Earth – 61 Part 6 (Ghar Wapasi)

EARTH-61

PART 6.

( Ghar Wapasi )

नागराज की आँखों में खून उतर आता है। दो मिनट सन्नाटा छाया होता है, पर फिर नागराज की एक धीमी आवाज़ गूंजती है।

नागराज- तुमने..इनको मार डाला?

नागमणि- देखो, ये हमने जानबूझ कर नहीं किया है, इतना तो तुम अब तक समझ ही गए होंगे। मैं तो इन पर अपने टेस्ट करना चाहता था पर ये लोग ही पहले हाथापाई पर उतर आये।

नागदंत- और इतना तो तुमको देखकर अब हम समझ ही गए हैं कि तुम भी मेरी तरह एक मानव नाग हो। तुम्हारे अंदर किस प्रकार का ज़हर है ये मुझे नहीं पता पर हो तो तुम एक इंसान। ये इच्छाधारी तुम्हारे सगे नहीं हैं, इनके साथ रहोगे तो तुम भी मारे जाओगे। हमारे साथ मिलकर काम करो और इनका सफाया करवाओ।

नागराज- जब मैं एक नवजात बालक था तब मुझमें विष का संचार होने के कारण मैं बेहोश था, तब मुझे किसी मानव ने नहीं बल्कि इन इच्छाधारी नागों ने ही बचाया था। वो चाहते तो मुझे मानव का बच्चा समझकर मरने के लिए छोड़ देते पर उन्होंने ऐसा नहीं किया, यही फर्क है हम लोगों में और उनमें। अधिकाँश इच्छाधारी नाग कभी मानवों को नुक्सान नहीं पहुंचाना चाहते पर तुम लोग फिर भी उनसे डरते हो, तुम हर उस चीज़ से डरते हो जो तुमको अपने से अलग लगती है पर मैं इन लोगों का साथ कभी नहीं छोड़ सकता।

नागदंत- तो फिर इनकी तरह तुम भी मरोगे, तुमने ये तो नहीं समझ लिया ना कि इनकी लाशें देखने के बाद हम तुमको ज़िंदा वापस लौटने देंगे।

……………………………….यह बोलते ही नागमणि एंटी वेनॉम गन उठाकर नागराज की तरफ फायर करता है, नागराज इस अचानक वार के लिए तैयार नहीं होता और लाख बचने के बावजूद एक गोली उसके शरीर में घुस जाती है जिससे वो विचलित हो जाता है। नागदंत बिना एक सेकंड गँवाए नागराज को सर्प रस्सी से बाँध देता है।

नागमणि- हा..हा..तुझे मेरा ऑफर मान लेना चाहिए था।

…………………………………..नागराज बेहद क्रोधित हो जाता है और एक झटके से नाग रस्सी को तोड़ देता है। ये देखकर नागमणि और नागदंत हैरान हो जाते हैं।

नागराज(हाँफते हुए)- हम्फ..मैं तुमको बताना भूल गया कि मेरे अंदर इस धरती का विष नहीं है, तो इस एंटी वेनॉम गन का असर मेरे सूक्ष्म सर्प कुछ ही पलों में ख़त्म कर देंगे।

नागदंत- पर उन कुछ पलों में मैं तुझको पीट पीटकर ख़त्म कर दूंगा।

………………………नागदंत अपना घूँसा नागराज की तरफ लहराता है पर नागराज बचकर उस पर ज़ोरदार प्रचंड वार करता है। नागमणि को ये देखकर बेहद आश्चर्य होता है।

नागमणि- आम इच्छाधारी सर्प तो एंटी वेनॉम गन का वार संभाल ही नहीं पाता पर ये ना सिर्फ खड़ा है बल्कि नागदंत से लड़ भी पा रहा है। मुझे इस पर फिर से एंटी वेनॉम गन का प्रयोग..अरे! इस गन की गोलियां तो ख़त्म हो गयी हैं,मुझे दूसरी गन उठानी होगी।

……………………………….नागमणि दूसरी गन की तरफ लपकता है पर नागराज उस पर अपने नाग फेंक कर उसे बाँध देता है। नागदंत फिर से नागराज पर वार करने की कोशिश करता है पर इस बार नागराज पूरी तरह गन के असर से मुक्त हो चुका होता है, वो ज़ोरदार मुष्ठि प्रहार करके नागदंत के होश छीन लेता है।

नागमणि- मैंने..कभी ऐसी शक्ति का नमूना नहीं देखा! तुम्हारे अंदर जो भी विष है, वो तुमको बहुत शक्तिशाली बना रहा है और अभी तो तुम सिर्फ एक किशोर हो, आगे के समय में जब तुम एक युवा बनोगे तब सोचो तुम्हारी शक्तियां क्या होंगी! तुम मानवता के लिए बहुत कुछ…..

नागराज(चिल्लाकर)- भाड़ में जाए मानवता! मैंने हमेशा से यह प्रयत्न किया कि किसी प्रकार से मैं कुछ ऐसा कर दूं कि मानव और इच्छाधारी सर्पों के बीच की ये दीवार ख़त्म हो जाये पर सच्चाई तो ये है कि तुम लोग हमेशा डरते रहोगे इसलिए अब मैं भी अब ये प्रयास करूंगा कि तुम मानव कभी इच्छाधारी नागों का अहित ना कर पाओ।

………………………………..तभी नागराज की नज़र लोहे के संदूक पर पड़ती है, वो उसे खोलकर देखता है तो उसके अंदर राजदंड होता है। नागराज को ज़बरदस्त झटका लगता है।

नागराज- ये..ये तो राजदंड है! इसका मतलब ये हुआ कि.. हे भगवान्! तुम लोगों को अंदाजा भी है कि तुमने क्या किया है? तुमने नागद्वीप से उसका भावी राजा छीन लिया है।

नागमणि- नागद्वीप क्या है?

नागराज- तुमको ये जानने की ज़रुरत नहीं..बल्कि आज के बाद तुमको कुछ भी जानने की ज़रुरत नहीं!

नागमणि- ये..तुम क्या कह रहे हो?

नागराज- मैं विषप्रिय और वायुनाग के शव और ये संदूक यहाँ से लेकर जा रहा हूँ और जाते जाते धरती में अपने कुछ सूक्ष्म सर्प भी छोड़ रहा हूँ जो धरती को खोखला करके इस पूरी इमारत को गिरा देंगे। अब तुम्हारी और तुम्हारे बेटे की किस्मत भगवान् भरोसे है।

नागमणि- एक मिनट..तुम..तुम कहाँ जा रहे हो? रु..रुक जाओ!

…………………………………नागमणि के चिल्लाने का नागराज पर कोई असर नहीं पड़ता। वो विषप्रिय और वायुनाग के शवों को अपने कंधे पर डालकर और लोहे का संदूक हाथ में पकड़कर वहां से चल देता है। कुछ समय बाद पूरी की पूरी इमारत ढह जाती है। रात के समय भारती विसर्पी को फोन करके हॉस्टल के बाहर बुलाती है।

विसर्पी- अरे! इतनी रात गए तुम यहाँ पर क्या कर रही हो?

भारती- कुछ ज़रूरी काम था।

विसर्पी- बोलो।

भारती- मुझे तुमको एक ज़रूरी बात बतानी है।

विसर्पी- क्या?

भारती- मैं नागराज से प्यार करती हूँ।

विसर्पी- य..ये तुम क्या कह रही हो!

भारती- हाँ, ये सच है। मैं जानती हूँ कि तुम और नागराज आपस में कितना प्यार करते हो। वादा करो कि ये बात तुम नागराज को नहीं बताओगी।

विसर्पी- ये तुम क्या..उफ्फ! अभी मेरा दिमाग बिल्कुल काम नहीं कर रहा है भारती। हम इस बारे में फिर कभी बात करेंगे।

भारती- तुम बहुत परेशान लग रही हो, क्या हुआ?

विसर्पी- विषप्रिय मुसीबत में फंस गया है, नागराज उसी को ढूँढने गया है।

……………………………..तभी आकाश में विसर्पी को कुछ नज़र आता है। नागराज सर्प रस्सी पर लहराता हुआ विषप्रिय, वायुनाग के शव और लोहे का संदूक ला रहा होता है।

भारती- ये क्या?

नागराज- विसर्पी वो..

विसर्पी(बिना कुछ सुने विषप्रिय के शव के पास जाती है)- ये विषप्रिय को क्या हुआ नागराज? क्या ये बीमार है?

……………………………..नागराज सर झुकाकर खड़ा हो जाता है, भारती मुंह पर हाथ रखकर रोने लगती है। तब तक पंचनाग और नागू भी आ जाते हैं जिनको नागराज ने ही मानसिक संपर्क करके बुलाया होता है।

विसर्पी- बोलो ना नागराज! आखिर क्या हुआ है विषप्रिय को? ये ऐसे शांत क्यों पड़ा हुआ है?

नागराज- ये मानवों की चाल का शिकार हो गया।

…………………………पंचनाग और नागू की आँखों में भी आंसू आ जाते हैं। विसर्पी फुट फुट कर रोने लगती है। नागराज भारती की तरफ देखता है।

भारती- नागराज, मैं वो..

नागराज- फिलहाल यहाँ से जाओ भारती, ये सही समय नहीं है।

भारती- पर विसर्पी मेरी दोस्त है।

नागराज- इतने समय में मुझे समझ में आ चुका है कि यहाँ कोई मानव इच्छाधारियों का दोस्त नहीं हो सकता।

………………………यह सुनकर भारती आँखों में आंसू लिए वहाँ से चली जाती है।

नागू- इतनी देर में टीवी पर न्यूज़ भी आने लगी कि एक गवर्नमेंट रिसर्च सेंटर को एक इच्छाधारी ने मलबे में बदल दिया। आखिर तुम क्या करके आ रहे हो नागराज?

नागराज- कुछ लोगों को उनकी करनी का सबक देकर आ रहा हूँ।

नागू- पर तुम तो किसी की भी जान लेने के खिलाफ थे।

नागराज- तो अब ये जान लो कि जिस नागराज को तुम इतने समय से जानते हो मैं वो नहीं हूँ, विषप्रिय के साथ एक हिस्सा मेरा भी मर चुका है।

सिंहनाग- अब हम क्या करेंगे? इस घटना के बाद तो लोग और ज़्यादा हाथ धोकर हमारे पीछे पड़ जायेंगे।

नागराज- इसमें चिंता करने जैसी कोई भी बात नहीं है। हम आज ही नागद्वीप के लिए निकल जायेंगे। वैसे भी बस रिजल्ट आना ही बाकी था, शिक्षा तो पूरी हो ही चुकी है।

नागार्जुन- पर वापस नागद्वीप जाने का इंतज़ाम कैसे होगा?

नागू- उसकी फ़िक्र मत करो। महानगर बंदरगाह पर नाव के काफी सारे पार्ट्स पड़े होंगे। अपनी मन्त्र शक्ति से मैं उनको जोड़कर एक स्वचालित नाव तैयार कर दूंगा जो तुमको नागद्वीप पहुंचा देगी।

नागराज- ठीक है, तो सारा सामान ले लो पंचनागों, फिर हम नागद्वीप के लिए रवाना होंगे..विषप्रिय और वायुनाग के शवों के साथ।

…………………………….दूसरी तरफ इस घटना की खबर मिलते ही लोगों में असुरक्षा और भय फ़ैल जाता है।सब लोग उस नाग को पकड़ने की मांग करते हैं जिसने रिसर्च सेंटर को तबाह किया। इसको देखते हुए सरकार राजनगर से एक प्रशिक्षित प्रतिरोधी दल को महानगर भेजती है जिसको लीड कर रहे होता है राजनगर पुलिस का सबसे खतरनाक पुलिस वाला …..इंस्पेक्टर अमर और उसके साथ उसका वैज्ञानिक दोस्त डॉक्टर अनीस रज़ा।

अनीस- यार कितना टाइम लगेगा महानगर पहुँचने में ?

अमर- मुझे क्या पता? वैन के ड्राईवर से पूछ।

ड्राईवर- लो जी, बस आ गया महानगर!

अनीस- पर अब हमको करना क्या है?

अमर- हमारी टीम को एंटी वेनॉम गन के साथ हर उस संवेदनशील एरिया में जाना है जहां इच्छाधारियों के मिलने के चांसेस हैं। खासकर कि मुझे और तुझे कुछ लोगों को साथ में लेकर महानगर बंदरगाह जाना है क्योंकि वहीँ पर सबसे अधिक इच्छाधारियों की गतिविधियों को नोट किया गया है।

अनीस- ओह! चलो ठीक है, पर मुझे इस मरने मारने के काम पर क्यों लगा दिया? मैं तो एक वैज्ञानिक हूँ यार!

अमर- तभी तो! तूने उस नागमणि के साथ मिलकर इन गन्स का आविष्कार किया था। तुझसे ज़्यादा इन गन्स के बारे में सिर्फ नागमणि को पता था पर अब उसका ही कोई पता नहीं है।

अनीस- हाँ, तबसे नागमणि की कोई खबर नहीं आई! मुझे तो किसी अनिष्ट की आशंका है।

अमर- चलो अब बंदरगाह पर चलकर देखते हैं, शायद कुछ हाथ लगे।

………………………….नागराज, विसर्पी और पंचनाग बंदरगाह पर पहुँचते हैं और नागू मणि की शक्ति से उनके लिए नाव तैयार करता है।

नागराज- बहुत बहुत धन्यवाद् नागू! तुमने हम लोगों के लिए बहुत किया है, पर मैं तुमको भी हमारे साथ चलने का सुझाव दूंगा। यहाँ हम लोगों के लिए कुछ नहीं रखा।

नागू- फिलहाल तो नहीं आ सकता। पर तुम्हारे सुझाव पर विचार अवश्य करूंगा।

……………………………..तभी बंदरगाह पर अमर और अनीस अपनी टीम के साथ पहुँचते हैं।

अमर- रुक जाओ! कोई अपनी जगह से नहीं हिलेगा, पहले हमें पता करना है कि तुम लोग इच्छाधारी सांप हो या नहीं।

नागराज- लगता है ये लोग बंदरगाह पर ही घात लगाकर बैठे रहते हैं! मुझे समझ जाना चाहिए था कि बंदरगाह का रास्ता सेफ नहीं है।

अमर- हमें तुम लोगो की तलाशी लेनी होगी।

नागराज- उसकी ज़रुरत नहीं पड़ेगी।

………………………….नागराज का इशारा समझकर पंचनाग और नागू अपने असली रूप में आ जाते हैं। अमर और अनीस समेत सभी फ़ोर्स वालों के होश उड़ जाते हैं।

अमर- फ..फ्रीज़!

सिंहनाग- कमाल का जज़्बा है तेरे अंदर, मुझे देखकर अभी तक भागा नहीं!

अमर- तुम लोग सरेंडर कर दो! रिसर्च सेंटर को तबाह करने के जुर्म में मैं तुम सबको गिरफ्तार करता हूँ।

नागराज(विषप्रिय की तरफ इशारा करते हुए)- ये होता है तुम्हारे रिसर्च सेंटर में! निर्दोष इच्छाधारियों की जान ली जाती है!

अमर- मैं सिर्फ अपना काम कर रहा हूँ, तुम लोग शांति से मेरे साथ चलो और सरकार से इस बारे में बात करो।

नागदेव- अब इसके लिए बहुत देर हो चुकी है।

………………………………तभी फ़ोर्स का एक आदमी नागदेव पर एंटी वेनॉम गन का वार करता है जिससे वो बेहोश हो जाता है। ये देखकर नागराज की आँखों में खून उतर आता है, वो ध्वंसक सर्प का प्रयोग उस आदमी पर करता है।अमर ऐन वक्त पर उस आदमी को धक्का दे देता है पर खुद को धमाके की चपेट में आने से नहीं बचा पाता।

अनीस- नहीं! अमर!

………………………………नागराज एकदम से हकबका जाता है तभी नागू चिल्लाता है।

नागू- तुरंत सब नाव में बैठो! मैं उतनी देर इनको रोकता हूँ।

…………………………………….नागार्जुन नागदेव के बेहोश शरीर को उठाकर नाव में कूदता है। नागराज भी विषप्रिय और वायुनाग के शरीर को उठाकर नाव में जाता है और विसर्पी को लोहे का संदूक पकड़ा देता है। सब लोग नागू से विदा लेकर निकल पड़ते हैं नागद्वीप की ओर। उधर फ़ोर्स के लोग नागू को पकड़ने का प्रयास करते हैं पर नहीं पकड़ पाते क्योंकि वो तब तक मणि की शक्ति द्वारा अदृश्य हो चुका होता है। अनीस अमर को लेकर तुरंत हॉस्पिटल की ओर भागता है। वो अमर को हॉस्पिटल में भर्ती करवाता है, कुछ समय बाद डॉक्टर गुप्ता अनीस के पास आते हैं।

डॉक्टर गुप्ता- सिचुएशन थोड़ी क्रिटिकल थी अनीस जी पर अब अमर खतरे से बाहर हैं, लेकिन..

अनीस- लेकिन क्या डॉक्टर?

डॉक्टर गुप्ता- ब्लास्ट का कुछ हद तक अमर के नर्वस सिस्टम पर भी हुआ है जिससे उसके शरीर के बाकि हिस्से पैरालिसिस के शिकार हो गए हैं..शायद ज़िन्दगी भर के लिए! आप चाहें तो अभी अमर से मिल सकते हैं।

………………………………….अनीस अमर से मिलने कमरे के अंदर जाता है।

अनीस- वो डॉक्टर बोल रहे थे कि…

अमर- पता है! धड़ के नीचे का मेरा पूरा शरीर बेकार हो गया है। अब मैं अपने देश की और सेवा नहीं कर सकता..एक इच्छाधारी की वजह से!

अनीस- काश कि मैं तुमको ठीक कर पाता!

अमर- तुम कर सकते हो।

अनीस- वो कैसे?

अमर- याद है कि तुमने मुझे अपने यांत्रिक मानव वाले आविष्कार के बारे में बताया था, जिसके लिए तुमको ऐसे लोग चाहिए थे जो खुद volunteer करके खुद पर प्रयोग करवाएं। जब तुमको ऐसे लोग नहीं मिले तो वो प्रोजेक्ट बंद करना पड़ा।

अनीस- तो?

अमर- तो मैं खुद पर प्रयोग के लिए तैयार हूँ!

अनीस- तुम पागल तो नहीं हो गए हो! जो तुम कह रहे हो उसका मतलब समझते हो! पूरी ज़िन्दगी एक रोबोट की तरह बिताना!

अमर- पूरी ज़िन्दगी एक बिस्तर पर बिताने से तो अच्छा ही आप्शन है। प्लीज अनीस, अपने दोस्त की ये एक बात मान लो।

…………………………………अनीस हारकर अपनी स्वीकृति हल्के से सर हिलाकर देता है। दूसरी तरफ नागराज समेत सब लोग नाव में बैठकर नागद्वीप की तरफ बढ़ रहे होते हैं। विसर्पी सबसे अलग एक कोने में बैठी होती है।

नागप्रेती- विसर्पी बहुत समय से कुछ बोली नहीं !

नागराज- विषप्रिय की मौत ने हम लोगों को भी हिलाकर रख दिया है, उसका तो वो भाई था। उस पर जो गुज़र रही है वो हम लोग सोच भी नहीं सकते।

……..…………फिर नागराज कुछ सोचकर विसर्पी के पास जाकर बैठ जाता है।

विसर्पी- जानते हो, ये बचपन में बहुत ज़िद्दी था और हमेशा मुझे चिढ़ाया करता था। इस चक्कर में कई बार पिताजी से पिट भी गया था पर फिर भी नहीं मानता था। यकीन नहीं होता कि ये आज मुझे छोड़कर चला गया है। वायुनाग माताजी मुख्य अंगरक्षक था, इसे भी मैं अपने बड़े भाई जैसा मानती थी। तुम तो मुझे छोड़कर कभी नहीं जाओगे ना..?

नागराज- कभी नहीं! वादा करता हूँ तुमसे! अच्छा ये वायुनाग यहाँ विषप्रिय को राजदंड सौंपने आया था। ऐसी क्या बात हो गयी कि राजपरिवार ने राजदंड बाहरी दुनिया में भिजवा दिया?

विसर्पी- ये एक मान्यता है कि राजपरिवार के सदस्य को अपने अट्ठारहवें जन्मदिन के चार दिन के अंदर अंदर राजदंड को अपने हाथों में लेना होगा, तभी उसे सम्राट की शक्तियां मिलेंगी।

नागराज- तो तुम और विषप्रिय एक ही दिन पैदा हुए हो, इसका मतलब कि अभी तुम भी राजदंड को अपने हाथ में ले सकती हो और सम्राज्ञी बन सकती हो।

विसर्पी- क्या! नहीं नागराज, ये राजदंड विषप्रिय के लिए भेज गया था..मैं कैसे..

नागराज- अब नागद्वीप वालों के पास क्या विकल्प रह जाता है? तुम मुझे बताओ। हमारे पास समय नहीं है विसर्पी, तुमको ये फैसला अभी इसी नाव में करना होगा।

…………………………..विसर्पी एक नज़र लोहे के उस संदूक पर मारती है। फिर वो खड़ी होती है और संदूक को खोलती है, अंदर राजदंड चमक रहा होता है। वो राजदंड को उठाती है, राजदंड के उठते ही विसर्पी को अपने शरीर के अंदर एक ऊर्जा का संचार महसूस होता है। नागराज और पंचनाग घुटने के बल झुककर अपनी नयी सम्राज्ञी का स्वागत करते हैं। काफी समय बाद वो लोग नागद्वीप पहुँचते हैं, उनको लेने राजा मणिराज, रानी नगीना और कालदूत नागद्वीप के तट पर ही खड़े होते हैं। विसर्पी ने पहले ही मानसिक संपर्क द्वारा सबको विषप्रिय की मृत्यु से अवगत करा दिया होता है पर शव को सामने देखकर सबकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं।

मणिराज- अगर मुझे पता होता कि बाहरी दुनिया इतनी क्रूर है तो कभी अपने बेटे को नहीं भेजता।

कालदूत(नागराज की तरफ देखकर)- तुम लोग चार साल बाद वापस आये हो, इसलिए हमको तुम्हारा स्वागत करना चाहिए पर शायद ये समय ही ठीक नहीं है।

……………………………………..तभी नगीना विसर्पी के हाथ में राजदंड देखती है।

नगीना- ये..ये राजदंड तेरे हाथ में कैसे आया! ओह, अब समझी! तो तूने राजदंड के लालच में अपने भाई को मरवा दिया!

मणिराज- ये तुम क्या कह रही हो नगीना? जिव्हा को लगाम दो!

नगीना- चुप करो सब! अब तू मेरे हाथों से नहीं बचेगी संपोली!

……………………………..नगीना विसर्पी की गर्दन पर तंत्र वार करती है और उसकी गर्दन जकड़ लेती है। उसकी इस हरकत से कालदूत, मणिराज और बाकी सब दंग रह जाते हैं।

मणिराज- विसर्पी को छोड़ो! अन्यथा हमें तुमको मारना होगा।

…………………………………..पर नगीना उस समय बेटे की मौत से अर्धविक्षिप्त सी हो जाती है, वो विसर्पी की गर्दन नहीं छोड़ती। मजबूर होकर कालदूत को एक तंत्र वार करके विसर्पी की गर्दन छुड़वानी पड़ती है।

कालदूत- विषप्रिय की मौत से हम सब दुखी हैं, पर आखिर ये क्या तरीका हुआ नगीना?

मणिराज- अब इसने जो किया है, इसकी सजा तो इसे मिलेगी ही। मैं नागद्वीप का राजा होने के नाते अभी इसी वक्त नगीना को इस द्वीप से बेदखल करता हूँ।

नगीना- नहीं! मुझे मेरे बेटे की अंत्येष्टि में रहना है!

कालदूत- यही तेरी सजा है कि तू विषप्रिय की अंत्येष्टि अपनी आँखों से नहीं देख पायेगी!

……………………………….यह कहकर कालदूत एक आयामद्वार जैसा द्वार खोलते हैं और नगीना को उसमे धकेल देते हैं। जाते जाते भी नगीना चिल्लाती है

” मैं वापस आऊँगी और तुम सबके नाश का कारण बनूँगी, याद रखना।”

मणिराज- अपने उसे कहाँ भेज दिया ?

कालदूत- बाहरी दुनिया में कहीं पर भी हो सकती है।

मणिराज- अब हम विषप्रिय की अंत्येष्टि के बाद विसर्पी को सम्राज्ञी घोषित करके उसका राज्याभिषेक कर देंगे।

………………………………….यह सुनकर नागद्वीप की पूरी जनता विसर्पी की जय के नारे लगाती है। फिर सब लोग दुखी मन से विषप्रिय की अंत्येष्टि में शामिल होते हैं।

कालदूत- तो बताओ नागराज! बाहरी दुनिया का ये अनुभव कैसा रहा?

नागराज- मुझसे ना ही पूछें तो बेहतर होगा, मैं वापस उस दुनिया में नहीं जाना चाहता।

……………………………..कुछ दिनों बाद वेदाचार्य शिक्षाधाम में रिजल्ट घोषित हो जाते हैं। भारती चेक करने जाती है तो सबसे ऊपर नाम होता है..राज उर्फ़ नागराज का। उसकी आँखों में आंसू आ जाते हैं, जब वो पीछे मुड़ती है तो वेदाचार्य खड़े होते हैं।

वेदाचार्य- उसके जाने से दुखी हो?

भारती- जी दादाजी!

वेदाचार्य- चिंता मत करो, वो वापस आएगा।

भारती- मुझे नहीं लगता कि वो इस दुनिया में कभी फिर वापस आएगा।

वेदाचार्य(मुस्कुराकर)- अगर मैं एक सच्चा भविष्यवक्ता हूँ तो मेरी बात मानो…..वो वापस आएगा।उसे आना ही होगा।

Earth 61 Part – 5 ( Nagmani Aagman )

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli 

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5 Comments on “Earth – 61 Part 6 (Ghar Wapasi)”

  1. वाह वाह वाह बहुत ही उम्दा पार्ट रहा ।
    माफ़ कीजियेगा हर्षित जी पिछले पार्ट में रिव्यू नही दे सका व्यस्त रहने के कारण । तो अब इस पार्ट में शुरू करता हूँ ।

    ● सबसे पहले तो मैं यह कहना चाहूँगा की यह पार्ट बाकी पार्टस् से बहुत ज़्यादा अच्छा है, पिछले पार्ट में जो मेरी शिकायतें थीं वो इस पार्ट में दूर हो गयीं ।

    ● क्योंकि इस पार्ट में सबकुछ आराम से दिखाया गया है हड़बड़ी कहीं भी नज़र नही आई ।

    ● और जैसा की आपने वादा किया था की आगे के पार्ट्स में और भी सुपर हीरोज़ आएंगे, आप उस वादे को बखूबी निभा रहे हैं और हमें हर पार्ट में नया हीरो देखने को मिल रहा ।

    ● फिलहाल अभी अमर इंस्पेक्टर स्टील नही बना है पर जैसी इस पार्ट की स्टोरी थी मुझे लगता है आगे बहुत ज़्यादा मज़ा आने वाला ।

    ● बेचारे विषप्रिय की मौत देखकर दुःख हुआ।

    ● और एक मज़ेदार बात भारती ने अपने प्यार का इज़हार कर दिया पर विसर्पी के सामने हीहीही।

    ● अगले पार्ट का इंतज़ार है ।।।

  2. bahut hi badhiya kahani hai
    sare superheroes ki origin story ek sath dekhne ko mil rahi hai
    umeed hai agle parts me sab ek sath ayenge

  3. Really sad story it was
    Is puri series ko padh kar ek chiz pata chal rahi hai
    Ye earth 61 par bhi sath sath baki heroes ka udgam bhi ho raha hai jo nagraj ki main story k irdgird hi chal rahi hai
    Ye part apne aap me ek bahut hi mahattvapoorn part tha
    Isme nagina villain kaise bani, inspector steel ka janm kaise hua, visarpi kyun samragyee bani, nagmani, nagdant sab kuch alag tarike se dikhaya hai
    I’m very much attached to this story now
    Harshit ji bahut bahut badhai is story k liye
    Haveli ki neenw me ek bahut badi mahagatha ki eent thok di aapne

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