Earth 61 Part 9 (Shakti Vistar)

EARTH-61

PART 9.

(Shakti Vistar )

 सभी रक्षक ध्रुव के जेट में बैठते हैं।

परमाणु-अब आगे का क्या प्लान है?

ध्रुव- हरु की शक्ति का नमूना हम सबने देखा है, उसे रोकने के लिए हमको भी अपनी ताकत बढ़ानी होगी और इसके लिए हमें अपनी टीम में असाधारण शक्ति वाले लोग भी चाहिए होंगे।

परमाणु- तुम शक्ति के बारे में बात कर रहे हो?

ध्रुव- शक्ति तो लिस्ट में है ही, पर एक ऐसा प्राणी है जो इस लिस्ट में नहीं है पर उसके बारे में सुना बहुत है…असम का भेड़िया।

डोगा- सुना तो मैंने भी है पर मुझे लगा कि वो सिर्फ एक अफवाह है।

ध्रुव- इस हिसाब से तो इच्छाधारी नागों और शक्ति को भी अफवाह ही होना चाहिए।

परमाणु- इच्छाधारी नागों से संपर्क करने की कोशिश नहीं की सरकार ने? उनकी शक्ति इस लड़ाई में बहुत काम आती।

ध्रुव- संपर्क ज़रूर किया जाता अगर पता होता कि वो अब कहाँ पर हैं, छह साल से तो उनकी कोई खबर है नहीं।

परमाणु- आखिरी बार महानगर रिसर्च सेंटर वाली घटना के बाद से वो लोग गायब हैं।

डोगा- हम इन असाधारण शक्ति वालों पर भरोसा कर सकते हैं क्या? क्या पता वो लोग भी मानवों पर राज करने के लिए हरु का साथ दें।

फेसलेस- मुझे किसी भेड़िया के बारे में तो नहीं पता पर इच्छाधारी नागों के बारे में मुझे पता है। उनमें से अगर कुछ लोग बुरे हैं तो कई लोग अच्छे भी हैं।

ध्रुव- फिलहाल हमको इच्छाधारी नागों या शक्ति की लोकेशन तो पता नहीं है, तो फिलहाल हमको असम जाकर भेड़िया को ढूंढना होगा।

………………………..सब लोग इस काम के लिये हामी भरते हैं। दूसरी तरफ असम के जंगल में एक कबीले में एक सांड पागल होकर उत्पात मचा रहा होता है और कबीले के लोग उसके सामने खुद को बहुत असहाय महसूस कर रहे होते हैं। सांड के सामने एकदम से एक बच्चा आ जाता है वो उसे कुचलने जा ही रहा होता है कि तभी एक ज़ोरदार मुक्का उसे कई गज़ पीछे कर देता है…सामने भेड़िया खड़ा होता है। उसके देखते ही कबीले वाले ख़ुशी से चिल्लाने लगते हैं और भेड़िया बच्चे को उठाकर उसकी माँ को सौंप देता है। इतनी ही देर में सांड संभल जाता है और फिर भेड़िया पर वार करने आता है पर इस बार भेड़िया अपनी गदा का आह्वान करता है “हे भेड़िया देवता मदद!” उसके हाथ में गदा प्रकट होती है और वो एक ज़ोरदार वार सांड के ऊपर करता है। सांड की खोपड़ी चटक जाती है और वो तुरंत मर जाता है। तभी भेड़िया और कबीले वाले देखते हैं कि सांड के शरीर से एक अजीब सी ऊर्जा निकलकर एक पेड़ की जड़ में समा जाती है। कबीले के सरदार भेड़िया के पास आता है।

सरदार- बहुत शुक्रिया भेड़िया! पर ये उसके शरीर में कैसी ऊर्जा भरी हुई थी जो इस पेड़ में समा गयी?

भेड़िया- पता नहीं सरदार! पर मुझे इतना तो शक हो गया था कि इस सांड में अप्राकृतिक शक्ति है वर्ना मुझे इससे निपटने के लिए गदा की आवश्यकता नहीं पड़ती।

सरदार- तो इसकी शक्ति का रहस्य कैसे पता लगेगा?

भेड़िया- मुझे लगता है कि सांड ने इस पेड़ की पत्तियां चबाने के बाद से ही अपना मानसिक संतुलन खोया है, मुझे इस पेड़ को उखाड़कर देखना होगा।

………………………………..भेड़िया अपनी शक्ति लगाकर पेड़ को उखाड़ देता है, लेकिन उसके बाद उसकी और आसपास खड़े लोगों के आश्चर्य की कोई सीमा नहीं रहती जब वो देखते हैं कि पेड़ के नीचे एक सुरंग बनी हुई है।

भेड़िया- मुझे नीचे जाकर देखना होगा कि ये क्या माजरा है।

सरदार- रुको! मैं अपने दो-तीन लोग तुम्हारे साथ भेजता हूँ!

भेड़िया- इसकी ज़रुरत नहीं है, मैं जाकर देखता हूँ।

…………………………………भेड़िया नीचे सुरंग में उतरता है और देखता है कि उस पेड़ की जड़ के अलावा बाकि कई पेड़ों की जडें आपस में जुड़ीं होती हैं।

भेड़िया- हे भेड़िया देवता! इसका मतलब जंगल की अधिकाँश वनस्पति पर इस शक्ति का प्रभाव है! मुझे अतिशीघ्र ही इस समस्या की जड़ को ढूंढना होगा!

………………………………….तभी भेड़िया सुरंग में आगे बढ़ता है और देखता है कि सभी जडें आगे बढ़कर एक केंद्र से जुड़ी हैं।

भेड़िया- ओह, इसका मतलब अगर मैं ये केंद्र नष्ट कर दूं तो शायद मैं इस अद्भुत शक्ति के प्रभाव को ख़त्म कर सकता हूँ।

……………………………………..भेड़िया गदा का आह्वान करके केंद्र की तरफ बढ़ता है कि तभी पेड़ों की जडें उसे बाँध देती हैं। भेड़िया एक पल के लिए आश्चर्यचकित रह जाता है लेकिन अपनी ताकत और इच्छाशक्ति के बल पर तुरंत जड़ों से खुद को आज़ाद कराता है लेकिन ऐसा करते ही जड़ें और कसकर उसे पकड़ लेती हैं।

भेड़िया- इन जड़ों में ज़रूर कोई अद्भुत शक्ति है वर्ना ये मुझे बांधे नहीं रख पातीं, पर अब मैं क्या करूँ! एक काम हो सकता है, केंद्र मुझसे ज़्यादा दूर नहीं है। अगर मैं गदा को सही दिशा से फेंकने का प्रयास करूँ तो सीधे केंद्र को नष्ट कर सकता हूँ पर इसके लिए मुझे एक बार फिर ताकत लगाकर जड़ों से आज़ाद होना होगा और जड़ों के मुझ तक वापस पहुँचने से पहले अपना वार कर देना होगा।

……………………………भेड़िया एक बार फिर ताकत लगाकर जड़ों से खुद को आज़ाद कराता है और जड़ों के फिर प्रहार करने से पहले ही केंद्र पर पूरी ताकत से गदा फेंककर मारता है। एक तेज़ रौशनी चमकती है और सारी जड़ें सामान्य हो जाती हैं। भेड़िया वापस सतह पर आता है पर वो देखता है कि उसके सामने ध्रुव, परमाणु, तिरंगा और डोगा खड़े हैं।

भेड़िया- कौन हो तुम लोग?

ध्रुव- हम लोग बाहरी दुनिया से आये हैं तुमको ढूँढने के लिए। इतने बड़े जंगल में तुमको ढूंढना बहुत मुश्किल काम था पर हवेली की असम शाखा  से फूजो नाम के एक आदमी का पता चला। हमको तुम्हारा पता फूजो बाबा ने ही दिया।

…………………..तभी फूजो भीड़ में से निकलकर आता है।

भेड़िया- आप भी ना फूजो बाबा! किसी को भी मेरे बारे में बता देते हैं।

ध्रुव- हमें पता चला है कि यहाँ पर हरु का हमला हुआ है।

भेड़िया- किसका हमला?

फूजो- पृथ्वी संकट में है भेड़िया! बाहर अंतरिक्ष के जीव भी अब पृथ्वी को निशाना बनाने लगे हैं।

भेड़िया- तो तुम लोग चाहते हो कि मैं तुम लोगों के साथ आऊं?

परमाणु- हाँ, हमारे साथ मिलकर हरु का मुकाबला करो।

भेड़िया- क्षमा करना! मैं बाहरी दुनिया में नहीं आ सकता!

ध्रुव- पर क्यों?

भेड़िया- मुझे पता है कि तुम लोगों ने इच्छाधारी नागों के साथ छह साल पहले क्या किया है। मैंने भी बाहर की दुनिया के मानवों के साथ मिलकर काम करूंगा तो शायद मेरा भी वही हाल होगा।

डोगा- तुमको इच्छाधारी नागों से क्या हमदर्दी है?

भेड़िया- उनके कारण ही मेरा श्राप ख़त्म हुआ और मैं वापिस इस दुनिया में आ पाया।

ध्रुव- देखो इस वक्त हम आपसी मतभेदों के बारे में नहीं सोच सकते क्योंकि पूरी धरती खतरे में है और तुम्हारी शक्तियों के बारे में सुनकर हमको इतना यकीन तो हो गया है कि तुम हरु से मुकाबला करने में हमारी बहुत मदद कर सकते हो। अगर तुमने संगठित होकर काम नहीं किया तो ये दुनिया या तो हरु की गुलाम हो जायेगी या फिर ख़त्म हो जायेगी।

डोगा- और वैसे भी तुमको कौन सा बाहर जाकर बसना है? अपना काम करना और जंगल वापस आ जाना।

भेड़िया- हुम्म…कह तो तुम लोग सही रहे हो, लेकिन हम लोगों को हरु का सामना करने से पहले एक काम और करना होगा।

ध्रुव- और वो क्या?

भेड़िया- हमको इच्छाधारी नागों को ढूंढना होगा।

ध्रुव- और ये हम कैसे करेंगे?

भेड़िया- मैं एक इच्छाधारी नाग से संपर्क कर सकता हूँ जो यहीं असम में रहता है।

ध्रुव- बहुत बढ़िया! उसको यहाँ बुलाओ।

………………………भेड़िया एक आदिवासी लड़के को बुलाता है।

भेड़िया- शुंडी! यहाँ आओ!

शुंडी- जी भेड़िया देवता!

भेड़िया- शहर जाकर रमन को बोलो कि मैंने बुलाया है।

………………………………शुंडी जाता है और कुछ ही समय बाद रमन को लेकर लौटता है।

रमन- आपने बुलाया भेड़िया जी?

भेड़िया(ध्रुव और बाकि सब की तरफ इशारा करके)- इन सबसे मिलो!

रमन- इन लोगों को तो मैं जानता हूँ, ये तो आपकी तरह रक्षक हैं।

ध्रुव- तो तुम एक इच्छाधारी नाग हो?

रमन- ह..हाँ!

ध्रुव- घबराओ नहीं! हम तुमको कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे! बस इतना बता दो कि इच्छाधारी नागों का निवास स्थान कहाँ पर है?

रमन- व्..वो मैं नहीं बता सकता!

ध्रुव- देखो मैं समझता हूँ कि तुम लोग अपने गुप्त जीवन के बारे में किसी को नहीं बताते पर तुम तो जानते ही हो की इस वक्त पृथ्वी की क्या स्थिति है। अगर इच्छाधारी नागों ने हमारा साथ नहीं दिया तो पूरी दुनिया खतरे में आ जायेगी!

रमन- आप समझे नहीं! मैं नहीं बता सकता क्योंकि मुझे नहीं पता की इच्छाधारियों का निवास स्थान कहाँ है!

डोगा- पर तू तो एक इच्छाधारी ही है ना..फिर तुझे कैसे नहीं पता!

रमन- हर नाग को उस स्थान के बारे में नहीं पता। मैं तो वैसे भी यहीं असम में पैदा हुआ था,मेरी माँ एक इच्छाधारी थी और पिता एक मानव। अभी से छह साल पहले मैं आखिरी बार किसी इच्छाधारी से मिला था।

ध्रुव- क्या हुआ था छह साल पहले?

रमन- यहाँ असम में कुछ विद्रोही नागों ने बड़ा बवाल मचा रखा था। मेरे दोस्त नागू ने मुझसे संपर्क किया और विद्रोहियों का पता पूछा। मुझे पता था कि विद्रोहियों ने जंगल में किस जगह डेरा डाला है, नागू अपने कुछ दोस्तों के साथ आया और मैं उसे यहाँ लेकर आया। यहाँ हमको पता चला कि विद्रोहियों के उस ग्रुप को एक रहस्यमयी व्यक्ति नागपाशा लीड कर रहा है, उस वक्त भेड़िया एक श्राप के कारण सोने की मूर्ति बना हुआ था। एक इच्छाधारी लड़की का रक्त अपने ऊपर गिरने से भेड़िया आज़ाद हो गया और नागराज के साथ मिलकर नागपाशा को हरा दिया।

डोगा- अब ये नागराज कौन है?

ध्रुव- मैं ..जानता हूँ कि वो कौन है! मैं अपने जीवन काल में उससे सिर्फ एक बार मिला हूँ पर वो मुलाकात मैं नहीं भूल सकता जब मेरे सर पर खून सवार था और मैं राघव से बदला लेने के लिए जा रहा था तब नागराज और उसके कुछ साथियों ने मेरी मदद की थी!

तिरंगा- इस नागराज का बड़ा ज़िक्र हो रहा है! लगता है बहुत ही शक्तिशाली इच्छाधारी नाग था।

रमन- नहीं! वो इच्छाधारी नाग नहीं बल्कि मानव नाग था पर उसके अंदर अद्भुत शक्तियाँ थीं। वो बहुत शक्तिशाली था।

ध्रुव- तो अब नागराज को ढूँढने के लिए हमको इच्छाधारियों का पता चाहिए और पता तुम्हारे पास है नहीं।

रमन- मेरे पास नहीं है…पर मैं जानता हूँ की किसके पास है इच्छाधारियों का पता!

ध्रुव- किसके पास है पता?

रमन- मैं उससे छह साल से नहीं मिला हूँ पर इतना पता है कि वो महानगर में रहता है..मेरा दोस्त नागू!

ध्रुव- तो ठीक है, हमारा अगला स्टॉप होगा महानगर, तुम आ रहे हो ना भेड़िया?

भेड़िया- हाँ, एक बार बाहरी दुनिया को भी देखा जाये।

फूजो-अपना ख्याल रखना बेटे।

भेड़िया- चिंता ना करें बाबा, ये सब ख़त्म होने के बाद में जल्द लौटूंगा।

…………………….फिर सब लोग फूजो और कबीले के लोगों से विदा लेकर जेट में बैठते हैं और महानगर की तरफ उड़ पड़ते हैं।तिरंगा, ध्रुव और फेसलेस जेट का कण्ट्रोल संभाल रहे होते हैं। जेट में परमाणु अकेला एक कोने में बैठा होता है, डोगा ये देखकर उसके पास आता है।

डोगा-कोई समस्या है क्या?

परमाणु- कुछ ख़ास नहीं! बस ये भेड़ियामानव, इच्छाधारी, हरु..ये सब मेरे लिए बहुत नया है। मैंने हमेशा या तो मशीनी रोबोट्स का मुकाबला किया है, या फिर बिगड़े हुए अविष्कारों का और गुंडों का।

डोगा- मुझसे पूछो मेरी क्या हालत है। मैं समाज की गंदगियों को निकालकर उसे बेहतर बनाने का प्रयास करता हूँ, भ्रष्ट सिस्टम से लड़ता हूँ। ये तंत्र मंत्र की शक्तियों से लड़ना मेरे लिए भी पहला अनुभव है पर ठीक ही है ज़िन्दगी में कुछ न कुछ अनुभव तो मिलना ही चाहिए।

परमाणु- तुम्हारी इमेज मेरे दिमाग में बहुत ही अलग थी पर उस एल्फ़ा मैन वाली घटना के बाद से मुझे लगता है कि समस्या को जड़ से उखाड़कर तुम ठीक ही करते हो, अगर मैंने भी ये ऐसा ही कदम उठाया होता तो दिल्ली में जान माल का नुक्सान काफी कम हो सकता था।

डोगा- सोचना भी मत!

परमाणु- क्या! क्या कह रहे हो तुम?

डोगा- एक हत्यारा बनने के बारे में सोचना भी मत। तुमको क्या लगता है कि मुझे अच्छा लगता है लोगों को मारना? ये नैतिक मूल्यों के खिलाफ है और पूरी तरह से गलत है।

परमाणु- तो फिर तुम क्यों मारते हो लोगों को?

डोगा- कभी कभी गलत काम करना ज़रूरी हो जाता है और वैसे भी दुनिया में एक डोगा इसलिए है ताकि बाकियों को डोगा ना बनना पड़े। मैं कोई सुपरहीरो नहीं हूँ, एक बागी हूँ जिसने इसलिए बगावत की है ताकि बाकियों को ना करनी पड़े।

परमाणु- सच में भाई! तुम्हारी इज़्ज़त मेरी नज़रों में बढ़ती जा रही है।

डोगा- और अगर फिर कभी एल्फ़ा मैन जैसा कोई सामने आये तो मुझे बुला देना, मैं मार दूंगा, तुमको ये काम करने की आवश्यकता नहीं है।

परमाणु- हा..हा..तो फिर डील रही!

डोगा- हाँ, डील रही।

परमाणु- और एक सवाल! तुमको कैसे पता चला कि मेरी बेल्ट खींचने से मेरी शक्तियां काम नहीं करेंगीं?

डोगा- मैंने तुम्हारी कॉस्ट्यूम को ध्यान से देखा, तुम्हारे हाथों में ब्रेसलेट्स हैं और पैरों में बूस्टर्स पर इनको चलाने का कमांड देने के लिए भी तो कुछ होना चाहिए। तुम्हारी पोशाक में सिर्फ एक बेल्ट ही मुझे ऐसी चीज़ लगी जिससे तुम इन यंत्रों को कमांड दे सकते हो। मुझे विज्ञान के बारे में तो ज़्यादा नहीं पता पर हथियारों के बीच इतना रहकर कोई भी ये अंदाजा लगा सकता है।

परमाणु- वाह! और लोग ध्रुव को दिमागवाला कहते हैं!

ध्रुव- मैंने सुन लिया!

परमाणु- अरे यार! तुम तो बुरा मान गए!

भेड़िया- वाह! ये मनुष्यों की तकनीकें तो काफी आगे बढ़ चुकी हैं, अब तो मैं बीच बीच में शहर घूमने आता रहूंगा।

डोगा- अच्छी बात है, परमाणु को बोल देना तुमको उड़ाकर शहर घुमा दिया करेगा।

भेड़िया- तुम्हारी पोशाक भी विज्ञान की शक्ति का नतीजा है परमाणु पर विज्ञान की असली शक्ति तो ये है..बोलने वाला कुत्तामानव!

……………..सभी लोग हंसने लगते हैं।

डोगा(खीझकर)- ये एक नकाब है, मैं एक मनुष्य ही हूँ।

भेड़िया- तो मनुष्य होकर कुत्ते का नकाब क्यों पहनते हो?

डोगा- ताकि मेरी आइडेंटिटी सुरक्षित रहे और कुत्ता वफ़ादारी का प्रतीक होता है।

भेड़िया- भेड़िये भी वफादार होते हैं, उसका नकाब पहन लिया होता।

डोगा(परमाणु से धीरे से)- ये बेकार में ही मुझसे उलझ रहा है।

परमाणु- अरे शांत भाई शांत! भेड़िया से लड़ने में समझदारी नहीं है!

तिरंगा- सभी लोग ध्यान दें! हम महानगर की सीमा में प्रवेश करने वाले हैं!

…………………..जेट महानगर में प्रवेश करता है।

ध्रुव- मुझे यहाँ से भी हरु के हमले के संकेत मिल रहे हैं, मुझे लगता है कि नागू को हम ढूंढ सकते हैं।

फेसलेस- वो कैसे?

ध्रुव- हरु ने अगर यहाँ पर हमला किया है तो ज़ाहिर सी बात है कि लोगों को सुरक्षा देने के लिए तुम तो यहाँ पर थे नहीं और कोई दूसरा सुपरहीरो भी नहीं है महानगर में। ऐसे में नागू को सामने आना ही होगा।

डोगा- नागू लोगों को बचाने के लिए सामने आएगा ? इतना भरोसा है तुमको? क्योंकि इच्छाधारी नागों ने छह साल से किसी भी प्रकार की हरकत नहीं की है!

ध्रुव- तुमको क्या लगता है भेड़िया, तुम भी तो इच्छाधारी नागों से मिले थे।

भेड़िया- मुझे पूरा यकीन है कि नागू लोगों को बचाने के लिए सामने आएगा!

ध्रुव- तो फिर ठीक है, जहाँ ज़्यादा भगदड़ मची हो उस इलाके में चलते हैं तो नागू अपने आप ही मिल जायेगा।

……………………….ध्रुव को वो जगह ढूँढने में ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती, वो जेट के कम्युनिकेशन सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए सभी न्यूज़चैनल्स को टटोलता है और उसे ऐसी लोकेशन मिल जाती है जहाँ हरु ने हमला किया होता है, वो जेट को उस दिशा में उड़ाता है और अफरातफरी का माहौल उसे नज़र आ जाता है। वो जेट को सावधानी से लैंड करता है और दरवाज़ा खुलता है जिससे सब लोग बाहर जाते हैं।

तिरंगा- मुझे लग रहा था कि सिर्फ दिल्ली की हालत ख़राब है पर इस हरु ने तो हर जगह ही हमला कर दिया है।

ध्रुव- हमले का स्त्रोत पश्चिम दिशा में लगता है, वहां से कोलाहल की ज़्यादा आवाज़ें आ रही हैं।

डोगा- तो देर किस बात की है चलो पास पश्चिम दिशा में।

………………………………………वहां वे लोग देखते हैं कि एक इच्छाधारी जैसा दिखने वाला व्यक्ति जिसका चेहरा और हाथ नीले पड़े हुए हैं और माथे पर एक मणि है, हवा में उड़कर अपनी मणि से सब पर वार कर रहा है।

फेसलेस- न..नागू! ये तो नागू है!

डोगा- तो ये क्या हरु से मिला हुआ है?

फेसलेस- बकवास मत करो! देख नहीं रहे कि उसका चेहरा कैसे नीला पड़ा हुआ है? ज़रूर हरु ने तबाही मचाने के लिए इसके अंदर अपनी हरु ऊर्जा भरी है।

डोगा- अरे तो चिल्लाते क्यों हो भाई! मुझे क्या पता इच्छाधारी नाग कैसा दिखता है और….एक मिनट! इच्छाधारी नाग तो छह साल से किसी के सामने नहीं आये तो तुमको कैसे पता की वो नागू है?

ध्रुव- हाँ फेसलेस! ये बात तुमको कैसे पता है कि ये नागू है? 

Earth 61 Part 8 (लक्ष्य पुरुष डोगा )

EARTH-61 PART 8. ( लक्ष्य पुरुष डोगा ) मुम्बई शहर में रात के दस बजे एक दो व्यक्ति अमन और आकाश घबराकर सुनसान सड़क पर भाग रहे होते है। अमन- …

Written By – Samvart Harshit for Comic Haveli 

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18 Comments on “Earth 61 Part 9 (Shakti Vistar)”

  1. waah samvart bhai maza aa gya…
    aapki story ko padhne mein bahot maza aata h…
    aur ye parts kbhi kbhi is story k liye aur chaah badha dete h
    saare superheroes ek dusre se mil kr duniya bachane k liye aage aa rhe h
    ab dekhna h ki baaki kb tk aa jaate hain….
    bs ek baat bolni thi ki kbhi kbhi aapki story thodi fast ho jati h….
    aur sb kuch mjhe acha laga
    aap ese hi apne paathakon ka manorajan krte rho esi meri manokaamna h

  2. Bhai mann to kar rha tha bas read karta jau aur story kabhi na khatam ho jitni bhibyareef karu kam hai aapserequest thoda aur jaldi jaldi likhiye q ki ab intezar karna zara mushkil sa lag rha hai aage na jane kya hoga

  3. Story to bht hi shandar tareeke se aange badh rahi hai. Maza aa gaya .
    Nagraj ko layo ab jaldi .bina uske story me kuch kami lag rahi hai
    Wo kutta manav wala mazak maza aa gaya

  4. bahut hi lajawab hai.
    ek multistarrer comics padhne ka maja aa gya
    ab jald hi nagaraj bhi ayega.
    fir milke action

  5. बहुत ही बढ़िया संवर्त जी, यह वाला पार्ट कुछ ज़्यादा ही अच्छा था ।

    इसमें सब कुछ बहुत ही शानदार ढंग से दिखाया गया, इस बार का एक्शन भी बहुत ज़बरदस्त लगा पढ़ कर मज़ा आ गया।

    परमाणु और डोगा की बातचीत बहुत मस्त दिखाई गयी, भेड़िया और गैंडे की फाइट बहुत गज़ब लगी ।

    नागु को अब हरुओं ने अपने बस में कर लिया है और वो भी तबाही मचा रहा है, क्या होगा अब ? आखिर नागु को हरुओं ने अपने बस में कैसे किया ? इच्छादारी नागों की अता पता गायब है।

    बस अब मुझे अगले पार्ट का इंतज़ार है, और उससे भी ज़्यादा नागराज का इंतज़ार है ।

  6. संवर्त जी इतने सारे क़िरदारों को साथ लेकर कहानी को जोड़े रखना कोई आप से सीखे, वाह मजा आ गया पढ़ कर

    वो फाइट्स बड़ी मस्त दिखाई आप ने

    और सबसे बड़ी लाइन “बोलने वाला कुत्ता मानव” …. डेढ़ मिनट हंसा हूं पहले फिर बाद में आगे बढ़ा मैं

    हे भगवान …… ऑसम

  7. samvart bhai sacch me awsm story or bhediya k sath baakiyo ka concept bhi accha jhoda lekin dhruv or nagraj ki jhodi ko miss kr rhe he hum …
    or doga wali line acchi thi bolne wala kutta manav us scene ko thoda or nada banate unke jhagde ko

  8. Maine story padhi aur sare reviews bhi padhe
    So jyada kuch bolne k liye hai nahi
    Bas aapne story ko sahi tarike se bandhe rakha hai
    Mujhe bhi thodi fast lagi but wo sirf isliye hota h kyun ki ye ek likhit kahani hai
    Chitrakatha nahi
    Same story with same contents chitrakatha me jyada lagte hain
    Now coming to the part, it’s amazing how Dhruv is looking for all the heroes one by one
    Aur is bar mila jungle ka jallad bhediya
    Mujhe is part me bhi doga ka role bahut pasand aaya
    Khas kar wo ek doga islye bana taki baki ko na banna pade
    Bhediya ki fight sequence bhi pasand aayi
    Aur sare heroes nikal pade hain
    Nagu haru k kabze me hai si next fight to usse hi hai
    Is part ka title confuse kar gya
    Mujhe laga shakti ka intro hoga usme but isme bhediya aaya
    Though the story is awesome and there’s absolutely nothing wrong with it
    Ab jabardasti kuch negative bhi ni mil raha hai
    Superb harshit bhai

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