Earth 61 Part 14 (Harupasha)

 Earth 61

Part – 14

(Harupasha)

 

एंथोनी और जैकब को देखकर नगीना और विषधर एकदम चिंतित हो जाते हैं पर नागपाशा क्रोध में आ जाता है।

नागपाशा- लगता है कि तुझे फिर से मरना है मुर्दे।

एंथोनी- तुझे बड़ा गुमान है न अपनी अमरता पर, चल देखते हैं कि तेरा अमृत तुझे कब तक बचा पाता है।

……………………..एंथोनी और नागपाशा भिड़ने ही वाले होते हैं कि तभी एक पोर्टल खुलता है और गुरुदेव की आवाज़ सुनाई देती है।

गुरुदेव- जल्दी से ख़ज़ाने वाला संदूक उठाओ और इस तरफ आओ तुम सब!

………………………..इससे पहले कि एंथोनी और जैकब कुछ समझ पाते, नागपाशा तुरंत संदूक उठाकर पोर्टल में कूदता है और उसके पीछे पीछे नगीना और विषधर भी।

एंथोनी- नहीं!वो लोग फिर एक बार भागने में सफल हो गए।

जैकब- लगता है अब एक बार फिर इनको ढूँढने की मेहनत करनी होगी।

……………………दूसरी तरफ नागपाशा, नगीना और विषधर पोर्टल से गुरुदेव की प्रयोगशाला में वापस आते हैं।

नागपाशा- आपने बहुत जल्दी कर दी गुरुदेव, मुझे उस मुर्दे को मुहतोड़ जवाब तो देने देते।

गुरुदेव- उससे हम पहले भी टकरा चुके हैं नागपाशा, उसकी शक्ति का हमको कोई अंदाजा नहीं है। वैसे भी जो काम करने गए थे वो तो हो ही गया, हमको खज़ाना मिल गया!

नागपाशा- हा..हा..वो तो है।

गुरुदेव- हरु की ऊर्जा सोखने की मशीन बनाने का काम कहाँ तक पहुंचा है कमलकांत?

कमलकांत- मशीन निर्माण अपने अंतिम चरण में है, काम जल्दी ही पूरा हो जायेगा।

…………………………दूसरी तरफ ध्रुव जेट लेकर कमलकांत की प्रयोगशाला में आता है जहाँ उसका इंतज़ार परमाणु, डोगा और तिरंगा कर रहे होते हैं।

परमाणु- आओ ध्रुव तुम..अरे, तुम्हारे साथ ये कौन लोग हैं?

ध्रुव- तुम शायद भूल रहे हो कि हम लोग नागद्वीप गए थे मदद मांगने के लिए।

डोगा- यानि..कि ये सब इच्छाधारी नाग हैं?

नागराज- मैं हूँ नागद्वीप का योद्धा..मानव नाग नागराज और मेरे साथ ये हैं पंचनाग यानि नागार्जुन,नागप्रेती,नागदेव,सर्पराज और सिंहनाग।

तिरंगा- मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि मैं इच्छाधारी नागों को अपनी आँखों से देख रहा हूँ।

नागार्जुन- विश्वास तो हमें भी नहीं हो रहा कि हम बाहरी दुनिया में वापस आ गए हैं जहाँ हम कभी आना नहीं चाहते थे।

ध्रुव(गुस्से को दबाते हुए)- तो हरु को ख़त्म करने तक रुको…तब जहाँ जाना हो चले जाना।

नागराज- तो प्लान क्या है?

ध्रुव- मुझे जेट के संचार सिस्टम के द्वारा हरु की लोकेशन मिल रही है…राजस्थान के एक सुनसान रेगिस्तान में।

भेड़िया- तो देर किस बात की?

परमाणु- अभी तो हमको ये भी नहीं पता की वो लोग कौन हैं जो कि प्रोफेसर को उठा ले गए और हरु की ऊर्जा से बने यन्त्र का इस्तेमाल कर रहे हैं।

ध्रुव- इसका पता लगाने के लिए हमको थोड़ा इंतज़ार करना होगा, पर उससे पहले..मुझे तुमसे कुछ काम है नागराज।

नागराज- क्या ध्रुव?

ध्रुव- दरअसल आम जनता इस बात से अभी तक अनजान है कि इच्छाधारी नाग फिर लौट आये हैं, तो सरकार ने ..एक छोटी सी प्रेस कांफ्रेंस रखी है ताकि लोगों को कुछ दिलासा मिल जाए।

नागराज- और ..और तुम चाहते हो कि मैं प्रेस कांफ्रेंस में जाऊं?

ध्रुव- हाँ, मेरे साथ।

नागराज- तुम्हारा दिमाग तो सही है ध्रुव? अगर लोगों को पता चलेगा कि हम फिर से उनके बीच आ गए हैं तो वो हरु का आतंक भूलकर फिर से हमारे पीछे लग जाएंगे।

ध्रुव- ये सोचो कि अगर तुमने अभी ये बात नहीं बताई और आम लोगों को किसी दूसरी तरह से ये बात पता चली..फिर क्या होगा? तुम्हारे पास अच्छा मौका है नागराज, सभी इच्छाधारियों की छवि सुधारने का..जो तुम छह साल पहले नहीं कर पाये थे।

…………………………………….नागराज की भौंहें तन जाती हैं और वो धीरे धीरे ध्रुव के पास आता है।

नागराज- एक बात समझ लो ध्रुव…हम लोगों को ना तो छह साल पहले कोई फर्क पड़ता था कि लोग हमारे बारे में क्या सोचते हैं और ना ही अब पड़ता है।

ध्रुव- अब फैसला तुम्हारे हाथ में है नागराज, तब दुनिया ने तुम लोगों को ठुकरा दिया था और अब दुनिया को तुम्हारी ज़रुरत है। ज़रा सोचो कि ऐसा करके तुम कितना बड़ा तमाचा मार सकते हो उन लोगों के मुंह पर जिन्होंने तब तुम्हारा विरोध किया था।

नागराज(पंचनागों की तरफ देखकर)- मुझे तुम लोगों की राय जाननी है।

नागार्जुन- मुझे तो लगता है कि ये लड़का ध्रुव ठीक ही बोल रहा है, तुमको प्रेस कांफ्रेंस में जाना चाहिए ताकि दुनिया को ये भी पता लगे कि छह साल पहले हुई रिसर्च सेंटर वाली घटना में भी हम लोग दोषी नहीं थे।

नागप्रेती- तुमको जाना चाहिए नागराज ताकि लोगों को भी ये अहसास हो कि उनके इतने तिरस्कार के बाद भी हम वापस लौटे।

नागराज- ठीक है..मैं जाऊँगा!

……………………………….राजस्थान के एक सुनसान रेगिस्तान में हरु प्राणी अकेला खड़ा होता है।

हरु- मानवों ने लगभग घुटने टेक ही दिए थे मेरे सामने पर न जाने कहाँ से ये विलक्षण रक्षक आ गए और इनको बचा लिया, और इनमे सबसे खतरनाक तो ये हरी खाल वाला है जिसने मेरी ऊर्जा को अपने शरीर के अंदर समाहित कर लिया।

…………………….तभी हरु को कुछ महसूस होता है।

हरु- मैं काफी समय से अपनी ऊर्जा में कुछ् खिंचाव महसूस कर रहा हूँ,पहले तो मैंने इस पर ध्यान नहीं दिया था पर अब लगता है कि पता लगाना पड़ेगा कि क्या हो रहा है?

…….……………हरु अपनी शक्तियों के बल पर ज़मीन के भीतर लगी गुरुदेव की मशीनों को देख लेता है।

हरु- ह्वी ह्वी ह्वी! वाह रे मानव! मेरी ही ऊर्जा को खींचने का तरीका खोज निकाला इन मानवों ने!ऐसे विलक्षण मानवों से तो खुद जाकर भेंट करनी होगी।

………………………………..प्रोफेसर कमलकांत अपनी मशीन को पूरा करते हैं।

गुरुदेव- क्या प्रोग्रेस है कमलकांत?

कमलकांत- ये संयंत्र पूरा हो चुका है, आपके यंत्र हरु की केवल 2% ऊर्जा ही खींच पाये थे पर इससे आप उसकी 25% तक ऊर्जा खींच सकते हैं।

नागपाशा- पर ये तो परेशानी की बात है गुरुदेव, पिछली बार तो आपने यंत्र पहले लगा दिए थे और हरु बाद में आया था जिसके कारण उसे उस स्थान पर यंत्र के होने की भनक नहीं लगी पर ये नया यंत्र कैसे काम करेगा?

कमलकांत- ये परेशानी का विषय तो है क्योंकि इस यंत्र से हरु की ऊर्जा खींचने के लिए आपको उसके 25 किलोमीटर के दायरे में जाना पड़ेगा।

गुरुदेव- हुम्म…ये तो वाकई में चिंता का विषय है।

…………………………….वो लोग कुछ सोच ही रहे होते हैं कि तभी वहां पर एकदम से एक तीव्र रौशनी होती है और सब लोग कुछ देर के लिए चुंधिया जाते हैं,जब रौशनी कम होती है तो सब देखते हैं ….सामने हरु मुस्कुराता हुआ खड़ा होता है।

हरु- तुम लोगों को मेरी ऊर्जा चाहिए ना? लो मैं आ गया!

 नागपाशा और गुरुदेव बुरी तरह से हैरान रह जाते हैं, हरु को सामने देखकर उनके हाथ पाँव फूल जाते हैं। विषधर दौड़ता हुआ जाता है और हरु को तंत्र में बाँधने का प्रयास करता है।

नगीना- रुक जा विषधर! ये क्या मूर्खता कर रहा है?

……………………………इससे पहले कि विषधर कुछ भी समझ पाता हरु मुस्कुराकर उसकी तरफ देखता भर है और विषधर के शरीर के हज़ारों टुकड़े हो जाते हैं।

गुरुदेव(चिल्लाकर)- प्रोफेसर! मशीन को चालू करो नहीं तो हम लोगों में से कोई नहीं बचेगा।

कमलकांत- ह..हाँ..हाँ..कर रहा हूँ!

………………कमलकांत एक लीवर दबाते हैं और मशीन चालू हो जाती है पर हरु पर उसका कोई असर नहीं होता।

गुरुदेव- ये..ये काम क्यों नहीं कर रही?

हरु- पिछली बार भी तुम लोग इसलिए ही सफल हो पाये थे क्योंकि मैंने कुछ समय तक तुम्हारे यंत्रों की तरफ ध्यान नहीं दिया था। मैं इस वक्त एक मामूली मानव शरीर के अंदर हूँ जो कि मेरी पूरी ऊर्जा को समाये रखने में सक्षम नहीं है जिसके कारण मेरी कुछ ऊर्जा वातावरण में फ़ैल गयी और वही तुमने उठा ली। सोचता हूँ कि अब शरीर बदलकर देखा जाये(नागपाशा की तरफ देखकर)तेरा शरीर इससे कुछ ज़्यादा शक्तिशाली है, अब मैं तेरे शरीर में प्रवेश करूंगा।

नागपाशा- म..म..मेरे! मेरे शरीर में!

……………………..तभी हरु अपनी शक्ति से नागपाशा को अपनी तरफ खींचता है और नागपाशा पूरी शक्ति लगाने के बावजूद उसकी शक्ति से छूट नहीं पाता। फिर हरु रमेश खन्ना के बेहोश शरीर का त्याग करता है और नागपाशा के शरीर में प्रवेश करता है। नागपाशा का शरीर भी नीले रंग का हो जाता है, वो मुस्कुराते हुए कहता है”ह्वी ह्वी ह्वी! ये शरीर काफी शक्तिशाली है, अब मैं सोच रहा हूँ कि अपना नाम भी थोड़ा बदल लूँ। अब जब तक मैं इस शरीर के अंदर हूँ, मेरा नाम रहेगा…हरूपाशा!” फिर हरूपाशा गुरुदेव की तरफ देखता है।

हरूपाशा- तो तुम्हारे साथ क्या किया जाये बुड्ढे?

गुरुदेव- म..म..माफ़ी..माफ़ी दे दीजिये हरु , मुझसे अनजाने में एक गलती हो गयी।

हरूपाशा- ह्वी ह्वी। मौत को सामने देखकर तो सब गिड़गिड़ाते हैं, तू भला मेरे किस काम का है?

गुरुदेव- आ..आप सिर्फ पृथ्वी पर राज करना चाहते हैं पर मैं सभी समयधाराओं पर राज करने में आपकी सहायता कर सकता हूँ।

हरूपाशा- हुम्म..भला वो कैसे?

गुरुदेव- दरअसल आपकी ऊर्जा चुराने के पीछे मेरी पूरी योजना यह थी कि मैं आपकी 25% ऊर्जा से खतरनाक हथियार बनाता और पृथ्वी के उस गुप्त स्थान पर धावा बोलता जिसका नाम है नागद्वीप!

हरूपाशा- क्यों? वहां पर ऐसा क्या है?

गुरुदेव- वहां पर एक त्रिफना मूर्ति है जो महात्मा कालदूत के संरक्षण में है, उस मूर्ति पर तीन मणियाँ स्थापित करने पर आप समय की सभी धाराओं और सभी आयामों पर राज कर सकते हैं।

हरूपाशा- हुम्म..यानि की अगर मैं तेरे यंत्रों की ओर ध्यान नहीं देता और तू त्रिफना को पाने में सफल हो जाता तो मुझे भी तू अपना गुलाम बना लेता?

गुरुदेव- श..शायद! कहते हैं कि जिसके हाथ में त्रिफना की शक्ति हो उसका आदेश तो देवता भी मानते हैं।

हरूपाशा- ह्वी ह्वी! बहुत बढ़िया चाल थी तेरी, तूने मुझे खुश कर दिया इसलिए मैं तुझे बख्श रहा हूँ,अब मुझे नागद्वीप लेकर चल!

गुरुदेव- जी ज़रूर! दरअसल नागद्वीप का पता नगीना जानती है तो हमको इसे भी साथ लेकर चलना होगा।

हरूपाशा(नगीना की तरफ देखकर)- ठीक है, तू भी हमारे साथ चलेगी।

नगीना(जो विषधर की मृत्यु से अभी तक शॉक में होती है)- ज..जी..जी जो आपकी आज्ञा!

हरूपाशा- वे तीन मणियाँ कहाँ पर हैं?

गुरुदेव- मेरे पास ही हैं, मेरे लोग पहले ही ये मणियाँ ले आये थे।

हरूपाशा- बहुत अच्छे!

………………………………..फिर हरूपाशा गुरुदेव और नगीना के साथ एक झटके में वहां से गायब हो जाता है…नागद्वीप जाने के लिए। अब तक एक मशीन के पीछे छिपे प्रोफेसर कमलकांत निकलकर बाहर आते हैं और बेहोश रमेश खन्ना को पानी की छींटे मारकर होश में लाते हैं।

रमेश- उ..उफ़..ये कहाँ पर हूँ मैं?

कमलकांत-क्या तुमको कुछ भी याद नहीं?

रमेश- उफ़..कुछ कुछ याद है! वो ..वो हरु प्राणी कहाँ गया है?

कमलकांत- उसे अब एक नया और शक्तिशाली शरीर मिल गया है। अब चलो यहाँ से, हमको बाहरी दुनिया को खबर करनी होगी कि उनपर क्या आफत आने वाली है।

…………………………….कमलकांत और रमेश खन्ना गुरुदेव की उस लैब से निकल जाते हैं। 

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli

Disclaimer – These stories are written and published only for entertainment. comic haveli and writers had no intent to hurt feeling of any person , community or group. If you find anything which hurt you or should not be posted here please highlight to us so we can review it and take necessary action. comic haveli doesn’t want to violent any copyright and these contents are written and created by writers themselves. the content doesn’t carry any commercial profit, as fan made dedications for comic industry.  if any name , place or any details matches with anyone then it will be only a coincidence.

11 Comments on “Earth 61 Part 14 (Harupasha)”

  1. Kya likhte ho sir…. Waah maja hi aa gya….
    Laga story khtm hi na ho…
    Isme action kam tha jo mujhe kafi khala….
    Harupasha banne se ab kahani kya mod lati hai wo dekhne yogya hoga….
    Ek taraf nagdweep aur ek tarf harupasha…. Aur unse dur nagraj aur baki rakshak… Wow jabardast

  2. बहुत बढ़िया कहानी है हर्षित जी।
    त्रिफना और हरु प्रणियों की कहानियों को बहुत बढ़िया तरीके से एक साथ पिरोया गया है।
    मैं चाहता हूँ ये सीरीज चलती जाए।

  3. Bahut bahut dhanyawad Moni ji, Devendra ji, Ravi ji, Akash ji aur Dev ji. Aap logo ke sahyog ke karan hi ye series yaha tak pahuchi hai

    1. उसके लिए क्षमा चाहूँगा तारिक जी,अगला पार्ट बड़ा आएगा।

  4. बेहतरीन
    बहुत बढिया कहानी है।हर केरेक्टर को लेकर कया काम्बीनेशन तैयार किया है।लगता है कहानी इसी तरह चलती रहे और कभी खत्म ही न हो,पर हर कहानी का अंत होता ही है।लिखने का ये हुनर बहुत कम लोंगों के पास ही होता है।
    आपका बहुत धन्यवाद, जो आपने हम सब कामिक्स प्रेमियों का मनोरंजन किया और एक साथ बांधे रखा।आप को बहुत शुभ कामनाएँ।आगे की कहानी का इंतजार रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.