Bhokal- An Ultimate Undefeated Hero

भोकाल

दोस्तों भोकाल राज कॉमिक्स का एक पुरातन काल से लिया गया हीरो है जिसको अन्य पुरातन काल के नायकों से ज्यादा सफलता मिली । आज हम भोकाल के विषय मे कुछ संक्षिप्त जानकारी यहाँ शेयर करने वाले हैं।

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परिचय

दोस्तों भोकाल वो नायक है जो परीलोक का एक नागरिक किन्तु उसने पृथ्वी को अपनी कर्मभूमि बनाया। भोकाल की माता का नाम ओसिका और   पिता का नाम खजान देव है । किन्तु दो राक्षसों बोझ और भरकम के आतंक के कारण भोकाल के पिता मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं और ओसिका का अपहरण हो जाता जिसकी तलाश में भोकाल पृथ्वी पर आता है और जादूगर फूचांग द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर तिलिस्मा का तिलिस्म तोड़कर विजय हासिल करता है किंतु परिस्तिथियों वश फिर भी अपनी माँ को बचा नही पाता। फिर वो पृथ्वी पर ही रहकर पाप के विनाश तथा मानवता की सेवा का प्रण लेता है। 

कार्यक्षेत्र

भोकाल तिलिस्मा प्रतियोगिता में भाग लेने विकासनगर में आया था और प्रतियोगिता के उपरांत वहां के राजा विकासमोहन के अत्यंत आग्रह और स्नेह के कारण भोकाल विकासनगर का ही होकर रह गया। यद्यपि भोकाल की सहायता तो देवता तक भी लेते रहते हैं किंतु फिर भी भोकाल ने सम्पूर्ण मानवता की सेवा के साथ साथ अपने आप को विकासनगर के सिंहासन के प्रति भी एक वचन से बांधा हुआ है । इसलिए भोकाल का मुख्य कार्यक्षेत्र विकासनगर ही है ।

शक्तियां

भोकाल एक पुराने काल के योद्धा के रूप में प्रस्तुत किया गया है जिसका कार्यकाल कलियुग शुरू होने से ठीक पहले का है। भोकाल का वास्तविक नाम आलोप है और अपने महागुरु भोकाल का नाम पुकार कर उसको प्राप्त हो जाती असीम शारीरिक शक्ति , कवच एक अभेद्य ढाल और महागुरु भोकाल की तलवार।

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भोकाल की ढाल और तलवार एक दिव्यास्त्र है और विश्व की कोई भी शक्ति भोकाल की ढाल को भेद नही सकती । हालांकि भोकाल परीलोक का नागरिक है तो उसको परो के कारण उड़ने की शक्ति भी प्राप्त है लेकिन मृत्युयोग कॉमिक में आखेटक के पुत्र और कालकुण्डली द्वारा उसके भाग्य में डाले गए विकलांग योग के कारण उसे अपने परो से हाथ धोने पड़ते हैं और यहीं पर भोकाल की ढाल की एक और विशेषता बताना आवश्यक है के भोकाल की ढाल भोकाल को किसी भी वार से बचाने के साथ साथ उसको उड़ने की शक्ति भी देती है । भोकाल की तीसरी महाशक्ति का नाम है प्रहारा!!!

प्रहारा एक ऐसी महाशक्ति जो मस्तक पर ताज की तरह सुशोभित होती है तथा मस्तिष्क की सोचो के अनुरूप प्रत्येक प्रकार के अस्त्र शस्त्र तैयार कर देता है। प्रहारा मूलरूप से भोकाल की शक्ति नही है बल्कि तिलिस्मा के रचयिता खजूरा के द्वारा भोकाल की पत्नी तुरीन को दी गयी थी जो तुरीन की मृत्यु के उपरांत भोकाल को धारण करना पड़ा। तुरीन के विषय मे हम अगले किसी सेगमेंट में बताएंगे। भोकाल की इन शक्तियों के बाद अगला नंबर आता है भोकाल की ही नही बल्कि विश्व की सर्वाधिक दुर्दांत और भीषण शक्ति जवालाशक्ति का। जी हां भोकाल के मानवता के प्रति समर्पण को देखकर ऋषि सिरकटा ने भोकाल को जवालाशक्ति के पथ का ज्ञान कराया तथा जवालाशक्ति को भोकाल की तलवार में समाहित किया। इसके अतिरिक्त भोकाल की सत्यप्रियता और पराक्रम को देखकर देवो ने उसको महारावण के संहार के लिए दिव्यास्त्रों से भी सुशोभित किया था । 

विवाह एवं परिवार

भोकाल के विषय मे बस यहीं आकर सबसे बड़े अन्याय शुरू होते हैं। भोकाल की कहानियों में उसके साथ ठीक से न्याय नही किया गया और ना ही उन तथ्यों को ठीक प्रकार से वर्णित किया गया।

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भोकाल शुरू से ही ओसाक ग्रह की राजकुमारी तुरीन से प्रेम करता था किंतु भाग्यवश भोकाल का तुरीन से विवाह होने से पहले ही किसी और से विवाह हो गया । ऋषि अखिलेश की पुत्री सलोनी ने भोकाल को जब से देखा बस उसको पति मान लिया और उसकी प्रतिमा बनाकर पूजा करने लगी , जब एक दिन सलोनी को तुरीन और भोकाल की शादी के विषय मे सूचना मिली तो वो खुद को रोक नही पाई और अपना अधिकार मांगने तुरीन तथा भोकाल के विवाह स्थल की और चल पड़ी । बाद में भोकाल को उसके हठ के सामने हारकर अपनी पत्नी का दर्जा देना पड़ा। दूसरी और विवाह से ठीक पहले किलारी योद्धा तुरीन का अपहरण कर लेता है और इसी का लाभ उठाकर महाराज विकासमोहन की भतीजी रूपसी  जो भोकाल से विवाह करना चाहती थी ,  तुरीन के कपड़े पहनकर घूंघट ओढ़कर भोकाल के साथ साढ़े तीन फेरे ले लेती है किंतु पड़ोसी देश की रानी चंदा के अचानक आ जाने के कारण रूपसी का भेद खुल जाता है। और बाद में भोकाल तुरीन से विवाह करता है किंतु सामाजिक परिस्थितियों तथा रूपसी के दबाव में आकर उसे रूपसी को भी अपनाना ही पड़ता है। इस प्रकार भोकाल की तीन पत्नियां हैं। भोकाल को रूपसी से एक पुत्र तथा सलोनी से एक पुत्र व एक पुत्री है जबकि तुरीन से भोकाल को एक पुत्र की प्राप्ति हुई । हालांकि काल वशीभूत भोकाल के पुत्र अक्सर उसी की जान की दुश्मन बने रहे।

मित्र एवं दुश्मन

जैसे के प्रत्येक नायक के साथ होता है उसके कुछ मित्र होते हैं और उनसे कहीं ज्यादा दुश्मन जो नायक के दुश्मन ना होकर सत्य और मानवता के दुश्मन होते हैं , वैसे ही भोकाल ने भी कुछ अच्छे मित्र और कुछ दुर्दांत दुश्मन कमाए हैं। भोकाल के मित्रों में प्रमुख भुजंग देश का महाशक्तिशाली दतांक धारी अतिक्रूर , प्रोका ग्रह का निवासी सम्मोहन सम्राट शूतान , महान धनुर्धर धनुषा , विकासनगर के सेनापति प्रवीण सिंह , दिव्यास्त्र खडग धारक वेणु वृन्दावनिया , महान मंत्रसाधक तिल्ली और पीकू पकोड़ियां प्रमुख हैं । दूसरी ओर सदैव भोकाल के प्राणों के प्यासे कुछ दुश्मन भी हैं जो सोते जागते हमेशा भोकाल की मृत्यु के ही स्वप्न देखते हैं। इनमे प्रमुख हैं महाराज विकासमोहन का भाई और रूपसी का पिता विवेकमोहन उर्फ कुबड़ा शैतान , विकासनगर का राजगुरु ऋषि योगेश्वर , विश्व के दुर्गम स्थानों से भी वापस आ चुका दुर्गमा , महान ज्योतिष का ज्ञाता कालकुंडली , ऋषि गुंटूर की पत्नी गुरुमाता , गुरुमाता का शिष्य छदम , चंदानगरी की रानी चंदा , अपने पुत्रों की मृत्यु के प्रतिशोध में जल रहा गुणीक  , तिलिस्मा के रचयिता महान खजूरा का पुत्र जादूगर फूचांग और समस्त पापशक्तियों के अनुयायी। इन सबके विषय मे भी आने वाले समय मे मैं विस्तार से बताने का प्रयास करूंगा।

गहन उद्गम एवं नवीन प्रयोग

जैसा कि पूर्व में बताया के महागुरु भोकाल का नाम पुकारने पर आलोप में चमत्कारिक रूप से महागुरु भोकाल की आत्मा प्रवेश कर जाती है तथा उसको दिव्यास्त्र ढाल एवं तलवार भी प्राप्त हो जाते हैं , उसके उद्गम के विषय में भी ऊपर बताया जा चुका है किन्तु राज कॉमिक्स द्वारा कुछ नवीन कॉमिक श्रंखलाओ में भोकाल के उद्गम को दुसरे तरीके से दिखाया है जिसके विषय में हम  इस सेगमेंट में चर्चा करेंगे | दोस्तों वर्ष 2009 में तरुण कुमार वाही जी ने भोकाल शक्ति के उद्गम के विषय में एक कथा श्रंखला की शुरुआत की प्रथम भोकाल के नाम से जिसमें भोकाल शक्ति का जन्म एवं परियों के जन्म के बारे में विस्तार से बताया गया | सृष्टि रचना के समय छोटे मोटे गृह पिंडो एवं अशुद्धियों का भक्षण करने हेतु स्याहविवर का निर्माण किया गया किन्तु वो हरे भरे और जीवन वाले ग्रहों के भक्षण में लग गया तब सप्तऋषियों ने उस के मुख पर बंधन लगा दिया किन्तु उसने अपनी पुत्रियों के साथ षड्यंत्र रचकर 7 संतानों की प्राप्ति की जो सप्तऋषियों के तेज से जन्मे थे | स्याहविवर के सातों नातियों पर भी स्याहविवर का तामसी प्रभाव था जिसके चलते सप्तऋषियों ने उन्हें शाप दिया के जब भी वो अपनी शक्तियों का प्रयोग करेंगे उनका अमरत्व समाप्त हो जायेगा और सामान्य जीवों की भांति उन्हें भी वृद्धावस्था प्राप्त होगी | स्याहविवर ने अपने नातियों को फिर एक कुलक्षित उपाय बताया के अगर वो देव कन्याओ से विवाह कर लें तो उन्हें संतान प्राप्ति भी हो जाएगी और उनका अमरत्व भी बना रहेगा , देव कन्याओ को राक्षसों से बचाने के लिए ब्रह्मा जी ने सूर्य की सात रश्मियों से परियों का निर्माण किया और बताया कि परियां केवल कन्याओ को ही जन्म दें पाएंगी इस से राक्षसों की योजना विफल हो जाएगी किन्तु देव पुत्रों को परियों को यूँ बलि का बकरा बनाया जाना पसंद नहीं आया और उन्होंने ब्रह्मा जी की सृजन शक्ति चुराकर एक नए लोक की स्थापना की जिसमे वो परियों को ले गए | राक्षसों के विनाश के लिए उन्होंने बची हुई सृजन शक्ति से ब्रह्माशय का निर्माण किया जिसने राक्षसों के विनाश हेतु अनेक शक्तियों बनायीं किन्तु अंत में सातों परियों और सातों देवपुत्रो के संयोग और उनकी शक्तियों से मिलाकर एक शक्ति का निर्माण किया जो कहलाया भोकाल !

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किन्तु इस प्रयास में देवपुत्र शक्ति विहीन हो चुके थे और परियां केवल कन्याओं को जन्म देने में सक्षम थी तो देवऋषि नारद के सुझाव पर परी उदावसु ने छल से ऋषि सत्यज्ञान का तेज अपने गर्भ में धारण कर लिया किन्तु  सत्य का आभास होते ही ऋषि सत्य ज्ञान ने शाप दिया के जिस छल से तुमने पुत्र प्राप्त किया है उसी प्रकार नियत जन्म जन्मान्तर तक तुम्हारे वंशजो को छलेगी तथा भोकाल शक्तिधारक सदैव अपनी मात्रभूमि के स्थान पर पृथ्वी की सेवा करेंगे | और इस प्रकार जन्म हुआ प्रथम भोकाल का जिसने स्याह विवर के नाश हेतु अपना समस्त यौवन एवं तेज देवताओं को दान कर दिया , इसी बलिदान के कारण भोकाल को महागुरु भोकाल की उपाधि से अलंकृत किया गया | तो दोस्तों ये थी प्रथम भोकाल और भोकाल शक्ति की उत्पत्ति गाथा अब आते हैं अपने आलोप उर्फ़ भोकाल की तरफ , चूंकि परियां केवल कन्याओं को जन्म दे सकती थी तो अगले भोकाल शक्ति धारक के लिए महागुरु भोकाल को खोज थी किसी श्रेष्ठ वीर की जो पृथ्वीवासी हो और जिसका तेज किसी परी को धारण कराके पुत्र प्राप्ति की जाए इसी क्रम में परियां जब पृथ्वी पर जल विहार कर रही थी तो उन पर निगाह पड गयी राजा आर्यवीर की जो देखते ही रानी परी पर दिल हार बैठे और उन्होंने अपने मित्र और सेनानायक युधेष्ठ्वीर को अगले दिन अपना प्रेम निवेदन लेकर परियों के पास भेजा जहाँ परियां एक राक्षस से जान बचाने के लिए मदद की पुकार कर रही थी , युधेष्ठ्वीर एक महायोद्धा थे उन्होंने परियों को संकटमुक्त किया और रजा आर्यवीर का सन्देश परी को दिया | परियों ने कल अपना निर्णय सुनांने के लिए कहा और वापस परीलोक लौट गयी किन्तु रानी परी को युधेष्ठ्वीर भा चुका था और भोकाल शक्तिधारक पुत्र के लिए उन्हें एक ऐसे ही महावीर की आवश्यकता थी , अगले दिन महागुरु भोकाल का दिया एक ताबीज उन्होंने युधेष्ठ्वीर के गले में डाल दिया जिसके कारण उसकी स्मृति जाती रही और परियां उसको अपने साथ ले गयी | युधेष्ठ्वीर और परी अवनिका से एक पुत्र की उत्पत्ति हुई जो कालांतर में भोकाल शक्ति का धारक बना और विकासनगर की सेवा में सदैव लिप्त रहा | एक दिन बाल्यकाल में आलोप ने युधेष्ठ्वीर के गले से ताबीज खीच दिया जिसके खींचते ही युधेष्ठ्वीर को ज्ञान हुआ के वो क्या अनर्थ कर बैठा है और उसने परीलोक में आतंक मचा दिया तब महागुरु भोकाल ने युधेष्ठ्वीर की किसी तिलिस्म में कैद कर दिया किन्तु ऋषि सत्यज्ञान के शाप के साथ साथ युधेष्ठ्वीर ने भी शाप दिया के यह पुत्र परीलोक की नहीं बल्कि पृथ्वी की रक्षा करेगा | उपरोक्त विवरणों को विस्तार से तथा रोमांचक तथ्यों को जान ने के लिए पढ़ें ( प्रथम भोकाल सीरीज , धिक्कार , अंतर्द्वंद ) 

गुण एवं दोष 

कॉमिक्स अधिकतम कल्पनाओं पर आधारित होती हैं किन्तु फिर भी पाठको के मन में कुछ प्रश्न अवश्य रह जाते हैं के लेखक ने ऐसा क्यूँ किया या ऐसा करते तो अच्छा रहता और इन प्रश्नों से कोई भी कॉमिक हीरो अछूता नहीं है | भोकाल के विषय में अगर कहें तो सर्वप्रथम उसके विवाह की चर्चा होना बड़ी आम बात है क्योंकि उसके दो विवाह पूर्णतः उसकी मर्जी के बिना और बिना ठोस आधारों के ही करा दिए गए थे , जैसे के किसी ने किसी की प्रतिमा बनाकर उसकी पूजा की और वो उसको पत्नी स्वीकार कर ले थोडा अजीब लगता है किन्तु एक महानायक कभी भी किसी की भावनाओ को ठेस नहीं पहुचाते इसलिए भोकाल ने सलोनी को स्वीकार कर लिया लेकिन रूपसी को स्वीकार करने का कारण केवल सामाजिक दबाव ही रहा | अब चलते हैं भोकाल की संतानों की तरफ तो जो संतान भोकाल को उसकी प्रिय पत्नी और उसके प्रथम प्रेम तुरीन से मिली थी उसके साथ हुए अन्याय से सभी कॉमिक्स प्रेमी अवगत हैं और सबके मन में दुःख है के कम से कम एक पुत्र तो उसके पास होना ही था उसके प्रथम प्रेम की निशानी , वहीँ दूसरी ओर तुरीन को कई बार मारना उसकी वापसी करना भी कुछ अतिश्योक्ति सी लगी | सलोनी और रूपसी को शुरुआत में भोकाल ने पत्नी का दर्जा नही दिया था किन्तु फिर भी उनसे ३ संताने होना अजीब लगा हालाँकि बाद में अत्याचारी कॉमिक में बताया था के भोकाल माया के मायाजाल में फंसा ऐसा कर रहा था लेकिन जिन कॉमिक्स में सलोनी और रूपसी को बच्चे हुए थे उन कॉमिक्स में कहीं माया का नाम भी नहीं था और लेखक इस तथ्य का खुलासा करना भूल गए | उसी प्रकार शूतान का आजतक स्पष्ट नहीं हो पाया कि वो जीवित है या मृत क्योंकि कई बार उसकी वापसी दिखाई है और कई बार मृत्यु | लेकिन जो भी भोकाल एक ऐसा नायक है जो राजा महाराजाओ के युग से सम्बन्ध रखने वाले अन्य नायको की तुलना में सबसे ज्यादा पसंद किया गया | भोकाल की कॉमिक्स का इंतज़ार बच्चे बड़ी बेसब्री से किया करते थे | भोकाल चूंकि परीलोक से संबंध रखता है और परियां अत्यंत कोमल होती हैं किन्तु भोकाल ने जिस अदम्य साहस और इच्छाशक्ति से समस्त समस्याओं का सामना किया है वो हर किसी के बस की बात नहीं | अगर हम फिल्मो की बात करें तो हालाँकि भोकाल पर फिल्में बनाने में खर्च तो ज्यादा आएगा किन्तु शायद उसकी कोई भी कहानी ऐसी नहीं जिस पर फिल बने और हिट ना हो | आशा है हम भोकाल को निकट भविष्य में बड़े परदे पर भी देख पाएंगे | भोकाल की कुछ ऐसी कॉमिक्स के नाम मैं बताना चाहूँगा जो मुझे व्यक्तिगत रूप से बहुत पसंद आई अगर आप पढेंगे तो आपको भी अवश्य पसंद आएँगी जिनमे चमत्कारी भोकाल , महागुरु भोकाल (ओल्ड ) , शक्ति शाली , महायोद्धा , नरक जाल , युद्ध सीरीज जिनमे GENL-0680 TILISMA
GENL-0687 KUBDA SHAITAAN
GENL-0697 KAUN BANEGA RAJA
GENL-0702 YUDH JEETUNGA MAIN
GENL-0707 BHOKAAL NAHIN HAREGA
SPCL-0070 BAUNA BHOKAAL
GENL-0723 BHOKAAL GAYAB
GENL-0727 JAL UTHA REGISTAAN
GENL-0736 RET KA BHOKAAL
SPCL-0076 SHAITAN BETA
SPCL-0077 VIKAT VYUHA
SPCL-0082 YUDH NAHI LADOONGA
SPCL-0083 BUDDHI PANSA प्रमुख हैं , इनके अतिरिक्त भोकाल की शादी सीरीज तथा महारावन श्रंखला तो विश्वविख्यात हैं | 

यदि आपको ये आर्टिकल पसंद आया तो अपने मित्रों के साथ शेयर करें , यदि आपको कहीं किसी तथ्य में कमी दिखाई दि तो कृपया कमेंट के माध्यम से बताएं तथा यदि आपके पास भोकाल के विषय में कुछ एनी रोचक जानकारी है जो हम यहाँ लिखना भूल गए हैं तो अवश्य अवगत कराएं | 

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23 Comments on “Bhokal- An Ultimate Undefeated Hero”

  1. जल्दी से जल्दी इसे पूरी करिये, इतना पढ़ने के बाद इसे पूरी पढ़ने की जिज्ञासा जागृत हो चुकी है। हालांकि भोकाल कभी मेरा फेवरेट नहीं रहा लेकिन जिस तरह से आप ने इस आर्टिकल (एक तरह से हमारे हिंदी पाठ्यपुस्तकों के हिसाब से सम्पूर्ण जीवन परिचय) को लिखा है, अब भोकाल के बारे में जानने की जिज्ञासा और बढ़ गयी है। कृपया इस लेख के अंत में भोकाल की ऑल टाइम टॉप 20 कॉमिक्स जरूर डालें जो आप को पर्सनली बहुत अच्छी लगीं हों।

    आगे और भी हीरोज जैसे गमराज, फाइटर टोड्स, तिरंगा इत्यादि का भी सम्पूर्ण जीवन परिचय टाइप्स आर्टिकल अवश्य प्रस्तुत करें।

  2. बहुत अच्छा आर्टिकल लिखा है । भोकाल के बारे एक एक बात डिटेल में लिखा है ।बेहतरीन लेख है।
    काफी मेहनत की है ।
    अब इसे जल्द से जल्द पूरा करिये।

  3. i like bhokal alot.. turin was my all time fav . dont know use kyu mar diya .. i still remember both of them in comics like tantra and khatro ki dharti ..

  4. भोकाल के बारे में तो ज्यादा जनता नही था मैं क्योंकि उसका कॉमिक्स मैंने ज्यादा पढ़ा भी नही है लेकिन यहां पर ये आर्टिकल आने के बाद पूरी जानकारी मिली मुझे ।
    बहुत ही बेहतरीन तरीके से आपने इसे संजोया है आपका बताने का तरीका मुझे बहुत अच्छा लगा। क्योंकि सुरु से अंत तक जितने भी चीज भोकाल के साथ घटित हुए सब आपने 1 सीक्वेंस में बताया आपने पढ़ने में बहुत अच्छा लगा।
    इसे जल्द पूरा करें और ऐसे ही सारे सुपर हीरो पर कुछ ऐसी ही सुपर डुपर हिट आर्टिकल ले के आइये।

  5. बहुत अच्छे से लिखा है आपने भोकाल के बारे में ।
    मज़ा आया पढ़ने में ।

  6. बहुत अच्छा लिखा है ।
    प्रभावशाली

    कुछ टाइपिंग की त्रुटियां हैं ।

    बाकी सब अच्छा है।

    लगभग सब समेत लिया आपने इस आर्टिकल में ।

    1. धन्यवाद् विरक्त जी और जो टाइपिंग की त्रुटियाँ हैं उन्हें भी बताएं ताकि ठीक कर सकूं

  7. बहुत ही बेहतरीन ,
    जो लोग भोकल के बारे मैं नहीं जानते थे उन्हें अब काफी कुछ पता चल गया होगा।
    आशा करते है कि आने वाले समय में और भी नायको के बारे में पता चलेगा, जो कही खो से गए हैं ।।।

    बहुत बढ़िया ।।।।

    रवि जी ।।।।।

    1. dheeraj ji poori koshish rahegi jo rangeen duniya comics ki humne apne bachpan me sajayi thi uski kuchh jhalak prastut karke yahan phir se kuchh rangeen lamhe sabhi ke jeewan me bhar saku .
      sehyog prarthneey hai

  8. बहुत बढिय़ा।
    बहुत लम्बा समय हो गया भोकाल की कामिक्स को पढें।
    आप ने फिर उत्साह जगा दिया।
    आप का प्रयास बहुत सराहनीय है।

    धन्यवाद

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