Dark Realms Part 10

DARK REALMS

PART 10.

समीर आयामद्वार से अंदर प्रवेश करता है और एकदम भौचक्का रह जाता है। वह स्वर्ग के मुख्य द्वार पर खड़ा होता है और वहाँ पर दो दस फुटे द्वारपाल भी खड़े होते हैं।

पहला द्वारपाल-मानव! यहाँ पर!

समीर-मेरा नाम समीर है और मुझे अनिश्चितकाल के लिए देवराज इंद्र का पद सँभालना है।

दूसरा द्वारपाल-हमें तुम्हारे बारे में पता है पर हम सिर्फ एक वज्रधारी को ही स्वर्ग के सिंहासन पर बैठा सकते हैं।

…………………………………….समीर अपने हाथ से देवराज इंद्र का दिया वज्र निकालकर दिखाता है। द्वारपाल भौचक्के रह जाते हैं। वह समीर को अंदर ले जाते हैं। वहाँ देवता और अप्सरायें विचरण कर रहे होते हैं और बड़े भव्य भवन होते हैं जिनकी कल्पना भी पृथ्वी पर नहीं की जा सकती।

द्वारपाल-जिस मानव की आप लोग बात कर रहे थे,उसका आगमन हो चुका है।

…………………………………..सभी देवता समीर को देखने लगते हैं,तभी यमराज सामने आते हैं।

यमराज-तो तुम हो वो परमशक्तिधारक मानव।

समीर-और आप हैं वो देवता जिसने आयामद्वार को खोला।

यमराज-मैं मंत्रबाध्य था।

समीर-इंद्र भी मंत्रबाध्य थे पर उन्होंने मुझे नहीं मारा।

यमराज-वो मार नहीं पाये क्योंकि अभी तुम्हारे पास परमशक्ति है।

समीर-अब बीती बातों को याद करने का कोई अर्थ नहीं। मैं फिलहाल यहाँ का कार्यभार सँभालूँगा। मुझे इंद्र ने यहाँ की स्थिति से अवगत कराया है।

वरूणदेव-वो तो ठीक है पर आपको हमारा शासन विधिवत तरीके से अपने हाथ में लेना होगा। आपको ‘गरुण’ को पराजित करना होगा।

………………………………….तभी एक ज़ोरदार आवाज आती है और एक विशालकाय पक्षी नीचे उतरता है।

गरुण-मैं हूँ गरुण!तुम एक परमशक्तिधारी अवश्य हो पर हो तो एक मानव ही। अगर तुमको स्वर्ग का कार्यकारी शासक बनना है तो मुझसे युद्ध करना होगा।

समीर-ठीक है। अगर यही तरीका है तो यही सही।

…………………………………फिर एक विशाल रणक्षेत्र में दोनों उतरते हैं। देवता कुछ गज की दूरी से देख रहे होते हैं। गरुण बहुत तेज गति से अपने पंख हिलाता है और समीर पीछे सरक जाता है फिर समीर उस पर वार करता है। गरुण बहुत शक्तिशाली था पर समीर के पास परमशक्ति के साथ इंद्र की दी हुई मुख्य शक्तियाँ भी थीं जिसके कारण गरुण अधिक देर उसके सामने टिक नहीं पाया। समीर के एक प्रचंड वार से वो एक तरफ जा गिरा।

गरुण-तुम अविश्वस्नीय रूप से शक्तिशाली हो मानव। मैं तुमको स्वर्ग का कार्यकारी शासक घोषित करता हूँ।

…………………………………देवता तालियों की गड़गड़ाहट से इस फैसले का स्वागत करते हैं। तभी वहाँ पर चित्रगुप्त आते हैं।

चित्रगुप्त-राक्षसलोक और स्वर्ग की शत्रुता बहुत पुरानी है पर भस्मासुर के स्वतंत्र होने के बाद उन राक्षसों को बहुत हौसला मिल गया था पर जब आपने उसका वध कर दिया तो राक्षस बुरी तरह बौखला गये और उन्होंने “कालजीवियों”का आह्वान किया।

समीर-ये कालजीवी कौन हैं।

चित्रगुप्त-ये पृथ्वी के प्रथम निवासी थे। जब पृथ्वी आग का गोला थी तब कालजीवी वहाँ रहते थे। ये औसतन आठ फुट के लंबे काले जीव हैं जो पृथ्वी में आये परिवर्तनों के कारण वहाँ से चले गये थे। अब राक्षसों ने उनसे संपर्क कर लिया है और वो स्वर्ग पर हमला करने आ रहे हैं। सुना है कि अब उनकी नज़र पृथ्वी पर फिर से है क्योंकि प्रदूषण के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है और वातावरण फिर से उनके अनुकूल बन रहा है।

समीर-पृथ्वी तक नहीं पहुँच पायेंगे कालजीवी। मैं उनकी कब्र यहीं बना दूँगा।

 देवराज इंद्र धरती पर सागर,रवि और प्रशांत के साथ एक टेबल पर बैठे होते हैं।

इंद्र-ये वस्तु तो बहुत स्वादिष्ट है, इसे कहते क्या हैं?

सागर-बर्गर कहते हैं।

इंद्र-इसकी व्यवस्था मैं स्वर्ग में भी करुँगा।

प्रशांत-तो..समीर इस वक्त स्वर्ग का शासन सँभाल रहा है और आप हमारे साथ बैठकर बर्गर खा रहे हैं।

इंद्र-ओह हाँ!उस बारे में…मुझे रक्तबीज को ढूँढना है और उससे वो ताम्रपत्र लेना है।

सागर-तो ..क्या उस ताम्रपत्र की मदद से आप वापस अपना ओहदा पा सकते हैं?

इंद्र-हाँ और आयामद्वार…जिसे तुम लोग DARK REALM कहते हो ,उसे भी हमेशा के लिए बंद कर सकता हूँ।

………………………………..एक वीरान खंडहर में रक्तबीज और एक भयानक राक्षस आपस में बात कर रहे होते हैं।

रक्तबीज-आपने मुझे याद किया राक्षसराज?

राक्षसराज-हाँ! स्वर्ग का शासन अब उस मानव के हाथ में आ गया है और अब उसके पास परमशक्ति के साथ साथ इंद्र की शक्ति भी है इसलिए मैं कालजीवियों का आक्रमण पृथ्वी पर प्रत्यक्ष रूप से करवा रहा हूँ। अब स्वर्ग पर आक्रमण करने का कोई अर्थ नहीं क्योंकि भस्मासुर का हश्र मुझे पता है।

रक्तबीज-कालजीवी! क्या उन जीवों का सच में अस्तित्व है? मुझे तो वे काल्पनिक लगते थे।

राक्षसराज-काल्पनिक तो मानव हमें भी मानते हैं तो क्या हम वास्तविक नहीं हैं?

रक्तबीज-एक तो मेरी चाल उल्टी पड़ गयी ,मुझे लगा था कि इंद्र उस लड़के को खत्म कर देंगे पर उल्टा इंद्र की शक्ति उसे मिल गयी।

राक्षसराज-पर इंद्र अगर स्वर्ग में नहीं है तो वो है कहाँ?

इंद्र-मैं यहाँ हूँ नीच राक्षसों!

रक्तबीज-इंद्र!ये..ये मानवभेष में..और यहाँ पृथ्वी पर?

राक्षसराज-लगता है इसकी शक्ति क्षीण पड़ गयी है,इसे अभी समाप्त कर देते हैं।

………………………………..राक्षसराज और रक्तबीज अपनी आँखों से किरण फेंकते हैं पर इंद्र पर असर नहीं होता।

इंद्र-मैं इस वक्त देवराज नहीं हूँ पर इंद्र हमेशा रहूँगा। मैं मर नहीं सकता क्योंकि देवता अमर होते हैं।

……………………….तभी जोरदार बिजली कड़कने लगती है। रक्तबीज और राक्षसराज घबरा जाते हैं।

रक्तबीज-तुमने हमें ढूँढा कैसे?

प्रशांत-हमारी सहायता से।

रक्तबीज-तो इसमें तुम योद्धाओं का हाथ है।

इंद्र-मेरे मानव मित्रों की संचार व्यवस्था बहुत अच्छी है। इन्होंने GPS नाम की वस्तु से विशाल का नंबर ट्रैक किया।

प्रशांत-तुमने विशाल की लाश को तो ठिकाने लगा दिया पर उसकी गाड़ी को भूल गये जिसमें उसका फोन रखा था। हम विशाल का नंबर ट्रैक करके इस खंडहर तक पहुँच गये।

राक्षसराज-मैं अभी युद्ध की स्थिति में नहीं हूँ पर जल्दी ही कालजीवी आयेंगे तब देखते हैं कि तुम उनसे कैसे निबटते हो?

रक्तबीज-नहीं राक्षसराज!रुक जाइये!

…………………………….राक्षसराज अंतर्धान हो जाता है। इंद्र रक्तबीज की ओर देखता है।

इंद्र-तम्हारे मालिक तो बड़े बहादुर निकले।

रक्तबीज-आ..आपको क्या चाहिए?

इंद्र-ताम्रपत्र।

………………………….रक्तबीज चुपचाप इंद्र को ताम्रपत्र दे देता है।

इंद्र-तुम्हारे कारण मैं बहुत परेशान हुआ रक्तबीज। मेरा पद छिन गया और मेरी आधी शक्तियाँ भी। तुम भले ही राक्षसराज और भस्मासुर की तरह शक्तिशाली ना सही पर उनसे अधिक कुटिल हो,सही मायने में तो तुम उनसे अधिक खतरनाक हो इसलिए तुम्हारा वध आवश्यक है।

…………………………………..यह कहते हुए इंद्र के एक इशारे पर कड़कती हुई बिजली आती है और रक्तबीज राख का ढेर बन जाता है।

END OF PART 10

Dark Realms Part 9

DARK REALMS PART 9. रक्तबीज मंत्र को संपन्न करता है और एक प्रकाश होता है, फिर वो सामने देवराज इंद्र को खड़ा पाता है। इंद्र-ये हम देवताओं का बड़ा दुर्भाग्य …

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli 

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2 Comments on “Dark Realms Part 10”

  1. वाह बहुत खूब एक और राक्षस राक्षसराज और रक्तबीज भी मारा गया और कालजीवी ये नया कौन आ गया इस कहानी में पल पल राज खुल रहे हैं और पल पल कुछ सवाल भी उठ रहे हैं।
    और ये पार्ट मुझे सबसे बेहतरीन लगा।

  2. Kaljeevi ek nayi prajati ka aagman hone ko h aur raktbeej Mara gya, predict karna mushkil ho raha ki kahani me aagey kya hoga, very good

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