Earth 61 Part 12 (Shaatir Gurudev)

Gurudev

EARTH-61

PART 12. 

(Shaatir Gurudev)

[ This Story Is Written By Samvart Harshit For Comic Haveli ]

इरी अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके कालदूत को पूरी घटना से अवगत कराते हैं। कालदूत के चेहरे पर चिंता की लकीरें आ जाती हैं, वो नागराज को बुलाते हैं जो जाने की लगभग पूरी तैयारी कर चुका होता है।

नागराज- मैंने जाने की तैयारी बस कर ली है महात्मन्।

कालदूत- अच्छी बात है, अब हमारी बात सुनो नागराज ….नगीना और तांत्रिक विषंधर मुर्दों की दुनिया से आज़ाद हो गए हैं।

नागराज- क्या? नगीना कैद से आज़ाद हो गयी? और ये विषंधर कौन है?

कालदूत- जब तुम शिशु थे और नागद्वीप पर पहली बार आये थे, उस वक्त मणिराज के कोई संतान नहीं थी जिसके कारण कुछ नाग विद्रोह करने लगे और उनका नेतृत्व कर रहा था विषंधर। तब हमको मजबूरन उसको भी निष्कासित करना पड़ा और बाकि विद्रोहियों का सर कुचलने के लिए ये अफवाह फैला दी कि मणिराज ने तुमको गोद ले लिया है, कुछ समय बाद विषप्रिय और विसर्पी का जन्म हुआ और इस छलावे की आवश्यकता भी ख़त्म हो गयी।

नागराज- पर वो दोनों आज़ाद हुए कैसे? आपने तो कहा था कि उस आयाम से किसी का निकलना लगभग असंभव है।

कालदूत-हाँ क्योंकि वो आयाम हमने और इरी ने मिलकर बनाया है और उसको खोलने के लिए भारी ऊर्जा की आवश्यकता पड़ेगी, हमें तो समझ में ही नहीं आ रहा है कि क्या हो रहा है।

नागराज- आप चिंता न करें कालदूत, एक बार मैं बाहरी दुनिया में पहुँच जाऊँ तो हरु वाली समस्या के साथ इस समस्या पर भी ध्यान दूंगा।

कालदूत- अब वक्त हो चला है पुत्र, जाओ बाहरी दुनिया में और अपने कर्त्तव्य का निर्वाह करो। हमारा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है।

……………………………………..नागराज कालदूत का आशीर्वाद लेकर नागरस्सी पर झूलता हुआ जाता है उस तरफ जहाँ पर पंचनाग पूरी तरह तैयार खड़े होते हैं और बाकि रक्षकों के साथ विसर्पी उसका इंतज़ार कर रही होती है।

[ This Story Is Written By Samvart Harshit For Comic Haveli ]

नागराज- तो तैयार हो पंचनागों?

पंचनाग (एक साथ)- तैयार हैं!

………………………………….फिर नागराज विसर्पी की तरफ मुड़ता है जो किसी प्रकार से अपने आंसू रोक लेती है।

नागराज- चिंता मत करना और मेरे आने तक अपने कर्त्तव्य का निर्वाह करना, जैसा कि अभी तक करती आई हो।

………………………………..फेसलेस ये दृश्य देखकर थोड़ा विचलित हो जाता है पर ये कोई नहीं जान पाता।

ध्रुव- पर अब जायेंगे कैसे? एक जेट था, उस पर भी उड़न सर्प ने प्रहार करके समुद्र में गिरा दिया।

नागू- ये देखो मेरी मणि का कमाल।

………………….नागू कुछ ही समय मणि की सहायता से जेट को खींचकर बाहर निकालता है और तट पर ले आता है। अचानक से ही कुछ ऊर्जा जेट से निकलकर नागराज में शरीर में समाने लगती है।

भेड़िया- ये क्या हो रहा है?

ध्रुव- मेरी कुछ कुछ समझ में आ रहा है, नागराज के शरीर में आलरेडी एक हरु ऊर्जा से बना प्राणी है, अब अगर नागराज के सामने कोई निम्न स्तर की हरु ऊर्जा आती है तो वो इसके शरीर में समाहित हो जायेगी।

नागराज- हुम्म ..ये अच्छी बात है या बुरी?

ध्रुव- ये तो वक्त ही बताएगा, फिलहाल जिस किरण का वार उड़न सर्प ने जेट पर किया था, उसका असर ख़त्म हो रहा है क्योंकि नागराज ने वो ऊर्जा सोख ली है। अब सब लोग जेट के अंदर आ जाओ, जाने का वक्त हो गया है।

……………………………ध्रुव, नागराज, पंचनाग, भेड़िया, नागू और फेसलेस जेट की तरफ बढ़ते हैं, नागराज जाते जाते विसर्पी को एक झलक देखता है और फिर जेट के अंदर प्रवेश कर जाता है। दूसरी तरफ इरी, जैकब और एंथोनी परेशान खड़े होते हैं।

इरी- मैंने कालदूत को स्थिति से अवगत करा दिया है पर अब भी मुझे समझ में नहीं आ रहा कि उन दोनों ने आयाम द्वार को खोला कैसे?

जैकब- आपने एक मानव मुर्दे को रक्षक बनाया, शायद इसलिए।

इरी(क्रोध से)- ये तुम क्या कह रहे हो जैकब?

एंथोनी- तो तुम्हारे हिसाब से क्या करना चाहिए था?

जैकब- किसी राक्षस या दानव के मुर्दे को पहरेदार नियुक्त करना चाहिए था।

इरी- तुम एंथोनी की शक्ति को कम आंक रहे हो। अगर एंथोनी की जगह कोई और मुर्दों की दुनिया की सुरक्षा कर रहा होता, तो अब तक कई पापात्मायें धरती पर कहर मचाने के लिए आज़ाद होतीं।

जैकब- आखिर एक मानव मुर्दे पर आपको इतना भरोसा कैसे है? कौन है ये एंथोनी गुंज़ाल्वेज़?

इरी- अगर जानना ही चाहते हो तो सुनो, ये तब की बात है जब भारत में अंग्रेजों के खिलाफ आज़ादी की पहली लड़ाई छेड़ी थी। चार्ली गुंज़ाल्वेज़ उस समय ब्रिटिश सरकार द्वारा भेजा गया एक क्रूर सिपाही था, वो उन लोगों में से एक था जिसने जलियांवाला बाग़ में सैकड़ों मासूमों की जान ली थी। कुछ समय बाद उसको अपनी इस हरकत का बेहद पछतावा हुआ और उसने अपनी पोस्ट का त्याग करने का निर्णय लिया, वो कुछ समय के लिए भारत के एक गाँव में ठहरा और उसे गाँव की ही एक औरत शीला देवी से प्यार हो गया, उन दोनों ने चोरी छिपे शादी कर ली और एक साल तक शांति से जीवन व्यतीत किया। गाँव के लोग उसके अतीत के बारे में कुछ नहीं जानते थे इसलिए वो उनको भला आदमी लगता था लेकिन एक दिन कुछ क्रान्तिकारी गाँव में रुके और चार्ली को देखते ही पहचान गए, उन्होंने गाँव के लोगों को उसके बारे में बताया। सब लोग क्रोध में उसको ख़त्म करने के लिए उसके घर गए पर तब तक चार्ली अपनी गर्भवती बीवी के साथ वहाँ से निकल चुका था। वो लोग देश छोड़कर जाने की तैयारी कर रहे थे पर किसी ने क्रान्तिकारियों को उनकी लोकेशन की जानकारी दे दी, पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी और वो लोग निकल चुके थे। शीला देवी ने लंदन में अपने बच्चे को जन्म दिया और देते ही गुज़र गयी, उसके बाद चार्ली ने ही अपने बच्चे एंथोनी को पाला पोसा और बड़ा किया। एंथोनी को हमेशा से ही म्यूजिक का बड़ा शौक था इसलिए पढाई पूरी कर लेने के बाद उसने म्यूजिक सीखने की सोची। उस समय बंगाल के संगीत गुरु दिलीप बनर्जी की ख्याति विदेश तक फैली हुई थी इसलिए एंथोनी ने भारत जाने का निर्णय किया। चार्ली ने भी सोचा कि पच्चीस वर्ष के बाद 1919 की घटना किसे पता होगी इसलिए उसने एंथोनी के भारत जाने का इंतज़ाम कर दिया। एंथोनी भारत गया और गुरु दिलीप बनर्जी की शरण में संगीत सीखने लगा, कुछ ही समय में उसकी भी ख्याति काफी फ़ैल गयी और दिलीप बनर्जी का चहेता शिष्य बन गया। उसके साथ ही एक लड़की जूलिया भी पढ़ती थी जिससे एंथोनी को प्यार हो गया, एंथोनी ने जूलिया से शादी करके घर बसा लिया। उसकी ख्याति इतनी फ़ैल चुकी थी कि अब बंगाल के बाहर भी लोग उसे जानने लगे थे।उस समय भारतीय अंग्रेजी सत्ता पर भारी पड़ रहे थे, जैसे ही कुछ विद्रोहियों को पता चला कि एंथोनी चार्ली का बेटा है, वो लोग उसके घर पहुंचे और उसका घर जला दिया। उस दिन रात बहुत काली थी, एंथोनी और उसकी बीवी सो रहे थे। एंथोनी की एकदम से आँख खुली, उसने जूलिया को जगाया और दोनों लोग बाहर की तरफ भागे। बाहर पहले से ही लोग बन्दूक लेकर तैनात खड़े थे, उन्होंने जूलिया को गोली मार दी, ये देखकर एंथोनी पागल सा हो गया। उसने तुरंत एक आदमी के हाथ से बन्दूक छीनी और बाकि सब पर चला दी, पर एक अकेला कितनों को मार पाता? आखिरकार विद्रोहियों ने मार ही दिया उसे। इसके बाद उसकी आत्मा सीधे नर्क के द्वार पर प्रकट हुई और उसने अपने सामने स्वयं यमराज को खड़ा पाया, वो एक पल को तो चौंक गया पर उसने अपने होश संभाले। यमराज ने कहा “तुमने कई लोगों की जान ली है इसलिए तुम स्वर्ग तो नहीं जा सकते इसलिए तुम नर्क के द्वार पर खड़े हो पर मुझे ज्ञात है कि तुमने किन हालातों में ऐसा किया है इसलिए मैं तुमको नर्क में जाने की इजाज़त भी नहीं दे सकता। तुम्हारा काम यही है कि धरती पर आत्मा की तरह भटकते रहो।” एंथोनी फिर से पृथ्वी पर आ गया तब मैं और कालदूत मिलकर मुर्दों की दुनिया के आयाम की रचना कर रहे थे ताकि अतृप्त दुष्ट आत्माए उसमे कैद हो सकें और जीवित पापियों को भी सज़ा के तौर पर निष्कासित करके वहाँ पर भेजा जा सके पर इसके लिए हमको एक ऐसी आत्मा चाहिए थी जिसके अंदर असीम क्रोध और दृढ निश्चय की भावना हों। इस प्रकार की आत्माएं बहुत शक्तिशाली होती हैं और अगर वो फिर से अपने शरीर के साथ जुड़ जाएँ तो वो मुर्दा शरीर बेहद शक्तिशाली हो जाता है। तब मैंने अपनी शक्ति से एंथोनी को ढूँढा और उसको उसके शरीर के साथ मिलाया और तभी से इस आयाम की रक्षा कर रहा है ये ज़िंदा मुर्दा…….एंथोनी गुंज़ाल्वेज़। ये किसी भी प्रकार के अन्य मुर्दे से अधिक शक्तिशाली है क्योंकि इसके अंदर क्रोध और इच्छाशक्ति का अद्भुत मिश्रण है।

एंथोनी- और कुछ पता करना है मेरे बारे में?

जैकब- नहीं! इतना विवरण काफी था।

गुरुदेव की प्रयोगशाला में नागपाशा, नगीना और विषंधर आश्चर्य से बेहोश प्रोफेसर कमलकांत वर्मा को देख रहे होते हैं।

[ This Story Is Written By Samvart Harshit For Comic Haveli ]

नगीना- तो..तुम नागराज के चाचा हो नागपाशा?

नागपाशा- हाँ, मैंने अब तुमको पूरा विवरण दे दिया है कि नागराज कौन है और मैं कौन हूँ। अब बस ये बताओ कि तुमको नागद्वीप का राज चाहिए या नहीं?

नगीना- हाँ।

नागपाशा- तो फिर खज़ाना ढूँढने में मेरी मदद करो।

विषंधर– उस ख़ज़ाने में ऐसा क्या है जो तुम उसके पीछे पड़े हुए हो?

गुरुदेव- ये भी समय आने पर तुमको पता चल ही जायेगा।

नगीना- और तुम लोगों के पास इतने खतरनाक हथियार कहाँ से आये जिनसे तुम मुर्दों की दुनिया के आयाम में ही घुस गए?

नागपाशा- नागराज और भेड़िया के हाथों शिकस्त मिलने के बाद हम दोनों कुछ समय के लिए अंडरग्राउंड हो गए थे, तब नागराज भी वापस नागद्वीप चला गया था। फिर छह साल बाद जब सारी दुनिया की नज़र उस धूमकेतु पर थी तो हम लोगों की नज़र भी थी उस पर क्योंकि गुरुदेव ने भांप लिया था कि इस धूमकेतु के अंदर असीम ऊर्जा का भण्डार है पर फिर हमको पता चला कि हरु प्राणी का आगमन हुआ है।

गुरुदेव- हरु प्राणी असीम शक्ति का मालिक तो था ही, पर साथ ही साथ वो अपने आसपास के वातावरण में अजीब प्रकार की ऊर्जा छोड़ रहा था। मैंने पहले से ही कैलकुलेट कर लिया था कि धूमकेतु कहाँ और कैसे गिरेगा इसलिए उसमे से कुछ ऊर्जा सोखने के लिए मैंने पहले ही रेगिस्तान में जाकर ज़मीन के अंदर कुछ यन्त्र लगा दिए थे। जब हरु आया तो मेरे यन्त्र उसकी प्रचंड ऊर्जा का कुछ कुछ भाग मेरे पास पहुंचाने लगे जिसके द्वारा हमने कई प्रकार के हथियार बनाये।

नगीना- और उस हरु को पता भी नहीं लगा कि तुम उसकी ऊर्जा का इस्तेमाल कर रहे हो?

गुरुदेव- हरु इस वक्त राजस्थान के रेगिस्तान में है और मेरे यन्त्र वहीं आसपास ज़मीन के अंदर लगे हुए हैं और अब तक तो उसे पता नहीं लगा।

विषंधर– ऐसा कैसे?

गुरुदेव- समुद्र से अगर धीरे धीरे एक एक बाल्टी पानी निकालोगे तो क्या फर्क पड़ने वाला है? हमने भी हरु की ऊर्जा का कुछ भाग ले लिया तो उसे कुछ पता नहीं लगा पर ये कमाल की ऊर्जा है। इसके द्वारा ही हमने वो मशीन बनाई जो कि मुर्दों की दुनिया के आयाम का रास्ता प्रशस्त कर पायी।

नगीना- पर तुम लोगों को मेरे बारे में कैसे पता?

……………………….ये सवाल सुनकर पहले तो नागपाशा और गुरुदेव एक दुसरे को देखकर मुस्कुराये और फिर चिल्लाये “आ जाओ रमन!” इस आवाज़ पर अँधेरे से निकलकर नागू का असम वाला दोस्त रमन सामने आता है।

[ This Story Is Written By Samvart Harshit For Comic Haveli ]

नागपाशा- तुम इच्छाधारियों में भी ईमान की कमी है कई लोगों में।

रमन- मैं नागू को पिछले कई वर्षों से जानता हूँ पर श्रीमान नागपाशा ने असम में छह साल पहले मुझसे मिलकर मुझे ख़ज़ाने का एक हिस्सा देने का वादा किया जिसके बदले में मुझे नागू को फोन करके नागराज को असम तक लाना था। उस वक्त इस योजना ने ठीक से काम नहीं किया और मुझे निष्क्रिय हो जाना पड़ा ताकि मेरी इंवॉल्वेमेंट के बारे में नागू या नागराज को पता न लगे पर भेड़िया मेरा पता जानता था, उसने कुछ समय पहले मुझे बुलवाया और नागराज का पता पुछा। उस वक्त भी मैंने रक्षकों को गोल घुमाने की कोशिश की और उनको नागू के पास भेज दिया,मैंने कहा कि मुझे नागद्वीप का पता नहीं मालूम क्योंकि उस वक्त मुझे कुछ सूझ ही नहीं रहा था।

नागपाशा- और इसी ने हमको नागद्वीप और उस पर रहने वाले तुम जैसे लोगों की जानकारी दी।

नगीना- पर नागद्वीप पर स्थाई रूप से रह रहे नागों को ही नागद्वीप की गुप्त बातें पता होती हैं, बाहरी नागों को इतना नहीं पता होता।

रमन- नागद्वीप के अंदर भी मेरे एक दो लोग हैं जो मुझे मानसिक संपर्क करके कुछ न कुछ बताते ही रहते हैं।मुझे आपके निष्कासन के बारे में पता चला और मैंने नागपाशा को बताया।

नागपाशा- बहुत अच्छा काम किया तुमने, अब जाओ। ज़रुरत होगी तो फिर से बुला लेंगे। 

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नगीना (रमन के जाने के बाद)- अब ये तो बताओ कि इस प्रोफेसर को यहाँ क्यों रखा हुआ है?

नागपाशा- इसने परमाणु पोशाक का इज़ाद किया है, इसके द्वारा हम ऐसा यन्त्र बनाना चाहते हैं जो कि हरु की ऊर्जा को बहुत मात्रा में सोख सके क्योंकि हमारे पास जो यन्त्र हैं वो बहुत ही कम मात्रा में हरु की ऊर्जा को सोख पा रहे हैं।

नगीना- बाहरी दुनिया में इस विख्यात प्रोफेसर के गायब होने से बवाल मच गया होगा।

गुरुदेव- नहीं मचा होगा।

नगीना- इतने भरोसे के साथ कैसे कह सकते हो?

गुरुदेव- क्योंकि मैंने इसके जैसा ही दिखने वाला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाला एक रोबोट वहाँ पर रख छोड़ा है, जिसका नाम है….प्रोबोट। इस वक्त प्रोबोट प्रोफेसर की लैब में है और सारी जानकारी हमको दे रहा है।

नगीना- कैसी जानकारी?

गुरुदेव- इस वक्त प्रोबोट के अलावा कुछ रक्षक भी हैं लैब मैं! मैं सोच रहा हूँ कि इन पर हमला करवा दूं ताकि हमारे रास्ते के कुछ कांटे तो साफ़ हों। 

नागपाशा- तो प्रोबोट को विध्वंस करने का कमांड दे दिया जाये ?

गुरुदेव(मुस्कुराकर)- दे दिया जाये।

 

Earth 61 Part 11 (Rakshak Anthony)

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Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli 

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11 Comments on “Earth 61 Part 12 (Shaatir Gurudev)”

  1. Humesha ki tarah is baar bhi awsm
    Lekin anthony wala part mujhe accha nhi laga
    Use powerful bataya gya h story me lekin uske origin ko itna acche se nhi likha gya he ..
    Or power k sath use ghamndhi bhi bataya gya he
    Ab next part ka wait he kya hoga jab jung chhidegi probot or parmanu n doga k bichh
    Waiting sir….

  2. बहुत ही अच्छा रहा यह वाला पार्ट भी। पढ़कर मज़ा आ गया। गुरुदेव को सच में बहुत शातिर दिखाया

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