Independence Day & Our Heroes

स्वतंत्रता दिवस और हमारे हीरोज

सुबह सुबह का समय-

स्थान- दिल्ली

तिथि- 15 अगस्त 2018

पुलिस अपार्टमेंट में विनय अभी गहरी नींद में सो रहा था। तभी अलार्म घड़ी घनघनाने लगी।

विनय ने जल्दबाजी में घड़ी को बंद किया और एकदम झटपट से तैयार होने के लिए बाथरूम की तरफ भागा।

विनय को पुलिस परेड में जाना था और साथ ही आज परमाणु भी दिल्ली में स्थित लाल किले में आज ध्वजारोहण में उपस्थित होने वाला था।

विनय ने जल्दी जल्दी अपनी यूनिफार्म पहनी और तेज कदमों से अपार्टमेंट से बाहर निकल कर अपनी जीप स्टार्ट कर पुलिस स्टेशन के लिए निकल गया।

विनय कुछ दूर अभी चला ही था कि अचानक वायरलेस पर कुछ आवाजें सुनायी देने लगी।

💢हैल्लो करररर हैल्लो…. यहाँ इंडिया गेट… करर करररर… के पास कुछ अजीब सा मौसम हो रहा है… करररर… श…शाय…द… आतंकवादियों की… चाल लगती है… करररर…. यहाँ और पुलिस बल भेजो… करररर…. ओवर💢

विनय- लगता है ये काम अब परमाणु को ही देखना होगा।

विनय जीप को एक सुनसान जगह पर रोकता है और परमाणु बनकर जीप से बाहर निकल आता है।

इंडिया गेट-

तिरंगा भी हलचल को देख रहा था। चारों तरफ तेज आंधी चल रही थी। कुछ भी साफ नहीं दिखायी दे रहा था।

तिरंगा- आखिर ये हो क्या रहा है? हर तरफ अजब से माहौल बना हुआ है। लगता है एनवायरो फिर आ गया है।

एनवायरो- तो तू आ ही गया तिरंगा। आज इस आज़ादी के दिन मैं तुझसे भारत को आज़ाद कर दूँगा।

तिरंगा- ये भी आजमा ले मुँह की ही खायेगा तू।

इतने में वहाँ परमाणु भी आ गया।

परमाणु- यहाँ हो क्या रहा है?

तभी एक ठहाका गूँज उठता है और इतिहास नजर आने लगता है।

इतिहास- फंस गए तुम दोनों अब मेरे जाल में अब होगी मेरी मनोकामना पूरी।

परमाणु और तिरंगा के कुछ समझ पाने से पहले ही इतिहास अपनी छड़ी घुमाता है लेकिन एनवायरो के उठाये तूफान के कारण वो एकाग्र नहीं हो पाता।

एक चकाचौंध करने वाली रोशनी उठती है और सब गायब हो जाता है।

अज्ञात स्थान-

हर तरफ खून की नदियां बह रही होती हैं। हर तरफ चिखने चिल्लाने की आवाज आ रही थी।

कराहता हुआ तिरंगा की आँखे खुलती हैं।

तिरंगा- आह!  ये सब क्या हुआ?

सभी लगभग कराहते हुए उठे।

इतिहास- एनवायरो तुझे मैंने कहा था न कि खुद पर नियंत्रण रखना।

एनवायरो- मुझे क्या पता था तू इतना कमजोर निकलेगा इतिहास।

इतिहास- रुक अभी तुझे पृथ्वी की उत्पत्ति के समय मे भेजता हूँ। वहां चलाना अब आँधी।

तिरंगा- रुक जाओ तुम दोनों। परमाणु कहाँ है?

परमाणु- यहीं हूँ मैं भी।

तिरंगा- ये सब क्या हो रहा है?

परमाणु- इस इतिहास को मैं छोडूंगा नहीं। आज इसका टंटा ही खत्म कर देता हूँ।

इतिहास- ले आजा बेटे तुझे तो ice age में भेज देता हूँ।

तिरंगा- हाँ और मुझे वापस भेज के जा लेकिन, फिर जहाँ भी जाना है तुझे जा। अबे पहले ये बता तुझे ध्यान नहीं हैं आज स्वतंत्रता दिवस है?

इतिहास- अबे हां मैं तो भूल ही गया था।

परमाणु- चल निकल यहाँ से। बड़ी भुतहा जगह लग रही है।

इतिहास- ठीक है आओ नजदीक, लड़ाई बाद में पहले स्वतंत्रता दिवस मना लेते हैं।

तिरंगा- लेकिन एनवायरो कहाँ गया?

एनवायरो थोड़ी दूर अजीब सी हालत में खड़ा था। तिरंगा आकर उसके कंधे पर हाथ रखता है।

तिरंगा- चल भाई।

एनवायरो चुपचाप खड़ा रहा।

तिरंगा जोर से एक थप्पड़ एनवायरो पर मारता है।

एनवायरो- अबे तेरी तो।

एनवायरो तिरंगा के पीछे भागता है लेकिन परमाणु बीच मे आकर एनवायरो को रोकता है।

परमाणु- अबे बाद में लड़ लेना यार अभी यहाँ से चलते हैं अजीब सी जगह लग रही है।

एनवायरो- एक सेकंड।

इतना कहकर एनवायरो अपने हाथ हवा में उठाता है और कुछ ही देर में जो अब तक धुंधला और कालापन दिखायी दे रहा था वो अब साफ साफ दिखायी देने लगा।

परमाणु- हे भगवान ये क्या है?

तिरंगा- इतिहास ये कौनसा टाइम है?

एनवायरो- क्या ये मुग़ल या सल्तनत या फिर भारत छोड़ो आंदोलन के टाइम तो नहीं ले आया तू इतिहास।

इतिहास- मुझे क्या पता अब।

सबके ऐसे सवाल करना बिल्कुल जायज था क्योंकि चारों तरफ का दृश्य भयावहता को दर्शा रहा था।

वातावरण में एक अजीब सी नमी सी थी जो बारिश के कारण तो बिल्कुल नहीं थी। हर तरफ कीचड़ ही कीचड़ नजर आ रहा था जो कि काला से था। मिट्टी में आम तौर पर जो भीनी खुशबू नजर आ रही थी वो नदारद थी, थी तो बस एक बदबू जो फेफड़े फाड़ने को आमादा थी।

तिरंगा ने नीचे झुककर मिट्टी हाथ मे उठायी उसे मसलकर उसने जैसे ही सूंघा उसे गहरा धक्का लगा।

वो कुछ पीछे की तरफ एक दो कदम हट गया।

परमाणु- क्या हुआ डिटेक्टिव साहब?

तिरंगा- तुम जानते हो ये मिट्टी इतनी गीली और काली क्यों हो गयी है?

एनवायरो- ना भाई मैं अभी आया हूँ यहाँ। ये तो ये जनता होगा। बोल जवाब दे इतिहास।

इतिहास- मुझे क्या पता होगा।

परमाणु- क्यो है ऐसा तिरंगा?

तिरंगा- ये खून के कारण है शायद यहाँ खून की नदियां बही हैं, के निर्दोष जाने जाने का का सबूत है ये।

परमाणु- किसने किया होगा ये?

तिरंगा- अब यहां से वापस बाद में जाएंगे। पहले देख आते हैं हम लोग कहाँ हैं? और ये सब है क्या?

इतिहास- कहाँ है क्या? दिल्ली है ये अपनी।

सब इतिहास को भूलकर इधर उधर देखते हैं और परमाणु आसमान से देखने के लिए हवा में उड़ता है।

परमाणु हवा से अजीब नजारा देखता है। हर तरफ आग फैली हुई थी, शोर ही शोर सुनायी दे रहा था, सड़कें लाशों से पटी हुई थी, घर के सामान सड़कों पर बिखरे पड़े थे। आसमान में भी घुटन हो रही थी इसीलिए परमाणु जमीन पर आ गया।

तिरंगा- क्या हुआ परमाणु?

परमाणु- क्या हम सचमुच दिल्ली में हैं? दूर दूर तक बस लाशें दिखायी दे रही हैं। कोई आदमी नजर नहीं आ रहा है।

एनवायरो- कहाँ पटक दिया है तूने कलमुँहे इतिहास।

इतिहास- गलती तो तेरी है ना। किसने बोला था इतना तेज तूफान लाने को।

तिरंगा- अबे चुप।

परमाणु- साथ चलो मिलकर देखते हैं आखिर हम हैं कहाँ?

सभी पैदल गलियों और चौराहों को टटोलते जा रहे थे लेकिन किसी का नामोनिशान नहीं दिख रहा था। तभी तिरंगा को दूर एक घर मे हलचल होती हुयी दिखायी दी। उसने सबको उस ओर इशारा किया।

दबे पांव सब उस घर के पास पहुँचे। परमाणु ने घर का दरवाजा खटखटाया लेकिन अंदर से एक भी आवाज नहीं सुनायी दी।

तिरंगा ने दरवाजा तोड़ने का इशारा किया।

परमाणु ट्रांसमिट होकर अंदर जाकर दरवाजा खोल देता है।

अंदर दस लोग एक दूसरे को बाहों में समेटे हुए दर के मारे कांप रहर थे।

देखने मे वो दो परिवार लग रहे थे क्योंकि एक कि वेशभूषा उसे हिन्दू बता रही थी तो एक को मुस्लिम।

तिरंगा उनके पास गया।

तिरंगा- आप घबरा क्यों रहे हैं? हम आपको कुछ नहीं करने वाले।

उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।

तिरंगा- आप लोग कौन हैं? और ऐसे क्यों दर रहे हैं?

उनमें से एक छोटा बच्चा आठ से दस साल का रहा होगा, बोल पड़ा।

बच्चा- व…व….वो बाहर…

इतना कहते ही उसके आँसू बहने लगे।

इतने में एक आदमी बोला।

“क्या तुम बाहर कुछ देख कर नहीं आये हो?”

तिरंगा- बाहर ये सब क्या हो रहा है?

आदमी- दंगे हो रहे हैं। हिन्दू मुस्लिम दंगे।

परमाणु- हिन्दू मुस्लिम दंगे?

आदमी- हाँ। तुम कहाँ के हो? क्या तुम्हें नहीं पता भारत आज़ाद होने वाला है।

परमाणु- आज कौनसी तारीख है?

आदमी- 14 अगस्त

तिरंगा- हे भगवान। परमाणु जल्दी चलो जितने हो सके लोगो को बचाना होगा।

आदमी- किस किस को बचाओगे? यहाँ सब एक दूसरे के खून के प्यासे बने हुए हैं। किसीको पाकिस्तान चाहिए किसी को हिंदुस्तान चाहिए। लेकिन किस कीमत पर? हम दो परिवार यहां है, हिन्दू और मुस्लिम हैं ये देखो।

आदमी डरे सहमे उन लोगों की तरफ इशारा करके कहता है।

“ कल तक आज़ादी के लिए लड़ते रहे हैं आज अपनी जान के लिए लड़ रहे हैं।”

“कल तक अंग्रेजो को भगा रहे थे आज अपनों को भगा रहे हैं।”

“कल तक अंग्रेजो से अपने खून के लिये लड़ते रहे आज अपने भाइयों का खून बहा रहे हैं।”

“आज भारत आज़ाद होगा लेकिन हिंदुस्तान और पाकिस्तान अलग होंगे।”

“बाहर निकलना और खुद को जाहिर करना आज एक दुःस्वप्न की तरह है क्योंकि क्या पता सामने खड़ा व्यक्ति किस कौम का है! मैं वापस आऊंगा भी वापस बाहर से ये भी पक्का नही है।”

आदमी तिरंगा, परमाणु, एनवायरो और इतिहास से कहता है।

“तुम अगर विदेशी हो तो डरो मत बाहर घूम के आओ तुम्हें कोई कुछ नहीं कहेगा बस डरना अगर तुम भारत के हो तो।”

इतना कहकर वो आदमी फूट फूट कर रोने लगा और अपने परिवार को अपने हाथों से कसकर जकड़कर अपना मुंह छुपा लिया।

परमाणु तिरंगा इतिहास एनवायरो सब देखकर भी कुछ कर पाने की अवस्था मे नही थे। उन्हें समझ नही आया क्या करें।

उनकी आँखों मे भी आँसू थे।

तिरंगा- इतिहास यहाँ से चलो इस दुख में अभी खुशी नहीं ढूंढ सकता।

एनवायरो- रात तक स्वतंत्रता का इंतज़ार करना मुझसे नहीं हो पायेगा।

इतिहास- कुछ ही घण्टे का समय बाकी है वैसे। अगर तुम रुकना चाहो तो बता दो।

परमाणु- रुकने में कोई बुराई नहीं है तब तक यहीं रुक जाते हैं।

चारों चुपचाप वहीं बैठ जाते हैं। आज उनसे भी नींद कोसों दूर थी।

रात को रेडियो बजने के साथ ही सबका मन खिल उठा। भारत के आज़ाद होने की घटना सुनने के बाद सभी खुश हो गए और घर से बाहर आ गए।

बाहर आकर उन्हें एक अलग ही नजारा देखने को मिला। जो कुछ देर पहले वीरान गलियां थी वो अब रोशन थीं।

हर तरफ मुस्कुराते चेहरे थे एक खुशी थी जो बयां कर रही थी कि ये खुशी हर दर्द से कई गुना अधिक मरहम लेकर आई थी।

इतिहास अचानक से अपनी छड़ी घुमाता है और सभी लाल किले के सामने खुद को पाते हैं।

तिरंगा- इतिहास के बच्चे बता तो देता।

एनवायरो- अबे अक्ल है या नहीं भाई।

इतिहास- तुम्हें क्या लगा ये देखकर? मतलब जो भी आज दिखा।

परमाणु- हम आजाद जरूर हैं आज लेकिन फिर भी अभी आज़ादी मिलनी बाकी है। हर एक उस सोच से जो भारत के लोगो को विदेशी और विदेश के लोगो को भारतीय बनाने पर लगी हुई है।

तिरंगा- हर उस सोच से आज़ादी चाहिए जो अपने ही भाइयों के प्रति द्वेष भर रही है।

एनवायरो- मुझे भी ये समझ आ रहा है कि भारत आज़ाद है लेकिन ये आज़ादी का स्वाद तब तक ही है जब तक हिन्दू मुस्लिम भाई भाई हैं।

परमाणु- मतलब?

एनवायरो- आज़ाद भारत हमारे कंधों पर है, उन कंधों ओर जिनपर हिन्दू मुस्लिम का टैग चिपकाया जा रहा है। जो हमे अलग कर रहा है। हमे एक होना होगा जिससे कोई और अंग्रेज फिर आकर हमारी आज़ादी में खलल न डाल पाए ।

लाल किले से एक ध्वनि सुनायी दी जो हॄदय को सुकून पहुंचा देती है।

राष्ट्रगान।

इसकी धुन के साथ ही चारो सावधान की मुद्रा में खड़े हो जाते हैं और राष्ट्रगान को गाते हैं।

लेकिन हमारे जहन में कई सवाल छोड़ जाते हैं जिनका जवाब हमें खुद अपने अंदर तलाशना होगा।

………समाप्त……..

जय हिंद।

कहने को बहुत कुछ है लेकिन समय कम। फिर कभी बात करते हैं।

Written By- Devendra Gamthiyal

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7 Comments on “Independence Day & Our Heroes”

  1. bhut hi behtreen …..puraany smye m aazaadi ky liye huye sangrsh ky antim din jo khel huya vo dhikhaya gya…ik baar heart bi pigal gya pd kr…such m iss aazadi ki ldaai my hmny bhut kuch khoyaa hy ..hmny kya dono hi mulk ny ….km smye m likhi gyi story bhut hi acchi hy …aur hmy hmaary puraany time ky baary m btaati hy …agr story m kisi kmi ki baat kru tho parmanu ki lungvess kuch alg si lgi …aur itihaas ka ikdam sy superhero ky saath milnaa ….bi thoda alg lga….lekin in sb ky baavjood story 4.5 out of 5 rating ki haqdaar hy ….nice work dev bhai ji….

    1. कोटि कोटि धन्यवाद अमन जी।
      कहानी को हल्का फुल्का बनाने के लिए ही ऐसा बदलाव किया गया।
      परमाणु और इतिहास बल्कि एनवायरो में भी हल्का बदलाव किया गया जिससे माहौल खुशनुमा रहे।

  2. एक शानदार कहानी जो दिल को रुला गई। कॉमिक सुपर हीरोज़ का इस तरह से इस्तेमाल । इससे अच्छा और कुछ हो ही नही सकता था। सच है। आज भी हमारा देश आज़ाद नही, हम सब एक देश में रहकर , उस देश में जिसे आज़ाद कराने के लिए न जाने कितने लोगों ने अपनी जाने गंवाई । उस देश में रहकर ही हम आपस में झगड़ रहे हैं । एक दुसरे को धर्म , जाति के नाम पर बाँट रहे हैं। क्या ये सही है? क्या हम आज़ाद हैं? नही! हम आज भी गुलाम हैं । उस हैवान के जो आज भी हमारे अंदर बैठा हुआ है । मान लो अगर आज वो वीर क्रांतिकारी हमारे सामने आ जाएं जिन्होंने अपनी क़ुरबानी दे कर देश को आज़ाद कराया तो हम उन्हें क्या जवाब देंगे। हमे एक होना होगा । हम भारतीय हैं और भारतीय ही रहेंगे चाहे जिस धर्म या जाति के हों।

    इतनी छोटी सी कहानी। मगर काफी कुछ बता और समझा गई। मेरी ओर से इस कहानी को

    10 आउट ऑफ 10 ।

    1. धन्यवाद तल्हा जी।
      जी कोशिश यही थी कि कुछ संदेश जाए।
      क्योंकि अंग्रेजो से तो मुक्त हो गए हम लेकिन इससे मिला क्या? केवल बंटवारा जाति, धर्म के नाम पर बंटवारा।

  3. बहुत बढ़िया देवेंद्र जी।
    कहानी छोटी थी पर इसकी सीख बहुत बड़ी थी।

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