Earth 61 Part 16 (Dev-Haru_Yuddh)

EARTH-61.

PART 16.

(Dev-Haru-Yuddh)

परमाणु, डोगा और तिरंगा प्रोफेसर कमलकांत और रमेश खन्ना को लेकर वापस प्रोफेसर की लैब में आते हैं जहाँ पर बाकी के लोग उनका इंतज़ार कर रहे थे , तब तक नागराज और फेसलेस भी वेदाचार्य से मिलकर वापस आ चुके थे।

ध्रुव- भगवान का लाख लाख शुक्र है कि आप सही सलामत हैं प्रोफेसर कमलकांत।

कमलकांत- तुम तो सुपर कमांडो ध्रुव हो..राजनगर के रक्षक..मैं पहचानता हूँ तुमको, और ये बाकी लोग?

परमाणु- ये भेड़िया है, असम के जंगलों का रक्षक और.. ये लोग इच्छाधारी हैं।

कमलकांत- इच्छाधारी नाग? ये तो कमाल की बात है, मुझे छह साल पहले की घटना के बारे में पता है। सच पूछो तो मुझे नहीं लगता था कि उस हादसे के बाद आप लोग फिर कभी वापस लौटेंगे।

नागराज- हमको भी नहीं लगता था कि कभी ऐसी नौबत आएगी पर वो तो आ ही गयी।

परमाणु- ये नागराज है..इन इच्छाधारियों के दल का नायक।

कमलकांत- नागराज! ख़ुशी हुई तुमसे मिलकर।

नागराज- मुझे भी। अब आप ये बताएं कि आपको बंधक बनाने के पीछे किसका हाथ था?

कमलकांत- वो दो लोग थे..एक था नागपाशा और एक का नाम था गुरुदेव।

नागराज- ओह!

कमलकांत- तुम्हे पता है कि वो कौन हैं?

नागराज- नागपाशा से मैं पहले भिड़ चुका हूँ और गुरुदेव शायद उसका सहायक है। आपको पता चला कि आपको गायब करने के पीछे उनकी मंशा क्या थी?

…………………………………….फिर प्रोफेसर कमलकांत उन सबको गुरुदेव की हरु की ऊर्जा को चोरी करके इस्तेमाल करने की योजना के बारे में बताते हैं, साथ ही वो हरु के लैब में आने और नागपाशा के शरीर पर उसके कब्ज़े के बारे में भी बताते हैं।

नागराज- हे देव कालजयी! मतलब कि हरु ने नागपाशा के शरीर पर कब्ज़ा जमा लिया है?

कमलकांत- हाँ, मैंने अपनी आँखों से देखा है और लैब में दो और लोग थे…विषंधर और नगीना!

नागराज(आश्चर्य से)- क्या! नगीना और विषंधर?

ध्रुव- तुम हैरान क्यों हुए? कौन है ये लोग?

नागराज- तांत्रिक विषंधर हमारे द्वीप का एक ऐसा व्यक्ति है जिसने पहली बार राजसिंहासन के लिए विद्रोह किया था जिसके कारण उसे निष्कासित कर दिया गया था। नगीना हमारी रानी थी,उसे अपनी ही पुत्री विसर्पी को मारने के प्रयास में दोषी पाकर छह साल पहले निष्कासित कर दिया गया था।

ध्रुव- तो कहाँ निष्कासित करके भेज गया था दोनों को?

नागराज-मुर्दों की दुनिया के नाम से एक आयाम है जिसे एक तांत्रिक इरी और महात्मा कालदूत ने मिलकर रचा है, उसी में भेजा गया था उन दोनों को। अब मुझे कुछ कुछ बात समझ में आ रही है..गुरुदेव और नागपाशा ने मुर्दों के आयाम में प्रवेश करके नगीना और विषधर को आज़ाद किया, पर क्यों? और कैसे?

कमलकांत- ये गुरुदेव बेहद खतरनाक आदमी है, इसने हरु की ऊर्जा को सोखने वाले यंत्र बनाये और उसकी मदद से अति विध्वंसकारी हथियारों का निर्माण किया। वो अपने संयंत्रों की मदद से हरु की केवल 1 से 2% तक ही ऊर्जा सोख पा रहा था इसीलिए तो उसने मुझे उठाया ताकि वो ऐसे यंत्र बना सके जो अधिक मात्रा में हरु की ऊर्जा सोख सकें पर हरु आ गया और उनकी पूरी योजना पर पानी फिर गया।

नागराज- पर उनको नगीना और विषंधर के बारे में पता कैसे लगा?

कमलकांत- मैं सोच रहा था कि ये सवाल तुम करोगे या नहीं। दरअसल, तुम लोगों के बीच एक गद्दार है।

नागराज- गद्दार? कौन?

कमलकांत- मैं आधी बेहोशी की हालत में था लेकिन मुझे नागपाशा और एक व्यक्ति की बातचीत सुनाई दी जिसका नाम था…रमन!

…………………..ये नाम सुनके सभी इच्छाधारियों के पैरों तले ज़मीन खिसक जाती है।

नागराज- आपने पक्का यही नाम सुना था प्रोफेसर?

कमलकांत- हाँ! क्यों, क्या हुआ?

नागराज- ये तो तुम्हारा मित्र था न नागू?

नागू- हाँ, मित्र तो था।

नागराज- यानि कि हमारे ही समुदाय के एक व्यक्ति ने हमसे धोखा किया, कुछ मानवों के साथ मिलकर। रमन ने ही उनको त्रिफना और नागद्वीप के बारे में पूरी जानकारी दी होगी।

नागू- अगर ऐसा हुआ है तो उसे हम छोड़ेंगे नहीं!

नागराज- आज मुझसे विसर्पी ने मानसिक संपर्क किया..उसने बताया कि हरु ने नागपाशा के शरीर पर कब्ज़ा कर लिया है और वो खुद को फिलहाल हरूपाशा कह रहा है, उसके साथ गुरुदेव और नगीना भी हैं। उसने कालदूत को पराजित कर दिया है पर हरु नागद्वीप पर क्या करने जा सकता है?

सिंहनाग- नागराज! कहीं वो त्रिफना मूर्ति के लिए तो..

नागराज- ..नहीं सिंहनाग, त्रिफना मूर्ति अगर वो हासिल कर भी लेता है तो उसे मेरे ख़ज़ाने की तीन मणियाँ चाहिए होंगी और खज़ाना तो भेड़िया के संरक्षण में हैं, है न भेड़िया?

भेड़िया- हाँ, खज़ाना तो मेरे लोगों के संरक्षण में है।

ध्रुव- फिर भी हमको पता करना पड़ेगा नागराज, क्या पता भेड़िया की गैरमौजूदगी में गुरुदेव और नागपाशा ने ख़ज़ाने को उठाने की योजना बनायीं हो?

नागराज- अब ये पता करने के लिए हमको इसी क्षण असम पहुंचना होगा और ऐसा कोई साधन नहीं जिससे तुरंत असम पहुंचा जा सके।

…………………………तभी हवा में एक आयामद्वार खुलता है। सभी लोगों की नज़र वहां चली जाती है, उस द्वार में से निकलता है स्वर्णनगरी का रक्षक..धनंजय।

नागराज- रुको! तुम कौन हो?

धनंजय- मेरा नाम धनंजय है और मैं एक देव हूँ।

नागराज- मुझे देवों के अस्तित्व का पता है, ये जाति तो धरती से हज़ारों साल पहले विलुप्त हो गयी थी।

धनंजय- विलुप्त नहीं हुई थी, हम लोगों ने अपना एक अलग ठिकाना बना लिया था और कभी मानवों के सामने न जाने का फैसला किया था क्योंकि आने वाले समय में मानव स्वार्थी हो गए थे और उन्होंने हमारी तकनीकों का गलत इस्तेमाल शुरू कर दिया था।

ध्रुव- तो अब तुम्हारे सामने आने की क्या वजह है?

धनंजय- वजह बहुत साफ़ है…हरु प्राणी। इसकी शक्ति को हम जानते हैं, ये लोग सृष्टि की सर्वप्रथम रचनाओं में से एक हैं और बेहद शक्तिशाली भी। बिना सहयोग के इनसे नहीं लड़ा जा सकता। हम काफी समय से दुनिया की हर छोटी बड़ी घटना पर नज़र रखे हुए हैं, जब हरु के हमले के बारे में पहली बार पता चला तभी से हम लोग आप रक्षकों पर नज़र बनाये हुए थे। हमें शक था कि आप लोग हालातों को संभाल पाएंगे या नहीं पर आपने हमारी उम्मीद से भी अच्छा काम किया। हमने सोचा कि जब इच्छाधारी नागजाति सामने आ ही चुकी है तो अब वक्त है देवजाति के सामने आने का।

ध्रुव- हम कैसे मान लें कि तुमको हरु या गुरुदेव ने नहीं भेजा है?

धनंजय- अगर ऐसा होता तो मैं अपने स्वर्णपाश के ज़रिये अंतरिक्ष का द्वार खोलकर तुम सबको उसमे धकेल देता।

नागराज- ठीक है, फिलहाल के लिए तुम्हारा स्वागत है हमारी दुनिया में। क्या तुम अपने स्वर्णपाश के द्वारा हम लोगों को असम लेकर जा सकते हो?

धनंजय- अवश्य।

…………………………धनंजय स्वर्णपाश के द्वारा एक आयमद्वार बनाता है और कमलकांत को छोड़कर सारे लोग भेड़िया के किले के पास प्रकट होते हैं।

भेड़िया- मैंने ख़ज़ाने की सुरक्षा का कड़ा इंतज़ाम किया था, आओ अंदर चलें।

………………………………भेड़िया सबको लेकर अंदर जाता है और अंदर जाकर सबकी आँखें फटी की फटी रह जाती हैं क्योंकि खज़ाना गायब था। वहीं पर दौदण्ड, काइगुला और एलफांटो सिर झुकाए और दयनीय अवस्था में खड़े थे।

भेड़िया(क्रोधित होकर)- दौदण्ड, काइगुला,एलफांटो! खज़ाना कहाँ गया?

दौदण्ड(निराशाजनक स्वर में)- हमको क्षमा कर दीजिये भेड़िया देवता, हम ख़ज़ाने की रक्षा करने में असफल रहे।

भेड़िया- यानी.. वो लोग पहले ही खज़ाना ले जाने में सफल हो गए? तुम तीनों आखिर कर क्या रहे थे?

काइगुला- हमने अपनी पूरी कोशिश की भेड़िया देवता, पर उनके पास तंत्र शक्तियां थीं। हमारे अलावा दो और लोग भी उनसे भिड़ने आये थे पर उनके कुछ करने से पहले ही वो सब खज़ाना लेकर भाग खड़े हुए।

भेड़िया- कौन दो लोग? दौदण्ड- एक का नाम शायद एंथोनी था और एक का जैकब!

भेड़िया(नागराज की तरफ मुड़कर)- मुझे क्षमा कर दो नागराज, मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि खज़ाना चोरी हो सकता है।

नागराज(भारी मन से)- जो हो गया , सो हो गया भेड़िया। अब आगे की क्या योजना है?

भेड़िया- धनंजय की मदद से हम लोग इसी वक्त नागद्वीप के लिए निकलेंगे, अगर हरूपाशा ख़ज़ाने की तीन मणियों को त्रिफना से जोड़ने में सफल हो गया तो अनर्थ हो जायेगा।

नागराज- तो फिर ठीक है, तुम तैयार हो धनंजय?

धनंजय- पूरी तरह।

 रात के समय चंदा को नींद नहीं आ रही थी, वो बैचेन होकर उठ गयी। उसने तरुण की तरफ देखा जो अभी तक गहरी नींद में था फिर वो अपने फ्लैट की बालकनी में आ गयी। रात को हवा तेज़ चल रही थी, अचानक चंदा के दिमाग में एक बात उभरी। उसने बालकनी से नीचे की तरफ देखा और तुरंत छलांग लगा दी लेकिन उसके शरीर के धरातल से टकराने से पहले ही एक रौशनी से भरे हुए शक्तिपुंज ने उसको रोक लिया और धीरे धीरे धरातल पर ले आया फिर उस शक्तिपुंज ने नारी जैसा आकार ले लिया।

चंदा(सिसकियाँ लेकर)- मैं जानती थी कि मुझ पर अगर कोई मुसीबत आई तो तुम वापस आओगी शक्ति।

शक्ति- तुम पागल हो गयी थी क्या चंदा? अगर मैं समय रहते नहीं पहुँचती तो न जाने क्या होता।

चंदा- दुनिया खतरे में है शक्ति।

शक्ति- पर अब मैं तुम्हारे शरीर का भाग नहीं हूँ चंदा, मैंने तुमको विकल्प दिया था पर तुमने ही मुझे छोड़ दिया।

चंदा- तुम तो देवी काली का अंश हो ना? फिर ऐसा अन्याय होते हुए कैसे देख सकती हो?

शक्ति- इस समस्या से निपटने के लिए और भी विलक्षण काबिलियत वाले लोग हैं।

चंदा- पर हरु बहुत ही शक्तिशाली है, उन लोगों को भी शक्ति की आवश्यकता पड़ेगी।

शक्ति- तो फिर ठीक है, मैं एक बार फिर तुम्हारा शरीर धारण करने को तैयार हूँ लेकिन…

चंदा- लेकिन क्या?

शक्ति- सिर्फ एक सीमित समय तक, हरु को ख़त्म करने के बाद मैं तुम्हारा शरीर फिर से त्याग दूँगी।

चंदा- ठीक है, मुझे ये मंज़ूर है।

…………………………………..शक्ति फिर से चंदा के शरीर को धारण करती है,उस स्थान पर एक तीव्र रौशनी होती है और चंदा अब वहां से गायब हो चुकी होती है और जो खड़ी होती है वो है नारी शक्ति का प्रतीक..शक्ति।अचानक से तरुण की नींद खुल जाती है, चंदा को बगल में न पाकर वो बालकनी में जाता है तभी वो देखता है कि शक्ति उड़ते हुए वहां से जा रही होती है। ये देखकर वह मुस्कुरा देता है। दूसरी तरफ सभी रक्षक धनंजय के साथ भेड़िया के किले में खड़े होते हैं।

परमाणु- एक मिनट! इसका मतलब कि तुम हम सबको नागद्वीप लेकर जाना चाहते हो?

नागराज- हाँ! ध्रुव,भेड़िया और फेसलेस पहले नागू के साथ आ चुके हैं पर इस बार तुम, डोगा और तिरंगा को भी चलना होगा।

डोगा- तो क्या तुम हमारे सामने नागद्वीप की गुप्त लोकेशन को ज़ाहिर करना चाहते हो?

नागराज(मुस्कुराकर)- नहीं! धनंजय सीधे एक आयमद्वार से हम सब को नागद्वीप ले जाएगा। हम किसी जेट या समुद्री मार्ग से नहीं जा रहे तो लोकेशन का पता लगने का सवाल ही पैदा नहीं होता और दूसरी बात ये कि तुम लोग नकाब पहनकर काम करते हो तो तुम स्वयं भी अपनी आइडेंटिटी ज़ाहिर नहीं करना चाहते, तो मैं इतनी उम्मीद तो कर ही सकता हूँ कि नागद्वीप का राज़ तुम लोग किसी को नहीं बताओगे वर्ना मेरे पास दस तरीके हैं तुम लोगों की आइडेंटिटी जानने के।

परमाणु- हुम्म..ठीक है! लगता है कि अब निर्णायक युद्ध की घड़ी आ ही चुकी है ।

………………………………नागद्वीप पर कालदूत तीन भागों में बँटे हुए होते हैं और विसर्पी उनके पास ही खड़ी होती है।

विसर्पी- हरूपाशा आपकी गुफा में पहुँचने वाला होगा महात्मन्! मुझे उसे रोकने की आज्ञा दीजिये।

महाविष्या- काश कि तुम उसको रोक सकतीं विसर्पी, पर राजदंड की शक्ति भी उसके सामने अधिक देर नहीं टिकेगी।

……………………………..तभी अचानक से तंत्र शक्ति का प्रयोग करके इरी, एंथोनी और जैकब अपनी प्रेत सेना के साथ वहां पर प्रकट होते हैं।

इरी- कालदूत मेरे मित्र ! तुम्हारा ये हश्र किसने किया ?

परमविष्या- इरी! अच्छा हुआ कि तुम आ गए, हरूपाशा मेरी गुफा की तरफ जा रहा है और इस वक्त मैं उसे रोक पाने में बिलकुल भी सक्षम नहीं हूँ।

इरी- तुम चिंता मत करो कालदूत! मेरे लोग अपना पूरा बल लगा देंगे..आओ एंथोनी और जैकब।

……………………………हरूपाशा,गुरुदेव और नगीना कालदूत की गुफा की तरफ बढ़ ही रहे होते हैं कि अचानक से एंथोनी, जैकब और प्रेत सेना उसका रास्ता रोक लेते हैं।

हरूपाशा- अब ये कौन हैं?

गुरुदेव- ये..ये तो एंथोनी है!

नगीना- ये मेरे पीछे यहाँ तक चला आया?

एंथोनी- ओह, तो ये बात है। हरु ने नागपाशा के शरीर पर कब्ज़ा जमा लिया है।

जैकब- ये लड़ाई काफी रोमांचक रहेगी।

हरूपाशा- सामने से हटो, जब कालदूत को मैंने पराजित कर दिया तो तुम किस खेत की मूली हो?

एंथोनी- अभी तक दुनिया में बहुत बवाल किया है तूने हरु, अब तेरी शक्ति को अपनी शक्ति से तौलेंगे हम!

हरूपाशा- ह्वी ह्वी! प्रयास करके देख लो!

………………………………उसी वक्त नागद्वीप के इच्छाधारी नाग, जिन पर हरु काबू कर लेता है, एंथोनी और बाकी प्रेत सेना पर टूट पड़ते हैं।

जैकब- उफ्फ.. इसने तो यहाँ के निवासियों को ही गुलाम बना लिया।

एंथोनी- तो जमकर युद्ध करो लेकिन गंभीर प्रहार मत करना ।

…………………………………..देखते ही देखते युद्ध का भीषण मंज़र आँखों के सामने होता है जिसमे प्रेत सेना और हरु की नाग सेना आपस में भिड़ रहे होते हैं।एंथोनी ठंडी आग का एक वार हरूपाशा के ऊपर करता है पर आश्चर्यजनक रूप से ठंडी आग हरूपाशा तक पहुँचने से पहले ही भीषण लावे का रूप धारण कर लेती है और वापस एंथोनी को निशाना बनाती है। एंथोनी टेलीपोर्ट होकर बचता है।

एंथोनी- उफ्फ! अभी तो बाल बाल बचे। आगे के वार संभालकर करने होंगे।

…………………………………प्रेत सेना का साथ देने के लिए विसर्पी भी राजदंड लेकर आ जाती है, वो राजदंड की एक किरण से वार करके नगीना और गुरुदेव को बेहोश कर देती है और फिर हरुपाशा पर वार करती है।

हरूपाशा- हर्रर्रर्रर्र! तो इस अस्त्र में दैवीय शक्ति है! कोई बात नहीं, मैं इस अस्त्र को भी नष्ट कर सकता हूँ।

…………………………हरूपाशा एक किरण का वार करके विसर्पी के हाथ से अस्त्र गिरा देता है, विसर्पी दर्द के कारण चीख पड़ती है। नारी की चीख सुनकर वहां पर प्रकाश की गति से पहुँचती है शक्ति। इससे पहले कि हरूपाशा विसर्पी पर दूसरा वार कर पाता, शक्ति अपने हाथों से तीव्र ऊष्मा के वार करके उसे को दूर धकेल देती है।

हरूपाशा- उफ्फ, पहले इसने दैवीय वार किया और अब ये..अरे ये नारी कौन है? इसके अंदर से मुझे भीषण दैवीय शक्ति का आभास हो रहा है।

शक्ति- मैं हूँ नारी शक्ति का प्रतीक..शक्ति! तो तू है वो हरु जिसने दुनियाभर में आतंक मचा रखा है!

हरूपाशा- हाँ, मैं ही हूँ हरु!

शक्ति- कोई बात नहीं। मैंने बड़े बड़े असुरों का संहार किया है तो तू मेरे सामने क्या है?

हरूपाशा- ह्वी ह्वी ह्वी! तुमने वाकई मेरी तुलना एक तुच्छ असुर से की? मैं हरु प्राणी हूँ, इस सृष्टि के प्राचीनतम प्राणियों में से एक!

शक्ति- कोई फर्क नहीं पड़ता, तेरा संहार तय है!

……………………………शक्ति आसपास पड़े अस्त्रों को ऊष्मा से पिघलाकर बेहद घातक अस्त्रों में बदल देती है और हरु प्राणी की तरफ फेंकती है। एंथोनी और जैकब इस युद्ध को आश्चर्य से देख रहे होते हैं। हरूपाशा के शरीर पर इन तीक्ष्ण अस्त्रों का कोई प्रभाव नहीं होता फिर हरूपाशा अपने हाथों और आँखों से प्रचंड किरण शक्ति की तरफ छोड़ता है जिससे शक्ति दूर जाकर गिरती है।

शक्ति- बस बहुत हुआ! अब लगता है कि तीसरी आँख का प्रयोग करना ही पड़ेगा!

…………………………….शक्ति उड़ते हुए जाती है और हरूपाशा पर तीसरी आँख का प्रयोग बहुत ही भीषण तरीके से करती है। हरूपाशा पहले तो चिंघाड़ता है और बाद में राख का ढेर बन जाता है, सब लोग ये देखकर ख़ुशी से चिल्लाने ही वाले होते हैं कि एक आश्चर्यजनक घटना होती है..वो राख का ढेर अपनेआप ही वापस हरूपाशा का आकार ले लेता है।

हरूपाशा- ह्वी ह्वी ह्वी! अरे वाह! ये नागपाशा का शरीर तो बड़े काम का है, अगर मैं उस रमेश खन्ना के शरीर में होता तो ऐसी स्थिति में वापस जुड़ना बेहद मुश्किल हो जाता।

शक्ति- उफ्फ! अब ये कैसे रुकेगा!

एंथोनी- ये क्या जैकब! ये तो फिर ज़िंदा हो गया, अब इसे ख़त्म कैसे करेंगे!

जैकब- कोई तरकीब तो निकालनी ही होगी।

हरूपाशा- तो तू देवी काली का अंश है और इसीलिए मुझे नष्ट करने आई है, मेरा सामना करने के लिये शक्ति के एक अंश से काम नहीं चलेगा…स्वयं देवी काली को आना होगा।

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli

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9 Comments on “Earth 61 Part 16 (Dev-Haru_Yuddh)”

  1. बेहतरीन।
    क्या जबरदस्त लिखाई है मजा आ गया।

  2. बहुत बढ़िया हर्षित जी।
    जबरदस्त
    आखिरी युद्ध का इंतज़ार है।

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