Earth 61 Part 7 (हरु सृष्टि )

EARTH-61

PART 7.

(हरु सृष्टि )

रिसर्च सेंटर वाली घटना को अब छह वर्ष बीत चुके हैं। लोग भी इच्छाधारियों को अब धीरे धीरे भूलने लगे हैं। न्यूज़ फ्लैश- नासा ने इस खबर को पुख्ता किया है कि पृथ्वी की तरफ एक बड़ा पुच्छल तारा एक तीव्र गति से बढ़ रहा है। इसकी गति बहुत तेज़ है जिससे ये वैज्ञानिकों ने ये अनुमान लगाया है कि ये आज या कल में धरती पर गिरेगा। कुछ बड़े वैज्ञानिकों का मानना है कि पुच्छल तारे का आकार बहुत छोटा है तो अगर ये धरती पर गिर भी जाता है तो कोई ख़ास नुक्सान नहीं करेगा। ……………………………………..इस न्यूज़ के ठीक एक दिन बाद पुच्छल तारा आकाश में नज़र आता है, उसी दिन फोटोग्राफर रमेश खन्ना राजस्थान के रेतीले भाग में न्यूज़ वालों की टीम के साथ होते हैं। कैमरामैन रवि उसके पास आता है।

रवि- अरे रमेश! तू इधर क्या करने आया है?

रमेश- जो तू इधर अपने न्यूज़ चैनल की टीम के साथ करने आया है।

रवि- अरे यार! मुझे लग ही रहा था कि पुच्छल तारे का सबसे बढ़िया व्यू यहीं से मिलेगा! और अब देखो! हर आदमी इसी जगह से पुच्छल तारे का लाइव कवरेज लेने आ गया। तू भी फ़ोटो लेने आ गया..चल अब ये तो बता दे कि किस अखबार को देगा ये फ़ोटो?

रमेश- मैं तो फ्रीलांसर हूँ भाई! जो भी अपने को ज़्यादा दाम देगा..सारी तसवीरें उसी की वैसे फ़िलहाल हवेली से वालो से बात चल रही है !

रवि- हा..हा..चलो अच्छा है। अरे ये देख आसमान में क्या चमक रहा है?

रमेश- ये..ये तो पुच्छल तारा है! चलो अच्छा रहा कि कैमरा मैंने पहले ही सेट कर लिया था। चलो काम पर लगते हैं।

……………………………….पर पुच्छल तारा अविश्वसनीय तरीके से धीमी गति से चलने लगा और उसके बाद धीरे धीरे रेतीली ज़मीन पर उतर गया। वहाँ न्यूज़ के लोग और रमेश खन्ना के साथ नासा के कुछ लोग भी मौजूद थे जो पुच्छल तारे की इस हरकत पर चौंक गए।

रवि- ये क्या हुआ? एक पल को ऐसा लगा कि इस तारे में जान है।

रमेश- ये धरती पर तेज़ी से गिरने के बजाय धीरे से उतरा, ये भला कैसे संभव है?

…………………………….. नासा के उस छोटे से ग्रुप को लीड कर रहे थे भारतीय मूल के हेड साइंटिस्ट विपिन मिश्रा।उनका असिस्टेंट उनके पास एक यन्त्र लेकर आया।

विपिन- तुम्हारे चेहरे का रंग क्यों उड़ा हुआ है, जैसे तुमने कोई भूत देख लिया?

असिस्टेंट- सर! बात ये है कि हमने ये जो यन्त्र बनाया है वो सूर्य तक की ऊर्जा को कैलकुलेट कर सकता है और ये जो छोटा सा पत्थर अजीब तरीके से उतरा है..ये उसकी ऊर्जा की गणना नहीं कर पा रहा।

विपिन- व्हाट नॉनसेंस! तुम कहना चाहते हो कि इस पत्थर के अंदर सूर्य से भी अधिक ऊर्जा है?

असिस्टेंट- या तो ये यन्त्र खराब है..या फिर यही बात है।

रमेश- अरे सुन रवि! मैं ज़रा आगे जाकर फ़ोटो लेने जा रहा हूँ।

रवि- आगे? और कितना आगे जाएगा? उस पत्थर में घुस जाएगा क्या जाकर?

रमेश- ये नासा वाले आपस में कुछ खुसर फुसर कर रहे हैं, मुझे लगता है कि इस पत्थर में ज़रूर कुछ ख़ास बात है।

…………………………………रमेश अपना कैमरा लेकर आगे बढ़ता है, उसकी इस हरकत से नासा वाले चौंक जाते हैं।

विपिन- ऐ तुम! कहाँ जा रहे हो कैमरा लेकर?

रमेश- फ़ोटो लेने।

विपिन- ये खतरनाक हो सकता है, हमें उस चट्टान के बारे में कुछ नहीं पता है।

रमेश- आप मुझे ना बताएं कि क्या करना है क्योंकि इस जगह पर नासा वालों की कोई अथॉरिटी नहीं है।

…………………………फिर रमेश उस चट्टान के नज़दीक पहुँचता है और फ़ोटो लेने लगता है कि तभी अचानक से ही चट्टान में से अजीब प्रकार की ऊर्जा निकलकर रमेश को घेर लेती है और रमेश घबराकर भागने का प्रयास करता है पर वो ऊर्जा रमेश के अंदर समाने लगती है।वहां मौजूद लोग आँखें फाड़े उस दृश्य को देख रहे होते हैं, कुछ पलों बाद ऊर्जा पूरी तरह रमेश के शरीर में समा जाती है और रमेश की शारीरिक संरचना बदल जाती है। उसका रंग नीला और चेहरे का आकार बड़ा हो जाता है, वो नज़रें उठाकर वहां खड़े लोगों को देखता है। विपिन, रवि और बाकी लोग ये दृश्य देखकर वहाँ से भागने का प्रयास करते हैं पर बदला हुआ रमेश खन्ना अपने हाथ से कुछ विचित्र प्रकार की किरणें निकालकर सभी लोगों को राख के ढेर में बदल देता है।

रमेश-  ह्वी ह्वी ह्वी आखिर इतनी सदियों बाद स्वतंत्र हो गया मैं! और स्वतंत्र होकर आया भी कहाँ…ब्रह्मा की सबसे सुन्दर रचना पृथ्वी पर, जो कि देवताओं की भी मनपसंद सृष्टि मानी जाती है। मुझे और मेरे बाकी हरु भ्राताओं को देवताओं ने अलग अलग अंतरिक्ष चट्टानों में कैद किया हुआ है। वो तो मेरा सौभाग्य है कि मैं जिस चट्टान में कैद था, वो इस गृह की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के संपर्क में आ गयी जिससे देवताओं की शक्ति का असर इस चट्टान से कुछ समय के लिए हटा और मैं स्वतंत्र हो गया। अब मुझे इस चट्टान के पास से हट जाना चाहिए वर्ना मेरी शक्तियां फिर से इसमें कैद हो जाएंगी। अब जब मैं पृथ्वी पर आ ही गया हूँ तो अपनी हरु शक्ति का नमूना तो इन मानवों को दिखाऊंगा ही ताकि ये देवताओं को छोड़कर मेरी सत्ता को मानने लगें और पृथ्वी का राज मेरा हो।इसके लिए पहले मुझे इस गृह की पूरी वर्तमान स्थिति जाननी होगी। इसके लिए मुझे अपनी शक्ति से एक प्राणी पैदा करना होगा। इस स्थान पर बहुत सारी रेत पड़ी हुई है, मैं रेत और पत्थरों को मिलाकर कोई प्राणी बनाता हूँ।

………………………………………हरु के हाथ से एक नीली किरण निकलकर रेत और पत्थरों पर पड़ती है और एक विशाल प्राणी का जन्म होता है।

हरु- हा..हा..जा मरेत! और मानवों को उनके नए मालिक की सूचना दे! पर तू ये करेगा कैसे? इस स्थान पर तो कोई आबादी ही नहीं है! मैं तुझे यहाँ से दूर आबादी वाले इलाके में भेजता हूँ।

…………………………………….हरु मरेत पर एक किरण छोड़ता है और मरेत वहाँ से गायब हो जाता है। दूसरी तरफ राजनगर में डॉक्टर अनीस की प्रयोगशाला में …

अनीस- तुम्हारी ट्रेनिंग ख़त्म हुई, अब तुम पूरी तरह से तैयार हो और राजनगर पुलिस में अपनी पोस्ट को फिर से ले सकते हो अमर! कभी अगर तुम्हारे पार्ट्स में कोई समस्या आये तो मैं तो हूँ ही!

…………………तभी एक भारी मशीनी आवाज़ आती है जिसका मालिक एक स्टील के शरीर का आदमी होता है..अमर!

अमर- धन्यवाद् अनीस! एक दोस्त के नाते जो तुमने किया वो कोई किसी के लिए नहीं करता आज की दुनिया में। अब अगर वो संपोले का बच्चा मुझे कहीं भी मिल जाये जिसके कारण…

अनीस- वो तो अब तुमको शायद ही मिलेगा! क्योंकि मुझे तुम्हारे लिए ये नया शरीर तैयार करने और तुमको इस नए शरीर को समझने में पूरे छह साल लगे हैं। इन छह सालों में एक भी इच्छाधारी ने कोई भी हरकत नहीं की।

अमर- उनके लिए यही अच्छा होगा! किसी नाग ने फिर कभी अपना फन निकाला तो मैं उसे कुचलकर रख दूंगा।

अनीस- इतना गुस्सा ठीक नहीं है अमर! अब ये सब बातें छोड़ो और ये बताओ कि तुमको नया नाम क्या दिया जाये।

अमर- नया नाम? क्यों?

अनीस- अरे भाई! राजनगर पुलिस तुमको पब्लिक से कुछ अलग तरीके से इंट्रोड्यूस कराना चाहती है। इससे तुम्हारी छवि तो अच्छी बनेगी ही और साथ ही साथ लोगों का पुलिस पर भरोसा भी मजबूत होगा।

अमर- हुम्म! मेरी ये नयी बॉडी स्टील की है ना?

अनीस- हाँ! क्यों?

अमर- तो आज से मेरा नाम होगा..इंस्पेक्टर स्टील!

अनीस- वाह यार! क्या नाम छाँट के रखा है?

………………………….तभी एक लड़की लैब में प्रवेश करती है। वो अनीस से कुछ कहने आई होती है पर स्टील को देखकर एकदम से हैरान रह जाती है।

अनीस- इससे मिलो अमर! ये है मेरी इंटेलीजेंट असिस्टेंट और पुलिस कमिश्नर राजन मेहरा की सुपुत्री….श्वेता मेहरा!

श्वेता- ह..हाय!

अनीस- ये पिछले छह महीने से मेरी असिस्टेंट है और हम लोग दोनों मिलकर विभिन्न आटोमेटिक पुर्ज़ों पर काम कर रहे हैं। तुम मुझसे पूछती थीं ना श्वेता कि मैं रात रात भर लैब में क्या करता हूँ? ये देखो!

श्वेता- मुझे..मुझे यकीन नहीं हो रहा कि मेरे सामने एक यांत्रिक मानव खड़ा है। इस सदी का पहला ..भावनाओं वाला यांत्रिक मानव! आपने मुझसे कभी डिस्कस क्यों नहीं किया इस बारे में सर?

अनीस- आपके पिताश्री राजन मेहरा जी का सख्त आदेश था कि काम पूरा होने तक किसी को भी भनक नहीं होनी चाहिए और तुमको क्या लगता है कि मैं और तुम जिन पुर्ज़ों पर काम कर रहे हैं वो कहाँ जायेंगे! अगर स्टील का शरीर दुर्घटनाग्रस्त होता है तो पुर्जे रिप्लेस हो सकते हैं।

श्वेता- यानि कि मैं भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा थी, बिना कुछ जाने ही!

स्टील- आपसे मिलकर अच्छा लगा श्वेता जी! आपके भाई के बारे में बहुत सुना छह सालों में।

श्वेता- मैं तो यही सोच रही थी कि भैया को जब पता लगेगा की मार्किट में नया सुपरहीरो आया है तो उसका क्या हाल होगा।

स्टील- सुपरहीरो का तो पता नहीं, बस अपनी ड्यूटी निभाने का प्रयास करूंगा।

………………………तभी अनीस की लैब में रखी टीवी पर एक न्यूज़ आती है। न्यूज़- एक अजीब से प्राणी ने आज पॉलिथीन को बैन करने के लिए की जा रही रैली में हंगामा खड़ा कर दिया है। स्पेशल फोर्सेज पहुँच चुकी हैं पर उस जीव को नहीं रोक पा रही हैं।

श्वेता- ये..ये रैली तो मैंने ही आयोजित की थी। लोग खतरे में हैं, मुझे जाना होगा!

स्टील- रुकिए! मैं भी साथ चलता हूँ!

अनीस- तुम तैयार हो अमर?

स्टील- लगता तो है।

अनीस- तो फिर दुनिया के सामने पहली बार इंस्पेक्टर स्टील के आने का वक्त आ गया है। 

सभी लोग जो घटनास्थल पर मौजूद होते हैं, इधर उधर भाग रहे होते हैं। मरेत तबाही मचा रहा होता है और पुलिस फ़ोर्स उसको रोकने में पूरी तरह नाकाम होती है। अचानक से ही हड़बड़ी में एक आदमी धड़ाम से गिर जाता है और मरेत उसकी तरफ बढ़ रहा होता है कि तभी मरेत के शरीर में एक ब्लास्ट होता है और वो गिर पड़ता है, सब लोग मुड़कर देखते हैं…इंस्पेक्टर स्टील एक हाथ में मेगागन लेकर खड़ा होता है। लोग ख़ुशी से चिल्लाते हैं।

स्टील- सब लोग शांत हो जाएँ और घटनास्थल से दूरी बनाये रखें।

……………………….फिर स्टील मरेत के शरीर के पास जाकर देखता है कि तभी मरेत एक ही रेतीले मुक्के से स्टील को पीछे गिरा देता है। स्टील को हैरानी होती है जब वो देखता है कि मेगागन से की गयी क्षति अपने आप ठीक हो रही है। अनीस स्टील के सर में लगे इनबिल्ट कम्यूनिकेटर द्वारा उससे संपर्क करता है।

स्टील- ये क्या बला है अनीस?

अनीस- मैं तो खुद हैरान हूँ, तुम इस पर ताबड़तोड़ भारी वार करके इसके शरीर को ख़त्म करने का प्रयास करो।

स्टील- कोशिश करता हूँ।

………………………………….स्टील फिर से मेगागन के एक के बाद एक कई वार करके मरेत के शरीर को काफी क्षतिग्रस्त कर देता है और जब मरेत पीछे गिरता है तो बिना एक पल खोये स्टील जाता है और एक लोहे के खम्बे को उखाड़कर मरेत के शरीर को फिर तहस नहस कर देता है। मरेत का शरीर रेत के ढेलों में बदल जाता है पर वो रेत धरती पर नहीं गिरती बल्कि उड़कर स्टील के शरीर के अंदर घुसती है और नाज़ुक सर्किट्स को बेकार कर देती है। स्टील किसी बेजान शरीर की तरह धरती पर गिरता है और मरेत वापस अपने असली रूप में आ जाता है, वो स्टील पर अगला वार करने जा ही रहा होता है कि तभी एक युवक मरेत पर पेट्रोल फेंकता है और माचिस दिखाकर उसे जला देता है। सभी लोग चिल्लाते हैं “सुपर कमांडो ध्रुव!” तभी वहाँ खड़े पुलिसवाले ध्रुव के पास आते हैं।

पुलिसवाला- तुम यहाँ कैसे ध्रुव?

ध्रुव- मुझे करीम ने स्टार ट्रांसमीटर पर मेसेज करके यहाँ की स्थिति से अवगत कराया और श्वेता भी इस रैली का हिस्सा थी जिसकेे कारण मुझे पहले से इस रैली के बारे में पता था।

पुलिसवाला- पर इसे जलाने से कुछ नहीं होगा। इस मशीनी आदमी ने काफी कुछ ट्राई किया पर इसका शरीर हमेशा जुड़ गया।

ध्रुव- लेकिन अब नहीं जुड़ेगा। वो बड़ा सा बॉक्स…उसमें क्या है?

पुलिसवाला- ये प्लास्टिक बैन करवाने की रैली है तो लोगों ने अपना प्लास्टिक का काफी सामान उसमें डाला है।

ध्रुव- ओह! अब एक तरीका मुझे समझ में आया!

……………………….ध्रुव अपने स्टार हेलीकाप्टर को बुलाता है और जलते हुए मरेत के ऊपर प्लास्टिक की वर्षा कर देता है। प्लास्टिक रेत के कणों से चिपक जाता है उसके बाद ध्रुव के आदेश पर पुलिसवाले मरेत के शरीर पर अपनी जीप से टक्कर मारते हैं। मरेत खील खील होकर ज़मीन पर आ गिरता है और प्लास्टिक चिपका होने के कारण उसके शरीर के भाग कोशिश के बाद भी आपस में नहीं मिल पाते। तभी श्वेता दौड़ती हुई वहाँ आती है।

श्वेता- अरे ये स्टील को क्या हुआ?

ध्रुव- स्टील कौन? अच्छा ये रोबोट!

श्वेता- ये रोबोट नहीं है! दुनिया का पहला ऐसा इंसान है जिसको यांत्रिक मानव का शरीर दिया गया है..इंस्पेक्टर अमर!

ध्रुव- ओह! लेकिन इसका शरीर तो बेजान पड़ा है!

श्वेता- कोई बात नहीं! इसको लेकर मेरे साथ अनीस सर की लैब में चलो।

ध्रुव- चलता हूँ…एक मिनट!

श्वेता- क्या कर रहे हो?

ध्रुव- इस प्राणी के शरीर के टुकड़े एक थैले में भर रहा हूँ, ताकि पता कर सकूं कि ये आखिर आया कहाँ से था?

………………………………फिर मरेत को थैले में भरकर और स्टील के शरीर को स्टार हेलिकॉप्टर के द्वारा ध्रुव और श्वेता अनीस की लैब में आते हैं।

अनीस- मेरा संपर्क अमर से अचानक टूट गया तो मैं समझ गया कि कुछ गड़बड़ हुई है, बहुत बहुत धन्यवाद् ध्रुव!

ध्रुव- अरे कोई बात नहीं! अब तुम इसे जल्दी से ठीक करो!

………………………………अनीस दो घंटे में स्टील के पुर्ज़ों को ठीक कर देता है।

स्टील- तुम्हारा बहुत धन्यवाद् ध्रुव! तुम नहीं आते तो वो राक्षस मेरी चटनी बना देता।

ध्रुव- कोई बात नहीं! तुम मुझे ये बताओ अमर कि तुम उस प्राणी के बारे में क्या जानते हो?

स्टील- कुछ ख़ास नहीं, बस जितना तुमको पता है। अरे हाँ एक ख़ास बात..मेरा स्कैनर उसके शरीर के आसपास से एक अजीब से एनर्जी को डिटेक्ट कर रहा था।

ध्रुव- कैसी एनर्जी?

स्टील- ये तो पता नहीं!

……………………………..दूर एक सुनसान स्थान पर खड़ा हरु प्राणी इस घटना पर नज़र रख रहा होता है।

हरु- यकीन नहीं होता! इन तुच्छ मानवों ने मेरी रचना को हरा दिया!अब बहुत हो गया खेल, लगता है कि अब सामने आना ही होगा!

……………………ध्रुव के पास अचानक ही स्टार ट्रांसमीटर पर करीम का मेसेज आता है।

करीम- आप कहाँ हैं कैप्टेन?

ध्रुव- डॉक्टर अनीस की लैब में, क्यों?

करीम- भारत की अलग अलग जगहों से खबर आ रही है। हर जगह अजीब से प्राणियों ने धावा बोल दिया है।

ध्रुव- अच्छा..एक मिनट! टीवी पर कुछ आ रहा है!

……………………………..हरु प्राणी अपनी शक्ति की मदद से सभी सैटेलाइट्स पर कब्ज़ा करके सभी टीवी चैनल्स पर अपना मेसेज प्रसारित करता है। मेसेज दुनिया के अलग अलग कोनो में हर भाषा में प्रसारित हो रहा होता है।

हरु- कैसे हो मानवों! तुम लोग ज़रूर जानना चाहते होंगे कि जो प्राणी अचानक से ही प्रकट हो गए हैं वो कैसे हुए? तो समझ लो कि इनके पीछे मैं हूँ, मैं एक हरु प्राणी हूँ। हरुओं और देवताओं की शत्रुता समय से भी पुरानी है और तुम लोग देवताओं की सृष्टि का ही एक हिस्सा हो, इसलिए मैं तुमको एक प्रस्ताव देना चाहता हूँ, या तो मेरी सत्ता को मान लो और मेरे राज में शान्ति से जीवन यापन करो या फिर मुझसे लड़ने का प्रयास करो और मारे जाओ। तुम्हारे भले के लिए ही कह रहा हूँ कि मेरा कहना मान लो क्योंकि एक बार तुम हरु शक्ति से जीत गए तो इसका मतलब ये नहीं कि हर बार जीत जाओगे, आगे तुम्हारी मर्ज़ी। तुम लोगों का सामना पहले भी ऐसे परग्रहियों से ज़रूर हुआ होगा जो दुनिया पर कब्ज़ा करने की धमकी देते हैं फिर आप लोगों के प्यारे सुपरहीरोज़ आते हैं और आपको ऐसे खलनायक से छुटकारा दिलाते हैं, तो ये बात समझ लो कि मैं कोई तुच्छ परग्रही नहीं बल्कि हरु हूँ और मानो या ना मानो …तुम्हारे ये रक्षक तुमको मुझसे नहीं बचा पाएंगे।

…………………………………तब एकदम से चैनल सामान्य हो जाते हैं पर तब तक हरु अपना काम कर चुका होता है और पूरी दुनिया में भय का साम्राज्य फ़ैल गया होता है। अनीस की लैब में बैठे ध्रुव, श्वेता और स्टील भी गहरी चिंता में आ जाते हैं। तभी करीम का एक और मेसेज आता है।

ध्रुव- ओफ्फो! अब क्या है करीम?

करीम- बहुत बुरी खबर है कैप्टेन! अमेरिका, कोरिया और रूस जैसी महाशक्तियों ने हरु के आगे घुटने टेक दिए हैं।

ध्रुव- क्या?

करीम- हाँ कैप्टेन! और इसके कारण बाकि देशों का भी मनोबल टूट रहा है। शायद ये मानवता के इतिहास का सबसे काला दिन है।

ध्रुव- हम लोग कोई..कोई तरीका ज़रूर निकालेंगे!

करीम- पता नहीं कैप्टेन! आज तक ऐसी स्थिति कभी मानवता के सामने नहीं आई!

………………………………तभी श्वेता के पास राजन मेहरा का फोन आता है।

श्वेता- हाँ पापा!

राजन- ध्रुव है वहाँ?

श्वेता- हाँ है, क्यों?

राजन- उससे कहो कि फ़ौरन घर आ जाये।

श्वेता- भैया! पापा घर बुला रहे हैं!

ध्रुव- ओह! कुछ ज़रूरी बात होगी!

………………………..ध्रुव स्टील और अनीस से विदा लेकर घर जाता है। अंदर घुसते ही वो देखता है क़ि गृहमंत्री उससे मिलने आये हैं।

ध्रुव- अरे! गृहमंत्री जी, आप? मुझे ही बुला लिया होता!

गृहमंत्री- इतना समय नहीं है ध्रुव! मैं सीधा प्रधानमंत्री जी के कहने पर तुमसे मिलने आया हूँ!

ध्रुव- ऐसा क्या काम आ गया मुझसे?

गृहमंत्री(एक लिस्ट देते हुए)- ये उन सुपरमानवों की लिस्ट है जो कई वर्षों से मानवता की रक्षा करते आ रहे हैं जैसे दिल्ली में तिरंगा और परमाणु, महानगर में फेसलेस आदि। तुमको इन सब महानायकों की एक टीम को तैयार करना है, प्रधानमंत्री जी का मानना है कि ये काम सिर्फ तुम ही कर सकते हो। ये एक इमरजेंसी गवर्नमेंट प्लान है हरु से निपटने का।

ध्रुव- पर क्या ये सब लोग मानेंगे?

गृहमंत्री- मैं तुमको जानता हूँ ध्रुव! तुम कोई न कोई तरीका निकाल ही लोगे! तुमसे बहुत उम्मीदें हैं, तुम्हारे ट्रांसपोर्ट का खर्च सरकार देगी और इन सुपरहीरोज को भी कुछ न कुछ फायदा तो होगा ही!

ध्रुव- मुझे भी लगता है कि हरु से निपटने का यही एक तरीका है, मैं आज ही निकलता हूँ।

रजनी – अरे बेटे, ज़रूरी सामान तो पैक कर ले, रास्ते में ज़रुरत पड़ेगी। और हाँ हवेली होते हुए जाना सुना है हवेली वालो के पास सबकी खबर होती है शायद तुम्हारी कुछ सहायता कर दें वो |

ध्रुव- ठीक है मम्मी!

……………………….फिर कुछ समय बाद ध्रुव निकल पड़ता है, रक्षकों को ढूँढने के अपने मिशन पर।

क्रमशः

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Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli 

Disclaimer – These stories are written and published only for entertainment. comic haveli and writers had no intent to hurt feeling of any person , community or group. If you find anything which hurt you or should not be posted here please highlight to us so we can review it and take necessary action. comic haveli doesn’t want to violent any copyright and these contents are written and created by writers themselves. the content doesn’t carry any commercial profit, as fan made dedications for comic industry.  if any name , place or any details matches with anyone then it will be only a coincidence.

8 Comments on “Earth 61 Part 7 (हरु सृष्टि )”

  1. sahi kahu toh iss baar kahani kuchh bhagti si lagi , matlab dhruv crime fighting pahle se kar raha hai aur steel bas abhi abhi aaya aur voh bhi shweta ki madad se matlab kahin kuchh chhoot gaya ho jaise aisa mehsoos hua

    1. Ravi ji , 6 saal pahle nagraj ne jab dhruv kee madad kar di thi raghav ko pakadne me, to comissioner Rajan Mehra ne use god le liya tha, tab se ab tak 6 saal ho gaye aur vo 6 saal se rajnagar me crime fighter hai….par aage ke parts me main ye bat aur clear karoonga, thanks for honest reviews

  2. Kaphi accha lagi kahani magar sirf nagraj aur Dhruv ke upar hee jyada focus lag Raha Hai jaise ki baki ke character bekar Hai aasha Hai ki agli parts main baki character ko bhi saman focus mile

  3. Harshit ji thoda aaram se
    Pichle part ko jitna damdar banaya is part me wo chhutata sa laga
    Shayd isliye kyun ki Dhruv aur nagraj equally strong superhero hain aur dhruv ka koi introduction bhi nahi bana
    Steel ka to sahi tha pichhle part se pata tha uspar kaam ho raha hai
    But 6 years k dauran jo zindagi Dhruv ne ji uski kuch parikalpana milti to sahi rahta
    Pahli bar sare leading superheroes haru k karan hi ek manch par aaye the
    Yaha bhi wahi hota pratit ho raha hai
    Story sahi ja rahi hai but pichhle part se koi connectivity na hona
    Dhruv ka proper introduction na hona is kadi ko kafi kamzor banata hai
    Hopefully next part me iski bharpai hogi
    All the best harshit ji

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