Earth – 61 Part 4 ( Khajane Ki Khoj )

EARTH-61

PART 4.

(खजाने की खोज )

फाइनल इयर का पेपर ख़त्म हो चूका होता है और रिजल्ट आने में कुछ ही दिन बचे होते हैं, सारे छात्र घर जाने के लिए उत्सुक होते हैं।

सर्पराज- चार साल काफी जल्दी निकल गए।

नागप्रेती- और मेरी एक भी गर्लफ्रेंड नहीं बनी और तो और हवेली वालो ने भी मुझ पर रहम नहीं खाया ।

नागार्जुन- अबे खाने को छोड़कर कुछ और सोचेगा तब गर्लफ्रेंड बनेगी ना!

नागदेव- वैसे क्या लगता है? इस बार के पेपर में टॉप कौन करेगा?

नागार्जुन- ये टॉप करने की होड़ तो हमेशा नागराज और विसर्पी के बीच ही लगी रहती है, उन्ही दोनों में से कोई करेगा।

सिंहनाग- रिजल्ट आने में अभी वक्त है, उसके बाद ही हम लोग नागद्वीप जा पाएंगे। अरे..ये हमारी तरफ कौन आ रहा है? ये तो नागू है! ये इधर शिक्षाधाम में क्या कर रहा है?

नागू- नागराज..नागराज किधर है?

सिंहनाग- ज़रा सांस तो ले लो, इतना घबराये हुए क्यों हो?

नागू- वो..आज असम में कई जगह बम धमाके हुए हैं, इच्छाधारी नागों द्वारा। उन्होंने एक वीडियो जारी किया है जिसमे उन्होंने उस “लड़के” की मांग की है जिसने बैंक में जाकर लोगों को बचाया था, यानी नागराज।

नागार्जुन- सत्यानाश! मतलब कि जो इच्छाधारी नाग बैंक लूटने के लिए गए थे, ये उन्हीं के साथी हैं।

नागू- हाँ, और उन्होंने बोला है कि अगर नागराज को उनके हवाले नहीं किया गया तो वे फिर से बम धमाके करेंगे।

सिंहनाग- अब उस नेता पहलेजा को फिर मौका मिल जायेगा कुछ बकवास करने का।

नागप्रेती- पहले इस समस्या के बारे में सोचते हैं। आखिर ये लोग हैं कौन, पहले इनके साथी नागों ने बैंक लूटने की कोशिश की और अब ये लोग ब्लास्ट करके आतंक फैला रहा हैं।

नागू- मेरे कुछ दोस्त नाग असम में रहते हैं, उनकी जानकारी के अनुसार ये सिस्टम से असंतुष्ट नाग हैं, जिनको मानवों के बराबर का दर्जा चाहिए।जब तक इनको मानवों के समान अधिकार सरकार द्वारा नहीं दिए जायेंगे, तब तक ये आतंक मचाते रहेंगे।

नागार्जुन- ये क्या बात हुई, हम लोगों को भी पता है कि इच्छाधारी नागों के साथ अन्याय हो रहा है पर ये तो कोई तरीका नहीं हुआ इस समस्या से निपटने का। ये चन्द इच्छाधारी नाग हम सबको बदनाम करते हैं।

नागप्रेती- ये देखो क्या न्यूज़ आ रही है!

न्यूज़- आज फिर से इच्छाधारी नागों के एक दल द्वारा असम द्वारा उपद्रव किया जा रहा है। वो मांग कर रहे हैं उस रहस्मयी मददगार की जिसने उनके साथियों को बैंक में पकड़ने में मदद की। क्या वो रहस्यमय मददगार असम जायेगा?

नागू- ये तो बड़ी गड़बड़ हो गयी, नागराज कहाँ है?

नागराज- मैं यहां हूँ!

……………………………………..सब लोग देखते हैं कि नागराज एक छोटा सा बैग टाँगे आ रहा होता है।

नागू- ये..ये सब क्या है!

नागराज- मैं उनकी बात मान रहा हूँ और उनको सरेंडर करने जा रहा हूँ।

नागप्रेती- क्या! तुम पागल हो गए हो क्या? लोगों को फिर ये कहने का मौका मिल जायेगा कि ये इच्छाधारी नाग आपस में ही मिलकर कोई नाटक कर रहे हैं।

नागराज- अगर मैं नहीं गया तो निर्दोष जानें जाएँगी।

नागार्जुन- तुमको इस दुनिया की इतनी फिक्र क्यों है नागराज? क्या इस दुनिया ने कभी तुम्हारी फिक्र की है? उनके लिए इच्छाधारी नाग हमेशा से उनके शत्रु रहे हैं।

नागराज- पर मैं गलत होते हुए नहीं देख सकता!

विसर्पी- अगर ऐसा है तो मैं भी साथ चलूँगी तुम्हारे!

पंचनाग(एक साथ)- हम भी चलेंगे!

नागू- हालाँकि ये पागलपन है, पर ये पागलपन हम सब साथ में करेंगे।

नागराज- ठीक है, अगर तुम लोगों की यही मर्ज़ी है तो यही सही! महानगर से असम ट्रेन से 7 घंटे का सफ़र है, अपना ज़रूरी सामान पैक कर लो।

विषप्रिय- रुको!

नागराज- तुम?

विषप्रिय- हम लोगों की आपस में नहीं बनती लेकिन इस सफ़र में मैं भी तुम लोगों के साथ चलूंगा।

नागराज- ठीक है, अपना सामान पैक कर लीजिये राजकुमार!

……………………………………फिर सब लोग ट्रेन से असम की ओर निकल पड़ते हैं।

नागू(नागप्रेती से)- एक बात बता भाई! ये राजकुमारी विसर्पी और अपने नागराज के बीच कुछ है क्या?

नागप्रेती- पक्का तो मुझे भी नहीं पता पर हाँ कुछ तो है!

नागू- हम्म! मुझे तो लग ही रहा था!

विषप्रिय- क्या बात हो रही है तुम दोनों की?

नागू- क..कुछ नहीं राजकुमार जी! कुछ भी तो नहीं!

नागराज(विसर्पी से)- तुमको नहीं आना चाहिए था, ये खतरनाक हो सकता है।

विसर्पी- तो क्या सारे खतरनाक काम करने का ठेका तुम्ही ने ले रखा है? मैं भी युद्ध कौशल की अच्छी जानकार हूँ, दो चार मामूली इच्छाधारी नागों को तो ऐसे ही पटक सकती हूँ।

नागराज- ओह! बहुत अच्छी!

…………………………………7 घंटे के बाद उनका गंतव्य असम आ जाता है।

नागराज- तो ये है असम! सुना है कि यहाँ के जंगल बहुत घने होते हैं। तुम्हारा आदमी हमको मिलने वाला था नागू?

नागू- मैंने उसे फोन कर दिया था और…वो देखो आ गया!

रमन- मेरा नाम रमन है, नागू ने मुझे सब बता दिया है। उन लोगों का अड्डा जंगल के अंदर है।

नागराज- ठीक है, तो फिर चलो!

……………………………………सब लोग रमन के पीछे जंगल में चल देते हैं। असम के घने जंगल में तरह तरह के जानवर थे, पर आज मामूली मानव नहीं बल्कि इच्छाधारियो का दल जंगल से गुज़र रहा था जिसका शिकार मामूली जानवर नहीं कर सकते।

रमन- वो जो आप सामने गुफा देख रहे हैं, वो उन विद्रोही इच्छाधारियों की है।

नागराज- मैं अकेले ही जाऊंगा और उनसे बात करूंगा, अगर कोई गड़बड़ हुई तो तुम लोग भी अंदर आ जाना।

नागू- ठीक है!

………………………………नागराज शांति से अंदर जाता है, अंदर कई सारे इच्छाधारी नाग मानव रूप में होते हैं जो नागराज को देखते ही खड़े हो जाते हैं।

नागराज- मुझे तुम्हारे लीडर से बात करनी है।

……………………………..एक विद्रोही नागराज को लेकर एक कमरे में जाता है जहां पर किसी भेड़िया मानव की सोने की मूर्ति रखी होती है और उसके साथ खड़ा होता है….नागपाशा।  ( टेन टेनेन )

नागपाशा- स्वागत है नागराज!

नागराज- तुम कौन?

नागपाशा- मुझे नागपाशा कहते हैं, मैंने ही इच्छाधारियों का ये विद्रोही दल बनाया है।

…………………………………..नागपाशा का नाम सुनते ही नागराज की आँखों में खून उतर आता है। वो नागपाशा पर तीव्र विषफुंकार छोड़ता है पर नागपाशा पर कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ता।

नागपाशा- तुम्हारी प्रतिक्रिया ने ज़ाहिर कर दिया क़ि तुमको पता है कि मैं कौन हूँ।

नागराज- मेरे माँ-पिता का कातिल!

नागपाशा- बिल्कुल ठीक! और अब मेरी बात ध्यान से सुनना वरना बाहर खड़े तुम्हारे दोस्त मारे जायेंगे। ये जो जगह तुम देख रहे हो, यहाँ पर कभी भेड़िया मानवों का एक समृद्ध राज्य हुआ करता था..वुल्फानो! तक्षकनगर और वुल्फानो के सम्बन्ध आपस में बहुत अच्छे थे और इसी कारण जब तक्षकराज यानी मेरे भाई को मेरे धोखे का पता चला, तो उन्होंने सारा खज़ाना वुल्फानो के युवराज भेड़िया के पास भिजवा दिया। मैं बड़े क्रोध में था। मैंने तक्षकराज से कहा कि अगर उसने ख़ज़ाने का पता नहीं बताया तो मैं रानी की जान ले लूँगा। उसने तुरंत मुझे वुल्फानो के बारे में बताया। मैंने फिर भी उसकी और रानी ललिता की जान ले ली। उसके बाद मैं वुल्फानो आया और यहां के युवराज भेड़िया से मित्रता का नाटक किया पर गुरुराज भाटिकि मेरी नीयत को भांप गए। उस वक्त वुल्फानो में युद्ध की स्थिति थी क्योंकि भेड़िया के पिता वुल्फा को उनके ससुर ने अपनी बेटी सुर्वया से धोखे से विवाह रचाने की वजह से जेल में बंद कर दिया था और भेड़िया उनको छुड़ाने जा रहा था। भेड़िया का भरोसा जीतने के लिए में उसके साथ युद्ध में गया लेकिन रानी सुर्वया ने भेड़िया को शाप देकर सोने की मूर्ति में बदल दिया। मुझे लगा कि मेरे सारे किये कराये पर पानी फिर गया क्योंकि खज़ाना बेहद गुप्त रूप से रखा गया था और उसका पता सिर्फ भेड़िया जानता था लेकिन फिर सुर्वया का दिल पसीज गया और उसने ये भविष्यवाणी की कि भेड़िया वापस सामान्य तब होगा जब किसी कुंवारी कन्या का रक्त इसके ऊपर गिरेगा। फिर मुझे इंतज़ार करना बेकार लगा, मैंने इंतज़ार करने का निर्णय लिया क्योंकि अगर मुझे तब खज़ाना मिल भी जाता तो देव कालजयी प्रकट होकर मुझे मार देते। तो मैंने सोचा कि जब भी ख़ज़ाने का असली वारिस मिलेगा, तब उसको योजनाबद्ध तरीके से यहाँ लेकर आऊंगा।

नागराज- लेकिन ख़ज़ाने का पता तो भेड़िया को मालूम था और वो तो मूर्ति बना हुआ है।

नागपाशा- उसका भी उपाय है मेरे पास!

………………………..नागपाशा के एक इशारे पर यांत्रिक जीव उठ खड़ा होता है और बाहर खड़े लोगों को पकड़ लाता है, वे विरोध का प्रयास करते हैं पर विफल रहते हैं।

नागपाशा(विसर्पी की तरफ इशारा करके)- इस लड़की को लाओ!

नागराज- बस बहुत हुआ!

……………………………………..नागराज सर्पबंधनों से नागपाशा को जकड़ने का प्रयास करता है पर विफल हो जाता है। नागपाशा एक मांत्रिक वार करके नागराज के हाथ कुछ समय के लिए सुन्न कर देता है। विसर्पी नागपाशा से लड़ने का प्रयास करती है पर नागपाशा फुर्ती के साथ चाकू निकालकर विसर्पी के हाथ पर वार करता है। रक्त की एक बूँद भेड़िया की मूर्ति पर गिरती है और कई हज़ार सालों की नींद के बाद भेड़िया जाग उठता है। कई वर्षों के बाद भेड़िया एक बार फिर जागता है।

नागपाशा- स्वागत है! तुम्हारा शाप ख़त्म हो गया भेड़िया!

भेड़िया- ये..ये सब क्या है? मैं कहाँ पर हूँ?

नागपाशा- तुमने मुझे पहचाना?

भेड़िया- नागपाशा! तुम?

नागपाशा- तुम कई वर्षों तक सोने की मूर्ति बनकर खड़े हुए थे। मैंने तुमको स्वतंत्र किया।

भेड़िया- उफ़! बहुत ही अजीब सा लग रहा है। इतने सालों से मैं इस खँडहर में मूर्ति बनकर खड़ा हुआ था? ये सब लोग कौन है जिनको तुमने बंदी बना रखा है?

नागपाशा- ये सब तुमको नुक्सान पहुंचाने की नीयत से आये थे, इस लड़के का नाम नागराज है और ये सब इसी के दोस्त हैं।

…………………………………तब तक नागराज के हाथ पर से तांत्रिक वार का असर ख़त्म हो जाता है वो कूदकर नागपाशा के पास पहुँचता है और उसे एक मुक्का जड़कर दूर गिरा देता है। भेड़िया ये देखकर आक्रोश में आ जाता है।

भेड़िया- तुमने मेरे मित्र पर हाथ उठाया? हे भेड़िया देवता मदद!

…………………………………..ये बोलते ही भेड़िया के हाथ में एक चमत्कारी गदा प्रकट होती है जिससे वो नागराज पर प्रहार करता है, नागराज इच्छाधारी कणों में बदलकर वार बचाता है और प्रकट होकर फिर भेड़िया पर वार करता है।

भेड़िया- तो तेरे पास भी चमत्कारी शक्तियां हैं, कोई बात नहीं ,देखते हैं कि कौन ज़्यादा शक्तिशाली है।

नागराज- नागपाशा तुमको मूर्ख बनाकर अपना उल्लू सीधा कर रहा है! हमें लड़ने की ज़रुरत नहीं है।

भेड़िया- वो कई वर्ष पहले से मेरा मित्र है, मैं उसे छोड़कर तुमपर भरोसा क्यों करूँ?

नागराज- लड़ाई कोई हल नहीं है भेड़िया! नागपाशा खज़ाना हासिल करने के लिए तुम्हारा मित्र बना था!

भेड़िया- खज़ाना तो उसी का है, वो भला उसे क्यों हासिल करना चाहेगा?

नागराज- खज़ाना तक्षकराज का है और मैं हूँ उनका पुत्र!

भेड़िया- तुम..तुम तक्षकराज जी के पुत्र हो? वो और मेरे पिता वुल्फा तो आपस में अच्छे मित्र थे। अरे! ये नागपाशा कहाँ चला गया?

नागपाशा- मैं यहाँ हूँ!

……………………………….नागपाशा यांत्रिक मानवों की फ़ौज लेकर आता है जिनको गुरुदेव ने अपनी प्रयोगशाला से टेलीपोर्ट करके भेजा होता है।

नागपाशा- मुझे तुम दोनों के उलझने से समय मिल गया इन यांत्रिक मानवों को बुलाने का। तुम्हारे सारे मित्र इनकी गिरफ्त में हैं। अब तुम मुझे चुपचाप ख़ज़ाने तक लेकर जाओगे भेड़िया!

भेड़िया-खज़ाना तो यहाँ से कुछ मील दूर मेरे महल में है!

नागराज- इसको ख़ज़ाने का पता मत बताओ भेड़िया!

नागपाशा- तुम्हारे सारे दोस्त मेरे यांत्रिक मानवों के रहमोकरम पर जीवित हैं नागराज। अब तुम भी मेरे साथ ख़ज़ाने की चाबी बनकर चलोगे!

भेड़िया- अब और कोई चारा नहीं है नागराज, इस विश्वासघाती ने मुझे मजबूर कर दिया है। हम इन लोगों की जान का खतरा नहीं ले सकते।

नागराज- उफ़! पंचनाग, नागू, विसर्पी और विषप्रिय, सब इन यंत्र मानवों की गिरफ्त में बेहोश पड़े हैं। बात तो माननी पड़ेगी।

………………………………….फिर भेड़िया नागपाशा और नागराज को साथ में लेकर महल की ओर निकल पड़ता है। नागपाशा अपने यांत्रिक मानवों को वहीँ पर नागराज के दोस्तों के साथ रुकने का आदेश देता है।

भेड़िया- मिल गया! वो रहा महल! इतने वर्षों बाद भी मैं यहाँ का नक्शा भूला नहीं!

नागपाशा- तो फिर चलो! अब ख़ज़ाने का पता भी बता दो!

भेड़िया- अंदर चलो!

…………………………….सब उस भव्य महल के अंदर जाते हैं, भेड़िया एक पुराने से लोहे के दरवाज़े को खोलता है, उसके अंदर भव्य ख़ज़ाने का संदूक पड़ा होता है।

नागपाशा- हा..हा..मिल गया खज़ाना। अब ये खज़ाना तुमको खोलना है नागराज! अपने दोस्तों की सलामती के लिए ये आखिरी काम कर दो।

नागराज- अगर मैं मजबूर ना होता तो तुझे बताता!

……………………………..फिर नागराज संदूक को खोलने का प्रयास करता है, तभी एक भारी प्रकाश होता है और एक तीन सर वाला विशाल नाग प्रकट होता है।

कालजयी- ख़ज़ाने के असली वारिस का स्वागत है! देव कालजयी की तरफ से ये नागफनी सर्प भेंट के रूप में स्वीकार करो पुत्र!

………………………………नागराज के शरीर में नागफनी सर्प प्रविष्ट होते हैं, और नागराज में गज़ब की ऊर्जा का संचार होता है।

नागराज- धन्यवाद देव कालजयी! प्रणाम स्वीकार करें!

………………………………….देव कालजयी मुस्कुराकर गायब हो जाते हैं।

नागपाशा- वाह! अब तो तुमको नागफनी सर्प मिल गए भतीजे! बाकी खज़ाना अब मुझे सौंप दे और चुपचाप यहाँ से निकल जा!

…………………………………..नागराज मुस्कुराकर पीछे मुड़ता है और नागपाशा के ज़ोरदार घूँसा जड़ता है। नागपाशा गिर पड़ता है।

नागपाशा- ये..ये क्या हरकत थी? लगता है कि तुझे तेरे दोस्तों की जान प्यारी नहीं है!

नागराज- मुझे मेरे दोस्तों की जान बहुत प्यारी है और तुम्हारी जानकारी के लिए मैं बता दूं कि जिस वक्त हम ख़ज़ाने को ढूँढने के लिए निकल रहे थे, उसी वक्त मैंने चुपके से अपने सूक्ष्म सर्पों को तुम्हारे यांत्रिक मानवों के नाजुक पुर्जों में घुसने का आदेश दे दिया था। अब तक तो तुम्हारे यांत्रिक मानव नष्ट होकर कबाड़ बन चुके होंगे।

नागपाशा- तो..ये सब नाटक था!

नागराज- हाँ, क्योंकि मैं भी उस ख़ज़ाने तक पहुंचना चाहता था जो मेरे पिता की आखिरी निशानी है! इसका इस्तेमाल मैं जनहित में करूंगा।

नागपाशा- गुरुदेव! बचाइए  , जल्दी!

भेड़िया- भागता कहाँ है, कायर!

…………………………………….पर तब तक नागपाशा को गुरुदेव टेलीपोर्ट कर लेते हैं। नागराज और भेड़िया निराश हो जाते हैं, फिर दोनों लोग महल से निकलकर वापस उस खँडहर में पहुँचते हैं जहाँ भेड़िया मूर्ति बनकर खड़ा था! सब लोग उनको देखकर खुश होते हैं।

नागराज- तुम्हारे लिए तो ये बड़ा ही मुश्किल होगा भेड़िया! इस दुनिया में फिर से अपनी जगह बनाना!

भेड़िया- वो तो है, लेकिन अगर मुझे एक बार फिर जीवनदान प्राप्त हुआ है तो ज़रूर भेड़िया देवता मुझसे कुछ चाहते होंगे! मैं इस जंगल में ही रूककर यहाँ के वासियों की मदद करूंगा।

नागू- सही है गुरु,जंगल में ही रहो! बाहरी दुनिया वाले जब हम इच्छाधारियों को स्वीकार नहीं कर पा रहे तो तुमको कहाँ से करेंगे!

विसर्पी- मेरा तो धन्यवाद् करो, तुम मेरी वजह से ही वापस ज़िंदा हुए हो!

भेड़िया- हा..हा..बहुत बहुत धन्यवाद् आपका, और तुम अपना खज़ाना नहीं लेकर जाओगे नागराज?

नागराज- नहीं! खज़ाना इस वक्त तुम्हारे पास सुरक्षित है, मैं सही समय आने पर खज़ाना तुमसे ले जाऊंगा।

भेड़िया- तो अब मेरे ख्याल से आप सभी विदा लेंगे।

………………………………..उसके बाद सभी लोग भेड़िया से विदा लेते हैं और ट्रेन में बैठकर वापस महानगर चल देते हैं। गुरुदेव अपनी प्रयोगशाला में चिंतित बैठे होते हैं।

गुरुदेव- मैंने तुझसे मना किया था कि जल्दबाज़ी मत करना! अब देख लिया अंजाम! खज़ाना, त्रिफना मूर्ति और नागद्वीप का पता..तीनों हाथ से गए!

नागपाशा- पर अब हमें पता है कि खज़ाना कहाँ पर है और उस पर तो अब देव कालजयी की सुरक्षा भी नहीं है। आशाएं अभी पूरी तरह से ख़त्म नहीं हुई हैं गुरुदेव लेकिन अब हम सही समय पर अपनी चाल चलेंगे।

# कौन सी नई चाल चलेगा अब नागपाशा?

# क्या नागराज नाग्द्वीप पर जा पायेगा या महानगर का ही होकर रह जायेगा इस आयाम में भी ?

# क्या आप भेदिया के इस कहानी में आगमन से खुश हैं या कुछ और होना चाहिए था ?

# कहानी कौन से मोड़ लेगी समय के साथ ?

# जानने के लिए जुड़े रहिये कॉमिक हवेली से और इंतज़ार करिए अगले भाग का और अपने बहुमूल्य विचार कमेंट करके हमे अवश्य बताएं |

क्रमशः 

Earth 61 Part – 3 (Prem Ankuran)

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli 

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10 Comments on “Earth – 61 Part 4 ( Khajane Ki Khoj )”

  1. Bahut aachi lagi kahani.
    DHRUV aur BHERIYA aa gaye ab to DOGA PARMANU TIRANGA ko bhi aana chahiye kahani main.
    Intejaar hai agle part ka.

  2. Kahani padh li
    Ab as usual mera lamba sa review
    Sabse pahle aapko bahut bahut badhai harshit ji itni behtareen kahani likhne k liye
    Is part ka best chiz tha bhediya ka aagman
    Totally different origin dikha diya
    Visarpi se hi zinda karwa diya usko
    Kaha se sochte hain ye sab
    RC ki timeline ko ignore kar diya jaye aur aapki timeline ko consider kiya jaye to story bahut hi behtareen bani hai
    Hum readers hain to hamara haq hai kuch galat hone se aapko btaye
    Kyun ki aapne ye story earth 61 k liye likhi h islye isko ignore bhi kar sakte hain
    Jaise mahanagar se assam koi bhi train 7 ghante me nahi pahucha sakti
    Dono hi india k thk ulte directions me hain
    Dusra bhediya 50000 saal tak murti bana raha tha
    Jab ki takshak nagar ki story 80+20 lagbhag 100 saal purani hai
    These are the normal facts
    But as I said k ye story earth 61 k liye likhi gai hai to you can ignore these

  3. ● वाह वाह वाह, क्या बात है क्या बात है। बहुत ही शानदार+जानदार+उम्दा=रोमांचकारी।

    ● हीहीही यह पार्ट भी बहुत ही बढ़िया लिखा है संवर्त हर्षित जी ने पढ़कर मज़ा आ गया, अब श्रृंखला में भेड़िया का भी प्रवेश हो चुका है सब कुछ बहुत ही शानदार तरीके से लिखा गया है।

    ● भेड़िया जो की Rc की स्टोरी लेकर देखा जाए तो जेन की वजह से पुनः जीवित होता है लेकिन इस श्रृंखला में विसर्पी के रक्त की वजह से पुनः जीवित हुआ है।

    ● भाई सबकुछ तो सही है पर चूँकि यह सिरीज़ नागराज है और मैं नागराज का बहुत बड़ा फैन हूँ और ये सिरीज़ भी बहुत ही शानदार + जानदार + उम्दा = रोमांचकारी, है, तो मैं इस नाते थोड़ी बहुत शिकायत तो कर ही सकता हूँ ।

    ● मुझे कहना ये है की, संवर्त जी लिखा तो आपने बहुत ही शानदार है नागराज की ओरिजिन श्रृंखला को एक बहुत ही नए और शानदार तरीके से पेश किया है आपने पढ़कर बहुत ही मज़ा आ रहा है, पर…, एक गलती हुई है, और वो यह है की, आपने इस पार्ट में सबकुछ बहुत जल्दी जल्दी दिखा दिया है शुरू में पढ़ने में तो मज़ा आ रहा था लेकिन सबकुछ इतनी जल्दी जल्दी हो गया की मज़ा थोड़ा सा किरकिरा हो गया, बाकी सब तो सही है बस मैं यही कहना चाह रहा हूँ की आगे थोड़े सस्पेंस बनाये और हो सके तो थोड़ा आराम आराम से आगे बढ़े , बाकी कहानी बहुत ही उम्दा है

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