Earth 61 Part – 5 ( Nagmani Aagman )

EARTH-61

PART 5.

सभी लोग ट्रेन से वापस महानगर की तरफ लौट रहे होते हैं। विसर्पी देखती है कि नागराज ट्रेन के गेट के पास खड़ा अपने ही ख्यालों में ग़ुम होता है, वो उठकर उसके पास जाती है।

विसर्पी- तुम यहाँ क्या कर रहे हो?

नागराज- बस ऐसे ही, कुछ सोच रहा था।

विसर्पी- तुमने कभी बताया नहीं कि तुम एक राजघराने से सम्बन्ध रखते हो?

नागराज- मुझे खुद ये बात महानगर आकर ही पता चली, पर मेरा इतिहास ऐसा नहीं जिस पर मैं गर्व कर सकूं, मेरे सगे चाचा ने मेरे माता पिता को मार दिया, मुझे ये बात सिर्फ अपने तक ही सीमित रखनी थी पर जब हम लोग विद्रोही नागों से भिड़ने आये तो यहाँ नागपाशा मिल गया, तो ज़ाहिर है कि सबको पता लगना ही था।

विसर्पी- तो तुम खुद के अस्तित्व से अनजान थे जो अब तुम्हे पता लग गया, ये तो एक अच्छी बात हुई।

नागराज- क्या फायदा ऐसे अस्तित्व को जानकर? आज मेरा अपना कोई भी नहीं है, मैं तो एक संपूर्ण इच्छाधारी नाग भी नहीं और एक सम्पूर्ण मानव भी नहीं।

विसर्पी- सही कहा। तुम दोनों से बढ़कर हो।

………………………………फिर नागराज विसर्पी की तरफ देखकर मुस्कुरा देता है। ट्रेन कुछ ही समय में महानगर पहुँच जाती है, सब लोग ट्रेन से उतरते हैं तो सबसे पहले विषप्रिय की नज़र अख़बार पर जाती है। वो अख़बार उठाता है जिसपर खबर छपी हुई है

” भारत सरकार ने उठाये इच्छाधारी विद्रोहियों के खिलाफ कुछ ठोस कदम। पार्लियामेंट की बैठक में एक कानून को पारित किया गया है जिसके तहत कोई भी इच्छाधारी अच्छी या बुरी नीयत से मानवीय क्रियाकलापों में दखल देता पाया गया तो उसके खिलाफ उसी वक्त एक खास एंटी वेनॉम गन का प्रयोग किया जाएगा जिसका अविष्कार देश के जाने माने साइंटिस्ट प्रोफेसर नागमणि ने किया है। प्रोफेसर नागमणि बहुत समय से नागों पर शोधकार्य कर रहे हैं।”

सभी ये खबर पढ़कर हैरान हो गए।

विषप्रिय(क्रोध में)- इन मूर्खों की तो कोई मदद करनी ही नहीं चाहिए।

नागराज- शांत हो जाओ विषप्रिय, ये जो सब हो रहा है उसके पीछे लोगों का डर है। अब हम लोगों को कोई भी कदम उठाने से पहले बेहद सावधान रहना होगा। बस रिजल्ट घोषित हो जाएँ, उसके बाद तो सीधे नागद्वीप ही जाना है।

विषप्रिय- सुनो नागराज, अपनी पिछली हरकतों के लिए मैं तुमसे और पंचनागों से क्षमा चाहता हूँ। मुझे अपने पद का कुछ अधिक ही घमंड हो गया था पर जब मुझे असम में पता चला कि तुम भी एक राजपरिवार से हो तो मुझको अपने आप पर बड़ी शर्म आई। तुम राजसी परिवार के होकर भी इतना सादा जीवन व्यतीत कर रहे हो और एक मैं हूँ जो हर वक्त एक घमंड में रहता हूँ।

नागराज- तुमको इस बात का अहसास है तो बहुत अच्छी बात है।

विषप्रिय- और..मुझे तुम्हारे और विसर्पी के बारे में भी पता है, कि तुम दोनों एक दूसरे से प्यार करते हो।

………………………….नागराज और विसर्पी एक दूसरे को ताकने लगते हैं।

विषप्रिय(हंसकर)- मैं नागद्वीप पहुंचकर पिताजी से इस बारे में बात करूंगा मुझे नहीं लगता कि पूरे नागद्वीप पर तुमसे योग्य वर उनको विसर्पी के लिए मिलेगा।

विसर्पी- विषप्रिय तुम ये… विषप्रिय- भाई होने का कर्त्तव्य तो निभाना पड़ेगा विसर्पी।

…………………………….पंचनाग और नागू इस बात पर ताली बजाते हैं। विसर्पी और नागराज शरमाकर रह जाते हैं, फिर सब लोग हॉस्टल की तरफ चल देते हैं। शाम के वक्त विषप्रिय अपने कमरे में अकेला होता है कि तभी उसके दिमाग में एक हलचल सी होती है, उसकी माँ नगीना उससे मानसिक संपर्क करती है।

विषप्रिय- अरे! कैसी हो माँ?

नगीना- अब ख्याल आ रहा है तुझे अपनी माँ का, इतने दिनों से बाहर है कभी खुद से ख्याल नहीं आया मानसिक संपर्क करने का।

विषप्रिय- अब आपको क्या बताऊँ कि यहाँ पर कितना कुछ एक साथ घटित हो रहा है!

नगीना- वो विसर्पी कैसी है?

विषप्रिय- ‘वो विसर्पी’ का क्या अर्थ हुआ? वो भी आपकी ही बेटी है।

नगीना- बेटी? हुंह! मुझे तो दो बेटे ही चाहिए थे।

विषप्रिय- इतने वर्षों में मैंने आपको कभी विसर्पी से एक माँ वाला व्यवहार करते नहीं देखा, वो हमेशा पिताश्री के ही ज़्यादा नज़दीक रही।

नगीना- आज बड़ा लाड़ आ रहा है बहन पर! बाहरी दुनिया ने वाकई तुझे काफी हद तक बदल दिया है बेटे। खैर,मैंने तुझसे एक ज़रूरी काम के लिए मानसिक संपर्क किया है।

विषप्रिय- क्या ज़रूरी काम?

नगीना- आज वायुनाग को मैंने एक विशेष कार्य से नागद्वीप से शहर तेरे पास भेज है।

विषप्रिय- वायुनाग? तुम्हारा मुख्य अंगरक्षक जो वायु की गति से चलता है और तीव्र वायु वेग पैदा कर सकता है।

नगीना- हाँ वही! वो तुझसे मिलने आ रहा है।

विषप्रिय- पर क्यों?

नगीना- तू भूल गया ना? आज तेरा अठारहवाँ जन्मदिन है और पूर्णिमा भी है। जब भी कोई इच्छाधारी नाग पूर्णिमा पर अपने जन्मदिवस पर राजदंड को हाथ में लेता है तो उसको सम्राट की सारी शक्तियां प्राप्त होती हैं। अब तू तो यहां पर आ नहीं सकता, तो मैंने राजदंड तेरे पास भिजवा दिया।

विषप्रिय- तो..तो राजदंड यहाँ आ रहा है, पर वायुनाग ने उसे कैसे उठा लिया?

नगीना- उठाया नहीं है, वो उसको एक लोहे के संदूक में बंद करके तेरे पास ला रहा है। तुझको वो संदूक आज रात को खोलकर राजदंड को अपने हाथ में लेना होगा और ऐसा करते ही तू नागद्वीप का अगला घोषित सम्राट होगा, यहाँ आते ही तेरा राज्याभिषेक भी कर देंगे। वायुनाग मानवरूप में है पर तू उसको पहचान लेगा क्योंकि वो पहुँचते ही तुझसे मानसिक संपर्क करेगा।

विषप्रिय- ठीक है माताश्री!

………………………………विषप्रिय और नगीना का मानसिक संपर्क टूट जाता है, कुछ समय बाद वायुनाग विषप्रिय से मानसिक संपर्क करके उसे महानगर बंदरगाह पर आने को कहता है। विषप्रिय महानगर बंदरगाह पर पहुँचता है जहाँ उसका इंतज़ार वायुनाग कर रहा होता है। वायुनाग उसे संदूक सौंप ही रहा होता है कि तभी अचानक बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट पहने कई लोग उनको घेर लेते हैं और एक आवाज़ आती है”फ्रीज़!” विषप्रिय और वायुनाग आश्चर्यचकित रह जाते हैं।

विषप्रिय पूछता है”कौन हो तुम लोग?”

तो उनमे से एक आदमी का जवाब आता है” हम लोग सरकार द्वारा गठित स्पेशल फ़ोर्स के मेंबर हैं जो ख़ास इच्छाधारी नागों को पकड़ने के लिए बनाई गयी है!”

विषप्रिय पूछता है” तुमको कैसे पता कि हम इच्छाधारी नाग हैं?”

तभी एकदम से वो सारे लोग हटकर एक लंबे , पतली मूंछों वाले व्यक्ति को रास्ता देते हैं जो विषप्रिय को देखकर मुस्कुराता है और कहता है” मेरा नाम है नागमणि! मैं सरकार के साथ मिलकर इच्छाधारियों का खतरा मिटाने के लिए प्रतिबद्ध हूँ, मैंने एक ऐसा यन्त्र बनाया है जिससे कि इस शहर में कहीं भी इच्छाधारी नाग का पता लगाया जा सकता है। इस यन्त्र को बनाने के लिए हमने उन इच्छाधारी लुटेरों के DNA की मदद ली जो बैंक लूटने गए थे। ये यन्त्र 100 फ़ीट की दूरी तक खड़े हर इच्छाधारी नाग को भांप सकता है, मैंने सोचा कि महानगर बंदरगाह पर ये ट्रायल लेके देखते हैं क्योंकि यहाँ पर इच्छाधारियों की गतिविधियाँ काफी देखने सुनने में आ रहीं थी और मेरी किस्मत देखो कि तुम दोनों नाग मुझे यहाँ मिल गए।”

विषप्रिय- तो तुम हम लोगों को इन बन्दूकों से मारोगे?

नागमणि- ये एंटी वेनॉम गन है जो तुम्हारे ज़हर को पानी बना सकती है, पर इसका प्रयोग मैं तुम पर नहीं करूंगा अगर तुम सरकार का सहयोग करो।

विषप्रिय- वो कैसे?

नागमणि(कुटिल मुस्कान के साथ)- मेरी लैब में चलकर मेरे टेस्ट सब्जेक्ट बनो। तुम लोगों पर प्रयोग करके मैं तुम इच्छाधारियों के बारे में और पता करूंगा।

वायुनाग- बस बहुत हुआ! ना तो तुम मानवों को हम पर प्रयोग करने का अवसर मिलेगा और ना ही ये अस्त्र प्रयोग करने का।

…………………………………इतना बोलते ही वायुनाग अपने असली रूप में आकर अपने हाथों से बवंडर पैदा करने लगता है और पूरी फ़ोर्स और नागमणि के पैर उखड़ जाते हैं।

नागमणि(चिल्लाकर)- अब..तुम्हारी बारी है नागदंत!

Nagdant In earth 61 comic haveli
Nagdant

…………………………………नागमणि के इतना बोलते ही एक हरे शल्कों में ढका हुआ युवक एकदम से प्रकट होता है और विषप्रिय और वायुनाग को सर्प रस्सी से बाँध देता है।उसको देखकर सबसे अधिक विषप्रिय को हैरानी होती है।

विषप्रिय- ये तो नागराज की तरह दिखता है!

नागमणि- ये है मेरा एक और आविष्कार तुम इच्छाधारियों से निपटने के लिए…मेरा बेटा.. नागदंत!

…………………………….तभी नागदंत खुद एक एंटी वेनॉम गन उठाकर एक के बाद एक कई इंजेक्शननुमा गोलियां विषप्रिय और वायुनाग के शरीर के पार कर देता है। दोनों के शरीर धरती पर गिर पड़ते हैं। नागमणि पास जाकर नब्ज़ चेक करके देखता है।

नागमणि- ये..ये दोनों तो मर गए! मैं तो सिर्फ प्रयोग करना चाह रहा था पर ये तो..उफ्फ.. अब इच्छाधारी समुदाय हमारा दुश्मन बन  जायेगा।

…………………………….फिर वो संदूक की तरफ मुड़ता है।

नागमणि- हुम्म! इसमें ज़रूर कुछ काम की चीज़ होगी, इसको उठाकर लैब में ले चलो नागदंत! और बाकि फ़ोर्स के लोगों…..इन दोनों की डेडबॉडी भी लैब में ले आओ। 

अगले दिन भारती और नागराज का सामना कॉलेज कैंपस के बाहर होता है।

नागराज- अरे भारती! क्लासेज तो अब ख़त्म हो गयीं! तुम यहाँ पर..

भारती- तुम शायद भूल रहे हो कि मैं इस शिक्षाधाम के मालिक की पोती हूँ राज, कॉलेज के किसी काम से आई हूँ।

नागराज(राज)- चलो अच्छा है, आओ कैंटीन पर चलकर चाय पीते हैं, बाकी लोग भी वही पर हैं।

भारती- न..नहीं, तुम जाओ! मुझे थोड़ा काम है, और हाँ..बधाई हो।

नागराज- किस बात की?

भारती- सुना है कि कॉलेज ख़त्म होते होते तुम्हे अपना प्यार मिल गया?

नागराज-तुमको ये बात विसर्पी ने बता दी?

भारती- हम दोनों बेस्ट फ्रेंड्स हैं, आपस में कुछ भी छुपाना मुश्किल है, और वैसे भी कॉमिक हवेली वाले मुझे पहले ही सब बता देते हैं , अच्छा अब मैं चलती हूँ।

……………………………..यह बोलकर भारती चली जाती है।

नागराज- अब इसे क्या हो गया? बड़ा अजीब सा बर्ताव कर रही है।

……………………तभी विसर्पी घबराती हुई नागराज के पास पहुँचती है।

विसर्पी- नागराज!

नागराज- अरे क्या हुआ विसर्पी? इतनी घबराई हुई क्यों हो?

विसर्पी- वो..विषप्रिय का कल से कुछ पता नहीं है!

नागराज- वो यहीं आसपास होगा!

विसर्पी- मैंने उसके हॉस्टल जाकर पुछा था, वो कल रात से गायब है।

नागराज- तुम चिंता मत करो, मैं और पंचनाग पूरा शिक्षाधाम  छान मारेंगे।

………………………….नागराज पंचनागों से संपर्क करता है और वो लोग शिक्षधाम के आसपास हर संभव जगह देखते हैं। नागराज को भी चिंता होने लगती है, वो नागू से मानसिक संपर्क करता है और उसे कॉलेज में बुलाता है।

नागू- अरे भैया, सुबह सुबह क्या करने बुला लिया?

नागराज- नागू, क्या तुम अपनी मणि के बल पर किसी भी इच्छाधारी नाग को ढूंढ सकते हो?

नागू- कोशिश कर सकता हूँ, क्यों क्या हुआ?

नागराज- विषप्रिय की लोकेशन का पता लगाओ।

नागू- यार तुम लोग तो काफी सीरियस लग रहे हो, ठीक है मैं प्रयास करूंगा।

………………………………नागू और बाकी लोग एक एकांत स्थान पर जाते हैं जहां नागू असली रूप में आकर ध्यान लगाकर बैठ जाता है। वो लगभग पांच मिनट ध्यान की अवस्था में बैठा होता है, उसके बाद वो आँखें खोलता है और बहुत गंभीर हो जाता है।

नागराज- क्या हुआ नागू?

नागू- वो..विषप्रिय के जो संकेत हैं , वो एक बेहद गुप्त सरकारी प्रयोगशाला से आ रहे हैं।

नागराज- क्या? तो मुझे उस स्थान का पता बताओ।

नागू- वहाँ घुसना इतना आसान नहीं होगा क्योंकि उस जगह पर प्रतिरोधी दल का पहरा है।

विसर्पी- प्रतिरोधी दल?

नागू- ये एक स्पेशल फ़ोर्स है जिसे सरकार ने इच्छाधारी नागों से लड़ने के लिए बनाया है।इन सबके पास प्रोफेसर नागमणि द्वारा बनाई गयी एंटी वेनॉम गन होगी।

नागराज- तो मैं अकेला जाऊंगा, मेरे अंदर कालजयी विष है जिसपर एंटी वेनॉम आम विष के मुकाबले धीरे असर करेगा।

सिंहनाग- अरे हद है यार, तुमको पता नहीं क्यों हर जगह अकेले जाना होता है। बैंक लुटेरों से भिड़ने तुम अकेले जाओगे, विद्रोहियों से मिलने के लिए सबको बाहर खड़ा करके गुफा में अकेले जाओगे और अब यहाँ भी अकेले?

नागराज- यहाँ अकेले जाने से मुझे कोई मत रोकना क्योंकि तुम लोग एंटी वेनॉम गन के सामने नहीं टिक पाओगे और हमारी मुश्किलें बढ़ जाएंगी!

नागदेव- ठीक है, तुम अकेले जाओ पर विषप्रिय को साथ लेकर आना।

नागराज- एक तो हमारी मुसीबतें पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रही हैं, पहले वो नागपाशा का चक्कर और अब ये। पता नहीं ये विषप्रिय कहाँ फंस गया? अब मैं जा रहा हूँ विषप्रिय को लेने, उम्मीद करो कि कोई बड़ा संकट ना आ जाये।

………………………………..फिर नागराज नागू से पता जानकर नाग रस्सी पर लहराता हुआ निकल जाता है। वो जल्द ही उस सरकारी रिसर्च सेंटर पर पहुँचता है। बाहर बहुत ही तगड़ी सुरक्षा का इंतज़ाम होता है, सुरक्षा बल के लोग हाथ में एंटी वेनॉम गन पकड़े खड़े होते हैं। नागराज बिना ध्यान दिए कदम आगे बढ़ाता है और उसके पैर एक तार से टकराते हैं जिससे अलार्म बजने लगता है। सब लोग चौकन्ने हो जाते हैं, नागराज उनकी नज़र में आ जाता है, वे गन का प्रयोग करते हैं पर नागराज बचता हुआ बड़ी फुर्ती से सब पर वार करके बेहोश कर देता हैऔर नाग रस्सी का प्रयोग करके उनको बाँध देता है। फिर वो अंदर जाता है, अंदर का दरवाजा बेहद मोटी धातु का बना होता है। नागराज नागफनी सर्पों को अपनी कलाइयों पर बांधता है और कुछ ही मुक्के के प्रहारों से उस गेट को गिरा देता है। सामने प्रोफेसर नागमणि खड़ा होता है, जो नागराज को देखकर बेहद आश्चर्यचकित रह जाता है। नागराज उसके पास पहुँचता है और उसकी गर्दन पकड़ लेता है।

नागराज- तुमने हमारे साथी विषप्रिय को पकड़ा था, कहाँ है वो?

नागमणि- तुम तो…हूबहू..

…………………………..तभी नागराज को पीछे से  एक लात पड़ती है और वो गिर पड़ता है, जब वो उठकर देखता है तो हैरान हो जाता है।

नागदंत- मेरा नाम है नागदंत और तू तो बिल्कुल मेरे जैसा है, ये क्या है पिताजी? ये आखिर कैसे संभव है?

नागमणि- मुझे लगता है कि ये भी एक मानव नाग है तुम्हारी तरह।

नागराज- तो..ये एक मानव नाग है?

नागमणि- सालों पहले हमारे घर में एक चोर घुस आया, तब मेरी गर्भवती बीवी घर में अकेली थी। चोर के आने पर वो घबराई नहीं बल्कि एक लोहे की छड़ उठाकर उसका सामना करने की ठानी पर उसे क्या पता था कि वो चोर असल में एक इच्छाधारी नाग है।उस नाग ने मेरी बीवी को काट लिया, जब मैं घर पहुंचा तब मेरी बीवी अंतिम सांसें गिन रही थी, उसने मुझे बताया कि क्या हुआ और तभी उसने अपनी अंतिम सांस ली और तभी से मैंने प्रण किया कि अब इस दुनिया में ये तो इच्छाधारी रहेंगे या मानव। मेरी बीवी के लिये कोई उम्मीद नहीं थी पर मेरे बच्चे के लिए थी, मैंने तरह तरह के शोध करके अपने बच्चे को बचाने का तरीका निकाल लिया। बच्चा बच तो गया पर ज़हर के कारण उसके अंदर सूक्ष्म सर्पों का संचार होने लगा, और इस तरह दुनिया को मिला…नागदंत।

नागदंत- और तू जानना चाहता था ना कि तेरे दोस्त कहाँ हैं, ये देख।

……………………….नागदंत एक बटन दबाता है और एक विशाल चैम्बर का दरवाज़ा खुलता है जिसके अंदर विषप्रिय और वायुनाग की लाशें होती हैं। लाशें देखकर नागराज की आँखों में खून उतर आता है और सीने के भीतर दबा हुआ एक ज्वालामुखी अब फट पड़ता है।

नागराज(चिल्लाते हुए)- नहीं!……

क्रमशः

  • कैसे निपटेगा नागराज अकेला नागमणि और नागदंत से?
  • आखिर क्या हुआ राजदंड का जिसे नागमणि उठा लाया था?
  • क्या भारत सरकार पर नागमणि का भेद खुल सकेगा?
  • विषप्रिय और वायुनाग के शव क्या अपनी मातृभूमि पहुच पाएंगे ?
  • नगीना आखिर क्यूँ सौतेला बर्ताव कर रही है अपनी पुत्री के साथ? 

इन्ही सब प्रश्नों के जवाब लेकर आएगा आगामी भाग |

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Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli 

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3 Comments on “Earth 61 Part – 5 ( Nagmani Aagman )”

  1. Story bahut hi romanchak mod par hai.
    Vishpriy ki to kismat hi khrab hai.
    RC ki storylines me bhi mrityu ko prapt hua aur yaha bhi
    But har ek ka introduction mast tarike se kar rahe hain.
    Ye solo series sahi ja rahi hai but ek bar mujhe aisa laga k nagraj ko dhruv se sampark karna chahiye tha, kyun ki villains k pas anti venom guns hain. Jinse dhruv sabse behtar tarike se nipat sakta tha.
    Nagraj ko underestimate nahi kar raha but akela anti venom guns and special force k against, nagdant aur nagmani k against, ye kuch jyada hi ho jayega kyun abhi wo kishore hi hai.
    Well ye meri thoughts hai
    Writers know better obviously
    Warna humlog itne interest se padhte kaise
    All the best for the next part
    Asha hai isi regularity se aayegi

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