Earth 61 Phase 2 Part 11

एकादश अध्याय- तबाही के बाद

नागराज तीव्र गति से आकाश में उड़ता हुआ आगे बढ़ रहा था, हवा के ठंडे थपेड़े भी गंभीरता की उन लकीरों को मिटा पाने में असफल हो रहे थे जो कि उस वक्त नागराज के माथे पर थीं। जबसे सुपरवेनॉम ने उसके शरीर में प्रविष्ट किया था, तब से उसका सौम्य शांत चेहरा गुम ही हो गया था जो कभी उसकी पहचान हुआ करता था। बादलों को चीरते हुए उसे अपनी मंज़िल दिखाई दी। समुद्र के बीचों बीच स्थित खूबसूरत नागद्वीप दिखाई दिया, प्राकृतिक सौंदर्य की अद्भुत मिसाल था नागद्वीप। नागराज उड़ता हुआ नीचे उतरा, उसे आकाश से नीचा उतरता देख कुछ प्रहरी चौंक अवश्य गए लेकिन उन्होंने नागराज से कोई भी सवाल जवाब नहीं किया। नागराज उनमें से एक प्रहरी से बोला-
“कहाँ हैं महात्मा कालदूत?”
प्रहरी बिना कुछ बोले नागराज को एक तरफ ले जाने लगा, कुछ ही दूर चलने पर नागराज को दस फ़ीट लंबा और तीन शरीर वाला वह प्रभावशाली सर्प दिखाई दिया जो नागद्वीप के ही दूसरे किनारे पर खड़ा होकर समुद्र में ढलते सूरज को निहार रहा था। उस सर्प ने शायद भांप लिया था कि नागराज आ गया है, वह नागराज की तरफ मुड़ा। नागराज ने उसके मुड़ते ही उसके पांव छुए और बोला-
“प्रणाम महात्मन्।”
कालदूत ने भी उसके सिर पर हाथ रखा और कहा- “जीते रहो वत्स नागराज!”
बाकी नाग प्रहरियों को शायद अंदेशा था कि कालदूत नागराज से कुछ महत्वपूर्ण बातचीत करना चाहते थे इसलिए उन्होंने कालदूत और नागराज को अकेला छोड़ दिया। कालदूत और नागराज धीरे-धीरे समुद्र के किनारे टहलने लगे और वार्तालाप करने लगे।
कालदूत- तुम्हें याद है वत्स कि पंचनागों के साथ तुम यहीं खेला करते थे, समुद्र के किनारे।
नागराज- कैसे भूल सकता हूँ महात्मन? बचपन तो व्यक्ति की सबसे मधुर स्मृति का हिस्सा होता है जिसे भुलाया नहीं जा सकता, मैं पिछली बार तभी नागद्वीप आया था जब आपने मुझे डोगा के विषय में बताया था, उसके बाद मौका ही नहीं मिला। वैसे विसर्पी कहाँ है? मुझे पिछली बार भी उससे मिलने का मौका नहीं मिल पाया था।
कालदूत- विसर्पी फिलहाल तंत्र साधना में व्यस्त है, फिलहाल पूरी नागद्वीप के शासन की ज़िम्मेदारी उसी के कंधों पर है इसलिए उसे अपनी तंत्र विद्या में भी निखार लाना होगा। डोगा की बात भी करेंगे लेकिन तुम मुझे बताओ कि तुम्हें ये ऐसी प्रलयंकारी शक्तियां कहाँ से प्राप्त हुईं कि तुमने समूची इच्छाधारी नागसेना को ही मुम्बई शहर से खदेड़ दिया।
नागराज- ये तो लंबी कहानी है महात्मन लेकिन मैं संक्षेप में सुनाने का प्रयत्न करता हूँ।

फिर नागराज ने कालदूत को सुपरवेनॉम, डॉक्टर करुणाकरण इत्यादि के बारे में बताया लेकिन वह भाग नहीं बताया जहां उसने नागमणि और नागदंत की हत्या कर दी थी।
कालदूत- आश्चर्य, एक ज़हर विशेषज्ञ की वजह से तुम्हें ये शक्तियां प्राप्त हुईं?
नागराज- दरअसल ये शक्तियां मेरे अंदर पहले से मौजूद थीं लेकिन उनका कहना है कि मेरे मास्तिष्क का एक हिस्सा तीक्ष्ण विष के कारण सुप्तावस्था में था जिसे रेडियोएक्टिव कंपाउंड ने सक्रिय कर दिया। इस कारण मैं पहले अपनी 40% दैवीय ऊर्जा ही इस्तेमाल कर पाता था लेकिन अब पूरी 100% दैवीय ऊर्जा मेरे शरीर में आ गयी है।

नागराज का ये कथन सुनकर महात्मा कालदूत ने कुछ सोचा और फिर नागराज से कहा- “आश्चर्य! जब कई वर्ष पहले तुम नागद्वीप पर एक बेहोश बालक के रूप में आये थे तो हमारे नागवैद्य ने तुम्हारी जांच की थी लेकिन उन्हें तुम्हारे मास्तिष्क के किसी हिस्से पर ज़हर का कम ज़्यादा प्रभाव होने की जानकारी नहीं थी।”
यह सुनकर नागराज बोल पड़ा- “जो चीज़ नागवैद्य पता नहीं कर सकते वो आज के युग में विज्ञान के माध्यम से संभव हैं।”
यह सुनकर कालदूत के चेहरे पर हल्की मुस्कुराहट आ गयी, वे बोले- “जो गुर नागवैद्य के पास हैं उनका मुकाबला इस युग का विज्ञान भी नहीं कर सकता, वे चिकित्सा के लिए तंत्र विद्याओं का भी प्रयोग करते हैं जिससे शरीर के महीन से महीन रोग का भी उन्हें झट से पता चल जाता है।”
इससे पहले की नागराज और कालदूत के मध्य नागराज की शक्तियों को लेकर ये बहस बढ़ती, एक प्रहरी आकर बोला- “नागराज का नागाधीश के सामने हाज़िरी देने का समय आ गया है!”
ये सुनते ही कालदूत दुखी हो गए और नागराज एकदम चौंक गया-
“क्या? मेरी हाज़िरी? तो क्या इसीलिए आपने मुझे मानसिक संपर्क करके राजनगर में चल रहे युद्ध के मध्य से ही बुलवा लिया?”
कालदूत ठंडी आह लेकर बोले-
“तुम ना सिर्फ डोगा को पकड़ने में असफल रहे अपितु तुमने मुम्बई में भेजे गए नागाधीश के खास नाग सैनिकों को भी बुरी तरह मारा, तुम्हें अंदाज़ा हो जाना चाहिए था कि तुम पर कार्यवाही होगी।”
नागराज अभी भी हैरान था, वह बोला- “तो क्या मानवों की मदद करने के लिए मुझे भी एक नाग अपराधी करार दिया गया है?”
कालदूत- नहीं वत्स, लेकिन तुम्हारी जवाबदेही तो बनती है।

इसके आगे नागराज ने कालदूत से बहस नहीं की और बिना उनके कुछ कहने का इंतज़ार किये चुपचाप प्रहरी के साथ नागाधीश के नाग न्यायालय की ओर चल दिया, कालदूत बस उसे बेबसी से जाते हुए देख रहे थे। शीघ्र ही वह नागाधीश के समक्ष एक कटघरे में खड़ा था। नाग न्यायालय आम मानव न्यायालयों से बहुत बड़ा था, वहां का माहौल भी आज अलग ही था, इच्छाधारियों से पूरा न्यायालय खचाखच भरा हुआ था। आखिर कौन सा उन्हें रोज़-रोज़ स्वयं रक्षक नागराज न्यायालय में खड़ा मिलने वाला था। न्यायालय में हो रहे शोर-शराबे को रोकने के लिए नागाधीश ने अपना हथौड़ा मेज पर ठोका और बेहद प्रभावशाली और गहरी आवाज़ में कहा- “कृपया शांत हो जाइए!”
इसके बाद नागाधीश को दूसरी बार अपनी बात दोहराने की ज़रूरत नहीं पड़ी क्योंकि सब एकदम शांत हो चुके थे। अब नागाधीश ने कटघरे में खड़े नागराज की तरफ मुड़कर पूछा-
“क्या आप अपनी मुकदमा खुद ही लड़ना चाहेंगे या आपकी तरफ से कोई और लड़ेगा?”
नागराज भी बुलंद आवाज़ में बोला- “जी नहीं, इस बेबुनियाद मुकदमे को मैं ही अंजाम तक पहुंचाऊंगा!”

नागराज के इस जवाब के बाद जनता में खुसर-फुसर चालू हो गयी। इस बार नागाधीश थोड़ी और बुलंद आवाज़ में बोले- “खामोश!”
फिर एक बार फिर पूरे न्यायालय में मौत जैसी चुप्पी छा गयी। नागाधीश के इशारे पर वहां बैठा चालाक सा दिखने वाला नाग वकील विषाधिवक्ता नागराज के विरुद्ध अपनी दलीलें पेश करने के लिए खड़ा हुआ।
विषाधिवक्ता- महान नागाधीश, आज हमारे कटघरे में जो शख़्स उपस्थित है वो ना सिर्फ नागद्वीप पर अपितु पूरी दुनिया में विश्वरक्षक नागराज के नाम से बहुत लोकप्रिय है। नागराज और उसके अन्य साथियों ने लगभग एक वर्ष पहले ही अंतरिक्ष की एक भीषण परामानवीय शक्ति हरु के खिलाफ नागद्वीप पर एक जंग लड़ी थी, हरु प्राणी तो पराजित हो गया लेकिन उस घटना की वजह से नागद्वीप का राज़ पूरी दुनिया के सामने जगजाहिर हो गया, इसी वजह से भारत सरकार से नागद्वीप को एक विशेष राज्य का दर्जा दिलवाने की मांग की जाने वाली थी और महात्मा कालदूत समस्त जगत की बड़ी-बड़ी हस्तियों के सामने ये प्रस्ताव लेकर जाने वाले थे लेकिन इससे पहले एक घटना घट गयी। खुद को डोगा कहने वाले एक बागी मानव ने एक इच्छाधारी की हत्या कर दी और जब उसको जवाबदेही के लिए नाग न्यायालय बुलवाया गया तो उसने विरोध किया, सबसे पहले उनको पकड़ने के लिए गए थे नागराज। तो अब मैं नागराज से जानना चाहूंगा कि जब वो डोगा की तरफ से क्या प्रतिक्रिया मिली उनको?


नागराज- डोगा ने मेरा विरोध किया और आने से इनकार कर दिया। उसके किसी साथी ने पीछे से मुझ पर एन्टी वेनम गन चला दी, जिसकी वजह से मैं शिथिल पड़ गया। डोगा भाग निकला लेकिन किसी तरह से मैं डॉक्टर करुणाकरण की लैब पहुंचा जहां उन्होंने सुपरवेनम को मेरे अंदर प्रविष्ट किया, मेरी नई शक्तियां भी सुपरवेनम के कारण हैं।
विषाधिवक्ता (अपनी ठोढ़ी पर हाथ रखकर)- हम्म, यानी डोगा जैसे तुच्छ मानव ने आप जैसे शक्तिशाली को परास्त किया और वहां से चलता बना। चलिए मान ली आपकी ये बात लेकिन फिर आपका अधूरा काम पूरा करने जिन सर्पों को भेजा गया आपने उन्हीं को पीट दिया, पाश सर्प के बयान के अनुसार तो आपने उसे जान से मारने की कोशिश की।
नागराज- देखिये, मैं उस वक्त क्रोध में था। गलती पूरी तरह से मेरी भी नहीं है, आप ही लोग एक व्यक्ति के पीछे यदि एक शहर में तबाही मचाएंगे तो मेरा फर्ज बनता है कि मैं आपको हर हाल में रोकूँ।
विषाधिवक्ता- वैसे आपको आपकी जानकारी के लिये बता दूं कि इच्छाधारी सर्पों को सख्त हिदायत दी गयी थी कि पूरे प्रकरण में किसी मानव की जान ना ली जाए।
नागराज- इस बात तो सही कैसे ठहरा सकते हैं आप? एक मानव के पीछे इंसानों की पूरी बस्ती को तबाह करने भेज दिया आपने इच्छाधारी सर्पों को, वो भी इसलिए क्योंकि उसने एक घटिया से नाग अपराधी को मार दिया, क्या यह नैतिकता है आपकी?
नागाधीश- ये न्यायालय का नागराज से अनुरोध है कि शब्दों का चयन इस स्थान की मर्यादा को ध्यान में रखकर करें।
नागराज- क्षमा करें नागाधीश, मैं काफी तैश में आ गया था। मेरा कहने का अर्थ सिर्फ इतना है कि डोगा तो मानवों के बनाये कानून भी नहीं मानता, आपको क्या लगता है कि वो किसी मानव आतंकवादी को मारता तो मानवों की अदालत उससे कोई जवाबदेही कर पाती? वो एक बागी है, बागी का अर्थ ही यही है कि जो व्यक्ति खुद को समाज और कानून के दायरे से मुक्त रखता हो।
विषाधिवक्ता- ये मानवों की नहीं नागों की अदालत है श्रीमान नागराज और यहां हर किसी को जवाब देना होगा चाहे वो कोई बागी ही क्यों न हो। हालांकि मैं मानता हूँ कि हमारी तरफ से भी जो तोड़ फोड़ हुई वो सही नहीं थी, तो क्या आप अभी डोगा को हमारे सामने यहां लेकर पेश कर सकते हैं?

विषाधिवक्ता के इस प्रश्न पर नागराज के दिमाग में कुछ समय पहले वाला मंज़र घूम गया, जब छत पर खड़े उस रहस्यमयी नकाबपोश ने नागराज से कहा था “मुझे मारने की सोचना भी मत नागराज, मेरे पास करुणाकरण की लैब के बाहर की वह वीडियो फुटेज है जिसमें साफ साफ दिख रहा है कि तुमने नागमणि और नागदंत की हत्या की है। इधर तुम मुझे मारोगे और उधर सोशल मीडिया पर तुम्हारा वीडियो वायरल हो जाएगा। एक नायक का अंत तब नहीं होता जब उसके शरीर का अंत हो जाये क्योंकि शरीर का अंत होने पर भी एक नायक लोगों के किस्से कहनियों में अमर हो जाता है, एक नायक का अंत तब होता है जब लोगों के उस पर किये गए विश्वास का अंत हो जाये!”
नागराज मन ही मन कुछ सोचकर बोला- “मैं डोगा को यहां पेश नहीं कर सकता, वह एक बागी है और उसका किया गया कृत्य मेरी नज़रों में सही है। उस नाग अपराधी को मृत्युदंड मिलना ही चाहिए था।”

विषाधिवक्ता ने मुस्कुराकर नागाधीश की ओर देखा और कहा- “नागों के हितैषी माने जाने वाले नागराज ने आज हमको छोड़कर मानवों का पक्ष लिया है नागाधीश! ये दर्शाता है कि अब नागराज को हम नागों की कितनी परवाह है, इसलिए मैं आग्रह करता हूँ कि नागद्वीप से नागराज को सदा के लिए निष्कासित कर दिया जाए और आगे से डोगा के मामले में ना पड़ने की हिदायत दी जाए।”
नागाधीश गहन चिंतन में चले गए, फिर कुछ क्षण बाद वे बोले- “नागराज ने भले ही आज एक मानव का साथ दिया है लेकिन उसके कारण को हम पूरी तरह दरकिनार नहीं कर सकते। डोगा भी उन रक्षकों में से एक है जिसने हरु के खिलाफ युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी, इसके लिए नागद्वीप उसका आभारी है लेकिन यहां न आकर डोगा ने ना सिर्फ नाग न्यायालय की अवहेलना की है बल्कि ये भी बता दिया है कि भविष्य में वह इसी प्रकार की निरंकुश हरकतें करता रहेगा और उसे रोकने वाला कोई नहीं होगा। नाग न्यायालय नागराज से अंतिम बार पूछती है कि क्या वे डोगा को यहां लाने में सक्षम हैं या नहीं?”

नागराज (गहरी सांस लेकर)- नहीं!
नागाधीश- तो फिर ठीक है, नागराज को भी डोगा के साथ साथ नाग अपराधी घोषित किया जाता है, उससे उनकी सारी शक्तियां छीनकर उसे एक आम व्यक्ति जैसा जीवन जीने का आदेश दिया जाता है।

इतना सुनते ही नागराज तैश में आ गया- “मैंने जो किया वो मेरे हिसाब से सर्वथा उचित था, मेरी शक्तियां मेरी संपदा हैं जिन्हें मुझसे कोई अलग नहीं कर सकता!”

ऐसा जवाब सुनकर नागाधीश हाथ में हथौड़ा लिए उठ गए और भारी लेकिन बुलंद आवाज़ में कहा- “ये हथौड़ा देख रहे हो नागराज, इसके अंदर ऐसी तंत्र शक्तियां हैं जो ब्रह्मांड के किसी भी इच्छाधारी के नाग और मानव रूप को खंडित कर दें, तेरी भला क्या बिसात है!”
फिर नागाधीश ने अपने हथौड़े से निकली ऊर्जा की पतली सी किरण को नागराज के शरीर में प्रविष्ट किया, नागराज के शरीर में एक हलचल होने लगी, वह बोला “य..ये आप ठीक नहीं कर रहे नागाधीश!”


नागाधीश उसी प्रकार से हथौड़े की ऊर्जा नागराज के शरीर पर केंद्रित करते हुए बोले- “सही और गलत की समझ हमें तुमसे ज़्यादा है!”
अचानक ही नागराज का मानव रूप और इच्छाधारी रूप कुछ क्षणों के लिए विखण्डित होते दिखाई दिए, सब लोग आश्चर्य से उस नज़ारे को देख रहे थे। नागाधीश के चेहरे के भाव देखकर ही पता लग रहा था कि वे हथौड़े की पूरी ताकत का इस्तेमाल कर रहे हैं, उधर नागराज भी बुरी तरह तड़प रहा था, इच्छाधारी रूप और मानव रूप के पूरी तरह अलग होने में ज़्यादा समय नहीं बचा था लेकिन तभी नागराज के अलग हुए इच्छाधारी रूप ने नागाधीश के ऊपर ध्वंसक सर्प से निशाना साधा। “धम्म” की आवाज़ के साथ नागाधीश अपने हथौड़े समेत पीछे की ओर गिरे और दूसरी तरफ नागराज के मानव और नाग रूप वापिस जुड़ गए। नागाधीश ने वापिस उठकर नागराज को देखा, अब नागराज का क्रूर रूप उस पर हावी हो चुका था, उसके चेहरे पर कुटिल मुस्कान थी और आंखें हरी अग्नि लपटों के कारण दहकते अंगारों जैसी प्रतीत हो रही थीं।
नागराज अब हवा में उड़ता ठीक नागाधीश के ऊपर पहुंचा और बोला- “तू मेरी शक्तियां मुझसे अलग करेगा? मैं तेरी जान को तुझसे अलग कर दूंगा!”
अगले ही पल नागराज के हाथ की मजबूत पकड़ नागाधीश की गर्दन पर आ कसी, अब नागराज धीरे-धीरे हवा में ऊपर उठता जा रहा था और उसके साथ उठता जा रहा था नागाधीश, सभी इच्छाधारी ये देखकर सहम गए थे। तभी नागाधीश ने अपने हाथ में पकड़े हथौड़े द्वारा तेज़ी से नागराज पर प्रहार कर दिया, प्रहार इतना भीषण था कि नागराज काफी पीछे चला गया लेकिन फिर हवा में ही उसने खुद को संतुलित कर लिया, नागाधीश ने वापस अपने पांव ज़मीन पर जमा लिए। नागाधीश ने नागराज की तरफ देखकर कहा- “मेरा हथौड़ा तेरी शक्तियों को छीन नहीं पाया तो क्या हुआ, तुझे पीट पीटकर अधमरा तो कर ही सकता है!”
नागराज फिर से उड़ता हुआ नागाधीश की तरफ बढ़ा लेकिन हथौड़े के तंत्र वार ने वापिस उसे पीछे धकेल दिया।
नागाधीश- मुझे पता था कि तू शक्तिशाली है लेकिन इतनी भीषण शक्तियों का स्वामी है, ये आज पता चला। अपनी हज़ार साल की उम्र में मुझे तू पहला ऐसा व्यक्ति मिला है जो मेरे हथौड़े की तंत्र शक्ति का विरोध कर पाया है।
नागराज- बहुत गुमान है तुझे तेरे हथौड़े पर, मैं वही तुझसे अलग कर दूंगा।

इतना कहकर नागराज इच्छाधारी कणों में परिवर्तित हो गया, नागाधीश को कुछ समझ में आता, उससे पहले ही वह नागाधीश के पीछे प्रकट हुआ और नागाधीश को एक शक्तिशाली लात जड़ दी। नागाधीश अलग गिरे और उसका हथौड़ा अलग, फिर नागराज हथौड़े के पास पहुंचा और उठाने की कोशिश की लेकिन हथौड़ा हिला तक नहीं। नागाधीश धूल झाड़ते हुए उठ खड़े हुए और नागराज की तरफ देखकर हंसने लगे-
“हाहाहा, जिस हथौड़े को तुम उठाने का प्रयत्न कर रहे हो वह ब्रह्मांड की सबसे भारी धातु गर्भीरा द्वारा निर्मित है जिसके एक चम्मच पदार्थ का वजन सौ हाथियों के बराबर होता है। मैं एक तंत्र शक्ति साधक हूँ और इस हथौड़े में भी तंत्र शक्ति भरी है जिसकी मदद से मैं इसे उठा पाता हूँ अन्यथा इसे बल से उठा पाना तो ब्रह्मांड के सबसे खतरनाक इच्छाधारी नाग कालदूत तक के लिए संभव नहीं है।”
नागराज ने एक क्षण नागाधीश को देखा और फिर धरती पर पड़े उस हथौड़े को, फिर उसकी दोनों भुजाएं हथौड़े पर जम गयीं, वह हथौड़े को उठाने के लिये अपनी शारीरिक शक्ति का एक एक कतरा लगा देना चाहता था, उसके दांत आपस में बुरी तरह भिंच गए और पांव धरती में धंसने लगे, उसकी भुजाएं फड़क रही थीं। तब नागाधीश के साथ साथ वहां मौजूद तमाम इच्छाधारियों ने वह दृश्य देखा जिसे देखने की कल्पना भी कोई नहीं कर सकता था…..गर्भीरा धातु द्वारा निर्मित हथौड़ा उठाने का असंभव काम नागराज ने कर दिखाया था, हालांकि इसके लिए उसकी दोनों बाजुओं के साथ साथ पूरे शरीर का भी जोर लग रहा था लेकिन अब वह हथौड़ा लेकर नागाधीश की तरफ बढ़ रहा था।
नागाधीश सिर्फ आश्चर्य से उसे अपनी तरफ बढ़ता देख रहे थे।
“आ..असंभव! ये नहीं हो सकता!”
नागराज अब नागाधीश के बिल्कुल पास पहुंच चुका था और नागाधीश पर उन्हीं के हथौड़े का भरपूर वार करने वाला था कि तभी नाग न्यायालय में एक रौबीली आवाज़ गूंजी- “ठहरो!”
नागराज ने मुड़कर देखा कि कालदूत अफरा तफरी मची देखकर नाग न्यायालय के अंदर आ गए थे। उन्होंने नागराज से कहा- “नागाधीश को छोड़ दो नागराज अन्यथा मुझसे युद्ध करने के लिए तैयार हो जाओ!”
नागराज ने एक पल नागाधीश को देखा और अगले ही पल कालदूत को, बड़ी मुश्किल से उठाया हुआ हथौड़ा उसने वापिस छोड़ दिया जिसके धरती पर गिरने से कुछ दरारें पैदा हो गईं। अब तक नाग न्यायालय इस अफरा तफरी के कारण काफी हद तक खाली हो चुका था।
फिर नागराज कालदूत की तरफ देखकर बोला- “आपके कहने पर मैं यहां आया कालदूत लेकिन इन लोगों को मेरी बात समझ में ही नहीं आ रही।”
कालदूत- तुम्हें हो क्या गया है नागराज? तुम पहले तो ऐसे नहीं थे, इन नई शक्तियों ने तुम्हें बदल दिया है।
नागराज- हो सकता है महात्मन लेकिन हर बदलाव अच्छे के लिए ही होता है।
नागाधीश- हर बदलाव नहीं नागराज, तुम्हें पता भी है कि तुम्हारे शरीर में क्या है जिसके कारण तुम्हें इतनी अद्भुत शक्तियां मिली हैं?
नागराज- जी हां, ये सुपरवेनम नाम का सीरम है जिसके अंदर प्रविष्ट रेडियोएक्टिव कंपाउंड ने मुझे ऐसी शक्तियां दी हैं।
नागाधीश- जिसने भी तुम्हारे शरीर में सुपरवेनम प्रविष्ट करवाया है वह बहुत ही चालाक व्यक्ति है नागराज, तुम्हारे शरीर की शक्तियों का कारण कोई रेडियोधर्मी पदार्थ नहीं बल्कि “हलाहल” है।

ये सुनकर नागराज और कालदूत दोनों चौंक गए।
कालदूत- य..ये आप क्या कह रहे हैं नागाधीश? भला नागराज के शरीर में हलाहल कहाँ से आया?
नागाधीश- उसी सुपरवेनम नामक सीरम के कारण जिसका जिक्र अभी-अभी नागराज ने किया। तुम तो जानते ही हो कालदूत कि मेरे अंदर ब्रह्मांड के हर प्रकार के विष को दूर से ही भांप लेने की क्षमता है, नागराज के शरीर के अंदर देव कालजयी के विष के साथ-साथ हलाहल भी प्रवाहित हो रहा है।

नागराज अभी भी भौचक्का था, वह बोला- “ल..लेकिन ऐसा नहीं हो सकता, डॉक्टर करुणाकरण मेरे साथ इतना बड़ा धोखा नहीं कर सकते!”
कालदूत नागराज को समझाने के लिए बोले- “देखो नागराज! तुम्हें संयम से काम लेना होगा, तुम..”
लेकिन कालदूत की बात सुनने के लिए नागराज वहां पर रुका ही नहीं, “वूsssss म” की तेज आवाज के साथ उड़कर नाग न्यायालय की छत को तोड़ता हुआ बाहर निकल गया।
नागाधीश ऊपर टूटी हुई छत देखकर बोले- “मैं मानवों के लिए प्रार्थना करूँगा की उन्हें नागराज के इस प्रलयंकारी रूप का सामना न करना पड़े।”

अंधेरा छा गया था, रात की कालिमा ने महानगर के घने आबादी क्षेत्र से दूर बने स्नेक पार्क को भी ढक लिया था। करुणाकरण अपनी लैब में बैठे माइक्रोस्कोप से कुछ जांच कर रहे थे। लैब में हल्की रोशनी थी, अचानक उनके कंधे पर किसी ने हाथ रखा, वे एकदम से चौंककर पीछे मुड़े तो उन्होंने देखा कि नागराज खड़ा था।
करुणाकरण- ऐसे मत आया करो नागराज! तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी थी।

नागराज के चेहरे पर हल्के क्रोध के भाव थे, वह करुणाकरण से बोला- “वह बच्चा कहाँ है डॉक्टर साहब?”
करुणाकरण- उस बच्चे के बारे में मैंने राजनगर की कमांडो फोर्स से संपर्क किया था, मुझे लगा था कि शायद उनको कुछ पता हो। कोई करीम और पीटर आये और वे बच्चे को राजनगर में स्थित जेनेटिक रिसर्च सेंटर में ले गए, वहां शायद वे उसकी तेज़ी से बढ़ती उम्र पर कुछ पाबंदी लगा सकें।
नागराज- हम्म, अच्छी बात है। यानी कि अब मैं आपसे खुलकर बात कर सकता हूँ।
करुणाकरण- खुलकर? किस बारे में?
नागराज- क्या आप दोहराएंगे कि सुपरवेनम आपने कैसे बनाया था?
करुणाकरण- म..मैं तुमको बता तो चुका हूँ नागराज, दुनियाभर के तीक्ष्ण नागों के विष के साथ कुछ रेडियोएक्टिव कंपाउंड मिलाकर……

करुणाकरण की बात पूरी होने से पहले अचानक ही नागराज ने उसकी गर्दन पकड़ ली और उसे पीछे वाली दीवार से चिपका दिया, नागराज की आंखों में क्रोध साफ नजर आ रहा था, इस अप्रत्याशित हरकत से डॉक्टर करुणाकरण एकदम घबरा गए थे।
नागराज क्रोधित स्वर में बोला- “जल्दी बता करुणाकरण, सुपरवेनम में क्या था? अगर तेरे हलक से सच के सिवा कुछ और निकला तो तेरा नागमणि और नागदंत से भी बुरा हश्र करूँगा।”
नागराज की मजबूत पकड़ के कारण करुणाकरण की सांसें हलक में ही दम तोड़ रही थीं, वह बड़ी मुश्किल से बोल पाया- “म..मैं बताता हूँ, सब बताता हूँ! प्लीज अपने शिकंजे से आज़ाद कर दो मुझे!”
नागराज को भी अहसास हुआ कि उसने ज़रूरत से ज़्यादा मजबूती से उसकी गर्दन पकड़ ली थी तो उसने एकदम से करुणाकरण को छोड़ दिया, पकड़ से छूटते ही करुणाकरण ज़मीन पर बैठकर खांसने लगा। फिर वह सामने पड़ी कुर्सी पर जाकर बैठ गया, उसकी सांसें अभी तक फूल रही थीं। वह बिना एक पल गंवाए बोला-
“कोई तुम्हारे पीछे है नागराज, किसी को तुम्हारी एक एक जानकारी चाहिए। उस रहस्यमय व्यक्ति ने मुझे भी ब्लैकमेल किया था, उसने ही मुझे एक कंटेनर में हलाहल विष लाकर दिया, उसने उसकी मदद से मुझसे सुपरवेनम बनाने को कहा। उसने मुझे धमकी दी कि अगर मैंने ऐसा नहीं किया तो वह मेरे पूरे परिवार को खत्म कर देगा इसलिए मुझे उसकी हर बात माननी पड़ी।”

नागराज (कौतूहल से)- और क्या-क्या बातें मानीं आपने उसकी?
करुणाकरण- उसने कुछ दिन पहले तुम्हारा वीडियो फुटेज मांगा जिसमें तुम नागमणि और नागदंत को मार रहे हो, वह दृश्य मेरी लैब के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरा में कैद हो गया था। इसके अलावा उस दिन मुम्बई में इच्छाधारियों के दंगे से पहले जो तुम्हारा डोगा से मुठभेड़ का वीडियो फुटेज लीक हुआ था, वह भी शायद उसी ने किया था। उस व्यक्ति ने तुम्हारे ऊपर बहुत गहन रिसर्च की है नागराज, तुम्हारी शक्तियां, तुम्हारा विष, ये सब उसके लिए हमेशा से कौतूहल का विषय रहा और मुझे भी उसे सब बताना पड़ा वरना मेरे परिवार को खतरा था।
नागराज- यानी…यानी मेरे अंदर सुपरवेनम प्रविष्ट करवाना एक प्लानिंग का हिस्सा था लेकिन आपको कैसे पता था कि मैं विष की कमजोरी के चलते आपके पास ……उफ्फ! अब मेरी समझ में सब चीजें आयी हैं! ज़रूर उसी व्यक्ति ने डोगा को एंटीवेनम उपलब्ध करवाया था, उसे पता था कि एंटीवेनम प्रविष्ट होते ही मैं सीधा तुम्हारे पास इलाज के लिए आऊंगा और तुमको मौका मिल जाएगा सुपरवेनम के रूप में हलाहल मेरे शरीर में पहुंचाने का। अब मुझे बस इतना बताओ डॉक्टर कि तुम्हें कैसे पता चला कि हलाहल जब देव कालजयी के विष से मिलेगा तो मुझे इतना शक्तिशाली बना देगा।
करुणाकरण- दरअसल मुझे ये नहीं पता था कि तुम पर शारीरिक रूप से क्या प्रभाव पड़ेगा लेकिन तुम्हारी शक्तियों और हलाहल के गहन विश्लेषण के बाद इतना ज़रूर जानता था कि कालजयी के दैवीय विष से मिलकर हलाहल इतनी दैवीय ऊर्जा तुम्हारे अंदर पैदा कर देगा जिसे तुम्हारा मानव मस्तिष्क झेल नहीं पायेगा। उस दिन जब तुमने नागमणि और नागदंत को मारा तो मुझे मेरा प्रयोग सफल होता दिखाई दिया। तुम अपनी क्रूरता को काबू में नहीं रख पा रहे थे और दिन प्रतिदिन क्रूरता बढ़ती जा रही थी। जो मैंने तुमको बताया था कि दैवीय ऊर्जा तुम्हारे अंदर पहले से ही विद्यमान थी लेकिन सुपरवेनम के जाते ही वह सक्रिय हो उठी, ये बात भी पूरी तरह से झूठ नहीं थी। कालजयी के दैवीय विष की पूरी ऊर्जा को सही में तुम्हारा शरीर पूरी तरह ग्रहण नहीं कर पा रहा था, मस्तिष्क का एक हिस्सा निष्क्रिय होने की बात झूठ थी, मस्तिष्क का इस प्रकरण में कोई लेना देना नहीं था लेकिन तुमको पूरी बात खुलकर नहीं बता सकता था मैं। खैर, हलाहल के तुम्हारे शरीर के भीतर जाते ही तुम्हारी सुप्त दैवीय ऊर्जा सक्रिय हो उठी और तुम्हारे शरीर में ऐसी भीषण दैवीय ऊर्जा का संचार हुआ जिसको संभाल पाना आम मानव शरीर के बस की बात नहीं है।
नागराज- यानी कि आपको पता था कि मैं एक राक्षस बन जाऊंगा?
करुणाकरण- सच बताऊं तो मेरी गणना के अनुसार तो तुम्हें इस वक्त जीवित ही नहीं होना चाहिए था और यही सोचकर उस रहस्यमयी व्यक्ति ने भी मुझे हलाहल थमाया था लेकिन तुम्हारे विलक्षण खूबियों वाले शरीर ने तुमको बचा लिया। मैंने गलत कैलकुलेशन की और अब इसका खामियाजा पूरी दुनिया भुगतेगी क्योंकि तुम अब पहले वाले नागराज नहीं रहे, अब तुम बन गए हो…..खलनायक नागराज।
नागराज (गहरी सांस लेकर)- फिलहाल अगर आप मेरा खलनायक वाला रूप नहीं देखना चाहते तो बताइये की यह व्यक्ति दिखने में कैसा था।
करुणाकरण- पता नहीं, यह मुझसे ज़्यादातर बातें फोन पर करता था लेकिन जब भी आता था, एक लंबा से ओवरकोट पहनकर आता था, ओवरकोट के अंदर उसका पूरा शरीर काले इनर जैसे वस्त्र से ढका होता था। चेहरे से लेकर पांव तक, जिसके कारण मैं उसे पहचान तो नहीं सका लेकिन उसकी आवाज़ बहुत अजीब थी।
नागराज- अजीब मतलब?
करुणाकरण- मतलब मशीनी आवाज़, उस आवाज़ में कोई भाव नहीं था, ऐसा लगता था जैसे कोई रोबोट बात कर रहा हो।
नागराज- वो नकाबपोश जो मुझे मुम्बई में मिला था, उसके पास नागमणि और नागदंत की हत्या की इस लैब के सीसीटीवी कैमरा में कैद फुटेज थी। ज़रूर वही है इन सभी घटनाओं का ज़िम्मेदार। मैं मुम्बई में फैले सभी जासूस सर्पों से मानसिक संपर्क स्थापित करके उन्हें उस आदमी का हुलिया बताकर उनके पीछे लगा देता हूँ, अगर वैसी वेशभूषा वाला व्यक्ति फिर अगर मुम्बई में दिखाई दिया तो सबसे पहले मुझे खबर पहुंचेगी।
करुणाकरण- एक मिनट? नकाबपोश? कौन नकाबपोश?
नागराज (क्रोध से करुणाकरण की तरफ देखकर)- उसकी चिंता आप मत कीजिये। वो जो भी है, मैं उसे ढूंढ निकालूंगा और फिर उसे ऐसी मौत दूंगा की कोई नागराज के खिलाफ जाने से पहले सौ बार सोचेगा।

इसके बाद नागराज हवा के झोंके के समान तेज़ी से उड़कर लैब से निकल गया, उसका यह वक्तव्य करुणाकरण को अंदर तक हिला गया। वह समझ गए कि नागराज अब रक्षक नागराज नहीं रहा, वह कुछ और बन चुका है और उसे ऐसा बनाने में उस रहस्यमयी व्यक्ति के अलावा उनका भी बहुत दोष है। उड़ते समय नागराज के दिमाग में भी कई विचार आ जा रहे थे।
“इतनी जबरदस्त प्लानिंग! पहले उस अजनबी ने उसके शरीर का गहन अध्ययन करके ये पता किया कि जब हलाहल मेरे शरीर के अंदर प्रविष्ट होगा तो भीषण ऊर्जा उत्पन्न होगी जिसे शायद मेरा शरीर संभाल ना पाए, हलाहल से उत्पन्न ऊर्जा के प्रवाह एक कारण मेरे दिमाग पर थोड़ा असर ज़रुर हुआ लेकिन मैं खत्म होने के बजाय और शक्तिशाली हो गया, ये देखकर अजनबी ने मुझे मारने के बजाय मुझे बदनाम करने की साजिशें रचीं जिसके तहत उसने चुपचाप मेरी और डोगा की भिड़ंत की वीडियो वायरल कर दी और अब नागमणि और नागदंत की हत्या की वीडियो भी उसके पास है, मुझे जल्द से जल्द उस तक पहुंचना होगा।”

इंस्पेक्टर स्टील अपनी स्पेशल बाइक पर तेज़ी से ध्रुव के घर की तरफ बढ़ रहा था, उसके शरीर को अनीस ने पूरी तरह रिपेयर कर दिया था लेकिन जब उन दोनों ने न्यूज़ चैनल के माध्यम से वह दिल दहला देने वाली खबर सुनी तो उससे रहा ना गया। जब वह राजनगर की चौड़ी सड़क पर बाइक की सवारी कर रहा था तो उसे अपने आसपास जले हुए, टूटे फूटे मकान दिख रहे थे। सैकड़ों की संख्या में मरे हुए पुलिस वालों के शव दिख रहे थे, कुछ आम लोगों के भी शव थे। सभी घायलों को स्ट्रेचर द्वारा एम्बुलेंस में भरा जा रहा था, ऐसी कई एम्बुलेंस उसे शहरों में कई जगह दिख रहीं थीं। ये सब विक्षिप्तों की कारस्तानी थी, जिनको वक्र ने तबाही मचाने के लिए खुला छोड़ दिया था। बड़े-बड़े मीडिया हाउस राजनगर में हुई तबाही को कवर कर रहे थे, ये मुम्बई में इच्छाधारियों के दंगों से भी बड़ी खबर बन गयी थी।
तेज़ी से बाइक चलाता स्टील जल्द ही अपने गंतव्य तक पहुंचा, गंतव्य था सुपर कमांडो ध्रुव का घर जो कि पूरी तरह से तबाह हो चुका था। फायर बिग्रेड वाले घर में लगी आग को बुझा रहे थे, पुलिस वाले भी वहां बड़ी संख्या में मौजूद थे। इंस्पेक्टर स्टील जब बाइक खड़ी करके घर के पास पहुंचा तो एक हवलदार दौड़ा दौड़ा उसके पास आया।
“सलाम साहब!”
स्टील जलते हुए घर को घूरता हुआ बोला- “यानी कि न्यूज़ वाले सच कह रहे थे।”
अब हवलदार का गला भर आया था।
“जी साहब! आज राजनगर ने एक दिलेर, जांबाज और ईमानदार कमिश्नर को खो दिया है। सुपर कमांडो ध्रुव ने अपने पूरे परिवार को खो दिया है।”
स्टील- लेकिन ध्रुव है कहाँ?
हवलदार- वो तो बहुत पहले ही यहां से चले गए साहब लेकिन हमको घटनास्थल पर ये मरा पड़ा मिला।

हवलदार ने एक तरफ इशारा किया, जब स्टील ने उस लाश को देखा तो वह हैरान रह गया। वक्र का चेहरा पूरी तरह से लहूलुहान था और उसका निर्जीव शरीर स्टील के सामने ज़मीन पर पड़ा हुआ था।
स्टील- क्या हुआ था यहां?
हवलदार- साहब देखने वालों के अनुसार ध्रुव ने इसकी हत्या की है।

इस पर स्टील ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, बस वह वक्र की लाश को घूरता रहा, फिर हवलदार की तरफ मुड़कर बोला- “इसे यहां से हटवाने का इंतज़ाम करो!”

हवलदार- लेकिन साब! हमें सूचना मिली थी कि ध्रुव, डोगा, परमाणु, तिरंगा, कुख्यात अपराधी रोबो और भी कई सारे लोग यहां जमा हैं लेकिन जब हम यहां आए तो इस लाश के अलावा हमें कोई नहीं मिला। ये आखिर है कौन?
स्टील- ये राजनगर में हुई इस तबाही का जिम्मेदार है। राजनगर की तबाही का भी और एक नायक के जीवन की तबाही का भी। अब जैसा कि मैंने कहा, इसे यहां से हटाने का इंतज़ाम करो।

फिर स्टील खुद मुड़कर वहां से जाने लगा, अब उसके करने के लिए वहां कुछ नहीं था। कुछ ही घंटों में राजनगर का पूरा नक्शा बदल गया था, तबाही और बर्बादी का इससे खौफनाक मंज़र इस शहर ने नहीं देखा था। अब स्टील समझ गया था कि ध्रुव कहाँ पर था।

मठ में अलग ही माहौल था, रात हो चुकी थी इसलिए जगह-जगह मशालें जलती हुई दिख रही थीं। मठ की सारी जनता दरबार के सामने एकत्रित थी। जनता को एक विशेष दायरे के अंदर जाने की अनुमति नहीं थी जहां खूँखार हन्टर्स खड़े हुए थे। ग्रेड A और ग्रेड B हन्टर्स सीढ़ियों के पास खड़े थे लेकिन कोई भी हंटर सीढ़ी के ऊपर नहीं था, सीढ़ियों से ऊपर जाकर दरबार के बड़े से स्वर्णद्वार के एकदम बाहर एक रस्म निभाई जा रही थी…….सुपर कमांडो ध्रुव को मठाधीश बनाने की रस्म। ध्रुव अब अपने नीले पीले कॉस्ट्यूम में नहीं बल्कि मठाधीश के पारंपरिक परिधानों में खड़ा था, फिरोज़ी रंग की धोती और ऊपर के शरीर पर एक अंगवस्त्र धारण किया हुआ ध्रुव हकीम कीमियादास के पीछे-पीछे मठाधीश बनने की प्रतिज्ञा ग्रहण कर रहा था। उसके आसपास परमाणु, डोगा, अदरक चाचा, तिरंगा, लोमड़ी, चीता, रोबो और नताशा खड़े हुए थे। ध्रुव हकीम जी के बोले गए वाक्य दोहरा रहा था, उसका हाथ प्रतिज्ञा लेते वक्त एक मशाल के ऊपर था लेकिन उसके चेहरे से लग नहीं रहा था कि उसको तपिश महसूस हो रही है।

कीमियादास- मैं मठाधीश ध्रुव…
ध्रुव- मैं मठाधीश ध्रुव
कीमियादास- ये संकल्प लेता हूँ कि…
ध्रुव- ये संकल्प लेता हूँ कि
कीमियादास- मैं इस मठ की…
ध्रुव- मैं इस मठ की
कीमियादास- पूरे तन, मन, धन से सुरक्षा करूंगा…
ध्रुव- पूरे तन,मन,धन से सुरक्षा करूंगा
कीमियादास- मेरा हर छोटा या बड़ा निर्णय…
ध्रुव- मेरा हर छोटा या बड़ा निर्णय
कीमियादास- मठ की सुदृढ़ता को सुनिश्चित करेगा..
ध्रुव- मठ की सुदृढ़ता को सुनिश्चित करेगा
कीमियादास- मैं जो भी नियम बनाऊंगा…
ध्रुव- मैं जो भी नियम बनाऊंगा
कीमियादास- वह मठ के हित को ध्यान में रखकर बनाऊंगा।
ध्रुव- वह मठ के हित को ध्यान में रखकर बनाऊंगा।

प्रतिज्ञा पूरी हो चुकी थी, हकीम कीमियादास ने एक बड़ी-सी थाली ली और ध्रुव का तिलक कर दिया। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद कीमियादास सीढ़ियों से नीचे खड़े हंटर्स और मठ की आम जनता की तरफ देखते हुए बोले “समारोह सम्पन्न हुआ, आज से ध्रुव हैं हमारे नए मठाधीश!”
इतना सुनते ही अब तक शांत खड़ी जनता खुशी से चीख पड़ी, ध्रुव मशाल पर से हाथ हटा चुका था लेकिन उसके चेहरे के भाव नहीं बदले थे। सैकड़ों, हजारों लोगों के लिए आज का दिन किसी उत्सव से कम नहीं था, एक बड़े पैमाने पर ऐसा हर्षोल्लास बहुत कम देखने को मिलता था।
इस हर्षोल्लास को दरकिनार करके ध्रुव अदरक की तरफ मुड़ा और बोला-
“मैं चाहता था कि आप और डोगा यहां रुकें लेकिन मैं समझ सकता हूँ कि मुम्बई में आपकी आवश्यकता है, वहां के वर्तमान हालात मुझे पता हैं।”
अदरक ध्रुव के कंधे पर हाथ रखकर बोले-
“मैं जानता हूँ कि तेरा मुश्किल समय चल रहा है बेटे लेकिन अगर हम मुम्बई को छोड़कर यहां रुके तो शायद मुम्बई हमें कभी माफ ना करे लेकिन एक बात याद रखना, तू जब भी मुझे याद करेगा, मुझे अपने साथ खड़ा पायेगा।”
फिर ध्रुव चीता की तरफ मुड़ा और बोला- “तुमने भी मेरा बहुत साथ दिया मित्र, तुम अंगरक्षक पद को छोड़कर मठ के बाहर एक नया जीवन शुरू करना चाहते हो, मैं समझ सकता हूँ।”
चीता बोल पड़ा- “मेरे इस निर्णय को अन्यथा मत लेना ध्रुव लेकिन मैंने पिछ्ले मठाधीश से गद्दारी की है, कारण चाहे जो भी हो लेकिन एक अंगरक्षक से उम्मीद की जाती है कि वो अपने मठाधीश का हर सही गलत काम में साथ दे। मैं अगर ये पद दोबारा ग्रहण करूँगा तो ये मुझे मेरे विश्वासघात की याद दिलाता रहेगा। मैं काले डकैतों के साथ मुम्बई जाना पसंद करूँगा।”
लोमड़ी भी बीच में बोल पड़ी- “मैं भी स्त्री योद्धा विभाग छोड़कर मुम्बई जाना चाहूंगी, अब मैं अपनी शर्तों पर जिऊंगी।”
अदरक ने ध्यान दिया कि लोमड़ी और डोगा ने एक दूसरे का हाथ पकड़ रखा था।
ध्रुव- ठीक है, मैं तो आप सब मित्रों को रोकना चाहता था लेकिन जैसी आप सबकी मर्ज़ी।

परमाणु आगे बढ़कर अदरक से बोला- “आपका हेलीकॉप्टर तो नष्ट हो गया, मैं आपको और डोगा को मुम्बई छोड़ देता हूँ।”
फिर परमाणु तिरंगा की तरफ मुड़ा जो किसी गहन चिंतन में डूबा था- “चलो तिरंगा, मैं तुमको दिल्ली छोड़ दूंगा!”
तिरंगा परमाणु की तरफ मुड़ा और बोला- “आप लोग जाइये, मैं यहीं रुकूँगा।”
सभी उसका ये निर्णय सुनकर थोड़ा चौंक गए, तिरंगा बोला-
“ध्रुव को इस कठिन समय में खूँखार हन्टर्स के मध्य किसी दोस्त की आवश्यकता है वरना वो बिल्कुल अकेला पड़ जायेगा। दिल्ली की रक्षा के लिए परमाणु है लेकिन यहां के लिये भी कोई चाहिए जिसका मठ से पुराना नाता हो और जो समय-समय पर ध्रुव का मार्गदर्शन कर सके इसलिये मैं अपना अंगरक्षक पद वापस ग्रहण करने की इच्छा रखता हूँ….अब देशभक्त डिटेक्टिव तिरंगा वापस बनेगा अंगरक्षक अभय!” इतना कहकर तिरंगा ने अपना मास्क उतार दिया।
तिरंगा की इस घोषणा के बाद जनता की तालियों की गड़गड़ाहट और अधिक बढ़ गयी।
ध्रुव ने अभय के कंधे पर हाथ रखा और कहा-
“शुक्रिया मित्र! मुझे उम्मीद है कि हम इस मठ में नया सवेरा लाकर रहेंगे।”

इसके बाद परमाणु अदरक, डोगा, चीता और लोमड़ी को लेकर मुम्बई की तरफ रवाना हो गया। अब बचे थे सिर्फ रोबो और नताशा।
ध्रुव (रोबो से)- क्या मैं आपके लिए हेलीकॉप्टर की व्यवस्था करवा दूं?
रोबो- नहीं मैंने अपने आदमियों से संपर्क कर लिया है, वे आते ही होंगे, यदि आपको कोई तकलीफ ना हो तो।
ध्रुव- मुझे भला क्या तकलीफ होगी, राजनगर पर हमले के बाद मठ का राज़ राज़ तो रहा नहीं लेकिन उन्हें पहाड़ी वाले संकरे रास्ते से आने को कहिएगा जहां से हम आये थे वरना मठ के ऊपर तैरते अम्लीय बादल उनकी हड्डियां गला देंगे।

इतनी देर से शांत खड़ी नताशा अचानक रोबो से बोल पड़ी।
“डैड, क्या मैं दो मिनट ध्रुव से अकेले में बात कर सकती हूँ?”
रोबो ने पहले ध्रुव को अजीब तरीके से देखा फिर नताशा को और फिर कहा- “ठीक है।”
अब तक भीड़ भी काफी हद तक तितर बितर हो चुकी थी, इस समारोह के संपन्न होते होते सभी काफी थक चुके थे।
अब नताशा और ध्रुव एक कोने में खड़े बातचीत कर रहे थे।
नताशा- मुझे तुम्हारी चिंता हो रही है ध्रुव।
ध्रुव- तो तुम यहाँ रुक क्यों नहीं जातीं मेरे पास?
नताशा- ध्रुव ये तुम क्या…

ध्रुव ने पहले नताशा के होंठों पर हल्के से उंगली रख दी, नताशा एकदम चुप हो गयी, उसके बाद उसने नताशा के दोनों हाथों को थामा और कहा-
“मैं मानता हूँ कि मेरा आगे का जीवन बहुत अंधकारमय होने वाला है, इस पूरी दुनिया में एक सिर्फ तुम ही हो जो कि इसमें प्रकाश भर सकती हो। तुम जानती हो कि मेरे दिल में तुम्हारे प्रति क्या भावनाएं हैं, अगर तुम्हारे दिल में भी वैसी ही भावनाएं हैं तो इस बारे में सोचना ज़रूर।”
नताशा कुछ जवाब देना चाहती थी लेकिन तभी उन्हें हेलीकॉप्टर की गड़गड़ाहट सुनाई दी, रोबो आकर नताशा से बोला- “चलने का समय हो गया है नताशा!”

नताशा मुड़कर ध्रुव से बोली- “मैं आऊंगी, मेरा इंतज़ार करना।”
फिर वह रोबो के साथ हेलीकॉप्टर की तरफ बढ़ने लगी तो पीछे से ध्रुव चिल्लाकर बोला- “मैं तुम्हारा इंतज़ार करूँगा!”
नताशा मुस्कुरा दी, रोबो को ये सब अजीब लग रहा था लेकिन वह कुछ बोला नहीं। उसके और नताशा के हेलीकॉप्टर में बैठते ही हेलिकॉप्टर ने उड़ान भर ली थी।
हेलिकॉप्टर के अंदर भी नताशा अलग ही ख्यालों में डूबी थी, ये देखकर रोबो ने पूछ ही लिया- “क्या सोच रही हो नताशा?”
नताशा ने रोबो की तरफ देखा, उसकी आँखों में हल्की नमी थी, वह रोबो से बोली-
“क्या आपने ध्यान नहीं दिया डैड? अपने परिवार के मरने के बाद ध्रुव रोया तक नहीं, आंसू का एक कतरा उसकी आँखों से नहीं निकला, वह एकदम सामान्य है और ये बात बहुत परेशान करने वाली है।”
रोबो ने उत्तर दिया-
“इंसान जब फूट फूट कर रोता है तो उसका दुख आंसुओं के माध्यम से निकल जाता है लेकिन जब हम दुख को अपने अंदर पनपने देते हैं तो हम कभी पहले जैसे नहीं रहते, हम पूरी तरह बदल जाते हैं। सुपर कमांडो ध्रुव वक्र के साथ राजनगर में ही मर गया था जब उसने पहली बार अपनी इंसानी जान न लेने की कसम तोड़ी और अब जिसका जन्म हुआ है वो है मठाधीश ध्रुव। ध्रुव का यह नया रूप कैसा है, ये ना मैं बता सकता हूँ और ना तुम, ये तो वक्त ही बता सकता है।”

To be continued…..
Written by- Samvart Harshit for Comic Haveli

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12 Comments on “Earth 61 Phase 2 Part 11”

  1. Bhai bahut badiya Chal rahi hai Kahana. Per dhurav Ka parivar Phir khatam ho Gaya to bahut Dukha Hua. Esa dhurav ke Sath 2 Bar ho chuka hai. Kash kisi tarah us Ka parivar wapas aa pata. Ab to dhurav matadeesh ban chuka hai. Aur us Ka Sath dene ki liye tiranga waha ruk gaya hai. Hunters NE Ab tak rajnager me khub aatak macha liya. Ab aage hi pata chelga ki dhurav aur trianga ki Kya bhumika hogi. Nagraj ke Sath bhi kuch thik nahi Hua. Hamara bhola bhala nagraj puri tarah badal raha hai. Us ki shaktiyo ki to koi seema hi nahi dikh rahi hai. Nagadheesh tak ko parasat ker diya. Shyad vedacharya ki bhavishyani such hone ja rahi hai. Pata nahi wo nakabposh Kon hai Jo nagraj ke peeche pada hai. Shyad nag Pasha aur gurudev wapas to nahi aa gaye. Y to a age hi pata chelaga. Aap ki lekhan sheli bahut hi badiya hai Bhai. Ham sab to aap ke writing ke diwane ho chuka hai. Per earth 61 me Muze to baato ku dhukh Hua. Earth 61 phase1 me pahale bharti Mari aur earth 61 phase 2 me dhurav ko apana pariwar khona pada. Per kisi se sahi kaha hai ki ek aachi khata balidan magati hi hai. Age ki kahani Ka intajer rahegi. Ek aachi story ke liye aap ko bahut bahut dhanyad.

    1. बहुत धन्यवाद विजय जी, आपको कहानी पसन्द आ गयी, बस इसी में मेरी सफलता निहित है। कहानी जिस प्रकार से मैंने आगे सोच रखी है उसके लिए ध्रुव के परिवार का मरना बहुत आवश्यक था, उम्मीद है कि आगे के भाग भी आपको पसंद आये।

  2. हर बार की तरह इस बार भी आप छा गए, नागराज व ध्रुव के मन में चलते अन्तर्द्वन्द को बहुत ही अच्छे ढंग से दिखाया है, नागराज का हथौड़ा उठाने वाला सीन जबरदस्त था। अभी नागराज व ध्रुव की ज़िंदगी एक नया मोड़ ले रही है, जिसमें उनके नायक की छवि पर खलनायक की छवि भारी पड़ रही हैं। दोनों ने अपनी इंसानी जानना लेने की कसम तोड़ दी है। कहानी में हर पल एक नया मोड़ आ रहा है जिससे जिज्ञासा बढ़ती जा रही हैं।
    आगामी भाग के लिए शुभकामनाएं

  3. Ek ache writer ki pahchan hai ki wo apne readers ko connect karke rakhe kabhi unhe bore na hone de aur aapki story day by day interesting hoti ja rhi hai ab bas mann karta hai ki jitne bhi part aap likhenge sab k sab ek sath mil jaye to maza aajaye but afsos ye possible nhi anyways story pr aate hain….

    Ye story completely nagraj ki thi…qki dhruva ki life ko ab new start mil gya hai mathadheesh ke roop me jisse vedacharya ki bhavishyavani ki jhalak dikh rhi hai…natasha aur dhruva me prem ankuran ho chuka hai..wo dheere dheere ek dusre kareeb aane lage hain…

    Idhar nagraj ne to faad hi dala uski power to infinite ho gyi ho jaise…sabse best isme ye laga ki aapne halahal ke k madhyam se power increase hone ki wajah batayi hai..qki dev kaljayi aur halahal dono k opposite hain aur nagraj ko usi se power mil gyi…jis tarah ne nagraj aur nagadheesh ki fight hui isse lagne laga hai shayad hi koi ab nagraj k raste me aasakta hai qki nagadheesh bhi nagraj ki power usse alag karne safal nhi ho paye…ab kya hoga nagraj ka ye soch kr mann me baht se sawal janm le rhe hain jiska jawab aapki aage ki stories me milega…

    Waise aur bhi baht sare sawal hain…
    Sabse bada sawal ki aakhir wo naqabposh kaun hai jo nagraj k piche pada hai jisne halahal lakar dr karunakaran ko diya?

    Ek aur sawal jo mere mind me shuru se chalta aarha hai kya abahay aur vinay jaan payenge ki wo ek dusre k bachpan k best friend hain mujhe har uss part me ek baar lagta h jab tiranga aur parmanu sath hote hain..and iss wale me to mujhe laga parmanu koi reaction dega but kch na hua plz isko sabse pahle clear kriye qki sabke raaz ab raaz nhi rah gye…

    Kya phase 2 me aur bhi baki heroes aayenge jo phase 1 me the agar haan to jaldi kariye qki un sabka baht besabri se intezar hai especially anthony ka

    Asha karta hu ki mere sabhi sawalo ka jawab mil jayega aage

    Ek baar phr se aapko congrats and best of luck

  4. पिछले भाग की अपेक्षा यह भाग थोड़ा 19 साबित हुआ लेकिन आपने अपनी छवि ऐसी बना ली है कि आपसे बहुत अपेक्षाएं हैं इसीलिये इस बेहतर भाग को भी 19 कहना पड़ रहा है। इसमें भावनाओं का ज्वार था, ध्रुव नताशा के प्रेम का प्रादुर्भाव था तो तिरंगा का अप्रत्याशित कदम।
    डोगा और लोमड़ी का प्रेम भी था लेकिन जो कमी लगी वो थी अपेक्षाएं। वैसे हर भाग भाग 10 भी नहीं होगा ये भी स्वीकार करना होगा किन्तु अभी यह सम्भव नहीं मेरे लिए तो।

    नागाधीश और नागराज के मध्य वार्तालाप और अपनी शक्तियों का प्रदर्शन मन मोह लिया। नागराज का नागाधीश का हथौड़ा उठाना अत्यंत हर्ष देने वाला था यदि ये चित्र कोई भी आर्टिस्ट बना पाये तो मजा ही आ जायेगा।
    नागराज के शरीर में हलाहल दौड़ रहा है? ये पढ़कर मैं हतप्रभ रह गया कि करुणाकरन ने नागराज के साथ धोखा किया!
    लेकिन मजबूरी कुछ भी करवा सकती है।
    इस नकाबपोश और धनिया का कोई जुड़ाव है ऐसा दिख नहीं रहा लेकिन नागराज के लिए दोनों एक ही हैं। यदि नागराज पता लगा दे कि धनिया ही वो नकाबपोश था जिसने उसे चेतावनी दी थी? फिर होगा डोगा vs नागराज जहाँ अब डोगा के पास कोई भी चांस नहीं है कोई भी नहीं।

    अब ध्रुव का एंगल देखें तो ध्रुव अब प्रस्तर हृदयी हो चुका है किंतु अब भी नताशा उसके लिए प्रेम का मार्ग बनी है जो जानकर थोड़ा अच्छा लगा। लेकिन जैसा शक्तियां मिल जाने से नागराज स्वच्छंद हो चुका है ऐसे ही ध्रुव न हो जाये।

    जैसा कि पहले ही कहा है तिरंगा का हन्टर्स के साथ ही रुकना वो भी ध्रुव का अंगरक्षक बनकर रुकना सबसे ज्यादा हतप्रभ कर गया। ये मेरे हिसाब से इस कहानी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट हो सकता है।

    खैर आगे के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं और जल्दी से आप अगला भाग लाइए यही आशा है आपसे।

  5. पहले तो उन सबका बहुत धन्यवाद जिन्होंने समय निकालकर मेरी कहानी पढ़ीं, प्रद्युम्न जी, देव भाई और तारिक भाई का बहुत बहुत धन्यवाद। आप सबकी समीक्षा ने एक नयी ऊर्जा दे दी है मुझे जिससे मैं नया भाग जल्द से जल्द पूरा करने की चेष्टा कर रहा हूँ, आप लोगों को जल्द ही नया भाग पढ़ने को मिलेगा। एक बार फिर से reviews के लिए धन्यवाद।

  6. यह कहानी पहले वाले भाग के मुकाबले में छोटी थी और शायद इसी कारण थोड़ा सा मायूस हुआ मै कहानी को लेकर

    नागराज की शक्तियां इतनी ज़्यादा देखकर अलग ही दुनिया में खो गया था मै अब आगे क्या होगा यही जानना है क्यूंकि इस भाग में सिर्फ और सिर्फ सवाल थे जैसे नागराज अब क्या करेगा उसको हलाहल के बारे में जानकारी हो चुकी है
    ध्रुव मठाधीश बन गया है और तिरंगा उसका अंगरक्षक और काले डकैत सब मुम्बई वापस आ चुके हैं परमाणु के जीवन का मकसद भी पूरा हो चुका है इसलिए आगे के भाग का बेसब्री से प्रतीक्षा है

    1. छोटे भाग के लिए आप सभी से माफी चाहूंगा, दरअसल कुछ भाग ऐसे होते हैं जो या तो किसी बड़े भाग में घटने वाली घटनाओं के आगे की झलक दिखाने के लिए होते हैं या फिर अगले बड़े भाग के लिए build up का काम करते हैं। ये भी एक ऐसा ही अध्याय था लेकिन अगला भाग बड़ा रहेगा।

  7. Kafi achhi rhi h ye part but ek doubt ho rha h, kya nagraj nayak se khalnayak ban jayega or dhruv ke sath aage kya hoga
    Kafi suspense h
    Dekhte h aage kya hota h ?

    Waiting for next part……..

  8. Tumhari dhruv ko mathadhish banane wali 1 saal purani mahatvakanksha purna hui finally wo bhi tumhari khud k story k madhyam se
    Congratulations for that
    Tiranga ka Delhi ko puri tarah chhod dena bhi bawal tha
    Matlab har character k sath itne experiments kar rahe ho aur wo bhi itne perfect execution k sath
    Halahal wali baat ab nhi bolunga kyun ki RC walo ki hi galti hai isliye pahle hi tumse discussion kar liya tha
    Waise bhi tumhara khud ka universe hai you can try whatever you want

    The name of the story was TABAHI KE BAD
    Tabahi k bad kya
    Tabahi k bad aur bhi jyada tabahi jo samvart harshit ki lekhani se aati hai
    Bahut awesome harshit
    Going to read the next part

  9. Earth 61 part 11

    Aur parts k apekshakrit ye part chota jarur tha but har baar ki tarah pathko ko bandhe rakhne k liye isme sab kuch tha emotional moment, wow moment, rahsya udhghatan, character development
    Ache lekhak ki pehchan h ki vo pathak ko bandhe rakhta h aur aapki har kahani me ye dekhne ko milta h, part samay par aane k karan is series ka maja bahut bad chuka h aur me keh sakta hu ki abhi ye complete nahi hui h but *it is the best ever fan made story*

    Nagraj ka garbhira dhatu k hathode ka utha lena ek wow moment tha,
    sath hi ye raj bhi khula ki nagraj k sharir me radioactive material nahi halahal h
    Tiranga vapas se angrakshak abhay ban gaya
    Ye sab khasiyat lagti h aapki story me ki kisi ko ek image me bandhte nahi character development bahut badiya hota h
    Dhruv ki mathadheesh ban Jane ki parkriya bhi jabardast thi

    As always a amazing part
    Thank u for entertaining

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