Earth 61 Phase 2 Part 12

द्वादश अध्याय- भक्षक नागराज

छह महीने पहले-

हिमालय की खूबसूरत वादियों का विस्तार इतना वृहद है कि प्रकृति के अधिकतर अजूबे देखने से मानव वंचित ही रह गया है। हिमालय की वादियों में कई रहस्य छिपे हैं, जिनसे मानव अभी तक रूबरू नहीं हुआ है और जो उन दुर्गम हिस्सों में जाकर वापिस आ चुके हैं वो वहां बसने वाली यति सभ्यताओं की कहानियां सुनाते हैं या फिर इच्छाधारी शीतनाग प्रजाति की लेकिन उनकी बात कभी कोई नहीं मानता। आज फिर एक रहस्यमयी आकृति हिमालय के उन्हीं दुर्गम हिस्से में बर्फीली धरती पर अपने पाँवों की छाप छोड़ते हुए आगे बढ़ रही थी, उस व्यक्ति के हाथ में एक पुराना सा नक्शा था जिसे लेकर वह आगे बढ़ रहा था। काले ओवरकोट के ऊंचे उठे कॉलर और बड़ी सी हैट ने उसके चेहरे को छिपा रखा था, ओवरकोट के अंदर काले इनर जैसा वस्त्र पूरे शरीर से चिपका हुआ था और हाथ में थे मोटे दस्ताने, कुल मिलाकर शरीर का कोई ऐसा हिस्सा नहीं था जो उसने ढक ना रखा हो। हिमालय पर चलने वाली बर्फीली हवाएं जहां किसी भी मनुष्य को ठिठुरने पर विवश कर देतीं वहां वह व्यक्ति अकड़कर चल रहा था जैसे ठंड से उसको लेशमात्र का भी प्रभाव ना पड़ रहा हो। शीघ्र ही वह अपने गंतव्य तक पहुंच गया था, बर्फ के बीचों बीच एक बहुत छोटा-सा तालाब बना हुआ था जिसमें एक खौलता हुआ द्रव्य भरा हुआ था। जिस तापमान पर पानी को जमने में दो पल से अधिक का समय नहीं लगता था वहां ये रहस्यमयी द्रव्य खौल रहा था। वह रहस्यमयी व्यक्ति उस बर्फ में बने तालाब से दस बारह फीट दूर एक बर्फीली शिला के पीछे छिपा वास्तुस्थिति का अध्ययन कर रहा था। तालाब के दूसरी तरफ चार शीतनाग प्रहरी भाला और ढाल लिये खड़े थे। अचानक एक तेज़ ब्लास्ट की आवाज़ आयी और एक शीतनाग प्रहरी की खोपड़ी उड़ गयी, बाकी तीन एकदम से घबरा गये, शायद उन्होंने सोचा नहीं था की कोई प्राणी इस स्थान पर हमले की सोच भी सकता है।

उन्हें हमलावर को ढूंढने के लिए अधिक मशक्कत नहीं करनी पड़ी, क्योंकि रहस्यमयी हमलावर पोखर के दूसरी ही तरफ खड़ा था। इससे पहले कि कोई कुछ कर पाता, उसके हाथ से निकले ऊर्जा ब्लास्ट ने एक और प्रहरी के सीने में छेद करके उसे काल के गाल में पहुंचा दिया। अब सिर्फ दो प्रहरी बचे थे जो ब्लास्ट से बचने के लिए पास पड़ी शिलाओं के पीछे छिप गये, वे बहुत घबरा गये। तभी एक प्रहरी को दूसरे की दर्द भरी चीख सुनाई दी “आह!” , वह समझ गया कि उसका तीसरा साथी भी उस रहस्यमयी हमलावर का शिकार बन चुका है। वह शिलाओं के पीछे छिपा रहा, बर्फ में पाँवों के दबने की आवाज़ धीरे-धीरे उसके समीप पहुंच चुकी थी। अचानक ही उसको छुपाने वाली शिला उस हमलावर के एक ही वार से टूट गयी, नाग प्रहरी ने भागने की कोशिश की लेकिन अब वह उस व्यक्ति की फौलादी जकड़ में था और पूरी ताकत लगाकर भी नहीं छूट पा रहा था, तभी उस व्यक्ति की मशीनी आवाज़ उसके कानों में गूंजी-
“मुझे इस हलाहल का कुछ हिस्सा दे दो और अपनी जान बचा लो।”
प्रहरी घबराकर बोला- “म..मेरे बाकी साथी जल्द ही यहां आ जाएंगे तुम बचकर नहीं जा पाओगे!”
“मुझे पता है”
-कहकर उस व्यक्ति ने प्रहरी को बर्फ़ीली ज़मीन पर फेंक दिया और बोला-
“इसलिए मैं चाहता हूँ कि तुम जल्द से जल्द मुझे हलाहल को लेने का उपाय बताओ क्योंकि तुम भी जानते हो और मैं भी हलाहल को किसी भी साधारण वस्तु में नहीं रखा जा सकता क्योंकि यह अधिकतर चीजों को गला देता है। तुम मुझे हलाहल ले जाने का तरीका बताओगे।”
नाग प्रहरी चीखा- “कभी नहीं, हम शीतनाग हलाहल कुंड से तुझे एक बूंद हलाहल भी नहीं ले जाने देंगे, भले ही तू मेरी जान ले ले।”
उस व्यक्ति ने कुछ सोचा और प्रहरी के पास बैठकर बोला- “तो फिर ठीक है, मैं एक काम करता हूँ, इस कुंड के आसपास की ज़मीन में धमाका करके हलाहल का प्रवाह रोके रखने की इसकी शक्ति को समाप्त कर देता हूँ। तुम नागों की बस्ती पास में ही है, मैंने यहां आते समय देखा था, यह हलाहल सीधे तुम्हारी बस्ती में जायेगा और वहां होने वाली तबाही के ज़िम्मेदार सिर्फ तुम होंगे।”
यह सुनकर नाग प्रहरी घबरा गया, वह बोला- “नहीं नहीं ठीक है, मैं तुमको अभिमंत्रित डिबिया देता हूँ!”
“क्या है यह अभिमंत्रित डिबिया?” उस व्यक्ति ने जिज्ञासावश पूछा।
नाग प्रहरी ने एक छोटी सी डिबिया दिखाई जो उसके हाथ में थी- “यह है अभिमंत्रित डिबिया! हालांकि इसमें ज़्यादा हलाहल तो आ नहीं पायेगा लेकिन तुम हलाहल केवल इसी में ले जा सकते हो क्योंकि इसे मंत्रों तंत्रों द्वारा हलाहल से सुरक्षित किया गया है। ये हलाहल कुंड के आसपास की बर्फ भी अभिमंत्रित है वरना हलाहल कबका बर्फ गलाकर हम शीतनागों के कस्बे में घुस गया होता।”
“ठीक है, मुझे भी कम हलाहल की ही ज़रूरत है।” वह व्यक्ति प्रहरी के हाथ से डिबिया लेते हुए बोला-
“ठीक है संपोले, अब मैं अपना वादा निभाउंगा और हलाहल कुंड को तबाह नहीं करूँगा लेकिन अब तुम भी जिंदा नहीं बच सकते क्योंकि फिर तुम वापस जाकर अपने साथियों को जाकर सब बता दोगे। उन्हें हलाहल चोरी होने की खबर ज़रूर मिलेगी लेकिन तब जब वे खुद आकर तुम्हारी लाशों को देखेंगे और तब तक मैं यहां से निकल चुका होऊंगा।”
वह प्रहरी घबराते हुए बोला- “नहीं! रुको! ये तुम क्या…”
लेकिन उस प्रहरी की बार पूरी होने से पहले ही उस व्यक्ति के साधारण से धक्के से प्रहरी बर्फ पर गिर चुका था। जब तक प्रहरी कुछ समझ पाता उस व्यक्ति का फौलाद जैसा मजबूत पैर उसके सिर पर पड़ा और एक “फच्चाक” की आवाज़ हुई और उस नाग प्रहरी की खोपड़ी फट चुकी थी। अब उस प्रहरी लाश भी बाकी तीनों नाग प्रहरियों के साथ हलाहल कुंड के पास पड़ी थी। अब तक वह व्यक्ति भी अपना काम करके वापिस जा चुका था।

वर्तमान समय में-

पूरे देश में मानसून का माहौल था लेकिन मुम्बई शहर में उमड़ते घुमड़ते बादल, कड़कती बिजलियाँ और रह रहकर होने वाली बारिश की बात ही कुछ और थी। राजनगर की तबाही वाली घटना को हुए तीन दिन बीत चुके थे। सूरज के अपार्टमेंट में सूरज और मोनिका किसी मधुर अंग्रेज़ी गाने पर धीरे-धीरे कपल डांस कर रहे थे। मोनिका का सिर सूरज के कंधे पर था और उसकी आंखें बंद थीं। उसका एक हाथ सूरज के कंधे पर था और दूसरा हाथ सूरज के हाथों में। वह डांस करते-करते बोली “काश ये वक्त यहीं थम जाता सूरज, काश हम कहीं दूर अपनी दुनिया बसा पाते जहां ना काले डकैत होते ना हंटर्स, ना डोगा होता ना लोमड़ी, होते तो बस सूरज और मोनिका।”
सूरज- मैं भी यही चाहता हूँ मोनिका, काश कि हम ऐसा कर पाते।
मोनिका- जब तुम मेरा राज़ पता चलने पर मुझसे नाराज़ हो गये थे, तब मुझे लगा कि मैंने तुमको हमेशा के लिए खो दिया है। वादा करो की तुम कभी मुझसे अलग होने की बात सपने में भी नहीं सोचोगे।
सूरज- जिसका ख्याल सपने में भी पीछा ना छोड़े उससे सपने में भी अलग होने के बारे में कैसे सोचा जा सकता है?
मोनिका- वैसे एक बात बताओ सूरज, क्या डोगा और काले डकैतों की ज़रूरत हमेशा इस समाज को रहेगी?
सूरज- शायद ऐसा ही होगा क्योंकि दुनिया में हमेशा कानून तोड़ने वाले भक्षक रहेंगे जिनको अंजाम तक पहुँचाने के लिए कानून तोड़ने वाले रक्षकों का होना भी जरूरी ही है।
मोनिका- तुम सही कह रहे हो, वैसे हंटर्स का खतरा तो ध्रुव के मठाधीश बनने से टल ही गया क्योंकि अब वह उन खूंखार शक्तियों को मठ के अंदर ही सीमित करके रखेगा।
सूरज- लेकिन मुझे ध्रुव के लिए बहुत बुरा लग रहा है, मुझे याद भी नहीं कि मेरा परिवार कैसा था क्योंकि जब से होश संभाला चारों चाचा ही मेरा परिवार थे लेकिन उस बेचारे ने दो बार अपनी आंखों के सामने अपने परिवार को खत्म होते देख लिया है। कहना मुश्किल है कि जीवन की ऐसी त्रासदी एक इंसान को किस हद तक बदल सकती है।
मोनिका- मुझे भी उसके लिए बुरा लग रहा है लेकिन मुझे उम्मीद है की नताशा का प्यार उसे मानवता की डोर से दूर नहीं जाने देगा।
सूरज- नताशा का प्यार? रोबो की बेटी से प्यार करता है ध्रुव?

सूरज के भोले से सवाल पर मोनिका मुस्कुरा दी-
“तुम लड़के वाकई कुछ नहीं समझते। मैंने ज़िन्दगी भर प्रेम संबंधों से दूर रहकर मठ में प्रशिक्षण लिया है लेकिन फिर भी दो लोगों के एक दूसरे के प्रति प्यार को समझ सकती हूँ।”

तभी एक फोन कॉल ने उस प्रेम से परिपूर्ण कपल डांस में व्यवधान डाल दिया। सूरज ने जेब से फोन निकाला तो देखा कि चीता की दो मिस कॉल पहले ही पड़ी थीं और तीसरी बार फोन बज रहा था लेकिन सूरज और मोनिका एक दूसरे की आंखों में और संगीत की आवाज़ में इतना खोये हुए थे की उन्हें घंटी सुनाई ही नहीं दी। सूरज हड़बड़ी में फोन उठाया-
“ह..हाँ चीता! क्या बात है?”

चीता- अदरक चाचा ने काले डकैतों की अर्जेंट मीटिंग बुलाई है, मोनिका को लेकर पहुंचो।
सूरज- म..मोनिका? मोनिका यहां कहां है?
चीता- हाहाहा, देखो भाई डोगा बनकर रहो, चीता बनने की कोशिश मत करो, जल्दी आओ।

इतना कहकर चीता ने फोन काट दिया, सूरज मोनिका को देखकर बोला-
“तुम्हारा भाई मठ में जासूस वगैरह था क्या?”
मोनिका- बात क्या है?
सूरज- कुछ नहीं बस अदरक चाचा ने काले डकैतों की एमरजेंसी मीटिंग बुलाई है, अब चूंकि तुम भी काली डकैत बन गयी हो इसलिये तुम्हारा होना भी जरूरी है।

जल्द ही सूरज और मोनिका उस सुनसान बिल्डिंग के बेसमेंट में पहुंचे जहां हल्का अंधेरा था, तरह-तरह के मॉनिटर्स लगे हुए थे। एक बड़ी सी लकड़ी की मेज के इर्द-गिर्द अदरक, हल्दी, धनिया, काली और चीता बैठे हुए थे। सूरज और मोनिका उनके चेहरे के भाव देखते ही समझ गये की मामला थोड़ा गंभीर है। वे बिना कुछ बोले उस लकड़ी की मेज के इर्द-गिर्द रखी अपनी अपनी कुर्सियों पर बैठ गये। अदरक ने क्रोध से धनिया की तरफ देखते हुए कहा-
“किसका प्लान था ये?”
धनिया की नज़रें अदरक की डांट के बाद नीचे झुकी हुई थीं लेकिन उसकी जगह हल्दी ने सहमी सी आवाज़ में जवाब दिया-
“प्लान तो मेरा ही था लेकिन धनिया ने बस मेरा साथ दिया।”
अदरक की क्रोध भरी नज़रें अब हल्दी पर केंद्रित हो गयीं-
“तुम हल्दी? तुमने इतनी गैर ज़िम्मेदाराना हरकत करने का सोचा भी कैसे?”
काली- मुझे बिल्कुल पता नहीं था कि ये दोनों क्या खुराफात कर रहे हैं वरना मैं इनको कतई ऐसा नहीं करने देता।
धनिया (अपने आप में ही बड़बड़ाते हुए)- इसीलिए तो आपको नहीं बताया गया।
अदरक (चिल्लाकर)- क्या बड़बड़ा रहे हो?
धनिया- कुछ नहीं मैं बस ये कह रहा था कि हमें आपकी फिक्र हो रही थी इसलिए हमने ऐसा कदम उठाया।

सूरज को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। वह पूछ बैठा- “एक मिनट! धनिया चाचा ने ऐसा क्या कर दिया?”

अदरक- तुम खुद ही बताओगे धनिया या मैं बताऊं?
धनिया (अपने आप में ही बड़बड़ाता हुआ)- आप ही बता दीजिये।
अदरक- क्या कहा तुमने?
धनिया- मैंने कहा मैं बताता हूँ ना पूरी बात सूरज को।

फिर धनिया ने सूरज को वह पूरा प्रकरण सुनाया कि किस तरह उन्होंने नागराज को बुलाकर वीडियो फुटेज के नाम पर ब्लैकमेल किया और राजनगर भेजा। जैसे-जैसे सूरज सुनता जा रहा था, वैसे-वैसे उसकी भौंहें तनती जा रहीं थीं, धनिया की बात खत्म होते ही वह बोल पड़ा-
“एक मिनट! यानी कि आपने नागराज को राजनगर हमारी मदद के लिए भेजा, उसे एक ऐसे वीडियो के नाम पर ब्लैकमेल करके जिसमें वो दो लोगों का कत्ल कर रहा है? ये क्या मजाक है?”

अदरक- इसमें मजाक वाली बात क्या है?
सूरज- यही की नागराज और कत्ल? वह हममें से सबसे अधिक नैतिक मूल्यों को मानने वाला शख्स है, बच्चे से लेकर बड़ों तक सब उसके जैसा बनना चाहते हैं, उसके दिये गये आदर्शों को मानते हैं। मैं खुद चाहता हूं कि सिस्टम और डोगा पैदा करने की बजाय नागराज के मूल्यों को समाज में पिरोने का काम करे और आप मुझसे कह रहे हैं कि उस व्यक्ति ने नैतिकता के सभी मापदंडों को ताक पर रखकर एक कत्ल कर दिया? ये मजाक नहीं तो क्या है? नागराज ने कब किसी की जान ली है?”
अदरक- हम सब खुद साक्षी हैं सूरज कि जब एक व्यक्ति के हालात बद से बदतर हो जाते हैं तो वो कैसा हो जाता है। ध्रुव भी नागराज से कम नहीं बल्कि उसके बराबर ही नैतिक मूल्यों को मानता था लेकिन जब उसके साथ एक भीषण त्रासदी हो गयी तब उसने अपने हाथों से एक जान ले ली, उसके नैतिक मूल्यों का पतन हो गया।
सूरज- आप कहना क्या चाहते हैं?
अदरक- यही की ज़रूरी नहीं कि एक नायक कभी नैतिकता की राह से नहीं डिग पाये, हालातों के आगे तो बड़े-बड़े देवता विवश हैं, नागराज तो एक इंसान है।

सूरज और अदरक के मध्य यह बहस चल ही रही थी कि धनिया ने लैपटॉप में पेनड्राइव लगायी और एक वीडियो सबके सामने खोलकर रख दी। सबका ध्यान उस वीडियो पर चला गया जिसमें नागराज बेरहमी से नागदंत और नागमणि को मार रहा था, सूरज तो ऐसे देख रहा था मानो उसे यकीन ही नहीं हो रहा हो कि ये नागराज है।

धनिया- अब कह दो सूरज कि ये नागराज नहीं बल्कि कोई बहुरूपिया है।
सूरज- ह..हो सकता है कि उसे किसी ने माइंड कंट्रोल करके ऐसा कृत्य करवाया हो?
अदरक- मैं तेरी मनोस्थिति समझ पा रहा हूँ मेरे बच्चे लेकिन तू भी मेरी बात समझ। हम जब एक नायक के आदर्शों को पसंद करते हैं और उसे समाज के लिए एक उदाहरण मानते हैं तो बहुत मुश्किल हो जाता है ये पचाना की वो नायक कोई बुरा काम कर सकता है और जब वो नायक कोई ऐसा काम करता है जो हमारे हिसाब से अनैतिक है तो हम उसे बचाने के लिए बहाने ढूंढते हैं जैसे की नायक को माइंड कंट्रोल किया जा रहा होगा या फिर ये उसका कोई बहुरुपिया होगा लेकिन सच्चाई ये होती है की नायक ने अपनी मर्ज़ी से पूरे होशो हवास में वह काम किया है। हमें ये सच्चाई माननी होगी कि नायक भी हालातों की मार के चलते अच्छे बुरे का भेद भूल सकते हैं।

सूरज कुछ देर शांत बैठा और फिर धनिया की तरफ देखकर पूछा-
“चाचा! ये रहस्यमयी व्यक्ति आखिर है कौन जिसने पहले हमको एंटीवेनम सप्लाई किया और अब ये करुणाकरण की लैब की ये फुटेज भेजी?”

धनिया- पता नहीं सूरज! हममें से किसी को नहीं पता है।

सूरज ने ध्यान दिया की उसके सवाल पर अदरक के चेहरे पर चिंता की लकीरें आ गई हैं।

सूरज- अदरक चाचा! क्या आपको पता है कि ये व्यक्ति कौन है?
अदरक- न..नहीं नहीं! हमारी कोई डील उससे आमने सामने नहीं हुई, वो अपने रहस्य रखना चाहता है और हम अपने लेकिन काम का आदमी है इसलिए औपचारिकता निभाने में कोई हर्ज भी नहीं।

इससे पहले कि सूरज उस व्यक्ति को लेकर कुछ और सवाल पूछ पाता, अचानक एक मॉनिटर पर एक अजीब सी चीज़ दृष्टिगोचर हुई और सबका ध्यान उसी पर चला गया। मुम्बई के कोने-कोने से सांप निकलकर आ रहे थे और बोरीवली के पास इकट्ठा होकर एक मानवाकृति बना रहे थे, सभी लोग आंखें फाड़े ये दृश्य देख रहे थे, वह आकृति बड़ी होते होते लगभग दस ग्यारह फीट की हो गयी और तबाही मचाने लगी। लोगों में अफरा तफरी और भगदड़ मच गयी, वो तो इच्छाधारियों के पिछले हमले के बाद से सड़क पर ज़्यादा ट्रैफिक नहीं था वरना भगदड़ में ही न जाने कितने मर जाते। चीता मॉनिटर स्क्रीन पर नज़रें गड़ाया हुआ था उसने हैरत से पूछा-
“ये..ये क्या चीज़ है!”
काली- सांपों द्वारा निर्मित एक विशाल आकृति, ये ज़रूर इच्छाधारियों का ही काम है।
सूरज (गुस्से से मेज पर हाथ पटककर)- बस बहुत हुआ, पिछली बार आपने कसम दी थी इसलिए इन संपोलों के सामने मैं नहीं गया था लेकिन अब अगर इनको डोगा चाहिए तो इनको डोगा ही मिलेगा।
अदरक- मैं जानता हूँ की इस बार मैं तुमको नहीं रोक पाऊंगा लेकिन तुम्हारे साथ हम सब इस मुसीबत का सामना करेंगे।
सूरज- ये आप क्या कह रहे हैं? मैं आप लोगों की जान खतरे में नहीं डाल सकता।
मोनिका- हमारी जान हमारी खुद की अमानत है सूरज जिसे हम अपनी मर्ज़ी से कहीं भी खतरे में डाल सकते हैं। हमें तुम्हारी हाँ या ना की ज़रूरत नहीं है।
चीता- मोनिका ठीक ही कह रही है और ज़रा इस “चीज़” के आकार को देखो, तुम्हें लगता है कि डोगा इसे अकेले हैंडल कर पायेगा? नहीं, इसके लिए काले डकैतों की पूरी ताकत इस्तेमाल करनी होगी।

सूरज जानता था कि वो ये बहस नहीं जीत पायेगा इसलिए उसने काली चाचा की तरफ मुड़कर पूछा-
“हमारे पास एंटीवेनम का कितना स्टॉक है चाचा?”
काली चाचा मुस्कुराकर बोले-
“इतना कि इच्छाधारियों की एक सेना को हमेशा के लिए सुला दे।”

सूरज (मुस्कुराकर)- तो फिर देर किस बात की? आज इन संपोलों को दिखा ही देते हैं कि हम इंसान क्या चीज़ हैं।

इच्छाधारियों के दंगों के बाद से मुम्बई में लोगों ने निकालना कम कर दिया था, सड़क पर चहलपहल रहती थी लेकिन पहले के मुकाबले वो नगण्य थी। ऐसे में कई सर्पों से बना हुआ एक विशाल शरीर जब बोरीवली के इलाके में तोड़ फोड़ कर रहा था तो भगदड़ ज़रूर मची लेकिन जल्द ही वो इलाका एकदम खाली हो गया। वह सर्पाकृति कभी बड़े-बड़े खंभे तोड़ डालती तो कभी इमारतों को नुकसान पहुंचाने लगती।

तभी उस सर्पाकृति पर किसी ने गोलियों को बारिश कर दी, ये डोगा था जो तेज़ी से बाइक उसकी तरफ बढ़ाता हुआ गोलियों की बौछार करता जा रहा था लेकिन उस सांपों से बने शरीर के जिस हिस्से पर वह गोली चलाता, उतने हिस्से के सर्प अपने आप उतनी जगह से हट जाते जिससे गोलियां पार निकल जातीं और वे वापिस अपना स्थान ग्रहण कर लेते। डोगा ने करीब जाकर गोली चलाने की सोची लेकिन सर्पाकृति ने एक ही वार में उसे बाइक समेत उछाल दिया। बाइक जब हवा में थी तभी डोगा ने शानदार कलाबाजी खाते हुए हवा में ही बाइक छोड़ दी और वापिस धरती पर पैर जमा लिए लेकिन बाइक गिरकर टूट फूट गयी। तभी दूसरी तरफ से अदरक, हल्दी, काली और धनिया अपनी काले डकैतों वाली पोशाकों में आये और उसपर एंटीवेनम गन का प्रयोग करना शुरू किया लेकिन उस सर्पाकृति ने वही नीति अपनायी, शरीर के उतने हिस्से से सर्प हट जाते जहां वार हुआ होता जिस वजह से उनके वार विफल हो रहे थे।
सर्पाकृति उन चारों की तरफ मुड़ी और एक ज़ोरदार मुक्का वहां मारा जिस स्थान पर चारों खड़े थे लेकिन वह चारों बेहद फुर्ती से वहां से हट गये, जहां सर्पाकृति का मुक्का पड़ा था वह सड़क थोड़ी चटक गयी। चीता और लोमड़ी एकदम गुपचुप तरीके से हाथ में एंटीवेनम इंजेक्शन लिए उस सर्पाकृति के पीछे पहुंचे और इंजेक्शन घोंपने की सोची लेकिन सर्पाकृति को इसकी भनक लग गयी और उसने तुरंत पीछे मुड़कर चीता पर वार कर दिया, चीता और लोमड़ी बड़ी ही चपलता से कलाबाजियां खाते हुए उस वार से बचे। सब लोग बच ज़्यादा रहे थे और वार कम कर पा रहे थे, तभी डोगा को गलियारे के अंत में एक आइसक्रीम स्टोर दिखाई दिया, उसके दिमाग में एक प्लान आया। वह चिल्लाकर सबसे बोला-
“उस सर्पाकृति को वहां लाने की कोशिश करो!”
चीता जो बड़ी मुश्किल से सर्पाकृति के वारों से बच पा रहा था, वह खीझकर बोला-
“हाँ जैसे की मैं बोलूंगा और ये सांपों का ढेर पालतू कुत्ते की तरह मेरे पीछे चल देगा।”

डोगा चीता की बात को अनसुना करता हुआ उस स्टोर की तरफ बढ़ा और गोली मारकर शटर का ताला तोड़ डाला। फिर बाकी लोगों से बोला-
“उससे मुकाबला करने की जरूरत नहीं है यहां भागकर आओ और वो हमारे पीछे अपने आप आयेगा।”

किसी को समझ में नहीं आया की डोगा क्या चाह रहा था लेकिन सबने उसकी बात मानी और बिना वक्त गंवाये आइसक्रीम स्टोर की तरफ दौड़े। जैसा कि डोगा का अनुमान था, सर्पाकृति भी उनके पीछे दौड़ी लेकिन सांपों से बने विशाल शरीर की गति उतनी नहीं थी। सभी लोग उस बड़े से आइसक्रीम स्टोर में घुस गये और अलग-अलग जगह छिप गये। डोगा, लोमड़ी और अदरक एक बड़े से आइसक्रीम के आकार के कार्डबोर्ड के कटआउट के पीछे छिप गये। उनके एकदम पीछे धनिया, हल्दी और काली एक सफेद अलमारी के पीछे छिप गये, चीता उन सबसे आगे एक खंभे के पीछे सांस रोके खड़ा था। “धम्म धम्म” पैरों की आवाज़ करती सर्पाकृति भी स्टोर में घुस आयी, उसे चीता के खंभे के पीछे छिपे होने की भनक मिल गयी उसने अपना विशाल हाथ बढ़ाया और चीता को पकड़ लिया, चीता ने उसके मजबूत शिकंजे से छूटने की भरसक कोशिश की लेकिन छूट ना सका। लोमड़ी घबराकर उठ गयी, बाकी सब भी अपने स्थानों से निकल आये, डोगा चिल्लाकर बोला-
“काली चाचा! इसे एंटीवेनम गन का निशाना बनाइये।”

काली बेहतरीन तरीके से हवा में घूमा और एक के बाद एक कई सटीक निशाने उस सांपों से निर्मित हाथ पर लगाये जिसने चीता को पकड़ा था, इस बार ना कोई सांप अपने स्थान से हटा और ना ही काली का निशाना चूका। अब सर्पाकृति का एक हाथ जिन सांपों से निर्मित था, उनके निष्क्रिय होते ही चीता भी तुरंत उनकी कैद से आजाद हो गया। बस फिर तो डोगा ने भी अपनी बंदूकों उस विशाल शरीर को निशाना बनाया, अब उस सर्पाकृति में उतनी चपलता नहीं बची थी कि वह किसी वार से बच पाये, ऊपर से काली और डोगा के अचूक निशानों के सामने तो पूरी सेना ना ठहर पाये फिर इस सर्पाकृति की बिसात ही क्या थी, जल्द ही सर्पाकृति बस सांपों का एक बड़ा सा ढेर बनके रह गयी।

काली- बहुत खूब डोगा लेकिन इसकी चपलता को क्या हुआ, ये आकृति जिन सांपों से बनी थी उनका आपस में कॉर्डिनेशन इतना अच्छा था कि वे हमारा हर बार बचा ले रहे थे लेकिन इस आइसक्रीम स्टोर में घुसते ही वे हमारा एक भी वार नहीं बचा पाये।
अदरक (मुस्कुराकर)- इसका कारण मैं बताता हूँ, जब हम इस स्टोर में घुसे तो हम सबने तापमान में एक भारी गिरावट महसूस की जो की आइसक्रीम स्टोर के लिए जरूरी भी है लेकिन सरीसृप(reptiles) इतने कम तापमान में बेहद असहज हो जाते हैं इसलिए जब यह सर्पों से बनी आकृति इस स्टोर में घुसी तो ये काली की एंटीवेनम गन छोड़ो, डोगा के साधारण बारूद से भी नहीं बच पायी और सारे सांप अलग थलग हो गये।
चीता (प्रशंसा के भाव से)- वाह डोगा! तुमने तो वाकई बढ़िया युक्ति लगायी।
डोगा- मेरी तारीफ बाद में कर लेना लेकिन पहले ये पता लगाना होगा की इसको तबाही मचाने के लिए किसने भेजा? इसके पीछे इच्छाधारी ही थे या कोई और?
धनिया- इच्छाधारी ही रहे होंगे, उनके अलावा कौन हो सकता है?

तभी सबको तालियों के स्वर सुनाई दिये, नागराज ताली बजाता हुआ आसमान से धीरे धीरे ज़मीन की तरफ बढ़ रहा था। वह धरती पर उतरकर बोला-
“बहुत खूब! मुझे उम्मीद नहीं थी कि तुम लोग मेरे भेजे गये इस नमूने को इतनी जल्दी विफल कर दोगे लेकिन तुमने मुझको गलत साबित कर दिया।”
नागराज को देखकर सब चौंक गये थे, खासकर डोगा क्योंकि उसको यकीन नहीं हो रहा था कि सामने खड़ा शख्स नागराज ही है, उसने हैरानी से पूछा-
“नागराज? ये सब क्या है? क्या मुझसे पिछली भिड़ंत का बदला लेने आये हो?”

नागराज- नहीं डोगा, उस लड़ाई का बदला मैं तुमसे कैसे ले सकता हूँ, आखिर उसी लड़ाई के बाद तो मुझे ये प्रचंड शक्तियां मिली हैं।
डोगा- तुम उस घटना के बाद से पूरी तरह बदल गये हो नागराज।
नागराज- इसे “बदलना” नहीं “बेहतर होना” कहते हैं डोगा, मैं पहले से बेहतर बन गया हूँ, बहुत बेहतर लेकिन मैं ये नहीं भूल सकता कि मुझे सुपरवेनम बेहतर बनाने के उद्देश्य से नहीं बल्कि नष्ट करने के उद्देश्य से दिया गया था, इसलिये दिया गया था ताकि हलाहल और कालजयी के विष से उत्पन्न हुई भीषण दैवीय ऊर्जा मुझे नष्ट कर दे। मुझे तो मेरे विलक्षण शरीर ने बचा लिया लेकिन वह मुझसे नहीं बचेगा जिसने मुझे मारने की कोशिश की थी।
डोगा- सुपरवेनम? दैवीय ऊर्जा? हलाहल? ये सब क्या बकवास है?
नागराज- तुम्हें ये सब समझने की आवश्यकता नहीं है डोगा, बस मुझे ये बताओ की आखिर किसने तुमको एंटीवेनम उपलब्ध करवाया? किसने मेरी और तुम्हारी भिड़ंत की फुटेज मीडिया को दी? किसने करुणाकरण को ब्लैकमेल करके सुपरवेनम बनवाया?
डोगा- ये सब मुझे कैसे पता?
नागराज- हम्म, यानी कि तुम ऐसे नहीं मानोगे।

अचानक ही नागराज की नज़र सबसे पीछे खड़े धनिया पर चली गयी, वह विलक्षण नागगति से दौड़कर एकदम धनिया के सामने जाकर खड़ा हो गया।

नागराज (मुस्कुराकर)- कैसे हो दोस्त? मेरी तीक्ष्ण नाग इंद्रियों ने तुमको पहचान लिया है, तुम्हीं ने उस दिन मुझे ब्लैकमेल करके राजनगर भेजा था।

इससे पहले कि धनिया कुछ जवाब देता, नागराज ने उसे एक हाथ से गिरेबान समेत उठा लिया। नागराज की इस हरकत पर काली ने एक के बाद एक उस पर एंटीवेनम गन के सटीक निशाने लगा दिए लेकिन नागराज पर कोई असर नहीं हुआ। ये देखकर अदरक, काली और हल्दी उसकी तरफ बढ़े लेकिन दूसरे हाथ को नागराज ने ज़ोर से झटका जिससे हवा में ऐसा वेग उत्पन्न हुआ जिससे तीनों ही उड़कर अलग अलग जा गिरे। काली और हल्दी तो गिरने के इम्पैक्ट से ही बेहोश हो गये लेकिन अदरक अधिक मजबूत शरीर का था इसलिए वह घायल होकर भी होश में ही रहा।
ये देखकर डोगा, चीता और लोमड़ी भी आक्रोश में नागराज की तरफ बढ़े लेकिन ये देखकर उनके कदम रुक गये की अब नागराज के हाथ में धनिया का गिरेबान नहीं बल्कि गर्दन थी। नागराज धनिया को गौर से देखता हुआ बोला-
“हम्म, तूने मुझे ब्लैकमेल ज़रूर किया था लेकिन तू वो नहीं है जिसकी मुझे तलाश है। डॉक्टर करुणाकरण के अनुसार उस रहस्यमयी व्यक्ति का कद डोगा से भी थोड़ा ऊंचा है यानी तुममें से वो कोई नहीं है लेकिन तुम लोग ज़रूर जानते हो कि वो कौन है इसलिए बिना कोई देर किये मुझे नाम बताओ।”

डोगा- हमें उसका नाम नहीं पता है नागराज, उसने ना एंटीवेनम की डील प्रत्यक्ष रूप से आकर की और ना ही उस फुटेज की।

“मुझे बहाने नहीं एक नाम चाहिए!”
नागराज क्रोध से बोला, अब उसके हाथ का मजबूत शिकंजा धनिया की गर्दन के इर्द गिर्द और मज़बूती से कस गया था। वह बोला- “अगर मैं अपना हाथ थोड़ा और कस दूंगा तो गर्दन की हड्डी टूटने में वक्त नहीं लगेगा इसलिए मुझे जल्दी बताओ की वो कौन था?”

धनिया का चेहरा लाल पड़ता जा रहा था, ये देखकर डोगा के जबड़े भिंच गये थे, उसके अंदर नागराज को फाड़कर सुखा देने की तीव्र इच्छा उठ रही थी लेकिन वो जानता था कि लाख चाहकर भी वो ऐसा नहीं कर सकता इसलिए बेबसी से अपनी जगह खड़ा था। अदरक खड़े होना चाह रहे थे लेकिन उन्हें गिरने के कारण टांगों में कुछ फ्रैक्चर जैसा महसूस हो रहा था जिसके कारण वे उठ नहीं पा रहे थे लेकिन धनिया की हालत देखकर वे वहीं से पड़े पड़े चिल्लाये-
“रुक जाओ नागराज! मैं उस व्यक्ति का नाम जानता हूँ लेकिन अगर धनिया को कुछ हुआ तो तुम्हें वह नाम कभी नहीं मिलेगा!”

इतना सुनते ही धनिया की गर्दन पर उसकी पकड़ ढीली पड़ गयी, धनिया ज़मीन पर गिरकर खांसने लगे। डोगा, चीता और लोमड़ी धनिया को संभालने में लग गये। नागराज अदरक के पास पहुंचा और उनको सहारा देकर पास वाली दीवार पर पीठ के बल टिका दिया और वहीं घुटने के बल बैठकर अदरक से धीमी आवाज़ में बोला
“मुझे उम्मीद थी कि आपमें से कोई तो समझदारी भरा कदम उठाएगा, मुझे बस वो नाम बताइये और फिर मैं आप लोगों को आगे परेशान नहीं करूँगा ये मेरा वादा है।”

अदरक (गहरी सांस लेकर)- जिस रहस्यमयी इंसान को तुम इतनी तल्लीनता से ढूंढ रहे हो वो तुम नायकों में से ही एक है।
नागराज (जिज्ञासावश)- क्या? कौन है वो?
अदरक- जिस व्यक्ति को तुम इतने दिलो जान से ढूंढ रहे हो, वो है ……..इंस्पेक्टर स्टील!

एक बार को जितने लोग वहां खड़े थे, किसी को अपने कानों पर यकीन नहीं हुआ लेकिन सबसे अधिक हक्का बक्का खड़ा था नागराज, उसकी आंखें पथरा सी गयीं थीं। वह लड़खड़ाती ज़ुबान से बोला-
“य..ये क्या कह रहे हैं आप? इंस्पेक्टर स्टील? आपको पता भी है कि किसके बारे में बात कर रहे हैं? स्टील एक ब्रह्मांड रक्षक है, वो ऐसा कभी नहीं करेगा!”

अदरक- क्यों मजाक करते हो नागराज? किसी भी सुपरविलेन से ज़्यादा ठोस कारण है स्टील के पास तुम्हारे साथ ऐसा करने का। भूल गये तुम? सात वर्ष पहले जब इच्छाधारियों को पकड़ने के लिए सरकार ने प्रतिरोधी दल बनाया था जिनको नागमणि द्वारा निर्मित एंटीवेनम दिया गया था ताकि वे इच्छाधारी नागों को पकड़ सकें तो इंस्पेक्टर अमर भी एक टीम को लीड कर रहा था, वो तुम तक पहुंच गये थे तब याद है कि तुमने क्या किया था?
नागराज- मैंने ध्वंसक सर्प मारकर अमर के शरीर को क्षतिग्रस्त कर दिया था लेकिन उसने मुझे माफ कर दिया था वो ज़िन्दगी में आगे बढ़ चुका था।
अदरक- उसने कहा और तुमने मान लिया? तुमने उसे ज़िन्दगी में आगे बढ़ने लायक छोड़ा ही कहां था? उसे फर्ज की मशीन कहा जाता है लेकिन उसे इंसान से मशीन सिर्फ तुम्हारे कारण बनना पड़ा था। खुद ही सोचो की हमें इतना बड़ा एंटीवेनम का जखीरा कौन दे सकता है? इतने एंटीवेनम का एक्सेस सिर्फ उसी के पास हो सकता है जिसने खुद इनको बहुतायत में प्रयोग किया हो, जैसे कि प्रतिरोधी दल का एक सदस्य। उसने तो ब्रह्मांड रक्षक दल की सदस्यता भी इसीलिए हासिल की थी ताकि तुम्हारे साथ रहकर तुम्हारी शक्तियों का विश्लेषण कर सके।

नागराज कुछ बोलना चाहता था लेकिन बोल नहीं पा रहा था, अदरक के सारे तर्क अकाट्य थे। डॉक्टर करुणाकरण ने भी कहा था कि उस रहस्यमयी व्यक्ति की मशीनी आवाज़ थी, रोबोट जैसी। सारी बातें स्टील की तरफ ही इशारा कर रही थीं।

नागराज- आपको इतना सब कैसे पता?
अदरक- हम काले डकैत हैं नागराज, हमारी नज़रें सब पर होती हैं खासकर कि उन पर जो दुनिया के सामने नायक बनकर दिखाते हैं लेकिन उनकी असलियत कुछ और ही होती है।

नागराज अब एक पल भी वहां नहीं रुका, वह हवा की गति से किसी की पलक झपकने से पहले ही आइसक्रीम स्टोर से निकल गया। अब तक धनिया काफी संयत हो चुके थे, सूरज दौड़कर अदरक चाचा के पास गया-
“आप ठीक हैं चाचा?”

अदरक- ठीक तो हूँ लेकिन लगता है कि पैर में फ्रैक्चर आ गया है।
डोगा- ये आपने ठीक नहीं किया चाचा, आखिर स्टील को इन सबमें घसीटने की क्या ज़रूरत थी।
अदरक- तुम्हें लगता है कि मैंने उसे ज़बरदस्ती घसीटा?
सूरज- इसका मतलब स..स्टील ही वाकई में है वो व्यक्ति जो नागराज के पीछे पड़ा है? और आपको इस बात का पहले से पता था? हम लोगों को कभी कुछ क्यों नहीं बताया?
अदरक- मजबूरी थी, स्टील अपने पद का इस्तेमाल करके राजनगर से आने वाले हमारे अवैध हथियारों के कन्साइनमेंट को पास कराता था। उसने मुझे सख्त हिदायत दी थी कि अगर उसके बारे में बाकी काले डकैतों को बताया तो वो सारी मदद देना बंद कर देगा इसीलिए मैं चुप रहा।
सूरज- फिर भी चाचा, आपको हम लोगों को बता देना चाहिए था।

अदरक कुछ नहीं बोले, लोमड़ी बोली-
“सूरज! बाकी दोनों चाचाओं की भी हालत खस्ता है, इन्हें तुरंत अस्पताल…..”

अदरक (बात बीच में काटकर)- नहीं अस्पताल नहीं, इस वेशभूषा में तो कभी नहीं। इन्हें वापिस बेसमेंट में ले चलो।
चीता- लेकिन चाचा, आपको नहीं लगता कि अस्पताल अच्छा इलाज कर सकता है?
अदरक- हाँ अच्छा कर सकता है लेकिन मैंने ये तो नहीं कहा कि हम खराब इलाज करते हैं।

नागराज उड़कर समुद्र के किनारे पहुंचा, उसके दिमाग में इस रहस्य के खुलने के बाद से उथल पुथल मच गई थी, न जाने वह समुद्र किनारे मिट्टी पर बैठकर कितनी देर तक लहरों को देखता रहा।

राजनगर में नए कमिश्नर रमन त्रिपाठी का तबादला हुआ था, उनके स्वागत में कोई विशेष तैयारी नहीं हुई और ना उन्हें चाहिए थी क्योंकि उन्हें क्षतिग्रस्त राजनगर के जख्म भरने थे, वे कुछ फाइलें देख रहे थे कि तभी स्टील उनके केबिन में आया-
“गुड मॉर्निंग सर! आपने मुझे बुलाया था?”
रमन त्रिपाठी अचानक एक फ़ाइल से अपना ध्यान हटाकर बोले-
“आओ आओ स्टील! बैठो!”
स्टील रमन त्रिपाठी के सामने वाली कुर्सी पर बैठ गया, त्रिपाठी उसे गौर से देखने लगे, फिर बोले-
“वाह! मुझे यकीन नहीं हो रहा कि मैं इंस्पेक्टर स्टील के सामने बैठा हूँ, तुम्हारे कारनामों का तो हर कोई दीवाना है!”

स्टील- सर आप तो मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं।
रमन- व्हाट नॉनसेंस! मैं तो बस सच बयान कर रहा हूँ। खैर, मैंने काफी रिसर्च की इन ….. हन्टर्स के बारे में। इनकी पहुंच बहुत अधिक है इसलिए ज़्यादा जानकारी तो नहीं जुटा पाया लेकिन मुझे पता चला है कि इनके “मठाधीश” को ध्रुव ने मार दिया।
स्टील- जी सर, ध्रुव ने अपने परिवार का बदला ले लिया।
रमन- लेकिन एक खूनी बनकर, देखो स्टील ध्रुव से मुझे भी हमदर्दी है लेकिन कानून सबके लिए एक बराबर है।
स्टील- लेकिन मठ में उनके अपने कानून हैं सर, उनका अपना साम्राज्य है। यदि आप ध्रुव को गिरफ्तार करने का सोच रहे हैं तो मेरी राय है कि इस विचार को दिमाग से निकाल दीजिये क्योंकि जितना मैं हन्टर्स के बारे में जानता हूँ , वो तो बड़ी-बड़ी सरकारों तक के तख्ते पलट सकते हैं। दूसरी बात ये कि ध्रुव के कारण ही हन्टर्स मठ में सीमित हैं और जब ऐसी शक्तियां खुलकर सामने आती हैं तो कैसी तबाही मचाती हैं ये कुछ दिन पहले सब देख चुके हैं। बाकी आपकी मर्जी लेकिन ध्रुव अब मठाधीश बन चुका है और उसको किसी हत्या के लिए गिरफ्तार करने असंभव ही है।
रमन- हम्म, ठीक है मैं तुम्हारी बात समझ गया लेकिन एक और ब्रह्मांड रक्षक है जिसके हाथ खून से रंगे हैं।
स्टील- आप परमाणु की बात कर रहे हैं।
रमन- उसने सिर्फ सुप्रीमो को नहीं मारा बल्कि एक ऐसे ज़रिये को खत्म कर दिया जो आतंकवाद जगत के रहस्य को उजागर करने में हमारी मदद करता।
स्टील- मैं आपकी बात से सहमत हूँ, बताइये मुझे क्या करना होगा।
रमन- देखो स्टील ध्रुव भले ही अब राजनगर रक्षक ना रहा हो लेकिन उसके द्वारा स्थापित कमांडो फ़ोर्स अब भी पुलिस फ़ोर्स के साथ एक पैरेलल डिफेन्स सिस्टम के रूप में मौजूद है, अब हमारे सामने ये चुनौती है कि हमें अपने आप को उनसे बेहतर साबित करना होगा और कुछ कठोर कदम उठाए बिना ये संभव नहीं है, कठोर कदम जैसे कि हमारे द्वारा परमाणु की गिरफ्तारी। परमाणु ने हत्या अरावली में की है जो कि राजनगर का ही एक हिस्सा है इससे हमारे पास अपने आप अधिकार आ जाता है उसे हिरासत में लेने का। मैं दिल्ली पुलिस को इन्फॉर्म कर देता हूँ, तुम आज ही मेरी स्पेशल परमिशन पर दिल्ली जा रहे हो परमाणु को पकड़ने के लिए।

स्टील इसके आगे कुछ नहीं बोला, वह बस अपनी कुर्सी से उठा, कमिश्नर को सैल्यूट किया और कमरे से बाहर चला गया।
एक अंधेरी बड़ी गुफा एक काली पहाड़ी के ऊपर स्थित थी, ये असम के वो हिस्सा था जहां न जानवर विचरण करते थे, न इंसान, आसपास के पेड़ भी सूखकर ठूंठ हो चुके थे। उस गुफा में एक बड़ी सफेद दाढ़ी वाला तांत्रिक ध्यानमग्न होकर बैठा था, अचानक ही उस तांत्रिक ने अपनी आंखें खोलीं और पूरी ताकत से चिल्लाया-
“नहीं!”
उस तांत्रिक की आवाज़ सुनकर प्रेत जैकब उस तांत्रिक की तरफ दौड़ा चला आया और पास आकर बोला-
“क्या हुआ इरी? तुम चिल्लाये क्यों?”

इरी के माथे पर पसीने की बूंदे चुहचुहा आयी थीं, वे बोले
“मैं तो सामान्य तंत्र साधना कर रहा था जैकब लेकिन अचानक ही मुझे कुछ भीषण तरंगें मिलीं!”
जैकब ने भी जिज्ञासावश पूछा- “तरंगें! कैसी तरंगें!”
इरी ने जैकब की तरफ फटी फटी आंखों से देखा और बोला- “पाप क्षेत्र का द्वार कमज़ोर पड़ रहा है जैकब!”
ये सुनकर जैकब भी स्तब्ध रह गया, वह बोला- “पाप क्षेत्र? ये भला कैसे संभव है? पाप क्षेत्र का द्वार खुलना तभी संभव है जब संसार में नैतिकता का भारी पतन होने लगे, जब पुण्य शक्तियां भ्रष्ट हो जायें लेकिन एक साथ इतने नायकों का भ्रष्ट होना भला कैसे संभव है?”

इरी- पता नहीं जैकब, मुझे भी समझ में नहीं आ रहा कि आखिर हो क्या रहा है? जिस बात का मुझे सबसे अधिक डर था वही हो रहा है, पाप क्षेत्र के खुलने से “वह” आज़ाद हो गया और अगर “वह” आज़ाद हुआ तो इस पृथ्वी पर ही नहीं बल्कि समूचे ब्रह्मांड पर खतरा मंडराएगा।
जैकब- यानी कि यदि पुण्य शक्तियां और अधिक भ्रष्ट हो गईं तो पाप क्षेत्र का आयामद्वार खुलने से कोई नहीं रोक पायेगा।
इरी- सही कहा, यदि नैतिकता का इसी प्रकार से पतन होता रहा तो पाप क्षेत्र का द्वार खुलने में समय नहीं लगेगा और फिर इस समूचे ब्रह्मांड पर खतरा मंडराएगा।

शाम के चार बज चुके थे और दिल्ली की छत कहे जाने वाला परमाणु पूरे जोश से दिल्ली के आकाश पर उड़ रहा था, उसके कानों में प्रोफेसर कमलकांत की आवाज़ गूंजी “परमाणु! कनॉट प्लेस पर कुछ लोग ज्वैलरी स्टोर से सामान चोरी कर रहे हैं, तुम पास ही हो इसलिए जाकर सिचुएशन संभाल सकते हो।”

परमाणु- ठीक है प्रोफेसर।

ज्वैलरी स्टोर से तीन गुंडे गोलियां दनदनाते हुए बाहर निकले, लुटेरों से सख्त हिदायत मिलने के बाद लोग स्टोर में अपने घुटने के बल बैठे हुए थे। गुंडे एक सफेद वैन की तरफ भागे, उनके पास बोरियां भर भर के लूट का सामान था कि तभी आकाश से नीचे आये परमाणु ने सबसे आगे दौड़ रहे गुंडे को एक जोरदार लात लगाई, वह उछलकर पीछे से आ रहे अपने दोनों साथियों से टकराया और तीनों धरती पर गिर गए। इससे पहले कि परमाणु कुछ और करता, तीनों गुंडों ने ही अपने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण की मुद्रा में हाथ उठा लिए।

परमाणु- अरे वाह! इतने शरीफ गुंडे तो आज पहली बार देखे वरना मेरी लात के बाद किसी भी गुंडे का पहला रिएक्शन आक्रमण का होता है, फिर जब थोड़ा और पिटकर उसे समझ में आ जाता है कि परमाणु से टकराना उसके बस में नहीं है तब वह आत्मसमर्पण कर देता है। चलो अब तुम्हें हवालात की सैर पर ले चलूं।

तभी परमाणु के पीछे से एक मशीनी आवाज़ गुंजी- “बहुत अच्छा काम किया आप लोगों ने, अब आपका काम खत्म और मेरा शुरू।”
परमाणु ने पीछे मुड़कर देखा तो भौचक्का रह गया क्योंकि उसके पीछे बंदूक हाथ में लिए खड़ा था इंस्पेक्टर स्टील।

परमाणु- स्टील तुम! यहाँ दिल्ली में?
स्टील- मुझे स्पेशल परमिशन पर तुम्हें पकड़ने के लिए भेजा गया है, वजह तो तुमको पता ही है।
परमाणु- यानी ये सब एक सेटअप था? मुझे पकड़ने के लिए?
स्टील- बिल्कुल, मुझे पता था कि ये नकली डकैती देखकर प्रोफेसर ज़रूर तुमको यहां भेजेंगे क्योंकि तुमको दिल्ली के इस एरिया के आसपास कई बार देखा गया है।
“यू आर अंडरअरेस्ट फ़ॉर टेकिंग अ लाइफ वंडरमैन परमाणु। “
परमाणु (गहरी सांस लेकर)- मैं तुमसे इस बारे में बहस नहीं करूंगा क्योंकि मैंने सुप्रीमो को मारने के बाद से ही सज़ा पाने का मन बना लिया था।
स्टील- हाँ लेकिन तुम अकेले दोषी नहीं हो, तुम्हारे निर्माता प्रोफेसर कमलकांत को भी गिरफ्तार करना है मुझे।
परमाणु- क्या? पर उन्हें क्यों?
स्टील- अनजान मत बनो परमाणु, सबको पता है कि वंडरमैन परमाणु के पीछे किसका दिमाग है, सुप्रीमो के अंत के लिए वे भी दोषी हैं।
परमाणु- अच्छा? क्या सुबूत है तुम्हारे पास?
स्टील- सुबूत भी मिल जाएगा जब मैं वारंट के साथ उनकी लैब की तलाशी लेने जाऊंगा।
परमाणु- देखो स्टील, प्रोफेसर को इन सब में मत घसीटो, सुप्रीमो को मैंने मारा है और क्यों मारा है वो भी मैं ऑन रिकॉर्ड बताने को तैयार हूं लेकिन मामाजी को इन सब चीजों से दूर रखो।

स्टील की खामोशी ने परमाणु को बता दिया कि बातों बातों में ही उसने कितना बड़ा राज स्टील को बता दिया था।
स्टील- मामाजी, हम्म। यानी कि कमलकांत तुम्हारे मामा हैं यानी कि तुम हुए धुरंधर पुलिसवाले इंस्पेक्टर विनय जिसके साथ मैंने दो तीन दफा काम किया है।

परमाणु अब आक्रमण की मुद्रा में खड़ा होकर स्टील से बोला-
“देखो स्टील, अब तुम्हें यहां से जाना होगा।”

स्टील का हाथ भी अब ब्लास्टर में तब्दील हो चुका था, वह बोला-
“जाऊंगा तो अब मैं तुम दोनों मामा भांजे को गिरफ्तार करके।”

इससे पहले की परमाणु स्टील पर कोई वार करता, स्टील ने अपना दूसरा हाथ झटका और इसी के साथ परमाणु की बेल्ट उसकी कॉस्ट्यूम से अलग होती चली गयी।

स्टील- बेवकूफ! अपना एक हाथ मैंने ब्लास्टर में इसीलिए बदला था ताकि तुम्हारा ध्यान मेरे दूसरे हाथ पर ना जाये जिसके सहारे मैंने महीन मशीनी तंतु तुम्हारी बेल्ट में पेवस्त कर दिये और जैसे ही तुमने प्रतिकार करना चाहा, तुम्हारी बेल्ट ही तुम्हारे शरीर से अलग हो गयी। अब मैं तुमको गिरफ्तार करके ही…..

स्टील की बात पूरी होने से पहले ही एक आवाज़ गूंजी “इंस्पेक्टर स्टील!”
स्टील और परमाणु की नज़रें ऊपर हो गईं जहां आकाश से धरती पर उतर रहा था नागराज, उसकी आँखों में हरी अग्नि की लपटें थीं ,आज वह कुछ ज़्यादा ही भयानक लग रहा था। वह हवा में तैरता हुआ स्टील के पास पहुंचा और उससे कहा-
“दूसरे के गुनाहों की सज़ा ही देते रहोगे या कभी अपने गुनाहों की भी भरपाई करोगे!”
स्टील बिना किसी भाव के बोला- “तुम क्या कह रहे हो नागराज? मेरी कुछ भी समझ में नहीं आ रहा।”
नागराज के चेहरे पर अपने ही एक ब्रह्मांड रक्षक साथी से मिले विश्वासघात का दर्द साफ झलक रहा था, उसने और आगे बढ़कर पूछा-
“क्या तुम ज़िम्मेदार हो मेरे शरीर में दौड़ते हलाहल के? क्या तुमने डोगा को एंटीवेनम दिया था?”
स्टील ने कुछ देर तक खामोश खड़ा रहा और फिर बोला
“यानी कि काले डकैतों ने तुमको सच्चाई बता दी, क्यों है ना?”

स्टील के इस प्रश्न से नागराज को एक और झटका मिला, वह एक प्रतिशत उम्मीद भी जाती रही जिसने उसके मन में कहीं घर कर लिया था कि स्टील इन सब घटनाओं के पीछे नहीं हो सकता, नागराज ने दर्द भरी आवाज़ में स्टील से पूछा-
“ऐसा क्यों किया तुमने स्टील, आखिर क्यों ऐसा ढोंग रचा तुमने?”
परमाणु अभी भी हतप्रभ खड़ा कभी नागराज तो कभी स्टील को देख रहा था।

स्टील- क्यों का जवाब तो तुम्हारे ही पास है नागराज, कभी तुम्हें ऐसा अहसास हुआ है कि तुम फौलाद की चारदीवारी में हमेशा हमेशा के लिए कैद हो गए हो? ऐसा अहसास मुझे हर पल होता है और मैं कभी नहीं भुला था कि मेरी इस दशा का जिम्मेदार कौन है, फिर मैंने ब्रह्मांड रक्षक की सदस्यता ले ली और तुम्हारे शरीर का विश्लेषण करने लगा। मैं जानता था कि तुमसे सीधी टक्कर नहीं ले पाऊंगा, मुझसे कहीं गुना शक्तिशाली लोग पहले कोशिश कर चुके थे लेकिन उनमें से एक भी सफल नहीं हुआ था इसलिए मैंने काले डकैतों को ज़रिया बनाया। तुम्हारे शरीर की संरचना जानने के लिए मैं करुणाकरण के पास गया, उसने मुझे बताया कि कालजयी विष एक दैवीय विष है। मैंने इंटरनेट पर कई माइथोलॉजी से जुड़े लेख देखे जहां इन सबके बारे में विस्तार से दिया था, फिर गहरी रिसर्च का सिलसिला चालू हुआ। मुझे पता हलाहल विष की भौगौलिक स्थिति के बारे में पता चला, मुझसे पहले भी कई लोग हलाहल की खोज में हिमालय की गोद में गये थे लेकिन उनमें से कई तो लौटे ही नहीं और जो लौटे उन्होंने वहां वास करने वाले खतरनाक शीतनागों का ज़िक्र किया जिसे लोगों ने कोरी गप्प समझकर भुला दिया लेकिन मैं ऐसे “पागल” समझे जाने वाले लोगों से मिला और उनसे हलाहल कुंड के लोकेशन की जानकारी हासिल की। रिसर्च के दौरान मेरे हाथ एक माइथोलॉजी से रिलेटेड लेख लगा जिसमें ज़िक्र था कि अगर दो दैवीय विष एक ही शरीर में वास करने लगें तो परिणाम भयानक होता है, एक प्रचंड ऊर्जा का जन्म होता है। इस थ्योरी की पुष्टि मैंने डॉक्टर करुणाकरण के पास जाकर की, उन्होंने भी इस बात पर अपनी सहमति जताई। मुझे लगा कि अगर हलाहल और कालजयी विष मिला दिए जाएंगे तो उनके मिश्रण से जन्म लेने वाली प्रचंड दैवीय ऊर्जा तुमको खत्म कर देगी। इस चक्कर में मैं हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों से बड़ी मुश्किल से हलाहल का कुछ अंश लेकर आया लेकिन समस्या ये थी कि इसे तुम्हारे शरीर में कैसे पहुंचाया जाए। किस्मत ने मुझे मौका दिया जब डोगा ने एक इच्छाधारी नाग की हत्या कर दी, तब काले डकैतों को इच्छाधारी नागों से सुरक्षा की ज़रूरत थी और उनको एंटीवेनम मैंने दिया, मुझे पता था कि नाग तुमको डोगा के पास अपना प्रतिद्वंद्वी बनाकर भेजेंगे। अब उसके साधारण गोला बारूद से तो तुम काबू में आते नहीं इसलिए उसे एंटीवेनम का इस्तेमाल करना ही पड़ता जो कि उसने किया, मैं उस वक्त लड़ाई के स्थान पर ही मौजूद था और मैंने आंखों में लगे कैमरा की मदद से उस प्रकरण का वीडियो शूट कर लिया। तुम एंटीवेनम से कमजोर हो गए और मजबूरन तुमको डॉक्टर करुणाकरण के पास जाना पड़ा जो कि पहले से ही हलाहल विष द्वारा तैयार सुपरवेनम तैयार करके बैठे थे तुम्हारे लिए, तुमसे पहले नागदंत ने वह सुपरवेनम ले लिया लेकिन फिर भी तुम वह विष अपने शरीर में ग्रहण करने में सफल हो गए क्योंकि नागदंत का शरीर हलाहल संभाल नहीं पाया लेकिन यहीं से मेरी योजना में गड़बड़ शुरू हो गयी। तुम्हारे शरीर में भीषण दैवीय ऊर्जा का संचार तो हुआ लेकिन उससे तुम्हारे शरीर को कोई नुकसान नहीं हुआ लेकिन तभी तुमने नागमणि और नागदंत का कत्ल कर दिया जो कि करुणाकरण की लैब के बाहर वाले सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। अब मेरी योजना बदल गयी क्योंकि तुम्हारा शरीर अविनाशी हो चुका था इसलिए एंटीवेनम भी तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता था। मुझे धीरे-धीरे पता चला कि उस भीषण दैवीय ऊर्जा का कुछ असर तुम्हारे मस्तिष्क पर हुआ है, तुम अब और उद्दंड हो चुके हो, रह रहकर तुम्हारा क्रूर स्वभाव बाहर निकल ही आता था इसलिए मैंने सोचा कि नायक का अंत तो हो नहीं सकता तो क्यों ना नायक की छवि का अंत कर दिया जाए, इसी लिए मैंने काले डकैतों को वह फुटेज रिकॉर्डिंग भेजी जिसमें तुमने दो बेरहमी से दो हत्याओं को अंजाम दिया। तुम और शक्तिशाली बन चुके हो लेकिन ये शक्ति किस काम की जब लोग ही तुम्हें रक्षक के बजाय अपना भक्षक मान लें।

इतना सुनकर नागराज की मजबूत पकड़ स्टील की फौलादी गर्दन पर जम गई और पकड़ इतनी कस गयी की स्टील गर्दन के आसपास डेंट पड़ने लगे। नागराज की दोनों आंखें वैसे ही हरी अग्नि लपटों से दहकने लगी थीं। वह क्रोध से बोला-
“अब लोग मुझे रक्षक मानें या भक्षक, मुझको परवाह नहीं! मैं तुझको नष्ट करके रहूंगा।”

स्टील- अगर तुमने मुझे मार दिया तो काले डकैत तुम्हारा वह वीडियो वायरल कर देंगे नागराज।
नागराज- मैंने कहा ना कि मुझे परवाह नहीं, बहुत कर ली तुम इंसानों की रक्षा और बदले में मुझे क्या मिला? दुख? धोखा? तिरस्कार? अब बस बहुत हुआ, अब नागराज मानवता की नहीं बल्कि इच्छाधारियों की रक्षा करेगा जो ना सिर्फ मुझे अपना कहते हैं बल्कि सच में अपना मानते भी हैं। मुझे यकीन नहीं होता कि तुम लालची, स्वार्थी, कायर और कमज़ोर इंसानों के पीछे मैंने इतनी बार अपने सच्चे हितैषियों को नुकसान पहुंचाया लेकिन अब और नहीं। तेरे अंत के साथ होगी नागराज की एक नई शुरुआत।

इतनी देर से चुप खड़ा परमाणु नागराज की तरफ दौड़ पड़ा-
“स्टील को छोड़ दो नागराज, क्या तुम चाहते हो कि तुम्हारे हाथ एक ब्रह्मांड रक्षक के खून से रंग जाएं?”
लेकिन परमाणु के पास पहुंचते ही नागराज के जोरदार झापड़ ने उसे धरती पर गिरा दिया और वह तुरंत ही होश खो बैठा।

अब नागराज की आंखों से निकल रही हरी लपटें और तेज़ हो गयी थीं, यह देखकर स्टील बोला- “अब मेरा अंत ही बनेगा तेरी नायक छवि के अंत की शुरुआत। मुझे मरने का गम नहीं क्योंकि मेरे मशीनी जीवन का उद्देश्य सफल हो चुका है, मेरी मौत से लोगों की ये गलतफहमी भी मर जाएगी कि तू उनका नायक है।”

ये स्टील के मुंह से निकले आखिरी शब्द थे क्योंकि इसके बाद नागराज के नेत्रों से प्रचंड हरी अग्नि लपटें निकलीं जिन्होंने स्टील के सिर को मोम की तरह पिघलाना शुरू कर दिया। स्टील की कर्णभेदी मशीनी चीत्कार पूरे वातावरण में गूंज गयी लेकिन नागराज की आंखों से बरसते अंगारे तब तक नहीं रुके जब तक स्टील का सिर पूरी तरह पिघल नहीं गया।

अब स्टील का निष्क्रय शरीर “धप्प” से ज़मीन पर गिर पड़ा, गले हुए सिर में से हल्का हल्का धुंआ उठ रहा था, इंस्पेक्टर अमर के दिमाग के भस्म होते ही इंस्पेक्टर स्टील भी खत्म हो चुका था। नागराज ने पहले क्रोध में ध्यान नहीं दिया था लेकिन अब उसने देखा कि लगभग सौ से अभी अधिक लोग उसे घेरे खड़े हैं, कुछ इस घटना को फोन से रिकॉर्ड भी कर रहे थे। नागराज चीखकर बोला- “अब तुम लोग भी मरोगे, मानवों से धरती को खाली कर देगा नागराज, अब होगा सिर्फ इच्छाधारियों का राज।”
नागराज के इस कथन के बाद से लोगों में भगदड़ मच गई, नागराज हवा में कुछ ऊंचा उठ गया और कहा-
“अब अपने अंत के लिए तैयार हो जाओ तुच्छ मानवों, अब नागराज तुममें से एक एक को नष्ट कर देगा।”
नागराज शायद अपना कहा कर भी देता अगर उसके चेहरे पर एक आग का गोला आकर ना टकराता, उस आग के गोले से नागराज को कुछ जलन महसूस हुई जबकि साधारण आग उसको कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकती थी। उसने उस दिशा में देखा जहां से वह आग का गोला आया था, उस दिशा से शक्ति अपने दोनों हाथों में ऊष्मा पैदा किये नागराज के पास ही आ रही थी।

नागराज (आश्चर्य से)- शक्ति तुम? तुम यहाँ कैसे?

शक्ति विस्फारित नेत्रों से कभी नागराज को, तो कभी स्टील की लाश को देख रही थी, वह अविश्वास से बोली
“ये..ये तुमने क्या किया नागराज?”
नागराज बेशर्मी से बोला- “मानवों को उनकी करनी का फल मिल गया, एक विश्वासघाती को मैंने उसके अंजाम तक पहुंचा दिया। तुम सभी मानवों का यही अंजाम होगा अब।”

शक्ति- उफ्फ, एक साल बाद मैं धरती पर लौटी और यहां क्या से क्या हो गया।
नागराज- तुम सही समय पर लौटी हो शक्ति, मेरी शक्ति परीक्षण के लिए तुमसे बेहतर प्रतिद्वंद्वी कहाँ मिलेगा मुझे?
शक्ति- ये तुमको हो क्या गया है नागराज? मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा कि तुम ही नागराज हो।
नागराज- मैं बेहतर बन गया हूँ शक्ति, तुम सबसे बेहतर। अब मानवों को मिटाकर मैं इच्छाधारियों के राज की शुरुआत करूँगा पृथ्वी पर।
शक्ति- मेरा तीसरा नेत्र जब खुलता है तो दैत्य, दानव, देव, यक्ष, गंधर्व, मानव किसी को नहीं बख्शता। क्या तुम वाकई अपने ऊपर ये परीक्षण करवाना चाहोगे?

नागराज कुछ नहीं बोला, उसने बस शक्ति को घूरा और वहां से तेज गति आए उड़ता हुआ चला गया। अब वहां शक्ति थी, बेहोश परमाणु था और स्टील की गली हुई लाश थी। शक्ति अब भी समझने की कोशिश कर रही थी कि आखिर हुआ क्या, आखिर कैसे नैतिकता पर अडिग रहने वाले नायकों का ये हश्र हो गया।

नागराज तेज़ गति से उड़ता हुआ एक सुनसान जगह के बीचोंबीच एक झील के सामने उतर गया। अब तक उसका चेहरा सामान्य हो चुका था लेकिन जब उसने झील के साफ पानी में अपनी शक्ल देखी तो उसे दो भयानक रूप से जलती आंखें नज़र आईं, एक कुटिल मुस्कुराहट नज़र आई, वह अक्स वाकई बहुत भयानक था। अचानक ही उस अक्स ने पूछा- “ऐसे क्या देख रहा है, मैं तेरा ही अंतर्मन हूँ।”
नागराज अपना चेहरा झील के थोड़ा और पास ले गया और पूछा- “कौन हो तुम? क्या कर रहे हो तुम मेरे साथ?”
अक्स हंसते हुए बोला- “मैं तुमको और बेहतर बना रहा हूँ, मैं तुम्हारी क्रूरता का सबसे चरम रूप हूँ जो पहले तुम्हारे भीतर कहीं न कहीं दबा हुआ था लेकिन आज तुमने मुझे आज़ाद कर दिया। मुझे वापस आने दो नागराज, ज़रा सोचो कि हम क्या क्या नहीं कर सकते एक साथ।”

नागराज (झील में देखते हुए)- सवाल ही पैदा नहीं होता।
अक्स- हाहाहा, तुम मुझसे अपना पीछा नहीं छुड़ा सकते नागराज, अब मैं और तुम एक ही हैं, तुम चाहो या ना चाहो।

इरी गुफा में इधर उधर देख रहा था, जैसे कि उसे तरंगें आती जाती महसूस हो रही हों। जैकब ने उसे ऐसे देख पूछा- “क्या हुआ इरी?”
इरी ने जैकब की तरफ देखा, उसकी आँखों में भय नज़र आ रहा था, वह घबराते हुए बोला-
“जिस बात का डर था वही हुआ है जैकब। नैतिकता का स्तम्भ माने जाने वालों में कोई ऐसा भीषण अनैतिक कार्य किया है जिसने उन्हें पूरी तरह भ्रष्ट कर दिया है, पाप क्षेत्र का द्वार अब खुल चुका है!”

To be continued….
Written by- Samvart Harshit for Comic Haveli

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12 Comments on “Earth 61 Phase 2 Part 12”

  1. Bhai aapki story lajawab hai…

    Nagraj ko aise roop me dekh kar josh aarha hai but josh se zyada bura lag rha hai waise mai nagraj ka utna bada fan nhi rha lekin pasand to har koi karta hai Nagraj ko….mai bayan nhi kr parha hu ki kitna bura lag rha hai nagraj k liye wo khud ye sab nhi karna chahta lekin ho rha hai…steel k liye bhi bohat bura lag rha hai qki steel ko Farz ki machine k naam se hi jana jata hai aur steel apne badle ki aag me farz se bilkul bhatak gya aur uska anjaam bhi wahi tha qki usne bohat se begunah naag ko mara..sirf apna badla lene k liye mere mind me steel ki jo image hai wo farz ki machine wali h hai isliye mai ye hazam nhi kar parha hu…qki superhero wahi jo farz k liye jaan dr sakta hai lekin le nhi sakta aur steel to farz ki machine tha aapki story me steel ko as a villain dikhaya very interesting….aur nagraj ne uska dimag hi jala dala amar khtam to steel khatam…shakti ki entry bohat thik time pe ki aapne but shakti se thodi fight hoti to aur bhi maza aajata qki shakti ki power level nagraj se zyada hai bcz uski 3rd eye k aage to devta bhi nhi thahrte phr bhi nagraj iss time kisi devta se powerful h….idhar doga ko itna bebas kardiya tha nagraj ne ki doga chah kr bhi ek kadam hil nhi parha tha bechara Doga itna majbur kabhi nhi hua….ek baar phr se parmanu ki belt aapne utrwa diya i dont like this seriously…..ab to parmanu ko apni dress k niche ek aur belt pahenni hogi jo kisi ko na dikhe aur ye wali belt artificial belt ho sirf like haathi k daant…

    Idhar Anthony ki entry hone wali hai qki iri ka zikr aaya to anthony bhi aayega hi aayega…ab 3 log se ummeed hai puri tarah se jo nagraj ko rok sakte hain….

    1st Anthony
    2nd Shakti

    Aur inn log se na ho paya to dhruva rokega apni sena k sath ya phr apne bemisal dimag k dum pe jisme hazaro nhi balki laakho ideas ek sath panapte hain..

    Next part jaldi se laao
    Mai to kah rha hu aaj hi lekr aao

  2. Ab sadham aayega
    Waise 11th part me hi mujhe steel hi laga overcoat wala jo ki bahuton ko laga hoga
    Steel is a robot
    Wo chilla nhi sakta, cheekh nhi sakta
    But bahut dhakad hai ye part
    Steel is dead
    Paap dwaar khul chuka hai
    Nagraj bhayankar rakshas ban chuka hai aur usko actual me rok sakne wala ekmatra shaksh mathadhish bana baitha hai
    Par dhruv mathadhish nhi bhi hota to is nagraj ko wo kaise rok pata?
    Bahut bhayankar events ho gaye hain ab
    Kafi permanent changes
    Shakti finally aayi par steel khatm ho chuka tha tab tak
    Next part sadham par focused rahega but baki k parts bahut jabardast hone wale hain
    Doga bane raho, cheeta banne ki koshis mat karo is one dialogue that I’m not going to forget

  3. क्या घातक लिखा है आपने । बहुत ही शानदार।
    शुरुआत में हिमालय पर घटित घटना को पढ़ते हुए लगा ये तो यति है फिर करेक्शन किया ना ना ये तो नागपाशा है फिर करेक्शन किया ये रोबोट कौन हो सकता है? लेकिन जब अदरक ने बम फोड़ा तब पता लगा कि ये तो स्टील है।
    इतने शानदार तरीके से आपने सस्पेंस को बनाये रखा।
    उसके बाद डोगा और लोमड़ी के बीच का डायलाग मुझे बहुत पसंद आया। जिसमे डोगा कहता है- “जब तक कानून को तोड़ने वाले भक्षक रहेंगे तब तक कानून तोड़ने वाले रक्षकों का होना जरूरी ही है।” हाहाहाहा।
    You know what i mean

    खैर जोक्स अपार्ट। दोनों के बीच पनप रहे प्रेम को देख कर बड़ा सुकून मिला। नागराज एक टुच्चे विलन को तरह एक सांप को भेजकर डोगा को बुला रहा था बाद शानदार था क्योंकि उसका एक रूप से अब भी नायक ही सिद्ध करना चाहता है।

    स्टील ने भी चालबाजी करके परमाणु को फँसाया। लेकिन इस पार्ट में परमाणु ने अपनी इडेंटिटी सबके सामने जाहिर कर दी।
    स्टील की मौत थोड़ा दर्दनाक थी।
    मगर अब नागराज पूरा का पूरा मानवता का दुश्मन हो चुका है।
    नागराज शक्ति से डर गया?

    अफसोस !

    खैर आपकी कहानी में सभी हीरोज की इडेंटिटी खुल जाए रही है जो अमूमन हो जाना चाहिए और वही चल रहा है। बहुग शानदार है।

    अब आगे क्या? असम का जिक्र है मतलब अब आने वाला है जंगल का जल्लाद। भेड़िया वाह।
    इरी और जैकब का आगमन मतलब आगमन होने वाला है एंथोनी का।
    ये सधम अधम का आगमन होने वाला है? या फिर ड्रैकुला का? वैसे ड्रैकुला अब नागराज के सामने नहीं टिक सकता तो सधम अधम वाला है शायद!

    खैर हो जो भी मजा जरूर आने वाला है।
    पार्ट 13 का इंतजार रहेगा।

  4. कहानी बहुत ही रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुकी है। स्टील द्वारा रचा गया षड्यंत्र सोच से परे था, उसने बहुत ही सोच के चाल चली, उसकी चाल के पीछे आपके दिमाग की तारीफ बनती है। स्टील अब मर चुका है, परमाणु सजा भुगतने को तैयार हैं, ध्रुव मठ में है, नागराज के ऊपर उसका क्रूर स्वभाव बढ़ता जा रहा है, पाप क्षेत्र का द्वार खुल चुका है व उसमे से कौन बाहर आएगा ये भविष्य के गर्त में छुपा है, कुल मिला के जिज्ञासा की पराकाष्ठा पार होती जा रही। हर भाग के साथ आपकी सोच व लेखनी में जबरदस्त निखार आता जा रहा है। आगामी भाग के लिए शुभकामनाएं

  5. बहुत धन्यवाद तारिक भाई, देव भाई, प्रदीप भाई और प्रद्युम्न भाई। आप लोग इसी तरह लेखकों का सपोर्ट बनाये रखिये ताकि हम लोग आपको और बेहतर कहानियां दे पाएं, आपकी समीक्षाएं बहुत मूल्यवान हैं और एकदम ऊर्जा भर देती हैं। अगला भाग भी जल्द ही सबके सामने आयेगा।

  6. प्रिय हर्षित जी!

    ये भाग बहुत अच्छा था।पर ऐसा लगा कि कहानी बहुत जल्दी खत्म हो गई।खैर,इस कहानी में ध्रुव नहीं दिखा।
    मुझे शक था कि हलाहल पाने वाला शायद मिस किलर और नगीना की मिली भगत होगी,क्योंकि ‘नागाधीश’ में वे दोनों थी,पर निकला वो स्टील। फर्ज की जगह वो एक फर्जी मशीन बन गया था।शायद ही कोई सोच सकता है कि स्टील ऐसा बन गया।
    वैसे एक दोष हमें लगा। ये शीतनाग जाति में हर प्रहरी तांत्रिक बोतल रखता था,ताकि कोई भी बाहरी आदमी आकर उसे छीन ले? कुछ तो कठिनाई स्टील को होनी चाहिये थी हलाहल पाने में। ऐसा लगा कि कोई भी हल्का फुल्का तगड़ा आदमी आयेगा और आकर बोतल में हलाहल भरकर कुछ भी कर लेगा।
    वो माइथोलॉजी नहीं, पौराणिक दस्तावेज होता है-ऐसा लिखिये तो सही रहेगा।

    स्टील की मौत करा दी,वैसे एक नायक के लिये तो मरना सही नहीं लगा पर उसके पाप के लिये उसे ये दंड मिलना गलत नहीं लगता। पर फिर भी आप उसे केवल तोड़-मरोड़ देते,पर आपने जान से मरवाने की आदत के चलते स्टील का श्राद्ध करा दिया।
    सर्पाकृति दानव से डोगा की भिड़ंत और वैज्ञानिक तरीके से उसको मारने का तरीका बहुत अच्छा लगा। यहां तक तो नागराज में कुछ नैतिकता थी,पर अचानक स्टील के सच बताने पर वो खलनायक बन गया।
    राज कॉमिक्स ने ‘आतंकवादी नागराज’ में उसके हाथों तीन नायकों को पिटवाया पर जान किसी की नहीं ली। पर आपने तीन मौतेॉ करवा दीं। ये एक नायक का पतन है।

    ईरी,जैकब के बाद ऐंथोनी भी आने वाला है। शक्ति का आगमन कल्पनातीत था, पर था बहुत सुंदर ।

    पहली बार पापक्षेत्र के बारे में सुना है कि नायक के पाप करने पर भी वो खुलता है,ये नई बात है। अब उसमें से सधम बाहर आयेगा ही। क्या पता, सर्वनायक की तरह ड्रैकुला और बोर्डेलो भी आ जायें।पर बहुत अच्छा होने वाला है इस बार। कुछ नया ही विध्वंस, परकाले,सर्वनायक या ड्रैकुला अथवा कुछ नया-सा देखने को मिलेगा।

    एक बात अजीब लगी। परमाणु जैसा व्यक्ति इतनी सरलता से कभी अपने मामा का नाम लेकर अपना भेद नहीं खोलेगा। ये बहुत ही हास्यास्पद बात है।और फिर कमिश्नर ने प्रोफेसर को पकड़ने की बात थोड़े ही कही थी?इससे अच्छा होता कि डायरेक्ट जाकर प्रोफेसर की लैब में रेड करवा देते।
    परमाणु बड़ी सरलता से बेल्ट से छूटकर पिट गया!अरे भैया! बार बार एक ही तरीके से पिटकर भी प्रोफेसर ने उसकी बेल्ट छिनने की कमी को दूर नहीं किया। वाह रे! क्या नायक है। पिट पिटकर भी अक्ल ठिकाने नहीं आई!
    चलो! आप हरवा देते,मगर कम से कम कुछ ढंग की फाइट तो दिखाते।

    वैसे आपकी फाइटिंग सीन लिखने में बेहतरी आई है।
    अगला भाग जल्दी लाइये।

  7. वाह बहुत ही ज्यादा शानदार,
    प्रसंसा के योग्य शब्द मिल पाना भी मुश्किल है, किसी ने कभी सोचा नही होगा कि इन नायकों को लेकर एक ऐसी कथा भी लिखी जा सकती है, नागराज का क्रोध अपने चरम पर पहुँच गया, सच है क्रोध सोचने समझने की बुध्दि खत्म कर देता है, कहानी प्रारम्भ से लेकर अब तक लगातार रोमांच के सागर में गोते लगाने को मजबूर कर रही है, सूरज और मोनिका को साथ डांस करते देख बहुत अच्छा लगा, उनका ध्रुव के बारे में चिंता करना भी जायज है, नागराज की शक्तियां इतनी कैसे बढ़ गयी कि वो नागाधीश का गर्भीरा धातु का बना हुआ हथौड़ा उठा ले, हलाहल इतनी ताकत कैसे दे सकता है??
    स्टील को अपना 7 साल पुरानी बदले की आग में जलता हुआ दिखाया गया और वो नागराज के हाथों मारा गया

    क्या यही नायकों का अंत है, पहले परमाणु, फिर ध्रुव और अब नागराज ने एक महानायक की ही हत्या कर हत्यारे बन चुके है, अगले भाग के इंतज़ार में

    धन्यवाद

    1. Bahut sateek analysis kiya aapne, maja aa gya. Ye Nayakon ka ant hai ya nahi ye to samay hi batayega, sath hi is patan ka koi karan hai ya nahi ye bhi samay hi tay karegaa.

  8. Earth 61 part 12

    Bhai is kahani ka pehla scene bahut pasand aaya sadharan hi scene tha par jis tarah likha maja aa gaya
    Describe karte waqt is tarah k hints the ki vo shaks kaun ho sakta h, halahal ko vo shaks kaise la paya vo bhi yahan janne ko mil gaya

    Cheetah ka jasusi dimag ki ek jhalak bhi dikhayi

    Mujhe doga k charo chacha ka character development mast laga

    Sabki apni ek unique personality rakhi h aapne aur adrak ka bade bhai ka poora raub dikhaya h
    Sannpo wali akrti ko harane ka doga ka tarika Acha laga

    Jab adrak ne us shaks ka raj khola to bum hi phod diya aapne
    Nahi believe hua ki Steel aisa kar sakta h
    But jo reason diya to sab connect ho gaya aur kaise hunters avaidh hathiyaar pate the vo bhi clear ho gaya
    Parmanu ka emotion me akar apna raj khol dena Steel k samne thoda odd laga kyuki aisi situation pehle bhi aayi but parmanu ne apna raj nahi khola

    Nagraj ka steel ki hatya kar dena ek aur shocking moment tha

    Shakti ki entry dekh kar Acha laga ab ye dekhna hoga 1 saal tak vo kahan thi uske aane se nagraj se thodi bahut takkar lene vala koi aaya

    Bhediya aur Anthony but abhi bhi gayab h, Jacob aaya h to lagta h Anthony bhi dur nahi aur kyuki iri ki gufa aapne asam me batayi h to lag raha bhediya bhi aane hi wala h

    Paap kshetra kamjor pad raha h lagta h sadham ki entry hone wali h

    Thanks for this amazing part

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