Earth 61 Part 15 (Shakti-Vichhed)

EARTH-61

PART 15.

( Shakti-Vichhed)

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli

सभी रक्षक इस वक्त प्रोफेसर की लैब के बाहर खड़े थे।

ध्रुव- तो तुम तैयार हो नागराज?

नागराज- ठीक है, मैं फिर से दुनिया के सामने आने को तैयार हूँ।

ध्रुव- ठीक है, तुम्हारे साथ कांफ्रेंस में मैं चलूँगा और गृहमंत्री जी भी होंगे।

डोगा- वो तो ठीक है, पर क्या तुमको लगता है कि ये सही है ध्रुव? दुनिया अभी हरु के हमले से त्रस्त है और हम लोग एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन कर रहे हैं।

ध्रुव- मेरे पास भी विकल्प नहीं है डोगा, जैसे ही सरकार को पता चला कि इच्छाधारी नाग वापस से हमारे बीच आ गए हैं,मेरे पास गृहमंत्री जी का मैसेज आ गया कि तुरंत उनमे से किसी एक के साथ मीडिया के सामने आया जाए ताकि लोगों को ये आश्वासन दिया जा सके कि हरु से निपटने के लिए हम कड़ी तैयारी कर रहे हैं और डर का माहौल थोड़ा ठंडा पड़ जाए।

डोगा- उम्मीद करो क़ि इच्छाधारियों के आगमन की खबर सुनकर माहौल ठंडा पड़ने के बजाय गरम न हो जाये।

ध्रुव- मुझे ऐसा नहीं लगता।

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli

नागराज- ये तो वक्त ही बताएगा। मैं तैयार हूँ, चलो ध्रुव।

ध्रुव- मैं नागराज के साथ जा रहा हूँ। तुम लोग यहाँ की स्थिति संभाल लेना।

फेसलेस- दरअसल, मुझे भी वेदाचार्य की स्थिति जानने के लिए हॉस्पिटल जाना है।

ध्रुव- ठीक है, तुम वेदाचार्य हालात जानकर आओ फेसलेस।

नागराज- वेदाचार्य? क्या हुआ है उनको?

ध्रुव- तुम जानते हो वेदाचार्य को?

नागराज- बहुत अच्छे से। अगर मानवों में मैं किसी को आदर्श मानता हूँ तो वो हैं वेदाचार्य।

ध्रुव- हरु की वजह से वे हॉस्पिटल में पहुँच गए हैं।

नागराज- मुझे भी उनकी हालत जाननी है, चलो फेसलेस।

ध्रुव- उनकी हालत उतनी भी गंभीर नहीं है, डॉक्टर ने उनको बेडरेस्ट के लिए बोला है। तुम प्रेस कांफ्रेंस से आकर भी उनसे मिलने के लिए जा सकते हो।

नागराज- ठीक है, चलो।

नागराज और ध्रुव कांफ्रेंस के लिए निकलते हैं। बाकि सभी रक्षक प्रोफेसर की लैब में रुकते हैं।

न्यूज़फ़्लैश- कुछ गुप्त सूत्रों से पता चला है कि हरु के खिलाफ जंग में विलक्षण रक्षकों के साथ इच्छाधारी नागजाति भी हिस्सा ले रही है। जी हाँ, इच्छाधारी नाग छह साल गायब रहने के बाद वापस हमारे समाज में आ गए हैं और उन्होंने भी हरु का सामना करने के लिए कमर कस ली है पर उनको लेकर लोगों के ज़ेहन में कई सवाल हैं जैसे की छह साल पहले क्या हुआ था रिसर्च सेण्टर में? उस घटना के बाद सभी इच्छाधारी कहाँ गायब हो गए? हो सकता है कि आज हमें इन सब सवालों के जवाब मिलें क्योंकि इच्छाधरियों का एक रिप्रेजेन्टेटिव आज एक प्रेस कांफ्रेंस में आ रहा है हमारे पसंदीदा हीरो सुपर कमांडो ध्रुव के साथ। इसी क साथ गृहमंत्री जी भी इस प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद हैं।

……………..…………….ध्रुव नागराज को लेकर न्यूज़ चैनल के स्टूडियो में पहुँचता है जहाँ गृहमंत्री जी भी मौजूद होते हैं। पहले तो सभी पत्रकार नागराज को ऐसे देखते हैं जैसे की उनको दुनिया का आठवां अजूबा दिख गया हो, फिर नागराज, ध्रुव और गृहमंत्री कुर्सियों पर बैठ जाते हैं और उनके सामने ढेरों पत्रकार अपने सवाल रखते हैं।

रिपोर्टर1- पहला सवाल मैं आपसे करना चाहता हूँ, मिस्टर….

नागराज- ..नागराज।

रिपोर्टर 1- जी मिस्टर नागराज। तो सबसे पहले तो आप उस रहस्य पर से पर्दा उठाइये कि आखिर छह साल पहले गवर्नमेंट रिसर्च सेंटर में आखिर क्या हुआ था जिसके बाद आप लोग इतने साल गायब रहे?

नागराज- मुझे बहुत ख़ुशी है कि आपने ये सवाल किया, मुझे भी आम जनता को ये बात बतानी थी। दरअसल उस रिसर्च सेंटर में मेरे एक बहुत अजीज़ मित्र और हम इच्छाधारियों के युवराज विषप्रिय को पकड़कर ले जाया गया और मार डाला गया।

……………………………..ये सुनकर सभी रिपोर्टर आपस में खुसर फुसर करने लगते हैं।

नागराज- मैंने खुद विषप्रिय की लाश को वहां रिसर्च सेंटर में देखा था, प्रोफेसर नागमणि ने उसे मार दिया था और उसके बाद मैंने ही उस रिसर्च सेंटर को मलबे के ढेर में बदल दिया था पर नागमणि का क्या हुआ ये मुझे नहीं पता।

रिपोर्टर 2- तो क्या आपको पता है कि सरकार ने ऐसा कदम क्यों उठाया? क्या आने वाले वक्त में आप लोग हमारे लिए खतरा बन सकते थे?

नागराज- खतरा तो आप लोग बन गए हमारे लिए। छह साल पहले हम लोग महानगर के वेदाचार्य शिक्षाधाम में शिक्षा लेने के लिए आये थे, हमको नहीं पता था कि मानव पहले से ही हमारे बारे में एक अलग ही धारणा बनाकर बैठे हुए हैं।

रिपोर्टर 2- लेकिन क्या हमारी धारणा गलत थी? उस समय महानगर के एक बैंक को इच्छाधारियों ने लूटने का प्रयास भी किया था और असम में भी उस वक्त उन लोगों ने सीरियल बम ब्लास्ट किये थे।

नागराज- और दोनों ही जगह मैंने उन इच्छाधारियों को विफल कर दिया। आप ही एक बात बताइये, क्या सब मानव दूध के धुले होते हैं? क्या आप लोगों में कोई अपराधी या कोई आतंकवादी पैदा नहीं होता? उसी प्रकार से हम लोगों में भी कुछ अच्छे और कुछ बुरे लोग होते हैं पर उस वक्त सरकार हम लोगों से इतना ज़्यादा डर गयी कि हमको पकड़ने के लिए प्रतिरोधी दल तक बना डाला।

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli

गृहमंत्री(बीच में ही)- प्रतिरोधी दल लोगों की सुरक्षा के लिए था।

नागराज- अच्छा ? ऐसा लगा तो नहीं की लोगों की सुरक्षा हो रही है, मुझे तो ऐसा लगा की उस दल का एकमात्र मकसद सम्पूर्ण नागजाति का विनाश था।

रिपोर्टर 3- गृहमंत्री जी, प्रोफेसर नागमणि के क्रियाकलापों के बारे में आपकी क्या राय है? क्या सिर्फ इच्छाधारी नागों को मारने के लिए ही सरकार उनकी फंडिंग करती थी?

गृहमंत्री- नागमणि को सरकार से अपने प्रयोगों के लिए पैसे मिलते थे और उसने कई बेहतरीन प्रयोग किये थे पर बाद में उसने रिसर्च लैब का इस्तेमाल किन कामों के लिए किया, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है।

रिपोर्टर 4- सुपर कमांडो ध्रुव, जो काम कोई नहीं कर पाया वो आपने कर दिखाया। आपको इच्छाधारी मिले कहाँ और आपने आखिर इच्छाधारियों को साथ आने के लिए मनाया कैसे?

ध्रुव- देखिये मैं इच्छाधारियों के उस गुप्त निवास स्थान की जानकारी तो आपको नहीं दे सकता पर इतना बता सकता हूँ कि इच्छाधारी हमसे इसलिए मिले क्योंकि हरु उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा था जितना कि हमारे लिए।

रिपोर्टर5- अब तो इच्छाधारी भी आपके साथ हैं, क्या आपको लगता है कि अब आप हरु का आतंक समाप्त कर पाएंगे?

ध्रुव- उम्मीद तो यही है, देखते हैं कि आगे क्या होता है। अब हमें चलना होगा, सवालों के लिए धन्यवाद।

न्यूज़फ़्लैश- तो आखिर इतने समय बाद इच्छाधारियों ने रिसर्च सेंटर वाली घटना पर अपनी चुप्पी तोड़ ही ली।इच्छाधारियों के आने से लोगों को एक उम्मीद जगी है पर अब सरकार के कदम पर सवाल उठाये जा रहे हैं, लोग तय नहीं कर पा रहे कि गलती किसकी है? देश के विख्यात प्रोफेसर नागमणि की? सरकार की? या फिर इच्छाधारियों की? दर्शकों को बता दें कि नागमणि की लाश रिसर्च सेंटर के मलबे में नहीं मिली थी।

………………………………………….उधर नागद्वीप पर अचानक एक तेज़ रौशनी के धमाके के साथ हरूपाशा, गुरुदेव और नगीना प्रकट होते हैं।

हरूपाशा- हुम्म..तो ये है नागद्वीप! अब मुझे बताओ कि वो कालदूत कहाँ है, जिसके पास त्रिफना मूर्ति है?

……………………………….तभी अचानक ही उन लोगों को चारों तरफ से नागद्वीप के प्रहरी घेर लेते हैं। हरूपाशा हल्का सा मुस्कुराता है और उसकी उँगलियों से एक किरण निकलकर उन सभी प्रहरियों के शरीर के अंदर जाती है, वे सभी विकृत हो जाते हैं और नागद्वीप में तबाही मचाने लगते हैं। एक नागसैनिक विसर्पी के पास महल में सन्देश लेकर जाता है।

नागसैनिक- नागसाम्राज्ञी! अनर्थ हो रहा है!

विसर्पी- क्या हुआ नागसैनिक? तुम इतने घबराये हुए क्यों हो?

नागसैनिक- रानी नगीना..वे वापस आ गयी हैं और उनके साथ दो और लोग हैं जो नागद्वीप में तबाही फैला रहे हैं।

विसर्पी- क्या? नगीना यहाँ पर?

महात्मा कालदूत कहाँ पर हैं?

नागसैनिक- कालदूत साधना में थे पर मुझे नहीं लगता कि इस कोलाहल वे बहुत देर तक साधना में रह पाएंगे।

विसर्पी- कालदूत अब तक साधना से उठ गए होंगे, उनको सूचित करो। मैं भी इस जंग के लिए तैयार होती हूँ।

……………………………..दूसरी तरफ हरुपाशा आगे आगे चलकर नागद्वीप में तबाही फैला रहा होता है, गुरुदेव और नगीना उसके पीछे होते हैं।

नगीना- हुंह! बड़े आये थे हरु की ऊर्जा सोखने वाले! खुद तो डूबे ही, साथ में मुझे भी ले डूबे!

गुरुदेव- मुझे क्या पता था कि मेरी योजना इस तरह से विफल हो जायेगी।

हरूपाशा- क्या खुसर फुसर कर रहे हो दोनों?

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli

गुरुदेव- ज..जी कुछ भी नहीं!

हरूपाशा- वो कालदूत कहाँ है जिसके पास त्रिफना है?

……………………………………तभी एक आवाज़ आती है “तुमको कालदूत चाहिए ना, लो आ गया कालदूत!” सामने कालदूत अपने रौद्र रूप में खड़े हुए थे, वे नागद्वीप पर हुए इस हमले से बुरी तरह कुपित हो चुके थे।

हरूपाशा- ह्वी ह्वी ह्वी! तो तू है कालदूत! ला त्रिफना मूर्ति मुझे दे दे और मैं तेरी जान बख्श दूंगा!

कालदूत- तो तू है हरु जिसने दुनिया में इतना आतंक मचा रखा है! मैंने सुना है कि तुम हरुओं में देवताओं को भी टक्कर देने की शक्ति होती है?

हरूपाशा- सही सुना है।

कालदूत- लोग मेरे बारे में भी यही कहते हैं, देखते हैं कि कौन अधिक बलशाली है।

 कालदूत और हरूपाशा आमने सामने आ चुके थे। गुरुदेव और नगीना केवल मूक दर्शक बने खड़े थे।

हरूपाशा- तुम्हारे सामने अभी मौका है कालदूत, त्रिफना को मेरे हवाले करके अपनी जान बचा लो।

कालदूत- लगता है कि तुमको अपनी शक्ति पर कुछ ज़्यादा ही गुमान है।

हरूपाशा- तुमको बस में करने के और भी तरीके हैं मेरे पास। मैं अपनी हरु ऊर्जा से तुझे अपना गुलाम बनाऊंगा।

……………………हरूपाशा अपनी उँगलियों से एक किरण कालदूत की ओर केंद्रित करता है जिससे उसने पहले नागसैनिकों को अपने वश में किया होता है पर कालदूत अपना कालसर्पी चलाकर उस किरण को बीच में ही काट देते हैं।

हरूपाशा- वाह! यानी कि मैं तुझे अपने वश में नहीं कर सकता, अब तुझे मरना होगा।

कालदूत- ये प्रयास भी करके देख लो क्योंकि मेरे ज़िंदा रहते तो तुम त्रिफना लेकर जा नहीं सकते।

…………………………………हरु द्वारा बस में किये गए नागसैनिक कालदूत की तरफ बढ़ते हैं लेकिन कालदूत चीरचला नाम के अस्त्र से उन सभी का संहार कर देते हैं।

हरूपाशा- ये क्या! इनके शरीर के भाग आपस में जुड़ जाने चाहिए थे, पर ऐसा नहीं हुआ।

कालदूत- मैंने चीरचला से इनका संहार किया है, ये अस्त्र किसी भी प्रकार की ऊर्जा को ख़त्म कर सकता है और अब तेरा भी संहार मैं इसी से करूंगा।

…………………………ये कहकर कालदूत चीरचला को हरूपाशा की तरफ फेंकते हैं लेकिन हरूपाशा चीरचला को हाथ में पकड़कर तोड़ देता है।

हरूपाशा- ये गया तेरा चीरचला! तूने अपनी शक्ति कुछ ज़्यादा ही आंक ली थी कालदूत! अब ये खेल बहुत हुआ, अब तू मुझे त्रिफना को हासिल करने से नहीं रोक पायेगा।

…………………………हरूपाशा एक भीषण वार कालदूत की संयुक्त कुंडली पर करता है जिसके कारण कालदूत के तीन रूप- विष्या, महाविष्या और परमविष्या अलग अलग हो जाते हैं।

हरूपाशा- ह्वी ह्वी ह्वी! अब मैंने तुझे बेबस कर दिया कालदूत। अब तेरे सामने से ही मैं त्रिफना मूर्ति लेकर जाऊँगा और तुम तीनों कुछ भी नहीं कर पाओगे। नगीना! मुझे बताओ कि इसकी गुफा कहाँ पर है!

नगीना- जी, आइये मेरे साथ।

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli

………………………………हरूपाशा, गुरुदेव और नगीना कालदूत की गुफा की ओर बढ़ते हैं,कालदूत के अलग थलग हुए रूप फिलहाल उनको रोकने की हालत में नहीं थे। दूसरी तरफ विसर्पी घटनास्थल पर पहुँचती है।

विसर्पी- हे भगवान्! ये क्या हो गया!

विष्या- उफ़्फ़…इतने समय बाद अलग होने के कारण बेहद भीषण पीड़ा हो रही है!

परमविष्या- फिलहाल ये सोचो कि हम उनको रोकेंगे कैसे, ये हरु तो हमारी कल्पना से भी अधिक शक्तिशाली है।

विसर्पी- आ..आप तीनों अलग कैसे हुए?

महाविष्या- हरु यहाँ पर पहुँच गया है विसर्पी, उसे रोकना होगा।

विसर्पी- पर जिसने आपको पराजित कर दिया, उसे हम कैसे रोकेंगे।

विष्या- मैं इरी से मानसिक संपर्क करता हूँ, हमें और लोगों की मदद चाहिए होगी।

………………………………..दूसरी तरफ भारती अपनी फेसलेस वाली पोशाक बदलकर वेदाचार्य से मिलने हॉस्पिटल पहुँचती है।

भारती- अब आपकी तबियत कैसी है दादाजी?

वेदाचार्य- मैं तो काफी हद तक ठीक हो गया हूँ, पर तुम्हारे चेहरे पर चिंता के निशान हैं।

भारती(गहरी सांस लेकर)- वो लौट आया दादाजी, छह वर्ष बाद वो फिर से लौट आया है।

वेदाचार्य(आश्चर्य और ख़ुशी के मिले जुले भाव के साथ)- क्या! ये तो तुमने कमाल कर दिया मेरी बच्ची! मेरी आधी तबियत तो ठीक हो ही गयी थी, आधी ये खबर सुनकर ठीक हो गयी।

भारती- पर उसके दिल में अभी भी मानवों को लेकर बहुत नफरत है दादाजी।

वेदाचार्य- जो उसके साथ हुआ, अगर किसी के साथ भी होता तो उसे मानवों से नफरत हो ही जाती।

………………………….तभी पीछे से आवाज़ आती है “ठीक कहा आपने वेदाचार्य जी।” भारती और वेदाचार्य देखते हैं कि सामने नागराज खड़ा होता है।

भारती- अ..अरे नागराज! इतने समय बाद!

नागराज- छुपाने का प्रयास मत करो भारती। मैं पहली नज़र में ही समझ गया था कि तुम ही फेसलेस हो पर उन लोगों के सामने मैं तुम्हारे राज़ का खुलासा नहीं करना चाहता था।

भारती- प..पर कैसे!

नागराज(मुस्कुराकर)- इस दुनिया में तिलिस्म के सबसे बड़े ज्ञाता हैं वेदाचार्य पर जब मैंने फेसलेस को तिलिस्म का इतना बेहतरीन उपयोग करते देखा तो मैं समझ गया कि ये ज़रूर वेदाचार्य का कोई करीबी होगा और फिर तुम मुझे नागद्वीप पर देखकर कुछ सकपका भी गयी थी जिससे मुझे यकीन हो गया कि फेसलेस तुम ही हो।

वेदाचार्य- बातें तो होती ही रहेंगी, मेरे गले नहीं मिलोगे।

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli

……………………………नागराज आगे बढ़कर वेदाचार्य से मिलता है।

वेदाचार्य(भावुक होकर)- तू कहाँ चला गया था मेरे बच्चे? मेरे राजा तक्षकराज की इकलौती निशानी है तू, जाने से पहले बताकर तो जाता।

नागराज(आँखों में आंसू लेकर)- आपको तो पता ही है कि क्या हुआ था दादा वेदाचार्य, मैं जाने से पहले आपसे मिलना चाहता था पर हालात ने साथ नहीं दिया।

भारती- और मुझे तो डांटकर भगा ही दिया था तुमने।

नागराज- हा..हा..उसके लिए माफ़ी भारती। उस समय मेरी स्थिति तुम जानती थी।

वेदाचार्य- खैर ये सब छोड़ो,अब ये बताओ कि हरु से निपटने की क्या योजना है।

नागराज- उसके लिए तो…

……………………………बोलते बोलते नागराज अचानक रुक जाता है, उसके चेहरे पर चिंता के भाव आ जाते हैं।

भारती- क्या हुआ नागराज?

नागराज- अनर्थ.. अनर्थ हो गया भारती!

वेदाचार्य- आखिर हुआ क्या?

नागराज- विसर्पी ने मुझसे मानसिक संपर्क किया है…हरु इस वक्त नगीना और किसी दुसरे बूढ़े व्यक्ति के साथ नागद्वीप पर है। पर इससे भी बुरी खबर एक और है।

भारती- वो क्या?

नागराज- हरु इस वक्त नागपाशा के शरीर में है और उसने कालदूत की संयुक्त कुंडली को विभक्त कर दिया है।

भारती- ये नागपाशा तो वही है ना जिससे तुमने छह साल पहले असम में मुठभेड़ की थी?

नागराज- हाँ, पर ये नहीं समझ आ रहा कि आखिर वो बूढा व्यक्ति कौन है और नगीना अपने निष्कासन से बाहर कैसे आई?

भारती- तो क्या हमें फिर से नागद्वीप जाना होगा?

नागराज- सोच तो मैं भी यही रहा था पर इतनी जल्दी नागद्वीप कैसे पहुंचेगे?

भारती- ध्रुव का जेट ले जाओ।

नागराज- वो जेट भी इतनी जल्दी हमको नागद्वीप नहीं पहुंचा पायेगा।

भारती- फिर आप्शन क्या है हमारे पास?

………………………ध्रुव, डोगा, पंचनाग, नागू, परमाणु और तिरंगा प्रोफेसर की लैब में होते हैं।

परमाणु- नागराज कहाँ गया?

ध्रुव- वो वेदाचार्य से मिलने हॉस्पिटल चला गया है।

……………………………………….तभी परमाणु की बेल्ट बीप बीप की आवाज़ करने लगती है।

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli

परमाणु- ओह! लगता है कि कोई मुझे सिग्नल भेजने का प्रयास कर रहा है।

ध्रुव- पर ऐसा कैसे हो सकता है? इस फ्रीक्वेंसी पर सिग्नल कैसे भेज जाएगा, ये तो सिर्फ प्रोफेसर कमलकांत को ही पता होगा। तो फिर..

डोगा- इसका मतलब तो..

परमाणु(तुरंत उठकर)-..मैं जा रहा हूँ।

ध्रुव- अगर ये कोई चाल हुई तो? तुम तिरंगा और डोगा को भी साथ ले जाओ।

डोगा- और क्या? हम तीनों लोग तो बने ही हैं ही एक साथ इधर से उधर जाने के लिए। आजा भाई।

परमाणु- चलो जल्दी।

……………………………….शीघ्र ही परमाणु के साथ डोगा और तिरंगा उड़कर उस स्थान पर पहुँचते हैं जहाँ से सिग्नल आ रहा था। गुरुदेव की लैब के पास प्रोफेसर कमलकांत और रमेश खन्ना खड़े होते हैं। परमाणु उनको देखकर ख़ुशी से चीख उठता है।

परमाणु- मामाजी! मैं आ रहा हूँ!

डोगा(तिरंगा की तरफ देखकर)- मामाजी?

……………………परमाणु शीघ्र ही डोगा और तिरंगा को उतारता है और दौड़ते हुए प्रोफेसर कमलकांत के गले लग जाता है।

परमाणु- कहाँ चले गए थे आप?

कमलकांत- हा..हा..तुम अभी भी बच्चों की तरह ही बर्ताव करते हो विनय।

परमाणु- आपके लिए तो मैं हमेशा बच्चा ही रहूँगा। अरे! ये कौन है? अधमरा सा लग रहा है।

कमलकांत- ये रमेश खन्ना है। चलो तुरंत यहाँ से निकलते हैं, बाकि बातें मैं तुमको रास्ते मैं बताऊंगा।

…………………………इरी की गुफा में-

एंथोनी- वे लोग फिर हाथ से निकल गए इरी।

जैकब- इस बार तो हमने उनको लगभग पकड़ ही लिया था पर तभी हवा में एक पोर्टल खुला और सब उसमे गायब हो गए।

इरी- दरअसल उनका पता चल गया है।

एंथोनी- क्या! कैसे?

इरी- कालदूत ने मुझसे अभी मानसिक संपर्क किया था। जो लोग नगीना को छुड़ाकर ले गए थे..गुरुदेव और नागपाशा, वो दोनों और नगीना इस वक्त नागद्वीप पर हैं।

जैकब- ये तो अच्छी बात है, कालदूत ने अब तक उनको बंदी बना लिया होगा।

इरी- नहीं, दरअसल हरु ने नागपाशा के शरीर पर कब्ज़ा कर लिया है और उसने..कालदूत को भी पराजित कर दिया है।

एंथोनी- क्या? मुझे नहीं पता था कि इस धरती की कोई भी शक्ति कालदूत को हरा सकती है।

इरी- यही तो बात है। हरु इस धरती का नहीं है और अब कालदूत ने मुझसे मदद मांगी है।

एंथोनी- तो फिर ठीक है, आपकी तंत्र शक्तियों के सहारे हम लोग तुरंत नागद्वीप पर जा सकते हैं।

इरी- जा तो सकते हो, पर क्या तुम लोग हरु के सामने टिक पाओगे?

जैकब- एक बार प्रयास करने में क्या हर्ज है?

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli

इरी- शायद तुमने ठीक से सुना नहीं। कालदूत ने मुझसे ” मदद” मांगी है। अगर कालदूत को मेरी आवश्यकता पड़ रही है , इसका मतलब शायद हम लोग भी संयुक्त रूप से उस हरु को पराजित न कर पाएं। वो त्रिफना के पीछे है।

जैकब- ये त्रिफना क्या है?

इरी- एक ऐसी शक्ति जिसको हासिल करने वाला समय की सभी धाराओं और सभी दुनियाओं पर राज कर सकता है।

एंथोनी- तो फिर इस बार मैं,आप,जैकब और पूरी प्रेत सेना जायेगी उसका मुकाबला करने। वैसे भी हम मरे हुए हैं, कितना मार सकता है हरु हमको?

इरी- ठीक है, लगता है कि तुम लोग मुझे भी अपनी जमात में शामिल करके मानोगे।

एंथोनी- हा..हा..तुम इतनी जल्दी नहीं मरोगे इरी, अब समय और नष्ट मत करो और नागद्वीप चलो।

इरी- ठीक है, मैं अपनी शक्ति से एक आयाम द्वार का निर्माण करता हूँ जिससे हम लोग तुरंत नागद्वीप पर पहुँच सकते हैं।

…………………………………..दिल्ली एक एक सामान्य से फ्लैट में एक महिला और एक व्यक्ति की बहस हो रही होती है।

चंदा- तुम समझ नहीं रहे हो तरुण! अब शक्ति कभी वापस नहीं आ सकती!

तरुण- पर क्यों नहीं आ सकती चंदा? क्या शक्ति को अब हम लोगों की परवाह नहीं?

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli

चंदा- उसने मुझे विकल्प दिया था। या तो मैं तुम्हारे साथ एक गृहस्थ और सुखी जीवन चुन सकती थी या फिर उसे।

तरुण- और तुमने मुझे चुन लिया।

चंदा- मैं थक चुकी थी तरुण। शक्ति को सिर्फ पापियों के संहार से मतलब था पर चंदा की तो अपनी एक ज़िन्दगी थी। ऊपर से तुमसे दूरी भी मुझे बर्दाश्त नहीं हो रही थी।

तरुण- मैं तुम्हारे फैसले का पूरा सम्मान करता हूँ चंदा, तुमने शक्ति के ऊपर मुझे चुना और मुझे अपने इस रहस्य से अवगत भी कराया जिसके कारण शक्ति ने रुष्ट होकर तुम्हारा साथ छोड़ दिया और वो चली गयी। पर दुनिया को अब उसकी ज़रुरत है, इस हरु के हमले से निपटने के लिए।

चंदा- शक्ति को गए हुए अब एक वर्ष से भी अधिक हो गया है तरुण और फिर छह महीने पहले हमारी शादी भी हो गयी, तुम्हारी तरह मेरा दिल भी यही चाहता है कि वो लौट आये लेकिन मुझे नहीं पता कि अब ऐसा संभव है या नहीं।

तरुण- शक्ति को इस विपदा के समय में वापस आना ही होगा, इस बार बात लोगों के विश्वास की है…उसको आना ही होगा।

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli

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9 Comments on “Earth 61 Part 15 (Shakti-Vichhed)”

  1. Kahani khtm
    अरे ये पार्ट लंबा था लेकिन पढ़ते पढ़ते पता ही नही लगा कब खत्म हो गया।
    बहुत ही सुंदर लिखा हुआ लेखन शैली जबरदस्त।
    नागराज का प्रेस कॉन्फ्रेंस में आना खुद को जाहिर करना सहज लगा….
    कालदूत और हरूपाशा कि लड़ाई उम्मीद से ज्यादा छोटी रही….कहानी की गति जबरदस्त है लेकिन कहीं पर भागती भी लगी….
    कुछ घटनाओं में बहुत जल्दी बदलाव हुआ..
    कहानी में अगले पार्ट का बहुत ज्यादा wait रहेगा

  2. बहुत बढ़िया हर्षित भाई।…
    शक्ति के आने से कहानी और भी ज्यादे मज़ेदार हो जाएगी।
    नागराज-विशर्पि -भारती के प्रेम त्रिकोण को बहुत अचे ढंग से लिखा है।। मज़ा आ गया।।
    अगले पार्ट्स का इंतज़ार है।

  3. Mann kar rha tya story chalti hi rahe aapki story me artwork ki bhi zarurat nhi sab kch imagine ho jata h weldone

  4. भाई पढते पढते कहानी खत्म हो गई पता ही नही चला
    बहुत बढिय़ा कहानी मे बहुत मजा आ रहा है।
    अगले भाग का इंतजार रहेगा।

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