Earth 61 Part 13 (Purane Jakhm)

EARTH-61

PART 13.

सभी लोग जेट के अंदर बैठे होते हैं और जेट नागद्वीप की ज़मीन छोड़कर हवा में उड़ जाता है।

नागराज- अब हम लोगों को पहले कहाँ जाना है?

ध्रुव- पहले हमको राजनगर जाकर स्टील को अपनी टीम में शामिल करना है।

भेड़िया- स्टील?  भला एक धातु हमारी टीम में कैसे आ सकती है? 

ध्रुव- धातु नहीं वो आधा मानव और आधा मशीन है।

नागराज- इन छह सालों में दुनिया काफी बदल गयी है।

दूसरी तरफ प्रोफेसर कमलकांत की लैब में डोगा, परमाणु और तिरंगा अपने अगले कदम पर विचार विमर्श कर रहे होते हैं।

डोगा- तुम ज़्यादा परेशान हो रहे हो परमाणु, प्रोफेसर मिल जाएंगे।

परमाणु- तुमको नहीं पता कि प्रोफेसर मेरे लिए कितना मायने रखते हैं डोगा, एक बार बस ये पता चल जाए कि उनको किसने उठाया तो उसकी खैर नहीं।

तिरंगा- पर हमको पहले..अरे! ये ..ये प्रोबोट क्या कर रहा है?

तभी सबकी नज़र प्रोबोट पर जाती है जो कि उनको मारने के लिए दौड़कर आता है, उसके हाथ एक ख़ास प्रकार की नुकीली धातु में बदल जाते हैं। सभी उसके वार को एकदम से डॉज करते हैं।

परमाणु- ये क्या कर रहे हो प्रोबोट?

प्रोबोट- मालिक का आदेश है कि तुम सबको ख़त्म किया जाये।

तिरंगा- मुझे शुरू से ही इस पर शक हो रहा था, जब इसने कहा कि इसको नहीं पता प्रोफेसर कैसे गायब हुए।

डोगा- तो यानि कि इस टीन के डब्बे के ज़रिये हम लोग प्रोफेसर तक पहुँच सकते हैं।

तिरंगा- बिल्कुल, पर पहले हमको खुद इससे बचना है।

प्रोबोट के वार काफी शक्तिशाली होते हैं, वो न सिर्फ अपने नुकीले हाथों का इस्तेमाल कर रहा होता है बल्कि अब मशीनी आँखों से भी अजीब से ऊर्जा का वार कर रहा होता है। तिरंगा काफी कलाबाजियां खाकर बचने का प्रयास करता है पर फिर भी एक हल्का सा ऊर्जा वार उसको छूकर निकल ही जाता है।

परमाणु- तुम ठीक हो तिरंगा?

तिरंगा- उफ्फ! ये पता नहीं किस प्रकार की ऊर्जा का वार किया इसने, पर अगर मैं नहीं बचता तो जान चली जाती।

परमाणु- बस बहुत हुआ! अब मुझे इस पर कुछ प्रचंड वार करने होंगे।

परमाणु एक ज़ोरदार एटॉमिक ब्लास्ट का वार करता है और प्रोबोट के एक हाथ के चीथड़े उड़ जाते हैं।

प्रोबोट- तुम लोग मुझसे नहीं जीत पाओगे, मुझे हरु ऊर्जा का प्रयोग करके बेहद एडवांस्ड मशीनरी के साथ बनाया गया है।

ये सुनकर सब हैरान हो जाते हैं।

परमाणु- इसको बनाने वाले ने हरु ऊर्जा का इस्तेमाल किया है, यानी की इसके पीछे हरु का हाथ है?

डोगा- मुझे नहीं लगता, हरु ने इससे तगड़े हमले किये हैं, वो अपनी ऊर्जा एक रोबॉट में भरकर नहीं भेजेगा।

तिरंगा- यानी कि इसे बनाने वाले ने हरु ऊर्जा का इस्तेमाल किया है, पर कौन हो सकता है?

परमाणु- इसका जवाब तो मैं इसी से निकलवाऊंगा।

परमाणु एक के बाद एक लगातार परमाणु ब्लास्ट के वार करता है और डोगा भी अपने हैंडग्रेनेड निकालकर प्रोबोट पर फेंकता है। प्रोबोट का शरीर खील खील होकर बिखर जाता है, पर हरु ऊर्जा के कारण फिर से जुड़ने का प्रयास करता है।

परमाणु- ये फिर से जुड़ने का प्रयास कर रहा है, अब क्या करें?

तिरंगा- तो जुड़ने ही मत दो, अपनी परमाणु रस्सी का इस्तेमाल करो और हर एक पुर्जे को बाँध दो।

परमाणु- ये ठीक रहेगा।

परमाणु बिना समय गँवाए प्रोबोट के हर पुर्जे को बाँध देता है, उनकी हरकत कम हो जाती है।

डोगा- हम्म्फ…चलो कम से कम एक मुसीबत से तो छुटकारा मिला।

परमाणु- हाँ, पर इसके पीछे मुझे किसी गहरे षड़यंत्र की बू आ रही है।

गुरुदेव, नागपाशा, नगीना और विषंधर ये नज़ारा एक स्क्रीन पर देख रहे थे, उस कैमरा के द्वारा जो कि प्रोबोट की आँखों में लगा हुआ था और पुर्जों के विवश होने के कारण अब टेलीकास्ट भी बंद हो गया था।

विषंधर- तुम्हारा टीन का डब्बा तो हार गया।

नागपाशा- ये रक्षक हमारी उम्मीद से ज़्यादा ही खतरनाक हैं।

गुरुदेव- सही कह रहे हो, अरे ये क्या!….प्रोफेसर को होश आ रहा है!

कमलकांत वर्मा को धीरे धीरे होश आता है।

कमलकांत- मैं..मैं कहाँ पर हूँ?

गुरुदेव- स्वागत है प्रोफेसर कमलकांत वर्मा, हमने आपका अपहरण किया है और अब हम आपको बताते हैं कि हमने ऐसा क्यों किया।

गुरुदेव प्रोफेसर को सारा वृतांत सुनाते हैं।

कमलकांत- तो..तो तुम लोग चाहते हो कि मैं ऐसे यन्त्र बनाऊं तुम लोगों के लिए जिससे तुम हरु की ऊर्जा की अधिक मात्रा में सोख सको?

गुरुदेव- बिल्कुल।

कमलकांत- और तुमको ऐसा क्यों लगा कि मैं तुम्हारी बात मानूंगा ?

गुरुदेव- हम जानते हैं कि तू उसूलों को आदमी है प्रोफेसर,ऐसे बात नहीं मानेगा। तेरा एक ही इलाज है..परमाणु की मृत्यु।

कमलकांत- क्या!

गुरुदेव- हाँ कमलकांत वर्मा, सुना है कि तू परमाणु का गुरु है। अब अगर तू हमारी बात नहीं मानेगा तो अपने शिष्य की बलि चढ़ते देखेगा। हम लोगों के पास काफी हरु ऊर्जा है जिसका इस्तेमाल हम परमाणु को मारने के लिए करेंगे।

कमलकांत- नहीं!  ठीक है, मैं तुम लोगों की बात मानूंगा।

नागपाशा- बहुत अच्छे प्रोफेसर।

फिर गुरुदेव और नागपाशा नगीना के पास आते हैं।

नगीना- हम लोग नागराज का खज़ाना कैसे हासिल करेंगे?

नागपाशा- पता चला है कि भेड़िया इस वक्त असम में नहीं है, उसकी अनुपस्थिति में खज़ाना चुराना बहुत आसान हो जायेगा।

गुरुदेव- और तुम लोग अभी असम के लिए निकल रहे हो।

विषंधर- तुम नहीं आओगे?

गुरुदेव- यहाँ पर कमलकांत है, ये भागने का प्रयास न करे इसके लिए मुझे यहाँ रुकना होगा। मैं तुम लोगों को सीधे टेलीपोर्टेर से असम भेजूंगा। तुम लोगों का जाना है, भेड़िया के महल का रास्ता नागपाशा को पता है ,वहाँ जाकर खज़ाना यहाँ लाना है।

दूसरी तरफ जेट में भेड़िया मौका देखकर नागराज के पास आ बैठता है और बेहद धीमे स्वर में बोलता है।

भेड़िया- तुम्हारा खज़ाना…

नागराज(धीमे स्वर में)- सुरक्षित है?

भेड़िया- चिंता मत करो, मैं जब यहाँ आ रहा था तब ख़ज़ाने की सुरक्षा का पूरा इंतज़ाम करके आया था।

नागराज- बहुत धन्यवाद्, अब जब वापस नागद्वीप जाऊंगा तो खज़ाना लेकर जाऊंगा।

ध्रुव(सबसे आगे ड्राइविंग सीट पर बैठा हुआ)- ये क्या खुसर फुसर हो रही है फेसलेस?

फेसलेस- भेड़िया और नागराज कुछ बात कर रहे हैं आपस में।

ध्रुव- ओह, राजनगर आ गया।

फेसलेस- तुम ये कहाँ लेकर आये हो?

ध्रुव- डॉक्टर अनीस रज़ा की लैब के पास।

सब लोग जेट से उतरकर लैब में जाते हैं।

ध्रुव- क्या हाल है अनीस?

अनीस- अच्छा हूँ ध्रुव!

ध्रुव- अच्छा तुम्हारे पास मरेत के शरीर के वो टुकड़े हैं क्या जो मैं छोड़कर गया था?

अनीस- हाँ, ये लो ये रहे पॉलिथीन में। इन टुकड़ों में अभी भी हरकत बंद नहीं हुई है।

ध्रुव- हुम्म…नागराज यहाँ आओ!

नागराज लैब में प्रवेश करता है और अनीस उसे देखकर हैरान हो जाता है।

अनीस- ये..ये तो..वही..

ध्रुव- क्या हुआ अनीस? तुम एकदम से परेशान क्यों हो गए?

अनीस- क..कुछ नहीं!

नागराज- तुमने बुलाया था ध्रुव?

तभी किसी के कुछ कह पाने से पहले ही मरेत की हरु ऊर्जा नागराज के शरीर में प्रवेश कर जाती है और मरेत के टुकड़े अब आम रेत के ढेले बनकर रह जाते हैं।

अनीस- ये..ये क्या हुआ?

ध्रुव- कुछ नहीं बस हरु के खिलाफ लड़ने का एक जरिया मिल गया।

तभी एक फौलादी मुक्का नागराज के जबड़े पर पड़ता है। नागराज को कुछ अधिक फर्क तो नहीं पड़ता पर वो क्रोध में मारने वाले की तरफ देखता है..सामने इंस्पेक्टर स्टील खड़ा होता है।

स्टील- आखिरकार तू अपने बिल से बाहर निकल ही आया संपोले!

नागराज- मुझे ये तो नहीं पता की तू कौन है पर तूने मुझको मुक्का मारकर सही नहीं किया।

स्टील- मैं वो हूँ जिसको तूने छह साल पहले अपनी शक्ति का शिकार बनाया था..महानगर बंदरगाह पर!

नागराज यह सुनकर एकदम से हैरान हो जाता है।

नागराज- तुम तो वही..पुलिसवाले..

स्टील- था! अब नहीं हूँ! अब मैं एक मशीन हूँ, और इसका ज़िम्मेदार है तू!

ध्रुव स्थिति का अंदाज़ा नहीं लगा पाता, उसकी नज़र अनीस पर जाती है।

ध्रुव- ये सब क्या हो रहा है अनीस?

अनीस- कुछ पुराने ज़ख्म ताज़ा हो रहे हैं।

  नागराज और इंस्पेक्टर स्टील आमने सामने होते हैं। ध्रुव और अनीस कुछ समय के लिए मूक दर्शक बने देख रहे होते हैं।

इंस्पेक्टर स्टील- तुझे वापस नहीं आना चाहिए था संपोले।

नागराज- पिछली बार तो मैंने गलती से तुझे मारा था पर तेरे तेवर देखकर लगता है कि तुझे ज़िंदा नहीं छोड़ना चाहिए था।

स्टील पूरे जोश के साथ अपना मशीनी मुक्का हवा में लहराता है पर नागराज उसका मुक्का हवा में ही रोक लेता है और 450 किलो के स्टील के शरीर को उठाकर दूर फेंक देता है।

नागराज- तू मुझ पर बल प्रयोग करके तो बिल्कुल नहीं जीत पायेगा क्योंकि मेरे अंदर अनगिनत सर्पों का बल है।

स्टील- तो और भी तरीके हैं।

स्टील एक बड़ी सी गन उठाता है और उसमे से कई छोटी छोटी इंजेक्शननुमा गोलियां नागराज पर दागता है।

नागराज- हम्म्फ! ये क्या है?

स्टील- एंटी वेनॉम गन का बेहद एडवांस्ड स्वरुप। एंटी वेनॉम गन को सरकार ने चार साल पहले ही बैन कर दिया था क्योंकि इच्छाधारी नागों की हरकतें भी बंद हो चुकी थीं,यहाँ तक कि मेरे वाले हादसे के बाद प्रतिरोधी दल को भी डिस्बैंड कर दिया गया था। अब यही गन तेरी मौत बनेगी।

पर कुछ पल की लड़खड़ाहट के बाद नागराज स्थिर हो जाता है और सारे इंजेक्शन उसके शरीर से निकालकर अपने आप गिर जाते हैं।

स्टील- ये क्या! इतनी डोज तो इच्छाधारियों की एक पूरी सेना को बेहोश करने के लिए काफी है फिर तू कैसे…

नागराज- मेरी शक्तियां छह सालों में पूरी तरह से विकसित हो चुकी हैं, पहले मेरी शक्तियां इतनी विकसित नहीं थीं और तब शायद ये गन मुझपर असर कर सकती थी।

फिर एक घूंसे से ही नागराज स्टील को उड़ाकर पीछे की दीवार पर गिरा देता है जो कि स्टील के वजन के कारण टूट जाती है।

ध्रुव- अमर को रोको अनीस।

अनीस- एक बात बताओ, अगर कोई इच्छाधारी नाग तुमको जीवनभर के लिए विकलांग बना दे तो क्या तुम उसको ऐसे ही जाने दोगे?

ध्रुव- तुम और अमर इस वक्त भावुक हो और तुमको ये नहीं दिखाई दे रहा कि हरु प्राणी की समस्या से निपटने का तरीका ये नागराज ही है।

तभी फेसलेस और भेड़िया जेट से निकलकर दौड़ते हुए आते हैं। फेसलेस नागराज को रोकता है और भेड़िया स्टील को।फिर नागराज और स्टील शांत पड़ जाते हैं और ध्रुव स्टील को वस्तुस्थिति से अवगत कराता है।

स्टील- मैं समझ रहा हूँ कि तुमको इसकी ज़रुरत है ध्रुव..पर मैं इस काम में तुम्हारा साथ नहीं दे पाऊंगा।

ध्रुव- आखिर क्यों?

स्टील- इसे सामने देखकर ही मेरा दिमाग गरम हो रहा है, इसके साथ मिलकर काम करना तो बहुत दूर की बात है।

ध्रुव- ठीक है स्टील, मैं तुम्हारी हालत समझ सकता हूँ। तुम राजनगर में ही रुको और हरु का हमला हो तो मुझे सूचित करना।

स्टील- ठीक है।

फिर नागराज स्टील को गुस्से से देखता हुआ ध्रुव के साथ अनीस की लैब से बाहर आ जाता है। सब लोग जेट के अंदर जाते हैं।

फेसलेस- स्टील ने तो साफ़ मना कर दिया, अब कहाँ जाना है?

ध्रुव- अब हमको प्लान…अरे ये क्या! परमाणु का मेसेज आ रहा है मेरे ट्रांसमीटर पर!

परमाणु- तुम कहाँ पर हो ध्रुव?

ध्रुव- राजनगर में..क्यों, क्या हुआ?

फिर परमाणु ध्रुव को प्रोबोट वाली घटना बताता है।

ध्रुव- ओफ़्फ़! मतलब कोई और भी है जो कि हरु की ऊर्जा का इस्तेमाल कर रहा है, बिना हरु की जानकारी के!हमको हरु की लोकेशन पता करनी होगी!

परमाणु- क्या तुमको लगता है कि हम तैयार हैं?

ध्रुव- सही बताऊँ तो इस वक्त मुझे कुछ भी लगना बंद हो गया है..दिमाग काम नहीं कर रहा है।

परमाणु- तुम जल्दी से दिल्ली आ जाओ।

ध्रुव- ठीक है। (ट्रांसमीटर ऑफ कर देता है)

भेड़िया- ये क्या है जिससे तुम संपर्क कर पा रहे थे?

ध्रुव- इसको ट्रांसमीटर कहते हैं।

भेड़िया- ये सिर्फ तुम्हारे और परमाणु के ही पास है।

ध्रुव- हाँ ये ट्रांसमीटर उसकी बेल्ट में इनबिल्ट है और मेरे पास तो हमेशा रहता है।

भेड़िया- तो तुमको नहीं लगता कि ये हम सब लोगों के पास भी होना चाहिए?

ध्रुव- अ..हाँ..हाँ होना तो चाहिए!

भेड़िया- अब हम लोग एक टीम में हैं और इसकी ज़रुरत हम लोगों को भी पड़ेगी।

नागराज- मैं सिर्फ यहाँ हरु के आतंक को ख़त्म करने आया हूँ, किसी टीम में शामिल होने नहीं।

भेड़िया- ठीक है, ठीक है तुम मत होना। मुझे तो ये बाहरी दुनिया बड़ी पसंद आई।

नागराज- कुछ दिन रहो, अपने आप भागोगे यहाँ से।

ध्रुव- कटाक्ष करना है तो सीधे ही कर दो नागराज।

नागराज- कटाक्ष नहीं कर रहा, सही बात बता रहा हूँ।

भेड़िया- अरे भाई लड़ो मत आपस में, मैं तो सिर्फ मज़ाक कर रहा था। मैं तो अपने जंगल ही वापस जाऊंगा।

दूसरी तरफ असम में भेड़िया के किले से कुछ दूरी पर एक पोर्टल खुलता है और उसमे से बाहर आते हैं नागपाशा, नगीना और विषंधर।

नागपाशा- आज कई वर्ष बाद फिर यहाँ आना हुआ है।

नगीना- वो रहा किला।

विषंधर- तो चलो फिर, देर किस बात की?

तीनों किले की तरफ बढ़ते हैं और अंदर प्रवेश करते हैं।

नागपाशा- खज़ाना ढूंढना आसान काम तो होगा नहीं..वक्त लगेगा।

नगीना- तो ठीक है, ढूंढना शुरू करते हैं।

विषंधर- ये कमरा बड़ा है, इसमें देखते हैं।

सब लोग उस कमरे में घुसते हैं पर घुसते ही उनके होश उड़ जाते हैं।

नागपाशा- ये क्या?

नगीना- इसकी उम्मीद नहीं की थी।

ख़ज़ाने की रक्षा कर रहे होते हैं असम के तीन अमानवीय योद्धा अंधी धुंध का शैतान दौदण्ड, काई की शक्ति वाला काइगुला और शक्तिशाली एलफांटो।

दौदण्ड- भेड़िया के कहने पर हम उसकी अनुपस्थिति में ख़ज़ाने की रक्षा कर रहे हैं, उसने कहा था कि कुछ लोग इसको चुराने का प्रयास कर सकते हैं।

नगीना- अपनी खैरियत चाहते हो तो हमारा रास्ता छोड़ दो।

काइगुला- भेड़िया ने काफी साल इस जंगल की रक्षा की, उसके लिए तो हम लोग जान भी देने को तैयार हैं।

नागपाशा- जान देने के इतने ही इच्छुक हो तो जान ले ही लेते हैं।

ये कहकर नागपाशा अपने तंत्रवार से काइगुला को जकड़ लेता है, दौदण्ड झपटकर नगीना और विषधर को अपने विशाल हाथों से पकड़ लेता है।

दौदण्ड- जो भी हमारे जंगल की तरफ आँख उठाकर देखेगा, दौदण्ड उसे कच्चा खा जाएगा।

नगीना एक शक्तिशाली तंत्रवार करके खुद को दौदण्ड की पकड़ से छुड़ाती है पर विषंधर अभी भी प्रयत्न कर रहा होता है। बलशाली एलफांटो नगीना को पकड़ने का प्रयत्न करता है पर नगीना के एक ही तंत्रवार से अपने होश खो देता है। फिर नगीना एक प्रचंड वार करके विषंधर को दौदण्ड के चंगुल से छुड़ाती है। नागपाशा तो शुरू से ही काइगुला पर भारी पड़ रहा था , दौदण्ड अपने हाथ झटककर नागपाशा को दूर गिरा देता है।

विषंधर- ये सफ़ेद राक्षस बड़ा तगड़ा है नगीना, इसने कुछ देर और मुझे पकड़े रखा होता तो मेरे प्राण पखेरू उड़ जाते।

नगीना- हाँ ,इस दौदण्ड का कुछ इंतज़ाम तो करना ही पड़ेगा,इसके आसपास धुंध है यानी कि ये नमी वाले वातावरण का आदी है।

विषंधर- हाँ, तो?

नगीना- तो ये कि अगर में अग्नि तंत्र का इस्तेमाल करके उसके आसपास की धुंध को वाष्पित कर दूं तो उस पर काबू पाया जा सकता है।

फिर नगीना अग्नितंत्र का इस्तेमाल करती है और दौदण्ड के आसपास की धुंध भाप बनने लगती है।

दौदण्ड- उफ्फ! मुझे बाहर जाना होगा वर्ना मेरा अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

दौदण्ड बाहर की तरफ भागता है।

विषंधर- हा..हा..ये तो कमाल हो गया नगीना!

नगीना- हाँ कमाल तो हो ही रहा है, जैसे कि तू मुझे रानी नगीना से सीधे नगीना ही बुला रहा है।

विषंधर- क्ष..क्षमा रानी!

नगीना- आगे से ध्यान रखना क्योंकि नागद्वीप की भावी रानी मैं ही हूँ, उस कालदूत को अपने पैरों से कुचलकर मैं बनूँगी रानी!

विषंधर- ज..जी बिल्कुल!

नागपाशा भी काइगुला को बेहोश कर देता है। उनको सामने संदूक दिखता है और उनकी आँखें चमक उठती हैं।

नगीना- खज़ाना..तो ये है वो खज़ाना!

नागपाशा- ये सबसे अधिक सुरक्षित तभी था जब स्वयं देव कालजयी इसके पहरेदार थे, अब ये भेड़िया के चमचे हमको खज़ाना पाने से थोड़े ही रोक पाएंगे।

सब लोग ख़ज़ाने की तरफ बढ़ते ही हैं कि एक ठंडी आग की लपट उनको बढ़ने से रोक लेती है। वो पलटकर देखते हैं तो पीछे खड़े थे …एंथोनी और प्रेत जैकब।

नगीना- ए.. एंथोनी! तुम यहाँ!

एंथोनी- हाँ मैं! तुमको और विषंधरको वापस ले जाने आया हूँ! तुम अंतहीन निष्कासन में रहोगे और बाद में प्रेत बनकर उसी आयाम में भटकोगे।

विषंधर- पर तुमको हमारा पता कैसे चला?

जैकब- एक बार जो इरी के बनाये हुए मुर्दों के आयाम में जाता है, उसको तो इरी सूँघकर भी बाहर निकाल सकता है..भले ही वो वापस इस आयाम में क्यों न आ जाये!

नागपाशा- वापस लौट जाओ मुर्दों,लगता है की पिछली बार की हार भूले नहीं अभी तक!

एंथोनी- नहीं भूला तभी तो मुर्दों के आयाम से निकलकर इस आयाम में आया हूँ..तुझसे हिसाब चुकाने।

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli

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9 Comments on “Earth 61 Part 13 (Purane Jakhm)”

  1. बहुत बढ़िया कहानी है हर्षित जी।
    अब देखना होगा कि स्टील ध्रुव and टीम के साथ कैसे आएगा
    क्योंकि आना तो उसे ह ही।
    कहानी बहुत ही रोचक होती जा रही है

  2. शानदार कहानी सभी किरदार एक नए तरीके से पेश किए गए हे और हा इसमे भूतकाल के सुपर हीरो भी आने चाहिए वर्ना आपकी story अधूरी लगेगी उनके बिना

  3. बहुत शानदार कहानी है भाई मजा आ गया
    अगली कहानी का इतजार रहेगा

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