Earth 61 Part 8 (लक्ष्य पुरुष डोगा )

EARTH-61

PART 8.

( लक्ष्य पुरुष डोगा )

मुम्बई शहर में रात के दस बजे एक दो व्यक्ति अमन और आकाश घबराकर सुनसान सड़क पर भाग रहे होते है।

अमन- हम्फ..क्या वो अब भी पीछे है?

आकाश- अबे..हम्म्फ.. मुझे क्या पता? तेरे साथ ही तो भाग रहा हूँ मैं!

अमन- यार, मुझे लगता है कि उसको हमने पीछे छोड़ दिया।

आकाश- हा..हा..बड़ा मुम्बई का बाप बना फिरता है, दो हत्यारों को तो पकड़ नहीं पाया।

…………………………………तभी अचानक से ही कुत्तों की एक फ़ौज आकर दोनों को घेर लेती है। दोनों एकदम से ही घबरा जाते हैं, तभी अँधेरे में से एक साया निकलकर उनके सामने आता है जिसने कुत्ते का मास्क लगाया होता है।

अमन- ड.. डोगा! तुम!

डोगा- अब आवाज़ क्यों नहीं निकल रही दोनों में से किसी की?

आकाश- यार, हम दोनों को मारकर तुमको क्या मिलेगा? मैं तो कहता हूँ कि मिलकर काम करते हैं, हम लोगों के तस्करी के काम में बहुत पैसा है, कुछ ले देकर कुछ हो सके तो…

डोगा- हुम्म..ऑफर तो बहुत अच्छा है तेरा। मेरे पास भी एक ऑफर है तुम दोनों के लिए..मैं तुमको तड़पाकर नहीं बल्कि जल्दी मारूँगा, बिल्कुल तकलीफ नहीं होगी।

आकाश- तू अगर हमारी बात मान लेता तो तेरे लिए ठीक होता, पीछे देख जो वैन आ रही है उसमें हमारे आदमी हैं। भागते वक्त मैंने अपने लोगों को मेसेज कर दिया था।

……………………….पीछे अचानक से एक वैन आकर रूकती है और करीब दस पंद्रह लोग स्वचालित हथियारों के साथ बाहर निकलते हैं और डोगा पर हमला कर देते हैं। डोगा गज़ब की फुर्ती दिखाते हुए ब्लैकपिपर आर्ट का इस्तेमाल करके गोलियों से बचते हुए वैन के पीछे चला जाता है, वह अपने अचूक निशाने से हर बार एक गोली चलाकर एक आदमी के सिर को निशाना बना रहा था। अब वो लोग घटकर पांच बचे थे और डोगा की रिवाल्वर की गोलियां भी ख़त्म हो चुकी थीं। उसने उन लोगों को मौका दिये बिना ही उन पर छलांग लगा दी और उन लोगों के स्वचालित हथियार भी उनकी हड्डियां टूटने से नहीं बचा पाये। उन सब से निपटकर डोगा फिर से अमन और आकाश की तरफ मुड़ता है जो मौके का फायदा उठाकर कुत्ता फ़ौज के कुछ कुत्तों को मारकर वहाँ से भाग चुके होते हैं। वो सड़क पर कुछ आगे जाता है तो देखता है कि दोनों बेहोश पड़े हैं और जिस आदमी ने उनको बेहोश किया है वो उनके पास खड़ा है..सुपर कमांडो ध्रुव!

ध्रुव- आओ डोगा! मैं थोड़ा लेट हो गया जिससे मैंने तुम्हारा एक्शन मिस कर दिया पर फिर ये दोनों जमूरे भागते दिखे और इनको मैंने बेहोश कर दिया।

डोगा- तुम तो ध्रुव हो..राजनगर के क्राइम फाइटर।

ध्रुव- और तुम हो डोगा..मुम्बई के self proclaimed बाप।

डोगा- मुम्बई का बाप मुझे यहाँ के वासी बोलते हैं क्योंकि शायद वो मेरे आसपास होते हुए सुरक्षित महसूस करते हैं, जो सुरक्षा उनको कानून नहीं दे पाता।

ध्रुव- तो तुम इसीलिए कानून की बार बार अवहेलना करते हो?

डोगा- जितने सालों से मैं जुर्म से लड़ रहा हूँ, उतने सालों का मुम्बई का क्राइम रेट का ग्राफ उठाकर देखोगे तो पता चलेगा कि मैं कानून क्यों तोड़ता हूँ। वैसे भी, मैं कानून तोड़कर कानून की ही रक्षा करता हूँ। अब तुम बताओ, तुम राजनगर से इतनी दूर सिर्फ मेरी नैतिकता पर सवाल उठाने तो नहीं आये होंगे ?

ध्रुव- तुम मेरे आने का कारण जानते हो, तुमको पता है कि इस वक्त दुनिया की स्थिति क्या है?

डोगा- तुम उस हरु के बारे में बात कर रहे हो क्या, जिसने पूरी दुनिया में आतंक मचा रखा है?

ध्रुव- हरु के सामने अब तक आधी दुनिया घुटने टेक चुकी है और जो आधी बची है उसमें भारत भी एक देश है। सरकार ने एक गुप्त योजना बनाई है जिसके तहत मुझे मेरे और तुम्हारे जैसे लोगों को ढूंढना है।

डोगा- तो तुम मुझे अपनी टीम का पहला मेंबर बनाने आये हो?

ध्रव- ऐसा ही समझ लो!

डोगा- देखो भाई! ये राक्षसों और परग्रहियों से निपटना तुम लोगों का काम है। मेरा काम है आम लोगों की रक्षा करना और सिस्टम के अंदर घुसे भ्रष्टाचारियों से निपटना। अगर तमाम सुपर हीरोज को इकट्ठा करना सरकार की योजना है..तो मुझे वैसे भी इस पचड़े में नहीं पड़ना।

ध्रव- मैंने तो बहुत सुना था तुम्हारे बारे में कि तुम लोगों के लिए अपनी जान भी दे सकते हो।

डोगा- सुना तो मैंने भी बहुत है तुम्हारे में ध्रुव। तुम्हारा सर्कस एक इच्छाधारी ने जला दिया और कमिश्नर राजन मेहरा ने तुमको उसके बाद गोद ले लिया, उसके बाद तुम राजनगर में रहकर ही अपराध से लड़ने लगे। मेरे और तुम्हारे काम करने के तरीके में बहुत अंतर है ध्रुव, ये तो तुमको भी पता है। वैसे भी हरु से लड़ने के लिए मुझसे ज़्यादा शक्तिशाली लोग चाहिए, जैसे कि परमाणु या शक्ति।

ध्रुव- बड़ी से बड़ी समस्या का हल शक्ति से नहीं बल्कि इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास से किया जाता है और मुझे नहीं लगता कि मेरे और तुम्हारे काम करने के तरीके में ज़्यादा अंतर है क्योंकि हम दोनों ही लोगों की सुरक्षा के लिए काम करते हैं। तुम इस पचड़े में नहीं पड़ना चाहते लेकिन क्या तुमको नहीं लगता कि एक दिन अपने रोज़मर्रा के गुंडे मवालियों को छोड़कर बड़ी समस्या पर भी ध्यान देना चाहिए? आज दुनिया एक ऐसे दौर से गुज़र रही है जैसे शायद यही अंत हो, पर अगर हम हार भी गए तो कम से कम ये अफ़सोस तो नहीं होगा कि हमने कोशिश नहीं की।

डोगा- ठीक है, मैं तुम्हारे साथ काम करने को तैयार हूँ पर तुमने कहा कि ये सरकार का इमरजेंसी प्लान है..अगर ये सरकार की चाल हुई मुझे पकड़ने की तो…

ध्रुव- जो आतंक इस वक्त हरु ने मचा रखा है, क्या तुमको लगता है कि लोग तुमको पकड़ने के बारे में सोच रहे होंगे?

डोगा- बात तो ठीक है तुम्हारी। और एक बात, मैं कभी अपनी आइडेंटिटी ज़ाहिर नहीं करूंगा।

ध्रुव- ठीक है, तो अब चलो मेरे साथ।

डोगा- कहाँ चलना है?

ध्रव- दिल्ली! दो और लोगों को अपनी टीम में भर्ती करने।

डोगा- इतनी जल्दी दिल्ली से मुम्बई का सफ़र कैसे तय करोगे?

ध्रुव- सरकार से मुझे ये विशेष जेट प्लेन मिला है जिससे मैं राजनगर से मुम्बई तक आया हूँ।

……………………………………ध्रुव एक रिमोट कंट्रोल से एक विशेष जेट को बुलाता है, डोगा उस जेट को देखकर हतप्रभ रह जाता है।

डोगा- और लोग कहते हैं कि भारत टेक्नोलॉजी में पीछे है।

ध्रुव- हुम्म…. दरअसल ये जेट जापान से इम्पोर्ट किया गया है।

डोगा(झिझककर)- हाँ तो..ठीक है, इम्पोर्ट करने में भी पैसा लगता है। इसका मतलब देश की आर्थिक स्थिति अच्छी है।

………………………………….ध्रुव और डोगा जेट में बैठकर दिल्ली रवाना होते हैं। जेट की ज़बरदस्त स्पीड देखकर डोगा हैरान रह जाता है। कुछ ही समय में वो लोग दिल्ली में होते हैं..और दिल्ली में तबाही का भयानक मंज़र फैला होता है। इमारतों में आग लगी होती है, लोग चीख पुकार मचा रहे होते हैं और कई लोगों की लाशें सड़क पर पड़ी होती हैं।

ध्रुव- मैंने..ये उम्मीद नहीं की थी! ऐसा लग रहा है कि हरु ने दिल्ली को मुख्य तौर पर निशाना बनाया है।

……………………..तभी उनको हवा में उड़ता परमाणु दिखता है जो जेट को लैंड करने का इशारा करता है। ध्रुव एक खाली जगह देखकर जेट को लैंड करवा देता है।

डोगा- तुम ऐसे ही कहीं भी जेट लैंड कर सकते हो?

ध्रुव- सामान्य स्थिति में नहीं..पर ये स्थिति सामान्य नहीं है। और तुमको क्यों कानूनी तौर तरीकों की इतनी चिंता हो रही है?

…………………………………..ध्रुव जेट का दरवाज़ा खोलता है, उसमे से परमाणु लगभग उड़ता हुआ अंदर आता है।।

परमाणु- सुपर कमांडो ध्रुव..गृहमंत्री जी से मेरी बात हुई थी, उन्होंने बताया था कि तुम आओगे। (फिर डोगा की तरफ देखकर)ये यहाँ क्या कर रहा है?

डोगा- मैं भी इस टीम का हिस्सा हूँ।

परमाणु- ये टीम नायकों के लिए बनाई जा रही है..अपराधियों के लिए नहीं!

डोगा- तुम्हारी राय से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं खुद नहीं आया था टीम में भर्ती होने।

परमाणु- ये सब क्या है ध्रुव?

ध्रुव- डोगा टीम का हिस्सा है परमाणु और अब तुम भी हो।

परमाणु- मैं एक बागी और अपराधी के साथ एक टीम में नहीं हो सकता।

डोगा- वो बाद में तय कर लेना, पहले ये बताओ कि ये दिल्ली में कैसी तबाही फैली है?

परमाणु- हरु ने एक बेहद खूंखार अपराधी एल्फ़ा मैन को हरु ऊर्जा की शक्ति दे दी है जिसके कारण उसका शरीर तो जेल में है, पर उसका मानस रूप होकर शहर में तबाही फैला सकता है और मानस रूप अदृश्य है जिसके कारण काफी परेशानी हो रही है।

ध्रुव- तो अगर एल्फ़ा मैन का शरीर जेल में है, तो तुमको ये कैसे पता कि उसका ही मानस रूप तबाही फैला रहा है?

परमाणु- दो कारण हैं, पहला ये कि कल ही तिरंगा ने एल्फ़ा मैन को लूटपाट के आरोप में पकड़कर जेल में बंद कर दिया था। आज जब तिरंगा कुछ काम से जेल गया तो देखा कि एल्फ़ा मैन का बेजान शरीर एकदम शांत पड़ा है और उसी के कुछ समय बाद शहर में अचानक से तबाही फैलने लगी ये देखकर तिरंगा को कुछ शक हुआ।

डोगा- और दूसरा कारण?

परमाणु- वेदाचार्य इस वक्त दिल्ली में हैं!

ध्रुव- क्या? वो महान भविष्यवक्ता वेदाचार्य इस वक्त दिल्ली में ?

परमाणु- वेदाचार्य महानगर से किसी अपने काम से दिल्ली आये थे, वो किस्मत से उसी इलाके में थे जहाँ एल्फ़ा मैन ने सबसे पहले तबाही मचाई। उस वक्त मैं भी उस एरिया में था लेकिन मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या अदृश्य ताकत ऐसी तबाही मचा सकती है, तभी वेदाचार्य ने अपनी तिलिस्मी शक्तियों से कुछ पल के लिए एल्फ़ा मैन के मानस रूप को बेबस कर दिया। उस वक्त मैंने भी कुछ पल के लिए एल्फ़ा मैन को साकार रूप में देखा।

ध्रुव- फिर क्या हुआ?

परमाणु- हरु ऊर्जा वेदाचार्य से अधिक शक्तिशाली निकली और एल्फ़ा मैन कुछ समय की कशमकश के बाद तिलिस्मी पकड़ से आज़ाद हो गया। इससे वेदाचार्य को एकदम से झटका लगा और वे बेहोश हो गए। अभी वे हॉस्पिटल में हैं।तब तिरंगा और मैं भी जेल में मिले जहाँ एल्फ़ा मैन का शरीर था पर हमको समझ में नहीं आया कि हम क्या करें। तभी मुझे मेरे निर्माता प्रोफेसर कमल कान्त ने संपर्क किया कि तुम्हारे जेट ने दिल्ली में प्रवेश किया है तो मैं तुमसे मिलने चला आया।

ध्रुव- अच्छा तो…अरे ये डोगा कहाँ गया?

परमाणु- मैंने भी ध्यान नहीं दिया, अब ये पता नहीं कहाँ चला गया?

ध्रुव- हे भगवान! मुझे पता है कि ये कहाँ गया है जल्दी जेट में बैठो परमाणु।

परमाणु- मैं उड़ सकता हूँ।

ध्रुव- तो चलो जल्दी मेरे साथ।

……………………………..ध्रुव और परमाणु तुरंत जेल की तरफ जाते हैं जहाँ पर एल्फ़ा मैन कैद होता है। वो अंदर जाकर देखते हैं कि कई पुलिसकर्मी बेहोश पड़े हैं , वे तुरंत एल्फ़ा मैन के सेल की तरफ जाते हैं और देखते हैं कि डोगा के एल्फ़ा मैन को मार दिया है।

ध्रुव- ये..ये क्या किया डोगा?

डोगा- वही जो करना ज़रूरी था।

परमाणु(उड़कर जाता है और डोगा पर वार करता है)- मैं सही था! तू एक हत्यारे से ज़्यादा और कुछ नहीं है!

…………………………डोगा तुरंत हरकत में आता है और परमाणु की बेल्ट को एक झटके में निकाल देता है। परमाणु हतप्रभ रह जाता है, फिर डोगा के दो मुक्कों में परमाणु को तारे नज़र आ जाते हैं। उसके मुंह से खून निकलने लगता है और डोगा उसे ज़मीन पर गिरा देता है।

ध्रुव- ये क्या कर रहे हो डोगा?

डोगा- अरे दिमाग ख़राब कर रखा है इसने! जब से मिला है तबसे अपराधी अपराधी कर रहा है। तझे पता है परमाणु कि सबसे बड़ा अपराधी कौन है?…तू है सबसे बड़ा अपराधी! जब वेदाचार्य के द्वारा तुझे पता लग गया कि एल्फ़ा मैन इतनी तबाही फैला रहा है और तू उसके मानस रूप को नहीं रोक सकता, उसी वक्त तुझे इसके शरीर को मार देना चाहिए था पर तूने क्या किया? एल्फ़ा मैन निर्दोष जानें लेता रहा और तुम सिर्फ कोशिश करते रहे उसके मानस रूप को ख़त्म करने की जबकि एक आसान ऑप्शन तुम्हारे सामने था। आदमी को मार दो और उसका कनेक्शन उसके दिमाग से ख़त्म कर दो तो मानस रूप भी नहीं रहता पर तुमने महान हीरो बनने की ठानी और जान नहीं ली। आज जो निर्दोष जाने गयी हैं वो तेरी और तिरंगा की वजह से गयी हैं क्योंकि तुम लोग आदर्शों के चक्कर में वो काम नहीं कर पाये जो ज़रूरी था।

……………………….ध्रुव इसके बाद डोगा से कुछ नहीं बोल पता क्योंकि वो जानता है कि कहीं ना कहीं डोगा सही है। वो परमाणु को उठता है।

ध्रुव- तुम ठीक हो?

परमाणु(धीरे स्वर में)- ह..हाँ।

ध्रुव- डोगा ने जो कहा…

परमाणु- बिलकुल सही कहा उसने..मेरी वजह से इतने लोग मारे गए क्योंकि मैं एक आदमी की जान नहीं ले पाया।

डोगा- मेरा मकसद तुमको चोट पहुंचाना नहीं था।

…………………………….तभी तिरंगा दौड़ता हुआ अंदर आता है।

तिरंगा- अरे परमाणु! ये सारे गार्ड्स बेहोश कैसे हैं और ध्रुव और डोगा यहाँ क्या कर रहे हैं? और..ये क्या! एल्फ़ा मैन मर गया!

परमाणु- बाहर की क्या खबर है तिरंगा?

तिरंगा- बाहर अल्फ़ा मैन के मानस रूप ने एकदम से तबाही रोक दी है,मुझे नहीं पता कि ये कैसे हुआ? इसलिए मैं यहाँ चेक करने आया था कि एल्फ़ा मैन का शरीर कैसा है।

ध्रुव- परमाणु तुम..

परमाणु- मुझे कुछ समय अकेले रहना है।

…………………..ये कहकर परमाणु जेल से बाहर निकल जाता है। ध्रुव, डोगा और तिरंगा उसे जाते हुए देख रहे होते हैं।

 तिरंगा- तो..डोगा ने एल्फ़ा मैन को मार दिया?

डोगा- और कोई रास्ता था? था तो बताओ।

ध्रुव- परमाणु को थोड़ा वक्त चाहिए सँभलने के लिए।

डोगा- वक्त ही तो नहीं है ,मैं उससे बात करता हूँ।

…………………………डोगा जेल से बाहर निकलता है, परमाणु बाहर ही खड़ा होता है। बाहर तबाही के बाद घायल लोग एम्बुलेंस में जा रहे होते हैं और लोग मृतकों के लिए रो रहे होते हैं।

परमाणु- तुम ठीक कह रहे थे, मैं ये सब रोक सकता था। अगर एक सही निर्णय ले लिया होता तो..

डोगा- अब उस बारे में बात मत करो क्योंकि समस्या अभी ख़त्म नहीं हुई है। हम लोगों को एकजुट होकर काम करना होगा और बाकि लोगों को टीम में भर्ती करना होगा ताकि हरु के खिलाफ जल्द से जल्द कोई कदम उठाया जा सके।तुमको इस बात का दुःख है कि तुम लोगों को नहीं बचा पाये लेकिन ये सही वक्त नहीं है, हमको तुरंत ठोस कदम उठाने होंगे।

…………………..तभी ध्रुव और तिरंगा भी बाहर आ जाते हैं।

ध्रुव- तिरंगा तो राज़ी है, तुम्हारा क्या विचार है परमाणु।

परमाणु- मेरी बात तो पहले ही गृह मंत्री जी से हो गयी थी और वैसे भी अब अगर इस लड़ाई में मैंने हिस्सा नहीं लिया तो इन दिल्लीवासियों के साथ जो मैंने अनजाने में किया है, उसकी भरपाई कैसे करूंगा।

ध्रुव- अच्छी बात है, अब मेरी लिस्ट में अगला नाम शक्ति का है, तो अब ये बताओ कि शक्ति कहाँ पर मिलेगी?

तिरंगा- शक्ति के साथ मैंने और परमाणु ने दो चार बार काम किया है पर वो एक पल में ही दुनिया के एक कोने से दुसरे कोने में पहुँच सकती है, तो इस तरह उसका पता करना नामुमकिन है।

ध्रुव- तो फिर लिस्ट में एक और नाम है…महानगर से फेसलेस!

तिरंगा- फेसलेस के बारे में ज़्यादा तो नहीं पता, बस इतना पता है कि वो वेदाचार्य का शिष्य है।

ध्रुव- पर वेदाचार्य तो हॉस्पिटल में बेहोश हैं।

तिरंगा- अभी में जेल आने से पहले वेदाचार्य का हालचाल लेने गया था, अब वो होश में हैं और बिल्कुल ठीक हैं।

ध्रुव- तो सीधे वेदाचार्य के पास चलते हैं, हॉस्पिटल में।

…………………………………सब लोग सीधे वेदाचार्य के पास हॉस्पिटल में जाते हैं, वेदाचार्य अपने बिस्तर पर आराम कर रहे होते हैं।

तिरंगा- प्रणाम वेदाचार्य जी।

वेदाचार्य- अरे, आप सब रक्षक एक साथ, क्या बात है?

ध्रुव- हमको फेसलेस का पता चाहिए वेदाचार्य जी।

वेदाचार्य- फेसलेस का पता! क्यों?

ध्रुव- मैं सभी सुपर हीरोज की एक टीम का गठन कर रहा हूँ, हरु से टक्कर लेने के लिए।

वेदाचार्य- ओह! तो तुमको फेसलेस अपनी टीम में चाहिए।

ध्रुव- जी। वेदाचार्य- ओह! पर फेसलेस का तो अभी मुझे भी नहीं पता।

………………………………..तभी पीछे से आवाज़ आती है”फेसलेस यहाँ है!” सभी लोग पीछे मुड़कर देखते हैं, नीली पोशाक में एक रहस्यमयी व्यक्ति खड़ा होता है।

परमाणु- तो तुम हो फेसलेस, पर तुम यहाँ क्या कर रहे हो? तुम तो महानगर में रहते हो।

फेसलेस- दादाजी..मेरा मतलब है वेदाचार्य जी की हालत के बारे में सुनते ही मैं महानगर से तुरंत यहाँ चला आया।

वेदाचार्य- अगर आप लोगों को ऐतराज़ ना हो तो मैं फेसलेस से अकेले में कुछ बात करना चाहूंगा।

…………………………..सब लोग कमरे के बाहर चले जाते हैं, उनके जाते ही फेसलेस अपना मास्क उतार देता है और आँखों में आंसू लिए भारती नज़र आती है।

भारती- अब आप कैसे हैं दादाजी?

वेदाचार्य- मैं बिल्कुल ठीक हूँ बेटी, पर तुम यहाँ क्यों आई हो?

भारती- दिल्ली की हालत के बारे में हवेली न्यूज़  चैनल पर आ रहा था,बीच में आपका भी ज़िक्र किया गया। बस फिर तो मुझे आना ही था।

वेदाचार्य- तुमको नहीं आना चाहिए थे भारती, अब ये लोग तुमको अपने समूह में शामिल करने का प्रयास करेंगे।

भारती- तो क्या हुआ?

वेदाचार्य- हरु बहुत खतरनाक है भारती। जब मैं एल्फ़ा मैन के मानस रूप से लड़ रहा था, तब मैंने हरु ऊर्जा के एक अंश की शक्ति को महसूस किया था। ये लोग कोई भी टीम बनाकर उसके सामने नहीं टिक पाएंगे, उसके अंदर देवताओं को भी टक्कर देने की शक्ति है इसलिए जब इन्होंने मुझसे फेसलेस के बारे में पुछा तो मैंने इनको टालने की कोशिश की ताकि तुम इस मामले में न पड़ो।

भारती- कोशिश करने में क्या हर्ज़ है दादाजी? अगर कोशिश भी नहीं की तो भी दुनिया को हरु से खतरा तो है ही।

वेदाचार्य- अगर तुम कोशिश करना चाहती हो तो ठीक है, मैं तुमको नहीं रोकूँगा और मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है।

भारती- धन्यवाद दादाजी।

……………………………भारती फिर से मास्क पहनकर फेसलेस के रूप में कमरे से बाहर आ जाती है, सारे हीरोज उसे देखने लगते हैं।

फेसलेस- मैं तैयार हूँ इस टीम में शामिल होने के लिए।

ध्रुव- स्वागत है।

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli 

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9 Comments on “Earth 61 Part 8 (लक्ष्य पुरुष डोगा )”

  1. koi kitni bhi koshish kar le baat ghumaane ki lekin doga always straight hi hota hai seedhi baat no bakwas , samasya jad se khatm

  2. Now this part is awesome
    Bahut hi jabardast
    Doga doga hai bas
    Parmanu ka role bhi sahi tha
    Tiranga ko thoda sa intro dena tha
    But fighting sequences ko jaise describe kiya gaya mujhe bahut pasand aaya
    Dhruv as usual ek leading role ada kar raha hai
    But is part me doga ne sabko dominate kiya
    Shayd isliye is part ka title bhi usi par tha
    Ab kuch idea to ho raha hai k nagraj kaise is ladai me shamil hoga
    But harshit ji knows all
    Agle part ka besabri se intezaar hai harshit ji
    Ab wapas connected ho gaya hu story se

  3. बहुत ही बढ़िया पार्ट हर्षित जी

    मुझे डोगा का काम पसन्द आया, कोई समझ ही नही पा रहा था की क्या करना चाहिए और डोगा ने कर दिया जो करना चाहिए था ।

    डोगा की सोचने की स्पीड बहुत ही ज़्यादा दिखाई गयी वो तुरन्त समझ गया की क्या करना
    चाहिए

    मज़ा आया बड़ा ही अच्छा पार्ट था

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