Earth – 61 Part 1 (Nagmani Se Pahle )

EARTH-61

Nagmani Se Pahle
PART 1.
हम सब जानते हैं कि हमारा बृह्माण्ड अनंत है और बृह्माण्ड में ऐसे ऐसे राज़ छुपे हैं जिनकी हम लोग कल्पना तक नहीं कर सकते, लेकिन एक और आश्चर्य की बात ये है कि सिर्फ एक बृह्माण्ड नहीं है, कई अलग अलग बृह्माण्ड अलग अलग आयामों में स्थित हैं और हर आयाम में अनगिनत समयधारायें होती हैं। हर समयधारा दूसरी से भिन्न होती है। अगर हम अपनी पृथ्वी को earth-1 मानकर चलें तो ऐसी न जाने कितनी और पृथ्वियां होंगी। ये कहानी है ऐसी ही एक अलग पृथ्वी की जो एक अलग समयधारा में स्थित है, जिसका नाम है Earth-61. आज तक्षकनगर के लिए शोक भरा दिन है क्योंकि आज बरसों बाद राजा तक्षकराज के यहां पैदा हुआ पुत्र दुष्ट नागपाशा की चाल का शिकार हो चुका है, जो कि राजा तक्षकराज का भाई है। उसके धोखे के कारण देव कालजयी ने रानी ललिता पर जानलेवा हमला किया, जिससे रानी तो बच कालजयी की कृपा से बच गयीं पर शिशु कालजयी के विष का शिकार हो गया और उसके शरीर को मान्यता के अनुसार नदी में एक टोकरी में रखकर  बहा दिया गया। नागपाशा खज़ाना हथियाने के लिए देव कालजयी के पास गया, पर वहां उसे पता चला कि ख़ज़ाने का असली वारिस अभी ज़िंदा है। क्रोधित नागपाशा ने कालजयी पर वार किया लेकिन कालजयी की दुम से टकराकर विष और अमृत के प्यालों पर गिर गया। विष ने उसका मुँह जलाकर विकृत कर दिया,पर अमृत ने उसे अमर बना दिया। उसने क्रोध में आकर अपने ही भाई तक्षकराज और रानी ललिता को मौत के घाट उतार दिया पर तक्षकनगर की जनता ने विद्रोह कर दिया जिसके कारण नागपाशा और उसके गुरुदेव को वहां से भागना पड़ा। अब नागपाशा का लक्ष्य है उस शिशु को ढूढ़ना जो उस ख़ज़ाने को खोल सकता था। दूसरी ओर शिशु का शरीर नदी में बहता हुआ इच्छाधारी नागों के रहस्मय द्वीप पर आ गया जिसका नाम था ….नागद्वीप। कुछ पहरेदार सर्पों ने उसे देखा और उसे महात्मा कालदूत के पास ले आये।

पहरेदार- महात्मा..महात्मा कालदूत! ये देखिये!

कालदूत- क्या हुआ! अरे, ये बालक कौन है?

पहरेदार- पता नहीं महात्मन्, हमें तो नदी के प्रवाह से एक टोकरी इस तरफ आती दिखी, ये उसी में था।

कालदूत- ये सामान्य बालक नहीं है, इसके अंदर से तीव्र दैवीय विष का आभास हो रहा है। आश्चर्य तो ये है कि ये इस विष को धारण करके भी ज़िंदा है। सुनो पहरेदार! फ़ौरन राजवैद्य को खबर करो, इसका उपचार जल्द से जल्द शुरू करना होगा। राजा मणिराज को भी खबर करो।

………………………………………राजवैद्य बालक का उपचार शुरू कर देते हैं, राजा मणिराज भी कालदूत के बुलावे पर आ जाते हैं।

Nagraj In Nagdweep In childhood
Child Nagraj

मणिराज- आपने याद किया महात्मन्?

कालदूत- आओ मणिराज! ये देखो!

मणिराज- ये..ये तो एक बालक है!

कालदूत- ये कोई साधारण बालक नहीं है, इसके अंदर दैवीय विष है।

मणिराज- क्या? पर ये तो इच्छाधारी नाग नहीं लगता, ये तो साधारण मानव है।

कालदूत- सो तो है, पर अगर ये बच गया, तो आगे जाकर बहुत शक्तिशाली बनेगा। सुनो, मैं कुछ सोच रहा था।

मणिराज- मैं समझ गया कि आप क्या सोच रहे हैं महात्मन्, मेरी भी अभी तक कोई संतान नहीं है।मैं इस बालक को गोद लेना चाहूंगा ताकि ये हमारे नागद्वीप का सम्राट बन सके।

कालदूत- नहीं मणिराज! सिंहासन पर हक़ तो तुम्हारी ही संतान का होगा वर्ना हमारे विद्रोही नागों को एक और बहाना मिल जाएगा कोई परेशानी खड़ी करने का।

मणिराज- फिर आप क्या चाहते हैं महात्मन्?

कालदूत- इस बालक का अभी उपचार चल रहा है, पता नहीं कितना समय लगेगा। तांत्रिक विषंधर कभी भी विद्रोह कर सकता है, इस विद्रोह को दबाने के लिए तुमको ये झूठी खबर फैलानी होगी कि तुमने इस बालक को गोद ले लिया है।

मणिराज- समझ गया महात्मन्!

…………………………………….मणिराज पूरे नागद्वीप पर झूठी खबर फैलवा देते हैं कि उन्होंने बालक को गोद ले लिया है। विद्रोही कुछ समय के लिए शांत पड़ जाते हैं। बालक के उपचार में पूरे साठ वर्ष लगते हैं, साठ वर्ष बाद उसमे जीवन के अंश नज़र आते हैं। कालदूत और मणिराज की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता, उसी समय एक और सूचना आती है कि मणिराज की पत्नी रानी नगीना ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया है जिसमे से एक लड़का है और एक लड़की। मणिराज लड़के का नाम विषप्रिय रखते हैं जबकि लड़की का नाम विसर्पी। ये सब सुनकर विद्रोहियों के हौंसले पूरी तरह से टूट जाते हैं। मणिराज कालदूत से मिलने उनकी गुफा में जाते हैं।

मणिराज- आखिर,आज के दिन हम चैन की सांस ले सकते हैं, आपको नहीं पता कि मै कितना खुश हूँ महात्मन्।

कालदूत- ख़ुशी की तो बात है ही! अब तुमको विषप्रिय के रूप में नागद्वीप का सम्राट मिल गया। अब हमको उस झूठी अफवाह की कोई ज़रुरत नहीं।

मणिराज- पर उस बच्चे का क्या?

कालदूत- वो बालक विलक्षण शक्तियों का मालिक है, अगर वो। नागद्वीप पर ही रह जाए तो मैं उसको प्रशिक्षित करके दुनिया के सबसे खतरनाक योद्धा में बदल दूंगा।

मणिराज- और हम जनता को क्या जवाब देंगे , वो तो अब तक यही समझ रहे थे कि ये बालक ही नागद्वीप का शासन संभालेगा।

कालदूत- अरे सीधी सी बात है, तब हम लोगो को क्या पता था कि राजपरिवार को उनका असली वारिस भी विषप्रिय के रूप में मिल जाएगा? ये बात तो सब लोग समझ ही जायेंगे कि जब हमने इस बालक को सम्राट बनाने की बात कही थी, तब परिस्थितियां अलग थीं।

मणिराज- आप ठीक कहते हैं, मैं बेकार में ही अपने दिमाग पर इतना ज़ोर डाल रहा था।

कालदूत- ये बालक हमारी देख रेख में बड़ा होगा, हम हैं इसके पिता और ये है हमारा बेटा नागराज!

……………………………………फिर वो बालक बड़ा होने लगता है, महात्मा कालदूत उसे प्रशिक्षण देना शुरू करते हैं। जो दांव पेंच इच्छाधारी नाग सालों बाद सीख पाते हैं, वो बालक 15 वर्ष की आयु में सीख लेता है। उसके साथ ही कालदूत पांच और बालकों को भी युद्धकला सिखाते हैं, जो की पंचनाग कहलाते हैं। नागराज और पंचनाग आपस में इतनी घनिष्ठता से रहते हैं कि देखने वालो को लगता क़ि नागराज, पंचनागों के ही समूह का हिस्सा है। उधर विसर्पी और विषप्रिय भी महल में बड़े हो रहा थे, मणिराज ने कभी अपने बच्चों में फर्क नहीं किया, विसर्पी अपने पिता मणिराज के साथ अधिक रहती थी जिससे उसके अंदर उदारता और दया के भाव आये जबकि विषप्रिय अपनी माँ नगीना का लाडला था जिसने उसके अंदर क्रोध और नफरत को पैदा किया। एक दिन कालदूत ने नागराज और पंचनागों को बुलाया।

नागराज- आपने याद किया महात्मन्?

कालदूत- आओ मेरे बच्चों! आज तुम लोगों ने अपना शारीरिक प्रशिक्षण पूरा कर लिया है, पर मानसिक प्रशिक्षण अभी बाक़ी है।

नागार्जुन- क्या मतलब?

कालदूत- मतलब ये कि हमने तुम लोगों को बाहरी दुनिया का हर संभव ज्ञान दिया जो हम दे सकते थे, पर आगे की शिक्षा के लिए तुम लोगों को स्वयं बाहरी दुनिया में जाना होगा।

नागराज(दुखी होकर)- यानि कि आप अपने पुत्रों को खुद से दूर करना चाहते हैं।

नागप्रेती(दुखी स्वर में)- क्या पता वहां कैसा खाना मिले?

कालदूत- मैं जानता हूँ कि ये तुम लोगों के लिए कठिन होगा पर ये आवश्यक है कि तुम बाहरी दुनिया के शिक्षण संस्थान में जाओ।वहां कुछ मानवरूपी इच्छाधारी नाग पहले से ही वेदाचार्य शिक्षाधाम में मौजूद होंगे।

नागराज- वेदाचार्य शिक्षाधाम?

कालदूत- सुना है कि स्नातक की पढाई के लिए सबसे अच्छा है, हालाँकि वहां पर दाखिले के लिए परीक्षा होती है, पर वो तुम लोग निकाल लोगे।

……………………………………सभी लोग दुखी सा चेहरा बनाकर कालदूत की गुफा से बाहर आते हैं, और आते ही हंस पड़ते हैं।

नागराज- चुप करो नालायकों! तुम्हारी हंसी हमको मरवा देगी!

सिंहनाग- पर ही..ही..हम लोगो ने अच्छा अभिनय किया।

सर्पराज- अब हमको मौका मिला है बाहरी दुनिया में कदम रखने का।

नागराज- हाँ, सो तो है। लेकिन ये नालायक नागप्रेती मरवा देगा किसी दिन।

नागप्रेती- अरे! मैंने क्या किया?

नागराज- क्या किया! वहां खड़ा होकर बोलता है कि ” क्या पता कैसा खाना मिले बाहर?” हम लोगों की हंसी बस वहीँ छूटने वाली थी।

सिंहनाग- अच्छा ये सब छोडो! ये बताओ कि हमें वहां जाकर अपने इंसानी वेश में रहना होगा क्या?

नागराज- नहीं तो! मानवों को तो आदत होगी दो पैरों पर चलने वाले शेर को देखने की!

सिंहनाग- क्या यार! तुमको मेरा मजाक उड़ाकर क्या मिलता है?

नागराज- अच्छा माफ़ कर दे भाई! बुरा मत माना कर! वैसे भी मायावी इंसानी रूप में तुम लोग रहोगे, मैं तो वैसे भी उनके जैसा ही दिखता हूँ।

नागप्रेती- मुन्ना ज़रा शरीर को कपड़ों से ढककर रखना, मानवों ने अगर बोलने वाला शेर नहीं देखा होगा तो हरी खाल वाला भी कभी नहीं देखा होगा!

……………………………………इस बात पर नागराज को छोड़कर बाकी सब हंस पड़ते हैं। शाम को छहों लड़के कालदूत से विदा लेते हैं, पंचनाग अपने इंसानी मायावी रूप में आ जाते हैं जबकि नागराज को पूरे कपडे पहने रखने की हिदायत दी जाती है। दूसरी तरफ मणिराज भी विसर्पी और विषप्रिय को पढ़ने के लिए बाहर भेजते हैं। इन सबका बाहर की दुनिया में यह पहला सफ़र होता है। नागराज और पंचनाग शहर महानगर के बंदरगाह पर पहुँचते हैं , वहां उनको लेने एक नागू नाम का इच्छाधारी नाग आया होता है।

नागू- आओ आओ! मुझे महात्मा कालदूत का मानसिक सन्देश मिला था कि तुम लोग आने वाले हो।

नागराज- पर तुमने हमें पहचाना कैसे?

नागू- ये मेरे माथे की मणि देख रहे हो ना! ओह, कैसे देखोगे! मैं तो अभी इंसानी रूप में हूँ, इंसानी रूप में मैं मणि जेब में रख लेता हूँ। हां, तो ये जो मणि है(जेब से निकालकर) ये आसपास के दायरे में कितने इच्छाधारी नाग हैं और कितने मानव, सब बता देती है।

नागप्रेती- तुम इंसानों के बीच कितने समय से हो?

नागू- अरे मियाँ! हम तो पैदा ही यहीं पर हुए थे! अब चलो कल वेदाचार्य शिक्षाधाम का एंट्रेंस एग्जाम है, यानि कि……

नागराज- यानि कि प्रवेश परीक्षा। हम लोगों को इंग्लिश आती है।

नागू- तुम लोग तो बड़े एडवांस हो यार! नागद्वीप में रहकर इंग्लिश सीख लिए!

नागराज- वो क्या है कि आप अकेले नाग नहीं हैं जो बाहर रहता हैं, हम लोगों ने बाहर रहने वाले नागों से ही सीखा है ये सब! जो कुछ समय तक बाहर रहकर फिर से नागद्वीप में बस जाते हैं। हम लोग भी तो यही करने आये हैं, कुछ समय के बाद स्नातक की डिग्री लेकर वापस नागद्वीप। फिर जो बच्चे हमारे बाद आने वाले होंगे उनको हम लोग जाकर तैयार करेंगे। इससे नागद्वीप के लोग आने वाले समय के साथ चलते हैं और कभी इंसानों से पिछड़ते नहीं।

नागू- वाह यार! हमको तो लगता था कि नागद्वीप से आने वाले नाग निहायती गंवार टाइप के होंगे पर आप लोग तो हमसे भी तेज़ निकले।

नागराज- वह सब छोड़िये! हम लोगों को ठहरना कहाँ पर है?

नागू- अजी! हमारे होते हुए क्यों टेंशन लेते हो? आज हमारे गरीबखाने में हमारे साथ ठहर जाओ, अगर पेपर क्लियर कर लिए तो चार साल हॉस्टल में रहोगे, नहीं तो भैया वापस नागद्वीप।

नागराज- तो आपको लगता है कि हमारा पेपर क्लियर नहीं होगा?

नागू- देखो हमारे लगने ना लगने से क्या होता है? तुम्हारा पेपर है, तैयारी होगी तो निकल जायेगा, नहीं होगी तो नहीं निकलेगा।

नागप्रेती- चलो अब बहुत बात हो गयी! आज नागू के साथ रूककर आराम कर लेते हैं, कल तो वैसे भी पेपर है।

……………………………………..अगले दिन छहों लोग पेपर देने जाते हैं और तीन घंटे के बाद वापिस आ जाते हैं। नागू- क्या हुआ भाई लोग?

नागराज- हम सबका पेपर क्लियर हो गया!

नागू- ओहो! यानी अब आप दादा लोग हमारे गरीबखाने की शोभा नहीं बढ़ायेंगें?

सिंहनाग- ऐसी बात नहीं है! मिलने आते रहेंगे।

……………………………..……..सब लोग हॉस्टल में शिफ्ट हो जाते हैं, नागराज और पंचनागों के लिए ये सब बहुत ही नया अनुभव होता है। अगले दिन सुबह सब लोग तैयार होकर अपनी पहली क्लास के लिए निकलते हैं।

नागराज- यार नागप्रेती!

नागप्रेती- बोल!

नागराज- वो सामने जो लड़की जा रही है , वो कहीं देखी हुई सी नहीं लग रही?

नागप्रेती- ये तो..ये तो कुमारी विसर्पी हैं!

सिंहनाग- कुमारी विसर्पी! राजा मणिराज की बेटी? ये तुझे कैसे पता नागप्रेती?

नागप्रेती- अरे मैं एक बार पिताजी(महात्मा कालदूत) के साथ महल की तरफ निकल गया था!

सर्पराज- तूने हमें तो कभी ये नहीं बताया?

नागप्रेती- अबे तो इसमें बताने जैसा क्या था और…… अरे!

नागराज- अब क्या हुआ?

नागप्रेती- इसका भाई विषप्रिय भी आया हुआ है! वो जो तगड़ा सा लड़का खड़ा है!

नागराज- अच्छा तो वो है विषप्रिय! अब जल्दी चलो क्लास के लिए लेट हो जायेंगे वर्ना!

…..…………………..सब लोग क्लास अटेंड करने चल देते हैं तभी नागराज एक लड़की से टकरा जाता है और उस लड़की की किताबें बिखर जाती हैं।

नागराज- ओह! माफ़ कीजियेगा!

लड़की- कोई बात नहीं! आप भी इसी क्लास में जा रहे थे क्या?

नागराज- जी! I am a fresher!

लड़की- Hi! मेरा नाम भारती है। ये मेरे दादाजी वेदाचार्य का ही कॉलेज है!

नागराज-तो आप जाने माने भविष्यवक्ता वेदाचार्य जी की पोती हैं!

भारती- जी! पर मुझे भी एडमिशन के लिए बाकायदा पेपर देना पड़ा है!

नागराज- मैंने तो ये पुछा ही नहीं!

भारती(हँसते हुए)- हाँ, पर यही सवाल सबसे पहले आ जाता है।

नागराज- चलिए फिर क्लास का टाइम हो रहा है!

………………………………………सब लोग क्लास के बाद वापिस आ रहे होते हैं कि तभी विसर्पी पीछे से नागराज और पंचनागों को आवाज़ देती है।

विसर्पी- ज़रा सुनिए!

नागराज(मुड़कर)- जी!

विसर्पी(धीरे से)- आप लोग भी नागद्वीप से हैं क्या?

नागराज- हाँ! आपको कैसे पता?

विसर्पी- मैं दुसरे इच्छाधारी नागों को देखते ही पहचान लेती हूँ! आप पाँचों तो इच्छाधारी नाग हैं पर(नागराज की तरफ देखकर) आपसे न तो इच्छाधारी नाग की तरंग आ रही है और ना ही साधारण मानव की!

नागराज- क्योंकि मैं मानव नाग हूँ!

विषप्रिय(पीछे से चिल्लाकर)- विसर्पी!

विसर्पी- क्या हुआ भैया?

विषप्रिय- कितनी बार कहा है कि अनजान लोगों से ज़्यादा घुलो मिलो मत!

विसर्पी- पर ये लोग भी हमारी तरह ……

विषप्रिय- …..इच्छाधारी सांप हैं! पर हैं तो हमारी प्रजा का ही हिस्सा! इनके ज़्यादा मुंह लगने की ज़रुरत नहीं!

……………………………………विसर्पी एक नज़र नागराज को देखती है, फिर वो और विषप्रिय वहां से चले जाते हैं।

नागप्रेती- यार! ये तो बड़ा अहंकारी है!

नागराज- राजपरिवार वाले हैं, अहंकार तो होगा ही ना!

भारती- अरे सुनो!

नागराज- आप?

भारती- हाँ , मैंने आपका नाम तो पुछा ही नहीं!

नागराज- मेरा नाम राज है, और ये मेरे दोस्त हैं अर्जुन(नागार्जुन), मान सिंह ( सिंहनाग), देव(नागदेव), प्रिंस(नागप्रेती) और राजेश( सर्पराज)

भारती- ओह! आप सबसे मिलकर बहुत ख़ुशी हुई।

नागप्रेती- हमें भी!

………………………………..तभी टीवी पर एक न्यूज़ आ रही होती है।

न्यूज़- आज फिर सरकार ने रॉ एजेंसी में कार्यरत एक इच्छाधारी नाग को पकड़ा। इस तरह से इच्छाधारी नागों के हमारे बीच रहने से लोगों में अशांति का माहौल फैल गया है, अमेरिका ने ये दावा किया है की दुनियाभर में हज़ारों ऐसी बड़ी पोस्ट्स हैं जहां इच्छाधारी नाग काम कर रहे हैं।कुछ लोग जैसे कि राजनगर के IG राजन मेहरा इनके पक्ष में भी हैं जिनका दावा है कि ये इंसानों को नुक्सान नहीं पहुंचाते पर बड़ी संख्या में लोग ये चाहते हैं कि इच्छाधारी नाग उनके बीच ना रहें। अब ये इच्छाधारी नागों के लिए बड़ी ही मुश्किल स्थिति है क्योंकि जो नाग यहाँ पर परिवार बसा चुके हैं, उनका यहां से जाना बहुत ही मुश्किल होगा।

भारती- उफ़! मुझे तो बड़ा डर लगता है, मान लो की कोई नाग इनमे से हमारे ही बीच हुआ तो?

नागराज- तो इससे दिक्कत क्या है? सुना नहीं क्या राजन मेहरा ने क्या कहा? हम लोगों को इनसे कोई खतरा नहीं है।

भारती- एक इच्छाधारी नाग किसी इंसान को आसानी से मार सकता है, क्यों है ना ?

नागराज- हाँ।

भारती- बस! तो फिर इनसे खतरा है!

……………………………………भारती ये कहकर चली जाती है और नागराज उसे जाता हुआ देख रहा होता है। 

क्रमशः

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli 

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18 Comments on “Earth – 61 Part 1 (Nagmani Se Pahle )”

  1. बहुत बढ़िया कथानक है आपका हर्षित भाई। नगराज के ओरिजिन को बिल्कुल नए ढ़ंग से दिखाना , बहुत ही अच्छा लगा पढ़ कर। आपने कॉमेडी भी बहुत सहज ढंग से डाली है इसमें। अगले भाग का ईन्तज़ार है।

    1. भारती ये कहकर चली जाती है और नागराज उसे जाता हुआ देख रहा होता है।

      ashlil baat

    1. Jinko bhi ye story pasand aayi unka bahut bahut dhanyawad.Aage is series me apko aur bhi adhik romanch dekhne ko milega.Keep reading.

  2. बहुत ही उम्दा हर्षित जी सबसे पहले तो आपको इस नयी शुरुआत के लिए अनन्त बधाइयां, स्टोरी पढ़ी बहुत ही मज़ा इसमें एकदम अलग सब कुछ देखने को मिला नागु जो नागराज के ही शरीर में ही रहता है इस स्टोरी में एक ग़रीबखाने का मालिक है हीहीही, पहली बार नागराज और पंचनागों को एकसाथ देखा वो भी स्टूडेंट्स के रूप में मज़ा आगया और इसमें विसर्पी और भारती दोनों और भविष्य में देख रहा हूँ की अभी बहुत ज़्यादा मज़ा आने वाला है, विसर्पी भी एक जगह भारती भी एक जगह हीहीही। अगले पार्ट्स का इंतज़ार रहेगा

  3. I can’t tell you how beautifully it has been written.
    Bahut hi different
    Humlogo ne kabhi aise imagine bhi ni kiya tha nagraj ya nagdweep vasiyo k jiwan ko.
    Totally different concept.
    Main to ye bolta hu k agar RC reboot hui to ye concept bahut sahi tarike se upyog ne laya ja sakta h.
    Haveli k baki stories ki tarah hasya ras vagairah nahi h parantu wahi iski visheshta h.
    Lag raha ek naya kathanak padh rahe hain.
    Mujhe personally bahut pasand aayi.
    Aur samvart bhai aapko bahut bahut badhai. Ye bahut hi original hai aur aasha hai jaldi jaldi hame aur bhi stories milengi padhne. Just lovely.

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