चुनाव सुपरहीरोज़ का

                      चुनाव सुपरहीरोज़ का

 प्रकृति का नियम होता है कि हर कबीले का एक सरदार होता है, हर देश का एक लीडर होता है, हर टीम का एक कैप्टन होता है, ऐसे ही हर समूह का नेता होता है और नेता कैसे बनता है, जब चुनाव होता है।

ऐसे ही हमारे सुपरहीरोज़ ने भी सोचा कि यार जब हर जगह एक लीडर होता ही है तो क्यों न हमारे बीच भी एक लीडर हो, वैसे भी लीडर में क्या गुण होने चाहिए- उसे झूठ बोलना आता हो।

तिरंगा को ये ख्याल आया कि क्यों न अपना भी कोई लीडर हो जो चुनाव से जीता हो? वैसे ऐसे ख्याल आना उसे लाज़मी भी था आखिर वही सबसे वेल्ला जो है आजकल।

दिल्ली-

तिरंगा अपने कमरे में बैठा हुआ है और उत्तर प्रदेश के उपचुनाव के नतीजे देख रहा है-

तिरंगा- बहूहूहू क्या जमाना आ गया है, मुझे न्यूज़ ही देखनी पड रही है पूरे दिन भर। अरे ये क्या उत्तर प्रदेश में आजकल चुनाव चल रहे हैं। वैसे यार क्यों न हम ब्रह्मांड रक्षकों का भी एक नेता हो जिससे कम से कम में काम ही मांग लूंगा हीहीही।

बस काम ये करना है कि सब मे आग लगानी है चुनाव करवाने के लिए। सबको फ़ोन मिलाता हूँ।

तिरंगा सबसे पहले डोगा को फ़ोन लगाता है।

तिरंगा- डोगा मान गया तो फिर सब मान जाएंगे हीहीही।

डोगा का फ़ोन लगता है।

डोगा- हैल्लो कौन है बे।

तिरंगा- तिरंगा!

डोगा- अबे अबे अबे रुक जाओ।

डोगा लेटा हुआ चिप्स खा रहा था, एकदम तन कर खड़ा हो गया और

डोगा- जय हिंद। अब स्टार्ट करो।

तिरंगा कंफ्यूज हो गया।

तिरंगा- बे मैं तिरंगा आदमी हूँ झंडा नही। गुर्रर्र

डोगा- अबे फालतू इंसान। क्यों परेशान करता है खाने दे फिर सोना है, रात को जागना पड़ता है मुम्बई वालो को बचाने के लिए।

तिरंगा- गुर्रर्र मुझे भी बचाना पड़ता है दिल्ली को अपराधों से….

तिरंगा बात पूरी भी नहीं कर पाया था कि

डोगा- हीहीही सपने में जाता होगा।

तिरंगा- गुर्रर्र क्या है बे । अच्छा छोड़ एक बात सुन यार, देख यार हर जगह चुनाव होता है ऐसे ही अगर हम ब्रह्मांड रक्षक भी चुनाव करें तो?

डोगा- किसका चुनाव बे?

तिरंगा- ब्रह्मांड रक्षकों के नेता का चुनाव।

डोगा- कौनसा नेता बे? हमारे पास पैसा आता कहाँ है जो कोई पैसे खायेगा?

तिरंगा- अबे वो नेता नहीं बल्कि लीडर।

डोगा- अबे वो तो मैं ही हूँ गुर्रर्र।

तिरंगा- अबे तो मानता कौन है? सबको बोल की मिल कर डिसाइड करो नेता का।

डोगा- साले नई बंदूक ली है चोर बाजार से सबसे पहली गोली तुझे मारूंगा गुर्रर्र। चल तू कहता तो करता हूँ आखिर फालतू है तू तो सारा सोच के बोल रहा होगा।

डोगा फ़ोन काट देता है।

तिरंगा- इसका कोई भरोसा नहीं, क्या पता ये फ़ोन करे या न करें। मैं ही फ़ोन कर देता हूँ।

तिरंगा एन्थोनी को फ़ोन करता है।

एन्थोनी जो बेचारा रूपनगर में वारदातों के कम होने से आराम से कब्र में सो रहा था और प्रिंस गला फाड़ फाड़ के गाना गाकर उसका मनोरंजन कर रहा था।

एन्थोनी- अबे प्रिंस ये बता आजकल तू काफी अच्छा कैसे गा लेता है।

प्रिंस- कांव कांव। वो क्या है ना एन्थोनी कि तुम्हे गाना सुनाते सुनाते आवाज अच्छी हो गयी है। (मन मे)💭 साले ने गवा गवा के गला बैठा दिया है और कहता है अच्छा गा रहा हूँ💭

एन्थोनी- प्रिंस तू चुप क्यों हो गया। चल अब 4 बज गए पार्टी अभी बाकी है सुना, या फिर लगावेलु जब लिपिस्टिक हिलेला सारा डिस्टिक सुना।

प्रिंस- (मन में) क्रू क्रू (कौवे की भाषा मे रोना)। हां सुनाता हूँ।

तभी एन्थोनी का फ़ोन बज उठता है।

प्रिंस- (मन मे) अब बताओ मुर्दो को भी फोन आता है बस मुझे नही आता। क्रू क्रू

एन्थोनी- हैल्लो कौन।

तिरंगा- तिरंगा।

एन्थोनी- ओह्ह तेरी। रुक जाओ बे।

एन्थोनी कब्र से बाहर आता है और खड़ा हो जाता है।

एन्थोनी- अब शुरू करो। जय हिंद।

तिरंगा- अबे गुर्रर्र। आदमी बे आदमी हूँ मैं तिरंगा।

एन्थोनी- अबे कैसा है हीरो।

तिरंगा- हीरो बहूहूहू। अरे एन्थोनी जी सुनो।

अंथोनी अपनी तारीफ से खुश हो जाता है।

एन्थोनी- अरे बोलो तिरंगा भाई।

तिरंगा- यार सब ग्रुप में एक लीडर होता है तो क्यों न हम ब्रह्मांड रक्षको का भी एक लीडर हो। तुम क्या कहते हो?

एन्थोनी- अबे हट। भग जा यहां से। मैं मुर्दा हूँ मुझे नहीं चाहिए कोई लीडर।

तिरंगा- अरे सुन तो यार।

एन्थोनी- अबे जा न हवा आन दे।

और एन्थोनी फ़ोन काट देता है।

तिरंगा- हद्द है यार ऐसे तो अब स्टील भी नहीं मानेगा अब क्या करूँ । कुछ देर रुकता हूँ देखता हूँ क्या पता डोगा फ़ोन मिला रहा हो।

मुम्बई में-

डोगा- अबे यार ये तिरंगा बोल तो सही रहा है अगर चुनाव होता है और कोई लीडर चुना जाएगा जो कि मैं हूँ, तो मजा आ जायेगा। कोई मेरे पैर दबाएगा, कोई मेरे लिए जूस लाएगा और तो और सबपर हुक्म झाडूंगा। चल फोन मिला डोगे।

डोगा सबसे पहले फ़ोन ध्रुव को मिलाता है।

राजनगर-

ध्रुव मेहरा निवास में नास्ता कर रहा था, और श्वेता उसके साथ ही बैठी थी।

श्वेता- (ध्रुव से) भैया कितना मोटा हो गया है और कितना खायेगा।

ध्रुव- तुझसे मोटा नहीं हूँगा टेंशन न ले।

श्वेता- हां होगा भी कैसे रिचा और नताशा रोज तेरी आरती जो उतारती हैं। हीहीही

ध्रुव- श्वेता पर्सनल कमेंट मत कर बहूहूहू।

तभी ध्रुव का फ़ोन बज उठता है। ध्रुव फ़ोन उठाता है।

ध्रुव- हैल्लो ध्रुव स्पीकिंग।

डोगा- गुर्रर्र हिंदी के बोल हिंदी में।

ध्रुव- अबे कौन है तू?

डोगा- मुम्बई का बाप।

ध्रुव- तो माँ को ढूंढ मुझे क्यों फ़ोन कर रहा है! गुर्रर्र

डोगा- अबे डोगा बोल रहा हूँ। बहूहूहू

ध्रुव- अरे डोगा भाई क्या बात है क्यों फ़ोन किया क्या हेल्प चाहिए?

डोगा- (मन में) 💭गुर्रर्र। इसे अच्छा सबक सिखाऊंगा, लेकिन जरूरी है अभी गधे को भी बाप बनाना पड़ेगा💭

हीहीही(नकली हँसी) अरे ध्रुव भाई, बात ऐसी है कि सोच रहा था क्यों न हम ब्रह्मांड रक्षको का चुनाव हो और एक लीडर चुना जाए।

ध्रुव- (मन ही मन खुश होते हुए) बोल बोल भाई।

डोगा- तो क्या आप चुनाव के लिए तैयार हो?

ध्रुव- (मन में) 💭वाह डोगा मेरी तरफ है अब तो पक्का मैं ही जीतूंगा तो मैं ही बनूंगा लीडर। हीहीही💭

हां डोगा तैयार हूँ कब है चुनाव?

डोगा- (मन में)💭 अबे तिरंगा ने तो ये बताया ही नहीं।💭

हीहीही अरे ध्रुव सबसे बात करने के बाद बुलाता हूँ।

डोगा फिर फोन काट देता है।

राजनगर में-

ध्रुव- वाह डोगा मेरा नाम ले रहा है अब कोई भी आये जीतूंगा तो मैं ही।

श्वेता- अरे भैया पगला गए हो का? का बड़बड़ाये जा रहे हो?

ध्रुव- गुर्रर्र।

ध्रुव खाने की टेबल से उठकर कमरे में चला जाता है।

ध्रुव काफी कोशिश करता है ध्यान इधर उधर करने की लेकिन उसका ध्यान बार बार चुनाव की तरफ ही था।

ध्रुव- यार पक्का मेरा विरोधी तो नागराज ही होगा। सब नागराज को चाहते भी हैं। बहूहूहू। सबको अपने तरफ मिलाता हूँ।

ध्रुव अपने फ़ोन से एक नंबर मिलाता है।

घन्टी बजती है ट्रिन ट्रिन ट्रिन ट्रिन। फ़ोन उठता है

ध्रुव- हैल्लो अमर मेरे दोस्त।

स्टील- अबे क्या हो गया क्यों मक्खन मार रहा है काम बता।

ध्रुव- अरे दोस्त क्या हुआ क्या बिना काम के मैं तुझे फ़ोन नही कर सकता?

स्टील- नही।

ध्रुव(मन में)- लगता है ये डब्बा मक्खन लगाना किसे कहते हैं समझ गया है।

स्टील- क्या हो गया? क्या फ़ोन काट दूँ?

ध्रुव- हेहेहे। अरे दोस्त आजकल चुनाव चल रहे हैं तो सोच रहा हूँ कि अगर हम ब्रह्मांड रक्षको का भी कोई लीडर होता तो सही रहता नहीं।

स्टील- उससे क्या होगा?

ध्रुव- जिनकी कॉमिक्स नहीं निकल रही है, उनके लिए लड़ा जाएगा।

स्टील-बहूहूहू। आँसू नहीं आ सकते मेरे वरना समुंदर बन चुका होता। भाई तुम मेरी बात समझते हो। मैं तैयार हूँ।

ध्रुव-(मन में) चलो हो गया काम। (स्टील से) अच्छा दोस्त फ़ोन रखता हूँ सबको बुलाना है।

ऐसा कहकर ध्रुव फ़ोन रख देता है।

पुराने समय में मतलब विकासनगर की धरा पर-

भोकाल अपने बच्चों के साथ घर के दालान में खेल रहा था। उसकी तीनों पत्नियां भी वहीं साथ में थी। रूपसी, सलोनी और तुरीन।

तुरीन- भोकाल क्या कर रहे हो? देखो यशस्वी क्या कर रहा है। उसे मिट्टी खाने से रोको।

भोकाल- बहूहूहू हां रोकता हूँ।

रूपसी- अजी सुनिए?

भोकाल – हां बोलो

सलोनी- अजी मेरी बात भी तो सुनिए!

भोकाल- बहूहूहू तुम भी बोलो।

रूपसी- कुछ नहीं।

सलोनी- कुछ नहीं।

भोकाल- तो फिर मुझे बुलाया क्यों? बहूहूहू

तुरीन- त्रिकाल को बुला लाओ कब तक यूँ फालतू बैठे रहोगे। कुछ तो काम किया करो।

रूपसी- आते समय एक गिलास पानी ले आना।

सलोनी- अच्छा सुनो आने से पहले चूल्हे पर दूध रखा है उसे संभाल के रख देना।

भोकाल- और कोई आज्ञा? बहूहूहू

तुरीन- बोल तो ऐसे रहे हो जैसे बड़े काम के हो… हुँह

रूपसी और सलोनी- सही कहा।

भोकाल दुखी मन से रसोईघर की तरफ चल पड़ता है।

इसी समय उसका फ़ोन बज उठता है….

बोले तो मानसिक संकेतों वाला टेलीफून हीहीही

भोकाल- हैल्लो कौन है भाई?

तिरंगा- तिरंगा बोल रहा हूँ।

भोकाल- अब ये कौन आ गया?

तिरंगा- गुर्रर्र। भूल गए हो क्या?

भोकाल- क्यों आप क्या मेरी प्रेमिका है? गुर्रर्र

तिरंगा- अबे शांत हो जा शांत हो जा। हीहीही। अरे भाई आपको एक जरुरी काम के लिए बुलाना है।

भोकाल- क्या सच कह रहे हो?

तिरंगा – हाँ भाई। ब्रह्मांड रक्षकों का चुनाव हो रहा है आपको भी आना है।

भोकाल- अबे कितने फालतू हो तुम लोग। गुर्रर्र मैं नही आऊँगा। भग जा।

इसी बीच दालान से तुरीन की आवाज आती है-

“क्या कर रहे हो तब से अंदर। दूध के साथ खुद उबल रहे हो क्या? गुर्रर्र”

भोकाल(तिरंगा से)- हेहेहे। भाई आ रहा हूँ। (मन में) गुर्रर्र इन बीवियों से तो छुटकारा मिलेगा । बहूहूहू

तिरंगा टेलीफून रख देता है। मानसिक वाला हीहीही।

दिल्ली में-

परमाणु आसमान में उड़ रहा था।

परमाणु- मेरी तो जिंदगी ही खराब हो गयी । एक को शक्ल दिखा नही सकता और एक के साथ जा नही सकता। बहूहूहू

मुझे कोई बचाओ।

तभी परमाणु का फ़ोन बजने लगता है।

परमाणु- बचाओ मतलब हैल्लो। बहूहूहू

डोगा- क्या हो गया बे परमाणु?

परमाणु- कुछ नहीं। ये बता क्यों फ़ोन किया तूने?

डोगा- ये बता तू फ्री है? एक काम था तुझसे।

परमाणु-(मन में) बहूहूहू डी एम थोड़े हूँ कहीं का।

डोगा- अबे चुप क्यों हो गया?

परमाणु- कुछ नहीं यार। बता क्या काम है।

डोगा- सोच रहा हूँ सभी ब्रह्मांड रक्षकों को मिलकर एक चुनाव करना चाहिए?

परमाणु- अबे साले शीना मेरी ही है। गुर्रर्र

डोगा- गुर्रर्र अबे उसका दिमाग ठिकाने पर नही रहता उसे तू ही रख। मैं तो एक नेता चुनने के लिए कह रहा हूँ।

परमाणु- ओह्ह। अबे पर क्यों?

डोगा- सबका लीडर होता है तो हमारा भी हो जाये तो क्या बुरा है।

परमाणु कुछ देर सोचने के बाद हां बोल देता है और डोगा फ़ोन काट देता है।

असम कर जंगलों में-

भेड़िया(कोबी) जेन के साथ एक पेड़ के नीचे बैठा हुआ था।

जेन- भेड़िया कितने समय बाद आज मैं तुम्हारे साथ अकेल समय बिता पा रही हूँ।

भेड़िया- जेन जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी मैंने ली है जिस कारण मैं चाहकर भी तुम्हारे साथ समय नहीं बिता पाता।

तब तक फूज़ो कि एंट्री हो जाती है।

फूज़ो बाबा- भेड़िया जल्दी चलो पास के जंगल मे आग लग गयी है।

जेन (भेड़िया से)- (धीमी आवाज में) इस फूज़ो को तभी आना होता है, जब तुम और मैं अकेले होते हैं बहूहूहू

भेड़िया- अभी आता हूँ जेन। चलिए फूज़ो बाबा

भेड़िया और फूज़ो बाबा जब तक जंगल पहुंचते हैं आग बुझ चुकी थी।

भेड़िया- फूज़ो बाबा ये क्या मजाक है बहूहूहू। यहाँ तो आग केवल एक खेत मे लगी थी जिसे कबीले वालों ने बुझा भी दिया।

फूज़ो बाबा- हीहीही। अरे मुझे लगा आग फैल चुकी होगी।

भेड़िया- अबे मुझे अकेले तो रहने दिया कर जेन के साथ बहूहूहू।

भेड़िया जल्दी से जेन के पास पहुंचता है लेकिन जेन अब वहां नही थी।

इसी बीच ध्रुव का फ़ोन आ जाता है।

भेड़िया- क्या है बे क्यों फ़ोन कर रहा है?

(ब्रह्मांड रक्षक फ्रीक्वेंसी वाला फोन)

ध्रुव- हेहेहे। अरे भेड़िया मैं ध्रुव बोल रहा हूँ।

भेड़िया- हां हां जानता हूँ अब आगे बोल! तूने फ़ोन किया क्यों है?

ध्रुव- अरे दोस्त हम सबने मतलब ब्रह्मांड रक्षको ने एक नेता चुनने का प्लान बनाया है हमारा।

ध्रुव के बात पूरी करने से पहले ही भेड़िया ने उसे रोक दिया।

भेड़िया- अबे सुन जब प्लान बना ही दिया है तो मुझे फ़ोन क्यों कर रहा है जा अब अपना काम कर।

ध्रुव- हेहेहे। (मन में) साले अभी काम है तुझसे वरना तेरी पूंछ से बांध कर तुझे ही फांसी दिलवा देता। गुर्रर्र।

भेड़िया- अबे तू बौरा गया है क्या बे। हँस क्यों रहा है अब?

ध्रुव- अरे अभी तक सबने केवल मिलने का प्लान बनाया है। तुम भी आ जाओ दोस्त तुम्हारे बिना काम कैसे होगा?

भेड़िया ने कुछ देर सोचा और हाँ बोल दिया।

अब ध्रुव खुशी से पागल हो गया।

अब ब्रह्मांड रक्षकों की कांफ्रेंस कॉल लगाई जाती है। लेकिन नागराज नदारद था।

ध्रुव- हैल्लो दोस्तों।

सभी हैल्लो हैल्लो।

डोगा- मुद्दे पे आओ बे सब। फालतू नहीं।

परमाणु- हां भाई मुझे कहीं जाना है फिर।

तिरंगा- तो भाइयों इस कॉल का मतलब है कि सभी चुनाव के लिए तैयार हैं?

सब एक साथ- “और नी तो क्या”

तिरंगा- तो अब हम लोगो को ये देखना है कि चुनाव होगा किसके यहां?

ध्रुव- तिरंगा के घर।

तिरंगा- नहीं यार मेरा मकान मालिक ज्यादा हल्ला करने पर घर से निकाल देगा। बहूहूहू । मेरे पास काम भी नही है, मैं कहाँ जाऊंगा। बहूहूहू

डोगा.- अबे कोई रुलाओ मत तिरंगा को।

परमाणु- डोगा के घर चलते हैं। क्यों दोस्तो?

ध्रुव- मैं गटर में नहीं जाऊँगा।

डोगा- अबे घर है मेरा अच्छा वाला । गुर्रर्र लेकिन किसीको नही ले जाऊंगा वहाँ।

भेड़िया- तो सब मेरे घर मेरे जंगल मे आ जाओ।

स्टील- नहीं मैं नही जाऊँगा।

एन्थोनी- हैं अब तुझे क्या टेंशन हैं स्टील?

स्टील- कीड़ों से डरता हूँ मैं।

ध्रुव-हीहीही।

तिरंगा- ध्रुव के घर चलते हैं। इसको अपना चेहरा ढकने की भी जरूरत नही पड़ती।

ध्रुव-(मन में श्वेता को सोचकर एक दम से चीखकर) नssss हीं sssss। मेरे घर नहीं जा सकते हैं।

एन्थोनी- मेरे घर आ जाओ।

डोगा- लो बताओ अब मुर्दो का भी घर होने लगा। हीहीही।

तिरंगा- हीहीही।

एन्थोनी- हां मेरा कब्रिस्तान ही मेरा घर है ।

तिरंगा- कब…ब…रि….स्तान।

स्टील- एक बार मे ही बोल देता न यार।

ध्रुव- वहाँ क्यों जाना। बहूहूहू (मन में)

भेड़िया- कोई और जगह है तो बता?

डोगा- बिल्कुल सही कोई डिस्टर्ब करने भी नही आएगा।

ध्रुव- तो फिर तय हुआ रूपनगर कब्रिस्तान में मिलते हैं । कल।

भोकाल को भी बता दिया गया लेकिन बाँकेलाल को नही बुलाया गया क्योंकि अगर वो आता तो सब कुछ हो जाता लेकिन चुनाव तो बिल्कुल नहीं होता हीहीही।

इधर महानगर में-

इन सब से अनभिज्ञ नागराज वेदाचार्य धाम में सोफे पर बैठा कुरकुरे कुरकुरा रहा था।

भारती- नागराज तुम मुझे कहीं घूमाने ले चलो।

नागराज – हेहेहे भारती जरूर तुम्हे घुमाने ले जाता लेकिन तुम तो जानती ही हो कल ही मैं नागद्वीप से आया हूँ। काफी थक गया हूँ।

नागराज सोफे में पसार जाता है।

नागराज- देखो मुझसे उठा भी नहीं जा रहा है।

इतने में नागराज का टुनटुना टुनटुनाने लगता है।

नागराज एकदम उठ के बैठ जाता है और फ़ोन उठाता है।

नागराज- हैल्लो।

एन्थोनी- अरे नागराज तुम कहाँ थे आज?

नागराज- घर मे ही हूँ। क्यों कोई खास काम?

एन्थोनी- हां कल सबको मेरे कब्रिस्तान में आना है।

नागराज- हैं तुम्हारे कब्रिस्तान में? ऐसा क्यों? मैं तो अभी जिंदा हूँ गुर्रर्र।

एन्थोनी- अरे चुनाव है ब्रह्मांड रक्षको के लीडर का।

नागराज- (मन मे) मुझे नहीं बुलाया पक्का ये ध्रुव की चाल होगी तभी तभी।

एन्थोनी- नागराज क्या हुआ?

नागराज- कुछ नहीं मैं नही आऊंगा अब। मुझे जब किसी ने बुलाया ही नहीं।

एन्थोनी- और मैं क्या कर रहा हूँ अभी गुर्रर्र।

नागराज- तब भी।

एन्थोनी- अबे सुन। मेरी तो गर्लफ्रैंड हो नही रहा तू जो तेरे साथ माथापच्ची करूँ। आना है तो आ जइयो वरना जै राम जी की।

एन्थोनी फोन काट देता है।

नागराज- अबे मेरी कोई वैल्यू ही नहीं है बताओ। गुर्रर्र

नागराज भूल गया था कि सामने भारती भी खड़ी है।

भारती- क्या हो गया? क्या वैल्यू नहीं रही तुम्हारी?

नागराज- अरे कुछ नहीं। हेहेहे।

भारती- चलो न मेरे साथ घूमने।

नागराज- बताया तो बहुत थकान हो रही है आज।

भारती- ठीक है कल तुम्हे चलना ही होगा।

नागराज- और कल नही चला तो?

भारती- तो कभी चल नहीं पाओगे। गुर्रर्र

नागराज- बहूहूहू ठीक है।

रात होते ही नागराज चुप के से बाहर भाग जाता है, वेदाचार्य धाम से और सीधे रूपनगर चला जाता है।

नागराज रूपनगर पहुँचकर रात को ही एन्थोनी के कब्रिस्तान के बाहर पहुँच जाता है और एक जगह बैठ जाता है।

नागराज (सोचते हुए)- बहूहूहूहू कैसी किस्मत हो गयी है मेरी।

प्रेमिका है वो साथ रहती नहीं, जो साथ रहती है वो प्रेमिका नहीं और जो मुझमें बसी है वो भी मेरी प्रेमिका नहीं। और दोस्त हैं जो मुझे कुछ समझते नहीं।

प्रिंस का घोंसला नजदीक ही था। वो अपने घोसले से बाहर टहलने आया तो उसे नागराज दिख गया।

प्रिंस- अबे ये तो देखा देखा लग रहा है। हरी खाल ऊपर से अजीब सी हेयर स्टाइल। अबे ये तो नागराज है ना। ये क्या कर रहा है यहां? इतनी रात को अभी पूछता हूँ।

प्रिंस नागराज के पास आता है और नागराज से बोलता है।

प्रिंस- कांव कांव कांव कांव।

नागराज- अबे कौवे तुझे चैन नही है क्या बे रात को भी? भग जा हुर्रर्रर्र यहां से।

प्रिंस- अबे ये क्यों नही सुन रहा है? अभी एन्थोनी से पूछता हूँ।

प्रिंस उड़ता हुआ एन्थोनी के पास जाता है। और जोर जोर से कर्कशाने लगता है।

एन्थोनी- अबे इतना मत चिल्ला फेफड़े फैट जाने है तेरे।

प्रिंस- बाहर नागराज है कब्रिस्तान के लेकिन उसने मेरी बात का जवाब नही दिया उल्टा भगा दिया बहूहूहू।

एन्थोनी- अबे खुद को क्या समझता है इतना अकड़ता है….

प्रिंस- कब्रिस्तान में नया नया आया देखो नागराज है। हीहीही

एन्थोनी- अबे तेरी बात केवल मैं ही समझता हूँ। अब चल उसके पास चलते हैं।

नागराज घोर चिंतन में था। एन्थोनी पीछे से उसके कंधे पर मारता है।

एन्थोनी- धप्पा।

नागराज बिल्कुल नही चौंकता।

नागराज- लुक छुप जाना मक्कई का दाना। गुर्रर्र

एन्थोनी- अबे क्या हो गया। बहुत दुखी लग रहा है! चल मेरी कब्र में चलते हैं गप्पें मारेंगे।

नागराज- हां चल।

नागराज और एन्थोनी दोनों एन्थोनी की कब्र के बाहर बैठ जाते हैं।

कुछ ही देर बाद बाकी सुपरहीरो भी आ जाते हैं।

कुछ देर सभी आपसी गप्पे मारने के बाद मेन मुद्दे पर आते हैं।

ध्रुव- दोस्तों आज हम सभी एक बहुत जरूरी काम के लिए इकठ्ठा हुए हैं। जिसके बारे में आपको तिरंगा बताएगा।

तिरंगा- मैं क्यों बताऊँ?

परमाणु- फालतू कौन है?

सब एक साथ -”तिरंगा”

तिरंगा- गुर्रर्र ठीक है ठीक है। मैं ही बोलता हूँ।

एंथोनी- तो फिर कौन बोलेगा? बोल जल्दी।

भेड़िया- हां जल्दी बोल।

डोगा- अब बोल भी दे।

स्टील- अबे चुप क्यों है?

तिरंगा- बहूहूहू। बोलने तो दो।

एंथोनी- अबे तो रोक कौन रहा है?

भेड़िया- तेरा मुँह खुला है, कुछ फूट भी ले।

डोगा- अबे जल्दी बोल।

स्टील- लोहे का बन गया क्या?

सभी स्टील को देखने लगे जाते हैं।

तिरंगा- देखो साला बोल भी कौन रहा है?

नागराज- हाय बेरहम दुनिया।

भोकाल- कब मिलेगी मुक्ति।

ध्रुव- कैसे बचूं।

परमाणु- चुप रहो यार मुझे अपनी दशा याद आ जाती है।

एंथोनी- अबे तिरंगा जल्दी बोल ये साले सभी बीवी के सताए हुए हैं, अपना दुखड़ा न रोने लगे जाएं।

तिरंगा- सुनो। दुनिया में पुराने जमाने से ये रीत रही है कि हर छोटे से छोटे दल का एक न एक नेता होता है ..

डोगा- ताकि लोग औकात में रहें।

सभी डोगा को इग्नोर करते हैं।

तिरंगा- और वो नेता सबका ध्यान भी रखता है और साथ ही समूह की एक पहचान भी दिलाता है। चाहे वो देश मे कोई मुखिया हो, परिवार में हो, चाहे गांव में हो हर जगह होता है। तो मेरा वोट है कि हमारा भी कोई नेता हो।

ध्रुव- बहुत अच्छी बात है। और नेता मेरे जैसा होना चाहिए।

एन्थोनी- हां। खुद तो पिटता रहता है सब से हमे बचाएगा ये होशियार चौधरी नेता। गुर्रर्र

ध्रुव- अबे मुझे किसने पिट दिया। नागराज को तक के बार हराया है।

परमाणु- रिचा।

तिरंगा- श्वेता।

भेड़िया- नताशा। अबे और कितनों के नाम लूं।

नागराज- अबे मेरा नाम लिया क्या ध्रुव ने?

तिरंगा बात संभालते हुए।

तिरंगा- (मन में) इन दोनों का साला यही ड्रामा है।

(नागराज से) हेहेहे अरे ध्रुव ने तुम्हें नेता बनाने के लिए कहा है।

नागराज- थैंक यू मेरे दोस्त ध्रुव।

ध्रुव- अबे।

भोकाल- मैं ध्रुव को चुनता हूँ।

परमाणु- और मैं खुद को।

एंथोनी- अबे खुद की कॉमिक्स तो निकाल नही पा रहा है। मेरी कॉमिक्स क्या निकलवाने में मदद कर पायेगा।

तिरंगा- रहने दे परमाणु तुझसे ना होगा।

डोगा- तो मैं खुद को चुनता हूँ।

तिरंगा परमाणु से- अबे इसको रोको ये नही जीतना चाहिए क्या पता कब किसके सर पर बम फोड़ दे।

भेड़िया- मैं नागराज को।

स्टील- तो ठीक है 3 पार्टिसिपेंट होंगे। डोगा, नागराज और ध्रुव।

डोगा- अबे मेरा सपोर्ट कौन कर रहा है?

सब चुप हो जाते हैं। डोगा गुस्से में लाल पीला हो गया।

डोगा- मैं ध्रुव को वोट दूँगा।

नागराज- अबे मैंने क्या बिगाड़ा।

ध्रुव- तो मैंने बिगाड़ा क्या?

डोगा- ध्रुव हमारा जिन्दाबाद जिन्दाबाद।

भेड़िया- नागराज जिन्दाबाद।

डोगा- अबे भग जा यहाँ से। नही तो बम फोड़ दूँगा।

भेड़िया- हेsss भेड़ियाsss देबताssss मददsss।

इसी के साथ भेड़िया के हाथ में आ जाती है उसकी गदा।

परमाणु- अबे रुक जा रुक जा भेड़िया।

स्टील- लड़ो मत यार।

भेड़िया- अब बोल बे डोगा।

डोगा और भेड़िया के बीच गुत्थम गुत्था हो जाती है। डोगा गोलियां चलाता है लेकिन भेड़िया पर असर नहीं होता लेकिन भेड़िया अपनी गदा का एक वार करता है डोगा पर लेकिन डोगा बाख जाता है।

डोगा जीभ निकाल कर भेड़िया को चिढ़ाने लग जाता है।

डोगा जीभ बाहर निकलते हुए और हाथ अपने सिर की तरफ करते हुए- न न न न

ध्रुव- अबे क्या बच्चे हो रहे हो। बंद करो ये सब।

एंथोनी- अबे बंद करो ये सब वरना सबको ठंडा कर दूंगा।

परमाणु- क्या बोला बे?

परमाणु एन्थोनी का कंठा पकड़ देता है।

परमाणु- साले एक तो शीना ने दुखी किया रहता है और तू साला मुर्दा धमकी दे रहा है।

परमाणु ने जैसे ही एंथोनी को उठाया। तो एंथोनी की लात तिरंगा से जा टकरायी और तिरंगा बैलेंस खो कर स्टील के ऊपर गिर गया।

स्टील- भाई साहब। जरा तमीज से।

तिरंगा- गलती से गिर गया यार।

एंथोनी परमाणु को उठाकर नागराज पर पटक देता है। या यूं कहें नागराज परमाणु को कैच कर देता है।

परमाणु- थंक यु थंक यु।

ध्रुव- लड़ाई मत करो जिसके लिए आये हैं वो तो करो। मतलब चुनाव।

डोगा- मैं जीत गया बस। किसी को बीच मे बोलना है तो बोल के दिखाए।

नागराज- बीच में।

डोगा- मजाक ना करियो बे। तुझमें इतने छेद करूँगा की कंफ्यूज हो जाएगा कि हेहेहे।  समझ तो तू गया ही होगा।

नागराज- रुक तुझे भी समझता हूं।

नागराज डोगा के पीछे पीछे भागता है और डोगा एक बम नागराज की तरफ फेंकता है लेकिन बम नहीं फटता।

डोगा- अबे अबे अबे।

तिरंगा- छी छी छी।

नागराज- चोर बाजार का सामान लाता है। भक्क

भोकाल बम के पास आता है। और जोर जोर से हँसने लगता है।

भोकाल – तुझसे न होगा डोगा। हाहाहा

इतने में बम फट जाता है। भोकाल गुस्से में वो शब्द बोलता है जिससे उस मे आ जाती है उसकी तलवार और ढाल।

भोकाल- भो ssss का sssss ल ssss।

तिरंगा- अबे अब भोकाल को क्या हुआ? (भोकाल से) क्या हुआ ताऊ?

भोकाल- सबको चुन चुन के मारूंगा सालों यहां लड़ाई करने बुलाया मुझे। बहूहूहूहू मुझे चाय बनानी है अब, टाइम हो गया होगा।

भोकाल बिना किसी की बात का इंतज़ार करे उड़ जाता है।

एंथोनी- ऐसे लोग भी होते हैं दुनिया मे।

डोगा- बहुत बवाल कर रहे हो सब। एक एक को मारूंगा अब।

भेड़िया (गदा दिखाकर)- तेरे बम में भम्म मारूंगा चुप हो जा।

परमाणु- ध्रुव कहाँ गया?

नागराज- पक्का नताशा ने बुलाया होगा उसे। हाहाहा।

नागराज कुछ देर सोचकर।

नागराज(मन में) – अबे विसर्पी ने आज बाजार चलने को कहा था उसे आज नाग रिंग भी तो दिलवानी है। भहहूहू।

नागराज इच्छाधारी कणों में बदलकर गायब हो जाता है।

परमाणु – अबे अब नागराज कहाँ गया? और डोगा गटर में क्यों जा रहा है वो देखो।

तिरंगा, स्टील, भेड़िया और एन्थोनी डोगा की ओर देखते हैं इतने में परमाणु उड़ जाता है।

डोगा- अच्छा भाइयों अलविदा मुझे जरा बम लेने जाना है घर भूल गया। अब बम कैसे फोड़ू।

भेड़िया भी जाना चाहता था लेकिन उसको बहाना समझ नही आ रहा था।

भेड़िया- आज जेन कह रही थी कि उसको भालू के लिये पाजेब लेनी थी। उसका बछड़ा बीमार हो गया था। काफी दवाई लगायी लेकिन फिर भी हाथी खड़ा ही नही उथ रहा था। जैसे तैसे उसकी सूंड उठाकर उसे सुबह सुबह खड़ा किया लेकिन लेकिन वो सियार का बच्चा उठा ही नहीं। कैसे जतन करने पड़े क्या बताऊँ। उसके हाथ धुलाये फिर पैर धुलाये फिर मुँह धुलाया लेकिन उसने नहाने से मना कर दिया…..

स्टील- अबे तुझे भी जाना है तो जा न क्यों दिमाग खराब कर रहा है।

भेड़िया- हेहेहे।

भेड़िया ने फिर ऐसी रेस लगायी कि वो अगले चौराहे तक कब पहुँच गया किसी को पता भी नही लगा।

स्टील – अच्छा मैं भी चलता हूँ।

तिरंगा भी न जाने कब भाग गया पता भी नहीं लगा।

एंथोनी- अबे प्रिंस इधर आ यार।

प्रिंस- क्रू क्रू क्रू( ये साला फिर गाना गवायेगा)

एंथोनी- चल यार तू एक गाना सुना। कोई अच्छा सा।

प्रिंस गाना शुरू करता है- 🎶🎶🎶🎶मेरा दिल ले गयी आये कमो किधर मैं देखूं उसको इधर उधर ओहोहोहो खोया खोया चांद……🎶🎶🎶🎶🎶

इधर ध्रुव-

नताशा- ओए हीरो जल्दी आ इधर शर्मा क्यों रहा है। चल मेरे पैर दबा दे आज।

ध्रुव- मैं?

रिचा- खबरदार जो नताशा को हाथ भी लगाया तो।

नताशा- क्यों न लगाएं मेरा है ध्रुव

रिचा- मेरा

ध्रुव- हां दोनो माँ हो तुम मेरी।

कुछ देर वहां सन्नाटा छा गया।

फिर आवाजें आने लगी  वो भी केवल बचाओ बचाओ की।

…………समाप्त

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Written By – देवेंद्र गमठियाल for Comic Haveli

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4 Comments on “चुनाव सुपरहीरोज़ का”

  1. yaar ..aap itni acchi acvhi kahaniyaa leker kahan sy aaty ho ..and jis baat ko leker suruwat huyi thi ..matlab chunaav ….vo tho kuch jayada hi aachy sy ho gya .. he he he well story bhaijaan

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