Earth 61 Phase 2 Part 17

सप्तदश अध्याय- निशाचर

दो दिन पहले-

मुम्बई की सीमा से लगे सुनसान जंगल के रास्ते पर एक गाड़ी तेजी से भाग रही थी। अपनी गाड़ी भगाता हुआ पचास वर्षीय व्यक्ति बार-बार पीछे मुड़कर देख रहा था, उसके माथे पर पसीना छलक आया था। उसके किनारे के बाल सफेद थे और पतले फ्रेम का चश्मा लगाया हुआ था, वह किसी उच्च पद पर आसीन अधिकारी जैसा लग रहा था। उसने गाड़ी की गति कुछ धीमी की और पीछे मुड़कर देखा कि पुलिस को उसने कितना पीछे छोड़ दिया है, बस यहीं उसने गलती कर दी। पुलिस की जीप ने तेज़ी से गाड़ी के पीछे ज़ोरदार टक्कर मार दी जिससे गाड़ी सामने वाले पेड़ से जा टकराई। ज़ोर का झटका लगने से उस व्यक्ति की आंखों के आगे कुछ पल के लिए अंधेरा छा गया, स्टीयरिंग की रगड़ खाने के बाद माथे से हल्का हल्का खून भी बह रहा था लेकिन वह जल्दी ही संभल गया। उसे संभलना ही था। वह किसी भी कीमत पर पुलिसवालों के कब्जे में नहीं आ सकता था। गाड़ी से कुछ देर तक कोई हरकत नहीं हुई तो दो हवलदार जीप से बाहर निकले, उनको लग रहा था कि पेड़ से टक्कर के बाद वह व्यक्ति बेहोश हो चुका होगा लेकिन फिर भी उनमें से एक ज़ोर से चिल्लाकर बोला “गवर्नर लेखराज भंडारी! आपको अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए क्राइम न्यूज़ नेटवर्क जैसी संस्था को संचालन करते हुए कई अवैध कार्यों को करने के इल्ज़ाम में गिरफ्तार किया जाता है।”

लेखराज भंडारी को तरफ से कोई प्रतिक्रिया ना मिलने पर दोनों हवलदार दबे पांव गाड़ी को तरफ बढ़ चले कि अचानक खिड़की में से बंदूक निकली और गाड़ी के पास पहुंचे हवलदार की खोपड़ी चीरती चली गयी। यह देखकर दूसरा हवलदार एकदम से चौंक गया और जीप में बैठे बाकी साथियों को इशारे से बुलाया, इतने में भंडारी जीप से उतरकर मोटे से तने वाले पेड़ के पीछे छिप गया। उसकी सांसें धौंकनी जैसी चल रही थीं, उसे अपने बचने की कोई उम्मीद नज़र नहीं आ रही थी फिर भी बंदूक को मजबूती से पकड़े वह चिल्लाया- “तुमको ज़रूर काले डकैतों ने भेजा है, मैं किसी के हाथ नहीं आऊंगा, उनके हाथ भी नहीं। एक साल पहले डोगा ने हमारी संस्था को बुरी तरह हिला दिया और अब तुम लोग आए हो मुझे गिरफ्तार करने, काले डकैतों के इशारे पर!”

पुलिसवालों ने एक दूसरे की तरफ ऐसे देखा जैसे उन्हें उसकी अजीब बातें समझ में ही ना आ रही हों। एक हवलदार ने तेज आवाज़ में पूछा-
“कौन काले डकैत! कहीं तुम्हारा दिमाग तो खराब नहीं हो गया है? तुम्हारे ऊपर भ्रष्टाचार, अवैध ड्रग्स, मानव अंगों की तस्करी जैसे न जाने कितने आरोप हैं। अंडरवर्ल्ड में तुम्हारी मजबूत नेटवर्किंग के चलते तुम और तुम्हारी संस्था इतने सालों तक छिपी रही लेकिन अब कोई फायदा नहीं है।”

इतने में लेखराज का हाथ पेड़ के पीछे से बिजली की तरह घूमा और गोली एक और पुलिसवाले का कंधा चीरती चली गयी, वह अपना कंधा पकड़कर वहीं बैठ गया। ये देखकर बाकी पुलिसवाले बेहद क्रोधित हो गए और तेज़ी से उसकी तरफ बढ़ने लगे, लेखराज ने आँखें मूंदकर बंदूक अपनी गर्दन पर सटा ली। उसने तय कर लिया था कि वह मर जायेगा लेकिन क्राइम न्यूज़ नेटवर्क के राज नहीं खोलेगा ताकि उसकी मौत के बाद CNN नष्ट ना हो बल्कि किन्हीं काबिल हाथों में जा सके लेकिन बंदूक का ट्रिगर दबने की नौबत ही नहीं आयी, उससे पहले ही पुलिसवालों की चीखें वातावरण में गूंजने लगीं और फिर सब शांत हो गया। लेखराज ने धीरे धीरे पेड़ की ओट से देखा कि उस तक पहुंचने से पहले ही सारे पुलिसवाले मरे पड़े हैं। उसने ध्यान दिया कि पुलिसवालों की लाश के पास एक लंबे से लबादे को धारण किये एक रहस्यमयी आकृति खड़ी थी, उसका लबादा हवा में तैरता सा मालूम हो रहा था, इससे पहले की लेखराज कुछ समझ पाता वह आकृति एकदम सर्द आवाज़ में बोली- “मुझसे डरने की आवश्यकता नहीं है मानव! मैं तुमको नहीं मारूँगा, बाहर आ जाओ।”

लेखराज पेड़ की ओट से बाहर आ गया और अपने मददगार के अजीब हुलिए को देखा- सफेद चेहरा, लाल आंखें और सर पर उगे दो छोटे सींग बड़े से बड़े बहादुर की भी घिग्घी बांध सकते थे। लेखराज की तो जुबान ही लड़खड़ा गयी, उसने डरते डरते पूछा- “क..कौन हो तुम?”

उस आकृति ने मुस्कुराकर जवाब दिया- “मैं अँधेरे का बेटा निशाचर हूँ, मैं तुम्हारे शरीर से प्रचंड पाप ऊर्जा को भांप पा रहा हूँ। मैं इतने समय पाप क्षेत्र में रहने के कारण बहुत कमजोर हो चुका हूँ, तुम ऊर्जा संचयन में मेरी सहायता कर सकते हो।”

लेखराज (कौतूहलवश)- ये पाप क्षेत्र क्या है?
निशाचर (मुस्कुराकर)- पचास हज़ार वर्ष पहले मेरे जैसी कई पाप शक्तियों को एक अलग आयाम में कैद कर दिया था जिसका नाम था “पाप क्षेत्र”, न जाने कैसे लेकिन इतने वर्षों बाद वह द्वार कमज़ोर पड़ गया और मैं आज़ाद हो गया। हम दोनों एक दूसरे के काफी काम आ सकते हैं, मैं खड़ा करूँगा पाप का साम्राज्य और तुम रहोगे मेरे सिपहसालार।

वर्तमान समय में-

न्यूज़फ्लैश- पिछले कुछ दिनों से मुम्बई के क्राइम ग्राफ में बढ़ोतरी हुई है। माफिया के लोग ही नहीं बल्कि मुम्बई के आम लोग भी इन आपराधिक गतिविधियों में शामिल हैं, आश्चर्य की बात तो ये है कि जब आम लोगों से उनके द्वारा की गई चोरी और लूटपाट को लेकर पुलिस वालों ने पूछताछ की तो उन्हें इन सब घटनाओं के पीछे कोई ठोस कारण नहीं दिखा। सूत्रों के हवाले से एक उड़ती उड़ती खबर हाथ लगी है कि पिछले दिनों जहां जहां ये जुर्म हुए हैं वहां वहां एक रहस्यमयी आकृति को देखा गया है, सोशल मीडिया के इस ज़माने में यह रहस्यमयी आकृति वाली बात तेजी से वायरल होती जा रही है। कुछ उसे “पाप का देवता” कह रहे हैं और कुछ “शैतान का अवतार”, हालांकि इस संबंध में कोई पुख्ता सबूत हाथ नहीं लगे हैं इसलिए इस बात को प्रशासन की तरफ से कोरी गप्प बताया जा रहा है लेकिन सवाल ये उठता है कि अगर ये कोरी गप्प है तो सिविलियन्स पिछले कुछ दिनों से इतने आक्रामक क्यों हो उठे हैं? क्यों कुछ दिनों से गैंगवार की खबरें बढ़ती जा रही हैं? इन सब सवालों का जवाब जल्द ही हम आपके सामने लाने की कोशिश करेंगे, इस मामले से जुड़े और रोचक तथ्य जानने के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।

रात दस बजे दिनेश दफ्तर का काम खत्म करके घर लौट ही रहा था कि उसे अपने पीछे किसी के पदचापों की आवाज़ सुनाई दी। इससे पहले की वह मुड़ता, एक बेहद शरीफ दिखने वाले व्यक्ति ने उस पर छलांग दी, वह भी दिनेश की तरह सामान्य शर्ट पेंट में था और दिखने से बिल्कुल भी गुंडा नहीं लग रहा था लेकिन उसके चेहरे पर वहशियत सवार थी। उसने दिनेश की गर्दन पर चाकू टिका दिया और चीखकर बोला “जितना पैसा है सब निकाल, एटीएम है तो वो निकाल और उसका पिन बता! जल्दी कर वरना जान से जाएगा!”
दिनेश बेहद घबरा गया था, उसने जल्दबाजी में वॉलेट निकालने के लिए जेब में हाथ डाला ही था कि अचानक से एक गोली, चाकू थामे व्यक्ति के हाथ को चीरती हुई चली गयी। दिनेश और जस व्यक्ति ने ध्यान दिया कि गली के मुहाने पर डोगा खड़ा था। उस व्यक्ति ने डोगा को देखकर भागने की कोशिश की लेकिन अगली गोली ने उसकी टांग को चीर दिया, वह दर्द से चिल्लाता हुआ वहीं पर बैठ गया। डोगा के इशारे के बाद दिनेश वहां से नौ दो ग्यारह हो गया लेकिन डोगा आगे बढ़कर उस व्यक्ति के पास पहुंचा जो अभी तक टांग को पकड़कर बैठा था।
डोगा उसके पास जाकर बोला- “अब तुम गुंडे लोग शरीफों जैसा हुलिया बनाकर डकैती करोगे? तू अकेला है या तेरा कोई गैंग है?”
वह व्यक्ति डोगा की तरफ देखकर बोला- “मेरा कोई गैंग नहीं है, मैं अकेला हूँ। ये पहली बार डकैती करने निकला था मैं।”
डोगा ने उस व्यक्ति को ध्यान से देखते हुए कहा- “तेरी भाषा भी टपोरी जैसी नहीं बल्कि काफी सभ्य है, तेरी तलाशी लेनी पड़ेगी।”

इतना कहकर डोगा ने उस व्यक्ति की शर्ट की जेब टटोली, उसमें से उसे एक आइडेंटिटी कार्ड मिला जिसे देखकर वह चौंक गया।
उसने उस व्यक्ति से पूछा- “तूने यह नकली आइडेंटिटी कार्ड कहाँ से बनवाया? इसमें तो लिखा है कि तू किसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता है।”
वह व्यक्ति बिना किसी डर के बोला- “ये कार्ड नकली नहीं है, मैं वाकई इस कंपनी के लिए काम करता हूँ।”
डोगा ने उस व्यक्ति को कॉलर से पकड़कर उठा लिया और बोला- “झूठ बोलता है? डोगा से झूठ बोलता है? इतनी बड़ी कंपनी में काम करने वाला आखिर छोटी मोटी लूटपाट क्यों करेगा?”
उस व्यक्ति की आंखों में अभी भी कोई भय के भाव नहीं थे। वह शांति से बोला- “मैंने कोई झूठ नहीं कहा, मैं इस कंपनी के लिए काम करता हूँ और लूटपाट अपने मजे के लिए कर रहा था, पैसे के लिए नहीं।”
डोगा ने उसका कॉलर छोड़ दिया, वह व्यक्ति घुटने में गोली लगने के कारण वापिस सड़क पर गिर गया। डोगा उसे गौर से देखते हुए बोला- “तू जरूर कोई पागल है। खैर, मैं पुलिस को खबर कर देता हूँ, वही तुझसे तेरे पागलपन का सही कारण जानने की कोशिश करेगी।”

इतना कहकर डोगा वहां से चला गया, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि इतनी बड़ी पोजीशन पर काम करने वाला छोटी मोटी लूटपाट क्यों मचाएगा। थोड़ा आगे जाते ही उसे फिर एक बेहद अजीब दृश्य देखने को मिला, पूरी सड़क पर लोग आपस में लड़ झगड़ रहे थे, इससे पहले की किसी को गंभीर चोट पहुंचती, डोगा ने दो हवाई फायर किए और लोग इधर उधर भाग गए।

डोगा- आखिर ये सब हो क्या रहा है? अच्छे खासे लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए हैं।

तभी उसके मास्क में लगे इयरपीस में अदरक की आवाज़ गूंजी “डोगा, इस वक्त तुम कहाँ हो?”

डोगा- अंधेरी के पास।
अदरक- फिर तो अच्छा है, छोटा हाजी के गुंडे पंजाब नेशनल बैंक को लूटने की कोशिश कर रहे हैं, फौरन वहां पहुंचो।
डोगा- छोटा हाजी? ये तो CNN का खास आदमी था, इसका मतलब “क्राइम न्यूज़ नेटवर्क” फिर से सर उठा रहा है?
अदरक- CNN को तो हमने एक साल पहले ही खत्म कर दिया था, अभी दो दिन पहले उनका मास्टरमाइंड भी पुलिस की कैद में आते आते रह गया जिसका कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है। शायद तुम ठीक कह रहे हो, छोटा हाजी ने इतने समय बाद फिर से सिर उठाया है इसका मतलब शायद पिछली बार हम CNN को पूरी तरह से खत्म नहीं कर पाए होंगे। हाजी तक पहुंचना होगा, क्या पता कि मुम्बई के बढ़ते क्राइम ग्राफ में CNN का कोई हाथ हो।

डोगा को भी यही ठीक लगा, वह पंजाब नेशनल बैंक की तरफ निकल गया। उधर छोटा हाजी के गुंडे बोरियों में रुपये लिए बैंक से उतर रहे थे, उनके पीछे दो गार्ड्स ने जाने की कोशिश की लेकिन बंदूक की गूंज ने उनके कदम जहां के तहां जमा दिए। चारों गुंडे एक बड़ी सी सफेद वैन में बैठे, उनके बैठते ही वैन चल पड़ी।

पहला गुंडा- हाहाहा, हाजी भाई की खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा क्योंकि आज बहुत बड़ा माल हाथ लगा है।
दूसरा गुंडा- अरे सब कमाल हाजी भाई के उस रहस्यमयी मददगार का है, जिसने……

उस गुंडे के कुछ बोलने से पहले ही दूसरे गुंडे ने उसे चुप रहने का इशारा कर दिया और बेहद धीमी आवाज़ में बोला- “पागल है क्या? आगे ड्राइवर बैठा है, अभी ये सब बात डिस्कस नहीं करने का।”
तभी ड्राइवर ने बिना मुड़े पूछा- “अब किधर जाने का है साहब?”
उनमें से एक गुंडा बोला- “क्या रे भुलक्कड़? बताया तो था कि पास वाले पुराने कब्रिस्तान जाना है, उधर हाजी भाई का डील होने वाला है, इतनी जल्दी भूल गया?”
“मैं तो नहीं भूलूंगा लेकिन ज़रा मैं भी तो देखूं कि मेरी शक्ल देखकर तुम लोग क्या क्या याद रख पाते हो।”
इतना कहते ही ड्राइवर उनकी तरफ घूम गया, ड्राइवर की शक्ल देखकर सबकी घिग्घी बंध गयी। एक गुंडा तो डर से चीख पड़ा- “डोगा! ये तो डोगा है! तू वैन में कैसे घुसा रे?”
डोगा ने जवाब दिया- “बहुत सिंपल था, वैन एकदम बैंक के बाहर ही तुम्हारे लिए तैयार खड़ी थी। मैंने ड्राइवर को बेहोश किया और खुद उसकी यूनिफार्म पहन ली, तुम लोगों ने भी जल्दबाजी में ध्यान नहीं दिया, अब जब हाजी के अड्डे का पता चल ही चुका है तो तुम लोग भी मेरे किसी काम के नहीं।”

डोगा के इस कथन के बाद सबकी जुबान पर मानो ताले लग गए थे, सबने एक दूसरे की तरफ देखा, एक साथ सबकी बंदूकें बाहर निकलीं लेकिन डोगा उनकी चाल पहले ही भांप चुका था, उनकी बंदूकें गरजने से पहले ही डोगा के हाथ में थमी पिस्टल गरजी, उसने बिना अपनी गर्दन मोड़े ही चारों गुंडों को लाश के ढेर में बदल दिया था।

चांद की रोशनी पर्याप्त रूप से उस पुराने कब्रिस्तान पर पड़ रही थी जो मुम्बई के सबसे बड़े कब्रिस्तानों में से एक था, अक्सर यहां खामोशी का साम्राज्य छाया रहता था लेकिन आज यहां मुम्बई के अपराध जगत की दो बड़ी गैंग्स एक दूसरे के आमने सामने खड़ी थीं। छोटा हाजी और डेविड, अंडरवर्ल्ड के दो बड़े डॉन एक बड़ी डील के लिए आमने सामने खड़े हुए थे। उनके लोग हथियार लिए कब्रिस्तान के बाहर तक तैनात थे ताकि डील में कुछ गड़बड़ ना हो।

छोटा हाजी- अच्छा किया जो तूने मेरा ऑफर मान लिया डेविड, मुझे भी बेमतलब का खून खराबा करना पसंद नहीं।
डेविड- ना मानने जैसी कोई बात ही नहीं थी हाजी, धारावी में बीस दुकानों से मेरा हफ्ता आता था लेकिन पिछले दिनों हुए इच्छाधारी नागों के हमले के बाद से लोग दुकानें छोड़कर भाग गए, हफ्ता आना बंद हो गया। मैं सभी दुकानों पर कब्जा जमाने वाला था लेकिन तब तक तेरे आदमी का कॉल आ गया कि तू सभी दुकानों के बदले बीस करोड़ देने को तैयार है, अब इस ऑफर के लिए तो कोई बेवकूफ ही मना करेगा ना।
छोटा हाजी (हल्का सा मुस्कुराते हुए)- हम्म, सही कहा तूने। तेरे पैसे का इंतज़ाम करने के लिए ही मेरे आदमी बैंक लूटने गये थे लेकिन अब ऑफर में हल्का सा बदलाव है, मैं सारी दुकानें लूंगा लेकिन बदले मैं तुझे एक फूटी कौड़ी भी नहीं दूंगा।
डेविड- हाहाहा, क्यों मजाक करते हो हाजी?
छोटा हाजी- मजाक तो तब होगा जब उन बंद दुकानों के लिए मैं तुझे बीस करोड़ रुपये दूंगा। बीस करोड़ का लालच मैंने इसलिए दिया ताकि तुझे यहां तक लाने का झांसा दे सकूं, अब या तो तू दुकानों पर कब्ज़ा छोड़ेगा या फिर जान से जाएगा।
डेविड- अच्छा तो ये बात है, वैसे अगर तू अंधा नहीं है तो खुद देख ले कि तेरे से ज्यादा हथियारबंद आदमी मेरे पीछे खड़े हैं। अब बोल, क्या बोलता है?

छोटा हाजी ने केवल मुस्कुराकर कुछ इशारा किया और डेविड के आदमियों की बंदूकें डेविड के ऊपर ही तन गयीं। ये देखकर डेविड एकदम भौचक्का रह गया, वह हड़बड़ाकर बोला- “ऐ! ऐ ऐ! ये तुम लोग क्या कर रहे हो?”

छोटा हाजी कुटिलता से मुस्कुराता हुआ बोला “सब क्राइम न्यूज़ नेटवर्क यानी CNN का कमाल है, तेरे गुंडों को खरीद लिया है हमने।”

डेविड- CNN? इस नेटवर्क को तो एक साल पहले डोगा ने खत्म कर दिया था।
छोटा हाजी- सब बकवास है, क्राइम न्यूज़ नेटवर्क बिना जड़ वाला पेड़ है, कितना भी काटने की कोशिश कर लो, वापिस उग ही आएगा। अब तू ये सब मत सोच और इस लोक से परलोक सिधारने की तैयारी कर।

इतना कहकर छोटा हाजी ने बंदूक डेविड के ऊपर तान दी लेकिन उसे ट्रिगर दबाने का मौका नहीं मिला क्योंकि अचानक ही तेज धमाके के साथ कब्रिस्तान के गेट पर खड़े हथियारबंद गुंडों के चिथड़े उड़ गए थे। छोटा हाजी, डेविड और बाकी लोगों ने तुरंत पलटकर देखा तो डोगा साक्षात यमदूत की तरह खड़ा था। एक साथ कई बंदूकें हरकत में आईं लेकिन डोगा सतर्क था, काली चाचा द्वारा सिखाई गयी ब्लैक पिपर आर्ट का प्रयोग करके उसने अपने शरीर को हवा में उछाला और हवा में ही कुछ विशिष्ट कोण बनाकर गोलियों से बचता हुआ वापिस धरती पर आ गया। धरती पर आते ही डोगा ने कोई रिस्क नहीं लिया और एक झटके से तीन चार हैंडग्रेनेड पिन खींचकर हथियारबंद हमलावरों पर फेंक दिए, उन हमलावरों ने दौड़कर बचने की कोशिश तो की लेकिन फिर भी धमाकों की चपेट में आ ही गये, छोटा हाजी और डेविड भी धमाके के कारण एक ओर गिर गए।

डेविड हांफते हुए बोला- “तू यहां मुझे मारने आया था ना छोटा हाजी, अब लगता है कि मुम्बई का बाप हम दोनों को इस कब्रिस्तान में दफन करके जाएगा।”
छोटा हाजी डेविड की तरफ मुड़कर बोला “ऐसा नहीं होगा, स्वयं पाप के देवता मेरी रक्षा को आएंगे।”

डेविड को छोटा हाजी की बात समझ नहीं आयी और उसे समझने का मौका भी नहीं मिला क्योंकि एक गोली उसके भेजे को चीरते हुए चली गयी। छोटा हाजी ने देखा कि डोगा ने कुछ ही समय में कब्रिस्तान में उसके और डेविड के आदमियों की लाशों का ढेर लगा दिया था और अब बढ़ता हुआ हाजी के पास आ था। अपनी बंदूक उसने हाजी के माथे से सटा दी। छोटा हाजी भय से थर थर कांप रहा था, उसने डोगा से कुछ कहा नहीं, बस अपनी आंखें मूंद लीं।

बंदूक हाजी के माथे पर टिकाए डोगा बोला- “अपने जिस खुदा को याद करना है, उसे जल्दी याद कर ले हाजी। डोगा तुझे आखिरी प्रार्थना करके भगवान से माफी मांगने का पूरा मौका देगा।”
हाजी ने जल्द ही आंखें खोल लीं और डोगा की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोला- “तुम गलत समझ रहे हो डोगा, मैं भगवान से नहीं बल्कि शैतान से प्रार्थना कर रहा था।”

तभी डोगा को महसूस हुआ कि उसके सिर के ऊपर से एक परछाईं गुज़री, जब तक वह मुड़ता तब तक एक भयानक ऊर्जा वार उसे आकर लगा। वह ज़मीन पर गिर गया, वह परछाईं एक लबदाधारी की थी, जो कि हवा में तैरता हुआ छोटा हाजी के पास पहुंच चुका था। छोटा हाजी खुशी से चीखकर बोला- “मुझे यकीन था कि आप अपने भक्त की पुकार पर अवश्य आएंगे, महान निशाचर!”
अचानक से एक ऊर्जा वार डोगा से टकरा चुका था।
ऊर्जा वार से डोगा के जिस्म का जर्रा जर्रा हिल गया था लेकिन वह उस वार से जल्दी ही उबर गया और उस विचित्र प्राणी को गौर से देखा जिसे छोटा हाजी निशाचर कहकर संबोधित कर रहा था। एकदम सफेद चेहरा, सुर्ख लाल आंखें, सर पर लगे दो छोटे सींग, ऊपर से हवा में तैरता लबादा उसे किसी हॉरर फिल्म के पात्र जैसी भयानकता प्रदान कर रहा था।
निशाचर कुटिलता से मुस्कुराते हुए रीढ़ की हड्डी में सिहरन दौड़ा देने वाली आवाज़ में डोगा से बोला- “तेरे अंदर अगर भीषण सत्य ऊर्जा ना भरी होती तो मेरा यह पाप ऊर्जा से भरा वार तेरे टुकड़े टुकड़े कर देता।”

डोगा निशाचर को गौर से देखते हुए बोला- “अब तू कौन है? छोटा हाजी के साथ है मतलब इतना तो तय है कि CNN का ही आदमी है तू, ये मेकओवर कमजोर दिल वाले अंधविश्वासी गुंडों को डराने के काम आता होगा लेकिन डोगा तेरे शरीर में इतने छेद कर देगा कि तू खुद को भी नहीं पहचान पायेगा।”
डोगा के हाथ में थमी बंदूक गरज उठी और कई गोलियां निशाचर की तरफ लपकीं लेकिन उसका शरीर छूते ही सारी गोलियां भस्म हो गईं।

निशाचर मुस्कुराते हुए बोला- “पाप क्षेत्र से स्वतंत्र होने के बाद मेरी पाप शक्तियां बेहद क्षीण अवश्य हुई हैं परंतु इतनी भी नहीं कि तेरे जैसा तुच्छ मानव मुझे कोई हानि पहुंचा सके।”
डोगा की आंखें फटी की फटी रह गयीं। उसने कौतूहलवश पूछा “पाप क्षेत्र? पाप शक्तियां? ये सब क्या बकवास कर रहा है तू?”

निशाचर- पिछले कुछ समय में तुम्हारे समय के आधुनिक यंत्र जैसे कि दूरदर्शन इत्यादि में एक रहस्यमयी आकृति का ज़िक्र हो रहा है जिसे कोई शैतान कह रहा है तो कोई पाप का देवता, यह सारे संबोधन मेरे लिए ही हैं। मैं कुछ ही समय पहले पाप क्षेत्र से आजाद होकर जब तुम्हारी दुनिया में आया तो मेरी पाप शक्ति इतनी क्षीण थी कि मैं एक मक्खी भी नहीं मार सकता था लेकिन जल्द ही मुझे कुछ ऐसे लोग मिले जिन्होंने पाप फैलाकर मुझे एक हद तक प्रबल कर दिया क्योंकि मैं वातावरण में फैली पाप ऊर्जा सोखकर ही शक्तिशाली होता हूँ। उसके बाद मैं इस नगर में जगह जगह अपनी पाप तरंगें छोड़ने लगा जिसके प्रभाव में आकर निर्दोष लोग भी अपराध करने लगे, पाप के और अधिक फैलने से मैं और प्रबल होता गया लेकिन अभी भी मेरी पाप शक्तियां बहुत अधिक क्षीण हैं। तू जब छोटा हाजी के लोगों को मार रहा था तब तेरे दरिंदगी भरे कृत्य के कारण भी मुझे पाप ऊर्जा का कुछ हिस्सा सोखने को मिला, मैं तुझे अपना दास बनाना चाहता था लेकिन फिर मुझे एहसास हुआ कि दरिंदगी भरा कृत्य करने के बावजूद भी तेरे अंदर सत्य शक्ति मौजूद है, भीषण सत्य शक्ति। मैं चाहूं तो तुझे अभी खत्म कर सकता हूँ लेकिन तेरे जैसी शक्तिशाली पुण्यात्मा को मारने के लिए पाप ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा मुझे व्यय करना पड़ेगा इसीलिए फिलहाल मैं केवल छोटा हाजी को तेरी पहुंच से दूर लेकर जा रहा हूँ लेकिन जैसे ही मैं अधिक से अधिक पाप को सोखकर खुद को और प्रबल कर लूंगा, हमारा सामना एक बार फिर से होगा।

इतना कहकर निशाचर छोटा हाजी को लेकर अपना लबादा लहराते हुए चांद की रोशनी से नहाए आसमान में उड़ता चला गया, डोगा सिर्फ एक मूक दर्शक की भूमिका निभाने के अलावा और कुछ नहीं कर सकता था, यह सब उसे एक भयानक सपने जैसा प्रतीत हो रहा था।

मुम्बई की सीमा से लगा वह जंगल बहुत घना नहीं था, ना ही उसमें किसी वन्य प्राणी का वास था लेकिन फिर भी मुंबईवासी इस ओर कम ही आते थे क्योंकि यहां तमाम चोरी चकारी और लूटपाट की घटनाएं हो चुकी थीं। उस जंगल के थोड़ा ही अंदर जाकर एक पत्थर से बनी गुफा मौजूद थी, उस गुफा को बाहर से देखकर कोई ये अंदाज़ा नहीं लगा सकता था कि ये अंदर कितनी गहरी होगी। गुफा की दीवार पर मशालें जलाकर टांगी गयी थीं और एकदम अंदर जाकर गुफा के संकरा रास्ता खुल जाता था और एक बड़े मैदान जैसा गोलाकार क्षेत्र नज़र आता था। आज उस जगह बहुत चहल पहल थी, कुछ 50-60 लोग लंबे लंबे चोगे पहनकर वहां इकट्ठा हुए थे, उनके सामने लेखराज भंडारी वैसी ही वेशभूषा में खड़ा हुआ था।

वह सामने खड़े लोगों को बुलंद आवाज़ में भाषण दे रहा था, गुफा की चारदीवारी में उसकी आवाज़ गूँज रही थी-
“मेरे साथियों! मैं CNN का संस्थापक लेखराज भंडारी आपका स्वागत करता हूँ। अब छुपकर जीवन बिताने का समय खत्म हो चुका है, कभी इसी जगह पर CNN यानी क्राइम न्यूज़ नेटवर्क के मुख्य लोगों की, यानी हम लोगों की मीटिंग हुआ करती थी लेकिन डोगा की वजह से, या फिर यूं कहें कि काले डकैतों की वजह से हमारी संस्था को एक वर्ष पहले बहुत नुकसान झेलना पड़ा था। उन्होंने हमको लगभग खत्म ही कर दिया था, हमारी बहुत बड़ी संस्था के गिने चुने लोग ही बच पाये, यानी कि हम लोग। मुम्बई की आम जनता और प्रशासन को लगता है कि डोगा उनका रक्षक है और उसी की वजह से अपराध का ग्राफ इतना नीचे गया है लेकिन अंडरवर्ल्ड के गिने चुने लोग जानते हैं कि डोगा तो सिर्फ एक मुखौटा है उस आर्गेनाइजेशन को हमारी नज़रों से छिपाने का जिसे कहा जाता है काले डकैत, ये लोग कुछ ही समय पहले न जाने कहाँ से अस्तित्व में आये और देखते ही देखते आर्गनाइज्ड क्राइम की परिभाषा ही बदल दी। इनके रहते न तो हम लोग ड्रग्स का धंधा कर पाते थे और न ही कोई और अवैध काम, काले डकैतों ने खुद अंडरवर्ल्ड जगत की सबसे बड़ी मछली बनकर छोटी मछलियों को निगलना शुरू कर दिया। इनसे टक्कर ले पाने की क्षमता केवल हमारी यानी CNN की थी लेकिन इन्होंने हमें भी नेस्तनाबूत कर दिया पर अब फिक्र की कोई बात नहीं क्योंकि अब साक्षात पाप के देवता हमारी मदद को आ चुके हैं। CNN जो कभी अपराध जगत में मजबूत नेटवर्किंग का काम करता था वो फिर से अपने पद को वापस बहाल करेगा और इस काम में देवता हमारी मदद करेंगे।”

उस व्यक्ति का इतना कहना था कि तब तक निशाचर छोटा हाजी को लेकर गुफा के अंदर आ गया, उसे देखते ही सब लोगों धरती पर घुटने टेक कर और सर झुकाकर बैठ गए। सभी एक साथ नारा लगाने लगे- “पाप के देवता की जय हो! पाप के देवता की जय हो!”

निशाचर लेखराज भंडारी के बगल में जा खड़ा हुआ और बोला “बस मेरे अनुयाइयों, मेरी और अधिक आवभगत करने की आवश्यकता नहीं है। यदि तुम मेरे सच्चे भक्त हो तो बाहर दुनिया में जाकर पाप को फैलाओ, तुम सब साधारण लोग नहीं हो बल्कि अलग अलग क्षेत्रों में उच्च पदों पर आसीन हो। अपने पद का इस्तेमाल करो और पाप फैलाओ ताकि मैं और शक्तिशाली बन सकूं और मेरा वादा है तुमसे कि तुम्हारी संस्था विश्व की सबसे बड़ी संस्था बनकर उभरेगी। किसी में इतनी शक्ति नहीं होगी कि हमारा विरोध कर पाए।”

रात के 12 बज चुके थे। सूरज ने डोगा का मास्क उतार दिया था लेकिन कॉस्ट्यूम अभी भी उसके शरीर पर थी, वो उसी बेसमेंट में बैठा हुआ था जहां से सैकड़ों मॉनीटर्स के जरिये काले डकैत पूरी मुम्बई का, और कभी कभी पूरे देश का निरीक्षण करते थे। चीता, मोनिका और अदरक भी वहां मौजूद थे। मॉनीटर्स पर पिछले कुछ दिनों में मुम्बई के अलग अलग हिस्सों में हुए दंगों, मार पीट, लूटपाट, किडनैपिंग आदि की फुटेज चल रही रही थी। सूरज सारी फुटेज ध्यान से देख रहा था तभी उसे एक फुटेज वह भी दिखाई दी जिसमें उसने एक व्यक्ति को दूसरे आम नागरिक के हाथों लुटने से बचाया था। उसने एकदम से अदरक से कहा- “यहां पर पॉज करिए चाचा।”

अदरक ने वहां पॉज कर दिया। चीता और मोनिका भी उस फुटेज को ध्यान से देखने लगे।

सूरज (मॉनिटर की तरफ इशारा करके)- वो ऊपर आसमान में एक आकृति सी नज़र आ रही है?

अदरक, चीता और मोनिका ने ध्यान दिया तो उन्हें भी बहुत हैरानी हुई क्योंकि फुटेज में साफ साफ एक आकृति दूर आसमान में तैरती नज़र आ रही थी।

चीता- यही वो प्राणी है जिससे तुम्हारी मुठभेड़ हुई थी?
सूरज- हां चीता, यही वह रहस्यमयी प्राणी है। इसने न जाने कैसी ऊर्जा का वार किया मेरे ऊपर की मैं एकदम बेबस हो गया और यह छोटा हाजी को लेकर चला गया।
चीता- मुझे तो लगता है कि ये सब नागराज की ही चाल है तुमको धर पकड़ने के लिए, तुमने करुणाकरण की लैब वाला फुटेज मीडिया को दे दिया था जिसमें वह दो लोगों की हत्या कर रहा है। वह इस वक्त तुम पर बेहद क्रोधित होगा।
अदरक- मुझे नहीं लगता कि ये नागराज की चाल है, उसे कुछ करना होता तो उसने उसी वक्त कर लिया होता जिस वक्त हमने मीडिया को फुटेज दी थी। ये प्राणी जिसे तुम “निशाचर” कह रहे हो, यही जिम्मेदार है मुम्बईवासियों के आक्रामक रवैये के लिए, नागराज के पास ऐसी कोई शक्ति नहीं जिससे वह ऐसा कुछ करवा सके। दूसरी बात ये की इस वक्त विश्व के अलग अलग हिस्सों में अजीब अजीब प्राणियों के देखे जाने की खबरें आई हैं, ये सब प्राणी कौन हैं और कहाँ से आये हैं, ये तो किसी को नहीं पता लेकिन निशाचर भी शायद उनमें से ही एक है।
सूरज- उसने कब्रिस्तान में मुझसे किसी “पाप क्षेत्र” का ज़िक्र किया था जिसमें वह काफी समय से कैद था और अब जाकर स्वतंत्र हुआ है। मुझे उस वक्त इस बात का अर्थ समझ में नहीं आया था लेकिन अब लग रहा है कि निशाचर और ये सभी प्राणी शायद उसी तथाकथित “पाप क्षेत्र” से आये हैं।
अदरक- पाप क्षेत्र? ऐसे नाम तो किसी परी कथा या कॉमिक बुक में प्रयुक्त होते हैं। खैर, इस पाप क्षेत्र का बाद में सोचेंगे, फ़िलहाल जिस समस्या को हम समझ सकते हैं उस पर ध्यान केंद्रित करना ज़्यादा बेहतर होगा। तुमने छोटा हाजी को वहां देखा था जिसका अर्थ ये हुआ कि क्राइम न्यूज़ नेटवर्क फिर से सक्रिय हो चुका है और इस निशाचर के साथ मिलकर काम कर रहा है।
मोनिका- ये क्राइम न्यूज़ नेटवर्क क्या है?
अदरक- मठ से बाहर निकलने के बाद काले डकैतों के सामने अपने अस्तित्व को कायम रखने की सबसे बड़ी चुनौती क्राइम न्यूज़ नेटवर्क यानी CNN के रूप में सामने आई। अंडरवर्ल्ड के हर पहलू पर उनका जबरदस्त कब्ज़ा था। भारत में एक साधारण पानवाले से लेकर किसी बड़े विधायक तक, ऐसा कोई नहीं था जिसकी सूचना वे नहीं निकाल सकते थे। उनके कॉन्टेक्ट्स हर जगह फैले हुए थे, हमने यह महसूस किया कि यदि अपराध पर अंकुश लगाना है तो पहले CNN पर अंकुश लगाना होगा। काले डकैतों ने धीरे धीरे अपना वर्चस्व कायम करना शुरू किया और इस जंग में हमारा सबसे बड़ा हथियार बना डोगा, डोगा का मास्क सिर्फ सूरज के लिए नहीं बल्कि सभी काले डकैतों के लिए था। अथक प्रयासों के बाद हमने उनके एक एक अड्डे के पता लगाकर CNN के लोगों को चुन चुन कर मारा, ये काम बहुत सावधानी से करना पड़ा क्योंकि उनमें से कोई बड़ा पुलिस अफसर था तो कोई बाहुबली नेता लेकिन ये काम बेहद सावधानी से करने के बावजूद भी CNN को अपने कॉन्टेक्ट्स द्वारा पता चल गया कि काले डकैत नाम की एक संस्था है और डोगा भी उनसे किसी प्रकार से संबंध रखता है। सच कहूं तो उनकी इतनी मजबूत नेटवर्किंग और असाधारण को ऑर्डिनेशन ने मुझे बहुत प्रभावित किया लेकिन ये समय दुश्मनों से प्रभावित होने का नहीं बल्कि उन्हें खत्म करने का था, हमने बिना समय गंवाये उनके सारे मुख्य अड्डे तबाह कर दिए और वर्चस्व की इस जंग में जीत हमारी हुई। उसके बाद काले डकैत ही अंडरवर्ल्ड की सबसे बड़ी मछली बन गए, हमने ड्रग्स का धंधा बंद करवाया, अवैध मानव तस्करी रुकवाई, कई घोटालेबाजों को मौत के घाट उतारा और अपराध दर को नीचे लेकर आये लेकिन अब मुझे अपनी सबसे बड़ी गलती समझ में आ रही है जो कि कतई नहीं करनी चाहिए थी। हम CNN की तरफ से बेफिक्र हो गए और कभी नहीं सोचा कि चंद बचे खुचे सदस्य इकट्ठा होकर फिर से काले डकैतों से भिड़ने की सोच भी सकते हैं लेकिन आज एक बार फिर वह मुसीबत बनकर हमारे सर पर मंडरा रहे हैं।
चीता- फिर तो हमारे लिए चिंता का विषय है, निशाचर किस प्रकार का जीव है वो हमें नहीं पता और फिलहाल वह CNN के साथ है। हमें बाकी तीनों चाचाओं को भी सावधान करना होगा।

गुफा में चल रही सभा खत्म हो चुकी थी, सारे लोग जा चुके थे, गुफा के अंदर केवल लेखराज भंडारी, छोटा हाजी और निशाचर बचे थे। कुछ हथियारबंद लोग गुफा के बाहर निगरानी कर रहे थे।
लेखराज छोटा हाजी की तरफ बढ़ा और एक तमाचा जड़ दिया, फिर उसका गिरेबान पकड़कर बोला- “एक तो वैसे ही मेरे पास हथियारबंद लोगों की कमी है, ऊपर से तू और लोगों को डोगा की दरिंदगी की भेंट चढ़ा आया!”

निशाचर- इसकी गलती नहीं है लेखराज, यह डेविड को मारकर बीस दुकानें कब्जाने ही गया था लेकिन न जाने कहाँ से वहां डोगा आ गया। अब ठंडे दिमाग से काम लो और आगे की योजना के बारे में सोचो, इतने वर्ष पाप क्षेत्र में रहकर मेरी शक्तियां इतनी क्षीण हो गयी हैं कि मुझे डोगा जैसे तुच्छ मानव का नाश किये बिना ही लौटना पड़ा। वो तो समय रहते मुझे तुम लोग मिल गए जिनकी मदद से पाप फैलाकर मैं कुछ शक्ति वापस पा पाया वरना मैं बिल्कुल शक्तिहीन हो जाता।
लेखराज – लोग तुम्हें वाकई देवता मानने लगे हैं निशाचर, “पाप के देवता” के रूप में मैं तुम्हारी छवि को इतना मजबूत कर दूंगा कि आम आदमी भी तुमको आराध्य मानकर पाप करने को सही मानने लगेगा।
निशाचर- लेकिन मैं कोई देवता नहीं हूँ लेखराज बल्कि देवताओं का कट्टर दुश्मन हूँ, तुम मेरी छवि का ऐसा प्रचार क्यों कर रहे हो?
लेखराज- मुझे भी पता है कि तुम देवता नहीं बल्कि पाप शक्ति पर जीने वाले प्राणी हो लेकिन लोगों का विश्वास जीतने का सबसे अच्छा तरीका है आस्था कायम करना। तुम्हारे युग में देवता सचमुच धरती पर आते होंगे लेकिन हमारे युग में लोगों की आस्था भी एक आम इंसान को देवता का तमगा दिला सकती है, तुम तो फिर भी विशिष्ट शक्ति वाले प्राणी हो। अब इसे तुम ढोंग कहो या ढकोसला लेकिन यह तरीका बेहद कारगर है, इस आस्था के कारण ही CNN के लोग तुम्हारे अनुयायी बनकर ही सही लेकिन इस संस्था से अभी तक जुड़े हुए हैं वरना सब लोग बिखरने के कगार पर थे। समय आने पर हम हमारे सबसे बड़े दुश्मन काले डकैत और डोगा पर ऐसा हमला करेंगे कि उनके अस्तित्व का ही नाश हो जाएगा।
निशाचर- हम्म, तुम्हारी बात में दम तो है लेखराज, डोगा एक आम इंसान सही लेकिन बेहद शक्तिशाली पुण्यात्मा है। मुझे तुम्हारे लोगों का “देवता” बनने से कोई समस्या नहीं है यदि इससे तुम्हारी संस्था सशक्त होती है। तुम बस पाप फैलाकर मुझे इतना प्रबल कर दो कि अगली बार मुझे डोगा जैसी प्रबल सत्य शक्ति को नष्ट करने से पहले मुझे सोचना ना पड़े।
छोटा हाजी- सिर्फ डोगा ही नहीं महान निशाचर, और भी कई विलक्षण शक्तियों वाले लोग हैं इस युग में।
निशाचर- क्या? तुम्हारे कहने का अर्थ जैसे मेरे युग में भोकाल, गोजो, अश्वराज और प्रचंडा जैसे महानायक थे वैसे ही इस युग में भी हैं?
लेखराज- नायक हैं नहीं बल्कि नायक थे निशाचर, अब ब्रह्मांड रक्षक दल पूरी तरह से खत्म हो चुका है और पूरी दुनिया ये बात जानती है। वे सब अलग थलग पड़े हैं, उनसे बाद में निबटा जाएगा लेकिन पहले तुम्हें शक्तिशाली करने का इंतजाम किया जाए जिसका सीधा सा तरीका है पाप फैलाना।

दिल्ली में आकाश में उड़ते परमाणु को ट्रांसमीटर द्वारा प्रोफेसर कमलकांत की आवाज़ सुनाई दी “परमाणु! साकेत में स्थित शिवा मॉल में कुछ आठ दस लोग घुसकर तोड़ फोड़ मचा रहे हैं। मुझे उनका उद्देश्य समझ में नहीं आ रहा क्योंकि वो लूटपाट नहीं कर रहे, केवल तबाही मचाकर अराजकता फैला रहे हैं।”
ये बात सुनकर परमाणु का भी माथा ठनका, वह बोला- “ठीक है प्रोफेसर, मैं जाकर देखता हूँ कि क्या हो रहा है।”

परमाणु तेज़ी से उड़ता हुआ मॉल के पास पहुंचा, वहां आठ दस लोग केवल तबाही मचाने के उद्देश्य से पहुंचे थे और बाकी लोग भगदड़ में एक दूसरे को घायल कर रहे थे। एक महिला अपने दो साल के बच्चे को संभाल नहीं पाई और उसके ज़मीन पर गिर पड़ी, उन उपद्रवियों में से एक की नज़र उस पर पड़ी, वह चीखता हुआ अपने हाथ में थमा मोटा से डंडा लेकर महिला की तरफ दौड़ा, उस महिला ने आंखें बंद कर लीं और कसकर अपने बच्चे को पकड़ लिया, उसे उस आदमी में यमदूत नज़र आ रहा था। जब कोई आवाज़ ना आने पर उसने वापिस आंखें खोलीं तो देखा कि परमाणु ने बीच हवा में ही उस मोटे से डंडे को रोक लिया था, वह आदमी लाख चाहकर भी परमाणु को पकड़ से अपने हथियार को छुड़ा नहीं पा रहा था। परमाणु के एक ही ज़ोरदार मुक्के से वह बेहोशी की सैर को चला गया, महिला तब तक अपने बच्चे को लेकर मॉल से सुरक्षित निकल चुकी थी। सभी अराजकता फैलाने वालों का ध्यान परमाणु पर चला गया, उनमें से किसी ने परमाणु पर हैंडग्रेनेड फेंका लेकिन वह सही समय पर ट्रांसमिट होकर बच गया। उसके बाद परमाणु तेज हवा के झोंके की तरह एक एक व्यक्ति को बेहोश करता चला गया। अब मॉल में वापिस शांति छा गयी थी, सारे उपद्रवी बेहोश हो गए थे।

परमाणु (ट्रांसमीटर द्वारा)- प्रोफेसर, यह दृश्य देखा आपने?
कमलकांत- जहां मेरी नज़रें नहीं जातीं वहां तुम्हारी बेल्ट पर लगा कैमरा मुझे पहुंचा देता है, तो ना देखने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।
परमाणु- ये लोग कौन हो सकते हैं?
कमलकांत- कोई आईडिया नहीं है मुझे, मैं इनके चेहरे का स्कैन करके सर्च मोड पर डालता हूँ, शायद कुछ पता लगे। तुम भी वापिस लैब आ जाओ, स्टील वाली घटना के बाद तुम्हारा ज़्यादा देर तक परमाणु बनकर घूमना ठीक नहीं है, राजनगर पुलिस वैसे ही तुम्हारे पीछे पड़ी है और अब शायद दिल्ली की पुलिस भी लग जाए।
परमाणु- आप ठीक कह रहे हैं, फिलहाल परमाणु एक मुजरिम है और मुजरिम का इतना ज्यादा खुलेआम घूमना ठीक नहीं वरना शक की सुई इंस्पेक्टर विनय पर भी जा सकती है।

परमाणु जैसे ही उड़ान भरने के लिए मुड़ा तो देखा कि सामने शक्ति खड़ी थी।

परमाणु- शक्ति! तुम यहाँ?
शक्ति- मुझे इस स्थान से कुछ महिलाओं की चीख सुनाई दी तो मैं तुरंत यहां चली आयी, यहां आकर देखा कि परिस्थिति को तुमने पहले ही काबू कर लिया है।
परमाणु- हां यहां पर तुम्हारे करने के लिए कुछ खास बचा नहीं है।
शक्ति- गलत परमाणु, वातावरण में तीव्र पाप तरंगें फैली हुई हैं। ये जिनको तुमने पीटा है, ये सभी आम नागरिक हैं जिनसे किसी बाहरी शक्ति ने ऐसा काम कराया है।
परमाणु- लेकिन ऐसा कौन हो सकता है?
शक्ति- शायद तुम भूल रहे हो कि पाप क्षेत्र का द्वार खुल चुका है, उसमें से कितनी खतरनाक तामसिक शक्तियां बाहर निकली हों इस बारे में कुछ कह नहीं सकते लेकिन मैं वातावरण में फैली इन पाप तरंगों के स्त्रोत का पता ज़रूर कर सकती हूँ।
परमाणु- ठीक है, तुम स्त्रोत का पता करो, मैं तब तक लैब जाकर अपने हिसाब से छानबीन करने की कोशिश करता हूँ।

परमाणु जल्द ही लैब पहुँचा जहां प्रोफेसर कमलकांत एकटक मॉनिटर की तरफ ही देख रहे थे।

परमाणु- कुछ पता चला मामाजी?
कमलकांत- मैंने एक एक व्यक्ति के चेहरे को स्कैन किया है विनय, इन उपद्रवियों में से ज़्यादातर आम लोग ही हैं।
परमाणु- ज़्यादातर? मतलब?
कमलकांत- मतलब कि इनमें से दो लोगों का क्राइम रिकॉर्ड है, दोनों ही मुम्बई के मशहूर गैंगस्टर छोटा हाजी के आदमी हैं। छोटा हाजी साल भर पहले एक गुप्त आपराधिक संस्था CNN यानी कि क्राइम न्यूज़ नेटवर्क के साथ काम करता था, CNN की पहुंच तमाम सरकारी विभागों से लेकर मल्टीनेशनल कार्पोरेशन्स तक थी। वे किसी भी व्यक्ति की पूरी डिटेल्स निकालने में माहिर थे, भले ही वो व्यक्ति रॉ का कोई एजेंट हो या कोई आम जीवन जीने वाला व्यक्ति। साल भर पहले डोगा ने CNN के सभी मुख्य अड्डों को ध्वस्त कर दिया था, उस वक्त पूरी दुनिया को इस गुप्त संस्था के बारे में पता चल गया था। छोटा हाजी इस संस्था के वफादार सदस्यों मे से एक था, हालांकि संस्था के चीफ लेखराज भंडारी का कुछ दिन पहले पुलिस को पता चला था लेकिन वह अभी तक पकड़ में नहीं आया, वह कहीं अंडरग्राउंड होकर रह रहा है। इसके अलावा एक और बात है जो मेरी चिंता का विषय है।
परमाणु- क्या?
कमलकांत- मैंने साटी (साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट) के लिए एक यंत्र बनाया था जो कि किसी भी प्रकार की ऊर्जा को डिटेक्ट कर सकता है, उसके इस्तेमाल से वहां के वैज्ञानिकों को पता चला कि पूरे विश्व में अलग अलग हिस्सों से वातावरण में किसी खास प्रकार की ऊर्जा का प्रवाह हो रहा है। जब उस खास एनर्जी सिग्नेचर को ट्रेस किया गया तो ऊर्जा का सबसे सघन क्षेत्र असम के जंगलों में मिला, एक टीम को रिसर्च करने के लिए वहां भेजा गया। प्रोफेसर विक्रम और उनके दो असिस्टेंट नवीन और सीमा उस एनर्जी सिग्नेचर को ट्रेस करते करते असम के जंगलों के घने हिस्से में पहुंच गए। दुर्भाग्यवश प्रोफेसर विक्रम बहुत ही भयानक मौत मारे गए लेकिन नवीन और सीमा को जंगल के जल्लाद भेड़िया ने बचा लिया, जब वो लौटकर आये तो बताया कि उनका सामना ऐसे प्राणियों से हुआ था जो कहीं से भी इस दुनिया के नहीं लग रहे थे। आज मुझे लगभग वैसा ही एनर्जी सिग्नेचर दिल्ली के अलग अलग हिस्सों से डिटेक्ट हुआ है, मुझे लगता है कि इस ऊर्जा के प्रभाव इन आकर ही आम जनता उपद्रव कर रही है।
परमाणु- यानी कि शक्ति सही थी, पाप क्षेत्र का द्वार खुल चुका है और उसमें से पाप शक्तियां बाहर आ रही हैं।
कमलकांत- ये पाप क्षेत्र क्या है?
परमाणु- कुछ नहीं मामाजी, मैं शक्ति से संपर्क करके उसे इस ऊर्जा को ट्रेस करने के लिए कहता हूँ। लगता है कि अब इन पाप शक्तियों से टकराव का वक्त आ गया है।

सुबह के पांच बज चुके थे। अपहरण, डकैती, तोड़ फोड़ और लूटपाट की घटनाओं के बाद फिलहाल मुम्बई पूरी तरह से शांत थी। रात को निशाचर और छोटा हाजी से हुई मुठभेड़ के बाद सूरज अपने अपार्टमेंट में गहरी नींद में सो रहा था कि तभी अचानक “मारो! मारो!” की आवाज़ से उसकी नींद एकदम से खुल गयी। उसने बालकनी से बाहर झांका तो देखा कि कुछ ही दूरी पर साम्प्रदायिक दंगे जैसी स्थिति बन गयी थी, उसकी बिल्डिंग में रहने वाले बाकी लोग भी शोर शराबे से जाग चुके थे। सूरज को बहुत गुस्सा आया, एक क्षण को सूरज के व्यक्तित्व पर डोगा हावी हो गया, उसने न आव देखा न ताव, काली बनियान और लोअर में ही अपने तेजी से अपने अपार्टमेंट से बाहर निकल गया और सीढियां उतरने लगा। उसने देखा कि बाहर बिल्डिंग के और भी लोग खड़े हैं, उनमें से एक वृद्ध सज्जन सूरज को देखते ही बोले- “अरे बेटा कहाँ चले? बाहर स्थिति बहुत भयानक है!”
सूरज ने उनसे पूछा- “आपको इसकी वजह पता है?”
उसी ग्रुप में खड़े एक और सज्जन बोले- “उड़ती उड़ती सी खबर मिली है कि किसी आज सुबह ही पास वाले मंदिर के पास गाय का कटा हुआ सिर मिला और एक मस्जिद के पास कटे हुए सुअर का सिर, अब दोनों कौमों के लोग एक दूसरे के खून के प्यासे बन गए हैं। बाहर जाने में बहुत खतरा है, दंगा भड़क उठा है।”

इतना सुनते ही सूरज के मस्तिष्क में कुछ कौंधा, वह वापिस दौड़कर अपने अपार्टमेंट में गया और दराज में रखी दूरबीन निकालकर बिल्डिंग की छत पर चढ़ गया। अभी भी सुबह के कारण हल्का अंधेरा था, सूरज ने दूरबीन से आकाश में इधर उधर देखने की कोशिश की। दूर निशाचर आकाश में एक जगह स्थिर खड़ा था।
सूरज के विचारों को तगड़ा झटका लगा, उसने मन ही मन सोचा “मेरा शक सही निकला! इसने बातों ही बातों में मुझसे कहा था कि ये अधिक से अधिक पाप को सोखकर अपनी शक्तियां बढ़ाएगा और एक बार फिर मुझसे सामना करेगा, साम्प्रदायिक दंगे में होने वाली हिंसा से इसे पाप की अच्छी खासी खुराक मिल जाएगी। क्राइम न्यूज़ नेटवर्क की बदौलत ही इतने बड़े पैमाने पर दंगा करवाना संभव हो पाया है, जरूर उन लोगों ने ही मंदिर और मस्जिद के प्रांगण में धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए पशुओं के कटे सिर फेंके होंगे लेकिन CNN और इस निशाचर के मंसूबों को कामयाब होने नहीं देगा डोगा। इस भीषण दंगे फसाद को रोकने की कोशिश करनी होगी।”

उधर सड़कों पर कोलाहल मचा हुआ था, दो बड़े गुट धारदार हथियारों के साथ एक दूसरे से भिड़ गए थे। गिरने वाले लोगों को भीड़ रौंदकर चली गयी, चीख पुकार और खून खच्चर की भयानक आवाज़ें वातावरण में गूंज रही थीं। लोगों ने अपने आप को अघोषित कर्फ्यू के चलते अपने अपने मकानों में कैद कर लिया था लेकिन फिर भी वह खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे थे। कहीं गाड़ियां पलटी जा रही थीं तो कहीं दुकानों के शीशे फोड़े जा रहे थे। कुछ लोगों को अपना गुस्सा था और कुछ निशाचर की शक्ति का भी असर था। तभी दो तीन हवाई फायर हुए, जिन लोगों ने एक दूसरे का गिरेबान पकड़ रखा था और दूसरे की गर्दन पर अपने हंसिया पर टिका रखी थी, वे सभी रुक गए। डोगा दंगा रोकने पहुंच चुका था। डोगा को देखकर लोग और भड़क गए।
भीड़ में से एक व्यक्ति क्रोध में बोला- “तुम यहाँ से चले जाओ डोगा, इन लोगों ने हमारी धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। इनको हम छोड़ेंगे नहीं!”
इसके जवाब में दूसरा व्यक्ति बोला “तुम्हारी भावनाएं? और तुमने जो मस्जिद में सुअर का कटा सर फेंका वो क्या था?”

“बस बहुत हुआ!” डोगा की कड़कदार आवाज़ पूरे वातावरण में गूंज गयी, जितने लोग चिल्ला रहे थे वो सब शांत हो गए। डोगा ने बोलना शुरू किया-
“इतनी नफरत लाते कहाँ से हो तुम लोग अपने जेहन में? ज़रा अपने आसपास देखो, तुम्हारे फैलाये आतंक ने कितनी जाने लीं हैं। जलती हुई गाड़ियां देखो, सड़क पर पड़ी अपने ही भाइयों की लाशें देखो। तुम्हें खुद को हिन्दू या मुसलमान कहते हुए शर्म आनी चाहिए, तुम जैसे लोग जो बिना सोचे समझे बस एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाएं वो ना हिन्दू होते हैं, ना ही मुसलमान, ना सिख, ना ईसाई, तुम जैसे लोगों के लिए सिर्फ एक शब्द ही सही है है….हत्यारा! तुमने एक पल के लिए भी तबाही फैलाने से पहले नहीं सोचा कि इस धार्मिक उन्माद को भड़काने के पीछे किसी का व्यक्तिगत उद्देश्य हो सकता है? किसी की चाल हो सकती है? बस अपने धर्म की रक्षा के लिये कमर कस ली, तुम्हारे जैसे लोग धर्म की रक्षा नहीं करते बल्कि धर्म का और देश का नाम डुबाते हैं। मुझे पता है कि इन दंगों को भड़काने के पीछे किसका हाथ है, तुम लोगों को तो यह अहसास भी नहीं है कि तुम अभी तक किसी के हाथों की कठपुतलियां बने हुए थे इसलिए तुमको जिंदा जाने का एक अवसर देगा डोगा। यहां से चले जाओ, अगर मेरा क्रोध काबू में ना रहा तो तुम सबकी खैर नहीं, भाग जाओ यहां से!”

ऊपर आकाश में तैरता निशाचर एकदम से चौंक पड़ा- “अरे! प्रचंड पाप ऊर्जा का प्रवाह बंद क्यों हो गया?”
नीचे का नज़ारा देखकर उसे काफी क्रोध आया- “यह डोगा फिर से आ गया और इसने दंगों को भी रुकवा दिया! डोगा अपनी ज़िंदगी की डोरी खुद ही पतली करता जा रहा है, लेखराज के अगले प्रहार तक मुझे भी संयम बनाये रखना होगा ताकि हम उस गुप्त संस्था तक पहुंच पाएं जिसको काले डकैत कहकर संबोधित किया जाता है।”

निशाचर आकाश में तैरता हुआ वहां से दूर चला गया, उसके जाते ही क्रोधित लोगों को मानो होश आ गया। सबने अपने आसपास फैली तबाही को देखा, तब उन्हें नज़र आया कि दंगे में किसी का भाई बलि चढ़ गया था तो किसी का बेटा। कुछ लोग तो रोते बिलखते वहीं बैठ गए थे, डोगा जानता था कि वे लोग पूरी तरह से अपने काबू में नहीं थे, निशाचर और CNN के षड्यंत्र का शिकार हुए थे इसलिए वह भी वहाँ नहीं रुका, वह जानता था कि अब उसके रुकने का कोई मतलब नहीं था। वह वहां से जाने लगा बिना यह जाने की कुछ दंगाइयों की आंखों ने अभी तक उसका पीछा नहीं छोड़ा है। एक व्यक्ति की नजरें दूर जाते डोगा पर गड़ी हुई थीं उसने लेखराज को फोन मिलाकर धीमी आवाज़ में कहा- “सिर, डोगा मेरी पहुंच से दूर निकलता जा रहा है। मैं उसका पीछा कर रहा हूँ लेकिन अगले ब्लॉक पर खड़े आदमी को भी सतर्क रहना होगा।”
उसके फोन पर लेखराज की आवाज गूंजी- “फोन पर बने रहो तुम और एक सुरक्षित दूरी तय करते हुए डोगा का पीछा करो। आगे और भी लोग हैं डोगा पर नज़र रखने के लिए लेकिन तुम भी उसका पीछा करो, जहां तक संभव हो। हमारे पास लोग भले ही कम हो गए हैं लेकिन हमारा नेटवर्क पहले जितना ही सक्षम है। हम जिसके बारे में जानना चाहते हैं, उसके बारे में जानकर ही रहते हैं।”

डोगा इन सबसे अनभिज्ञ सड़क पर चलता जा रहा था, उस आदमी के अलावा कुछ और आंखें अब डोगा पर जम चुकी थीं। वह एक पल को ठिठका और गर्दन मोड़कर इधर उधर देखा और फिर मेनहोल में उतर गया।
उसकी ये हरकत देखकर उसका पीछा कर रहे लोगों की सांस चढ़ गई थी, उनमें से एक गहरी सांस छोड़ता हुआ बोला- “बच गये! एक बार को तो मुझे लगा कि उसने हमें देख लिया है लेकिन ऐसा नहीं हुआ।”
फोन पर लेखराज की तेज आवाज गूंजी “बातचीत में समय मत गंवाओ बेवकूफों! एक आदमी मेनहोल में तुरंत उतरो, मैं तुम्हारे फोन पर सीवर सिस्टम के ब्लूप्रिंट्स भेज रहा हूँ जिससे तुम्हें अंदाज़ा लगेगा कि डोगा किस मेनहोल से बाहर आता है। सब लोग बिखर जाओ और इन मेनहोल्स को कवर करो।”

उसके बाद एक व्यक्ति बिना किसी देरी के उसी मेनहोल में उतर गया और बाकी लोगों के पास ब्लूप्रिंट आ गया जिससे वे ये देखने लगे गये की इस मेनहोल से निकलकर किस निकटवर्ती मेनहोल तक पहुंचा जा सकता है। ब्लूप्रिंट्स को ध्यान से देखने के बाद एक व्यक्ति बोला-
“आसपास जिन मेनहोल्स से निकला जा सकता है उनमें से एक पुलिस स्टेशन के पास है, डोगा इतना बेवकूफ नहीं कि वहां से जाए, एक बिल्कुल भागदौड़ वाले इलाके में हैं वहां भी कोई चांस नहीं लेकिन एक मेनहोल आईसी टावर्स बोरीवली के पास खुलता है। इस जगह भूत प्रेत के डर से लोग कम ही आते जाते हैं, मुझे लगता है कि डोगा यहीं से निकलेगा।”
उसकी बात सुनकर दूसरा व्यक्ति बोला- “ज्यादा दिमाग मत लगा, लेखराज सर ने कहा है कि सारे निकटवर्ती मेनहोल्स कवर करने हैं तो सारे ही करेंगे हम लोग। एक आदमी मेनहोल में उतर ही चुका है, वो डोगा के बारे में हमको जानकारी देता रहेगा।”

लेखराज के बाकी लोग हर मेनहोल को कवर करने पहुंच गए थे, सबको डोगा के बाहर निकलने का इंतज़ार था। मेनहोल में उतरा व्यक्ति लगातार लेखराज से संपर्क में था और डोगा से सुरक्षित दूरी रखते हुए बार बार अपनी लोकेशन फोन से बता रहा था। वह बहुत सावधानी से डोगा का पीछा कर रहा था, वह जानता था कि यदि वह चूक गया तो उसे बहुत भयानक मौत मिलेगी। आखिरकार डोगा एक मेनहोल के पास पहुंचकर वापिस ऊपर चढ़ने लगा, उसका पीछा कर रहे व्यक्ति ने फोन से लेखराज को फुसफुसाते हुए बताया- “सर! डोगा बाहर निकल रहा है!”

इतना सुनते ही लेखराज चौकन्ना हो गया, डोगा मेनहोल से ऊपर आने लगा। हर मेनहोल पर तैनात व्यक्ति चौकन्ना हो गया था, डोगा आईसी टावर्स के पास वाले मेनहोल से निकला जो कि एक संकरे से गलियारे में था। लेखराज एक पल के लिए भी डोगा को अपनी आंखों से ओझल नहीं होने देना चाहता था, सभी मेनहोल के पास खड़े लोगों को उसने कांफ्रेंस कॉल पर ले लिया था। आईसी टावर्स के पास खड़ा उसका आदमी बोला- “स..सर, डोगा मेनहोल का ढक्कन हटाकर आ रहा है! वह एक पतले से गलियारे में खड़ा है!”
“तो तुरंत उसके पीछे लग जाओ, वह आंखों से ओझल नहीं होना चाहिए।” लेखराज लगभग चिल्लाते हुए बोला।

तब तक देर हो चुकी थी, उसी संकरे गलियारे की एक इमारत में घुसकर डोगा गायब हो चुका था। ये देखकर लेखराज से बात करता व्यक्ति एकदम चौंक गया। वह भी दौड़ता हुआ पतले गलियारे की इमारत के दरवाजे के सामने जो कि ठीक मेनहोल के सामने थी, डोगा के अंदर प्रवेश करने के बाद दरवाज़ा लॉक हो चुका था। बिना एक पल भी गंवाये उस व्यक्ति ने एसिड कटर से लॉक को गला दिया, एक तो वैसे भी उस जगह कम आवाजाही होती थी ऊपर से सुबह के वक्त वहां कोई भी नहीं था इसलिए उस व्यक्ति को ताला गलाने में कोई परेशानी नहीं हुई। “चर्रर्रर” की आवाज़ के साथ दरवाज़ा खुल गया, साथ ही उस व्यक्ति की साँसों की आवाज़ भी तेज हो गयी, उसने एसिड कटर वहीं छोड़ दिया और अंदर घुस गया। अंदर घुसते ही उसने देखा कि उसके सामने कई सारे मॉनीटर्स रखे हुए थे, सामने एक बड़ी सी लकड़ी की मेज थी, जिसपर कुछ फाइलें पड़ी हुई थीं, दीवार पर पुराने अखबारों की कटिंग चिपकी हुई थी। ये सब देखकर वह व्यक्ति बहुत खुश हो गया, वह लेखराज से बोला- “सर, लगता है कि काले डकैतों का सीक्रेट हाईडआउट मिल गया है, यहां तो बहुत बड़ा सेटअप लगा हुआ है, यहीं से शायद वो मुम्बई, दिल्ली, महानगर, राजनगर और अन्य बड़े शहरों पर नज़र रखते होंगे।”
लेखराज खुशी से उछल पड़ा- “वाह मेरे ताश के इक्के वाह! तूने तो वो कर दिखाया जो कोई सोच भी नहीं सकता था, अब तू तुरंत वहां से निकल जा।”
“जी सर, मैं अभी यहां से…..आह!” वाक्य पूरा होने से पहले ही एक चीख गूंजी और फोन कट गया।

लेखराज समझ गया कि उसका आदमी डोगा के हत्थे चढ़ चुका है लेकिन वह ऐसी स्थिति के लिये तैयार था। उसने फोन पर पूछा- “निशाचर तुम हमले के लिए तैयार हो ना?”

ऊपर आकाश में तैरता निशाचर अपने कान में लगे इयरपीस पर बोला- “जबसे तुमने यह दूरभाष यंत्र मुझे दिया है तबसे मैं आकाश में ही तैनात हूँ, मैंने तुम्हारे आदमी को उस इमारत के अंदर जाते देखा है। मैं ठीक उसी जगह पर मौजूद हूँ।”

लेखराज (मुस्कुराकर)- तो फिर वक्त आ गया है कि तुम काले डकैतों के इस गुप्त अड्डे को तबाह कर दो और डोगा को यहां पकड़ लाओ! जब तुम हमारे नेटवर्क के लोगों के सामने उसे मारोगे तो तुम्हारे ऊपर उनकी आस्था और मजबूत हो जाएगी। आज हुए दंगों के अलावा मैंने दिल्ली, राजनगर और महानगर में भी अपने और छोटा हाजी के लोगों को भेजकर उपद्रव करवाया है, क्या उससे तुम्हारी पाप शक्ति में वृद्धि हुई है?
निशाचर- हां, लेखराज पिछले कुछ समय में मेरी पाप शक्ति में जबरदस्त वृद्धि हुई है, अब एक क्या सौ डोगा भी मेरे आगे नहीं ठहर सकते। मेरी बढ़ी हुई शक्तियों का एक नमूना दिखाने के लिए मैं काले डकैतों के इस अड्डे के समूल नाश करूँगा।

निशाचर ने दोनों हाथों से भीषण पाप ऊर्जा का वार उस इमारत पर किया, उस वार से उस इमारत की नींव कमजोर हो गयी और दीवारें चरमरा गयीं, बिना कोई समय गंवाये पतले से गलियारे में बनी इमारत बुरी तरह ढह गई। इसी के साथ निशाचर तैरता हुआ ज़मीन पर आ गया, उसकी ऊर्जा से ढही हुई इमारत का मलबा इधर उधर हटने लगा और जल्द ही उसे चिर परिचित पोशाक की एक हल्की सी झलक मिली। उसने मलबा हटाकर देखा ……. वह डोगा ही था, अधमरा लेकिन ज़िंदा डोगा।

निशाचर- वाह! ये डोगा तो बिना किसी मेहनत के मिल गया लेकिन तू चिंता मत कर डोगा, तू अभी नहीं मरेगा, तुझे तो मैं अपने अनुयायियों के सामने मारूँगा और तेरे बाद तेरे जैसे हर रक्षक का यही हाल होने वाला है।

डोगा की हालत ऐसी नहीं थी कि वह कुछ बोल पाये, निशाचर डोगा को लेकर आकाश में उड़ता लेखराज के गुप्त अड्डे की तरफ जाने लगा, इस बात से बेखबर कि कुछ जोड़ी आंखें उसे गौर से देख रही थीं। कुछ ही देर में डोगा को उसी गुफा में ले जाकर पटक दिया था निशाचर ने जहां लेखराज भंडारी और छोटा हाजी के लोगों के साथ क्राइम न्यूज़ नेटवर्क से संबंध रखने वाले सारे लोग जमा थे। उन्होंने वही अजीबोगरीब काला चोगा पहन रखा था, अधमरे डोगा को देखते ही वहां पर हलचल मच गई थी।

लेखराज- घबराइए मत, डोगा हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा क्योंकि हमारे आराध्य “पाप के देवता” ने इस रोड़े को हमारे रास्ते से हमेशा के लिए हटा दिया है। इन काले डकैतों की वजह से कभी पूरे अंडरवर्ल्ड में फैला हमारा नेटवर्क महज हम चंद लोगों में सिमटकर रह गया, मेरे बारे में भी कुछ दिन पहले पुलिस को पता लग गया और मैं मारा मारा फिरने लगा। अगर पाप के देवता सही समय पर अवतरित नहीं होते तो हम अंधेरे में कहीं खो जाते लेकिन देवता के नेतृत्व में हम अपनी पुरानी साख वापस पाएंगे, अंडरवर्ल्ड में CNN फिर से अपनी वही जगह बनाएगा।

लोग खुशी से चिल्लाने लगे लेकिन उन लोगों में भी पांच लोग ऐसे थे जो एकदम शांत खड़े थे। उन्होंने भी बाकियों को तरह काला चोगा पहन रखा था और लेखराज की बात गौर से सुन रहे थे।

लेखराज- अब मैं डोगा का मास्क उतारने जा रहा हूँ, इसे तो मैं ज़िंदा रखकर ऐसी प्रताड़ना दूंगा की यह खुद मुझे काले डकैतों तक पहुंचाएगा, वैसे भी उनका मुख्य बेस तो हमारे देवता ने तबाह कर ही दिया है, आखिर वे कब तक छिपेंगे।

इतना कहकर लेखराज ने एक झटके से डोगा का मास्क उतार दिया और उसके उतरते ही लेखराज, छोटा हाजी और निशाचर के साथ साथ बाकी खड़े लोगों को भी बड़ा झटका मिला क्योंकि ये डोगा की पोशाक में लेखराज का ही आदमी था जो डोगा के पीछे पीछे इमारत में घुस गया था।

लेखराज- य..ये तो मेरा ही आदमी है, ये क्या मजाक है निशाचर?
निशाचर- ये डोगा की चाल है, उसने मेरे हमले से पहले ही तुम्हारे आदमी को अपने विशिष्ट परिधान पहना दिए और इसकी शारीरिक बनावट भी काफी हद तक डोगा से मिलती जुलती है इसलिए मैंने भी संदेह नहीं किया।

जो पांच लोग शांत खड़े थे उनमें से एक व्यक्ति चिल्लाया- “ये कोई देवता नहीं है, देवता ऐसी गलतियां नहीं करते!”

बस फिर क्या था, इस बात ने पेट्रोल में चिंगारी देने का काम कर दिया, बाकी लोग भी भड़क उठे- “नहीं नहीं ये देवता नहीं है! ये कोई ढोंगी है! तुमने एक ढोंगी को हमारा आराध्य बनाया है लेखराज!”

इससे पहले की लेखराज अपनी सफाई में कुछ कह पाता, निशाचर का क्रोध बेकाबू हो गया, वह चिल्लाया- “हां, नहीं हूँ मैं कोई देवता और हो भी कैसे सकता हूँ मूर्खों! निशाचर तो एक पाप शक्ति है जो देवताओं की कट्टर दुश्मन है, अब तक मैं तुम्हारी संस्था का साथ दे रहा था क्योंकि मेरी शक्तियां क्षीण थीं लेकिन अब मेरे पास तुम लोगों के फैलाये आतंक की मेहरबानी से प्रबल पाप शक्तियां हैं। अब तुम ज़िंदा रहो या ना रहो, मुझे फर्क नहीं पड़ता।”

तभी वहां डोगा की आवाज़ गूंजी- “ये लोग मरेंगे ज़रूर निशाचर लेकिन तेरे हाथों नहीं बल्कि काले डकैतों के हाथों!”
सभी ने मुड़कर देखा कि सबसे पीछे खड़े पांच चोगाधारियों ने अपने अपने चोगे उतार दिए थे, वे थे डोगा और चारों चाचा जिन्होंने चोगे के अंदर भी अपनी काले डकैत वाली पोशाक पहन रखी थी।
लेखराज ने आश्चर्य से पूछा “तुम यहाँ तक कैसे आ गए?”

डोगा- तुम जितना सोचते हो काले डकैत उससे कहीं अधिक फैले हुए हैं लेखराज, इसी कारण से तुमने एक साल पहले भी मात खाई थी। मुझे पता था कि तुम्हारे आदमी मुझ पर दंगे वाली घटना के बाद से नज़र रख रहे हैं क्योंकि तुम्हारा हर आदमी जो मुझ पर नज़र रख रहा था वो खुद लगातार हमारी नज़र में था। मैं जानबूझकर मेनहोल में उतरा, तुम्हारा एक आदमी मेरे पीछे आया, मैं तो पानी में अपने पीछे हुई “छप छप” की आवाज़ से ही समझ गया था कि कोई मेनहोल में मेरे पीछे उतरा है लेकिन मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी बल्कि पतले से गलियारे में उस इमारत के अंदर घुस गया जहां तुम्हारा आदमी जल्दबाजी में मेरे पीछे घुस गया जहां हम लोगों में एक नकली सेटअप लगाया हुआ था, ऐसे डमी सेटअप हमने मुम्बई के कोने कोने में बनवा रखे हैं जिसमें घुसकर लोगों को लगे कि वे वाकई किसी गुप्त अड्डे तक पहुंच गए हैं। बस फिर क्या था, एक ही सटीक वार से मैंने उसे बेहोश किया और उसे अपनी पोशाक पहना दी और खुद इमारत के तहखाने में छिप गया, मुझे यकीन था कि अगला वार करने के लिए तुम निशाचर से कहोगे और वही हुआ, निशाचर ने अपनी शक्ति से पूरी इमारत ढहा दी, तहखाने में होने के कारण मुझे कोई नुकसान नहीं हुआ। डोगा की पोशाक पहने तुम्हारे ही व्यक्ति को वह असली डोगा समझकर ले गया। तहखाने से एक दूसरा रास्ता जाता है जिससे मैं तुरंत वहां से निकल गया, पहले हमारी योजना थी कि निशाचर पर लगातार नज़र रखी जाए क्योंकि जहां वह जाता वही CNN का अड्डा होता लेकिन वह तरीका ज़्यादा काम आया नहीं क्योंकि उड़ता हुआ वह आकाश में न जाने कहाँ विलीन हो गया लेकिन दंगा भड़काने वाले तुम्हारे लोग जो दंगे के बाद से मेरे पीछे थे, उन्हें भी तो लौटना ही था। हालांकि तुम्हारी योजना फुलप्रूफ साबित हो सकती थी क्योंकि सब लोग बिल्कुल अलग अलग रास्तों से होकर इस गुफा तक आ रहे थे लेकिन शायद तुम्हें अंदाज़ा नहीं है कि इस शहर में काले डकैतों की कितनी आंखें मौजूद हैं। आखिरकार हमें तुम्हारे गुप्त अड्डे के पता चल ही गया, फिर काले चोगे का इंतज़ाम करके भीड़ में शामिल हो जाना कोई बड़ी बात नहीं थी क्योंकि जिस तरह से हमने तुमको एक साल पहले नेस्तनाबूत किया था, तुम्हारे पास अच्छी सिक्योरिटी का भी बजट नहीं बचा है।
निशाचर- हाहाहा! मूर्ख तू एक बार मौत से बचकर खुद मौत के मुंह में आ चुका है, अब सबसे पहले तेरी ही लाश बिछेगी उसके बाद ही किसी और को मारेगा निशाचर।

डोगा ने अपना हाथ आगे किया, उसके हाथ में एक बोतल थी।

डोगा- जानता है यह क्या है निशाचर?
निशाचर- नहीं क्या है ये?
डोगा- पवित्र गंगाजल, इसमें लाखों करोड़ों लोगों की आस्था की शक्ति है। तेरी शक्ति की काट सोचने में मुझे बहुत वक्त लगा लेकिन मैंने गौर करने पर पाया कि तू मुझे पिछली बार इसलिए खत्म नहीं कर पाया क्योंकि तेरे अनुसार मैं “भीषण सत्य ऊर्जा से भरी पुण्यात्मा” था जिसे नष्ट करने में तेरी पाप शक्ति का एक बड़ा हिस्सा नष्ट हो जाता। तेरी शक्ति यदि लोगों के पाप करने से फलती फूलती है तो करोड़ों लोगों की आस्था और सकारात्मक ऊर्जा तेरी शक्ति को खत्म भी कर सकती है, हालांकि ये सिर्फ एक थ्योरी है जिसका प्रैक्टिकल उपयोग में अभी करके देखना चाहूंगा, तुझ पर ये गंगाजल उड़ेलकर।
निशाचर- नहीं! तुझे मुझ तक पहुंचने से पहले इन लोगों से निपटना होगा।
लेखराज- भूल जाओ! अब हम तुम्हारे साथ काम नहीं करेंगे!
निशाचर- काम तो तुमको करना पड़ेगा भंडारी, या तो मर्जी से या फिर मजबूरी से।

इतना कहते ही निशाचर के हाथ से पाप तरंगें निकलीं जिसने वहां मौजूद हर पापी व्यक्ति के दिमाग पर पलक झपकते ही कब्ज़ा कर लिया। निशाचर चीखकर बोला- “नष्ट कर दो इन काले डकैतों को मेरे अनुयायियों! यही वक्त है!”

सभी क्राइम न्यूज़ नेटवर्क के सदस्यों ने डोगा, अदरक, काली, धनिया और हल्दी को घेर लिया लेकिन तभी गुफा के बाहर से भारी भारी बंदूकों से गोलियां चलाते लोमड़ी और चीता ने प्रवेश किया।

अदरक- इन दोनों को भारी हथियारों के साथ बाहर खड़ा करना काम आ गया।

चीता और लोमड़ी जल्दी जल्दी लाशें बिछाने लगे। साथ ही डोगा और चारों चाचा भी दस दस लोगों से एक साथ लोहा लेने लगे। डोगा की जिन भुजाओं में जुनून का लोहा भरा था उसके सामने भला किसी की क्या बिसात थी, CNN के लोग तेजी से खत्म होते जा रहे थे।

निशाचर- हाहाहा, डोगा और उसके साथियों का दरिंदगी भरा कृत्य अच्छी खासी पाप ऊर्जा दे रहा है। अब मुझे अपनी उस शक्ति का प्रयोग करना होगा जिसका प्रयोग मैंने युगों से नहीं किया ताकि ये टकराव लंबा चले और हिंसा से मैं अधिक पाप ऊर्जा की प्राप्ति कर सकूं।

निशाचर के हाथों से दो पतली किरणें निकलीं जो छोटा हाजी और लेखराज भंडारी के जिस्मों से जा टकरायीं, उनके शरीर में विचित्र परिवर्तन आने लगे। जल्द ही उन दोनों का स्वरूप बेहद भयानक हो गया, वे नरक से आये भयावह प्राणियों जैसे लगने लगे। डोगा, अदरक, धनिया, हल्दी, काली, चीता और लोमड़ी ने फटी फटी आंखों से के वह दृश्य देखा। बाकी लोगों की लाशें बिछ गई थीं लेकिन वे दो भयावह प्राणी धीरे धीरे कदम बढ़ाते उनकी तरफ बढ़ रहे थे। चीता और मोनिका ने उन पर भी गोलियां बरसाईं लेकिन उनके शरीर से टकराकर सब बेअसर हो गईं।

अदरक- अब क्या करें? इन शैतानों से कैसे निपटें?
डोगा- यह गंगाजल चाचा, यदि इस गंगाजल से निशाचर जैसा प्राणी भय से कांप सकता है तो सोचिए कि यह इन प्राणियों का क्या हाल करेगा!

डोगा गंगाजल को बोतल पकड़े छोटा हाजी और लेखराज की तरफ बढ़ा, छोटा हाजी के पंजेनुमा हाथ के वार से वह सर झुकाकर बच गया और गंगाजल का पानी उड़ेलने के लिए हाथ उठाया लेकिन लेखराज ने लात मारकर उसे पीछे गिरा दिया। गंगाजल की बोतल भी एक तरफ गिर गयी जिसमें से सारा पानी निकलकर बाहर ज़मीन पर फैल गया। अब लेखराज और छोटा हाजी का विकृत रूप डोगा की तरफ बढ़ रहा था, डोगा ज़मीन पर ही गिरा हुआ था। जैसे ही छोटा हाजी ने उस पर झुककर प्रहार करने की कोशिश की, डोगा ने बचते हुए अपने पैर से मजबूत टक्कर उसके घुटने पर जड़ दी।

छोटा हाजी के कदम लड़खड़ा गये और इसी बात का फायदा उठाते हुए डोगा ने पूरी शक्ति से उसके पेट पर घूंसा जड़ दिया। छोटा हाजी ज़मीन पर पड़े गंगाजल पर गिर गया, देखते ही देखते उसके शरीर से धुआं उठने लगा और वह फिर से सामान्य हो गया ……लेकिन मृत अवस्था में। लेखराज ने डोगा को कोई वार करने का मौका नहीं दिया और उसे उछालकर गुफा की दीवार की तरफ फेंक दिया, दीवार से टकराकर डोगा नीचे गिरा तो उसकी आँखों के आगे अंधेरा सा छा गया। इससे पहले की लेखराज वापस उसकी तरफ कदम बढ़ाता, चारों चाचा जाकर उससे भिड़ गए। अदरक ने शक्तिशाली ठोकर मारकर उसका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर लिया, लेखराज ने तेज़ी से अपना पंजेनुमा हाथ मारकर अदरक को खुद से दूर किया। हल्दी और धनिया भी उसके वारों से बचते हुए उसके विशाल राक्षसी शरीर पर हमला कर रहे थे लेकिन उसके कठोर शरीर पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। चीता, लोमड़ी और काली भी लगातार गोलियां बरसा रहे थे लेकिन उसका भी उस चट्टानी शरीर पर कोई असर नहीं हो रहा था। किसी का भी ध्यान इस तरफ नहीं था कि उनके द्वारा की गई हिंसा से वातावरण में उत्पन्न पाप ऊर्जा को सोखकर निशाचर पल प्रतिपल और शक्तिशाली होता जा रहा था, वह मन ही मन सोच रहा था-
“वाह! अब जाकर असली तृप्ति हुई है मुझे, पाप क्षेत्र से निकलने के बाद जो कमज़ोरी हो गयी थी, वो पूरी दूर कर दी इन लोगों ने, मैं तो चाहता हूँ कि ये लड़ाई चलती रहे और मैं वातावरण से पाप ऊर्जा सोखता रहूं।”

चीता, लोमड़ी और काली गोलियां चलाते जा रहे थे लेकिन लेखराज पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। उसने सबसे आगे खड़ी लोमड़ी की बंदूक छीन ली और उसके कंधे पर पंजा मार दिया, लोमड़ी के मुंह से चीख निकल गयी, वह दर्द से बिलबिला उठी थी। तभी अचानक से गुफा में ही मौजूद एक चट्टान की दीवार गल गयी, गलकर उसमें एक बड़ा सूराख हो गया और उसमें से गुफा के अंदर आ गयी शक्ति। अंदर आते ही उसकी नज़र लेखराज के विकृत रूप पर पड़ी जिससे बाकी लोग जूझ रहे थे और डोगा दीवार से टकराने के बाद अभी तक अपने होश कायम रखने की कोशिश कर रहा था। उसने बिना कोई मौका गंवाये दोनों हाथों से भयंकर उष्मा पैदा की और लेखराज पर प्रहार कर दिया, उसके राक्षसी शरीर को गलने में कुछ क्षण का ही वक्त लगा।

निशाचर- ये क्या? काली मां? यहां धरती पर?
शक्ति- काली मां को स्वयं आने का आवश्यकता नहीं है दुष्ट, तेरे जैसे पापियों के अंत के लिए उनकी शक्ति का अंश ही काफी है।

शक्ति को देखकर डोगा में जैसे कि नए जोश का संचार हो गया, उसने पूछा- “शक्ति? तुम यहाँ कैसे?”

शक्ति- दिल्ली में कुछ अजीब घटनाएं हो रही थीं, आम लोग हिंसा पर उतारू हो गए थे। मुझे वातावरण में फैली पाप ऊर्जा का तो पता था लेकिन उसका केंद्र ढूंढने के लिए मुझे कुछ समय के लिए ध्यान में जाना पड़ा, तब पता चला कि पाप ऊर्जा का केंद्र मुम्बई में है। परमाणु भी आना चाहता था लेकिन पाप क्षेत्र खुलने के बाद कोई पाप शक्ति दिल्ली पर कभी भी हमला कर सकती है इसलिए वह दिल्ली की रक्षा के लिए रुक गया और मैं यहां मुम्बई आ गयी। मुम्बई में यह पाप ऊर्जा वातावरण में बहुत सघन थी इसलिए मुझे केंद्र की सही लोकेशन ढूंढने में मुश्किल हुई लेकिन तभी मेरे कानों में एक नारी की चीख पड़ी और मैं यहां इस पापी का नाश करने आ पहुंची।
निशाचर- पापी नहीं, पाप का अवतार हूँ मैं और अब अत्यधिक पाप ऊर्जा सोखकर मैं इतना प्रबल हो चुका हूँ कि तू तो क्या देवता भी मेरा मुकाबला नहीं कर पाएंगे।
शक्ति- अच्छा? तो फिर अभी ताकत तौल लेते हैं।

शक्ति ने अपने हाथों से प्रचंड उष्मा वार निशाचर पर किया जिसे निशाचर ने अपने हाथों के ऊर्जा वार से निरस्त कर दिया। शक्ति अपनी उष्मा के स्तर को बढ़ाती जा रही थी, निशाचर तो हर वार रोक दे रहा था लेकिन आसपास के लोगों तक उन वारों की तपिश पहुंच रही थी।

चीता- हमें यहां से निकलना होगा वरना भुट्टे की तरह भुन जाएंगे।

सब चीता का कहा मानकर तेज़ी से गुफा के बाहर निकल गए। अब तक शक्ति और निशाचर एक दूसरे के वारों का प्रत्युत्तर देते हुए गुफा की चट्टानों को तोड़कर उड़ते हुए बाहर आ चुके थे।

निशाचर- हाहाहा, कोई फायदा नहीं है शक्ति। मेरी प्रबल पाप शक्तियों के आगे तुम ठहर नहीं पाओगी!

निशाचर की बात सुनकर शक्ति ने मन ही मन सोचा “उफ्फ! इसे मैं तीसरी आंख के इस्तेमाल से भस्म कर सकती हूँ लेकिन उसके लिए मुझे ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है लेकिन इसके लगातार वार मुझे ध्यान केंद्रित ही नहीं करने दे रहे।”

तभी शक्ति ने वार करते करते देखा कि ज़मीन पर खड़ा डोगा एक तरफ इशारा कर रहा है, शक्ति डोगा का इशारा समझ गयी और अपने वार तेज़ कर दिए।

निशाचर- उफ्फ! इसके वार तो और अधिक घातक हो गए, मुझे भी अपने ऊर्जा वारों के स्तर को बढ़ाना होगा।

शक्ति पर वार करने के चक्कर में निशाचर ये नहीं देख रहा था कि उड़ते उड़ते वह कहां आ पहुंचा था लेकिन जब तक वह ध्यान देता तब तक बहुत देर हो चुकी थी, शक्ति के एक बेहद भीषण उष्मा प्रहार से वह धरती पर गिर पड़ा, वहां पर पहले से डोगा खड़ा था। उसे देखते ही निशाचर क्रोध से बोला-
“मैंने कभी सोचा नहीं था कि तेरे जैसा तुच्छ मानव मेरे लिए इतनी समस्या का कारण बनेगा, तेरी इहलीला तो मैं अभी समाप्त करूँगा।”
इससे पहले की निशाचर कुछ कर पाता, डोगा ने कहा- “ज़रा देख पहले तो ले कि शक्ति ने तुझे कहाँ गिराया है?”

निशाचर ने अपने आसपास देखा और उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं- “ये..ये तो एक मंदिर है!”

डोगा- हां निशाचर, ये एक मंदिर है। कहने को तो लोग इसे मात्र ईंट पत्थर से बनी एक इमारत भी कहते हैं लेकिन जब ऐसी किसी इमारत के साथ लाखों करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हो तो वो इमारत भला साधारण कहाँ रहती है। तेरी शक्तियों का आधार नकारात्मक विचारोंसे के उत्पन्न होने वाली पाप ऊर्जा है इसीलिए तू गंगाजल देखकर इतना घबरा गया था क्योंकि तुझे ऐसी हर चीज़ से समस्या है जिसमें कई लोगों की आस्था जुड़ी हो क्योंकि आस्था या विश्वास सकारात्मक विचार हैं जो नकारात्मकता को बहुत ही प्रभावी तरीके से नष्ट कर देते हैं। ये मंदिर ही तेरी मौत का कारण बनेगा।

निशाचर क्रोधित होकर डोगा की तरफ बढ़ा लेकिन एक ही प्रचंड घूंसे में ज़मीन सूंघने लगा।

डोगा- शक्ति की ऊष्मा के अंदर भी पुण्य शक्ति है जिससे तूने इतनी लंबी लड़ाई करके अपनी पाप शक्ति कुछ हिस्सा वैसे ही नष्ट करवा लिया, बाकी पाप शक्ति ये मंदिर तेजी से नष्ट कर रहा है। तू फिलहाल शक्तिहीन है।

तभी निशाचर ने देखा कि शक्ति धीरे धीरे धरती पर आ रही है, उसके माथे पर लगी आंख चमकने लगी थी।

शक्ति- अब मेरी तीसरी आंख तुझे हमेशा के लिये नष्ट कर देगी दुष्ट।
निशाचर- मेरे जैसे कितनों को नष्ट करोगी शक्ति, पाप क्षेत्र से केवल मैं नहीं आया, और भी मेरे जैसे कई तामसिक शक्ति वाले प्राणी आये हैं। मुझे मारने से कुछ नहीं होगा, अब इस ब्रह्मांड को अंधेरे में समाने से कोई नहीं रोक सकता।

शक्ति की भौंहें तन गयीं, तीसरी आंख से निकली ऊर्जा ने निशाचर के शरीर को निशाना बना लिया और एक भीषण चीख के साथ उस शैतान का अंत हो गया, अब सिर्फ उसकी राख धरती पर पड़ी थी।

डोगा- ये खतरा भी टल गया, मदद के लिए धन्यवाद शक्ति।
शक्ति- खतरा अभी टला नहीं है डोगा, अभी असली खतरे से तो हमारा सामना हुआ भी नहीं है। पाप क्षेत्र के खुलने के बाद न जाने और कैसे प्राणी उसमें से बाहर निकलें।
डोगा- ये निशाचर भी किसी पाप क्षेत्र का ज़िक्र कर रहा था, आखिर ये पाप क्षेत्र है क्या?
शक्ति- मैं तुमको सब बताऊंगी डोगा क्योंकि जो खतरा हमारे सामने है उससे भिड़ने के लिये हमें सभी नायकों की सम्मिलित शक्ति चाहिए होगी और उसके बाद भी पता नहीं कि हम इस ब्रह्मांड को बचाने में सक्षम होंगे भी या नहीं।

राजनगर जेनेटिक रिसर्च लैब का इमरजेंसी मैसेज मिलने के बाद कमांडो फ़ोर्स के करीम, रेणु और पीटर लैब तक पहुंच गए थे। लैब के अंदर घुसते ही उनके चेहरे के हावभाव ही बदल गए क्योंकि वहां पर कई वैज्ञानिकों की लाशें पड़ी हुई थीं, लगातार अलार्म बज रहा था और लाल इमरजेंसी लाइट के अलावा और कोई लाइट नहीं जल रही थी। कई यंत्र टूटी फूटी अवस्था में थे और जगह जगह कांच बिखरा हुआ था।

करीम- ये..ये क्या हुआ? इमरजेंसी मैसेज मिलने के बाद यहां पहुंचने में हमें बस दस मिनट ही लगे और दस मिनट में क्या से क्या हो गया?
रेणु- आसपास किसी जीवित व्यक्ति को तलाशो।

वे सब इधर उधर देख ही रहे थे कि अचानक से मेज के नीचे छिपे इब्रित विकराल बाहर आ गए।

इब्रित- आप लोग आ गए! लाख लाख शुक्र है भगवान का!
पीटर- ये सब यहां क्या हुआ है? आपने किसी विचित्र प्राणी के द्वारा लैब पर हुए हमले का संदेश भेजा था हमें?
इब्रित- ह..हां! सब कुछ ठीक चल रहा था, एकदम सामान्य दिनचर्या चल रही थी लेकिन तभी न जाने कहाँ से वह भयानक प्राणी लैब में घुसकर तोड़ फोड़ मचाने लगा, कई वैज्ञानिकों को तो अपने शिकंजे में दबोचकर उनके मांस को उनके पिंजर से ही अलग कर दिया। मैंने तुरंत आपको इमरजेंसी सिग्नल भेजा और फिर मेज के नीचे छिप गया।
करीम- तो अब वह प्राणी कहाँ पर है?

इस प्रश्न एक उत्तर में इब्रित ने अपनी उंगली का इशारा एक तरफ किया जहां बड़े से भयावह प्राणी की लाश पड़ी थी। करीम, रेणु और पीटर दौड़कर उस प्राणी के पास पहुंचे, उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं।

करीम- क्या लगता है पीटर? ये चीज़ है क्या?
पीटर- तुम तो मुझसे ऐसे पूछ रहे हो जैसे मुझे इस पृथ्वी के हर प्राणी की जानकारी हो, वैसे भी ये पृथ्वी का नहीं, किसी और दुनिया का लग रहा है लेकिन इसे मारा किसने?
इब्रित- उस..उस बच्चे ने जिसे आप लोग यहां लेकर आये थे, अपनी तेज़ी से बढ़ती उम्र के कारण वह अब अट्ठारह वर्ष का किशोर बन चुका है। उसकी तेज़ी और उसकी ताकत कमाल की है, वह आज तक कभी अपने कमरे से बाहर नहीं निकला था लेकिन जैसे ही उसने देखा कि यह प्राणी उत्पात मचा रहा है, बुलेटप्रूफ कांच को तोड़ता हुआ बाहर आ गया और इस प्राणी से भिड़ गया।
पीटर- यकीन नहीं होता, इतने कम समय में ही वह बच्चा इतना बड़ा हो गया, उसकी उम्र की रोकथाम के लिए कोई उपाय नहीं निकला?
इब्रित- अभी तक तो नहीं, इसीलिए हमने उसे अलग अलग चीजों में पारंगत करना शुरू कर दिया था क्योंकि शरीर के साथ उसके दिमाग का विकास भी तेजी से हो रहा है। इस प्राणी से भिड़कर उसने इसे खत्म कर दिया और तेजी से लैब से बाहर न जाने कहाँ निकल गया।
करीम- आपने उसे रोकने की कोशिश नहीं की?
इब्रित- की थी लेकिन उसने मेरी सुनी ही नहीं। वह बस लैब से बाहर निकल गया।

अब कमांडो फ़ोर्स वाले भी बेबस थे, उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि इस परिस्थिति पर क्या प्रतिक्रिया दें। वे बार बार उस टूटे बुलेटप्रूफ कांच वाले चैम्बर की तरफ देख रहे थे जहां कभी वह उस बालक को छोड़कर गये थे, उस चैम्बर के बाहर सफेद रंग की छोटी सी पट्टी चिपकी हुई थी जिस पर मोटे काले अक्षरों में लिखा हुआ था “प्रोजेक्ट सुपर इंडियन”।

To be continued….
Written by- Samvart Harshit for Comic Haveli

Disclaimer- These stories are written and published only for entertainment. Comic Haveli writers have no intent to hurt feelings of any person, community or group. If you find anything which hurt you or should not be posted here, please highlight to us so we can review it and take necessary action. Comic Haveli doesn’t want to violate any copyright and these contents are written and created by writers themselves. The content doesn’t carry any commercial profit as they are fan made dedications to the comic industry. If any, name, place or details matches with anyone then it will only be a coincidence.

4 Comments on “Earth 61 Phase 2 Part 17”

  1. Bohat badhiya likha hai harshit bhai wow

    Story read krke lagne laga hai ab aar ya paar ki fight hone wali h jaise ji iss kahani ka ab climax scene chal rha h qki ab duniya me sabhi paap shakti fail chuki hai jagah jagah log larh rhe hain ek dusre ka qatal kar rhe hain Shakti ne nishachar ko khatam kar diya aur doga ko bata bhi diya ab waqt aagya hai sab heroes ek sath mil kr fight kare sab bohat ache se chal rha hai..

    Parellel story chalate to aur bhi maza aata qki sabke mind me chal rha hoga ki dusri side kya ho rha h…lekin isse story thoda long ho jati ya phir short…lekin mazedar wahi zyada lagta h jaha sab kch cover ho…and bohat acha laga ki Doga, parmanu aur shakti ko dekh kr… nishachar ki power thoda kam dikhaya aapne but utna chalega qki isse zyada dikhane pe lengthy lagne lagta…

    Baht si chizo k wait hai ki jab nagraj aur doga ka samna hoga to kya hoga…aur parmanu jo kanun ka rakhwala hai wo mujrim ban gya h uska kya hoga…qki jaha tk mujhe lag rha h parmanu saza bhugatne k liye ready h but agar usne aisa kiya to sari duniya ko uske parmanu hone ka raaz lata lag sakta h..kya Abahy kabhi wapis tiranga banega ya phr scd kabhi return aayega apni karambhumi pe…

    Aur sabse zabardast chiz lagi mujhe ki aapne super Indian ko start se hi question mark bana rakha tha aur iss tarah se present kiya iske liye sach me genius mind hi chahiye…wow clapping

    Ab intezar hai baht hi zyada besabri k sath agle bhaag ka
    Ummeed karta hu ki isi week me mil jayega

  2. आपकी कहानी निःसंदेह राज कॉमिक्स के चरित्रों पर लिखी सबसे उत्तम कहानियों में से एक है। बहुत शानदार रूप से पिरोया गया है इसको।
    पिछले पार्ट से लगा ही था कि अब नए से नए (पुराने नकारात्मक किरदार) आने वाले हैं और इस बार निशाचर का आगमन हुआ।
    कहानी बहुत बढ़िया रफ्तार से बढ़ रही है आपके अनुसार बस 20 पार्ट की कहानी होने वाली है लेकिन इस पार्ट को पढ़कर ऐसा लगा नहीं कि ये इतनी आसानी से खत्म हो जानी चाहिये।
    मैंने कभी भी लेखराज हाजी इत्यादि को नहीं पढ़ा तो relate नहीं कर पाया खुद को कॉमिक्स नाम बताइयेगा पढूँगा तो शायद समझ जाऊँ क्योंकि आपकी कहानी में ओरिजिन बिल्कुल नए तरीके से है तो अंदाज़ा भी नहीं लग पा रहा है।
    खैर अब कहानी पर बात करते हैं आपकी कहानी का ये भाग निशाचर के इर्द गिर्द ही था जिसका संबंध आपने डोगा से किया मुझे ध्रुव की भी आशा थी लेकिन वो यहाँ नहीं आया। चंडकाल जाग रहा है और अग्रज ऐसा कर रहा है मेरा पूरा फ़ोकस उसी पर था। निशाचर कैसे शक्तिशाली होता है और कैसे डोगा वापस अज्ञात वीएएस से बाहर आता है इसको ध्यान में रखकर आपने बहुत बढ़िया लिखा है इसको।
    अब अगले भाग का इंतज़ार रहेगा।

  3. Bahut hi badhiya likha hai aapne, par jane kyu aisa lag rha jaisa thoda kam mehnat kiya hai aapne, vaise mai kbhi nhi bolta par aadat aap ne hi kharab karai hai achha padhne ki, nishachar ke dialogue thode se feeke lage, aap thoda aur aur jabardast dialogue bana sakte the, doga ka ye avtar thoda achha laga to thoda bura bhi, kyuki ab wo barood se sath dimag bhi lagane laga hai, lomdi ne insani jaan li ye bat kuch hazam nhi hui, aur is part me nagraj dhruv aur bhediya ka koi hint bhi nhi mila,

    Ab kahani apne antim padav pr hai , aur ye ek alag level ki gatha bnne ja rhi hai, isliye umeed hai ki agala bhag aur bhi bada umda aur jaldi aane waala hoga.

    Aapka lekhan kary vaakai sarahniya hai,
    Ho sakta hai agle bhag me baki ke heroes dekhne ko mile, baki bahut si cheeje aisi bhi hai jo kabhi upyog nhi ki gyi thi comics me, wo sab dekhkar achha laga, agale bhag me Super Indian bhi aane wala hai, uska besabri se intezaar hai.

    Dhnyawad, agale bhag ka intzaar hai…..

  4. बहुत धन्यवाद तारिक भाई, देव भाई और मनोज भाई। आप उन चंद लोगों में से हैं जिन्होंने शुरू से अंत तक समीक्षाओं के द्वारा मेरा साथ दिया। अगर इतनी बड़ी कहानी संभव हो पाई तो आपके द्वारा दिये गए फीडबैक और प्रोत्साहन के कारण।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.