरुराज कालदूत और किरिगी आ रहे हैं उनसे लड़ने लायक हालत में नही हूँ अभी।

भाटिकि- अधीर न हो नगीना। अभी देखो ।

गुरुराज भाटिकि अपनी आंखें बन्द करते हैं और कुछ मंत्र बुदबुदाते हैं, जिनसे वो हवा में उड़ने लगते हैं और उनके हाथों से कुछ किरणें निकलनी लगती हैं और उनके चारों और यांत्रिक स्तंभ बनने लगते हैं और जैसे ही वो यंत्र बनकर तैयार होते हैं भाटिकि उन यंत्रो के मध्य बने एक किरण पुञ्ज के भीतर जीवक मणि को स्थापित कर देते हैं।

भाटिकि- नगीना अब अंतिम चरण बाकी है उसके बाद वुल्फानो फिर से हरा भरा हो जाएगा।

नगीना- अवश्य गुरुराज। शीघ्र अंतिम चरण भी पूरा कीजिये।

भाटिकि के हाथों से एक किरण निकलती है और वो एक कृत्रिम सूर्य का निर्माण करने लगती है।

जैसे ही कृत्रिम सूर्य का निर्माण पूरा हो जाता है कृत्रिम सूर्य को भाटिकि जीवक मणि से कुछ दूर स्थापित कर देते हैं।

कृत्रिम सूर्य से किरणे निकलती हैं और जीवक मणि को भेदती हुई पार जाती हैं और जीवक मणि से कुछ दूर रखे जीवद्रव्य (एमनियोटिक फ्लूइड) के अंदर भ्रूण का निर्माण होने लग जाता है।

भाटिकि और नगीना इंतज़ार करते हैं लेकिन वो भ्रूण जल्दी विकसित नहीं होता बल्कि कुछ ही क्षणों के बाद मर जाता है ।

भाटिकि- (चिल्लाते हुए) भेड़िया देव आपने मुझसे छल किया है।

नगीना- अब क्या होगा गुरुराज?

तभी हवा में एक द्वार खुलता है और एक आवाज गूँजती है-

“क्या मैं सहायता करूँ”

नगीना- तुम यहाँ?

महानगर में-

नागराज और भेड़िया बैठे थे, वेदाचार्य भी साथ ही थे।

नागराज- अफसोस हमने जहाँ से शुरू किया था वहीं आकर अटक गए हैं? ना ये पता लग पा रहा है कि बैंक में चोरी क्यों हुई और क्यों आखिर भेड़िया इस प्रकार हरकत कर रहा है?

भेड़िया- नागराज। मैं बाधापहाड़ से भिड़ रहा था और इतने में तुम आ गए और वहाँ बाधापहाड़ नहीं था।

तभी फेसलेस वेदाचार्य से मानसिक संपर्क बनाता है।

फेसलेस- 💭दादा जी मैं अभी बैंक के ही पास हूँ लेकिन कुछ भी पता नहीं लग पाया है। यहाँ कुछ भी अलग नही लग रहा है।💭

वेदाचार्य- 💭भारती ये सब मामला अब बहुत बढ़ गया है तुम तुरंत वापस आ जाओ।💭

फेसलेस वेदाचार्य धाम की ओर निकल पड़ता है।

वेदाचार्य- नागराज मैं काफी समय से महात्मा कालदूत से संपर्क करने की कोशिश कर रहा हूँ लेकिन कोई उत्तर नहीं मिल पा रहा है।

नागराज- आखिर कहां गए महात्मा कालदूत?

वेदाचार्य- मुझे भी आभास हो रहा है कि जल्द ही कोई बड़ा संकट उत्पन्न होने वाला है।

इसी समय ब्रह्मांड फ्रीक्वेंसी पर भेड़िया को परमाणु की कॉल आती है।

भेड़िया- कहो परमाणु कैसे याद किया?

परमाणु- भेड़िया अभी असम से कुछ विचित्र चित्र प्रोबोट को प्राप्त हो रहे हैं? आखिर हो क्या रहा है असम में?

भेड़िया- मैं तो महानगर में हूँ।

परमाणु नागराज से भी बात करता है।

परमाणु- नागराज तुम्हे अवश्य ही यहाँ आना चाहिए। कुछ विचित्र सा घट रहा है। तुम भेड़िया को लेकर अभी दिल्ली आ जाओ।

इतना कहकर परमाणु कॉल काट देता है।

नागराज- चलो भेड़िया दिल्ली जाना होगा।

भेड़िया- नहीं नागराज अब मेरा असम जाना बहुत जरूरी हो गया है। मैं नहीं चाहता मेरी उपस्थिति में असम को कोई हानि हो। तुम दिल्ली पहुंचकर मेरे संपर्क में रहना।

नागराज- ठीक है भेड़िया तुम्हे कुछ दूर तक छोड़ आता हूँ।

वेदाचार्य से आज्ञा लेकर नागराज और भेड़िया विदा लेते हैं।

दिल्ली में-

परमाणु प्रोबोट के साथ लैब में नागराज का इंतज़ार कर रहा था।

जल्द ही नागराज पहुँच जाता है।

परमाणु- वेलकम नागराज।

नागराज- ऐसी क्या खास न्यूज़ है जो तुमने मुझे बुलाया परमाणु।

प्रोबोट- भेड़िया कहाँ है?

नागराज- भेड़िया असम के लिए निकल गया है।

परमाणु- चलो कोई नहीं।

नागराज- तुम बताओ परमाणु क्यों बुलाया?

परमाणु- नागराज असम के जंगलों में कुछ अजीब सी घटनाएं घट रही हैं, जिन्हें मैं तो कुछ नहीं समझ पा रहा हूँ लेकिन प्रोबोट ही बता पाएंगे अब तो।

प्रोबोट एक बड़ी स्क्रीन की तरफ इशारा करता है।

प्रोबोट- ये देखो पिछले कुछ दिनों से असम में कुछ अजीब सी घटनाएं घाट रही है। कुछ दिन पहले बादलों का एक गुब्बार जैसा नजर आया था, जो ये दर्शाता है कि शायद वहाँ कोई एटम बम जैस फटा हो  लेकिन कुछ समय बाद सब सामान्य हो गया था। फिर ये देखो कुछ अजीब ही चित्र नजर आ रहे हैं।

प्रोबोट चित्र को बदलता है।

प्रोबोट- ये देखो असम में इस धुंए के गुब्बार के बाद एक 200 एकड़ में फैला ये महल नजर आ रहा है। ये महल कहाँ से खड़ा हुआ रातों रात कोई नही जानता।

नागराज- लेकिन क्या सैटेलाइट से पता नहीं चल पाया? क्या इससे पहले के चित्र हैं?

परमाणु- नहीं नागराज इस धुंए के गुब्बार के पहले कुछ तकनीकी खराबी आ गयी थी। जिसकी वजह से कुछ दिखाई नही दिया और उसके बाद जब ये धुँआ छंटा तो ये महल दिखाई दिया।

प्रोबोट- इसीलिए यहाँ भेड़िया को बुलाया था कि शायद वो जानता हो कि आखिर इस घटना का क्या अर्थ हो सकता है।

परमाणु- नागराज ये बताओ भेड़िया महानगर कैसे आया?

नागराज परमाणु और प्रोबोट को अब तक घटी सभी घटनाएं बता देता है।

नागराज- मुझे अभी तक समझ नही आया है कि आखिर क्यों भेड़िया कुछ अजीब सी हरकतें कर रहा है और उसे कुछ याद क्यों नहीं।

परमाणु – तुम्हे भेड़िया को अकेले नहीं भेजना चाहिए था।

नागराज- मैं उसे जाने नहीं देना चाहता था लेकिन….

नागराज कुछ कह कर चुप हो जाता है।

परमाणु- क्या हुआ नागराज?

नागराज- अभी अभी विसर्पी का संदेश आया है। शायद वो किसी मुसीबत में है।

परमाणु- मैं भी चलता हूं।

नागराज- नहीं परमाणु तुम रुको। तुम यहाँ से असम की निगरानी करो और भेड़िया से लगातार संपर्क में रहो। मैं कुछ ही समय मे आता हूँ।

परमाणु – ठीक है। जल्द ही आना नागराज।

नागराज परमाणु से विदा लेकर नागद्वीप की ओर निकल पड़ता है।

वहीं असम में-

महात्मा कालदूत और किरिगी असम के जंगल में जैसे जैसे अंदर प्रवेश करते जाते हैं वैसे वैसे उन्हें अलग ही मंजर नजर आने लगता है।

चारों तरफ ऊंची ऊंची दीवारें, एकाश्म पत्थरों से बने बड़े बड़े भेड़ियामानव की मूर्तियां और एकाश्म पत्थरों से बने स्तंभ नजर आ रहे थे।

चलते चलते शीघ्र ही किरिगी और महात्मा कालदूत एक बहुत बड़े यंत्र के सम्मुख पहुँच जाते हैं।

यंत्र में एक तरफ एक मणि रखी हुयी थी जिस पर एक कृत्रिम सूर्य का प्रकाश पड़ रहा था।

अभी कालदूत और किरिगी समझ भी नही पाए थे कि क्या हो रहा है इतने में वहां नगीना आ जाती है।

कालदूत- नगीना।

नगीना- हाहाहा स्वागत है महात्मा कालदूत और अमर निंजा किरिगी का।

कालदूत- मुझे समझ जाना चाहिए था कि इस सब के पीछे तुम ही हो सकती हो।

इतने में एक किरण किरिगी और महात्मा कालदूत से टकराती है और उनके होश छीन देती है।

फिर महल ठहाकों से गूंज उठता है।

नागद्वीप में-

नागद्वीप का इलाका चारों तरफ विष के प्याले के समान दहल रहा था। नागद्वीप के आसमान में अजीब से काले बादल आ गए थे और वातावरण और बहुत अधिक विषैला हो गया था।

हर नागद्वीप वासी त्राहि त्राहि चिल्ला रहा था।

नागद्वीप पर एक नाग जाति का आक्रमण हो चुका था।

इनका पहनावा गहरे हरे और पीले रंग का था जो शायद विष के अनुकूल था क्योंकि जहां सभी नागद्वीपवासी वातावरण में फैले विष के कारण असहज महसूस कर रहे थे वहीं वो नाग जाति के नाग बड़ी सहजता से वार कर पा रहे थे।

सभी नागद्वीप के नागयोद्धा उस नाग जाति के खिलाफ लड़ रहे थे लेकिन नागद्वीप के नागयोद्धाओं के किसी भी वार का उनपर कोई असर नहीं हो रहा था।

एक एक करके सभी नागद्वीप के योद्धा वीरगति को प्राप्त हो रहे थे।

पंचनाग, विसर्पी और विषांक ही उनसे कुछ मुकाबला कर पा रहे थे।

विसर्पी- भैया विषांक। मुझे नहीं लगता हम अधिक देर तक इनका मुकाबला कर पाएंगे।

विशांक- दीदी मुझे भी लगता है कि मैं अब इनका मुकाबला नहीं कर पाऊंगा।

विसर्पी- नागराज को काफी देर हो गयी लेकिन वो अभी तक नही आया।

इसी बीच एक नाग का वार विषांक को लग जाता है।

विषांक- आह! इनका हर विष वार अत्यंत घातक है, जो पृथ्वी का है ही नहीं।

इसी बीच एक नाग ने विसर्पी की तरफ एक भाला फेंका लेकिन विसर्पी का पूरा ध्यान विषांक पर था और वो ये देख नहीं पायी की भाला उसकी ओर आ रहा है।

इससे पहले की भाला विसर्पी को छू भी पाता, एक धमाके के साथ ही भाले के परखच्चे उड़ गए।

जो संकेत था कि अब नागद्वीप पर कोई संकट नहीं आ सकता क्योंकि आ चुका था, नागसम्राट नागराज।

जिसके ध्वंसक सर्पों ने भाले के परखच्चे उड़ा दिए थे।

नागराज को देखते ही विसर्पी भाग कर नागराज के गले लग जाती है।

विषांक जो अब सम्भल चुका था।

विषांक- नागराज तुम आ गए। काफी देर कर दी तुमने आने में।

नागराज- ये क्या हो रहा है? यहाँ क्या हुआ?

विसर्पी- नागराज! कुछ देर पहले ही अचानक ही नागद्वीप पर मौसम में परिवर्तन होने लगा और आसमान में काले रंग के बादल छाने लगे थे। इसी के साथ न जाने कैसे वातावरण विषैला हो गया है । जिससे हमारे सैनिक कमजोर होते गए और ये नाग जाति हावी हो गयी।

नागराज- ये नाग जाति कैसे आ गयी नागद्वीप? इससे पहले इन्हें नही देखा?

विषांक- इसका कुछ पता नहीं चल पाया है नागराज क्योंकि ये अचानक ही प्रकट हुए हैं। इन पर हमारी नाग शक्तियों का असर नहीं हो रहा है।

नागराज- ठीक है। सबसे पहले वातावरण से इस विषैली हवा को दूर करना होगा।

नागराज वातावरण की विषैली हवा को पीने लग जाता है और कुछ ही देर में सारी हवा साफ हो जाती है।

नागराज- आह! बहुत ही विषैली थी ये हवा। ऐसा जहर आज तक नहीं देखा मैंने।

अब सभी नागद्वीप के नाग सैनिक जो कमजोर हो गए थे उनमें पुनः शक्ति वापस आ गयी थी। आश्चर्यजनक रूप से अब नाग सैनिक कमजोर हो गए थे जिन्हें नागराज ने कुछ ही क्षणों में हरा दिया।

लेकिन ऐसा केवल नागद्वीप तक ही सीमित नहीं था। सभी जगह अजीबोगरीब घटनाएं हो रहीं थी।

मुम्बई में-

रात के रक्षक डोगा का शहर जहाँ कोई अपराध भी करता है तो इस डर के साथ कि न जाने डोगा की किस गोली पर उसका नाम लिखा होगा।

लेकिन फिर भी कुछ लोग अपराध का सहारा नहीं छोड़ते।

एक सड़क पर लैम्पपोस्ट की लाइट के नीचे एक काली टोपी पहने, काली फ़तवी पहने सफ़ेद कपड़ो में एक मोटा आदमी कार के बोनट को उठाकर गाड़ी में कुछ देख रहा था। शायद गाड़ी में कुछ खराबी आ गयी थी। देखने से आदमी काफी मालदार लग रहा था।

सेठ- इस गाड़ी को भी आज ही खराब होना था। आज सनाया का बर्थडे है और आज ही देर हो जाएगी। वो हमेशा मुझसे नाराज रहती है, लगता है आज मेरी अच्छे से खबर लेगी वो।

एक मोटरसाइकिल पर दो अजीब से दिखने वाले लोग आते हैं और कार को देखते ही रुक जाते हैं।

एक आदमी- कुछ मदद चाहिए सेठ जी?

सेठ- हां भाई मेरी कार खराब हो गयी है और मेरी बेटी का आज बर्थडे है। मुझे देर हो रही है। क्या आप कुछ मदद कर पाएंगे?

दूसरा आदमी- क्यों नहीं।

इसके साथ ही दोनों आदमियों में से एक आदमी देशी कट्टा निकालता है और दूसरा आदमी सेठ के गले मे चाकू रख देता है।

पहला आदमी- अबे सेठ बहुत मोटा हो गया है। इतना माल किधरिच ले जाएगा? चल कुछ माल इधर भी निकाल।

सेठ- मेरे पास कुछ नहीं है। मुझे जाने दो।

दूसरा आदमी- अबे तेरा क्या करने का है अपन को। अपन को तो माल पकड़ा और खिसक जाएगा अपन इधर से।

पहला आदमी- इसको मैंने संभाल रखा है रे भिड़ू। तू चेक कर न इसको।

दूसरा आदमी सेठ की पूरी तलाशी लेता है और उसके पहनी सोने की चैन और उसके जेब मे रख सारा पैसा निकाल देता है।

पहला आदमी- अबे अब कार की तलाशी भी ले।

कार की तलाशी लेने में दूसरे आदमी को एक बहुत कीमती ट्रैन टॉय मिलता है।

दूसरा आदमी- अबे देख भिड़ू। मेरे बच्चे के लिए खिलौना है इसके पास। अब बच्चे को दूँगा तो वो खुश हो जाएगा।

पहला आदमी- चल निकल अब जल्दी से।

सेठ तब तक गन वाले आदमी को पकड़ लेता है।

सेठ- पैसा ले जाना है ले जा लेकिन ट्रैन पकड़ा दे।

चाकू पकड़े पहले वाला आदमी सेठ पर चाकू चला देता है। जिससे सेठ बहुत घायल हो जाता है और कराहने लगता है ।

पहला आदमी- अबे चल ज्यादा टाइम मत खराब कर। अभी डोगा आता ही होगा।

लेकिन जिससे पहले की गन पकड़े वो बाइक तक पहुँच पाता तब तक डोगा की एक लात उसके मुंह पर छप चुकी थी।

डोगा- डोगा के शहर में अपराध करके सोचते हो भाग जाओगे। कुत्ता हूँ हर अपराधी को फाड़ देता हूं ।

पहला आदमी- डोगा माफ कर दे अब से नहीं करेगा अपन ये काम आज से ही छोड़ देगा मैं। प्लीज़ मुझे छोड़ दे।

डोगा- छोड़ दूंगा तुझे लेकिन मौत के दरवाजे तक, जहां यमराज भी पूछेगा तो बताना कि यहाँ कुत्ते का राज है वो भी अगर आये तो  डोगा से पूछकर आये ।

डोगा की एक गोली अब उसके कंधे को चीर चुकी थी।

डोगा- जिस हाथ से आज तूने ये चाकू उठाया है वो हाथ अब किसी काम का नही रहेगा।

डोगा ने गोली से गुंडे की हथेली भेद डाली थी और एक घूँसा गुंडे को अब बेहोशी की दुनिया में पहुंचा चुका था।

डोगा अभी सेठ को उठा ही रह था कि एक बाण डोगा के हाथ को चीरता हुआ पार हो जाता है।

डोगा इधर उधर देखता है तो वो खुद को कई लोगो से घिरा पाता है।

……………………क्रमशः

Written By –  Devendra Gamthiyal for Comic Haveli 

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12 Comments on “Bhediya Aatank Part 3”

  1. बहुत बढ़िया देवेंद्र जी आपकी इस कहानी ने तो राज कॉमिक्स के उस सुनहरे दौर में पहुच दिया जिसमे मनु और धीरज जी कॉमिक्स की दुनिया के स्टार थे। तब गुरुराज भाँतिकी की चालें, नगीना का छल , भेड़िया का एक्शन सब कुछ काफी अच्छा था। और अब तो डोगा की भी एंट्री हो गयी है। काफी अच्छा लगा ये कहानी पढ़के।

  2. बहुत बढ़िया कहानी है देवेंद्र जी।
    कहानी अब अपने पूरे रफ्तार से आगे बढ़ रही है , नागराज , परमाणु और डोगा के आ जाने से कहानी का रोमांच और भी बढ़ गया है।
    आशा करता हूँ बाकी के भी ब्रह्मांड रक्षक जल्द ही आये।
    जल्दी से अगला भाग भी प्रस्तुत कीजिये।

  3. तो। बाकी से भी ज़्यादा ज़बरदस्त ये भाग। जिसे मैंने पढ़ ही लिया। और सच बता रहा हूँ जब मैं इसे पढ़ रहा था तो मुझे भी वैसा ही अहसास हुआ जैसा सम्वर्त भाई ने ऊपर कॉमेंट में बताया है।मैं सच मे उस समय मे पहुंच गया था जब ऐसी कहानियां आया करती थीं। ये पार्ट पूरी तरह से ज़बरदस्त, एक्शन से भरपूर था।गुरुराज भाटिकि और भेड़िया के बीच बहस वाला सीन भी अच्छा लगा । पर आखिरकार भेड़िया देवता ने जीवक मणि दे ही दी भाटिकी को।

    भेड़िया को बाधा पहाड़ नामक बाधा से झूझते देखकर मजा आया। परन्तु वो एक धोखा निकला और भेड़िया की वजह से कई लोग घायल हुए। सुपर हीरोज़ के साथ ऐसी समस्याएं बहुत होती हैं (बहूहू)।

    भाटिकी को जो जीवक मणि मिली है उसकी मदद से वो एक बार वुल्फानो को पुनः निर्माण करना चाहता है। भाटिकी और नागिना साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

    इसमें परमाणु और डोगा की एंट्री धमाकेदार थी। और अब स्टोरी पूरी तेज़ी से आगे बढ़ रही ही । डोगा की एंट्री अभी अभी हुई । और उसे बाण किसने मार ये तो अगले भाग में पता चलेगा।

    मैं इस रिव्यु में आगे भी कुछ लिखना चाहता हूँ। पर इस वक़्त मेरे आस पास इतना शोर हो रहा है कि मैं ज़्यादा नही लिख पाऊंगा।
    बस इतना कहूँगा की स्टोरी ज़बरदस्त है आप ऐसे ही लगे रहिये देवेन्द्र। आपने हमलोगों को तो भूतकाल में पहुंचा दिया है। (हीहीही)

    1. धन्यवाद तल्हा जी आपका इतने सुंदर और उत्साहवर्धक समीक्षा के लिए।

  4. देवेन्द्र भाई।*

    गुर्रर्रर । इसमे यहाँ तो दुबारा एडिट करने का ऑप्शन ही नही दिया है। कोई गलती हो जाये तो बन्दा कैसे सुधारेगा। (भैं वै) ऊपर वाले रिव्यु में कई गलतियां हुई हैं । (अब मैं सही कैसे करूँ। भैं वैं वैं।)

    1. सब बहुत सही है।
      धन्यवाद एक बार और तल्हा जी

    1. जी धन्यवाद।
      देखते हैं ध्रुव आने को हां बोलता है भी या नहीं।
      अभी तो फिलहाल किसी और को मना रहा हूँ

  5. Wah ye to pichi wali se bhi behtar h, Vishank ko thoda aur ladte dikhana tha vo kafi powerful h, Doga ki entry mast , aur ye Jo alag alag samsya aani shuru hui h Matlab baki superheroes ki entry bhi hone wali h, dhruv ka besabri se intezaar h

    1. अवश्य विशांक का रोल बड़ा करने का प्रयत्न करूँगा।
      जल्द ही आएगा ध्रुव भी

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