Earth 61 Part 17 (The Conclusion)

EARTH-61

PART 17.

Conclusion Part

स्टील लैब में अपनी बैटरी को चार्ज कर रहा था , तभी अनीस लैब में आता है।

अनीस- मुझे तुमसे कुछ बात करनी थी अमर।

स्टील- बोलो।

अनीस- दरअसल छह साल पहले जब तुम्हारे साथ वो हादसा हुआ..तब डॉक्टर ने मुझसे एक बात कही थी जो मैंने तुम्हें नहीं बताई।

स्टील- ऐसी क्या बात है?

अनीस- तुमको उस वक्त pancreatic कैंसर था।

स्टील(हैरानी से)- क्या? ये कैसे हो सकता है? अनीस- मुझे भी ये उस वक्त पता चला जब मैं तुमको हॉस्पिटल लेकर आया था, तुम्हारी रिपोर्ट्स में ये बात पता चली। इस प्रकार का कैंसर सिर्फ 2% लोगों को ही होता है और इसको जल्दी से डायग्नोज़ करने का कोई तरीका भी नहीं होता। कैंसर के इनिशियल स्टेज में होने के कारण तुमको इस बीमारी का पता पहले नहीं लगा। मैं भी इसी कारण से तुम्हारे ऑपरेशन के लिए माना क्योंकि यांत्रिक पार्ट्स लगाने के लिये तुम्हारे शरीर से सिर्फ एक ही चीज़ की आवश्यकता थी और वो था तुम्हारा दिमाग और तुमको बचाने के लिए और कोई रास्ता भी नहीं था क्योंकि तुम्हारे शरीर के बाकी पार्ट्स पहले ही काफी डैमेज हो चुके थे।

स्टील- यानी.. अगर नागराज उस वक्त मुझ पर घातक हमला नहीं करता तो तुमको इस बीमारी का पहले पता नहीं चलता?

अनीस- शायद नहीं। मैं पहले भी बता चुका हूँ कि pancreatic कैंसर को डिटेक्ट करना बेहद मुश्किल होता है।

स्टील- तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया?

अनीस- क्योंकि छह साल से मैं तुमको नया शरीर देने में लगा हुआ था और मैं नहीं चाहता था कि तुम्हारा नर्व सिस्टम ब्रेकडाउन हो जाये। अभी इसलिए बताया क्योंकि यही मुझे सही समय लगा और सच पूछो तो इतनी घटनाएं एक साथ हो गयीं कि मेरे दिमाग से भी ये बात निकल गयी थी।

……………..……………….स्टील तुरंत एक ट्रांसमीटर निकालता है।

अनीस- क्या कर रहे हो?

स्टील- ध्रुव से संपर्क कर रहा हूँ।

अनीस- तो तुम उन रक्षकों के साथ इस लड़ाई में कूदोगे पर अब इसकी क्या ज़रुरत है? अब तो इच्छाधारी भी इस लड़ाई में कूद गए हैं।

स्टील- बात वो नहीं है, मैं एक रक्षक हूँ और अगर मैं किसी भी प्रकार से इस युद्ध में योगदान दे सकता हूँ तो दूंगा।

……………………………..स्टील ट्रांसमीटर द्वारा ध्रुव से संपर्क बनाने का प्रयास करता है।

ध्रुव- हेल्लो…स्टील! क्या हुआ!

स्टील- मैंने फैसला कर लिया है ध्रुव, अब इस लड़ाई में मैं तुम्हारा साथ दूंगा।

ध्रुव- ये तो अच्छी बात है, मैं तुमको अभी लेने आता हूँ।

स्टील- पर तुम हो कहाँ?

ध्रुव- असम में। स्टील- तो असम से तुम इतनी जल्दी कैसे…?

……………………….स्टील की बात पूरी होने से पहले ही हवा में एक द्वार प्रकट होता है और उसमे से ध्रुव और धनंजय निकलते हैं। अनीस और स्टील एकदम से हैरान रह जाते हैं।

स्टील- ये क्या था?

ध्रुव- इससे मिलो ये है धनंजय, ये हवा में ही द्वार बनाकर हम सबको एक स्थान से दुसरे स्थान आसानी से ले जा सकता है।

स्टील- तुम्हारे दोस्तों की सूची में कभी सामान्य मानव नहीं आते हैं क्या?

ध्रुव- हा..हा..अच्छा मज़ाक था पर अफ़सोस कि हंसी मज़ाक करने का वक्त अब नहीं है, आखिरी युद्ध का वक्त नज़दीक आ गया है।

……………………………धनंजय फिर हवा में एक द्वार खोलता है।

अनीस- अमर मेरे भाई! अपना ख्याल रखना!

स्टील- चिंता मत करो अनीस!

ध्रुव- अब चलो स्टील!

…………………………..ध्रुव, धनंजय और स्टील द्वार के दूसरी तरफ आते हैं, फिर धनंजय द्वार बंद कर देता है। स्टील सामने का दृश्य देखकर हैरान रह जाता है क्योंकि उसके सामने तिरंगा, डोगा, परमाणु, फेसलेस, भेड़िया, पंचनाग, नागू और नागराज खड़े होते हैं।

स्टील- ये कौन सी जगह है?

ध्रुव- असम में स्वागत है।

डोगा- टीम में एक नए मेंबर की एंट्री।

स्टील- मुम्बई का मोस्ट वांटेड क्रिमिनल डोगा…ये भी है तुम्हारी टीम में?

ध्रुव- ये वक्त किसी भी प्रकार के आपसी मतभेद का नहीं है। क्या तुमको नागद्वीप की लोकेशन पता है धनंजय?

धनंजय- हाँ, मुझे पता है।

नागराज- पर नागद्वीप की गुप्त लोकेशन तुमको कैसे पता है?

धनंजय- हमारी देवजाति भी इच्छाधारी नागजाति जितनी ही पुरानी है, तो दुनिया में ऐसी कोई जगह नहीं है जो हमारे लिये “गुप्त” हो।

ध्रुव- तो फटाफट द्वार बनाओ और हमको नागद्वीप लेकर चलो।

धनंजय- ठीक है।

…………………………………फिर सारे रक्षक एक साथ धनंजय के बनाये हुए द्वार से नागद्वीप सीधे पहुँचते हैं पर वहां का नज़ारा देखकर सबकी आँखें फटी की फटी रह जाती हैं क्योंकि वो सीधे वहां प्रकट होते हैं जहाँ पर कालदूत अपने विभक्त और कमज़ोर रूप में मौजूद होते हैं। इरी उनके अलग रूपों को जोड़ने का प्रयास कर रहा होता है।

नागराज- हे देव कालजयी! यहाँ की स्थिति तो जितना सोचा था उससे भी अधिक खतरनाक है!

ध्रुव- ये महात्मा कालदूत को क्या हुआ?

इरी- सब हरूपाशा का किया धरा है।

नागराज- हरूपाशा?

इरी- हाँ, नागपाशा के शरीर में जाने के बाद से वो अपने आप को यही बुलाता है।

परमाणु- तो ये है नागद्वीप, विश्व के सबसे रहस्मयी स्थानों में से एक। मुझे..मुझे यकीन नहीं होता कि मैं यहाँ खड़ा हूँ।

डोगा- तो यकीन करो, क्योंकि अब वक्त नहीं है हमारे पास।

महाविष्या- भगवान् का शुक्र है कि तुम समय से आ गए नागराज, अब उम्मीद कि कुछ किरण बाकी है।

नागराज- हरूपाशा इस वक्त कहाँ है?

इरी- वो कालदूत की गुफा के पास है और त्रिफना को लेने का प्रयास कर रहा है। मेरी प्रेत सेना इस वक्त वहीँ पर है और उससे लोहा ले रही है और मैं यहाँ कालदूत को फिर से संयुक्त करने का प्रयास कर रहा हूँ।

ध्रुव- तो फिर उसी तरफ चलते हैं।

नागराज- चलो।

……………………………सारे रक्षक कालदूत की गुफा के पास पहुँचते हैं, वहां का नज़ारा किसी भी कमज़ोर दिल वाले को मारने के लिए काफी होता है। प्रेत सेना जैकब के नेतृत्व में हरु के नाग गुलामों से टक्कर ले रही होती है, शक्ति और एंथोनी हरूपाशा को रोकने का कमज़ोर प्रयास कर रहे होते हैं। हरूपाशा एक भीषण वार करके एंथोनी और शक्ति को दूर गिरा देता है।

हरूपाशा- बस बहुत हुआ खेल, अब तुम्हारी मृत्यु का इंतज़ाम करना ही होगा।

……………………………एक किरण एंथोनी और शक्ति दोनों को अपना शिकार बनाने के लिए चल देती है कि तभी नागराज का शरीर बीच में आ जाता है और वो उस किरण का वार झेल लेता है। हरु की नज़र पड़ती है उस जगह जहाँ बाकी सभी सुपरहीरोज खड़े होते हैं।

हरूपाशा- ओह! तो अब ये लोग भी आ गए! चलो कोई बात नहीं, सबकी मौत का इंतज़ाम करेगा हरूपाशा।

……………………इतना कहकर हरूपाशा ज़मीन को छूता है और कई दस फुट के भीमकाय राक्षस खड़े कर देता है। वो सभी रक्षकों पर हमला कर देते हैं।

नागराज- इनसे बचते हुए हमला करो।

शक्ति- तुम कोई आम मानव नहीं लगते, तुमने हरु के उस भीषण वार को अपने शरीर पर कैसे झेल लिया?

नागराज- तुमने सही कहा, मैं कोई आम मानव नहीं बल्कि मानव नाग नागराज हूँ और रही बात हरु के हमले को झेलने की तो मेरे अंदर पहले से ही काफी हरु ऊर्जा मौजूद है शायद इसलिए मैं इस वार को भी झेल गया।

………………………………दूसरी तरफ बाकी रक्षक इच्छाधारियों के साथ मिलकर उन राक्षसों से लड़ रहे थे जिनको हरु ने भूमि से पैदा किया था। अचानक एक भूमि राक्षस के वार से तिरंगा घायल हो जाता है, डोगा उसे लेकर एक चट्टान के पीछे जाता है और आराम से लिटा देता है।

तिरंगा- हम्म्फ..ये हम क्या कर रहे हैं डोगा?

डोगा- क्या मतलब?

तिरंगा- मतलब मैं एक डिटेक्टिव हूँ जो देश के दुश्मनों से लड़ता हूँ, तुम कानून को तोड़कर कानून की रक्षा करते हो..हम इस देव दानव युद्ध में क्या कर रहे हैं? चमत्कारी शक्ति वाले लोगों का तो चलो फिर भी समझ में आता है जैसे नागराज, शक्ति, भेड़िया..पर मैं, तुम, ध्रुव और यहाँ तक कि परमाणु भी इस लड़ाई के लिए नहीं बने।

डोगा- मेरी बात सुनो तिरंगा, ज़िन्दगी हर एक को ये मौका नहीं देती कि उसे ऐसा नज़ारा देखने का मौका मिले। तुम अपनी जगह सही हो कि शायद हम जैसे सामान्य शक्ति वाले लोग ऐसे युद्ध के लिए नहीं बने पर ज़रा सोचकर देखो कि हम कितने भाग्यशाली हैं कि हम इसका हिस्सा बन पाये।

तिरंगा- तुम ठीक कहते हो, भाग्यशाली तो हम हैं ही।

डोगा- तुम यहीं कुछ देर आराम करो, फिर युद्ध में वापस कूद पड़ना। परमाणु का पाँव एक “भूमि राक्षस ” के पकड़ में आ गया है, उसको छुड़ाकर आता हूँ।

……………………………………..परमाणु का पाँव वाकई एक राक्षस के पकड़ में आ गया था, डोगा लांचर लेकर जाता है और राक्षस के हाथ को निशाना बनाता है पर तभी शक्ति उड़ते हुए आती है और डोगा के लांचर को फायर करने से पहले ही अपनी ऊष्मा से लांचर को पिघलाकर एक बड़ा सा भाला तैयार करती है और उस राक्षस के हाथ पर मारकर उसका हाथ तोड़ देती है जिसके कारण परमाणु भी उसकी पकड़ से आज़ाद हो जाता है।

परमाणु- धन्यवाद्, पर तुम इतने समय से कहाँ थी शक्ति? एक साल हो गया पर तुम्हारी कोई खबर नहीं आई।

शक्ति- तुम लोग इतनी सक्षमता से काम कर रहे थे तो मैंने सोचा कि थोड़ा आराम कर लूँ, अब मुझे क्या पता था कि हरु तुमसे नहीं संभलेगा।

परमाणु- हा..हा..सही कहा।

डोगा(नीचे से)- अरे मेरा लांचर ही मिला था तुमको?

शक्ति(हंसकर)- उसका इस्तेमाल नहीं करती तो शायद तुम राक्षस के हाथ की जगह परमाणु को ही उड़ा देते।

डोगा- निशाने का पक्का हूँ, ऐसा नहीं करूंगा। अब ये बताओ कि ये हरु की सेना से लड़ने के लिए भूत पिशाच की फ़ौज कहाँ से आई?

एंथोनी- ये प्रेत सेना तंत्र गुरु इरी की है और मैं हूँ एंथोनी..एक ज़िंदा मुर्दा संहारक।

डोगा- तो अब मुर्दों की ही कमी रह गयी थी इस लड़ाई में, चलो हमको क्या? अब चार पाँच राक्षस और बचे हैं ..जल्दी निपटाओ इनको !

नागराज(अचानक से विसर्पी को युद्धभूमि में देखकर)- विसर्पी! क्या ये तुम हो?

विसर्पी- नागराज! तुम आ गए!

नागराज(दौड़कर विसर्पी के गले लग जाता है)- तुम ठीक तो हो?

विसर्पी- मैं तो ठीक हूँ पर नागद्वीप ठीक नहीं है नागराज, अरे वो देखो हरूपाशा मौके का फायदा उठाकर वापस कालदूत की गुफा की ओर बढ़ रहा है।

………………………………हरूपाशा वापस गुफा की तरफ बढ़ने लगता है कि तभी उसका रास्ता नागराज रोक लेता है।

नागराज- तू अब इससे अधिक आगे नहीं बढ़ पायेगा।

हरूपाशा- तो आखिर हम मिल ही गए नागराज, मुझे तुझसे मिलना था क्योंकि तू पूरी सृष्टि में ऐसा एकमात्र प्राणी है जो कि इतनी हरु ऊर्जा को धारण किये हुए है। अब अगर मैं थोड़ी और हरु ऊर्जा तुझमे भर दूं तो तू मेरा गुलाम भी बन सकता है और तू अगर मेरा गुलाम बन गया तो मुझे परास्त करने की शक्ति किसी में नहीं होगी।

……………………………इतना कहकर हरूपाशा एक तीव्र किरण का वार नागराज पर करता है। नागराज तुरंत उसी जगह पर बैठ जाता है और कराहने लगता है।

हरूपाशा- ह्वी ह्वी ह्वी! ये मैंने पहले क्यों नहीं सोचा?

…………………………………इतने समय में रक्षक सारे भूमि राक्षसों को ख़त्म कर चुके होते हैं और प्रेत सेना भी हरु के नाग गुलामों को धनंजय के स्वर्णपाश की मदद से पराजित कर देती है।

ध्रुव- वाह! अब हमें सिर्फ हरूपाशा को रोकना है और ये काम नागराज…अरे, ये नागराज कहाँ गया?

धनंजय- वो देखो ध्रुव, नागराज वहां घायल बैठा हुआ है।

ध्रुव- चलो उसके पास चलकर देखें कि हुआ क्या?

…………………………………ध्रुव और धनंजय नागराज के पास पहुँचते हैं, नागराज का सर नीचे होता है और वो कुछ भी जवाब नहीं दे रहा होता।

ध्रुव- नागराज? क्या हुआ?

………………………………….नागराज धीरे धीरे अपना चेहरा ऊपर की ओर उठाता है और अपने हाथ के एक ही वार से ध्रुव और धनंजय को कई फुट दूर उछाल देता है। सबका ध्यान नागराज पर चला जाता है जो कि हरु की शक्ति के प्रभाव में आकर काफी विकृत लग रहा होता है। सबके दिल की धड़कनें रुक सी जाती हैं। विकृत नागराज सबको ऐसे देखता है जैसे अभी फाड़ खायेगा। फिर वो अचानक से हवा में उड़ने लगता है।

परमाणु- नागराज..हवा में उड़ सकता है?

ध्रुव- नहीं। ये हरु की अतिरिक्त शक्ति के कारण है।

एंथोनी- हरूपाशा को रोकना होगा, मैं और जैकब उसके पीछे जाते हैं बाकी लोग नागराज को संभालो।

………………….इतना बोलकर एंथोनी और जैकब चुपचाप निकलने का प्रयास करते हैं लेकिन नागराज एकदम से उनके सामने आ जाता है।

एंथोनी- हट जाओ नागराज, हम तुमको नुक्सान नहीं पहुंचाना चाहते।

नागराज- हर्रर्रर्रर्र।

जैकब- मुझे नहीं लगता कि ये तुम्हारी बात सुनेगा एंथोनी, इसे बल से ही काबू में लाना होगा।

………………………………….एंथोनी नागराज पर ठंडी आग का वार अपने हाथों से करता है, नागराज हल्का सा तड़पता है पर फिर क्रोधित मुद्रा में एंथोनी की ओर देखता है। नागराज तुरंत जाकर एंथोनी का एक हाथ पकड़ लेता है, जैकब एंथोनी को छुड़ाने का प्रयास करता है पर नागराज उसे एक ही मुक्के से दूर उछाल देता है।फिर वो एक क्रूरता भरी नज़र लिए एंथोनी को देखता है और एक ही झटके से उसका एक हाथ उखाड़कर दूर फेंक देता है।

जैकब- नहीं!

………………………..ये देखकर भेड़िया अपनी गदा लेकर नागराज पर टूट पड़ता है। वो अपनी चमत्कारी गदा के एक ही वार से नागराज को कुछ फुट दूर उछाल देता है पर नागराज भेड़िया के दुसरे वार को अपने हाथों पर रोक लेता है और एक लात मारकर भेड़िया को कुछ दूर गिरा देता है। शक्ति भी अपनी प्रचंड ऊष्मा का प्रयोग करती है पर नागराज उड़ता हुआ जाता है और शक्ति की गर्दन पकड़ लेता है।

डोगा- अब क्या करें ध्रुव? जब यही लोग नागराज को नहीं संभाल पा रहे तो हम और तुम तो सोच भी नहीं सकते।

ध्रुव- हरु ने अपना सबसे शक्तिशाली मोहरा चुनकर भेजा है इस बार। नागराज से अधिक उपयुक्त कौन हो सकता था हम सभी को रोकने के लिए?

……………………………….परमाणु उड़कर शक्ति को नागराज की पकड़ से छुड़ाने जाता है ।

परमाणु- लगता है कि नागराज पर घातक प्रहार करना ही पड़ेगा वर्ना शक्ति अपनी जान से हाथ धो बैठेगी।

………………………….परमाणु तीव्र एटॉमिक ब्लास्ट का वार नागराज के ऊपर करता है जिसका नागराज पर कोई ख़ास असर तो नहीं होता, वो सिर्फ मुड़ता है और बेहद तीव्र विषफुंकार का प्रयोग करता है जिससे परमाणु किसी परकटे पक्षी की तरह नीचे गिरने लगता है, पर भेड़िया बेहोश परमाणु को पकड़ लेता है। तभी कहीं से एक आवाज़ आती है ” रुक जाओ नागराज!” सबके साथ साथ शक्ति का गला पकडे हुए नागराज का ध्यान भी उस तरफ चला जाता है। ये आवाज़ होती है फेसलेस की, फेसलेस धीरे धीरे चलकर नागराज की ओर बढ़ता है।

डोगा- ये..ये क्या बेवकूफी कर रहा है फेसलेस?

ध्रुव- फेसलेस के दिमाग में ज़रूर कोई योजना होगी।

…………………………….तब तक फेसलेस नागराज के कुछ कदम पास तक पहुँच जाता है। नागराज शक्ति का गला छोड़कर फेसलेस को घूरने लगता है। अचानक फेसलेस एक ऐसी अप्रत्याशित हरकत करता है जिसकी किसी को उम्मीद भी नहीं थी, वो अपना मास्क उतार देता है। भारती का चेहरा देखकर सब हैरान रह जाते हैं।

भारती- प्लीज नागराज! ये तबाही बंद कर दो! अपने आप को पहचानो, तुम एक अच्छे इंसान हो..तुम कोई दरिन्दे नहीं हो!

…………………………नागराज क्रोध से भारती की तरफ देख रहा होता है,जैसे ही भारती कुछ और पास आने का प्रयास करती है..नागराज के हाथ से एक पतली सी किरण निकलती है जो भारती के पेट को गोली की तरह बेधती हुई निकल जाती है। सब अवाक रह जाते हैं, उन कुछ क्षणों में युद्धभूमि एकदम मौन हो जाती है। ये सन्नाटा मौत से भी भयानक होता है। भारती ने मुश्किल से अपनी सांसें पकड़ी होती हैं, वो बड़ी मुश्किल से अपनी आखिरी सांसें बचाकर कुछ बोल पाती है” आ..आई लव यू! न..नागराज!” इतना बोलकर भारती धराशायी हो जाती है। ये शब्द नागराज के कानों में बम की तरह फूटते हैं, वो अपना सर पकड़कर बैठ जाता है। उसके शरीर में उसकी इच्छाधारी शक्ति और हरु शक्ति के बीच एक अजीब सा द्वंद् होने लगता है, नागराज को कुछ याद आने लगता है..कॉलेज का पहला दिन जब भारती उससे और पंचनागों से पहली बार मिली थी..फिर वो दिन जब बस पानी में गिर गयी थी और भारती के सामने नागराज का राज खुल गया था..फिर वो समय जब नागराज नागद्वीप के लिए निकल गया था और भारती से हलकी सी बहस हुई थी..फिर छह साल बाद दोनों वापस मिले और गले लगे थे। सभी स्मृतियाँ नागराज पर टूट पड़ती हैं, हरु शक्ति ने नागराज के दिमाग पर कब्ज़ा किया होता है, अब वो कब्ज़ा धीरे धीरे हटने लगता है। नागराज विकृत से वापस सामान्य हो जाता है, वो भारती की लाश को अपनी गोद में रख लेता है। उस वक्त लगभग सभी की रुलाई फूट पड़ती है पर नागराज सिर्फ भारती का चेहरा देख रहा होता है। विसर्पी जो अब तक प्रेत सेना के साथ थी, वो धीरे धीरे नागराज के पास आती है और उसे गले से लगा लेती है, नागराज अभी भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा होता। तभी घटनास्थल पर विभक्त कालदूत और इरी पहुँचते हैं। नागराज उनको देखकर ही उनके पास पहुँचता है और बेहद सामान्य तरीके से बोलता है।

नागराज- इरी! अच्छा हुआ कि आप आ गए , भारती को मैंने थोड़ा गंभीर रूप से घायल कर दिया है। आप उसे ठीक कर दीजिये।

…………………इरी कुछ भी नहीं बोलते।

नागराज- आप कुछ बोलते क्यों नहीं इरी..आपको जो भी सामान चाहिए में लाकर देता हूँ। बस भारती थोड़ा घायल हो गयी है..उसे ठीक कर दीजिये।

……………………………..तभी विसर्पी नागराज के पास आती है और प्यार से कंधे पर हाथ रखती है।

विसर्पी- अब..बहुत देर हो गयी है नागराज!

……………………….नागराज कुछ कहता नहीं, बस एकटक विसर्पी को देखने लगता है।

विसर्पी- क्या हुआ नागराज?

नागराज- मेरी कसम खाकर एक बात बताओ विसर्पी..क्या तुमको पता था कि भारती मुझसे प्यार करती है?

विसर्पी- व्..वो..मैं..

नागराज- तुमको पता था।

विसर्पी(सर झुकाकर)- हाँ।

नागराज- उसने कभी मुझसे क्यों नहीं कहा?

विसर्पी- क्योंकि कॉलेज के शुरुआती सालों में ही उसे हम दोनों के बारे में पता चल गया था। उसने मुझे बताकर कसम दी थी कि मैं तुमको इस बारे में न बताऊँ।

नागराज- वेदाचार्य..वेदाचार्य से मैं क्या कहूँगा! ये कि मैंने उनकी पोती की हत्या कर दी! हाँ मैं ही हूँ..भारती का हत्यारा!

………………………………..इतना कहकर नागराज कुछ समय के लिए एकदम सुधबुध ही खो देता है, उसकी ऐसी हालत देखकर ध्रुव की भी आँखों में आंसू आ जाते हैं।

डोगा- मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि फेसलेस भारती थी या कोई और..मेरे लिए वो हमेशा से एक ऐसा योद्धा था और रहेगा..जिसने कभी हार नहीं मानी।

ध्रुव- वाकई, फेसलेस मरा नहीं है..बल्कि अमर हो गया है! युद्धभूमि पर भारती की लाश को छोड़कर नागराज कालदूत की गुफा की तरफ बढ़ता है।

परमविष्या- कहाँ जा रहे हो नागराज?

नागराज- हरु को ख़त्म करने।

विसर्पी- रुक जाओ नागराज! अपनी दोस्त भारती को मैं आज खो चुकी हूँ, अब क्या तुमको भी खो दूँगी?

नागराज- पर अगर हरु को मूर्ति मिल गयी तो खेल वैसे भी ख़त्म हो जायेगा।

ध्रुव- ऐसा नहीं होगा।

नागराज- क्या तुम्हारे पास कोई योजना है ध्रुव?

ध्रुव- हाँ, मेरे दिमाग में एक योजना है और उसके लिए धनंजय की मदद की आवश्यकता पड़ेगी।

धनंजय- क्या योजना है?

ध्रुव- प्रोफेसर कमलकांत ने बताया था कि उन्होंने गुरुदेव के साथ मिलकर एक ऐसा यंत्र बनाया है जो कि हरु की ऊर्जा को 25% तक सोख सकता है। वो यंत्र अगर यहाँ आ जाये तो..

डोगा- लेकिन उसका फायदा क्या? 75% ऊर्जा से भी वो हम सबको पराजित कर सकता है।

इरी(गंभीर मुद्रा में)- नहीं कर पायेगा।

डोगा- कैसे?

इरी- उसे नागराज रोकेगा।

ध्रुव- वो कैसे?

इरी- जो व्यक्ति इतनी हरु ऊर्जा को अपने अंदर समाहित किये हुए है वो निसंदेह कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। नागराज एकमात्र ऐसा व्यक्ति है जो हरु के द्वारा गुलाम बनाये जाने के बाद भी सिर्फ अपनी इच्छाशक्ति के बल पर वापस सामान्य हो पाया।

ध्रुव- आप कहना क्या चाहते हैं?

इरी- यही कि जब यंत्र हरु की 25% ऊर्जा खींच लेगा तब नागराज को हरु से भिड़ना होगा।

नागराज- पर हरुपाशा की ताकत हम सबने देखी है, मैं उसके सामने अधिक देर तक नहीं टिक पाऊंगा।

इरी- तुमने अभी तक अपनी असली शक्ति को नहीं पहचाना है नागराज। तुम्हारे अंदर देव कालजयी का विष है जिसके कारण दैवीय शक्ति भी तुम्हारे अंदर विद्यमान है, तुम असीम शक्ति के मालिक हो। हरु तुम पर कोई भी ऊर्जा वार करेगा तो तुम महज़ अपनी इच्छाशक्ति से उस वार को झेलने के बजाये अपने अंदर सोख सकते हो।

ध्रुव- अब मैं आपके कहने का तात्पर्य समझ रहा हूँ, यानि कि जब हम गुरुदेव की लैब से यंत्र लेकर आएंगे तब हरु की ऊर्जा का क्षरण करने का काम दो लोगों को करना होगा। एक यंत्र को..और दूसरा नागराज को।

इरी- हाँ पर जल्दी जाओ। हरूपाशा ऊँची पहाड़ी पर स्थित गुफा पर बस पहुँचने ही वाला होगा।

धनंजय- तो फिर मैं चलता हूँ।

शक्ति- रुको मैं भी साथ चलूँगी! क्या पता यंत्र का भार कितना होगा?

धनंजय- ठीक है।

…………………………………..फिर धनंजय हवा में एक आयमद्वार बनाता है और शक्ति को लेकर दूसरी तरफ निकल जाता है। वो लोग सीधे गुरुदेव की लैब के अंदर निकलते हैं, जहाँ पर वो यंत्र रखा होता है। उन्नत विज्ञान से परिचित होने के कारण धनंजय देखते ही समझ जाता है कि ये यंत्र ही हरु की ऊर्जा को सोखने वाला है। धनंजय- कमाल का यंत्र बनाया है मनुष्यों ने! हम देव होकर भी ऐसा यंत्र नहीं बना सके।

शक्ति- एक बात बताओ! क्या तुम आयामद्वार बनाकर हरु को बृह्माण्ड के ऐसे किसी कोने में नहीं भेज सकते जहाँ से वो वापस न आ पाये!

धनंजय- आयामद्वार बनाने में बहुत ऊर्जा खर्च होती है तो इतनी दूरी पर द्वार बना पाना बहुत ही नामुमकिन सी बात है। दूसरी बात ये कि हरु जब तक देवताओं की ऊर्जा द्वारा बनाई गयी चट्टानों से नहीं बांधे जाते तब तक उनको कहीं भी छोड़ आओ..वो पलक झपकते ही वापस आ जायेंगे।

शक्ति- देवताओं की ऊर्जा द्वारा बनाई गयी चट्टान?

धनंजय- तुमको नहीं पता क्या? सभी हरु प्राणी इसी प्रकार की किसी न किसी चट्टान में कैद होते हैं। ये वाला हरु भी धरती पर इसी प्रकार की चट्टान में कैद आया था पर जब ये पृथ्वी में वातावरण में आया तो चट्टान में तीव्र घर्षण के कारण ये चट्टान से आज़ाद हो गया।

शक्ति- यानि कि ये उस चट्टान में वापस कैद हो सकता है?

धनंजय- हाँ! पर उसके लिए हरु को कमज़ोर करना होगा। तुम्हारे दिमाग में चल क्या रहा है वैसे!

शक्ति(कुछ सोचकर)- अभी बताने का वक्त नहीं है,अब जल्दी चलो! ये यंत्र मैं उठा लेती हूँ।

………………………………….. यंत्र लेकर धनंजय और शक्ति वापस आ जाते हैं। सभी नायक ये देखकर बहुत खुश होते हैं।

शक्ति- अब हमें अपनी योजना पर काम करना चाहिए।आओ नागराज।

नागराज- चलो।

ध्रुव- एक मिनट! केवल तुम दोनों ही हरूपाशा को रोकने जाओगे!

नागराज- हाँ!

स्टील- हमें भी चलना चाहिए!

नागराज- तुम लोगों ने वैसे भी यहाँ नागद्वीप तक आकर बहुत साथ दिया है, अब उस हरूपाशा ने इस लड़ाई को व्यक्तिगत बना दिया है।

स्टील- पर नागराज..

नागराज- नहीं स्टील! भारती का बदला लेने मैं ही जाऊंगा, प्लीज इतना तो तुम लोग कर ही सकते हो।

ध्रुव- ठीक है नागराज पर अगर हमें कुछ भी गड़बड़ लगी तो हम लड़ाई में कूदने से नहीं चूकेंगे।

नागराज- ठीक है।

विसर्पी- अपना ख्याल रखना..और याद रखना कि भारती सिर्फ तुम्हारी ही नहीं मेरी भी दोस्त थी!

दूसरी तरफ हरूपाशा सामने कालदूत की गुफा में बढ़ रहा होता है कि तभी उसे सामने त्रिफना मूर्ति नज़र आती है।

हरूपाशा- ह्वी ह्वी ह्वी! तो ये रही त्रिफना मूर्ति! अब सबसे पहला काम मैं ये करूंगा कि अपने सभी हरु भ्राताओं को देवताओं की चट्टानी कैद से स्वतंत्र करवाऊंगा! अरे..नहीं! अगर वे आज़ाद हो गए तो मुझे अपना राज़ बांटना पड़ेगा। उनको उनकी कैद में सड़ने देता हूँ और त्रिफना को हासिल करके स्वर्ग पर कब्ज़ा करता हूँ।

………………………………हरूपाशा त्रिफना को लेने के लिए आगे बढ़ता ही है कि तभी उसके सामने रौशनी का एक पुंज उड़कर आ जाता है। शक्ति और नागराज वो यंत्र लेकर गुफा में आ चुके होते हैं।

हरूपाशा(क्रोध और हैरत के मिले जुले भाव के साथ)- तू..तुझे तो मैंने अपना गुलाम बना लिया था नागराज! फिर तू आखिर कैसे..

नागराज- मुझे गुलाम बनाते वक्त तू भूल गया कि मेरे अंदर देव कालजयी के विष के कारण दैवीय शक्ति है। इसी कारण से मैं इतनी हरु ऊर्जा अब तक संभाले हुए हूँ। शक्ति अब तुरंत यंत्र चालू करो।

…………………………..सब कुछ इतनी शीघ्रता से हुआ होता है कि हरुपाशा कुछ समझ ही नहीं पाता। यंत्र चालू होता है और हरूपाशा की ऊर्जा का तेज़ी से क्षरण होने लगता है।

हरूपाशा- उफ्फ! पिछली बार तो मैंने वक्त रहने ध्यान दे दिया था जिससे ये यंत्र मेरी ऊर्जा का क्षरण नहीं कर पाया था पर अब लगता है कि इनकी ये योजना सफल हो गयी।

शक्ति- नागराज! ये दुष्ट इस पृथ्वी पर एक दैवीय ऊर्जा वाली चट्टान में कैद होकर आया था, अगर मैं उस चट्टान को यहाँ ले आऊं तो ये फिर से कैद हो सकता है।

नागराज- ठीक है तुम जाओ शक्ति..मैं इसे रोकता हूँ।

…………………………………….तब तक यंत्र तेज़ी से हरूपाशा की 25% ऊर्जा का क्षरण कर लेता है।

हरूपाशा- हम्म्फ! इतनी कमज़ोरी तो मुझे अपने अपने लाखों वर्षों के जीवनकाल में भी कभी नहीं हुई! पर अब भी मुझमे इतनी ऊर्जा है कि तुझे ख़त्म कर सकूं।

नागराज(मुट्ठियाँ भींचकर)- तो हो जाये दो दो हाथ!

………………………………..हरूपाशा और नागराज आपस में भिड़ जाते हैं। हरूपाशा अपने हाथ के एक ही वार से नागराज को कई फुट दूर उछाल देता है, नागराज उस पर ध्वंसक सर्पों का प्रयोग करता है पर हरूपाशा सिर्फ खड़े होकर मुस्कुराता है।

हरूपाशा- ह्वी ह्वी ह्वी! तू मुझको नहीं हरा सकता नागराज! मैं एक हरु हूँ और तू एक मनुष्य है! हरु से तो देवता और असुर भी कांपते हैं फिर तू मेरे सामने क्या है?

नागराज- मनुष्य को कमतर समझने की भूल लगभग हर कोई करता है और किसी का वही अंजाम होता है जो अब तेरा होने वाला है।

हरूपाशा- तुच्छ मनुष्य! तेरा ये दुस्साहस!

……………………..इतना कहकर हरूपाशा अपनी उँगलियों से ऊर्जा निकालकर नागराज की तरफ बढ़ाता है जो कि नागराज को भयंकर पीड़ा पहुंचाती हैं।

नागराज- आह! हरूपाशा- हा..हा..हा..चीख नागराज चीख! ये तेरी अंतिम चीखें साबित होंगीं। अब मेरे हाथों से ये किरणें तब तक निकलती रहेंगी जब तक तू ख़त्म नहीं हो जाता।

………………………………….पर तभी नागराज भयानक पीड़ा सहते हुए उठ खड़ा होता है और आँख बंद करके खड़ा हो जाता है।

हरूपाशा- ये..ये क्या! मेरे हाथ से ऊर्जा निकलना बंद नहीं हो रहा है और नागराज का शरीर हल्का नीला पड़ने लगा है।

………………………………… हरूपाशा के हाथों से कुछ समय के बाद ऊर्जा प्रवाह रुक जाता है। नागराज जो कि इतने समय से आँख बंद किये खड़ा होता है ..अब लगभग नीले रंग का हो चुका होता है। नागराज की आँखों की पुतलियाँ भी पीली हो चुकी होती हैं क्योंकि वो हरु की लगभग 27% ऊर्जा अपने शरीर में खींच लेता है।

नागराज(आवाज़ हरु जैसी हो जाती है)- अब आएगा मुकाबले में मज़ा।

……………………………इतना कहकर वो हरुपाशा पर टूट पड़ता है। हरूपाशा की लगभग आधी से ज़्यादा ऊर्जा यंत्र और नागराज के कारण छिन चुकी होती है..वो यंत्र को नष्ट करके अपनी ऊर्जा को लेने के लिए आगे बढ़ता है पर नागराज उसका पाँव पकड़कर उसे हवा में उछाल देता है। फिर क्रोध से पागल होकर एक के बाद एक मुक्के की बरसात हरूपाशा के मुंह पर कर देता है।

नागराज(चिल्लाकर)- वो मेरी दोस्त थी! वो मेरी दोस्त थी और तूने उसे मरवा दिया…मेरे ही हाथों से!

…………………………….हरूपाशा भी नागराज का ये रूप देखकर एक बार को सहम सा गया पर शीघ्र ही उसने खुद पर काबू पा लिया और लात मारकर नागराज को पीछे किया।

हरूपाशा- तू..हम्म्फ..तू सही कह रहा था। मानवों को कमतर समझना मेरी भूल हो सकती है पर अब मैं तुझे दूसरा अवसर नहीं देने वाला।

…………………………….इतनी ही देर में शक्ति वहां पर चट्टान को लेकर पहुँचती है।

शक्ति- जल्दी करो नागराज! हरु को इस चट्टान की तरफ धकेलो!

नागराज- ठीक है!

…………………………………..फिर नागराज अपनी समस्त इच्छाधारी शक्ति और शारीरिक शक्ति लगाकर हरुपाशा से मुकाबला करने लगता है। हरूपाशा अब भी नागराज पर भारी पड़ रहा होता है , ये देखकर शक्ति भी नागराज के साथ अपनी ऊष्मा के द्वारा हरूपाशा को चट्टान की तरफ धकेलती है। पहले से कमज़ोर हरूपाशा दोनों का संयुक्त प्रयास झेल नहीं पाता और चट्टान के पास आ गिरता है। फिर नागराज कूदकर हरूपाशा को पकड़ लेता है और पूरी ताकत लगाकर चट्टान से सटा देता है। हरूपाशा के शरीर से एक अजीब सी ऊर्जा निकालकर चट्टान में समाने लगती है और साथ ही साथ नागराज के अंदर की हरु ऊर्जा भी चट्टान के अंदर समाने लगती है। बहुत समय के संघर्ष के बाद हरूपाशा फिर से सामान्य नागपाशा बन जाता है और बेहोश होकर धरती पर गिर पड़ता है, साथ ही नागराज भी सामान्य होकर धरती पर गिर पड़ता है।

नागराज- हम्म्फ! आखिरकार..हरु का आतंक समाप्त हुआ।

शक्ति- अब मैं इस चट्टान को वापस अंतरिक्ष में दूर छोड़ आती हूँ।

नागराज- कहते हैं कि कोई भी काम पूरा करना चाहिए।

शक्ति- क्या मतलब?

……………………………….नागराज जाता है और यंत्र को चालू कर देता है, यंत्र में समाहित हरु ऊर्जा भी चट्टान में चली जाती है।

नागराज- अगर ये शक्ति गुरुदेव जैसे किसी व्यक्ति के हाथ में पड़ जायेगी तो फिर से विनाश का सबब बनेगी।

शक्ति- तुमने ठीक कहा, अब मैं इसको अंतरिक्ष में छोड़ आती हूँ।

……………………………………….शक्ति चट्टान को लेकर अंतरिक्ष में उड़ जाती है और नागराज गुफा से बाहर निकल आता है। सब लोग ख़ुशी से चिल्लाने लगते हैं, विसर्पी दौड़कर नागराज के गले लग जाती है।

विसर्पी- मुझे पता था कि जीत तुम्हारी ही होगी।

…………………………………फिर युद्ध में घायल हुए लोगों का उपचार किया जाता है जिसमे परमाणु,तिरंगा और भेड़िया भी शामिल होते हैं। एंथोनी नागराज के पास आता है।

नागराज- हाथ उखाड़ने के लिये क्षमा चाहता हूँ पर..तुम्हारा हाथ वापस कैसे जुड़ गया?

एंथोनी- मेरा हाथ उखड़ने का मुख्य कारण तुम नहीं बल्कि हरु था और मेरी एक ख़ास शक्ति है कि जब भी मुझे शारीरिक क्षति पहंचाने वाला अपने अंजाम तक पहुँच जाता है तो वो क्षति अपने आप ठीक हो जाती है। अब वो अंजाम चाहे पराजय हो..या मृत्यु।

नागराज- तो अब?

एंथोनी- अब मैं मुर्दों की दुनिया में वापस जा रहा हूँ..कुछ नए कैदियों को साथ लेकर।

………………………………..तभी नागराज देखता है कि इरी अपने तंत्र से गुरुदेव, नगीना और नागपाशा को बांधकर ले आता है।

इरी- अब चलने का वक्त हो गया है एंथोनी और जैकब।

एंथोनी- ठीक है इरी! (नागराज की तरफ देखकर) विदा मित्र, अब अगर दुनिया पर इस प्रकार का संकट आएगा तभी दोबारा मिल सकेंगे।

नागराज- ठीक है मित्र!

…………………………………..फिर एंथोनी, जैकब और इरी अपनी प्रेत सेना के साथ सबसे विदा लेते हैं और चले जाते हैं। नागराज नागद्वीप के तट पर खड़ा होकर ढलते सूरज को निहार रहा होता है, तभी ध्रुव आता है।

ध्रुव- ऐसा नज़ारा शहर में देखने को नहीं मिलता।

नागराज- मुझे ये जगह बहुत याद आएगी।

ध्रुव- क्या मतलब? तुम तो यहीं पर रहोगे ना?

नागराज(मुस्कुराकर)- ये मैंने कब कहा?

ध्रुव- मैं समझा नहीं!

नागराज- विषप्रिय की मृत्यु ने मानवता में मेरा विश्वास तोड़ दिया था और भारती ने फिर से वो विश्वास कायम कर दिया। मानवता को समझने में अभी मुझे और समय लगेगा और इसके लिए मुझे बाहरी दुनिया में ही रहना होगा।

ध्रुव- विसर्पी को बताया?

नागराज- उसे पता है। कालदूत को बताना बाकी है।

महाविष्या- हमने सब सुन लिया!

……………………………………नागराज पीछे मुड़कर देखता है तो कालदूत अभी भी विभक्त रूप में खड़े होते हैं।

परमविष्या- तुम कितने समय तक बाहर रहोगे?

नागराज- ये तो पता नहीं! मुझे वेदाचार्य का भी सामना करना है अभी तो!

विष्या- हम तो चाहते थे कि भारती का दाह संस्कार यहीं से हो।

नागराज- क्षमा करें महात्मन् पर वेदाचार्य से उनकी पोती मैं पहले ही छीन चुका हूँ, अब ये अधिकार नहीं छीन सकता।

विष्या- ठीक है नागराज।हम तुम्हारे इस फैसले का सम्मान करते हैं।

नागराज- आप को फिर से संयुक्त होने में कितना समय लगेगा?

परमविष्या- हमें कुछ महीनों तक काल साधना का कठिन तप करना होगा।

…………………………………तभी नागराज की नज़र स्टील पर पड़ती है।

नागराज- सुनो स्टील मैं..

स्टील- कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है नागराज। तुम कहोगे कि तुम शर्मिंदा हो कि तुमने मुझे उम्रभर के लिए ऐसा कर दिया पर यकीन मानो..तुमने अच्छा ही किया।

नागराज- वो कैसे?

…………………………फिर स्टील उसको सारा वृतांत सुना देता है।

नागराज- ओह! तभी मैं सोचूँ कि तुम इतनी जल्दी आने को राज़ी कैसे हो गए!

धनंजय- तो क्या सब लोग तैयार हैं?

तिरंगा- शक्ति कहाँ गयी?

परमाणु- उसको कहीं भी आने जाने के लिए किसी आयामद्वार की आवश्यकता नहीं है।

…………………………………….फिर सभी रक्षक नागद्वीप से विदा लेकर धनंजय के साथ चल देते हैं।

न्यूज़फ़्लैश- दुनियाभर में आतंक मचाने वाले हरु का आतंक आज समाप्त हो गया है। जी हाँ, सुपरहीरोज के संयुक्त प्रयास ने हरु के हमले को विफल कर दिया है और इसमें एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है इच्छाधारी नागों ने। अपने तिरस्कार को भुलाकर इच्छाधारी नागों ने मानवों का साथ दिया।इस घटना का समाज पर बहुत असर पड़ा है और अब लोग इच्छाधारी नागों को भी अपने रक्षकों की लिस्ट में शुमार करना चाहते हैं। इसके साथ ही दुखभरी घटना की खबर भी मिली है, महानगर के रक्षक फेसलेस हरु से युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हो गए। उनके गुरु और जानेमाने ज्योतिषी वेदाचार्य इस घटना से बेहद दुखी हैं और उन्होंने किसी भी प्रकार का बयान जारी करने से मना कर दिया है। अब महानगर की बागडोर को उस व्यक्ति ने संभाल लिया है जिसका हरु की पराजय में सबसे बड़ा योगदान है और उसका नाम है…नागराज! जी वही नागराज जो कुछ समय पहले ही इच्छाधारियों के रिप्रेजेन्टेटिव बनकर मीडिया के सामने आये थे। गृहमंत्री फिलहाल सुपरहीरोज को साथ लाने वाली अपनी सरकारी योजना से बहुत खुश नज़र आ रहे हैं और आगे इस प्रकार की स्थिति न आये उसको रोकने के लिए सुपर कमांडो ध्रुव ने ये अनाउंसमेंट की है कि रक्षकों का एक दल बनाया जायेगा…जिसका नाम होगा बृह्माण्ड रक्षक!

………………………………..इतनी न्यूज़ सुनने के बाद एक रहस्यमय शख्स रिमोट से टीवी बंद कर देता है और अँधेरे से निकलकर सामने आता है।वो व्हीलचेयर बैठा होता है।

नागमणि- तो अब इच्छाधारियों को समाज ने स्वीकृति दे दी है। कोई बात नहीं, जब मैं वापस आऊंगा तो पूरी तैयारी के साथ आऊंगा और तब न तो इच्छाधारी बचेंगे और न ही उन का मसीहा जिसने मुझेे उस ढहती बिल्डिंग में मरने के लिए छोड़ दिया था….नागराज! 

The phase one of story series earth 61 end here. We’ll come back again in near future with few new and improved plots under the title Earth 61 Revived. The response and love all of you gave towards this story is really incredible . The Comic Haveli team will continue efforts to bring you some good contents. Thank You all.

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli with Help of all comic haveli team 

Disclaimer – These stories are written and published only for entertainment. comic haveli and writers had no intent to hurt feeling of any person , community or group. If you find anything which hurt you or should not be posted here please highlight to us so we can review it and take necessary action. comic haveli doesn’t want to violent any copyright and these contents are written and created by writers themselves. the content doesn’t carry any commercial profit, as fan made dedications for comic industry.  if any name , place or any details matches with anyone then it will be only a coincidence.

11 Comments on “Earth 61 Part 17 (The Conclusion)”

  1. बहुत सुंदर।
    समापन अंक बहुत अच्छा रहा लड़ाई काफी अच्छी रही….

  2. Puri earth -61 series bahot he umda thi..bahoot he badiya prayas tha..pad kar maza aa gaya..keep it up..aage bhi jarur likhiye

  3. बहुत बढ़िया हर्षित जी।
    वैसे तो ये पूरी सीरीज मुझे पसंद थी पर यह आखिरी पार्ट लाजवाब था।
    जिन्होंने राज कॉमिक्स नहीं पढ़ी वो भी इस सीरीज को पढ़ सकते है।
    हर कैरेक्टर एक नए अंदाज़ में देखने को मिला।

  4. धन्यवाद् सभी लोगों का जिनकी वजह से ये सीरीज अपने अंजाम तक पहुंची।

  5. Dhruv ka role is series me bahut week ho,gaya,khas kar is last part me.uska role thora aur strong hona chia baki sab acha hai…..

    1. amit ji yeh katha vishesh roop se ichhadhariyon ke paripekshya me likhi gayi thi isliye baki kisi aur kirdar ko itna jyada bal nahi diya tha , aagami khando me shayad aapki shikayat door ho jaye

  6. बहुत शानदार रही पूरी सीरीज।शुरू से लेकर अंत तक हर भाग बहुत बढियां रहा। भारती का अंत बहुत दुखद रहा।वह भी शायद जीवित रहती तो बढियां होता।
    यह कहानी तो खत्म हुई। कया आगे भी नागमणि को लेकर अगला भाग लिखा जायेगा।कया सभी सुपर हीरो एक साथ वापस आ पायेंगे।
    आप का बहुत धन्यवाद जो आप इस प्रकार सभी कामिकस प्रेमियों को एक साथ बांधे हुये हो। और सबका मनोरंजन कर रहे हो। इस साइट के माध्यम से हम सभी अपना बचपन फिर से जी रहे है।
    उम्मीद हे कि अर्थ 61 पर आप नई कहीनी फिर लेकर आयेंगे।
    आपको बहुत बहुत धन्यवाद और शुभ कामनाएँ।

  7. Bhai कहानी बहुत ही acchi थी, आप बस इसी तरह लिखते रहिये, हम सsabhi इसके लिए आपके बहुत आभारी रहेंगे

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