Dark Realms Part 2

Dark Realms
Part 2

दो व्यक्ति एक बड़े से लोहे के गेट के सामने खड़े होते हैं जिसमे से एक गंजा है, और उसने काली जैकेट पहनी हुई है, और दूसरा लंबा और गोरा है.
पहला- तुम्हे पक्का पता है कि गेट को खोला गया था?
दूसरा -मैं पागल नही हूं जो दो बजे रात में तुमको फोन करके बुलाउंगा !
पहला – क्या ये किसी इंसान की हरकत हो सकती है?
दूसरा – पता नही, पर मुझे लगता है कि ये “उनमें” से कोई था।
पहला – जो भी हो, अभी हमें छुपकर रहना होगा. तुम किसी होटल में रुक जाना और मेरे काॅल का इंतजार करना ।

दोनो वहां से चुपचाप चले जाते हैं।

तीसरे दिन सुबह के आठ बजे सागर और समीर तैयार हो रहे होते हैं कि नौकर उनका नाश्ता लेकर रूम में ही आ जाता है

सागर – वाह ! ये अच्छा है, वरना पिताजी तो हमेशा डायनिंग टेबल पर ही बुला लेते हैं।
समीर -तुम्हारा पेपरवर्क होने में कितना समय लगेगा?
सागर – सिर्फ पेपरवर्क ही नही होना, यहां मुझे लेबर भी तो चाहिए ताकि काम जल्दी शुरू हो । मैं थोड़ा काम निपटा लेता हूं , तबतक तुम यहां के बुक स्टाॅल ही हो आओ जो हमने आते हुए देखा था ।
समीर- ठीक है, तुम काम निपटा लो, कुछ बात हो तो काॅल कर देना ।

समीर नाश्ता करके रूम से निकल जाता है. विक्रम का बंगला इस समय भी काफी भयानक लग रहा था । बाहर निकलते समय नौकर समीर को एक अजीब तरह से देखता है ।समीर को अजीब लगता है, पर फिर वो जल्दी ही बुक स्टाॅल पर आ जाता है, वहां पर सभी किताबे अच्छे से लगी होती है और गोल टेबल के अंदर एक लड़की बैठी होती है।

समीर -चलो, यहीं से कुछ नाॅवल ले लेता हुं, क्या पता भाई को कितना टाइम लगेगा, अंस भूतहा महल में बोर हो जाउंगा ।
निकिता- एक्सक्यूज मी, आप लोग विक्रम जी के बंगले पर रहते हैं न!
समीर – जी, एक्चुअली मेरे भाई का कंस्ट्रक्शन बिजनेस है तो उनका बंगला देखने आए थे।
निकिता – अजीब बात है, क्योंकि मैंने न तो कभी विक्रम जी को ज्यादा लोगों से मिलते देखा है और ना ही ये सोंचा था कि वो बंगला कभी बेचेंगे ।
समीर – आपका नाम?
निकिता- निकिता।
समीर -तो आप यहां बचपन से रही हो, इस locality में..?
निकिता – जी, मैं यहीं की हूं।
समीर -तो ये विक्रम जी हमेशा से ऐसे ही थे, ड्रैकुला की तरह रहने वाले?
निकिता (हंसती हुई ) -नही, एक्चुअली वो बहुत ही हंसमुख इंसान थे, पर ऐसा मैंने सिर्फ यहां के लोगों से सुना है।
समीर – ओह! ऐसा लगा तो नही, शायद कोई ट्रेजडी हो गई हो उनकी लाइफ में,well..it’s nice to meet you.

इस conversation के बाद समीर कुछ किताबें खरीदता है और चला जाता है ।वहां पर एक नौकर खड़ा था, समीर उसे बुलाता है।
समीर – बात सुनो यार, ये कल से आपके साहब के दर्शन नही हुए।
नौकर – मालिक, उनके दर्शन तो हमे ही कभी-कभी होते हैं, हमेशा कमरे में ही रहते हैं। पर दिल के अच्छे हैं, पेमेंट में कोई ढील नही करते ।

समीर फिर अपने कमरे में जाकर उपन्यास पढ़ने लगता है ।

तीसरे दिन …. सुबह के तीन बजे।

सागर – और साहबजादे, ले आए किताबे तुम अपनी?
समीर – यार! तुम किधर रह गये थे?
सागर – अरे मत पूछो, एक तो यहां लोकल लेबर ढूंढना भी मुश्किल काम है, अच्छा! मैं जरा मिस्टर सारस्वत से मिलकर आता हूं।

इसके बाद सागर विक्रम सारस्वत के रूम में चला जाता है ।विक्रम कुर्सी पर किसी मुर्दे की तरह बैठा होता है, और उसके आते ही हमेशा की तरह ठंढे आवाज में पूछता है-

विक्रम – क्या सब ठीक तो है, नौकर आपके ख्याल तो रख रहे हैं न..!
सागर – जी बहुत अच्छी व्यवस्था है। मैं इसलिए आया था कि पूछ सकुं कि आपको पैसे कितने दिन में चाहिये?
विक्रम – आप कितने दिन में दे सकते हैं?
सागर – एक्चुअली मैंने अभी डैड को फोन किया था, तो वो बोले कि कुछ जगहों पर पैसा फंसा हुआ है, पर ज्यादा समय नही लगेगा। 4-5 दिन ही लगेंगे।
विक्रम – अच्छी बात है, कोई और समस्या?
सागर – जी नहीं ! धन्यवाद ।(सागर रूम से निकल जाता है )

विक्रम (सागर के जाने के बाद चिंता भरी आवाज में) – शुरुआत हो चुकी है ।

Story will be continued in next part…..

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli

 

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6 Comments on “Dark Realms Part 2”

  1. Samvart bhai kahani bahut achhi ja rahi hai aur intresting bhi hoti ja rahi hai let’s see the next part ki aap aage kya late ho

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