Earth 61 Phase 2 Part 18

अष्टादश अध्याय- ब्रह्मांड रक्षक पुनर्स्थापन

रात के आठ बज रहे थे, दो पुलिसवाले अपनी जीप एक बाइक सवार चोर के पीछे दौड़ा रहे थे। गाड़ी चलाते पुलिसवाले से उसका साथी बोला- “जल्दी कर मिश्रा! गाड़ी कछुए की स्पीड से क्यों चला रहा है?”
मिश्रा ने झुंझलाकर जवाब दिया- “अबे तेज ही तो चला रिया हूँ! अब वो चोर ही स्टंटमैन निकला तो मैं क्या करूँ?”

अचानक ही तेज भागती बाइक एक पतली सी गली के अंदर घुस गयी और जीप वहाँ जाकर रुक गयी। मिश्रा फिर से झुँझला गया।
“धत तेरे की! अब जितनी देर में हम एलपीजी गाड़ी घुमाएंगे तब तक ये रफूचक्कर हो चुका होगा, हमें बाकी यूनिट्स को अलर्ट करना होगा।”

उधर चोर पतली गली के छोर पर निकल गया लेकिन तभी कोई साया उछलता हुआ आया और उसके दोनों पैर चोर की छाती से तेजी से टकरा गए। पतली गली के अंदर जीप घुस न पाने का कारण पुलिसवालों ने जीप वहीं खड़ी कर ली थी, ये कारनामा देखकर उनकी भी आँखें फटी की फटी रह गयीं। चोर तो बाइक से उछलकर सड़क पर गिरा और बेहोश हो गया और फिर उस साये की नज़र उन दो पुलिसवालों से टकराई, पुलिसवाले भी उसे देखकर हैरान थे- वो एक अट्ठारह उन्नीस वर्ष का लड़का था जिसके लंबे बाल उसके कंधे तक आ रहे थे, कपड़े के नाम पर उसने केवल फटी चिथड़ी सी पैंट पहन रखी थी।
पुलिसवालों के देखते ही देखते उसने एक ऊँची छलांग लगायी और अँधेरे में गुम हो गया।

मिश्रा आँखें फाड़कर उसी ओर देखता हुआ बोला- “य..यह तो वैसे ही हुलिए का लड़का लग रहा है जैसा कि हमको कमांडो फ़ोर्स ने बताया था, हमें कमांडो फ़ोर्स को सूचित करना चाहिए।”
दूसरे पुलिसवाले ने भी सिर हिलाकर सहमति जतायी।

ब्रह्मांड रक्षक हेडक्वार्टर-

जो काफी समय से खाली पड़ा था, जिस हॉल में ब्रह्मांड रक्षकों की मीटिंग होती थी, अब वहाँ जगह-जगह मकड़ी के जाले लग गए थे। मेज और कुर्सियाँ वैसी की वैसी ही पड़ी थीं, बस उन पर धूल की एक मोटी परत चढ़ गयी थी। आसपास एकदम सन्नाटा था, किसी परिंदे के पर मारने की आवाज़ भी नहीं गूँज रही थी। तभी अचानक हवा में एक गोलाकार द्वार बना, उसमें से सबसे पहले धनंजय, फिर नागराज, ध्रुव, अभय, एंथोनी, भेड़िया और जैकब ने हेडक्वार्टर के उस सुनसान हॉल में कदम रखा। जहाँ एंथोनी, धनंजय, भेड़िया और जैकब इस नई जगह को घूर-घूर कर देख रहे थे वहीं नागराज, ध्रुव और अभय की पुरानी यादें ताज़ा हो गयी थीं।

भेड़िया- वाह, काफी बड़ा हॉल है। मैं जंगल में शासन व्यवस्था कायम करने के इतना व्यस्त रहा कि कभी इस जगह के दर्शन करने का मौका नहीं मिला।
नागराज- फिर तो अच्छा ही हुआ, कम से कम तुम तो नायक तिमिर योग का शिकार होने से बच गए।

ध्रुव जानता था कि वेदाचार्य का रहस्य खुलने के बाद नागराज बुरी तरह से टूट गया था। उसे बहुत सारे विश्वासघातों का सामना करना पड़ा था, इतने में आम इंसान बुरी तरह टूट जाता लेकिन नागराज अब भी पाप शक्तियों से लड़ने को तैयार था, यह बड़ी बात थी और इस बार से कोई भी नायक अनभिज्ञ नहीं थे।
एंथोनी ने तभी बात संभालते हुए कहा-
एंथोनी- तो हमारा सबसे पहला कदम क्या होना चाहिए?
भेड़िया- सबसे पहले तो यहाँ की सफाई करवानी चाहिए, बड़ी धूल जमा हो गयी है।
एंथोनी- मेरे पूछने का मतलब था कि पाप शक्तियों से भिड़ने के लिए हमारा पहला कदम क्या होना चाहिए?
ध्रुव- अपने जैसे और लोगों को ढूँढ़ना होगा जो इस जंग में हमारा साथ दे सकें और उनको यहाँ लेकर आना होगा।
नागराज- अपने जैसे लोगों से तुम्हारा मतलब?
ध्रुव- मतलब कि शक्ति, परमाणु, डोगा आदि।
नागराज- उन्हें बुलाने की कोशिश कर सकते हो लेकिन मुझे नहीं लगता कि वो आएंगे।
ध्रुव- ऐसा क्यों?
नागराज- स्टील की हत्या मैंने परमाणु और शक्ति के सामने की है ध्रुव, वो मेरी जान के दुश्मन बन चुके होंगे। डोगा से भी बहुत समय से बहुत तनाव चल रहा है मेरा, अगर मैं ब्रह्मांड रक्षक दल में रहा तो ये कभी नहीं आयेंगे।
ध्रुव- जहाँ तक रही स्टील की बात तो ये उनको समझाना होगा कि ऐसा नायक तिमिर योग के कारण हुआ था, बल्कि उस दौरान नायकों के हाथों हुयी सारी हत्यायें नायक तिमिर योग के कारण हुयी थी। डोगा के साथ बातचीत से भी मामला हल हो सकता है, वैसे भी हम हमेशा के लिए तो ब्रह्मांड रक्षक दल बना नहीं रहे ना, जैसे ही ये विषम परिस्थिति टलती है, सब अपनी अपनी जिंदगियों में वापस मशगूल हो जाएंगे। उन्हें एक अस्थायी तौर पर की गई संधि से कोई समस्या नहीं होनी चाहिये।
नागराज (कुछ सोचकर)- हम्म, तुम्हारी बात में दम तो है। ठीक है, ये प्रयत्न भी करके देख लेते हैं।

तभी अचानक धनंजय के कलाईबन्द से “बीप बीप” की आवाज़ आने लगी, वो समझ गया कि कदाचित फिर से प्रसेन का कोई संदेश आया है। उसने एक बटन दबाया और प्रसेन का त्रिआयामी स्वरूप उसके सामने प्रकट हो गया।

धनंजय- कहो प्रसेन, क्या समस्या है?
प्रसेन- समस्या तो बहुत विकट है धनंजय। पाप शक्ति से निशाचर बाहर आ गया था।
धनंजय- क्या? वह पाप ऊर्जा पर जीने वाला प्राणी? वह तो काफी शक्तिशाली तामसिक प्राणी है।
प्रसेन- वह मुम्बई शहर में विनाश मचा रहा था लेकिन डोगा और शक्ति ने मिलकर उसको मौत के घाट उतार दिया।
धनंजय- ये तो अच्छा हुआ।
प्रसेन- लेकिन पाप शक्तियों का आगमन पहले से कहीं ज़्यादा बढ़ गया है, पहले के मुकाबले अब इन पाप शक्तियों का संचार वातावरण में तेजी से हो रहा है।
धनंजय- ओह, इसका मतलब तो ये हुआ कि पाप क्षेत्र का द्वार धीरे धीरे पूरी तरह खुलने की चेष्टा कर रहा है।
प्रसेन- हाँ, फिलहाल तो नियंत्रण कर सकने योग्य पाप शक्तियों से ही हमारा सामना हुआ है लेकिन द्वार पूरी तरह खुल जाने पर किस प्रकार का महाभयानक संकट हमारे सामने आएगा, हम कल्पना भी नहीं कर सकते।
धनंजय- फिलहाल तुम्हें पाप ऊर्जा का आभास किन स्थानों से हो रहा है?
प्रसेन- पाप ऊर्जा तो विश्व के कई स्थानों पर फैल चुकी है लेकिन मुझे अपने भारत देश के ही दिल्ली, मुम्बई और राजनगर, तीनों जगहों से प्रचंड पाप शक्तियों के संकेत मिल रहे हैं जिनसे तुरंत निपटने की आवश्यकता है।
धनंजय- ठीक है, तुम पाप क्षेत्र के द्वार को किसी प्रकार से बंद करने का तरीका खोजो, तब तक हम लोग इन पाप शक्तियों से निपटते हैं।

संपर्क काटते ही प्रसेन का त्रिआयामी स्वरूप गायब हो गया। धनंजय बाकी लोगों की तरफ मुड़ा जो कि उनकी बातचीत सुन रहे थे।
सबसे पहले अभय बोला- “हमें भी तीन दल बनाकर अभी निकलना चाहिए, धनंजय के स्वर्णपाश के पास हवा में ही द्वार बनाने की शक्ति है जिसके जरिये हमें तीनों जगहों पर पहुंचने में बिल्कुल समय नहीं लगेगा।”

ध्रुव- तुम ठीक कहते हो, क्या तुम्हारा स्वर्णपाश एक साथ तीन द्वारों का निर्माण कर सकता है धनंजय?
धनंजय- ये तो एक साथ छह द्वारों का भी निर्माण कर सकता है बस इसके संचालक में ध्यान केंद्रित करने की शक्ति अच्छी खासी होनी चाहिए। मैं प्रयास करके देखता हूँ, पहली बार ऐसा कुछ करने जा रहा हूँ, आप सब थोड़ा दूर खड़े हो जाइए।

सब लोग धनंजय से दूर खड़े हो गए, धनंजय ने कसकर स्वर्णपाश अपने हाथ में थामा और हाथ को आगे करके बोला “हे स्वर्णपाश! दुनिया भर में फैली प्रचंड पाप शक्तियों को भांपो और एक से अधिक द्वारों का निर्माण करके उनके संहार में मेरी सहायता करो !”

अचानक ही स्वर्णपाश चमकने लगा, वह धनंजय के हाथ से छूट गया और हवा में गोल गोल चक्कर लगाकर एक द्वार का निर्माण कर दिया। धनंजय का हाथ अभी भी आगे था, उसके दांत भिंच गये थे जिससे ये पता लग रहा था कि उसे तीन द्वारों का निर्माण करने में कितना अधिक ध्यान केंद्रित करना पड़ रहा था। स्वर्णपाश तेजी से हवा में घूमा और इसी के साथ हवा में दो और द्वारों का निर्माण हो गया, फिर वह वापस धनंजय के हाथ में आ गया।

धनंजय- मेरे उस पार कदम रखते ही सभी द्वार गायब हो जाएंगे इसलिए मुझे सबसे आखिर में जाना होगा।
ध्रुव- ठीक है! नागराज और भेड़िया मुम्बई जाएंगे; अभय, एंथोनी और जैकब दिल्ली और आखिर में मैं और तुम राजनगर के लिए निकलेंगे।
अभय- लेकिन मठाधीश मैं आपका अंगरक्षक हूँ, मुझे आपके साथ चलना चाहिए।
ध्रुव- तुम दिल्ली से वाकिफ हो अभय इसलिए मैं तुमको दिल्ली भेज रहा हूँ।
अभय- लेकिन मठाधीश….
ध्रुव- क्या तुम अपने मठाधीश का आदेश टालना चाहते हो?
अभय (सिर झुकाकर)- जी नहीं।
नागराज- तुम बहुत चालाक हो ध्रुव, तुम मुझे भेड़िया के साथ मुम्बई इसलिए भेज रहे हो ताकि मेरा डोगा से सामना हो और मैं उसे हमारे साथ आने के लिए मनाऊं।
ध्रुव- वैसे मैंने इतना सोचा तो नहीं लेकिन हाँ तुम्हारा आईडिया अच्छा है।
धनंजय- उफ्फ! अरे बातें बाद में कर लेना, मुझे तीन द्वार बनाये रखने में मुश्किल हो रही है, सभी लोग निकलो जल्दी!

फिर नागराज और भेड़िया, उनके बाद अभय, एंथोनी और जैकब और सबसे बाद में ध्रुव और धनंजय गोलाकार द्वार के उस पार चले गए। धनंजय ने सबसे आखिर में द्वार के उस तरफ कदम रखा, उसके ऐसा करते ही हवा में बने तीनों द्वार एक तेज चमक के साथ फिर से बंद हो गए।

राजनगर में जोरों से बिजली कड़कने के साथ बारिश भी शुरू हो चुकी थी। करीम, पीटर और रेणु अभी भी जेनेटिक रिसर्च लैब के अंदर इब्रित विकराल के साथ ही थे। जहाँ उनसे थोड़ी ही दूरी पर एक बेहद भयानक प्राणी मरा पड़ा था।

करीम- इस क्लोन बालक के चैम्बर के बाहर “प्रोजेक्ट सुपर इंडियन” क्यों लिखा गया है इब्रित विकराल साहब?
इब्रित- वो दरअसल ……हम उसे एक खास तरह की ट्रेनिंग दे रहे थे।
रेणु- जब हम पिछली बार आये थे तब भी इस बच्चे की ट्रेनिंग की ही बात चल रही थी, आखिर बात क्या है?
इब्रित- आप लोगों को याद होगा कि जब आप पिछली बार आये थे तो मैंने आपको बताया था कि इस बच्चे के अंदर कितना अधिक पोटेंशियल है।
पीटर- जी, हमें याद है। आपने ये भी कहा था कि ये तेजी से सीख रहा है।
इब्रित- तेजी से नहीं बल्कि वह बहुत तेजी से सीख रहा था, सुप्रीमो अहंकारी को भी अंदाज़ा नहीं होगा कि उसने नागमणि के साथ मिलकर न जाने कितनी विलक्षण रचना कर डाली है। हमने इस बच्चे की क्षमताओं पर शोध करने के लिए एक अलग टीम बनाई, इस प्रोजेक्ट को नाम दिया गया “प्रोजेक्ट सुपर इंडियन”, यह बच्चा कुछ ही समय में अलजेब्रा और क्वांटम फिजिक्स जैसे विषयों को समझने लगा। हमने इसकी शारीरिक क्षमता को टेस्ट करने के लिए भारत के जाने माने जुडो कराटे इत्यादि सिखाने वालों को बुलवाया, जिस कला को सीखने में लोग महीनों लगा देते हैं उसको यह चंद दिनों में ही सीख गया। हमने यह तय कर लिया था कि यदि हम उसकी उम्र को किसी तरह सामान्य कर देते हैं तो एक सुपर सोल्जर के तौर पर उसे अपनी भारतीय आर्मी को सौंप देंगे, इस तरह देश को एक विलक्षण फौजी मिल जाता और उस क्लोन को जीवन का एक उद्देश्य।
पीटर- वाह, यानी कि एक आतंकवादी के प्रयोग को समाज की भलाई के लिए प्रयोग करने की ठानी आपने।
इब्रित- हाँ, ऐसा कह सकते हो। यह हमारा दुर्भाग्य ही समझिए कि जाने यह प्राणी कहाँ से प्रकट हो गया और हमारी रक्षा के लिए उसे आगे आना पड़ा, उसने इस प्राणी से बहुत बढ़िया टक्कर ली और अंत में हरा दिया लेकिन अपने बुलेटप्रूफ चैम्बर से निकलने के बाद बाहर की दुनिया में जाने का लालच उसे रोक नहीं पाया। मैं भी चिल्लाता रहा लेकिन वह बाहर निकल गया, न जाने बाहरी परिस्थितियों में वह कैसे रहेगा!
करीम- उसकी फिक्र आप हमें करने दीजिए। ओह! ट्रांसमीटर पर स्पेशल मैसेज आ रहा है।

करीम ने ट्रांसमीटर ऑन किया, दूसरी तरफ़ से इंस्पेक्टर पाठक की आवाज़ आयी- “क्या मैं कमांडो फ़ोर्स से बात कर रहा हूँ?”

करीम- यस, करीम हीयर।
पाठक- करीम जी मैं इंस्पेक्टर पाठक बोल रहा हूँ। जिस तरह के हुलिए वाले लड़के का आपने वर्णन किया था वह हमारे दो हवलदारों को दिखा था, उसने लीला चौक पर एक बाइक सवार चोर पर हमला किया और घटनास्थल से निकल गया। क्या आप उसकी खोज जारी करवाना चाहते हैं?
करीम- जी इंस्पेक्टर साहब, मैं चाहता हूँ कि उस लड़के की खोज जल्द से जल्द शुरू की जाए और मिलने पर हमें सूचित किया जाए। यह ध्यान रखा जाए कि वह जेनेटिक रिसर्च लैब के एक बहुत बड़े प्रयोग का हिस्सा है इसलिए उसपर जानलेवा प्रहार करके उसे नुकसान ना पहुँचाया जाए।
पाठक- ठीक है, मैं अभी से अपने आदमियों को उसकी खोजबीन में लगा देता हूँ।

इतना कहकर इंस्पेक्टर पाठक ने संपर्क काट दिया।

इब्रित- उसे कुछ होगा तो नहीं ना?
पीटर- वह यहाँ से बाहर पहली बार निकला है मिस्टर विकराल, उसने यहाँ रहते हुए भले ही कितनी भी चीजें सीखीं हों लेकिन सच तो ये है कि उसे बाहरी दुनिया में जीने का अनुभव नहीं है। उस पर खतरा हो भी सकता है और वह किसी के लिए खतरा बन भी सकता है।

हल्की बारिश शुरू हो चुकी थी लेकिन बिजली बहुत जोरों से कड़क रही थी, राजनगर के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर के बाहर बहुत से भिखारी कतार में बैठे हुए थे, कतार के आखिर में बैठे व्यक्ति ने अपने आप को शॉल से ढक रखा था जिसकी वजह से उसका चेहरा नहीं दिख रहा था। तभी वहाँ तीन चार पुलिसवाले पहुंचे, वो पूरे मंदिर का जायजा ले रहे थे तभी उनकी नज़र भी उस रहस्यमयी व्यक्ति पर पड़ी।
एक पुलिसवाला दूसरे से फुसफुसाकर बोला- “अबे यही तो नहीं है वो जिसकी तलाश है कमांडो फ़ोर्स को? जाकर चेक करना पड़ेगा।”

फिर सभी पुलिसवाले धीरे धीरे उस व्यक्ति की तरफ बढ़ने लगे, उनमें से सबसे आगे चल रहा पुलिस वाला उस व्यक्ति के पास पहुंचकर बोला- “पुलिस की रेगुलर चेकिंग चल रही है, अगर आप बुरा ना मानें तो क्या मैं आपकी शॉल हटा सकता हूँ?”

उस व्यक्ति की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। जैसे ही पुलिसवाले ने उसकी शॉल की तरफ हाथ बढ़ाया, उस व्यक्ति ने उसका हाथ पकड़ लिया, पकड़ इतनी मजबूत थी कि पुलिसवाला खुद को छुड़ा नहीं पा रहा था। तभी वह व्यक्ति उठा और पुलिसवाले को जोरदार पटखनी दे दी लेकिन इस प्रकरण में उसकी शॉल उसके शरीर से हट गई। बाकी सभी पुलिसवालों ने देखा कि वह एक बलिष्ठ युवक था जिसकी उम्र 25 से अधिक लग रही थी, उसने सिर्फ एक फटी पुरानी सी पैंट पहन रखी थी। उन सबके देखते देखते उसने एक बेहद ऊँची छलांग मारी और एक इमारत की छत पर जा खड़ा हुआ। वहाँ से वह एक से दूसरी इमारत की छत पर छलांग मार मारकर उस जगह से दूर निकल गया। सभी पुलिसवाले ये कारनामा देखकर दंग रह गए थे। उनमें से एक ने वायरलेस पर संदेश प्रसारित कर दिया।

“आल यूनिट्स अलर्ट! सब्जेक्ट अभी अभी हनुमान मंदिर की पश्चिमी दिशा से निकला है, वह इमारतों पर ऊँची-ऊँची छलांगें लगाकर आगे बढ़ रहा है, हमें जमीनी के साथ साथ हवाई मदद भी चाहिए होगी।”

पलक झपकते ही उस एरिया में गश्त लगा रहा एक पुलिस हेलीकॉप्टर भी वहाँ पहुँच गया। हेलीकॉप्टर की नज़र उस विलक्षण युवक पर पड़ चुकी थी और वह उसके पीछे लग गया था। उस युवक ने नीचे देखा तो पुलिस की तमाम गाड़ियों ने उस एरिया को पूरी तरह से घेर लिया था। हेलीकॉप्टर में बैठे पुलिसवाले ने लाउड स्पीकर का प्रयोग करते हुए कहा-
“हमें पता है कि तुम जेनेटिक रिसर्च लैब के टेस्ट सब्जेक्ट हो, खुद को हमारे हवाले कर दो और हम वायदा करते हैं कि तुमको कोई भी नुकसान नहीं पहुँचाएंगे। तुम्हारे इस तरह खुले घूमने से तुम्हारे साथ साथ आम नागरिकों को भी खतरा है, उम्मीद है कि तुम हमारी बात को समझोगे।”

वह युवक भी शायद समझ चुका था कि भागते रहने का कोई फायदा नहीं है, पुलिसवालों ने वह इलाका कुछ ही समय में पूरी तरह से घेर लिया था। उसने समर्पण के लिए हाथ ऊपर कर दिए लेकिन तभी उसे दूर से एक भयानक चिंघाड़ सुनाई दी। उसे ही नहीं बल्कि जितने पुलिसवाले उस क्षेत्र में थे, सभी को वह भयानक चिंघाड़ सुनाई दी। तभी उस युवक ने देखा कि एकदम से एक नौ दस फुट का भयावह प्राणी न जाने कहाँ से आया और उसे देखते ही पुलिस वालों में भयंकर भगदड़ मच गई। उसके जैसे कुछ और भयंकर प्राणी आ गए, कुछ देर पहले उसे पकड़ने आये पुलिस वालों के सामने अब एक नई मुसीबत प्रकट हो गयी थी। उन्होंने अपनी अपनी बंदूकों से फायर किया लेकिन वह प्राणी बेहद फुर्तीले थे, बंदूकों से निकली गोली उनको छू भी नहीं पा रही थी। एक प्राणी ने पुलिस जीप उठाकर चार पाँच एक साथ खड़े पुलिसवालों के ऊपर फेंक दी लेकिन इससे पहले की गाड़ी उन्हें कुचलती, वह युवक उछलता हुआ इमारत से नीचे कूदा और उस जीप को हवा में ही एक जोरदार लात मारी जिससे जीप दूसरी ओर जा गिरी। पुलिसवालों की जान में जान आ गयी, वह युवक तेज आवाज में बोला- “मुझे पता है कि आप मुझे वापिस उस जेनेटिक रिसर्च लैब में ले जाने आये हैं लेकिन फिलहाल हमें सामने आई मुसीबत पर ध्यान देना चाहिए, मैं कुछ ही समय पहले ऐसे एक प्राणी से भिड़ चुका हूँ।”
पुलिसवालों ने भी मूक सहमति दे दी, आखिरकार हालात तो यही बता रहे थे कि उन्हें उस युवक की मदद की सख्त जरूरत थी।
अब उन विचित्र जीवों का ध्यान उस युवक पर केंद्रित हो गया था। वह अपने पास खड़े दो पुलिसवालों से बोला- “अपनी अपनी रिवॉल्वर मुझे दो।”
एक पुलिसवाला बोला- “लेकिन फायदा क्या है? वे बहुत ज़्यादा ही फुर्तीले हैं।”
इस पर वह युवक बोला- “उनकी सारी फुर्ती धरी की धरी रह जायेगी, तुम अपनी रिवाल्वर दो, बहस का वक्त नहीं है।”

दो प्राणी उस युवक की तरफ बढ़ने लगे थे, वह युवक भी दोनों हाथों में रिवॉल्वर थामे आगे बढ़ने लगा। वह प्राणी उछलकर उस तक पहुँचे लेकिन तब तक वह युवक भी ज़मीन छोड़कर उछल चुका था, एक प्राणी के विशाल पंजे से बचते हुए उसका शरीर हवा में घूमता हुआ दूसरे प्राणी तक जा पहुंचा, उस प्राणी ने भी उस पर हमला करने की कोशिश की लेकिन उसकी मोटी भुजा को पकड़कर एक लंबी उछाल लेते हुए वह उसके कंधों पर जा बैठा। इससे पहले की वह प्राणी कुछ करता, दो रिवॉल्वर उसकी खोपड़ी से सट चुकी थीं, “बैंग बैंग” की तीखी आवाज़ के साथ दो गोलियां उसके सिर को भेदकर निकल चुकी थीं। यह देखकर दूसरा प्राणी और अधिक हिंसक हो उठा, वह गुस्से से उस युवक की तरफ बढ़ा लेकिन युवक आकार में उन प्राणियों से कम होने के कारण फुर्ती का अच्छा इस्तेमाल कर पा रहा था। उसने उछलकर हवा में ही अपने घुटने मोड़े और दोनों घुटने एकदम सटीक तरीके से उस प्राणी की छाती से टकरा गये, दर्द से बिलबिलाता प्राणी लड़खड़ाकर गिरने लगा लेकिन उसका सिर धरातल से टकराने से पहले ही उस युवक ने दो गोलियां उसके सिर के भी पार कर दीं। अब बाकी बचे प्राणियों का ध्यान भी तबाही मचाने से हटकर युवक पर ही केंद्रित हो गया। वे सब चारों दिशा से एक साथ उसकी तरफ बढ़ने लगे, युवक ने भी दोनों रिवाल्वर कसकर पकड़ लिए लेकिन तभी कहीं से तीव्र इंटेंसिटी वाली तीन लेजर बीम आयीं और उन बीमों ने आगे बढ़ते तीन जीवों के शरीर को निशाना बना लिया, वे जीव तुरंत ही राख में बदल गए। पुलिसवालों के साथ साथ उस युवक का ध्यान भी अपने मददगारों की ओर गया, कमांडो फ़ोर्स घटनास्थल पर पहुंच चुकी थी। करीम, पीटर और रेणु के हाथ में थीं वे विलक्षण बंदूकें जिन्होंने उन प्राणियों के शरीर को निशाना बनाया था।

करीम- अनीस रज़ा द्वारा बनाई गईं ये लेज़र गन्स वाकई कमाल की हैं।
रेणु- हां लेकिन ज़रा ध्यान से इस्तेमाल करना, अनीस जी ने बताया था कि ये सिर्फ टेस्ट मॉडल्स हैं इसलिए हमको नहीं पता कि इनके अंदर कितना चार्ज बाकी है।
पीटर- जितना चार्ज बाकी है वो इन सबके खात्मे के लिए काफी होना चाहिए।

एक बार फिर उनकी लेज़र गन्स गरज उठीं और वे भयानक प्राणी एक एक करके राख के ढेर में तब्दील होने लगे। प्राणी संख्या में ज़्यादा नहीं थे, वे कमांडो फ़ोर्स से भिड़ने के लिए आगे बढ़े लेकिन हाई इंटेंसिटी लेज़र बीम ने एक एक करके उनके विशाल शरीरों को राख के ढेर में बदल दिया। सभी पुलिस वाले कमांडो फ़ोर्स के वीरता भरे इस कृत्य पर तालियां बजाने लगे, वह युवक कमांडो फ़ोर्स के पास पहुंचा, वो उसे देखकर काफी हैरान थे।

करीम- यकीन नहीं होता कि तुम वही बच्चे हो जिसे हम कुछ वक्त पहले जेनेटिक रिसर्च लैब में छोड़कर आये थे। तुम तो अब एक पूरी तरह से विकसित वयस्क बन चुके हो लेकिन तुम लैब छोड़कर भागे क्यों?

यह बात सुनकर वह युवक गहरी सांस लेकर बोला- “मैं तंग आ गया था लैब के वातावरण से, ये सच है कि मुझे वहाँ लड़ने की कलाओं से लेकर अच्छी शिक्षा तक सब उपलब्ध करवाया गया लेकिन ये सभी चीजें भी बाहरी दुनिया को देखने की मेरी लालसा को मार नहीं पायीं। शरीरिक विकास से भी कहीं तेजी से मेरा मानसिक विकास हो रहा था, अब तक मैं समझ चुका था कि मेरी उम्र बेहद असामान्य तरीके से बढ़ रही है। धीरे-धीरे मुझे इन लोगों का काला सच पता चला, वे मेरी बढ़ती उम्र को लेकर कतई चिंतित नहीं थे बल्कि कठिन प्रशिक्षण देकर मेरी शारीरिक संरचना को और अच्छे से समझना चाहते थे ताकि वे मेरे जैसे और सुपर क्लोन्स बना सकें और सेना को सप्लाई करके मुनाफा कमा सकें। मेरी बढ़ती उम्र की रोकथाम करना कभी इनका मकसद था ही नहीं, वे बस मेरे जैसे और क्लोन्स बनाना चाहते थे, ये जानने के बाद भी मैंने अपना प्रशिक्षण नहीं छोड़ा लेकिन वहां से बाहर निकलने के मौके की तलाश करने लगा और मौका भी हाथ लगा जब इनके जैसे ही एक अजीब प्राणी ने लैब पर आक्रमण कर दिया। तब मुझे पहली बार अपनी असली शक्ति का अहसास हुआ। जिस बुलेटप्रूफ काँच के चैम्बर में मैं बंद था, उसे पूरी ताकत से तोड़ता हुआ बाहर निकलकर उस प्राणी से भिड़ गया और उसे हरा भी दिया लेकिन तब तक उसने लैब के अधिकतर वैज्ञानिकों को मार दिया था लेकिन उसकी ही बदौलत मैं उस कैद से आज़ाद हो चुका था। मैं तुरंत वहाँ से निकल गया, मैं तय कर चुका था कि बाहरी दुनिया में चाहे जैसे रहूँ लेकिन यहाँ वापस नहीं आना है।”
करीम गुस्से से दांत भींचते हुए बोला- “उफ्फ, तो ये है प्रतिष्ठित जेनेटिक रिसर्च लैब का घिनौना सच! अब तो मुझे लगता है कि ये भयानक प्राणी भी वहीं के वैज्ञानिकों की कारस्तानी हैं, उन्हीं के किसी भयानक प्रयोग का हिस्सा हैं।”
यह सुनकर वह युवक बोला- “ये जीव किसी प्रयोग का हिस्सा नहीं हैं, होते तो मुझे पता होता क्योंकि लैब के अंदर होने के कारण वहाँ चल रहे प्रयोगों की थोड़ी बहुत जानकारी मुझे भी थी। ये जीव क्या हैं और कहाँ से आये हैं, ये तो मुझे भी नहीं पता।”
तभी एक पुलिसवाला आसमान की ओर देखकर चिल्लाया- “एक मिनट! वो कौन है?”

सभी की नज़रें आसमान की तरफ उठ गयीं जहां एक बेहद वृद्ध सा दिखने वाला व्यक्ति आराम से हवा में तैर रहा था, उस व्यक्ति ने बड़ा ही अजीब सी बैंगनी रंग की पोशाक पहनी थी जिसके बीचोंबीच पीला चक्र बना हुआ था। काले घने आसमान में रह रहकर कड़कती बिजली के कारण कुछ क्षण होती रोशनी द्वारा ही उसका इतना स्वरूप समझ में आया। वह व्यक्ति बेहद आश्चर्यचकित लग रहा था, धीरे-धीरे वह धरती की तरफ बढ़ा, अब भी उसके पाँव धरती से कई फ़ीट ऊपर थे। पुलिसवालों ने अपनी बंदूकें और कमांडो फ़ोर्स ने लेज़र गन उस पर तान दी।

करीम ने गन ताने हुए ही पूछा- “कौन हो तुम? क्या चाहते हो?”
वह व्यक्ति उड़ता हुआ उनके और पास पहुँचा और हर एक चीज़ का अवलोकन करने लगा। कुछ क्षण के बाद वह चिंतन की मुद्रा में बोला- “आश्चर्य! घोर आश्चर्य! महाराक्षस चंडकाल ने तो कहा था कि बढ़ी हुई तामसिक ऊर्जा के कारण मानवता समाप्त हो जाएगी लेकिन ये तुच्छ मानव तो आज तक जीवित हैं, साथ ही साथ इनके बीच इस युग में भी कुछ ऐसे विलक्षण शक्तियों वाले मौजूद हैं जो मेरे शरीर में वास करने वाले प्राणियों को मात देने की क्षमता रखते हैं। यानी कि पाप क्षेत्र का निर्माण करने की युक्ति काम कर गयी थी, मानवता उस वक्त पाप के प्रकोप से बच गयी थी लेकिन कोई बात नहीं, अगर मैं स्वतंत्र हुआ हूँ तो बाकी लोग भी स्वतंत्र अवश्य हुए होंगे। देवताओं की सृष्टि को इस बार पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाएगा ताकि हम अपनी सृष्टि की रचना कर सकें।”

उसकी बातें सुनकर करीम और पीटर एक दूसरे की तरफ देखने लगे। करीम ने उसकी तरफ देखकर फिर से पूछा- “तुम हो कौन? ये क्या बहकी बहकी बातें कर रहे हो?”
उस व्यक्ति ने करीम की तरफ देखा और मुस्कुराकर बोला- “वाह! जो तुच्छ मानव कभी पापराज के नाम से थर-थर काँपा करते थे वो आज उससे प्रश्न करने का साहस कर रहे हैं, तुमको सबक सिखाना होगा।”

अचानक उस पापराज ने अपना मुँह खोला, देखते ही देखते उसका जबड़ा इतना बड़ा हो गया कि उसमें एक पूरा व्यक्ति समा जाए, उसके इस कारनामे को देखकर सबकी साँसें अटक गई थीं लेकिन गजब तो तब हुआ जब उसके फैले हुए मुँह में से ठीक वैसे ही प्राणी निकलने लगे जिनसे कुछ देर पहले कमांडो फ़ोर्स की भिड़ंत हुई थी।

करीम- सब लोग पीछे हटो! हम अपनी लेज़र गन द्वारा इस पापराज का और इसके मुंह से निकले प्राणियों का मुकाबला कर सकते हैं!

फिर एक के बाद एक पापराज के मुँह से निकलती राक्षस सेना की बाढ़ को लेज़र बीम राख के ढेर में बदलती चली गयी लेकिन राक्षस उसके मुँह से निकलते ही जा रहे थे।

रेणु- उफ्फ, करीम! मेरी गन का चार्ज खत्म होने जा रहा है।
करीम- यही हाल मेरी गन का भी है रेणु, इसके मुँह से तो राक्षस सेना निकलती ही चली जा रही है।
पीटर- लेकिन जब तक चार्ज खत्म ना हो जाये बंदूकें चलाते रहो, अगर मरना है तो लड़कर मरेंगे।

एक वक्त के बाद आखिरकार तीनों की बंदूकों का चार्ज खत्म हो गया था और राक्षस सेना की बाढ़ के रूप में मौत उनकी तरफ बढ़ ही रही थी कि तभी पापराज की सेना और कमांडो फ़ोर्स के बीच में हवा में एक गोलाकार द्वार बन गया जैसे ही कमांडो फ़ोर्स ने उस द्वार से निकली दो आकृतियों को देखा, उनकी खुशी का ठिकाना ना रहा। ध्रुव और धनंजय राजनगर में कदम रख चुके थे। धनंजय के कलाईबंद से विशुद्ध ऊर्जा निकली जिसने बड़ी बड़ी आरियों का आकार ले लिया, उन आरियों की मदद से धनंजय राक्षस प्राणियों को गाजर मूली की तरह काटता चला गया। धनंजय को देखकर पापराज सकते में आ गया था, उसका मुँह वापिस सामान्य हो गया और उसमें से प्राणी निकलना बंद हो गए।

पापराज (आश्चर्य से)- यह..यह तो स्वर्णनगरी के देव की पोशाक है, इसका मतलब स्वर्णनगरी भी अभी तक पृथ्वी पर है!

धनंजय अभी तक सारे राक्षस प्राणियों को काट चुका था, वह पापराज की तरफ मुड़कर बोला- “स्वर्णनगरी तो हमेशा ही पृथ्वी पर रहेगी दुष्ट लेकिन तुम पापियों को पाप क्षेत्र में ही कैद रहना चाहिए था, वहाँ कम से कम तुम्हारी जान तो बची रहती। बाहर इस दुनिया में तुम्हें मृत्यु के अतिरिक्त कुछ नहीं मिलेगा।”

इतना कहकर धनंजय पापराज की तरफ बढ़ा और उसे एक जोरदार मुक्का रसीद किया लेकिन अपने हाथ द्वारा पापराज को स्पर्श करते ही उसे एक जोरदार झटका महसूस हुआ। वह जमीन पर बैठ गया।

पापराज- हाहाहा, तूने पापराज की शक्तियों को कम आंक लिया है तुच्छ देव। मुझे सीधे स्पर्श करने की चेष्टा करने वाले की आत्मा पर आघात होता है लेकिन अब तेरी आत्मा पर कोई आघात नहीं होगा क्योंकि उसे मैं तेरे शरीर से जुदा कर दूंगा।

इतने कहते हुए पापराज ने बेबस धनंजय पर ऊर्जा वार करने की चेष्टा की लेकिन ध्रुव ने धनंजय को तेजी से पीछे खींच लिया जिसकी वजह से पापराज का ऊर्जा वार विफल हो गया। पुलिस वाले उस पर गोलियां बरसाने लगे लेकिन गोलियां उसके शरीर तक पहुंचने से पहले ही एक अदृश्य कवच से टकराकर नष्ट हो जा रहीं थी।

पापराज- ये लौह के छर्रे मुझे नुकसान अवश्य पहुँचा सकते हैं लेकिन मेरा कवच इनको मेरे आसपास फटकने तक नहीं देगा और कोई मनुष्य मेरे समीप आने की चेष्टा करेगा तो उसकी आत्मा पर भी गहरा आघात पहुँचेगा जैसे कि इस देव को पहुंचा। अब सब मरने के लिये तैयार हो जाओ।

इतना कहकर पापराज ने अपने हाथ फैलाये और देखते ही देखते वह सामान्य कद काठी वाले प्राणी से बीस फुट का भयंकर राक्षस बन गया जिसके गर्दन के ऊपर वाला हिस्सा एक अजगर की तरह था। वह सबकी जीवनलीला समाप्त करने आगे बढ़ा ही था कि तभी हवा में उछलता युवक उससे जाकर भिड़ गया।

पापराज- असंभव, मुझे प्रत्यक्ष रूप से स्पर्श करने वाले कि आत्मा पर चोट होती है, तू कैसे बच गया?

युवक ने जवाब दिया- “इसका उत्तर तो मुझे नहीं पता लेकिन अब तू मेरे हाथों से मरेगा!”

इतना कहकर युवक उसकी ओर बढ़ा लेकिन प्रचंड मुष्टि प्रहार ने उसे दूर उछाल दिया।

पापराज- मुझे नहीं पता कि तू मुझे कैसे स्पर्श कर पा रहा है लेकिन मेरा बाहुबल तुझसे कहीं अधिक है। तेरी इहलीला समाप्त करने में मुझे अधिक समय नहीं लगेगा।

उस युवक ने संभलते हुए मन ही मन सोचा- “यह सच कह रहा है, अपने इस रूप में यह अपने शरीर से उत्पन्न होने वाले प्राणियों से बहुत अधिक शक्तिशाली है जिन्हें मैंने कुछ समय पहले आसानी से हरा दिया था। इसका मुकाबला सावधानी से करना होगा।”

धनंजय को संभालते ध्रुव ने करीम से पूछा- “यह लड़का कौन है करीम? यह काफी विलक्षण मालूम होता है।”

करीम- यह वही लड़का है कैप्टेन, सुप्रीमो अहंकारी का अंश।
ध्रुव (बेहद आश्चर्य से)- क्या! यह इतना बड़ा हो गया!
करीम- इसकी उम्र तेजी से बढ़ रही है कैप्टेन, हालांकि इस बारे में हम बाद में बात कर सकते हैं। फिलहाल तो सामने समस्या पर ध्यान दें।

ध्रुव ने अर्धमूर्छित अवस्था वाले धनंजय से पूछा- “क्या तुम सूर्य तक पहुंचने वाले एक द्वार का निर्माण कर सकते हो धनंजय? यह पापराज लाख शक्तिशाली सही लेकिन इसके जिस्म को सूर्य जलाकर खाक कर देगा।”

धनंजय- उफ्फ, मुझे संभलने में वक्त लगेगा ध्रुव, इस अवस्था में मैं किसी द्वार का निर्माण नहीं कर सकता ध्रुव लेकिन एक रास्ता है।
ध्रुव- वो क्या?
धनंजय- यही की तुम मेरे कलाईबन्द पहनो जिनसे स्वर्णपाश संचालित होता है और उसके द्वारा अपने मनचाहे स्थान पर द्वार का निर्माण करो।
ध्रुव- क्या? मैं भला ऐसा करने की क्षमता कहाँ रखता हूँ?
धनंजय- सच कहूं तो पहले मुझे भी नहीं लगता था कि किसी मानव में स्वर्णपाश को संचालित करने की क्षमता होगी क्योंकि स्वर्णपाश को संचालित करने के लिए सत्य ऊर्जा के साथ साथ बेहिसाब इच्छाशक्ति भी चाहिए होती है लेकिन तुम्हारे साथ काम करने के बाद मानवों को लेकर मेरी धारणा बदल चुकी है, मैंने तुम्हें ऐसे असंभव हालात में संयम कायम करते देखा है जिसमें शायद हम देव भी पसीने छोड़ दें। मुझे तुम पर पूरा विश्वास है कि तुम स्वर्णपाश को संचालित कर सकोगे, बस जिस स्थान तक का द्वार खोलना है उस पर ध्यान केंद्रित करो और पूरी इच्छाशक्ति लगा दो।
ध्रुव- लेकिन मैं अब पुण्यात्मा नहीं रहा, मेरी नैतिकता का पतन वक्र की हत्या के साथ हो चुका है। क्या स्वर्णपाश मेरी सत्य ऊर्जा को स्वीकारेगा?
धनंजय- कोशिश करके क्यों नहीं देखते?

इसके बाद ध्रुव ने आगे धनंजय से बहस नहीं की क्योंकि समय कम था, उधर वह युवक भी पापराज के हाथों से पिट रहा था। ध्रुव में तुरंत धनंजय के हाथों से कलाईबन्द निकालकर खुद धारण कर लिए और स्वर्णपाश को हाथ में ले लिया। स्वर्णपाश को एक हाथ से आगे किया और मन ही मन कहा “हे स्वर्णपाश! मैं नहीं जानता कि मैं आपका संचालन करने के काबिल हूँ या नहीं लेकिन आज मेरा शहर एक बार फिर खतरे में है। पिछली बार मेरी गलती की वजह से पूरे शहर में तबाही मच गई थी लेकिन आज मेरे पास प्रायश्चित का मौका है, क्या आप प्रायश्चित करने में मेरी मदद करेंगे?”

अचानक ही ध्रुव के हाथों में थमा स्वर्णपाश चमक उठा और उसके हाथों से छूटकर हवा में गोल गोल घूमने लगा, ध्रुव मुस्कुरा दिया। उसने आंखें बंद कर लीं और पृथ्वी से सूर्य की दूरी की कल्पना की, स्वर्णपाश और तेजी से घूमने लगा। ध्रुव को इस वक्त बेहिसाब मानसिक शक्ति और इच्छाशक्ति की ज़रूरत थी, एक पल को इधर उधर भटकने वाले ध्यान की उसे भारी कीमत चुकानी पड़ सकती थी। अचानक ही तेजी से गोल घूमता स्वर्णपाश एक द्वार का निर्माण करने लगा जो कि अंतरिक्ष के निर्वात में जाकर खुलता था, सीधे सूर्य की सतह पर। द्वार ठीक पापराज के पीछे प्रकट हुआ था जिसने उस युवक को अपने विशाल पंजों में थाम रखा था, ध्रुव ने उस युवक को कुछ इशारा किया, वह समझ गया कि उसे क्या करना है। उसने पापराज को पूरी शक्ति से एक लात मारी जिससे वह पापराज के विशाल पंजों की कैद से आजाद हो गया, पापराज ने फिर से आगे बढ़ने की कोशिश की लेकिन द्वार के समीप होने के कारण अंतरिक्ष का निर्वात उसे खींच रहा था लेकिन वह उस खिंचाव का पर्याप्त विरोध कर पा रहा था। वह युवक दौड़ता हुआ पापराज के पास गया और उछलकर एक जोरदार लात उसके मुँह पर मारी, अब पापराज अधिक विरोध न कर सका और चीखता हुआ द्वार के उस पार जा गिरा। युवक भी तेजी से निर्वात में खींचने लगा लेकिन तब तक ध्रुव ने स्वर्णपाश को आदेश देकर द्वार को बंद करवा दिया, द्वार एक तेज चमक के साथ बंद हो गया। द्वार बंद होते ही पुलिसवालों और कमांडो फ़ोर्स की तालियों की गड़गड़ाहट से वातावरण गूँज उठा, एक बार फिर ध्रुव ने राजनगर को एक विषम संकट से बचा लिया था।
करीम, पीटर और रेणु दौड़कर गये और एक साथ ध्रुव के गले लगकर बोले- “आपने कर दिखाया कैप्टेन! आपने एक बार फिर से कर दिखाया!”

ध्रुव (हँसकर)- अरे भाई थोड़ा सांस तो लेने दो, इतने दिनों बाद यहां आना हुआ है।
रेणु- वैसे आप अपने मठाधीश वाले इस नए लुक में बेहद जंच रहे हैं।
ध्रुव- थैंक्स रेणु, मुझे लगा कि धोती और अंगवस्त्र थोड़ा ओल्ड फैशन हो गया होगा।
पीटर- आप तो जो पहन लो वही ट्रेंड बन जाता है कैप्टेन।
ध्रुव- ठीक है ठीक है, अब मस्का लगाना बंद करो।

तभी सबका ध्यान उस युवक पर गया जो धीरे धीरे उनकी तरफ बढ़ रहा था, ध्रुव उसके पास जाकर बोला- “जो तुमने किया वो बेहद काबिले तारीफ है, मैं तुम्हारे जन्म के वक्त सुप्रीमो अहंकारी के अड्डे पर ही था। मुझे खुशी है कि तुमने मानवता का साथ देने का निर्णय किया है।”

युवक (दुखी मन से)- इस पापराज से लड़ते वक्त मुझे एक बात स्पष्ट हो गयी, मुझे समझ में आ गया कि मेरी तेजी से बढ़ती उम्र का कारण क्या है?
ध्रुव- क्या?
युवक- यही की अप्राकृतिक जन्म के कारण मेरे अंदर उस ऊर्जा तत्व की कमी है जो मनुष्य के अस्तित्व का आधार है …..उसकी आत्मा! यही वजह है कि पापराज के स्पर्श मुझे आघात नहीं पहुँचा रहे थे क्योंकि आघात तो उसे पहुँचेगा ना जिसके अंदर आत्मा होगी। एक कृत्रिम मानव के अंदर भला आत्मा कैसे होगी?
ध्रुव (युवक के कंधे पर हाथ रखकर)- तुम कृत्रिम मानव ही सही लेकिन मानवता के हितैषी हो। तुम चिंता मत करो, मैं तुम्हारी उम्र की रोकथाम की हर संभव कोशिश करूंगा। वैसे तुम्हारा नाम क्या है?

इस बात पर युवक थोड़ा सोचकर बोला- “दरअसल मुझे कोई नाम ही नहीं दिया गया, ट्रेनिंग के चलते मेरा ध्यान भी कभी इस बात पर नहीं गया।”

करीम- इसमें इतना दिमाग लगाने वाली बात क्या है? तुम्हारे चैम्बर के बाहर लिखा तो था “प्रोजेक्ट सुपर इंडियन”, तो जब तक तुम्हें कोई ढंग का नाम नहीं मिल जाता, सुपर इंडियन से भी काम चल सकता है, शार्ट फॉर्म सुपी।

युवक मुस्कुराकर बोला- “मुझे ये नाम कभी पसंद नहीं आया लेकिन काम चलाने के लिए ठीक है।”

धनंजय- फिलहाल हमें पाप क्षेत्र से निकली मुसीबतों से निपटने पर ध्यान देना चाहिए।
करीम- ये पापराज भी कह रहा था कि वह किसी पाप क्षेत्र से स्वतंत्र होकर आया है, आखिर ये पाप क्षेत्र क्या है कैप्टेन?
ध्रुव- पाप क्षेत्र युगों से बंद वह आयाम द्वार है जिसके खुलते ही पूरी धरती एक भीषण संकट में आ चुकी है।

डोगा और शक्ति अभी भी उसी मंदिर में खड़े थे जहां कुछ देर पहले उन्होंने निशाचर जैसी भयानक मुसीबत को राख में मिलाया था।

डोगा- मैं अब उन लोगों के साथ काम नहीं कर सकता शक्ति।
शक्ति- लेकिन क्यों?
डोगा- क्योंकि अब वो नायक नहीं रहे, वे कभी नायक थे लेकिन अब वो सब खूनी हैं। नागराज ने स्टील को मार दिया शक्ति, आखिर इस घटना के बाद मैं उसके साथ काम करने की सोच भी कैसे सकता हूँ?
शक्ति- तुम्हें शायद मेरी बात बकवास लगे लेकिन मेरा मानना है कि नायकों के हाथों हुए अनैतिक कृत्य और पाप क्षेत्र के खुलने के पीछे अवश्य कोई संबंध है।
डोगा- क्या मतलब? क्या तुम ये कहना चाहती हो कि नायकों से खून किसी ने जानबूझकर करवाये हैं?
शक्ति- ज़रा सोचो डोगा, एक साथ इतने नायकों का पतन? यदि किसी एक या दो के हाथों हत्या हुई होती तो मैं फिर भी मान लेती लेकिन परमाणु, स्टील, ध्रुव और नागराज का पतन ये साबित करता है कि ज़रूर इसके पीछे कोई बाहरी शक्ति है।
डोगा- मेरा दिल भी यही मानना चाहता है लेकिन….. उफ्फ!

शक्ति ने देखा कि अचानक ही निशाचर की राख से कुछ ऊर्जा निकली और उसने डोगा के शरीर पर हमला कर दिया। उसके हमले से विचलित होकर डोगा धरती पर बैठ गया, शक्ति उसके पास पहुंची और उसके कंधे पर हाथ रखकर बोली- “क्या तुम ठीक हो डोगा?”
“हट जा लड़की!”- चिल्लाते हुए डोगा ने शक्ति को जबरदस्त धक्का दिया, शक्ति मंदिर से बाहर जा गिरी।
बाहर खड़े अदरक, काली, धनिया, हल्दी, चीता और लोमड़ी एकदम से चौंक गए।

लोमड़ी- शक्ति! तुम ठीक हो?
शक्ति- उफ्फ! इतना जबरदस्त बाहुबल एक आम आदमी में नहीं हो सकता, डोगा के शरीर पर ज़रूर किसी शैतानी शक्ति का साया है।

तभी डोगा मंदिर के बाहर आ गया, उसकी फूली हुई मांसपेशियां पोशाक में से भी दिख रही थीं। वह भयानक हँसी हँसता हुआ बोला- “हाहाहा! तूने मुझे लगभग खत्म कर ही दिया था शक्ति लेकिन निशाचर अपनी शक्ति के एक अंश से भी वापस जन्म ले सकता है, राख में मेरी पाप ऊर्जा का कुछ अंश बाकी था। डोगा के अंदर पाप और पुण्य दोनो प्रकार की ऊर्जा मौजूद है, पुण्य ऊर्जा थोड़ी अधिक है और पाप ऊर्जा कम लेकिन फिर से जाग उठने के लिए डोगा के रूप में मेरे पास आखिरी मौका था। मैंने बची खुची पाप ऊर्जा को डोगा के शरीर में प्रविष्ट करवा दिया, हालांकि इस प्रक्रिया में मैं खुद भी नष्ट हो सकता था लेकिन मेरे पास और कोई चारा नहीं था। ये दांव मैंने खेला और निशाचर एक बार फिर जाग उठा! इस बार मेरा कब्जा ऐसे शरीर पर है जिसमें सत्य ऊर्जा भी मौजूद है लेकिन धीरे-धीरे डोगा के जर्रे जर्रे पर हावी हो जाएगा निशाचर का अस्तित्व! तू मुझे एक पल में अपनी तीसरी आँख से भस्म कर सकती है लेकिन मुझे पता है कि तू ऐसा नहीं करेगी क्योंकि तू अपने हाथों से एक नायक की हत्या नहीं करेगी। तू प्रचंड उष्मा का प्रयोग भी नहीं करेगी क्योंकि इससे भी डोगा का शरीर झुलसेगा, अब देखता हूँ कि तू मुझे कैसे रोकती है? अब तेरे ही सामने निशाचर करेगा अपनी अँधेरे की दुनिया का प्रारम्भ और तू बस देख ही पाएगी।”

अदरक (चिल्लाकर)- तुझे तो हम रोकेंगे शैतानियत के पुतले!

अदरक के इतना कहते ही उनके साथ बाकी हल्दी, धनिया और काली भी डोगा की तरफ बढ़े। हल्दी ने छलांग मारकर पूरी ताकत से डोगा के शरीर को आगे धक्का दिया, आगे खड़े अदरक ने एक शक्तिशाली मुक्का रसीद किया। अदरक दूसरा मुक्का रसीद करने ही वाले थे कि डोगा ने उनका हाथ पकड़ा और घुमाकर बाकी तीनों पर फेंक दिया, अदरक के शक्तिशाली शरीर का भार वे तीनों संभाल नहीं पाए और गिर पड़े। चीता और लोमड़ी ने भी संयुक्त हमले का प्रयास किया लेकिन डोगा ने तेजी से एक ही हाथ मारकर उन दोनों को बेहोश कर दिया। शक्ति ने एक बड़े से लोहे के गेट को पिघलाया और डोगा के आसपास बड़ा सा लोहे का पिंजरा तैयार कर दिया।

शक्ति- जब तक तुझसे निपटने का तरीका नहीं मिल जाता, तू इसी पिंजरे में कैद रहेगा।
डोगा- तू वाकई मेरी ताकत को नहीं पहचान पा रही है, डोगा की हिंसक प्रवृत्ति के कारण मेरी पाप शक्ति हर पल इसके शरीर में द्विगुणित हो रही है जिसके कारण मेरी शक्ति बढ़ भी बढ़ रही है। देख मेरी बढ़ी हुई शक्तियों का एक नमूना।

शक्ति ने हैरानी से देखा कि कैसे डोगा ने पिंजरे की सलाखों को अपनी भुजाओं के जोर से मोड़ दिया और उसमें से बाहर आ गया। शक्ति को अब घातक वार करने के अलावा और कोई चारा नज़र नहीं आ रहा था, उसने अपनी मुट्ठी भींच ली, हाथों से उत्पन्न होती ऊष्मा प्रचंड होती गयी। डोगा और शक्ति दोनों एक दूसरे की ओर भागे लेकिन उनके टकराने से पहले ही डोगा से एक गदा जा टकराई, डोगा कई फ़ीट पीछे जाकर गिरा। शक्ति ने देखा कि उसके सामने खड़े हैं जंगल का जल्लाद भेड़िया और विश्वरक्षक नागराज! हालांकि शक्ति से नागराज की पिछली मुलाकात बहुत अच्छी नहीं रही थी इसलिए नागराज ने बिना नज़रें मिलाए हिचकते हुए पूछा- “क्या हो रहा है ये?”
शक्ति ने भी बेरुखी से जवाब दिया- “डोगा पर एक शैतान निशाचर का साया है, उसकी पाप ऊर्जा डोगा की पुण्य ऊर्जा को दबा रही है।”

भेड़िया- ओह, यानी कि पाप क्षेत्र से निकली एक और शक्ति!
शक्ति- तुम लोग पाप क्षेत्र के बारे में क्या जानते हो?
नागराज- उतना जितना जानने की ज़रूरत है, फिलहाल इससे निपटने के बारे में सोचना होगा।

तभी उन्होंने देखा कि डोगा वापिस तेजी से उनकी तरफ बढ़ रहा है, भेड़िया ने उस पर गदा का प्रहार करने की कोशिश की लेकिन डोगा के हाथ से निकली किरणें उसकी छाती से टकरायीं और वह पीछे गिरा।

शक्ति- ये क्या! अभी तक ये सिर्फ असाधारण बाहुबल का प्रदर्शन कर रहा था लेकिन अब इसकी और शक्तियां भी उजागर हो रही हैं यानी कि निशाचर धीरे-धीरे डोगा के सम्पूर्ण अस्तित्व पर कब्जा जमा रहा है।

भेड़िया वापिस उठा और डोगा को अपनी शक्तिशाली पूँछ में जकड़कर एक जोरदार पटखनी दी।

भेड़िया- बहुत हुआ! अब मैं तुझे दिखाऊंगा कि कौन है सबसे बड़ा जल्लाद!

भेड़िया पूँछ से जकड़े डोगा का समीप लाया, वह गदा का जोरदार वार करके उसकी हड्डियां चटकाने ही वाला था कि शक्ति चीखी- “रुक जाओ भेड़िया, उस पर जानलेवा हमला मत करो!”

भेड़िया का ध्यान शक्ति की आवाज़ पर चला गया, उसका ध्यान एक क्षण के लिए भटकते ही पूँछ की पकड़ में छटपटाते डोगा ने पूँछ को एक जोरदार झटका दिया जिससे भेड़िया एक झटके से उसकी तरफ खिंचता चला गया। उसके पास आते ही डोगा ने अपनी खोपड़ी से भेड़िया के चेहरे पर जोरदार वार किया, इस वार से भेड़िया को दिन में तारे नज़र आने लगे, उसकी नाक से खून बहने लगा और पूँछ की पकड़ ढीली पड़ गयी जिससे डोगा आराम से आज़ाद हो गया। शक्ति क्रोध से डोगा की तरफ बढ़ी लेकिन नागराज बीच में आ गया “रुको शक्ति! हम इसे सिर्फ अपनी शक्तियों से काबू करने का प्रयास करेंगे तो शायद हमें डोगा के अस्तित्व सके भी हाथ धोना पड़ सकता है लेकिन मेरे पास एक और तरीका है।”

इतना कहकर नागराज डोगा की तरफ बढ़ने लगा, एकदम डोगा के नज़दीक पहुंचकर बोला- “मैं जानता हूँ कि तुम मुझे सुन सकते हो डोगा, तुम एक नायक हो। मुझसे भी बेहतर नायक, शायद हम सबसे बेहतर। तुम भले ही ऐसा ना मानो लेकिन मैं ये मानता हूँ क्योंकि तुम्हारे मास्क के अंदर एक ऐसा इंसान छिपा है जो अपने उसूलों के लिए किसी से भी लड़ जाएगा शायद अपने आप से भी और आज तुम्हें अपने आप से ही लड़ना है डोगा।”
डोगा ने नागराज को एक जोरदार मुक्का रसीद किया जिससे नागराज हल्का सा पीछे खिसका, डोगा के कंठ से एक शैतानी आवाज़ आयी- “अब इस शरीर पर मेरा कब्ज़ा है मूर्ख मानव और तुम मानवों में इतनी इच्छाशक्ति नहीं कि निशाचर की शक्ति का सामना कर पाओ!”
नागराज और तेज़ आवाज़ में बोला- “मैं जानता हूँ कि तुम अंदर ही कहीं हो डोगा, तुम निशाचर सफल नहीं होने दे सकते!”
“मैंने कहा ना कि बकवास बंद कर!”- कहते हुए डोगा ने एक घूँसा और जड़ दिया, हर बार घूँसे की तीव्रता बढ़ती जा रही थी क्योंकि निशाचर डोगा के अस्तित्व पर हावी होने की पूरी चेष्टा कर रहा था।
नागराज डोगा का हर वार अपने शरीर पर झेल रहा था, शक्ति और भेड़िया नागराज पर हथौड़े की तरह पड़ते वारों से विचलित होकर आगे बढ़े लेकिन नागराज ने उन्हें रुकने का इशारा कर दिया। इस बार उसने पूरे आत्मविश्वास से डोगा की तरफ देखा और कहा- “तो क्या यही था रात का रक्षक डोगा! मुम्बई का बाप डोगा! जो पाप क्षेत्र से निकले एक तुच्छ प्राणी से हार गया वो मुम्बई की रक्षा क्या खाक करेगा!”

इस बार तेजी से नागराज की तरफ बढ़ता वार हवा में ही रुक गया, डोगा सड़क पर घुटने के बल बैठ गया, उसकी आँखों के आगे अंधेरा छाने लगा। जल्द ही उसके मन के किसी अंधेरे कोने में निशाचर अकेला खड़ा था, दूर दूर तक कोई नहीं था, निशाचर को समझ में नहीं आ रहा था कि ये आखिर वो एक पल में कहां पहुंच गया। वह चिल्लाया “कोई है!”
तभी उसे किसी के पदचापों की आवाज़ सुनाई दी, उसने मुड़कर देखा, अंधेरे में से सूरज निकलकर आया, उसकी आँखों में असीम क्रोध भरा हुआ था।

निशाचर- तू कौन है? मैं इस वक्त कहाँ हूँ?
सूरज- तू इस वक्त मेरे अंतर्मन में है, डोगा के अंतर्मन में।
निशाचर- ओह तो डोगा के नकाब के पीछे तेरा चेहरा है, अच्छा हुआ कि तू खुद मेरे सामने आ गया वरना तुझे मारने में मुझे बेकार मशक्कत करनी पड़ती। तुझे खत्म करके मैं तेरे शरीर का एकमात्र मालिक बन जाऊँगा।

इतना कहकर निशाचर उसकी तरफ बढ़ा लेकिन सूरज ने उसकी गर्दन को पकड़ लिया और उसकी तरफ क्रोध से देखते हुए बोला- “तू शायद भूल गया कि अभी मैंने क्या कहा, हम मेरे अंतर्मन में मौजूद हैं, यहाँ तेरी पाप शक्तियां और मेरी पुण्य शक्तियां किसी काम की नहीं। वही जीतेगा जिसकी इच्छाशक्ति दूसरे से ज़्यादा होगी।”

निशाचर पूरी शक्ति लगाकर सूरज की पकड़ से छूट गया, वह बोला- “अच्छा हुआ तूने मुझे ये बता दिया, सदियों तक पाप क्षेत्र में कैद रहने से मेरी इच्छाशक्ति कुछ ज़्यादा ही बढ़ गयी है।”

अब निशाचर और सूरज आमने सामने थे और उनकी खूबियाँ उनको नहीं बचा सकती थीं, बचा सकती थी तो सिर्फ मजबूत इच्छाशक्ति। अंतर्मन से बाहर वास्तविक दुनिया में भी इस जंग का असर दिख रहा था, डोगा का शरीर धरती पर पड़ा इधर उधर झटके खा रहा था। नागराज, भेड़िया और शक्ति आश्चर्य से उसे देख रहे थे।

शक्ति- ये तुमने क्या किया नागराज?
नागराज- मैंने सिर्फ अंदर छिपे डोगा को जगा दिया है लेकिन निशाचर की कैद से आज़ाद होने का काम उसे खुद ही करना होगा, इसमें उसकी मदद कोई नहीं कर सकता।

अब तक लोमड़ी को भी होश आ गया था, वह सड़क पर पड़े डोगा को तड़पते देख उसकी तरफ भागी। डोगा के पास बैठकर उसे सहलाते हुए उसने शक्ति की तरफ देखा, शक्ति बोली- “इस वक्त डोगा निशाचर से इस शरीर पर विजय पाने के लिए जंग लड़ रहा है, हमें नहीं पता कि जीत किसकी होगी।”

लोमड़ी बुरी तरह तड़पते डोगा की तरफ देखकर बोली “मेरी बात सुनो सूर.. मेरा मतलब डोगा! तुम्हारी जंग में मैं हमेशा तुम्हारे साथ थी और हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगी, मैं जानती हूँ कि तुम जीतोगे क्योंकि तुम्हारे साथ मेरे प्यार की ताकत है, आई लव यू!”

अंतर्मन के भीतर निशाचर से जूझ रहे सूरज के ऊपर तो जैसे इन शब्दों ने जादू का काम किया। उसके हाथों से अंगारे निकलने लगे, ये देखकर निशाचर सकते में आ गया।

निशाचर- य..ये क्या?
सूरज- इसे प्यार की शक्ति कहते हैं निशाचर, मैं तुझसे भिड़ते वक्त कुछ देर के लिए भूल गया था कि लड़ाई तो मेरे अंतर्मन में चल रही है और अंतर्मन में कुछ भी संभव है क्योंकि ये जंग पूरी तरह से इच्छाशक्ति पर निर्भर करती है, प्रेम की भावना ने मेरे अंदर की इच्छाशक्ति को दुगुना कर दिया है। अब उसी इच्छाशक्ति के बल पर मैं तुझे और तेरी पाप शक्ति को अपने शरीर से समाप्त करूँगा। अब निशाचर का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा, हमेशा हमेशा के लिए।

इतना कहकर सूरज के हाथों से निकल रहे भीषण अंगारे निशाचर से जा टकराये और वह चीख उठा लेकिन सूरज की इच्छाशक्ति के सामने वो अधिक देर टिक नहीं पाया। निशाचर का शरीर तो पहले ही राख हो चुका था और अब डोगा उर्फ सूरज के शरीर में मौजूद उसकी बची खुची पाप शक्ति भी खत्म हो गयी। आखिरकार डोगा ने तड़पना छोड़ दिया, उसकी साँसें संयमित हो गयीं और उसने वापिस अपनी आँखें खोलीं। उसका सिर लोमड़ी की गोद में था।

लोमड़ी- डोगा?
डोगा- हाँ मैं ही हूँ। निशाचर खत्म हो चुका है, हमेशा के लिए।

लोमड़ी अब अपने आँसू रोक ना पायी और डोगा से लिपटकर धीरे-धीरे सुबकने लगी, वह धीरे से डोगा के कान में बोली- “एक पल को लगा कि मैंने तुम्हें खो दिया है सूरज!”
डोगा भी हल्के से बोला- “तुम सात समंदर पार से भी पुकारोगी तो भी मैं चला आऊँगा, ऐसे सैकड़ों निशाचरों को रौंदते हुए।”
तभी उनका ध्यान पास खड़े नागराज, भेड़िया और शक्ति पर गया। डोगा खड़े होकर नागराज से बोला- “तुमने भी मेरी बहुत मदद की वरना शायद मेरा स्वतंत्र होना मुश्किल होता, वैसे तुम्हें ऐसा क्यों लगा कि निशाचर ऐसे काबू में आ जायेगा?”

नागराज (मुस्कुराकर)- कुछ समय पहले मैं भी एक ऐसी पाप शक्ति के चंगुल में फंस गया था जिसका नाम था ग्रहणों, यदि उस वक्त ध्रुव ने मेरी मदद ना की होती तो मैं कबका उसके चंगुल में फंसकर उसका गुलाम हो गया होता। तब मुझे समझ में आया कि ऐसी स्थिति में मनुष्य को दिया गया हौंसला ही उसे बचा सकता है क्योंकि मानवीय भावनाओं में बहुत अधिक शक्ति होती है। मैंने बस तुमको हौंसला दिया, तुम ऐसी स्थिति में थे जहाँ अपनी मदद खुद किये बिना तुम नहीं निकल सकते थे।
शक्ति- लेकिन तुम दोनों यहाँ क्या कर रहे हो नागराज और भेड़िया? पाप क्षेत्र के संदर्भ में तुम्हें कैसे पता है?
भेड़िया- सब बताते हैं, ज़रा साँस तो लेने दो।

विनय अपने फ्लैट में आराम कर रहा था कि तभी बाहर से उसे चीख पुकार की आवाज़ सुनाई दी, उसने खिड़की से झाँककर देखा, बाहर बड़ा ही अजीब नज़ारा था, गाडियाँ, बाइक या पैदल लोग बदहवास से भाग रहे थे। विनय को समझ में नहीं आया कि ये हुआ क्या, इतनी देर में उसे प्रोफेसर कमलकांत का फोन आया।

कमलकांत- विनय ये दृश्य तुम देख रहे हो? तुम्हारे इलाके के पास बड़ी ही अजीब घटना हो रही है।
विनय- लोग बदहवास से भाग रहे हैं, आखिर वजह क्या है?
कमलकांत- समझाना थोड़ा मुश्किल है, पुरातन कालीन वस्त्र यानी धोती और कवच पहना हुआ एक बीस फुट का व्यक्ति तबाही मचा रहा है। मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि ये आखिर हो क्या रहा है?
विनय (आँखें तरेरकर)- लेकिन मैं समझ पा रहा हूँ मामाजी, पाप क्षेत्र की शक्तियां पूरी दुनिया में फैल रही हैं। शक्ति ने मुझे आगाह किया था कि ऐसी कोई राक्षसी शक्ति दिल्ली पर भी हमला कर सकती है लेकिन परमाणु दिल्ली को इन पाप शक्तियों का गढ़ नहीं बनने देगा।

कुछ ही देर में दिल्ली के आसमान में परमाणु उड़ता नज़र आ रहा था। वह इधर-उधर देख रहा था कि तभी उसकी आँखें एक जगह आकर जम गयीं, जहां वह बीस फुट का व्यक्ति तबाही फैला रहा था, उसका तेज अट्टहास पूरे वातावरण में गूंज रहा था- “हाहाहा! तपनासुर के कहर से कोई नहीं बचेगा!”

तभी परमाणु गोली की रफ्तार से आया और तपनासुर के बड़े से चेहरे पर पूरी ताकत से मुक्का जड़ दिया, तपनासुर का तो बस थोड़ा सा सिर हिला लेकिन परमाणु को ऐसा लगा जैसे वह किसी फौलादी चट्टान से टकरा गया हो। तपनासुर परमाणु को ऐसे देखने लगा जैसे न जाने कौन सा अजूबा देख लिया हो।

तपनासुर- तू कैसा प्राणी है? क्या तू कोई यक्ष है, गंधर्व है या फिर कोई देवता?
परमाणु- मैं एक मनुष्य हूँ और यह मनुष्य ही तेरा काल बनने जा रहा है।
तपनासुर- आश्चर्य! अजीब वेशभूषा में उड़ता मनुष्य यानी कि उस युग में भी विलक्षण योद्धा हैं, मुझे लगता था कि अब ऐसे लोग मौजूद नहीं हैं।
परमाणु- ऐसे लोग भी मौजूद हैं और वे सभी तुम पाप क्षेत्र की आसुरी शक्तियों से भिड़ने का दम भी रखते हैं।
तपनासुर- हाहाहा! तुझे लगता है कि मैं पाप क्षेत्र में कैद सबसे भयंकर शक्ति हूँ, तुम मानवों को भान भी नहीं है कि पाप क्षेत्र में कैसे-कैसे प्राणी कैद हैं। उन प्राणियों का नाम तो हम जैसे असुरों की आत्मा को ही कंपाकर रख दे, देवतागणों तक में आतंक उत्पन्न कर देने वाली शक्तियां हैं पाप क्षेत्र में। एक बार द्वार पूर्ण खुल गया तब वे प्राणी स्वतंत्र हो जाएंगे और स्याह शक्तियां समूचे ब्रह्मांड को निगल लेंगी किन्तु मैं ये सब तुझे क्यों बता रहा हूँ? तेरे जैसे तुच्छ प्राणी के लिए तो मैं ही पर्याप्त हूँ!

इतना कहकर तपनासुर ने एक तेज़ फूँक मारी जिससे परमाणु धक्का खाकर धरती पर जा गिरा लेकिन वह जल्द ही संभल गया और वापिस उस असुर की तरफ बढ़ा। तपनासुर ने अपने विशाल मुक्के का प्रहार परमाणु पर करना चाहा लेकिन तब तक वह ट्रांसमिट हो गया और ठीक तपनासुर के पीछे प्रकट हो गया। बिना वक्त गंवाये अपनी छाती और ब्रेसलेट्स से परमाणु ने तपनासुर की पीठ पर तीव्र परमाणु छल्ले बरसाने शुरू किये, तपनासुर दर्द से चीख उठा।

तपनासुर- तुझे साधारण समझना मेरी भूल थी लेकिन तपनासुर एक ही गलती बार बार नहीं दोहराता, अब मैं भी खुलकर अपनी भीषण शक्तियों का प्रयोग करूँगा।

तपनासुर के हाथों से एक विचित्र धुआं निकलने लगा, वह धुआं जैसे ही परमाणु के नथुनों में घुसा उसको चक्कर आने लगा, अब उसके पास ट्रांसमिट होने का वक्त होने नहीं था। तपनासुर ने हाथ बढ़ाकर उसके शरीर को अपनी विशाल मुट्ठी में कैद कर लिया और भींचने लगा, तपनासुर की फौलादी मुट्ठी का कसाव बढ़ने से परमाणु की हड्डियां तक कड़कने लगीं। तभी तपनासुर को अपनी मुट्ठी में अकड़न महसूस हुई, जल्दी ही अकड़न एक सर्द अहसास में बदल गयी और जब ऐसा हुआ तो उसे परमाणु के शरीर को छोड़ना पड़ा। उसने मुड़कर देखा तो पाया कि एंथोनी उसके हाथ पर ठंडी आग छोड़ रहा था, परमाणु के अर्धबेहोशी की अवस्था में गिरते शरीर को अभय ने उछलकर बीच में ही थाम लिया। जैकब भी तपनासुर पर तंत्र ऊर्जा के वार करके एंथोनी का साथ देने लगा।

तपनासुर- उफ्फ, ये प्रेत तो बेहद शक्तिशाली मालूम होते हैं लेकिन तपनासुर ने भी अपनी शक्तियां कठोर तप से अर्जित की हैं, इनको तो मैं मक्खियों की तरह मसल दूंगा!

जैकब और एंथोनी तपनासुर से भिड़ रहे थे और तब तक अभय परमाणु को उसकी पहुंच से दूर ले गया था। परमाणु भी अब धीरे धीरे होश संभालने लगा था, जब उसे पूरी तरह होश आया तो वह एक इमारत से टिककर बैठा था और उसके सामने नीला नकाब और नीली धोती पहने एक व्यक्ति खड़ा था।

परमाणु- मुझे बचाने का शुक्रिया, पर तुम हो कौन?
अभय- इस नए रूप में तुम शायद मुझे पहचान नहीं पाए, मैं तिरंगा।
परमाणु- तिरंगा! तुम्हारी कॉस्ट्यूम को क्या हुआ?
अभय- लंबी कहानी है, इस राक्षस से निपटने के बाद बताऊँगा।

तभी परमाणु ने देखा कि तपनासुर से एंथोनी और जैकब भिड़े हुए हैं।

परमाणु- ये तो वही मुर्दा है ना जिसने हरू युद्ध के दौरान हमारा साथ दिया था, क्या नाम था इसका? हाँ एंथोनी!
अभय- हाँ ये एंथोनी है और दूसरा है प्रेत जैकब जो तांत्रिक इरी के साथ रहता है।
परमाणु- तुम इस प्रेत मंडली के साथ क्या कर रहे हो? क्या इसका संबंध पाप क्षेत्र से है?
अभय- ओह! तो तुमको भी पाप क्षेत्र के बारे में पता चल गया।
परमाणु- तुम शायद भूल रहे हो कि दिल्ली में शक्ति भी ऑपरेट करती है जो कि इन सब मामलों की जानकारी रखती है। उसी से मुझे पाप क्षेत्र के बारे में पता चला।
अभय- अच्छा है, तुम्हें समझाने की मेहनत बच गयी। चलो अब इस असुर को हराने पर ध्यान केंद्रित करें।

एंथोनी और जैकब अभी तक तपनासुर से जूझ रहे थे, अचानक उसने अपना मुँह खोला जिसमें से दो बड़े बड़े चक्र निकलकर एंथोनी और जैकब को तरफ बढ़ चले।

एंथोनी- उफ्फ! ये चक्र हमारे मुर्दा शरीरों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, इनसे बचना होगा।

जैकब और एंथोनी चक्र से बचने के प्रयास में इधर उधर हट गए लेकिन चक्र ने उनका पीछा नहीं छोड़ा।

जैकब- इनसे बचने का प्रयास तो बेकार जा रहा है एंथोनी, ये तो हमारे पीछे पीछे आ रहे हैं।
तपनासुर- ये चक्र तुम्हारे निर्जीव शरीरों का काटकर ही दम लेंगे और उसके बाद तुम्हारी आत्माओं भी तड़पाउंगा मैं, हाहाहा!
एंथोनी- तूने अभी मेरी शक्ति को ठीक से आंका नहीं है तपनासुर वरना तू अति आत्मविश्वास दर्शाने से बचता।

एंथोनी जैकब को लेकर उड़ता हुआ ठीक तपनासुर के कन्धे के निकट आ पहुँचा और चक्र भी बहुत तेजी से उनके पीछे पीछे आ गए, इससे पहले तपनासुर कुछ समझ पाता, दोनों चक्रों के एकदम समीप पहुंचते ही एंथोनी जैकब को लेकर दूर टेलीपोर्ट हो गया और “खच” की आवाज़ के साथ विशाल चक्रों ने तपनासुर की गर्दन को ही धड़ से जुदा कर दिया। उसकी गर्दन धड़ से कटते ही दोनों चक्र भी गायब हो गए। तब तक अभय और परमाणु भी वहां पहुंच गए, चारों ने देखा कि तपनासुर का विशाल शरीर गर्दन कटने के बाद चारों तरफ लहरा रहा था। उन्हें उम्मीद थी कि निर्जीव शरीर जल्द ही नीचे गिरेगा लेकिन हुआ कुछ और जिसने उन चारों को चौंकने पर मजबूर कर दिया, तपनासुर के धड़ ने धरती से अपना कटा हुआ सिर उठाया और वापस गर्दन पर जोड़ लिया। एक बार फिर भयानक अट्टहास करता तपनासुर जीवित हो उठा था।

तपनासुर- हाहाहा! तपनासुर के रक्त में अमृत मौजूद है मूर्खों! इतनी आसानी से खत्म नहीं हो सकता मैं!
एंथोनी- तो फिर मैं तेरे रक्त को ही जमा दूंगा।

इतना कहकर एंथोनी ने पूरी ताकत से भीषण ठंडी आग का वार तपनासुर पर किया जिससे तपनासुर बुरी तरह विचलित हो उठा, वह चिल्लाया “आह! तेरी शक्तियां विलक्षण हैं, मुझे तेरे वारों में नारकाग्नि के तेज का आभास हो रहा है, साधारण अग्नि में इतनी क्षमता कहाँ जो तपनासुर को विचलित कर सके लेकिन तपनासुर भी कोई मामूली असुर नहीं। युगों पहले मैं महाराक्षस चंडकाल का सेनाध्यक्ष हुआ करता था, तामसिक शक्तियां देवताओं को चुनौती देकर इस सृष्टि को नष्ट करके अपना राज कायम करना चाहती थीं और पाप क्षेत्र से स्वतंत्र होने के बाद भी मेरा उद्देश्य वही है, देखता हूँ कि मुझे कौन रोकता है!”

इतना कहने के बाद तपनासुर की आँखों से भयंकर किरणें निकलीं जिन्होंने धरती पर खड़े एंथोनी, जैकब, अभय और परमाणु को निशाना बनाया, एंथोनी बाकी तीनों को लेकर सही समय पर वहां से टेलीपोर्ट हो गया लेकिन सड़क किरणों के प्रहार से दो भाग में बंट गयी। तपनासुर अपने दोनों हाथों से भरपूर ताकत से वार करके आसपास की इमारतों को गिराने लगा।

तपनासुर- हाहाहा! तुम मानव मेरा सामना नहीं कर सकते, अब वक्त है कि तुम मेरे सामने घुटने टेक दो।

तपनासुर से काफी दूर टेलीपोर्ट हुए चारों नायक दिल्ली को तबाह होता देख रहे थे। परमाणु कसमसाकर जाने लगा लेकिन अभय ने उसके कन्धे पर हाथ रखकर उसे रोका।

अभय- कहाँ जा रहे हो परमाणु?
परमाणु- वो राक्षस भले ही कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, मैं उसे अपनी दिल्ली में ऐसे तबाही मचाने नहीं दे सकता।
जैकब- तो क्या तुम उससे सीधी टक्कर लोगे?
परमाणु- और क्या चारा है?
अभय- ज़रा सोच विचार से काम लो परमाणु, वह राक्षस हम चारों पर भारी पड़ गया। हम उसे कितनी भी बार खत्म कर लें लेकिन उसके शरीर के अंदर का अमृत उसे फिर से जीवित कर देगा, हमें उसके अमृत का कुछ उपाय खोजना होगा।

यह सुनकर परमाणु कुछ सोचने लगा।

अभय- किस सोच में पड़ गए परमाणु?
परमाणु- कुछ दिन पहले मैंने एक आतंकी हमले को रोका था, आतंकवादी संसद भवन को उड़ाने को तैयारी के साथ आये थे। उनके पास एक “हीलियम बम” था जो कि अधिक गर्मी पाकर फट सकता था, उस हीलियम बम में आसपास के तीन किलोमीटर के रेडियस में लोगों के चिथड़े उड़ाने की शक्ति तो थी ही लेकिन साथ ही साथ उसके असर से पानी भी भाप में बदल जाता। जो बम इतनी गर्मी पैदा करने की क्षमता रखता है, क्या वो इस असुर के रक्त को नहीं सूखा सकेगा? रक्त के साथ साथ रक्त में समाहित अमृत भी सूख जाएगा। उसका मैकेनिज्म भी बहुत सिंपल है, बस नॉब घुमाओ और बम फटने के लिए तैयार।
अभय- वाह! ये प्लान तो अच्छा है, फिलहाल वो बम कहाँ है?
परमाणु- प्रोफेसर कमलकांत की लैब में, वे बम की क्षमता को उत्पादक बनाने के लिए उस पर कुछ टेस्ट कर रहे थे। मैं वहां जाकर बम को लेकर आ सकता हूँ।
अभय- ठीक है! तुम बम लेकर आओ, तब तक हम लोग इस आफत को रोकने का प्रयास करते हैं।

परमाणु प्रोफेसर कमलकांत की लैब की तरफ उड़ चला और बाकी लोग वापस तपनासुर की ओर बढ़े।

अभय- अब हम इससे अपने अपने तरीके से नहीं भिड़ सकते, शत्रु जब ज़्यादा शक्तिशाली हो तो स्ट्रेटेजी बनाकर लड़ने में ही भलाई है।
एंथोनी- तुम सही कह रहे हो, हमें शक्तियों के साथ साथ सोच समझ को भी काम में लाना होगा।

तपनासुर तबाही मचाने में मशगूल हो गया था कि तभी अभय एंथोनी के साथ अचानक से टेलीपोर्ट होकर उसके सामने प्रकट हुआ और ढाल का जोरदार वार उसके चेहरे पर कर दिया। ढाल के कटर्स उसके चेहरे पर गहरी खरोंच मार गये लेकिन इससे पहले की वह कुछ कर पाता, एंथोनी और तिरंगा टेलीपोर्ट होकर गायब हो गए। तभी अचानक उस पर किसी ने जोरदार मुक्के का प्रहार किया, उसने देखा कि सामने प्रेत जैकब अपने भयंकर प्रेत रूप में खड़ा है। वह प्रेत रूप तपनासुर के शरीर जितना ही बड़ा था।

जैकब- मैं इस शक्ति का प्रयोग करना तो नहीं चाहता था क्योंकि इसके कारण मेरी तांत्रिक ऊर्जा का तेजी से क्षरण होता है और मैं फिर कुछ समय के लिए शक्तिहीन हो जाता हूँ लेकिन तूने मुझे विशालकाय रूप धारण करने पर मजबूर कर ही दिया।

इतना कहकर जैकब ने उसको एक और घूँसा जड़ना चाहा लेकिन तपनासुर ने उसका हाथ बीच में ही रोक लिया “हाहाहा! तेरे जैसा साधारण प्रेत अगर तपनासुर को पराजित कर सके तो मैं महाराक्षस चंडकाल का सेनाध्यक्ष कहलाने के योग्य नहीं।”

जैकब को भी क्रोध आ गया, अब दो विशालकाय शरीरों के बीच भीषण मल्लयुद्ध आरम्भ हो गया। उधर एंथोनी में भी पूरी ताकत के साथ ठंडी आग का प्रयोग तपनासुर के शरीर पर किया, इस दोहरे वार से तपनासुर चीखकर गिर पड़ा।

अभय- वाह! योजना काम कर रही है! ऐसे हम इसे काफी देर तक रोक सकते हैं और उतनी देर में परमाणु हीलियम बम लेकर आ जायेगा जिससे इसका समूल नाश निश्चित है।

तभी उन्होंने देखा कि बेबस होता तपनासुर सम्पूर्ण इच्छाशक्ति लगाकर वापस उठ रहा है, वह बोला- “मुझे निम्न आंककर तुम लोग बहुत बड़ी मूर्खता कर रहे हो, अब तो मैं तुम सबको पराजित करके ही रहूंगा, इस कार्य हेतु चाहे मुझे अपनी शक्ति का तृण तृण ही क्यों न खर्चना पड़े।”

जैकब- पाप शक्तियों के प्रति तुम्हारी निष्ठा कमाल की है तपनासुर, तुम हमारे शत्रु ज़रूर हो लेकिन फिर भी तुम्हारी प्रशंसा करने का जी चाह रहा है लेकिन सच यही है कि यदि सृष्टि को बचाना है तो तुझे और तुझ जैसों को समाप्त करना ही होगा।

इतना कहकर जैकब फिर से वार करने के लिए आगे बढ़ा लेकिन तब तक तपनासुर के दोनों हाथ बड़े बड़े ऑक्टोपस जैसी भुजाओं में तब्दील हो गए थे। उसने दोनों विशाल भुजाओं से जैकब को जकड़ लिया, जैकब पूरी ताकत लगाकर भी उन भुजाओं से छूट नहीं पा रहा था। एंथोनी ने फिर से ठंडी आग का वार करना चाहा लेकिन उतनी देर में तपनासुर का सिर घूमा और उसने अपने नेत्रों से भीषण किरण वार अभय और एंथोनी पर किया। वार इतना अप्रत्याशित था कि एंथोनी को टेलीपोर्ट होने तक का मौका नहीं मिला। अगर अभय उस वक्त अपनी ढाल को आगे ना करता तो शायद उसका शरीर राख में बदल जाता। किरण वार उसकी ढाल से टकराया और वह ढाल समेत बीसियों गज दूर एक खंडहर हो चुके घर में जाकर गिरा, वह इतनी बुरी तरह गिरा था कि उसकी टांगें, घुटने सब छिल गये थे, मुँह से और माथे से भी हल्का रक्त बहने लगा था। एंथोनी का मुर्दा शरीर भी उस किरण वार को झेल नहीं सका और वह राख के ढेर में तब्दील हो गया।

तपनासुर- हाहाहा! तेरे साथी तो गये अब बस तू बाकी है!

जैकब को अब तक अच्छा खासा क्रोध आ चुका था, क्रोध की अधिकता के कारण उसके शरीर में मौजूद तंत्र ऊर्जा बहुत अधिक तीव्र हो गयी और उसके पूरे शरीर के आसपास एक तंत्र कवच सा बन गया, तपनासुर की भुजाएं भी उसे अधिक देर तक थामीं ना रख सकीं। तभी जैकब के कानों में परमाणु की आवाज़ पड़ी “जैकब! मैं हीलियम बम लेकर आ गया!”

जैकब ने देखा कि परमाणु के हाथ में एक सिलेंडर के आकार का बड़ा सा बम था, जैकब तपनासुर से जूझते हुए बोला “मैं अपनी सम्पूर्ण तंत्र शक्ति का प्रयोग करके इसको आसमान में लेकर जाता हूँ, अगर यह बम यहां फटा तो भीषण तबाही मचा देगा!”

इससे पहले की तपनासुर कुछ सोच समझ पाता जैकब उसे पकड़कर आसमान की ओर कूच कर गया, तपनासुर को थामे रखने में उसे अपनी शक्ति का एक एक कतरा लगाना पड़ रहा था। परमाणु भी बम लेकर उसके साथ तेजी से उड़ रहा था।

जैकब- उफ्फ! मेरी तंत्र ऊर्जा का तेजी से क्षरण हो रहा है परमाणु, कुछ ही क्षणों बाद मैं अपने सामान्य रूप में आ जाऊंगा इसलिए ईश्वर करे कि तुम्हारी ये योजना सफल हो!

तपनासुर जैकब की पकड़ से छूटने का पूरा प्रयास कर रहा था लेकिन मजबूत पकड़ और तेज हवा का वेग उसे कुछ सोचने समझने का मौका ही नहीं दे रहे थे, लेकिन अपना सम्पूर्ण बल लगाने पर वह आखिरकार जैकब की कैद से आज़ाद हो ही गया।

तपनासुर- हाहाहा! मैं तो तेरी पकड़ से स्वतंत्र हो गया, तुम्हारे बाकी दोनों साथियों की तरह अब तुम भी मृत्यु को प्राप्त हो जाओगे!
जैकब- तू शायद भूल रहा है कि तू अब आसमान की एक निश्चित ऊँचाई पर है।
तपनासुर- हाँ, तो क्या हुआ?
जैकब (परमाणु की तरफ मुड़कर)- परमाणु! हमला करो!

बिना देरी किये परमाणु ने बम के ऊपर लगा नॉब खोला और तेजी से तपनासुर की ओर फेंक दिया, इससे पहले की तपनासुर कुछ समझ पाता, एक भीषण विस्फोट हुआ। परमाणु और जैकब ने तीव्रता से उड़ने की कोशिश की लेकिन उस बम की रेंज बहुत ज़्यादा थी जिससे कुछ लपटें उनके शरीर को भी स्पर्श कर गयीं। दोनों लोग गिरते पड़ते धरती पर आ गए, जैकब अपना विशालकाय प्रेत रूप छोड़ चुका था। परमाणु की पोशाक जगह जगह से कट फट चुकी थी, उन दोनों ने देखा कि एंथोनी धरती पर खड़ा मुस्कुराता हुआ उनका इंतजार कर रहा था।

एंथोनी- तुम लोग तो बहुत बुरी अवस्था में वापस लौटे हो, मैं बम को और तपनासुर को चुटकियों में आसमान तक टेलीपोर्ट करके वापिस भी आ जाता।
जैकब- हाँ, बस समस्या ये थी कि उसने तुम्हारे शरीर को राख में बदल दिया था और जब तक हम उसको जान से नहीं मारते, तुम वापस सामान्य नहीं हो पाते।

परमाणु का ध्यान उनकी बातों पर था ही नहीं, वह इधर उधर देख रहा था। उसने एंथोनी से पूछा- “तुमने तिरंगा को कहीं देखा है?”

एंथोनी- तिरंगा? अच्छा तुम अंगरक्षक अभय की बात कर रहे हो क्या? उसे और मुझे भीषण किरणों का वार लगा था उसके बाद तो मैं राख से अभी प्रकट हुआ हूँ।

“अभय” नाम सुनकर परमाणु थोड़ा चौंक गया, उसने बिना देर किए अपने मास्क में लगा लाइफ फॉर्म डिटेक्टर ऑन किया जो कि जीवित व्यक्ति की तरंगें पकड़ लेता था। उसके मास्क में से एक छोटी सी मॉनिटर स्क्रीन निकलकर उसकी आँखों के सामने आ गयी।

एंथोनी- तुम क्या कर रहे हो?
परमाणु- आसपास किसी जीवित व्यक्ति को तलाश करने का प्रयास कर रहा हूँ। चिंता मत करो, तुम लोग मुर्दे हो इसलिए यह स्कैनर तुम्हारी तरंगें नहीं पकड़ेगा।

तभी अचानक उस छोटी सी स्क्रीन पर लिखा आया “वन लाइफ फॉर्म डिटेक्टेड।”

पास ही एक पुराने खंडहरनुमा मकान से यह जीवन तरंगें आ रही थीं, परमाणु बिना देर लिए उड़ता हुआ उस मकान में घुस गया। वहाँ अभय बेहद घायल अवस्था में धरती पर बेहोश पड़ा था। उसका शरीर जगह जगह से घायल तो था ही, साथ में उसका नीला नकाब आधा फट चुका था। परमाणु ने तुरंत उसके पास जाकर उसके नकाब को झट से उतार दिया, नकाब उतारते ही उसके आश्चर्य की सीमा ना रही, उसके सामने एक जाना पहचाना चेहरा था। वह अपनी आँखों पर यकीन नहीं कर पा रहा था कि ये “वही” है। परमाणु के पीछे पीछे जैकब और एंथोनी भी उस खंडहरनुमा मकान के अंदर आ गए।

परमाणु- ये बहुत घायल है, इसका इलाज करवाना होगा।
एंथोनी- लेकिन क्या इसे अस्पताल ले जाने में इसकी गुप्त पहचान खुलने का खतरा नहीं होगा?
परमाणु- तो मैं इसे लैब ले जाऊंगा, प्रोफेसर कमलकांत के पास ऐसे एडवांस्ड उपकरण हैं जो इसकी अवस्था को सुधारने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
जैकब- ठीक है तो फिर हम भी चलते हैं तुम्हारे साथ।

फिर परमाणु अभय को लेकर लैब की ओर तेजी से उड़ चला, उसके पीछे पीछे एंथोनी और जैकब भी थे।

बेहोशी की दुनिया के सफर के बाद जब धीरे धीरे अभय की आँखें खुली तो उसने खुद को एक लैब में पाया, वह धीरे धीरे उठा और अपने शरीर की ओर देखा, वह इस वक्त मरहमपट्टी की दुकान लग रहा था। फिर उसने अपने चेहरे को छूकर देखा, उसका मास्क गायब था। तभी उसके कमरे में परमाणु, जैकब, एंथोनी और प्रोफेसर कमलकांत ने प्रवेश किया।

परमाणु- कैसे हो तिरंगा उर्फ अभय?
अभय (गहरी सांस लेकर)- ठीक ही हूँ, मेरे यहाँ होने का अर्थ ये हुआ कि तुम लोग तपनासुर नाम की आफत से निपट चुके हो।
परमाणु- हाँ वो तो है। क्या तुम्हें चिंता नहीं कि तुम्हारी गुप्त पहचान मुझ पर जाहिर हो गयी है?
अभय (हल्के से मुस्कुराकर)- गुप्त पहचान की चिंता तो मैंने तभी छोड़ दी थी जब इस वस्त्र को वापिस अपने शरीर और धारण करने का सोचा था।
परमाणु- तुमको एक कहानी सुनाता हूँ। मेरी क्लास में एक लड़का था जो मेरा सबसे अच्छा दोस्त था, मैं उसे अपनी हर बात बताता था और वह मुझे लेकिन एक दिन स्कूल में एक आतंकवादी हमला हुआ और एक आतंकी उसे उठाकर ले गया, उसके बाद से मुझे उस दोस्त की कोई खबर नहीं थी। जब मैंने एंथोनी के मुंह से तुम्हारा वास्तविक नाम “अभय” सुना और जब तुम्हारा मास्क हटाकर देखा तो मुझे उसी दोस्त का चेहरा नज़र आया लेकिन मैंने सोचा कि क्यों न एक छोटा डीएनए टेस्ट लिया जाए। यहाँ इस लैब में प्रोफेसर की कृपा से ऐसे उपकरण मौजूद हैं जिससे आज के किसी व्यक्ति के बाल, खून या फिंगरप्रिंट लेकर उसे बीस या तीस साल पुराने दिल्ली के नागरिकों के रिकार्ड्स से मैच किया जा सकता है। कंप्यूटर में तुम्हारी इनफार्मेशन थी इसलिए तुम्हारे फिंगरप्रिंट मैच करवा पाना कोई बड़ी बात नहीं थी। फिंगरप्रिंट मैच होते ही मेरे शक की पुष्टि हो गयी, स्कूल में मुझसे बिछड़ा मेरा दोस्त आज मेरे सामने आया है। आज नहीं बल्कि पिछले कुछ वर्षों से मेरे साथ दिल्ली की सुरक्षा के अभियान में लगा था लेकिन मैं कभी उसे पहचान ही नहीं पाया।

इतना कहकर परमाणु की आँखों से आँसू बहने लगे, अभय ये सुनकर तो जैसे सदमे में ही पहुंच गया था। वह फटी फटी आँखों से परमाणु की ओर देखते हुए बोला “विनय! परमाणु तू है विनय?”

“हां, मैं हूँ परमाणु!” इतना कहकर विनय ने अपना मास्क उतार दिया, अभय बुरी तरह चौंक गया, हालांकि अब वे लोग बड़े हो गए थे लेकिन आखिर कोई बचपन के साथी को कैसे नहीं पहचान सकता। अभय भी भावुक हो गया, वह भरे गले से बोला “जिंदगी भी कैसे कैसे खेल रचती है, दो जिगरी दोस्त इतने समय से एक दूसरे के सामने थे लेकिन दोनों को ही कोई खबर नहीं।”

विनय आँसू पोंछते हुए बोला- “लेकिन तुम्हें शेर खान लेकर कहाँ गया था और तुम वापिस तिरंगा बनकर कैसे लौटे? अब तुम इस अवतार में क्यों हो?”

अभय- सब बताता हूँ दोस्त, थोड़ा दम तो लेने दे। इतने सालों बाद मुझे मेरा दोस्त वापिस मिला है, सब बातें आराम से होंगी अब।

एंथोनी और जैकब एक किनारे खड़े उनकी बातें सुन रहे थे।

जैकब- वाह, ये तो लंगोटिया यार निकले।
एंथोनी- लेकिन अच्छा है ये। इतने भयानक युद्ध के मध्य ऐसे हल्के फुल्के क्षण नहीं मिलते तो बड़े से बड़े योद्धा का मनोबल डगमगाने लगता है और अब जो महासंग्राम होने वाला है, उसके लिए हम सबको तैयार रहना होगा। इसके लिये सबसे पहला कदम यही है कि बिखरे हुए रक्षक फिर से जुड़ें, एक बार फिर से हो ब्रह्मांड रक्षकों का पुनर्स्थापन।

शहर से दूर कहीं किसी पहाड़ी इलाके पर किसी का शैतानी अट्टाहास गूँज रहा था, ये अग्रज था जो वेदाचार्य के साथ एक गोल घेरे में खड़ा था। वह घेरा अग्नि द्वारा निर्मित था जिसके अंदर वे अपनी तंत्र और तिलिस्म शक्तियों को मिलाकर चंडकाल के मस्तिष्क में आरोपित सूक्ष्म यंत्र को निकालने का प्रयास कर रहे थे जिसे युगों पूर्व भोकाल द्वारा आरोपित किया गया था। कई घंटों की मेहनत के बाद वेदाचार्य ने अपनी तिलिस्मी शक्ति की मदद से उस बेहद सूक्ष्म यंत्र की सही स्थिति को भांपा और अग्रज की तंत्र शक्तियों ने उसे बाहर निकाल फेंका।

अग्रज- हाहाहा! इस बार आखिरकार मैं सफल हो ही गया! एक बार फिर जागेगा चंडकाल!

यंत्र के मस्तिष्क से बाहर निकलते ही चंडकाल ने धीरे धीरे आँखें खोलीं और धीरे धीरे उठकर बैठ गया, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वो कहाँ पहुँच गया।

चंडकाल- ये क्या? मैं तो भयंकर पाप शक्तियों के साथ ब्रह्मांड पर राज कर रहा था फिर ये अचानक से कहाँ पहुंच गया।

अग्रज उसके सामने अपने घुटने के बल बैठकर बोला “आपके साथ धोखा किया था पुण्य शक्तियों ने महाराक्षस चंडकाल! आपके मस्तिष्क को एक यंत्र द्वारा निष्क्रिय करके आपको स्वप्न की एक ऐसी दुनिया में भेज दिया गया जहाँ सब आपकी इच्छानुसार चल रहा था जबकि हकीकत इससे कोसों दूर है, आप सदियों तक पाप क्षेत्र में कैद रहे, मैंने आपको स्वतंत्र करवाया और आपके मस्तिष्क से उस यंत्र को बाहर निकाल फेंका!”

चंडकाल- क्या? नहीं ये असत्य है! तू असत्य बोल रहा है मानव!
अग्रज- आपके पास तो असीमित शक्तियां हैं, आपके लिए सत्य असत्य जानना चुटकियों का खेल है।

वेदाचार्य एक ओर खड़े होकर इस पूरे तमाशे का अवलोकन कर रहे थे, उनके नेत्र नहीं थे लेकिन चंडकाल की मानस तरंगों से ही उनको पता लग गया था कि ये किस स्तर की तीव्र पाप शक्ति है। चंडकाल ने अग्रज की बात पर गौर करना सही समझा और हाथ फैलाकर बोला “हे वातावरण में फैली पाप शक्तियों, मेरी कैद के उपरांत इस धरती पर क्या क्या हुआ इसका पूरा ब्यौरा मेरे मस्तिष्क में भर दो!”

अचानक ही दुनियाभर की जानकारी चंडकाल के मस्तिष्क में जाने लगी। जैसे जैसे वह जानकारियाँ उसके मस्तिष्क में जा रही थीं, उसकी आँखें अविश्वसनीयता से और चौड़ी होती जा रही थीं। कुछ ही मिनटों बाद उसके ज़रूरत की जानकारी उसके दिमाग में थी, उसकी साँसें फूल रही थीं लेकिन चेहरे पर एक आक्रोश था।

चंडकाल- इतने समय तक मुझे अँधेरे में रखा गया, इससे अच्छा तो मुझे प्रताड़ित करके मार दिया जाता, इतने वर्षों तक मैं अपने ही मस्तिष्क में लगे एक यंत्र के सहारे एक झूठा जीवन जी रहा था जबकि सच्चाई ये थी कि सदियों से मैं पाप क्षेत्र में कैद था।

चंडकाल ने आवेश में आकर पास खड़ी एक बड़ी सी चट्टान पर मुक्के से प्रहार कर दिया, वह चट्टान खील खील हो गयी।

अग्रज- ये क्षण दुखी होकर आवेश में आने का नहीं है महाराक्षस बल्कि ये सोचने का है कि पाप क्षेत्र के द्वार को पूरी तरह कैसे खोला जाए। अब तक उसमें से जितनी तामसी शक्तियां आयी हैं, सबको पृथ्वी के विलक्षण नायकों ने मृत्यु के घाट उतार दिया है लेकिन यदि द्वार पूरी तरह खुल जाए तो उसमें से आप जैसी तीव्र पाप शक्तियां काफी मात्रा में बाहर आ जाएंगी।

अग्रज का कथन सुनकर चंडकाल हंसकर बोला- “हाहाहा! तुम नादान हो मानव, ये सत्य है कि पाप क्षेत्र में कैद होते समय मैं निष्क्रिय था लेकिन उससे पूर्व भी मैंने पाप क्षेत्र के बारे में कई प्रकार की बातें सुनी थीं, हालांकि मुझे वे बातें मिथ्या लगती थीं इसलिए मैंने कभी उन पर गौर नहीं किया और पाप क्षेत्र के अंदर मैं पूरी तरह निष्क्रिय था इसीलिए इस मिथ्या वचन में कितना सत्य है, इसकी पुष्टि मैं नहीं कर सकता। मैं यदि पाप क्षेत्र में निष्क्रिय नहीं पड़ा होता तो शायद उसके अस्तित्व को भी नकार देता।”

अग्रज- भला ऐसा भी क्या है पाप क्षेत्र में महान चंडकाल ?
चंडकाल (गहरी सांस लेकर)- हम सभी तामसी प्रवृति वाले जीव दानव, दैत्य, राक्षस, प्रेत, पिशाच, असुर इत्यादि में अलग अलग स्तर की पाप ऊर्जा होती है, किसी में कम तो किसी में ज़्यादा। सबसे उच्च कोटि की पाप ऊर्जा को कहा जाता है “स्याह ऊर्जा” और इसे हर कोई धारण नहीं कर सकता। इसे सिर्फ वही धारण कर सकता है जिस पर “महाकाल छिद्र” की विशेष कृपा हो।
अग्रज- महाकाल छिद्र?
चंडकाल- सभी प्रकार की पाप शक्तियों के पूज्यनीय, इस सृष्टि की रचना के पहले से मौजूद चंद जीवों में से एक……महाकाल छिद्र। एक और शक्ति थी जिसे हममें से किसी ने कभी नहीं देखा था लेकिन उसका जिक्र मात्र ही रीढ़ की हड्डियों में सिहरन दौड़ाने के लिए काफी था, वह महाशक्ति थी स्याह विवर। जब मैं अपनी शक्तियों के बल पर ब्रह्मांड विजय के स्वप्न देख रहा था तब मैंने सुना था कि महाकाल छिद्र और स्याह विवर को भी पाप क्षेत्र में कैद कर लिया गया है, मुझे यकीन नहीं हुआ बल्कि किसी भी पाप शक्तिधारी के लिए ऐसी खबर पर यकीन करना मुश्किल था लेकिन अब मैं कुछ भी दावे के साथ नहीं कह सकता। पाप क्षेत्र मौजूद है तो हो सकता है कि महाकाल छिद्र और स्याह विवर अभी भी उसमें कैद हों।
अग्रज- परंतु इतनी भीषण शक्तियां अभी तक पाप क्षेत्र से बाहर क्यों नहीं आयीं?
चंडकाल- तुम्हीं ने तो कहा कि पाप क्षेत्र का द्वार पूरी तरह से नहीं खुला है, स्याह विवर और महाकाल छिद्र वैसे भी पाप ऊर्जा का भंडार हैं। कम श्रेणी की पाप शक्तियां आसानी से द्वार के बाहर आ सकती हैं लेकिन बिना द्वार पूरा खोले इतनी भारी ऊर्जा बाहरी वातावरण में विसर्जित नहीं हो पाएगी।
अग्रज- तो आपके अनुसार हमारा अगला कदम क्या होना चाहिए महाराक्षस?
चंडकाल- कोई भी आयामद्वार एक निश्चित स्थान पर बहुत कमजोर होता है, हमें बस वह स्थान ढूंढना है और पाप क्षेत्र के द्वार में तुम्हारे प्रयासों के कारण पड़ी दरार को और चौड़ा करना है।

सुदूर जंगल का वातावरण बेहद शांत था, नदी कल कलकर बह रही थी, सूर्य की किरणें छन छन कर धरती तक पहुंच रही थीं, तरह तरह के वन्य जीव आपस में खेल रहे थे। पास ही बनी मिट्टी की एक कुटिया के बाहर एक तपस्वी साधना कर रहे थे, तभी एक छोटा सा नेवला कूदता फांदता उस तपस्वी के कंधे पर जा बैठा। तपस्वी ने धीरे धीरे आँखें खोलीं, उनकी आँखों में सौम्यता के साथ के विशेष तेज भी था। वे शांत परंतु गंभीर आवाज़ में बोले “इतने युगों बाद एक बार फिर स्याह शक्तियों का आगमन इस पावन धरती पर हो रहा है शिकांगी, ब्रह्मांड का संतुलन बनाये रखने के लिये श्वेत शक्तियों को आगे आना होगा!”

To be continued….
Written by- Samvart Harshit for Comic Haveli

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5 Comments on “Earth 61 Phase 2 Part 18”

  1. Bhai kasam se faad kar rakh diya ekdum…

    Sabse pahle to bohat badhai ho aapko kyunki aapki ye kahani bohat famous ho chuki hai aur hona hi tha qki isme dum hai boss….

    Ab aate hain review pe..

    Jaisa ji last part me hum sabne parha ki nishchar mara gaya wo bhi aasani se usko aapne iss part me bohat ache se cover kiya isse ye pta lagta hai ki hume aage ki story jane bina hi judge nhi karna chahiye..ya phr karna chahiye bcz isse aap apni galtiya sudhar sakte hain…

    Super indian ki jo image banayi thi jo raj comics ne wo utna nhi pasand mujhe lekin aapka supi to sach me supi hi nikla maza aagya usko parh kr lekin mujhe uske liye tension bhi ho rhi hai ki kaise uski barhti hui Umar ko roka jaye warna wo mara jayega..shayd ab hakeem ji hi kch kar paye apne karhe se…karha zindabad

    Scd ne anjane me hi sahi Nagraj ko mumbai bhej kr acha kaam kiya isse sabki galat fahmiya dur ho gayi…aur doga ko nagraj ne behadd ache se yaad dilaya ki aakhir wo doga hai lag rha tha mano koi filmi scene chal rha hi aankho k samne usi pal monika ka usko i love u bolna..aye Haye jaan le liya re… Laga ki ab hero ko aayega josh aur hua bhi wahi…nishachar ka puri tarah se apna hero khatma karke wapas apne pyar k paas aagaya…baht hi ache se aap inki love story ko aage barha rhe hain…romantic writer bhi ban sakte hain aap to..

    Idhar Abahy parmanu Anthony aur Jacob ne team work me lambu ko mar to diya lekin yaha thoda sa fast dikha diya aapne ki abahay ko wo sirf naam se hi judge karleta h aur uska mask utar kar bolta hai ki wahi hai…thoda sa alag likhna tha ki koi nishani dekh kr pahchanta ya kch aisa ki batata ki mera bhi Abhay naam ka dost tha…baki story janne k baad unka emotion aapne ache se likha hai..earth one aur earth 61 ye dono duniya me kitna alag hai sab kch waha kisi se kisi ka link nhi aur earth 61 me sabka ek dusre se link..manna padega aapne ek alag universe hi creat kr dala aur bohat hi khubsurat….

    Idhar chandkal hosh me aagya hai aur usne ye kya surprise de dala ki usse bhi powerful koi aur hai kaal chhrida aur ab agraj aur chandakal dono mil kr paap Kshetra dwar pura khol dalenge aisa darr lag rha h mujhe ya phir khulte khulte band ho jaye heroes ke dwara…

    Last me baba Gorakhnath ki entry ho gyi shayd ab kch acha ho qki Baba Gorakhnath punya shaktiyo ko bula rhe hain ab hoga ek mahayudh

    I can’t wait anymore jald se nxt part

  2. Shabd kum h tareef k liye jo masterpiece gatha aapne pesh ki h

    Bhai ye kahani nahi ye kohram h ye vidhwans h ye mahagranth h

    Ek baar phir se ek kum famous character ko gajab ka use kiya aapne

    Grahano
    Paparaj
    Tapnasur

    Who is next

    Super indian ko kya gajab pesh kiya but mujhe aur jyada expectation thi ki vo akele hi jeete but vo dhruv ki madad se jeeta

    Ek confusion h ki jab police walo ne pehle superindian ko dekha to vo 18-19 saal ka tha baad me jab police walo ne mandir k bahar use dekha uski age 25 k karib batayi to kya uski umar itni tezi se bad rahi tab to use ek hi din me mar jana cahiye

    Dhananjay ka teen dwar ek sath kholna badiya laga

    Paparaj ko entry kafi unexpected thi aur usse sath me ye Raaj bhi khula ki superindian me atma urja nahi hone k karan uski age itni tezi se badh rahi

    Dhruv ka swarnpash use karna wow moment tha

    Nishachar ko vapas aate dekhkar maja aaya kyuki laga tha bada easily kaise haar gaya vo

    Doga ne ek hi ghunse me cheeta aur lomdi ko behosh kiya vo atpata laga mana ki doga k sharir me nishachar tha but uska vaar lagne se cheeta aur monika thodi der k liye to khud ko bacha hi sakte the kyuki dono bahut hi trained fighter h

    Nagraj ne jaise doga ko bachaya kohram k gussa bum ki yaad aa gayi

    Anatraman wali ladai gajab thi ekdum mast scene

    Tapnasur ko bahut unche level par pahucha diya aapne

    Uski fight achi lagi

    Chalo do bachpan k dost vapas mil gaye

    Ab to mahakal chidra bhi aane wala h matlab kisi ko chhodenge nahi aap
    Aa rahe h gorkhnath bhi

    Last 2 part bhi aise hi likhiyega bus

    Kyuki itni behtareen series ka ant bhi behtareen hona cahiye varna sari mehnat bekar ho jayegi

    Waiting for next part

  3. वाह अदभुत
    बहुत ही शानदार लेखन, अद्वितीय परिकल्पना
    सुपर इंडियन भी आ गया और उसे देखकर बहुत मज़ा आया, पर उसकी उम्र बहुत जल्दी बढ़ रही है उसका भी कोई उपाय करना होगा जल्दी ही नही तो वो बूढ़ा हो जाएगा, बस एक बात समझ नही आई थोड़ी देर पहले 18 जैसा लग रहा था फिर कुछ देर बाद ही 25 जैसा, ये कैसे सम्भव है इस हिसाब से तो वो एक दिन में ही मर जाता, हो सकता है इसके पीछे कोई और वजह हो।

    ब्रह्मांड रक्षक फिर एक साथ काम करने वाले है, डोगा का निशाचर से अंतर्द्वंद्व बहुत ही उत्तम और दर्शनीय था।

    ध्रुव का राजनगर वापस आना भी सुकूनदायक है, धनंजय की शक्तियों का सही से वर्णन किया है आपने, परमाणु और तपनासुर की लड़ाई गजब थी, फिर अपने पुराने दोस्त को पहचानना ये गजब का था, आपके इमोशनल सीन लाजवाब होते हैं, आँखों मे आँसू आने के लिए मजबूर कर देते है।

    चंडकाल को अब सच पता चल गया है, और महाकाल छिद्र का भी नाम आया है, गुरु गोरखनाथ भी आने वाले है, अग्रज का इन सब मे फायदा क्या है, क्या दादा वेदाचार्य अब भी ये सब रोकना नही चाहते हैं,

    यहां एक चीज जो सबसे अच्छी लगी कि सब एक क्रम में है, और एक के बाद एक घटना हो रही है

    उम्मीद है अगला भाग शीघ्र ही आएगा

  4. Nice story Sir Ji mja aa gya. Aane wale part bahut hi interesting hote ja rahe hai bar, bar padne ki ichcha hoti hai. Next part ka besabri se intjaar hai.. And sir ji itni achchi story ke liye thank you…… I am waiting for next part…

  5. बहुत धन्यवाद तारिक जी, अभिलाष जी, जतिन जी और मनोज जी। उम्मीद है कि आगामी भाग आपको और अधिक रोमांचक लगेगा, अंतिम दो भागों पर सबसे अधिक मेहनत लगने वाली है।

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