Earth 61 Part 10 (Probot)

EARTH-61

PART 10.

( प्रोबोट )

फेसलेस इतने सवाल एक साथ सुनकर हकबका जाता है पर वो संयम से काम लेते हुए जवाब देता है।

फेसलेस- छह साल पहले कुछ इच्छाधारी नाग और नागराज यहाँ शिक्षाधाम में पढ़ने के लिए आये थे और ये नागू भी कभी कभी उनसे मिलने आता था। मैं उन सबकी आइडेंटिटी जान गया था पर वो लोग अच्छे लोग थे।

डोगा- तो क्या तुम भी शिक्षाधाम में ही पढ़ते थे तब?

फेसलेस- हाँ, और तब हम लोगों में अच्छी दोस्ती भी थी।

ध्रुव- ये तुमने पहले क्यों नहीं बताया?

फेसलेस- मैं तो अब भी तुमको नहीं बताने वाला था क्योंकि तुम सबसे ज़्यादा मैं अपनी गुप्त पहचान को लेकर चिंतित हूँ।

डोगा- ठीक है, पर ये बताओ कि इस नागू को कैसे रोक जाये?

फेसलेस- अगर मुझे ठीक से याद है तो इसकी मणि इसकी शक्ति का मुख्य स्त्रोत है।

परमाणु- यानि कि मणि इसके माथे से निकलने पर उसकी शक्तियां निष्क्रिय हो जाएंगी?

फेसलेस- निष्क्रिय तो नहीं होंगी पर तब हम इससे निपट सकते हैं।

परमाणु- अभी नागू ज़मीन से काफी ऊपर हवा में है, मैं ऊपर जाकर उसकी मणि निकाल सकता हूँ।

फेसलेस- ये कोशिश करोगे तो जलके राख हो जाओगे क्योंकि मणि लेने की कोशिश तुम तभी कर सकते हो जब नागू मणि उतार दे। अनाधिकृत रूप से मणि लेने पर मणि अपनी शक्तियों से सामने वाले को नष्ट कर सकती है।

ध्रुव- तो क्या करें?

भेड़िया- मैं एक प्रयास करके देखता हूँ, नागू में फिलहाल हरु शक्ति का समावेश है और मेरी गदा दैवीय होने के कारण हरु शक्ति का प्रतिरोध करती है। इस बात का एहसास पहली बार मुझे तब हुआ जब तुम लोगों के मिलने से पहले जंगल में मैं हरु की शक्ति से मुकाबला कर रहा था।

ध्रुव- ठीक है पर उसके लिए नागू को ज़मीन पर लाना होगा।

भेड़िया- कोई समस्या नहीं!

………………………………..भेड़िया अपनी पूँछ ऊपर की तरफ बढ़ाना शुरू करता है। सब उसकी ये शक्ति देखकर दंग रह जाते हैं। वो नागू के पैर को पूँछ से बांधता है और उसे नीचे पटक देता है। नागू के गिरने से ज़मीन में उस जगह पर दरारें आ जाती हैं, नागू बहुत ही शांति से उठता है। नागू बिल्कुल होश में नहीं था और हरु शक्ति के कारण उसके शरीर का रंग नीला पड़ा हुआ था।

ध्रुव- ये बहुत ही खतरनाक लग रहा है, तुमको यकीन है कि तुम इसको संभाल सकोगे भेड़िया?

भेड़िया- तुम मेरी शक्ति को कम समझ रहे हो ध्रुव क्योंकि तुमने मुझे अभी तक लड़ते हुए नहीं देखा है।

…………………………भेड़िया आगे बढ़ता है, नागू अपनी मणि से एक घातक किरण निकालता है पर भेड़िया उसको गदा से रोक लेता है। भेड़िया गदा का एक शक्तिशाली वार नागू के सर पर करता है,नागू थोड़ा पीछे हटता है पर फिर क्रोध में आकर अपनी मणि से भेड़िया के लिए एक पिंजरा बना देता है। भेड़िया की गदा के दो शक्तिशाली वारों से पिंजरा टूट जाता है फिर भेड़िया बिना मौका गँवाए नागू पर गदा फेंककर मारता है। नागू गिर पड़ता है लेकिन इस बार नागू मणि की शक्ति का पूरा ज़ोर लगाकर भेड़िया को उछाल देता है। भेड़िया बहुत दूर गिरता है, अब तक दर्शक बना हुआ ध्रुव तुरंत परमाणु को इशारा करता है।

ध्रुव- मैं और तिरंगा भेड़िया को देखते हैं, तुम और फेसलेस तब तक किसी प्रकार से नागू को रोको।

परमाणु- ठीक है पर जरा जल्दी करना। मुझे नहीं लगता कि इस नागू को मैं और फेसलेस ज़्यादा देर संभाल पाएंगे।

…………………………फिर परमाणु नागू पर दूर से ही एटॉमिक ब्लास्ट करने लगता है और फेसलेस भी उस पर तंत्र वार करने लगता है। ध्रुव और तिरंगा भेड़िया के पास जाते हैं।

ध्रुव- तुम ठीक हो भेड़िया?

भेड़िया- उफ्फ! ये तो काफी शक्तिशाली लगता है, इससे कैसे निपटा जाये?

………………………..ध्रुव और तिरंगा एक दुसरे को देखकर मुस्कुराते हैं।

तिरंगा- तुम भी वही सोच रहे हो जो मैं सोच रहा हूँ।

ध्रुव- लगता तो ऐसा ही है।

भेड़िया- ज़रा मुझे भी बताओ कि क्या सोचा रहे हो?

ध्रुव- नागू की मणि की शक्ति में हरु शक्ति नहीं है, बल्कि बाकी के शरीर में है इतना तो देखने से मालूम पड़ रहा है! जब तुम नागू से लड़ रहे थे तो हम दोनों ने नोटिस किया कि तुम्हारी गदा की दैवीय शक्ति हरु शक्ति को काट रही है।

तिरंगा- तो अगर तुम नागू के माथे से गदा का स्पर्श कुछ देर के लिए करवा दो तो उसकी मणि का संपर्क उससे काटा जा सकता है।

भेड़िया- वाकई दिमाग तेज़ है तुम दोनों का! मैं ये प्रयास करके देखता हूँ।

………………………….भेड़िया जाता है और नागू अभी तक परमाणु और फेसलेस से ही उलझा होता है। वो तुरंत तेज़ गति से बढ़कर गदा को नागू के माथे से स्पर्श कराता है। नागू की चीख निकल जाती है और वो भेड़िया के हाथ को पकड़ लेता है। नागू के हाथ आग छोड़ने लगते हैं जिससे भेड़िया के हाथ जलने लगते हैं पर भेड़िया गदा को उसके माथे से चिपकाए रहता है। अचानक ही एक तीव्र रौशनी होती है और नागू बेहोश हो जाता है, उसकी मणि उससे अलग हो जाती है और उसका रंग भी सामान्य हो जाता है। सभी रक्षक दौड़कर भेड़िया और नागू के पास जाते हैं।

ध्रुव- तुमने तो कमाल कर दिया भेड़िया!

भेड़िया- हम्फ! अब इसके होश में आने का इंतज़ार करना होगा।

………………………………….तभी नागू धीरे धीरे होश में आने लगता है।

ध्रुव- कैसे हो नागू? थोड़ा आराम से उठो।

नागू- मैं ये नहीं पूछना चाहता कि तुम लोग कौन हो क्योंकि तुम लोगों को तो सारी दुनिया जानती है। हरु की शक्ति मेरे अंदर ज़रूर थी लेकिन मेरा दिमाग जाग रहा था। ये..ये सब तबाही मैंने की है!

ध्रुव- इसके ज़िम्मेदार तुम नहीं हो नागू बल्कि वो हरु है।

नागू- अरे भेड़िया तुम? तुम यहाँ शहर में?

भेड़िया- कैसे हो मित्र? बहुत दिन बाद दिखे।

ध्रुव- हमको तुमसे कुछ काम है नागू।

नागू- कैसा काम?

ध्रुव- मुझे इच्छाधारी नागों के निवास स्थान का पता चाहिए।

नागू(हकबकाकर)- प..पता क्यों चाहिए तुमको?

ध्रुव- तुमने हरु की शक्ति देखी है नागू। क्या तुमको लगता है कि हम कुछ लोग मिलकर हरु को हरा सकते हैं? हमें पृथ्वी पर रहने वाली हर प्रजाति का साथ चाहिए होगा।

नागू- इस मामले में मैं बहस कर भी नहीं सकता क्योंकि मेरे कारण आज कई मासूम जानें खतरे में पड़ी हैं। मैं आपको उस जगह का पता बताऊंगा और आपके साथ उस जगह चलूँगा।

…………………………तभी परमाणु के बेल्ट में से बीप बीप की आवाज़ आने लगती है, सब लोग चौंक जाते हैं।

परमाणु- ओह,दोस्तों लगता है कि मेरे निर्माता कमलकांत वर्मा किसी मुसीबत में हैं, मुझे तुरंत जाना होगा।

डोगा- रुको, मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ।

ध्रुव- ये हरु की कोई चाल हो सकती है। एक काम करते हैं परमाणु, तुम डोगा और तिरंगा को लेकर दिल्ली निकलो और मैं जेट लेकर नागू, भेड़िया और फेसलेस के साथ नागों के उस रहस्यमय स्थान के लिए रवाना होता हूँ।

परमाणु- ये भी ठीक है।

………………………………….फिर ध्रुव, फेसलेस, भेड़िया और नागू नागद्वीप के लिए रवाना होते हैं जबकि परमाणु, डोगा और तिरंगा दिल्ली जाते हैं। परमाणु डोगा और तिरंगा को लेकर उड़ता हुआ दिल्ली की तरफ जा रहा होता है।

डोगा- तुम कुछ ज़्यादा ही परेशान लग रहे हो परमाणु।

परमाणु- प्रोफेसर कमलकांत वर्मा मेरे लिए बहुत अहमियत रखते हैं, उन्होंने ही इस बेल्ट में ये व्यवस्था की थी कि अगर वो कभी खतरे में हुए तो इस बेल्ट में एक अलार्म अपने आप बजेगा।

तिरंगा- तो हमको जल्दी ही दिल्ली पहुंचना होगा।

…………………………..परमाणु, डोगा और तिरंगा सीधे प्रोफेसर की गुप्त लैब में उतरते हैं।

डोगा- तुमको नहीं लगता कि हम दोनों को यहाँ लाने से तुम्हारी गुप्त पहचान और प्रोफेसर के राज़ को कुछ खतरा हो सकता है।

परमाणु- मेरा दिमाग अभी इतना नहीं चल पा रहा है डोगा, मुझे सिर्फ मामा..मेरा मतलब प्रोफेसर की फ़िक्र है।

………………………………..तिरंगा, डोगा और परमाणु प्रोफेसर कमलकांत की खोज में लग जाते हैं। लैब के अलग अलग हिस्सों में जाकर वे प्रोफेसर की खोज करते हैं। तभी तिरंगा को कुछ नज़र आता है, वो डोगा और परमाणु को आवाज़ देता है।

तिरंगा- डोगा! परमाणु! यहाँ आओ!

परमाणु- क्या हुआ?

तिरंगा- मैंने ये दीवार चेक की तो देखा कि ये एक गुप्त दरवाज़ा इसके पीछे लगा हुआ है।

परमाणु- मुझे..इस बारे में नहीं पता था! सब लोग पीछे हटो, मैं ब्लास्ट करके ये दरवाज़ा खोलता हूँ।

परमाणु(ख़ुशी से)- प्रोफेसर, आप यहाँ!

…………………….तभी वो प्रोफेसर की तरह दिखने वाला व्यक्ति ऊपर की तरफ देखता है, उसकी आँखों में से एक लाल किरण निकलती है जो उस जगह पड़ती है जहाँ तीनो लोग खड़े होते हैं पर तब तक वो लोग फुर्ती दिखाते हुए बच जाते हैं। वो व्यक्ति एक तेज़ छलांग लेता हुआ बाहर आता है, परमाणु ध्यान देता है कि प्रोफेसर जैसे दिखने वाले उस व्यक्ति की आँखें मशीनी होती हैं।

परमाणु- प्रोफेसर कहाँ हैं? और तू कौन है?

डोगा- ये तो रोबोट जैसा है पर लग इंसान बिल्कुल रहा है।

…………………………………जवाब में वो व्यक्ति एक मशीनी लहज़े में जवाब देता है”मेरा नाम प्रोबोट है!मैं एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हूँ मुझे प्रोफेसर कमलकांत ने बनाया है। उन्होंने मुझे किसी ऐसी स्थिति में एक्टिवेट होने का आदेश दिया था जब लैब पर किसी प्रकार का हमला हो रहा हो।

परमाणु- तो तुमको लगा कि हम लोग लैब पर हमला करने आये थे।

प्रोबोट- हाँ, तभी मैंने एकदम से हमला किया पर फिर मेरे आँखों के सेंसर ने तुम्हारा फेशियल स्कैन किया परमाणु और तुम्हारे बारे में मुझे सब कुछ पता चल गया।

परमाणु- तो तुमको पता है कि प्रोफेसर कहाँ गए?

प्रोबोट- क्या मतलब? वो मिल नहीं रहे हैं क्या?

परमाणु- तुम तो लैब में थे ना, तो तुमको नहीं पता की क्या हुआ है?

प्रोबोट- मैं डीएक्टिवटेड मोड पर था, अगर तुमने दरवाज़ा नहीं तोड़ा होता तो मैं एक्टिवेट नहीं होता।

परमाणु- यानि कि तुमको भी नहीं पता कि प्रोफेसर कहाँ गए?

प्रोबोट- नहीं, पर पता लग सकता है।

परमाणु- कैसे?

प्रोबोट- इस लैब में कई गुप्त क्लोज सर्किट कैमरे हैं, प्रोफेसर के बारे में इनसे जानकारी मिल सकती है।

…………………………फिर प्रोबोट एक कंप्यूटर को ऑन करता है और सबकी नज़र मॉनिटर पर चली जाती है।

प्रोबोट- प्रोफेसर के गायब होने का समय पता है किसी को?

परमाणु- मेरे पास मैसेज दो बजे आया था तो तुम बारह से दो बजे तक की सारी फुटेज निकालो।

………………………………..फिर जो परमाणु स्क्रीन पर देखता है उससे उसकी आँखें फ़ैल जाती हैं। मॉनिटर पर नज़र आता है कि प्रोफेसर कमलकांत आराम से कुर्सी पर बैठे हुए हैं पर तभी अचानक से ही हवा में एक पोर्टल खुला और दो नकाबपोश प्रकट हुए। प्रोफेसर ने एकदम से चौंककर एक बटन दबाया जिससे लैब के डिफेंस सिस्टम ऑन हो गए, चारों तरफ से लेज़र बीम निकलकर उन नकाबपोशों पर गिरने लगी पर उनकी पोशाक पर कुछ असर नहीं हुआ फिर दोनों नकाबपोश प्रोफेसर को पकड़कर उसी हवा में प्रकट द्वार से दूसरी तरफ ले गए। परमाणु के चेहरे पर चिंता और क्रोध के मिलेजुले भाव आ गए, वो चुपचाप ज़मीन पर बैठ गया। डोगा और तिरंगा एक दूसरे को देखने लगे।

डोगा- कोई..आईडिया है कि ये किसका काम हो सकता है?

परमाणु- मैंने तो इतने सालों में हज़ारों दुश्मन बनाये हैं पर जब उनको मेरे बारे में ही नहीं पता तो प्रोफेसर के बारे में कैसे पता होगा।

तिरंगा- कमलकांत वर्मा सिर्फ तुम्हारे निर्माता ही नहीं बल्कि इस देश के एक जाने माने साइंटिस्ट भी थे और ऐसे आदमी के कई दुश्मन होते हैं ऊपर से सबको ये पता है कि परमाणु सूट के अविष्कारक वही हैं।

डोगा- पर एक बात तो तय है कि ये हरु का काम नहीं है।

परमाणु- नहीं, हरु ऐसे हमले कर रहा है जिससे बड़े स्तर पर नुक्सान हो सकते हैं और वैसे भी उसका प्रोफेसर से क्या लेना देना?

तिरंगा- तो फिर आखिर ये दो नकाबपोश थे कौन जिनके सामने इस लैब की सुरक्षा प्रणाली भी नाकाम हो गयी?

प्रोबोट- मुझे अफ़सोस है कि मैं तुम लोगों सिर्फ इतनी ही मदद कर पाया पर जब तक प्रोफेसर वापस नहीं आते, मैं उनके स्थान पर तुम्हारी सहायता कर सकता हूँ परमाणु।

………………………दूसरी तरफ ध्रुव, नागू, फेसलेस और भेड़िया जेट के द्वारा अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे होते हैं।

ध्रुव- तुमने बताया नहीं नागू कि उस जगह का नाम क्या है?

नागू- नागद्वीप! नागों की उस सुन्दर बस्ती का नाम है नागद्वीप!

ध्रुव- तो छह साल पहले रिसर्च सेंटर वाली घटना के बारे में तुमको कुछ पता है?

नागू- पता क्या करना है, मैं भी उस घटनाक्रम का एक छोटा सा हिस्सा था।

ध्रुव- अगर तुम बुरा न मानो तो क्या मैं पूछ सकता हूँ कि वास्तव में हुआ क्या था?

नागू- रिसर्च सेंटर में नागों पर अवैध प्रयोग होते थे। एक दिन हमारे युवराज विषप्रिय को कुछ लोग उठा ले गए, नागराज तब यहीं था। वो जब रिसर्च सेंटर पहुंचा तो देखा कि विषप्रिय और नागद्वीप का ही एक दूसरा नाग वायुनाग मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं फिर नागराज ने उस रात रिसर्च सेंटर को एक मलबे में बदल दिया। नागराज मनुष्यों का सबसे बड़ा हिमायती था, समाज ने इच्छाधारियों का इतना तिरस्कार किया फिर भी उसने हमेशा मानवों का अच्छा पहलू देखने की कोशिश की पर उस घटना के बाद से उसके अंदर का विश्वास ख़त्म हो गया और वो ज़्यादातर नागों के साथ नागद्वीप लौट गया।

ध्रुव- तो फिर तुम नागद्वीप क्यों नहीं गए?

नागू- मेरा तो धंधा पानी यहीं पर सेट है, नागद्वीप जाकर क्या करता? पर तब हम सबने मिलकर प्रण लिया था कि मानवों के अच्छे बुरे वक्त में कभी दखल नहीं देंगे और हमने ये प्रण अच्छे से निभाया था..अभी तक।

ध्रुव- तो अब तुमने क्यों दखल दिया?

नागू- अभी दखल इसलिए देना पड़ा क्योंकि ये मामला सिर्फ मानवों से जुड़ा नहीं है, हरु पृथ्वी पर रहने वाली हर प्रजाति को अपना गुलाम बनाना चाहता है।

……………………………………तभी एकदम से जेट को एक तेज़ धक्का लगा, ध्रुव ने जेट को संभाला फिर भेड़िया ने खिड़की से कुछ देखा।

भेड़िया- बाहर एक बहुत बड़ा उड़ने वाला सर्प है!

फेसलेस- क्या ये हरु का हमला है?

ध्रुव- बेशक! पर अब तक तो वो शहरों को निशाना बना रहा था, अब वो हम लोगों को क्यों निशाना बना रहा है?

फेसलेस- बहुत सीधी सी बात है, हम लोगों ने उसके ज़्यादातर हमले विफल किये हैं जिसके कारण वो बौखला गया है और उसका ध्यान हम लोगों पर केंद्रित हो गया है।

भेड़िया- अरे! ये तो इस जेट को बहुत ही तगड़ा धक्का दे रहा है! ऐसे तो ये जेट को गिरा देगा! मुझको बाहर जाकर इससे निपटना होगा।

ध्रुव- जेट की स्पीड बहुत तेज़ है भेड़िया अगर तुम जेट के ऊपर जाकर इससे लड़ने का प्रयास करोगे तो संतुलन नहीं बना पाओगे!

भेड़िया- मैं जेट के ऊपर नहीं जा रहा हूँ बल्कि इस विशाल उड़न सर्प की पीठ पर जा रहा हूँ।

…………………………………….ध्रुव जेट के दाहिने तरफ का दरवाज़ा खोलता है, उड़न सर्प जेट के एकदम बगल में ही होता है। भेड़िया अपनी पूँछ निकालकर उस सर्प के शरीर पर बांधता है और जेट से छलांग लगाकर उसकी पीठ पर जा बैठता है। सर्प उसकी इस हरकत से बौखलाकर अपनी आँखों से एक किरण निकलता है जो कि जेट से टकराती है और जेट के सारे फंक्शन बंद हो जाते हैं।

ध्रुव- नागू और फेसलेस! हमें नीचे कूदना होगा तुरंत!

……………………………….नीचे समुद्र होने के कारण ध्रुव, फेसलेस और नागू बिना कुछ सोचे समुद्र में छलांग लगा देते हैं।

ध्रुव- उम्फ्फ्! अच्छा हुआ कि नीचे ठोस ज़मीन नहीं थी!

नागू- होती तो भी कोई समस्या नहीं थी, मैं अपनी मणि से पैराशूट बना देता।

ध्रुव- भेड़िया तो अभी उस सर्प से ही उलझा होगा। वो सामने द्वीप थोड़ा निर्जन लगता है, उसी पर चलते हैं।

…………………………तीनों लोग उस द्वीप पर पहुँचते हैं कि तभी एकदम से अचानक सैकड़ों इच्छाधारी आकर उन लोगों को घेर लेते हैं।

ध्रुव- अरे वाह! लगता है कि नागद्वीप पहुँच गए हम!

नागू- कैसे हो दोस्तों? अपने भाई बंधुओं के साथ अब तुम ऐसा मज़ाक करोगे?

………………………कि तभी उनमे से एक इच्छाधारी नाग बोलता है ” सब सावधान हो जाएं! नागद्वीप के रक्षक और हमारे परम योद्धा आ रहे हैं! आ रहे हैं हमारे….रक्षक नागराज!” तभी सभी सर्प हटकर जगह बनाते हैं और एक बलिष्ठ हरे शल्क वाला युवक सामने खड़ा होता है जिसके पीछे पंचनाग खड़े होते हैं।

नागराज- मानव? नागद्वीप की परिधि में मानव?

…………………………एक अँधेरी जगह पर नगीना की आँखें खुलती हैं!

नगीना- उफ्फ! बड़ा ही ज़ोर का वार किया था कालदूत ने! अब पता नहीं मैं निष्कासित होकर कहाँ पर आ गयी?

…………………………….फिर नगीना खड़ी होती है और अपने आसपास के स्थान को अच्छे से निहारती है। वो बहुत ही भयानक स्थान होता है जहाँ पर मुर्दे चल रहे होते हैं और कई खोपड़ियां पड़ी होती हैं।

नगीना- ये..ये कैसी जगह है?

…………………………………तभी एक रहस्मय व्यक्ति की आवाज़ आती है ” तुम छह वर्षों से बेहोशी की अवस्था में थीं! पर ये बात सामान्य है, पिछली बार जिस नाग को कालदूत ने निष्कसित किया था, वो दस वर्ष बेहोशी की हालत में रहा था!”

नगीना- मैं..मैं छह वर्षों से बेहोश थी! नहीं, मुझे तुरंत वापिस जाना होगा!

……………………वो रहस्मय आवाज़ फिर से गूंजती है” महात्मा कालदूत जिसको भी यहाँ भेजते हैं उसको सिर्फ मृत्यु ही यहाँ से आज़ाद कर सकती है!”

नगीना- तो तू मुझे रोकेगा! तेरी लाश पर से होती हुई जायेगी नगीना!

………………………नगीना एक तंत्र वार उस व्यक्ति पर करती है पर उस पर बिल्कुल भी उस वार का असर नहीं होता, वो अँधेरे से निकलकर थोड़ा प्रकाश में आता है जहाँ उसका चेहरा साफ़ नज़र आ रहा होता है।

वो बोलता है” मेरा नाम एन्थोनी गुंजालवेज़ है और मैं इस जगह का रक्षक हूँ! ये मुर्दों की दुनिया है और यहाँ से तब तक कोई नहीं जा सकता जब तक मैं नहीं चाहता! मुर्दों की इस दुनिया में स्वागत है नगीना!”

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Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli 

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11 Comments on “Earth 61 Part 10 (Probot)”

  1. bahot badiya part.. is baar mjhe isme koi khaami nhi mili..
    SCD Faceless ka nagdweep pr jaana…. bade event ka plan
    aur Professor ka apaharan…
    but sbse bada twist to anthony ki entry lagi mjhe…..
    bahot badiya part h yh..
    aap haveli pr naya benchmark bana rhe h
    aur aap khud bhi apne benchmark ko toda h…
    bahot lucky mahsoos kr rha hn jo aapki story ko pdh paya.

  2. bahot badiya part…
    isme koi khaami nhi mili mjhe
    SCD aur faceless ka nagdweep pr jaana
    aur best part anthony ki entry
    maza aa gya bhai..
    aap khud hi benchmark set kr rhe aur khud hi usse tod kr naya bana rhe hn
    is part k baad se aapse umeede bdh gyi..

  3. I think story is going too serious and some light moments should be added in this.
    so far I’m liking the story and characters are bound pretty well in story line.

  4. bahot badiya part…
    isme koi khaami nhi mili mjhe
    SCD aur faceless ka nagdweep pr jaana
    aur best part anthony ki entry… XOXO
    maza aa gya bhai….
    aap khud hi benchmark set kr rhe aur khud hi usse tod kr naya bana rhe hn
    is part k baad se aapse umeede bdh gyi..

  5. bahot badiya part…
    isme koi khaami nhi mili mjhe
    SCD aur faceless ka nagdweep pr jaana
    aur best part anthony ki entry
    maza aa gya bhai..
    aap khud hi benchmark set kr rhe aur khud hi usse tod kr naya bana rhe hn
    is part k baad se aapse umeede bdh gyi..
    keep it up

  6. bahot badiya ja rhi h story…
    aapki story mein din pr din interest bdh rha h
    finally SCD faceless aur Nagraj ki mulaqat hogi…
    aur is part mein best chiz mjhe Anthony ka aana laga
    aap jese RC characters ko story mein add kr rhe kaabil-e-taarif h…..
    aap khud hi benchmark bana rhe h aur usko todd kr naya bana rhe h …
    ese hi stories likhte rahiye esi meri kaamna h ….

  7. गज़ब बहुत ही गज़ब, भाई कमाल कर दिया आपने हर्षित जी। बहुत ही धांसू, ऐसे आइडियाज तो हमारे दिमाग में आ ही नही पाते, बहुत ही अच्छा लगा यह दसवां पार्ट।

    आखिर कौन हैं वो लोग जिन्होंने प्रोफ़ेसर कमलकांत को उठा लिया।

    क्या इच्छाधारी नागजाती तैयार हुई मानवों की मदद के लिए? तैयार तो उन्हें होना ही होगा क्योंकि हरुओं से उन्हें भी खतरा है।

    पूरी स्टोरी बहुत अच्छी लगी,और लास्ट में एन्थोनी की एंट्री ने तो एकदम हिला कर रख दिया।

  8. I’m sorry I’m late
    And now I’m scolding myself why I was late
    Such an amazing story is having having such amazing turning points
    Harshit ji you surely know how to keep readers intact with your story
    Bahut hi gajab likhi hai
    Aisa lag raha hai RC ka hi base chal raha hai
    Har event ek totally naye tarike se present kiye ja rahe hain
    Bahut hi jabardast
    Abhi aage k parts padhne hain
    Wo dono nakabposh ko to main guess kar pa raha hu
    Aage k part me pata chalega k main sahi hu ya nahi
    But really you’re an amazing writer
    Is part me mujhe kuch bhi khami nahi lagi
    It was such a perfect one
    10 saal k liye kaun behosh the jisko kaldoot ne bheja tha?
    Nagraj Dhruv aur baki logo k sath kaisa vyavahar karega?
    Nagdweep to bahut bada role nibhane wala hai is story me
    Kamal kant ko jo log utha le gye wo log kyun le gye ye bahut bada question hai
    And there comes our Anthony in a totally new and awesome genre
    Superb

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