Dark Realms Part 4

Dark Realms

Part 4

DAY 4 -12:00 PM.

समीर-मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा,तुम शुरू से सब जानते थे सागर? सागर-हाँ , पर मुझे कभी नहीं लगा कि तुमको इसमे involve होना पड़ेगा। समीर-यानी कि अगर ये सब आफत नहीं होती तो मुझे मेरी family history कभी पता ही न चलती। सागर-तुम्हारी protection के लिए ज़रूरी था और पिताजी को कभी नहीं लगा कि………. ……..

 

समीर -…….कि उनका नालायक बेटा सच handle कर पायेगा। तुमने मुझे कैसे नहीं बताया सागर?तुम तो कम से कम मुझ पर थोड़ा भरोसा कर सकते थे।अब बता यहे हो जब एक राक्षस already बाहर आ गया।

रवि-sorry for interruption , पर ये बहस बाद में भी हो सकती है फिलहाल तो यहाँ से निकलते हैं। …………………………………फिर चारों लोग गाड़ी में बैठ जाते हैं।

नमन गाड़ी चला रहा होता है।

समीर-एक मिनट….क्या हम हवेली वापस नहीं जा रहे?

नमन-सवाल ही पैदा नहीं होता। हमने तुम्हारे मेजबान पर रिसर्च की है,और जानना चाहोगे वो कौन है?

समीर-बताओ। नमन-विक्रम ही है रक्तबीज।

समीर-क्या ?यानी कि हम एक राक्षस के साथ रह रहे थे?और ये बात तुम मुझे कब बताने वाले थे सागर?

सागर-अरे शांत हो जाओ यार!ये बात मुझे भी अभी पता लगी है,तुमको ये कैसे पता नमन?

नमन-अंकल के कहने पर मैं और रवि तुमको आगाह करने ही तो आये थे। बाद में यहाँ आकर पता लगा कि DARK REALM का गेट खोला गया था।अंकल को तो तभी शक हो गया था जब इतनी सस्ती ज़मीन का offer आया,फिर थोड़ी research की तो पता चला कि 1985 में विक्रम को जबरदस्त heart attack आया था,उसके बचने की कोई possibility न होते हुए भी वो न सिर्फ बचा बल्कि खुद को समाज से isolate कर लिया और तब से लेकर अब तक इसकी age में भी बहुत बदलाव नहीं आया।

समीर-तो इससे क्या साबित होता है?

नमन-दर असल रक्तबीज की एक खूबी ये भी है कि वो खुद की शारीरिक संरचना को दूसरी body के अनुरूप ढाल सकता है।

समीर-और आसान भाषा में?

नमन-वो खुद को दूसरे की exact copy बना सकता है। उसके हाथ अच्छा मौका लगा, जब असली विक्रम उसी वक्त heart attack से मर गया, उसने उसकी जगह ले ली। सोचो इससे अच्छा और क्या हो सकता है?उसे एक अमीर आदमी की body मिल गयी जिससे वो शिमला में ही रहकर portal खोलने में प्रयासरत रहा ।

रवि-जिसमें उसको कुछ हद तक success भी मिली, वो एक राक्षस को बाहर निकालने में सफल हो गया।

सागर,समीर,रवि और नमन को गाड़ी में बैठे दो घंटे हो चुके थे।

रवि-और कितना दूर है?

नमन-बस पहुँच गये।

सागर-तुम काफी देर से शांत बैठे हो समीर।

समीर-मेरा दिमाग इस वक्त काम नहीं कर रहा है,जो चीजें आज तक movies और comic books में देखी थी वो आज सामने हैं।

सागर-मैं समझ सकता हूँ कि तुमको अचानक ये पता चलने से shock लगा है। मैंने तो जब से होश सँभाला है, mom और dad को इन राक्षसों से लड़ते देखा है और एक दिन रक्तबीज के एक गुंडे के हाथों dad के एक अच्छे दोस्त की हत्या हो गयी,तब से dad एकदम टूट गये। फिर तुम पैदा हुए , तो यह तय किया गया कि तुमको हमेशा सुरक्षित रखा जायेगा और हमारे गुप्त जीवन की तुम्हें खबर भी नहीं होगी। फिर रक्तबीज की activities भी कम हो गयीं बीच में, तो कभी ऐसी नौबत आई ही नहीं।

रवि-लो, बातों बातों में हम पहुँच भी गये। ………………………….गाड़ी एक बड़े से cottage के सामने जाकर रूकी। सब लोग गाड़ी से उतरकर अंदर चल दिए। अंदर प्रशांत और संगीता पहले से मौजूद थे।

सागर(चौंकते हूए)-Dad आप!

प्रशांत-आना पड़ा बेटे,पाषाणदैत्य का आजाद होना कोई छोटी बात नहीं है।

दूर पहाड़ियों पर एक 10 फुट का बड़ा सा दानव खड़ा होता है और उसके साथ खड़ा होता है विक्रम।

विक्रम-स्वागत है आपका महाराक्षस।

पाषाणदैत्य-इतनी सदियों के बाद ऐसी आजादी,तुम कल्पना भी नहीं कर सकते कि मैं कितना प्रसन्न हूँ रक्तबीज। पर ये तुमने क्या वेशभूषा बना रखी है?

विक्रम-क्षमा करें,पर आपको भी मानवाकृति में आना पड़ेगा।

पाषाणदैत्य-पर क्यों?

विक्रम-देवताओं ने आपके जाते ही इस आयामद्वार की सुरक्षा का कार्यभार कुछ मानव योद्धाओं को सौंपा था,उनके वंशज आज भी उस द्वार की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और आपको मैंने बहुत मुश्किल से निकाला है। उनको ये सूचना मिल चुकी है और वे इस वक्त बौखलाये हुए हैं।

पाषाणदैत्य-हम अदने से मानवों से क्यों डरें?

विक्रम-डरने की बात नहीं है,पर इतना समय पृथ्वी पर व्यतीत करने के बाद मैंने सीखा है कि मानवों को कभी कम नहीं आँकना चाहिए,वो आपको रोकने का भरसक प्रयत्न करेंगे और जब तक भस्मासुर आजाद नहीं होता, हमें शांति से कदम बढ़ाना होगा।

पाषाणदैत्य-चलो ठीक है, पर भस्मासुर और अग्निमुख को आजाद कराने के लिए फिर द्वार खोलना पड़ेगा । अगर मानव अधिक चौकस हो गयें हैं ,तो तुम ये कैसे करोगे?

विक्रम(मुस्कुराकर)-मेरे पास एक तरकीब है।

DAY 4- 8:00 PM.

समीर-ये cottage हमारा है?

प्रशांत-ऐसे देशभर में हमारे काफी secret hideouts हैं।

सागर-वो DARK REALM का दरवाज़ा फिर खोलने का प्रयास करेंगे Dad.

प्रशांत-पर इस बार हम चौकन्ने हैं।

समीर-इन सबमें मैं कैसे मदद कर सकता हूँ?

प्रशांत-तुम्हें अपने बड़े भाई से training लेनी होगी , हमारी तरह लड़ना सीखना होगा।

समीर-इसमें तो वक्त लगेगा?

प्रशांत-उसकी चिंता मत करो, हम पहली चाल नहीं चलेंगे। उनके पहले कदम का wait करेंगे तो हमारे पास काफी वक्त होगा।

END OF PART 4

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli

 

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4 Comments on “Dark Realms Part 4”

  1. बहुत ही बेहतरीन कहानी चल रही है जैसे जैसे आगे बढ़ती जा रही है रोमांच बढ़ता जा रहा है पर मेरी एक शिकायत है कि पार्ट बहुत छोटे हैं पर लेखन बहुत अच्छा है।

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