Dark Realms Part 9

DARK REALMS

PART 9.

रक्तबीज मंत्र को संपन्न करता है और एक प्रकाश होता है, फिर वो सामने देवराज इंद्र को खड़ा पाता है।

इंद्र-ये हम देवताओं का बड़ा दुर्भाग्य है कि मंत्र तुझ जैसे नीच राक्षस के हाथ लग गया है। अगर मैं मंत्रशक्ति से नहीं बँधा होता तो पलभर में तेरा नाश कर देता। बोल क्या चाहता है?

रक्तबीज-इतना क्रोध अच्छा नहीं है देवराज। आपको पता है कि इस बार मैंने यमराज की जगह आपको क्यों बुलाया?

इंद्र-नहीं,मुझे कैसे पता होगा!

रक्तबीज-क्योंकि मेरे राक्षस भ्राताओं की मौत का कारण आप हैं देवराज!परमशक्ति की भविष्यवाणी के बारे में आपको पता था और आपने ही उस मानव को एक ऐसे हथियार में बदल दिया जिससे आप सभी राक्षसों का सफाया कर सकें।

इंद्र(हँसकर)-तुम नीच राक्षस समझते हो कि तुम सिर्फ हम देवताओं के कारण हारते हो पर तुम्हारी पराजय का मुख्य कारण हमेशा से मानव रहे हैं। भगवान भी श्रीराम और श्रीकृष्ण का मानवरूप धारण कर पृथ्वी पर अवतरित हुए थे ताकि तुम्हारा नाश कर सकें जिसके परिणाम स्वरूप तुममें से काफी राक्षस पृथ्वीलोक छोड़कर भाग गये और अपना अलग ‘राक्षसलोक’ बनाया,कुछ को हमने एक दूसरे आयाम(dark realm) में बंद कर दिया और उसकी सुरक्षा के लिए योद्धाओं की स्थापना की और तू इकलौता था जो मानवों के बीच छिपकर मानव बनकर रहने लगा। हद तो तब हो गयी जब तुमने भस्मासुर और बाकी दोनों राक्षसों को स्वतंत्र किया तब मैंने समीर को उसके सत्य से अवगत कराया ताकि तुम्हारा नाश हो सके। अब बहुत वार्तालाप हो गया जिस काम के लिए बुलाया है वो बताओ।

रक्तबीज-आपको समीर को मारना होगा।

इंद्र-क्या बकवास कर रहे हो, मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा।

रक्तबीज-करना तो पड़ेगा ही क्योंकि आप मंत्रशक्ति से बँधे हैं।

इंद्र-तुमको परमशक्ति के बारे में कुछ पता भी है? इसका सृजन स्वयं बृह्मा ने त्रेतायुग में किया था,उनको ये बात पता थी कि आने वाले समय में आसुरी शक्तियाँ इतनी प्रबल हो जायेंगी कि शायद वो देवताओं पर भी भारी पड़ें, उस समय उनको सिर्फ एक बड़ी आसुरी शक्ति ही हरा पायेगी। इस कारण से उन्होंने तमाम प्रबल पौराणिक महाराक्षसों की आत्माओं की ताकत से ये “परमशक्ति” तैयार की पर इस शक्ति को ना तो देवता धारण कर सकते थे,ना ही राक्षस, ना गंधर्व और ना यक्ष। इसको समय आने पर एक मानव के शरीर में स्थापित करना तय हुआ क्योंकि मानवों ने हर युग में अपनी इच्छाशक्ति और शारीरिक प्रबलता को सिद्ध किया है और देवताओं के साथ मिलकर राक्षसों से युद्ध किया है चाहे वो परशुराम हों,द्रोणाचार्य हों या पांडव हों। जब से योद्धाओं की स्थापना हुई तभी बृह्मा ने भविष्यवाणी की कि आपातकालीन अवस्था में सिर्फ किसी मानव योद्धा को ही ये अवसर मिलेगा।

रक्तबीज-और ये अवसर मिला समीर को,पर एक बात बताइये देववर,कि अगर परमशक्ति एक राक्षसी शक्ति है तो क्या निकट भविष्य में समीर आपके लिए चिंता का विषय नहीं बनेगा?

इंद्र-अभी तो वो तुम्हारी चिंता का विषय है।

रक्तबीज-ओह!अब मैं समझा!आप उससे नहीं लड़ना चाहते क्योंकि आपको नहीं पता कि एक देवता होने के बावजूद आप उसे पराजित कर पायेंगे या नहीं।

इंद्र-मुझे तुम नहीं उकसा पाओगे रक्तबीज पर मैं मंत्रशक्ति से बँधा हूँ इसलिए युद्ध तो करना होगा।

………………………………………समीर और निकिता रात के समय खाना खाकर cottage के बाहर सीढ़ियों पर बैठे होते हैं।

निकिता-तो..क्या ये शक्तियाँ permanent हैं?

समीर-कुछ कह नहीं सकता पर अगर permanent हैं तो इसमें बुराई क्या है?हमारे बच्चे भी superman बन जायेंगे।

निकिता-मज़ाक छोड़ो समीर। प्रशांत अंकल कह रहे थे कि ये राक्षसी शक्ति है,अगर ऐसा है तो तुमको इस बारे में कुछ सोचना चाहिये।

समीर-मैं इस शक्ति को अच्छे से handle कर रहा हूँ निकिता आगे भी कर लूँगा।

…………………………………तभी रवि और सागर आ जाते हैं।

रवि-और निकिता भाभी!कैसी हैं!

समीर(धीरे से)-आ गये कबाब में हड्डी बनने।

सागर-ओये superman!मैं अभी भी तेरा बड़ा भाई हूँ समझा!मैंने training देकर तुझे रजनीकांत बनाया था,superman तो तू बाद में बना है।

समीर-अरे गुरु जी!आपका चेला तो आपसे आगे निकल गया!

………………………………………सब लोग हँसी मज़ाक कर रहे होते हैं कि तभी रोशनी का एक तेज़ धमाका होता है और कुछ क्षणों के लिए रात में दिन जैसा माहौल हो जाता है, जब रोशनी छँटती है तो सामने देवराज इंद्र खड़े होते हैं।

इंद्र-समीर!तुमको मुझसे युद्ध करना होगा।

 समीर-ये सब क्या है देवराज ? आप धरती पर क्या कर रहे हैं?

इंद्र-मुझे मंत्रशक्ति का प्रयोग करके रक्तबीज ने बुलाया है।

समीर-पर उसे ताम्रपत्र कैसे..ओह!अब समझा!विशाल यहाँ आकर माफी का नाटक कर रहा था,वो ताम्रपत्र चुराने आया था और उसने ताम्रपत्र ले जाकर रक्तबीज को दे दिया।

इंद्र-मुझे क्षमा करना समीर!पर मैं विवश हूँ।

समीर-ठीक है!मैं आपसे युद्ध के लिए तैयार हूँ।

निकिता-समीर ये तुम…. समीर-और कोई चारा नहीं है।

इंद्र-हम अगर यहाँ युद्ध करते हैं तो आधी पृथ्वी समतल हो जायेगी। हमें किसी वीरान ग्रह पर जाना होगा।

……………………………….इंद्र के इतना बोलते ही एक तीव्र प्रकाश होता है और इंद्र और समीर दोनों गायब हो जाते हैं।

रवि-ये दोनों कहाँ गये?

सागर-युद्ध करने।

निकिता-क्या समीर देवराज इंद्र से जीत सकता है?

सागर-पता नहीं।

…………………………………उधर सागर और देवराज इंद्र मंगल पर पहुँच जाते हैं जहाँ पर दूर दूर तक लाल आकाश और वीरान बंजर धरती होती है। समीर के कुछ समझ में आने से पहले ही इंद्र उस पर जोरदार प्रकाश का वार करते हैं जिससे समीर काफी दूर जा गिरता है और आसपास की जमीन भी काली पड़ जाती है, फिर समीर उड़कर इंद्र की तरफ आता है और दोनों में भयानक युद्ध होने लगता है। युद्ध में कभी समीर भारी पड़ता है तो कभी इंद्र। इस प्रकार से युद्ध दो घंटे तक चलता है।

इंद्र-रूको समीर!इस प्रकार से तो कोई परिणाम नहीं निकलेगा।

समीर-तो क्या करें देवराज?अरे! ये आपके शरीर से ऊर्जा क्यों निकल रही है?

इंद्र-जिसका भय था वही हुआ। अगर हम देवताओं को किसी काम के लिए मंत्र से बाँधा जाता है और हम वो काम करने में असफल हो जाते हैं तो हमें अपना पद छोड़ना होता है।

समीर-अब क्या होगा देवराज?

इंद्र-अब मेरी बात ध्यान से सुनो समीर!मैं तुमको अपनी कुछ शक्तियाँ और वज्र स्थानांतरित कर रहा हूँ। तुम स्वर्ग में मेरा पद “अस्थायी”रूप से सँभालोगे और मैं अपनी बची हुई शक्तियाँ लेकर पृथ्वी पर जाकर मानवों के बीच रहूँगा और इस समस्या का हल ढूँढने का प्रयास करुँगा।

समीर(चौंककर)-क्या कह रहे हैं देवराज?मैं स्वर्ग में आपकी जगह लूँ?

इंद्र-मना मत करना समीर क्योंकि भस्मासुर के स्वतंत्र होने के बाद ‘राक्षसलोक’के राक्षसों का आये दिन स्वर्ग पर आक्रमण होने लगा है इस वक्त स्वर्ग में युद्ध के हालात हैं और वहाँ एक सशक्त नेतृत्व की आवश्यकता है। वैसे भी ये स्थिति अस्थायी तौर से रहेगी,मैं पृथ्वी पर जाकर अपनी बची खुची शक्तियों द्वारा रक्तबीज को ढूँढकर इस समस्या का हल करूँगा। समीर-ठीक है देववर,अगर स्थिति इतनी जटिल है तो मुझे ये स्वीकार है।

……………………………………फिर एक तीव्र प्रकाश के साथ इंद्र अपनी मुख्य शक्तियाँ समीर के शरीर में स्थानांतरित करते हैं और खुद मानवों के कपड़ों सूट,टाई और पैंट में आ जाते हैं।

समीर-ओह! इंद्र-क्या हुआ?

समीर-कुछ नहीं!बस वो आपको हमेशा देवता के वस्त्रों में देखा है तो ये अवतार थोड़ा अजीब लग रहा है।

इंद्र-तो अब मैं तुमको स्वर्ग भेजने जा रहा हूँ,तुमको मेरा मुकुट और अन्य वस्त्र चाहिए?

समीर-उनकी कोई खास आवश्यकता होगी?

इंद्र-नहीं, ऐसी कोई आवश्यकता नहीं होगी।

समीर-तो फिर नहीं चाहिये।

इंद्र-अगर पहन लेते तो बाकी देवताओं से कुछ हिल मिल लेते,खैर तुम्हारी इच्छा। ईश्वर हम दोनों को अपने अपने मकसद में सफल बनाये।

………………………………….तभी एक आयामद्वार खुलता है।

इंद्र-जाओ समीर। उस पार स्वर्ग का द्वार है।

समीर-ठीक है देवराज।

इंद्र-अब कुछ समय के लिए मैं सिर्फ इंद्र हूँ और तुम हो देवराज, अब जाओ।

………………………..फिर समीर उस आयामद्वार में प्रवेश कर जाता है और आयामद्वार बंद हो जाता है। उसके बाद इंद्र अपने मानवरूप में धरती पर लौट जाते हैं।
END OF PART 9

Dark Realms Part 8

DARK REALMS PART 8. समीर छत तोड़कर उड़ जाता है। पीछे रवि और सागर एकदम भौचक्के रह जाते हैं। रवि-उसने..नमन को मार दिया? सागर-वो इस वक्त अपने आपे में नहीं …

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli

 

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2 Comments on “Dark Realms Part 9”

  1. ये क्या है एक कल के बच्चे ने देवराज इंद्र का स्थान ले लिया ?
    अगर आप सोचते हैं जी मैं ऐसा कुछ लिखूंगा तो आप थोड़ा सही है थोड़ा गलत पर एक बात है समीर जिस तरह से इंद्र का नाम ले रहा था उससे तो ऐसा लगता है जैसे आगे कुछ बहुत बुरा होने वाला है ।

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