Bhediya Aatank Part 6

               भेड़िया आतंक पार्ट 6

 

 

रूपनगर-

 

जिंदा मुर्दा एंथोनी!

हां यही नाम है रूपनगर के रक्षक का।

आज उसकी जरूरत सबसे ज्यादा है रूपनगर को।

मुर्दे कब्रें फाड़कर बाहर आ रहे हैं। हर जगह केवल मुर्दों का ही आतंक नजर आ रहा है।

लेकिन कहाँ है मुर्दा?

आसमान में प्रिंस चिल्ला रहा है, आज वो ऐसे कर्कशा रहा है जैसे कि ये अंत हो!

वो आसमान में गोल गोल घूम रहा था और बस कर्कशा रहा था।

रूपनगर शहर में बीचों बीच कब्रिस्तान पर मुर्दों का एक बहुत विशाल झुंड नजर आ रहा है।

सभी मुर्दे एक जगह पर एक के ऊपर एक चढ़ते जा रहे थे जैसे वो किसी को दबा रहे हैं।

 

लेकिन ये क्या जमीन कांपने लगी है, क्या हो रहा है।

अचानक मुर्दे बाहर की ओर छटकते जा रहे थे।

उनके बीच मे एक आकृति नजर आ रही है।

एंथोनी!

रूपनगर का रक्षक।

कौवा प्रिंस जो पहले किसी चिंता व डर के कारण कर्कशा रहा था वो अब एक विजय के होने जैसा कर्कशा रहा था।

 

एंथोनी उन मुर्दो के बीच से निकलता हुआ एक बार फिर आसमान में था।

 

एंथोनी- तूने क्या सोचा था प्रिंस? एंथोनी इतना कमजोर है? इस मुर्दे ने लाखों मुर्दो को जिंदा इंसानों के भेष में झेला है ये तो फिर भी मुर्दे हैं। अब ऐसा नहीं होगा प्रिंस अब मुझे इन्हें हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए।

 

एंथोनी हवा में बहुत ऊपर तक गया।

 

एंथोनी- थोड़ा और ऊपर जाना होगा।

जब एंथोनी जमीन से कई किलोमीटर ऊपर तक पहुंच गया उसके बाद वो नीचे की तरफ बढ़ा और उसकी गति भी आज प्रकाश को मात देने पर आमादा थी।

एंथोनी- अब जरूरी गति तक पहुंच चुका हूँ, अब इन मुर्दो की खैर नहीं।

 

बहुत तीव्र वेग से एंथोनी जमीन से टकराया तो ऐसा लगा मानो भूचाल आ गया हो। जमीन जगह जगह से फट पड़ी।

 

एंथोनी- इन मुर्दों को अब इनकी असली जगह बतानी होगी।

 

एंथोनी के दोनों हाथों से उसकी ठंडी आग निकलने लगी और उसकी चपेट में सभी मुर्दे आने लगे, शहर के हर गली से हर सड़क से सभी जगह जितने भी मुर्दे थे वो ठंडी आग में जकड़ चुके थे।

 

एंथोनी- आह! अब इन्हें एक साथ वापस इस फटी जमीन में दफन करना होगा।

एंथोनी ने आज अपने शरीर के रोम रोम से पूरी ताकत झोंक दी थी। धीरे धीरे सभी मुर्दे खींचे चले आ रहे थे और जर्जर व कमजोर फ़टी हुई जमीन में समाते भी जा रहे थे।

एंथोनी- इन मुर्दो को एक बार फिर दफन करना होगा प्रिंस मुझे करना होगा।

“आह!”

 

प्रिंस देख रहा था कि एंथोनी आज किस दर्द से गुजर रहा था ऐसा दर्द जो शायद उसने कभी नही झेला होगा।

“कांव कांव”

केवल यही आवाज गूंज रही थी हर जगह।

एंथोनी की ठंडी आग मुर्दों को तड़पाकर सभी मुर्दो को जमीन के अंदर तक खींच लायी थी।

 

अब एंथोनी आराम की सांस ले सकता था।

लेकिन कोई और था जिससे आराम अभी दूर दूर तक दिखायी भी नहीं दे रहा था।

 

3 घण्टे पूर्व दिल्ली-

 

हर तरफ रंग बिखरा हुआ था कई लोग क्षत विक्षत हालत में पड़े हुए थे।

सार्जेंट किलर जमीन पर गिरा पड़ा था।

तिरंगा- अच्छा हुआ परमाणु तुम आ ही गये।

परमाणु- क्यों तिरंगा इसे हराना मुश्किल हो रहा है क्या?

तिरंगा- आसान ही है आओ तुम ही मार दो इसे।

इतने में सार्जेंट भी उठ चुका था।

परमाणु- इसमें क्या बात है अभी लो।

परमाणु उड़ता हुआ सार्जेंट किलर के पास आया और एक प्रचंड मुक्का सार्जेंट के चेहरे पर लगाता है।

सार्जेंट जमीन फाड़ता हुआ दूर जा गिरता है।

सार्जेंट एक कुटिल हँसी लिए हुए खड़ा हुआ-

“हाहाहा। बस इतनी है ताक़त है तुम लोगों में?”

 

इससे पहले की परमाणु और तिरंगा कुछ समझ पाते सार्जेंट उनके पास आ गया और जमीन पर ही खड़े परमाणु पर एक लात मारता है और परमाणु दूर जा गिरता है।

 

तिरंगा- परमाणु तुम ठीक हो?

परमाणु- बहुत बढ़िया। एक तुम भी खा के देखो फिर पूछना।

तिरंगा- अब तक क्या कर रहा था फिर मैं?

परमाणु- इससे ऐसे जीतना मुश्किल है अब असली लड़ाई का टाइम आ गया है।

 

परमाणु सार्जेंट के सामने उड़कर खड़ा हो जाता है।

सार्जेंट और परमाणु में अब लात घूँसों से हमला शुरू हो जाता है।

कभी परमाणु का पलड़ा भारी दिखता है कभी सार्जेंट का।

परमाणु सार्जेंट पर जानलेवा वार नहीं करना चाहता था और उसे इसका मौका भी नहीं मिल पा रहा था।

देखते ही देखते परमाणु सार्जेंट की गिरफ्त में आ चुका था। सार्जेंट ने उसे अपने हाथों से जकड़ा और अद्भुत बल का परिचय देते हुए कुछ ही पलों में परमाणु की पीठ तोड़ भी देता लेकिन

“श्रिंक”

परमाणु के मुंह से निकली ये आवाज परमाणु को छोटा कर गयी और एक पल से भी कम में फिर से सामान्य रूप में आ गया और एक दो हाथों का संयुक्त प्रहार भी सार्जेंट पर कर दिया।

सार्जेंट एक बार फिर धूल फांक रहा था।

लेकिन अब भी सार्जेंट होश में था।

इसी बीच तिरंगा ने अपने न्याय स्तंभ से एक भयंकर ऊर्जा वार सार्जेंट पर किया।

एक क्षण के लिए सार्जेंट तड़पा लेकिन फिर सम्भल गया। सार्जेंट को देखकर साफ समझा जा सकता था कि अब उसकी आँखों में खून उतर आया होगा।

परमाणु- ले कर गया अपने मन की। अब भुगतना मुझे पड़ेगा।

परमाणु उड़ता हुआ दोनों हाथों को आगे कर एक प्रचंड प्रहार करने के किये बढ़ा लेकिन सार्जेंट एक तरफ हट गया और एक जोरदार मुक्का परमाणु पर मारता है, परमाणु के जमीन पर टकराने से बहुत बड़ा गड्ढा बन जाता है।

परमाणु कुछ देर के लिए लड़ाई से बाहर हो जाता है।

अब सार्जेंट और तिरंगा एक दूसरे की तरफ देखते हैं।

तिरंगा- अब तो शायरी भी नहीं निकल रही है। तिरंगा बेटे तू तो गया।

 

किसी अज्ञात स्थान पर-

 

किरीगी अचरज में खड़ा कालदूत को घुटनों के बल बैठा हुआ देख रहा था। अभी तक अंधेरा छँटा नहीं था न ही चारों तरफ धनुष्टंकारों, चल रही तलवारों के टकराने की आवाज, चीखों का आना बंद हुआ था।

किरीगी अभी तक कुछ नहीं समझ पाया था।

 

किरीगी – उठिए महात्मा कालदूत। यूँ युद्ध मे भला कौन सा योद्धा हथियार डालता है?

कालदूत को मानो कुछ सुनायी ही नही दे रहा था।

आकृति उनके सम्मुख अब भी खड़ी थी।

कालदूत घुटनों कब बल बैठा हाथ जोड़े बैठा हुआ था। उसकी आँखों से बहते हुए पश्चाताप के आँसू ये बयाँ करने के लिए काफी थे कि उससे कुछ अनर्थ हो गया था।

 

कालदूत- प्रभू। क्षमा कीजिये देव कालजयी क्षमा कीजिये। भूलवश मुझ अज्ञानी ने आप पर अस्त्र चलाने का दुस्साहस किया।

 

देव कालजयी जो कि अब तक स्पष्ट नहीं दिख रहे थे।

“महात्मा कालदूत आप इस समय में किस प्रकार आ सकते हैं?”

“आप तो नागद्वीप की रचना में व्यस्त थे!”

 

ये आकृति देव कालजयी की थी।

 

लेकिन ये क्या असमंजस था कालदूत और किरीगी कैसे पहुंच गए देव कालजयी के समक्ष और कौन सी जगह है ये? इन सवालों के जवाब जहाँ देव कालजयी और कालदूत व किरिगी को इंतज़ार था ठीक ऐसे ही सवालों से भेड़िया भी रूबरू हो रहा था।

 

असम वर्तमान-

वुल्फानो-

 

भेड़िया अभी भी गर्दन झुकाए बैठा था।

वुल्फा- गुरुराज आप ठीक हो गए?

भाटिकी- हाँ मैं ठीक हूँ। लेकिन ये क्या कर रहे हो वुल्फा?

वुल्फा- ये कोई बहरूपिया लगता है गुरुराज, अवश्य कोई शत्रु है जो भेड़िया मानव जैसा दिख रहा है लेकिन ऐसा पहली बार देख रहा हूँ।

भाटिकि- ये मेरा शिष्य है इसे मैंने ही बुलावा भेजा था। इसके बारे में विस्तार से बात करेंगे अभी तुम महल चलो।

वुल्फा- लेकिन गुरुराज आप मूर्छित थे और वो तीनों कौन हैं?

भाटिकि- सब का उत्तर मिलेगा वुल्फा अभी महल में चलो।

भाटिकि भेड़िया के पास जाते हैं और उसे उठाते हैं।

भेड़िया- गुरुराज आप? प्रणाम गुरुराज।

भाटिकि- बहुत विलम्ब कर दिया पुत्र।

भेड़िया- ये स्वप्न क्यों हो रहा है मुझे गुरुराज?

भाटिकि- ये स्वप्न नही है। पुत्र कोबी।

भेड़िया- गुरुराज आप सशरीर असम में? और ये वुल्फानो क्यों दिख रहा है? क्या ये मेरे माता पिता सुवर्या और वुल्फा हैं?

भाटिकि- हाँ पुत्र कोबी। अब वुल्फानो और असम एक ही हैं।

भेड़िया- लेकिन ये कैसे हुआ गुरुराज?

भाटिकि- पुत्र अभी आराम करो सब पता चल जाएगा। अभी विश्राम हेतु कक्ष में चलो तुम्हें विश्राम की अतिआवश्यकता है।

भेड़िया हाँ में सिर हिलाता है। भाटिकि भेड़िया को एक कक्ष की ओर ले जाते हैं।

भेड़िया अब भी इन सब पर विश्वास नहीं कर पाता लेकिन वो इतना थक चुका था कि कोई प्रश्न नहीं कर पाया और केवल कक्ष में पहुंचकर एक शैय्या पर लेट गया।

भाटिकि तेज कदमों से कक्ष से बाहर निकल जाते हैं।

भाटिकि बहुत तेज कदमों से महल से बाहर निकलकर एक ओर बने विशाल से भवन की ओर चले जा रहे थे जहां की सुरक्षा व्यवस्था बता रही थी कि ये अवश्य ही कोई विशेष स्थान होगा।

कदम कदम पर सैनिक खड़े थे जो अस्त्र शस्त्र से सुसज्जित थे। भाटिकि बेरोकटोक आगे बढ़े चले जा रहे थे।

भवन के अंदर पहुंचकर भाटिकि ने एक सैनिक को द्वार खोलने के लिए इशारा किया।

सैनिक कुछ देर सकपकाया लेकिन वो इनकार नहीं कर सका।

द्वार खुलते ही जैसे ही भाटिकि कक्ष के भीतर प्रवेश करते हैं।

“तुम्हें अब समय मिल रहा है इतने समय बाद”

“किसी तरह खुद को रोका हुआ था नहीं तो तुम्हें लगता है ये बंधन हमें रोके रख पाते?”

भाटिकि- हमें तुम्हारी क्षमताओं पर तनिक भी संदेह नहीं है।

दिल्ली-

प्रोबोट की लैब-

प्रोबोट के सामने एक बहुत बड़ी स्क्रीन लगी है जिसमें बहुत सी अलग अलग फ्रेम दिखायी दे रही हैं।

प्रोबोट बारीकी से सबको देख रहे थे।

तभी लैब में नागराज का आगमन होता है।

प्रोबोट- बहुत देर कर दी तुमने नागराज आने में।

नागराज- बस प्रोबोट किसी काम में उलझ गया था। ये स्क्रीन पर क्या दिखायी दे रहा है। हो क्या रहा है सब?

प्रोबोट- पिछले कुछ समय से या यूं कहो पिछले कुछ दिनों से असम की घटनाओं के बाद से पूरे विश्व में जगह जगह अजीब सी घटनाएं घटित हो रही हैं। जिनका केंद्र सम्भवतः भारत का असम ही हो सकता है।

नागराज- वो कैसे?

प्रोबोट- गौर से देखो नागराज जो असम कुछ समय तक असामान्य सा व्यवहार कर रहा था वो अब मानचित्र पर ही कहीं दिखायी नहीं दे रहा है ऐसा लगता है जैसे वो गायब हो गया हो।

नागराज- परमाणु कहाँ है? उसने मुझसे संपर्क किया था।

प्रोबोट- स्क्रीन पर नजर दौड़ाओ नागराज तुम्हें हर एक बात का जवाब मिल जाएगा।

नागराज- ये दिल्ली को क्या हो गया है? जहाँ से मैं आ रहा हूँ वहां भी न जाने ये क्या हो रहा था! समझ नहीं आ रहा है।

प्रोबोट- नागराज ये बातें मेरी समझ और विज्ञान की समझ से भी परे लग रही हैं। जब तक इस पर अध्ययन  करता हूँ तुम तब तक इस समस्या से दो चार हो रहे लोगों की मदद के लिए जाओ नागराज सभी ब्रह्मांड रक्षक इस काम मे लगे हैं। तुम कितनी तेज उड़ सकते हो?

नागराज- अभी तो इसका कोई आईडिया नहीं है मुझे, लेकिन शायद उड़ पा रहा हूँ।

प्रोबोट- ठीक है। फिर तुम जहाँ मुमकिन हो वहाँ मदद करो।

नागराज लैब से निकल पड़ता है। प्रोबोट इस समस्या का हल निकालने की कोशिश में लग जाता है।

लेकिन एक जगह ऐसी है जहाँ इस समय कहीं से भी हल नहीं निकल रहा था।

 

वर्तमान राजनगर-

 

पूरे विश्व में त्राहि त्राहि मची हुई थी और सुपर कमांडो ध्रुव का शहर फ़र्ज़ की मशीन इंस्पेक्टर स्टील की कर्मभूमि भी इन सबसे अछूती नहीं थी।

भले ही इन अजीबोगरीब घटनाओं के पीछे क्या कारण था लेकिन अभी किसी के पास इसे सोचने का समय नहीं था।

इंस्पेक्टर स्टील के पास भी नहीं।

वो शायद किसी जल्दी में था इसीलिए आज उसकी बाइक फुल स्पीड में थी न उसे आज ट्रैफिक रूल्स की याद थी और न ही उसे रास्ते मे पड़ रहे बैरियर्स की परवाह थी।

 

“हेल्लो अमर”

इंस्पेक्टर स्टील उर्फ अमर के कानों में गूँजती ये आवाज इंस्पेक्टर स्टील अच्छी तरह से जानता था, ये आवाज थी उसके अजीज दोस्त डॉक्टर अनीस की।

इंस्पेक्टर स्टील- 💤बोलो अनीस।💤

अनीस- तुम कहाँ तक पहुँचे अमर?

इंस्पेक्टर स्टील- 💤अभी मैं मेन मार्केट के दक्षिण वाले पुल पर हूँ अनीस💤

अनीस- अमर तुम उत्तर की तरफ राजनगर शॉपिंग काम्प्लेक्स जाओ वहाँ तुम्हारी जरूरत है।

इंस्पेक्टर स्टील- 💤वहाँ क्या है अनीस?💤

अनीस- तुम विश्वास नहीं करोगे! जल्दी पहुँचो वहाँ तुम्हारा इंतज़ार चण्डिका और नताशा कर रहे हैं।

इंस्पेक्टर स्टील- 💤ओके अनीस💤

स्टील ने अपनी सुपरबाइक घुमायी और बाइक एक तरफ फिसलती हुयी राजनगर शॉपिंग काम्प्लेक्स की तरफ बढ़ चला जो उत्तर की ओर था।

10 मिनट के अंदर भीड़ को छकाता हुआ स्टील कॉम्प्लेक्स के बाहर खड़ा था।

उसे वहीं चण्डिका और नताशा दिख गए थे जो एक तरफ खड़े थे।

काम्प्लेक्स के हाल कुछ अच्छे नहीं लग रहे थे। बल्कि वहाँ कोई कॉम्प्लेक्स था भी इसका अंदाज़ा लगाना भी कठिन था।

रोड़ हर जगह से उखड़ चुकी थी, इमारतें अपना स्थान छोड़ती जा रही थीं।

स्टील, नताशा और चण्डिका अपने स्थान पर ही थे कि एक और इमारत भरभरा कर गिर गयी।

इंस्पेक्टर स्टील- 💤ये क्या हो रहा है? कौन कर रहा है ये?💤

चण्डिका- हमें खुद नहीं पता ये हो क्या रहा है।

इंस्पेक्टर स्टील-💤हमें इस एरिया को खाली करवाना पड़ेगा।💤

नताशा- ये हम बहुत पहले कर चुके हैं। हम केवल ये देख रहे हैं अब की ये है कौन? और कर क्यों रहा है इतनी बड़ी तबाही।

इंस्पेक्टर स्टील- 💤ग्रेट जॉब गाइस💤

कुछ ही देर बाद फिर से जमीन कांपने लगी।

इंस्पेक्टर स्टील- 💤 ये क्या हो रहा है?💤

चण्डिका- फिर से कोई इमारत ढहने वाली है लगता है।

इंस्पेक्टर स्टील-💤 तो पता करते हैं ये है कौन?💤

इतना कहकर स्टील जैसे ही इमारत गिरती है उस गड्ढे में कूद जाता है जो इमारत के ढहने से बनता है।

स्टील गड्ढे में पहुँचकर इधर उधर देखता है लेकिन कुछ नहीं दिख पाता तो कुछ ही देर बाद वो वापस सतह पर आ जाता है।

चण्डिका- कुछ पता चला स्टील?

इंस्पेक्टर स्टील- 💤नहीं। मेरे देखने से पहले ही वो जा चुका था।💤

इंस्पेक्टर स्टील- 💤ध्रुव कहाँ है?💤

चण्डिका- 💭भैया कहाँ है इसका पता होता तो क्या मुझे आने की जरूरत पड़ती यहाँ।💭 न जाने स्टील ध्रुव कहाँ है आज। जबकि आज उसकी जरूरत है।

नताशा- ध्रुव जहां भी है लेकिन पहले इस समस्या का हल ढूंढो।

 

राजनगर में समस्या का हल कौन ढूँढेगा और ढूंढ भी पायेगा या नही ये तो नहीं पता लेकिन एक जगह मुसीबत बढ़ने वाली थी।

 

दिल्ली-

 

तिरंगा सार्जेंट के सामने खड़ा था।

परमाणु पीछे से परमाणु रस्सियों में सार्जेंट को बांधता जाता है, तिरंगा मौका जानकर न्याय दंड से एक और भीषण ऊर्जा का वार सार्जेंट पर करता है। जिससे सार्जेंट तड़प उठता है।

तभी नागराज की कॉल आ जाती है।

नागराज- परमाणु! क्या तुम मुझे सुन पा रहे हो?

परमाणु- हाँ नागराज बोलो।

नागराज- जल्दी से इस मुसीबत को छोड़ो उसे तिरंगा संभाल देगा। तुम विश्व मे हर जगह हो रही इन घटनाओं से जितना संभव हो लोगों को बचाओ, मैं भी जा रहा हूँ।

परमाणु- ओके नागराज।

 

परमाणु- तिरंगा तुम इस सार्जेंट को देखो मैं विश्व भ्रमण पर निकलता हूँ।

तिरंगा- ये क्या मजाक कर रहे हो?

परमाणु एक परमाणु ब्लास्ट सार्जेंट पर करता है और उड़ जाता है।

परमाणु ब्लास्ट सार्जेंट बचा जाता है।

तिरंगा- गजब।

अब सार्जेंट और तिरंगा आमने सामने थे।

 

……………………………क्रमशः

Written By- Devendra Gamthiyal for Comic Haveli

Disclaimer – These stories are written and published only for entertainment. comic haveli and writers had no intent to hurt feeling of any person , community or group. If you find anything which hurt you or should not be posted here please highlight to us so we can review it and take necessary action. comic haveli doesn’t want to violent any copyright and these contents are written and created by writers themselves. The content is as fan made dedications for comic industry. if any name , place or any details matches with anyone then it will be only a coincidence.

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5 Comments on “Bhediya Aatank Part 6”

  1. हुम्म….बड़ा बुरा लगा देखकर की सज्जन लोग एक शब्द लिखकर कट लेते हैं, ये एक शब्द भी न लिखते आधा लिख देते या वो भी न लिखते। खैर उससे मुझे क्या। मैं तो एक शब्द नही लिखने वाला। हीहीही।

    सर्वप्रथम गुर्र भी और हीही भी। भई वाह। क्या स्टोरी है। परन्तु रिकैप तो देना था । पिछ्ला वाकया भूल चुका हूँ। सब से पहले एन्थोनी का सीन दिखाया गया जिसमे एक्शन गजब का देखने मिला। एन्थोनी का मुर्दों को ज़मीन के अंदर गाड़ना बहुत ज़बरदस्त सीन था। लेकिन ये एन्थोनी सुपर मैन कब बना? हीहीही।

    दूसरा सीन दिल्ली का था जहाँ परमाणु और तिरंगा को एक साथ देखकर मज़ा आ गया। लेकिन ये सार्जेंट कौन है जिसपर दोनों मिलकर भी काबू नही पा सके। दूसरी तरफ वुल्फानो में न जाने क्या क्या गुल खिल रहे हैं । कौन है वो जिसे भाटिकि ने कैद कर रखा है।

    और जनाब कालदूत तथा किरिगि तो डायरेक्ट देव काल जयी के पास पहुँच गए। हीहीही। ये क्या हो गया रे राजू!

    राजनगर का सीन भी झकास था। कौन है वो नामुराद जो बिल्डिंगे गिरा रहा है? ध्रुव कहाँ है।

    नागराज और परमाणु विश्वभ्रमण पर निकल चुके हैं बेचारे तिरंगा को सार्जेंट के साथ छोड़कर।

    हीहीही। बुहुहु। ये हो क्या रहा है? इतनी सारी घटनाएं तो मैंने सर्वनायक से त्रस्त में भी नही दिखाईं थीं।

    बहुत ज़बरदस्त कहानी । परन्तु इसका अन्त क्यों नज़र नही आ रहा? बुहुहु।

    एक और गलती। आप कहानी बताते वक़्त कहीं कहीं पर “है” तथा कहीं कहीं पर “था” शब्द कर प्रयोग करते गए। इसे ठीक करने की ज़रूरत है। या तो “है” कीजिए या “था” कीजिये।

    बाकी सब कुछ सही है। अगला पार्ट जल्दी लाएं। हीहीही।

    8 आउट ऑफ 10

  2. ग्रेट वर्क देवेंद्र भाई।
    इस कहानी में बहुत से हीरोज आये जिन्हें देख कर अच्छा लगा, अब किस तरह से इन सबका रोल कहानी में आगे बढ़ेगा ये देखना है।
    और सब तो आ गए , पर ध्रुव नहीं आया अभी तक।
    आखिर क्या हुआ है वुल्फानो में, और किस पर छायेगा भेड़िया आतंक।
    कहानी की लंबाई भी थोड़ी छोटी है जिससे किसी भी हीरो का एक्शन सीन पूरा नहीं हुआ, आशा है इसका ख्याल आप अगले भागों में जरूर रखेंगे।

  3. एक मल्टीस्टार स्टोरी पढ़ने का मजा ही अलग है और वह भी ऐसी स्टोरी एक्शन और romanch se पूरी भरी हुई . मैंने इस स्टोरी के अभी तक न जाने कितने part पढ़ लिए ( क्योंकि मुझे कुछ याद नहीं pichly part में क्या हुआ था ,शायद अब से आपको भी रिकेट देना चाहिए ताकि वापिस पिछले वाले part na पढ़ने पड़े , स्टोरी के लिए जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है . परमाणु और तिरंगा के punch शानदार थे और फाइट के बीच यह सब सुनना बहुत ही मजेदार लगता है . पता नहीं क्यों जब भी दो सुपर लड़ते हैं तो उसमें से कॉमेडी करने वाला सुपर हीरो ही ज्यादा पसंद आता है na कि बस शांत और लड़ने वाला . अभी dhruv कहां गायब है यह नहीं पता पर शायद अगले आने वाले part में पता लग जाएगा और अभी यह सब घटनाएं हो रही है इसका जवाब bi aagy hi मिलेगा इसलिए उसका इंतजार

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