Earth 61 Part 11 (Rakshak Anthony)

EARTH-61

PART 11. 

(Rakshak Anthony)

[ Written By Samvart Harshit for Comic Haveli ]

नागद्वीप की सीमा पर बहुत हलचल थी क्योंकि ऐसा रोज़ नहीं होता कि कोई मानव नागद्वीप पर कदम रखे। नागद्वीप के सैनिकों ने ध्रुव, फेसलेस और नागू को घेर लिया था और उनके सामने खड़ा था नागद्वीप का सबसे शक्तिशाली रक्षक….नागराज! नागराज इन छह वर्षों में किशोर से युवा हो गया था, उसके चेहरे पर इस वक्त गंभीर भाव थे शायद छह साल पहले के उसके ज़ख्म फिर से मानवों को देखकर ताज़ा हो गए थे।

नागराज- मानव? यहाँ नागद्वीप पर? तुम इनको यहाँ लेकर आये हो नागू?

नागू- हाँ नागराज, मैं ही इनको लेकर यहाँ आया हूँ, आज दुनिया एक बहुत बड़े संकट में है और इससे निपटने के लिए संसार की सभी प्रजातियों को एक साथ खड़ा होना होगा।

नागराज- तो इसका मतलब ये हुआ कि तुम किसी भी मानव को इस द्वीप पर ले आओगे? मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी नागू।

ध्रुव- शायद तुमने मुझे नहीं पहचाना पर मैं तुमको पहचान गया हूँ नागराज।

नागराज- क्या हम पहले मिले हैं? ध्रुव- हाँ, जब तुम शहर में थे तब तुमने मेरे प्रतिशोध में मेरी मदद की थी..मैं हूँ ध्रुव!

नागराज- ध्रुव? तुम वही हो जिसका सर्कस जला दिया गया था?

ध्रुव- हाँ, तब तुमने मेरी मदद की थी।

नागराज- तो मुझे बताओ ध्रुव कि ऐसा क्या खतरा आ गया है पृथ्वी पर कि तुमको नागों के इस द्वीप पर आना पड़ा?

ध्रुव- अपने आप को हरु कहने वाला एक जीव पृथ्वी पर आ गया है और वो बेहद शक्तिशाली है। सरकार के आदेश पर उसकी शक्ति का सामना करने के लिए मैं एक टीम बना रहा हूँ। अगर इच्छाधारी नाग भी हमारा साथ देते हैं तो हमारी लड़ाई आसान हो जायेगी।

नागराज- तुमको पता है छह साल पहले क्या हुआ था ध्रुव?

ध्रुव- नागू ने मुझे बताया कि सरकार के बनाये हुए प्रतिरोधी दल की वजह से तुम्हारे दो साथी मारे गए थे।

नागराज- बहुत ही आसानी से कह दी तुमने ये बात। जानते हो उसमें से एक नाग कौन था? हमारा युवराज विषप्रिय। उस दिन तुमने हमसे हमारे नागद्वीप के भविष्य को दूर कर दिया। पहले तो सरकार को इच्छाधारी नाग खतरा लगते थे तो अब क्या हुआ? अब हमसे मदद मांगते हुए क्यों नहीं डर रही है सरकार?

ध्रुव- तुम्हारे साथ जो हुआ वो अच्छा नहीं हुआ पर अगर तुम लोग हमारा साथ नहीं दोगे तो हरु तुम्हारे लिए भी एक बड़ी समस्या बनेगा।

नागराज- नागद्वीप के योद्धा अकेले ही हरु के लिए काफी होंगे, हमको मानवों के साथ मिलकर काम करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

………………………………..ये कहकर नागराज पलटकर जाने लगता है कि तभी ध्रुव चिल्लाता है।

 [ Written By Samvart Harshit for Comic Haveli ]

ध्रुव- तुम कोई नायक नहीं हो नागराज! नायक बदले की भावना अपने अंदर नहीं रखते, तुम एक कायर व्यक्ति हो!

……………………………..अचानक जाते हुए नागराज के कदम रुकते हैं, वो पीछे मुड़ता है और जाकर ध्रुव का गला पकड़कर उसे हवा में उठा देता है।

नागू- ये..ये क्या कर रहे हो नागराज?

नागराज- ये मानव अपने आप को समझते क्या हैं! पहले हमारे युवराज को मारा और अब हमसे मदद मांगने चले आये!

……………………………तभी अचानक से भेड़िया उड़न सर्प से लड़ता हुआ “छपाक”से समुद्र में गिरता है और सबका ध्यान वहीं पर चला जाता है। नागराज भी ध्रुव को अपनी पकड़ से आज़ाद करता है। कुछ समय तक पानी में से गड़गड़ की आवाज़ होती है और फिर भेड़िया एक विजयी भाव से निकलकर पानी से बाहर आता है, वो सीधे नागराज की तरफ बढ़ता है। नागराज के चेहरे के गंभीर भाव भी भेड़िया को देखकर शांत हो जाते हैं ,वो और भेड़िया गले मिलते हैं।

भेड़िया- हा..हा..कैसे हो मित्र? बड़े दिनों से कोई खबर ही नहीं दी तुमने?

नागराज- क्षमा करना मित्र पर बाहरी दुनिया में जाने का मन ही नहीं किया।

भेड़िया- कोई बात नहीं, अब मैं और तुम साथ में चलेंगे और उस हरु से मिलकर लड़ेंगे!

……………………………….ये बात सुनते ही नागराज के चेहरे पर आई कुछ पल की मुस्कान चली जाती है और वो फिर गंभीर हो जाता है।

नागराज- मुझे..कुछ सोचना पड़ेगा।

……………..फिर वो नागसैनिकों की तरफ पलटता है।

नागराज- भेड़िया और बाकि सब को कुछ देर आरामगाह में रखो, मुझे इस निर्णय के लिए थोड़ा समय चाहिए।

……………………….इतना कहकर वो वहाँ से चला जाता है। ध्रुव, नागू, फेसलेस और भेड़िया भी जाने लगते हैं कि तभी समुद्र में से अचानक उड़न सर्प वापस निकल आता है।

भेड़िया- ये..ये कैसे संभव हुआ? मैंने तो इसे पूरी तरह नष्ट कर दिया था!

ध्रुव- लगता है कि इसके साथ भी मरेत वाला केस है। जितनी बार भी ख़त्म करोगे उतनी बार अपने आप जी उठेगा क्योंकि यह हरु ऊर्जा से बना हुआ प्राणी है।

नागराज- चाहे जो भी हो, कोई भी नागद्वीप पर तबाही नहीं मचा सकता, सब लोग तैयार हो जाओ।

…………………..नागसैनिक उस उड़न सर्प पर अपने हथियार फेंककर मारते हैं और उनका साथ देने पंचनाग भी आ जाते हैं पर उड़न सर्प पर उनकी शक्ति का कोई असर नहीं होता। फिर नागराज आगे बढ़ता है और उड़न सर्प पर अपनी तीव्र विषफुंकार का प्रयोग करता है जिससे सर्प काफी विचलित हो जाता है।

ध्रुव- कमाल है, ये सर्प नागराज की शक्ति से विचलित क्यों हो रहा है?

भेड़िया- क्योंकि नागराज के अंदर देव कालजयी का दैवीय विष है और दैवीय शक्ति हमेशा हरु शक्ति को काटती है इतना तो हम लोग जान ही चुके हैं।

ध्रुव- तुम्हें तो बहुत पता है नागराज के बारे में।

भेड़िया- मेरा और नागराज का अतीत आपस में जुड़ा हुआ है, कभी फुरसत से सारी कहानी सुनाऊंगा।

[ This Story Is Written By Samvart Harshit for Comic Haveli ]

……………………नागराज अपने नागफनी सर्प छोड़ता है जो उड़न सर्प को काटकर रख देते हैं, सब लोग ख़ुशी से चिल्लाते हैं पर फिर देखते हैं कि उड़न सर्प के कटे हुए टुकड़े फिर आपस में जुड़ने लगे हैं।

नागराज- उफ्फ! ऐसे तो ये कभी ख़त्म ही नहीं होगा, या फिर शायद हो सकता है।

………………………………फिर नागराज उड़न सर्प के सामने शांति से खड़ा हो जाता है और अपना एक हाथ आगे करता है, उड़न सर्प अचानक से हमला करते करते रुक जाता है। उड़न सर्प नागराज की तरफ एक अजीब खिंचाव महसूस करता है, फिर एकदम से ही वो जाकर नागराज की कलाइयों में समा जाता है। ये करिश्मा देखकर ध्रुव के आश्चर्य की सीमा नहीं रहती।

ध्रुव- ये..ये अभी इसने क्या किया?

भेड़िया- उसके शरीर में असंख्य सर्प वास करते हैं और उसे अपना सम्राट मानते हैं और ये उड़न सर्प भी एक प्रकार का सर्प ही था तो भला नागराज के आदेश की अवहेलना कैसे करता?

ध्रुव- यानि की नागराज ने एक जीती जागती हरु शक्ति को अपने शरीर में आवास दे दिया! ये तो मैं पहली बार देख रहा हूँ!

…………………………………फिर नागराज पलटकर बाकि लोगों की तरफ आता है।

नागराज- सैनिकों! हमारे मेहमानों के लिए आरामगाह तैयार करो और महात्मा कालदूत को देखो कि वो अभी तक साधना से जागे हैं या नहीं!

……………………….फिर ध्रुव्, फेसलेस, नागू और भेड़िया आरामगाह में बैठे होते हैं।

भेड़िया- आज की इस लड़ाई में तो मज़ा आ गया पर एक बात मेरे समझ में नहीं आ रही..कि तुम इतनी देर से इतने शांत क्यों हो फेसलेस?

ध्रुव- हाँ फेसलेस, जबसे हम लोग नागद्वीप पर आये हैं तबसे तुम्हारे मुंह से कोई बात नहीं निकली।

नागू(मजाकिया अंदाज़ में)- ऐसा लग रहा था कि बेचारा नागराज को देखकर झटका खा गया है।

फेसलेस- ऐ..ऐसी कोई भी बात नहीं है, बस इतनी यात्रा की है हम लोगों ने तो थोड़ी थकावट है बाकि कुछ भी नहीं!

………………………………….फिर ध्रुव आगे के प्लान्स बनाने लगता है पर फेसलेस के दिमाग में उस वक्त कुछ भी नहीं घुस रहा था और फेसलेस के नकाब के अंदर भारती बड़ी ही मुश्किल से अपने आंसुओं को रोक पायी थी जो नागराज को इतने लंबे समय बाद देखने के कारण निकले थे। दूसरी तरफ नागराज कालदूत से मिलने के लिए उनकी गुफा में जाता है।

नागराज- प्रणाम महात्मन्! मैंने सैनिकों को देखने भेजा था की आप साधना से उठे या नहीं!

कालदूत- आओ नागराज! मुझे सारी घटना से अवगत कराया गया है!

नागराज- तो आपका क्या विचार है इस बारे में?

कालदूत- मैं तो कहूँगा कि तुमको वो हर ज़रूरी काम करना चाहिए जो हरु को रोकने के लिए आवश्यक है भले ही उसके लिए तुमको मानवों के साथ कुछ समय के लिए संधि ही क्यों ना करनी पड़े।

नागराज- जो हमारे साथ हुआ उसके बाद भी आप….?

कालदूत- जो हमारे साथ हुआ ये उसके बारे में नहीं है नागराज। ये सोचो कि आगे हमारे साथ क्या होगा? हम हरु नाम की उस महाशक्ति से वाकिफ हैं पर ऐसा मौका कभी नहीं आया कि हमें उसका सामना करना पड़ा हो। वर्ना छह साल बाद मानव हम इच्छाधारियों के पास मदद के लिए कभी नहीं आते।

नागराज- कह तो आप ठीक रहे हैं कालदूत, अब मुझे विसर्पी से भी बात करनी है एक बार।

कालदूत- ठीक है, वैसे भी ये सब ख़त्म होने के बाद मैं तुम्हारी और विसर्पी की शादी के बारे में ही सोच रहा था।

नागराज- महात्मन् ये आप.. कालदूत- देखो नागराज, छह साल पहले विसर्पी ने अपना भाई खो दिया था, फिर दो साल पहले मणिराज भी गुज़र गए और उस नगीना को तो उससे कभी कोई लगाव था ही नहीं जिसके कारण हमें उसको मुर्दों की दुनिया में भेजना पड़ा। अब तुम ही उसके अपने हो और तुम दोनों आपस में प्रेम भी करते हो। इसके आलावा नागद्वीप को भी अब एक कार्यकारी सम्राट की आवश्यकता है, आखिर विसर्पी कब तक राजदंड के भार का वहन अकेले करेगी? कभी न कभी तो तुमको उसका साथ देना ही होगा।

नागराज- मैं तैयार हूँ महात्मन्, हरु की समस्या से निपटने के बाद मैं विसर्पी से शादी कर लूँगा, पर फिलहाल मुझे उसको इस बारे में अवगत करना होगा।

……………………………….इतना कहकर नागराज नागरस्सी पर झूलता हुआ वहां से निकल जाता है और सीधा पहुँचता है राजमहल में जहाँ विसर्पी महल की छत पर खड़ी होकर उसी की राह देख रही होती है।

नागराज- माफ़ करना, आज थोड़ी देरी हो गयी!

विसर्पी- कोई बात नहीं, मुझे पता चला की क्या हुआ है।

नागराज- मैं जानता हूँ कि तुम्हारी कुछ कड़वी यादें ताज़ा हो गयी होंगी विसर्पी पर तुम एक मज़बूत शख्सियत हो और इसका प्रमाण तुमने इतने साल तक यहाँ का राज़ संभालकर दे दिया है।

विसर्पी- मुझसे और नहीं होगा नागराज, तुम्हारे बिना तो बिल्कुल नहीं होगा।

नागराज- जाना तो मुझे होगा ही, वर्ना नागद्वीप को भी हरु निशाना बनाने का प्रयास करेगा।

विसर्पी- मैं भी साथ चलूंगी तुम्हारे।

नागराज- नहीं विसर्पी, तुम्हारी अनुपस्थिति में नागद्वीप के अराजकतत्व अपना सर उठाने का प्रयास करेंगे।

विसर्पी- उनको संभालने के लिए कालदूत तो होंगे ही।

नागराज- कालदूत सब कुछ नहीं संभाल सकेंगे विसर्पी और पंचनागों को मैं अपने साथ लेकर जा रहा हूँ। ऐसे में मेरी अनुपस्थिति में नागद्वीप की सुरक्षा की पूरी ज़िम्मेदारी बनती है नागद्वीप की साम्राज्ञी यानि तुम्हारी..और लौटने के बाद तुमसे मुझे एक और ज़रूरी बात करनी है..हमारी शादी के बारे में।

…………………………………..ये सुनते ही विसर्पी एकदम से नागराज के गले लग जाती है। उसकी आँखों से कुछ आंसू छलक आते हैं।

[ This Story Is Written By Samvart Harshit for Comic Haveli ]

नागराज- अब मुझे जाने की तैयारी करनी होगी और पंचनागों को भी सूचित करना होगा।

…………………………………फिर नागराज पंचनागों को ढूँढने निकल पड़ता है। वो देखता है कि पंचनाग ध्रुव के पास बैठे हैं और उसके किसी जोक पर हंस रहे हैं, वे नागराज को आते देख एकदम से शांत हो जाते हैं।

नागराज- नागप्रेती, सर्पराज, सिंहनाग, नागदेव और नागार्जुन!

पंचनाग(एक साथ)- क्या हुआ?

नागराज- तुम लोग मेरे साथ चलोगे बाहरी दुनिया में।

ध्रुव(ख़ुशी से)- यानि..तुम हमारी मदद करोगे हरु से लड़ने में।

नागराज- हाँ, पर इसे दोस्ती का हाथ समझने की कोशिश मत करना ध्रुव! हम लोगों की दोस्ती कभी नहीं हो सकती और तुम सब तैयार हो जाओ पंचनागों, हमें कल सुबह निकलना है।

………………………………….फिर नागराज सर्परस्सी से होते हुए चला जाता है।

ध्रुव- ये तो अब भी काफी सीरियस है।

नागप्रेती- दिल का बहुत ही अच्छा है बस हालातों ने उसे ऐसा बना दिया है।

ध्रुव- कोई बात नहीं, अब ये तो वक्त ही बताएगा कि नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव की दोस्ती हो पाएगी या नहीं।

 नगीना मुर्दों की दुनिया में कैद थी, वो एक कोने में बैठी हुई थी और वीभत्स मुर्दों को चलते हुए देख रही थी। वो अब तक समझ चुकी थी कि एंथोनी से सीधे सीधे भिड़ने का कोई मतलब नहीं है। वो अपने मन में सोच रही थी “ये जगह तो अच्छे अच्छों का दम निकाल दे, तो अब मुझे पता चला कि कालदूत नागों को निष्कासित करके कहाँ भेजता है।” तभी उसे एक आवाज़ सुनाई देती है” रानी नगीना!” वो आवाज़ की दिशा में देखती है तो नागतांत्रिक विषधर खड़ा होता है।

नगीना- विषधर! तुम यहाँ?

विषधर- मैं भी कई सालों से यहाँ पर कैद हूँ, कालदूत भांप गया था की उस शिशु के आने पर विद्रोही दल के नाग कुछ हरकत करेंगे और मैं उस शिशु को मारने वाला था..नागद्वीप की गद्दी हड़पने के लिए।

नगीना- किस वक्त की बात कर रहे हो विषधर? अब वो शिशु काफी बड़ा हो गया है और शक्तिशाली भी। उसका नाम नागराज है।

विषधर- मैं इतने समय से यहाँ कैद हूँ कि समय का कोई पता ही नहीं है। फिर मैंने आपको यहाँ आते देखा, आप कई वर्ष बेहोश रहीं। मैं आपके होश में आने का इंतज़ार करता रहा। आप कैसे निष्कासित हुईं?

नगीना- मेरे पुत्र विषप्रिय की हत्या हो गयी थी..वो विसर्पी ज़िम्मेदार है उसके खून की!

विषधर- विसर्पी कौन?

नगीना- एक ऐसी बेटी जो मुझे कभी नहीं चाहिए थी, अब तक तो नागद्वीप का राज़ उसके हाथ में आ गया होगा। मुझे यहाँ से निकलना होगा।

विषधर- मैंने भी काफी बार कोशिश की यहाँ से निकलने की पर वो मुर्दों की दुनिया का रक्षक एंथोनी बेहद ताकतवर है।

नगीना- ये एंथोनी इतना शक्तिशाली कैसे है?

विषधर- यहाँ इतने वर्ष काटकर मुझे ये पता चल गया है कि ये पहले एक मनुष्य था जिसे मृत्यु के बाद किसी प्रकार से ढेर सारी शक्तियां मिली हैं।

नगीना- इससे निपटा कैसे जाए?

विषधर- पता नहीं। हमारी तंत्र शक्तियां तो ज़िंदा को मारने के काम आती हैं पर मरे हुए को कैसे मारा जा सकता है? अब तो किसी चमत्कार से ही बचा जा सकता है।

……………………………….तभी मुर्दों की उस दुनिया में एक पोर्टल खुलता है और दो काले नकाबपोश उसमे से बाहर आते हैं..वही नकाबपोश जिन्होंने प्रोफेसर कमलकांत को गायब किया होता है। नगीना और विषधर के साथ साथ कई और मुर्दों का ध्यान भी उन पर चला जाता है। एक नकाबपोश नगीना और विषधर को देखता है और उनके पास जाता है।

नकाबपोश- तुम नगीना हो?

नगीना- हाँ!

नकाबपोश- हम तुमको ले जाने आये हैं।

…………………………तभी उस नकाबपोश पर ठंडी आग का वार होता है और वो दूर जा गिरता है। एंथोनी का प्रवेश होता है।

एंथोनी- मुझे तारीफ करनी होगी तुम दोनों की, तुमने महात्मा कालदूत और इरी के संयुक्त प्रयासों से मिलकर बनाये गए इस आयाम के द्वार को एक झटके में खोल दिया। अब आये तो तुम लोग अपनी मर्ज़ी से हो पर जाओगे नहीं।

………………………….एक नकाबपोश बेहद एडवांस्ड गन निकालकर एंथोनी को मारता है पर एंथोनी उस गन के वार से बच जाता है, वो टेलिपोर्ट होकर सीधे उस नकाबपोश के पीछे पहुँचता है और ज़ोरदार घूंसे से उसको दूर उछाल देता है। दूसरा नकाबपोश एंथोनी पर तंत्र वार करने का प्रयास करता है पर एंथोनी उसको भी अपनी प्रचंड ठंडी आग से विफल कर देता है।

एंथोनी- कौन हो तुम लोग?

[ This Story Is Written By Samvart Harshit for Comic Haveli ]

…………………………………..इसके जवाब में दोनों नकाबपोश अपना नकाब उतारते हैं। वो होते हैं….गुरुदेव और नागपाशा!

नागपाशा- मैं हूँ नागपाशा और ये हैं मेरे गुरुदेव।

गुरुदेव- हम यहाँ पर नगीना को छुड़ाने आये हैं।

नगीना- तुम लोग मेरे बारे में कैसे जानते हो?

नागपाशा- हम नागद्वीप के बारे में भी जान गए हैं और कालदूत के बारे में भी। कैसे? ये तो एक लंबी कहानी है, इसके पीछे छह साल की मेहनत है।

एंथोनी- नगीना तो मेरे होते हुए यहाँ से नहीं जायेगी।

गुरुदेव- देखते हैं।

………………………….गुरुदेव के एक इशारे पर नागपाशा पूरी शक्ति से एंथोनी से जाकर भिड़ जाता है।

नागपाशा- तू मर चुका है और मुझे मारा नहीं जा सकता, इस मुकाबले में मज़ा आने वाला है।

एंथोनी- बिल्कुल!

…………………………..नागपाशा अपनी प्रचंड तंत्र शक्तियों का प्रयोग करने लगता है और एंथोनी भी अपनी ठंडी आग से उसके वारों को रोकता है, इसी दौरान गुरुदेव एक आयमद्वार खोलता है।

गुरुदेव- जल्दी करो नगीना! अपने चेले को लेकर इस द्वार से आओ!

विषधर- चेला! मैं किसी का चेला नहीं हूँ!

नगीना- ये सब सोचने का वक्त नहीं है विषधर, जल्दी चलो।

गुरुदेव- नागपाशा! मेरा ये यन्त्र बहुत देर तक द्वार को खोले नहीं रख पायेगा, जल्दी आजा।

नागपाशा(लड़ते हुए)- आया गुरुदेव!

…………………..फिर नागपाशा अपनी पूरी ताकत से एंथोनी पर एक तंत्रवार करके उसको काफी पीछे कर देता है और सब लोग तेज़ी से आयमद्वार की तरफ बढ़ते हैं। एंथोनी भी उस द्वार तक पहुँचने का प्रयास करता है पर उसके पहुँचने से पहले ही द्वार बंद हो जाता है।

एंथोनी- उफ्फ, ये क्या! मुझे तुरंत इरी से संपर्क करना होगा! कंकाली यहाँ आओ!

कंकाली(एक भारी भरकम मुर्दा)- जी रक्षक एंथोनी!

एंथोनी- मैं कुछ समय के लिए बाहरी दुनिया में जा रहा हूँ, तुम यहाँ पर व्यवस्था बनाये रखना।

कंकाली- चिंता न करें! आप शांति से जाएँ!

…………………………..फिर एंथोनी एक द्वार खोलता है और खुद भी सीधे एक गुफा में पहुँचता है जो की तंत्रगुरु इरी की होती है। द्वार पर प्रेत जैकब खड़ा होता है।

जैकब- तुम कौन हो? एंथोनी- मेरा नाम एंथोनी है, मुझे इरी से मिलना है।

जैकब-ये इरी की साधना का समय है और…

एंथोनी- मुर्दों की दुनिया में घुसपैठ हुई है।

जैकब(चिंता की मुद्रा में)- चलो मेरे पीछे!

……………………….जैकब एंथोनी को लेकर सीधा इरी के पास पहुँचता है।

एंथोनी- इरी वो…

इरी- मुझे पता है की क्या अनर्थ हुआ है एंथोनी! मुझे तो ये समझ में नहीं आ रहा की कालदूत और मेरे द्वारा बनाये गए इस मुर्दों के आयाम में कोई इतनी आसानी से कैसे घुस गया?

एंथोनी- हमें क्या करना होगा?

[ This Story Is Written By Samvart Harshit for Comic Haveli ]

इरी- मैं कालदूत जो मानसिक संपर्क द्वारा इस घटना की जानकारी देता हूँ फिर देखते हैं कि आगे क्या किया जाये।

…………………………………दूसरी तरफ गुरुदेव, नागपाशा, नगीना और विषधर सीधे एक बड़ी सी प्रयोगशाला में प्रकट होते हैं।

गुरुदेव- हम्म्फ! बड़े दिनों बाद कुछ एक्शन करने को मिला!

नगीना- अब बताओ की तुम लोग हो कौन? अब तक तो ये साबित हो गया है कि तुम लोग कोई साधारण मानव तो हो नहीं।

नागपाशा- सब बताएँगे, इतनी भी जल्दी क्या है? सांस तो लेने दो!

…….………………………..तभी नगीना की नज़र कुर्सी पर रस्सियों से बंधे एक पचपन वर्षीय पुरुष के ऊपर जाती है।

नगीना- ये व्यक्ति कौन है?

गुरुदेव- इस देश का बहुत विख्यात वैज्ञानिक…प्रोफेसर कमलकांत वर्मा!

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Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli 

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9 Comments on “Earth 61 Part 11 (Rakshak Anthony)”

  1. Waah sarkar kya kahani likhi h…. Maja aa gya… Keep it up… Bas dhrm rkhe har part ke sath ab ummide b badhti jayengi .. all d bst

  2. bahut hi shandar story hai .
    lag raha hai movie dekh raha hoo.
    jis nagraj aurSCD ki dosti ki log mishale dete hai ,dekhte hai kaise wo dost banate hai is ayam me.

  3. Bhai mai aaj kal baht bsy hu grp me bhi baht km active hu lekin sach kahu to aap itna amazing likhte hain ki mai bina parhe rah nhi pata mujhe jaise hi pta lagta hai ki aapki story update hui kahi bhi rahta hu zarur read karta hu baht hi shandar likha aapne ab to bs next part jaldi se upload kardo bhai

  4. Yes I was right
    Dono nakabposh wahi nikle
    Par ye Anthony, kaldoot aur Iree sabko ek sath to jabardast dikhaya hai
    But isme kahi na kahi Anthony lead character se aise character jaisa dikha
    Ye chiz achhi nahi lagi
    Sawal ye uth raha hai k duniya par haru shakti ka hamla ho chuka hai fir bhi ye gurudev aur nagpasha kya dimag laga rahe hain
    Dhruv ka to 11 parts khatm hone k bad bhi koi role nahi lag raha hai
    Sirf wo heroes ko ikattha kar raha hai
    Koi solo action nahi
    Being a Dhruv fan, I don’t like it
    But rest of the story is awesome
    Not as good as the last part was but still a nice one
    Ek sawal hai, nagraj kisi bhi sarp ko bina uski marzi k apne andar nahi sama sakta hai
    Fir usne udan sarp ko kaise sama liya?
    Ye uski power me nahi aati hai
    Kisi ki marzi k against karne k liye bhi alag tricks hain
    Ek comics me jaise ek sarp ko andar samane k liye usko charo taraf se sarpo se dhak kar un sarpo sahit andar sama liya tha
    So this was a fault as per me
    Let’s see what harshit has in the next part for us
    Moving to the next part

    1. Bahut Dhanyawad Pradip ji for your review, ab aapke ek sawaal ka jawab me dena chaahonga.Ye sahi hai ki Nagraj doosre sarp ki marzi ke bina use apne shareer me nahi ghusa sakta par udan sarp haru urja paane se pahle ek sadhaaran saanp tha jise haru ne aisa bana diya tha. Vo haru shakti ke kaaran logon par hamla kar raha tha aur jab nagraj ne thoda zor lagaya to vo jiska pahle se hi apne shareer par koi vash nahi hai…vo pratirodh na kar saka aur uske shareer me sama gaya.

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