झूठ बोलने की भी हद होती है

रोज की तरह आज भी 8 साल की छोटी बच्ची हीना  सोने की तैयारी कर रही थी लेकिन सोने से पहले वह अपने पापा से एक कहानी सुनना चाहती थी वह भी रोज वाली नहीं कुछ, अलग ।

हिना – पापा पापा आज कोई बढ़िया सी कहानी सुनाओ ना ,ऐसी कहानी जो आज तक मैंने कभी सुनी ना हो।

पापा – ठीक है बेटा ठीक है मैं ,आज तुम्हें ऐसी कहानी सुनाऊंगा, जो आज तक तुमने कभी नहीं सुनी होगी ।

लो भाई पिताजी तैयार है अपनी बेटी को कहानी सुनाने के लिए आइए हम भी सुनते हैं इस पिताजी की अजब अनोखी कहानी जिसका ना कोई अंत है ना ही कोई बीच और ना ही कोई शुरुआत

पिता जी कहानी सुनाना शुरू करते हैं

लो तो सुनो बेटा
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कहानी शुरू होती है एक घर से

एक घर में एक चिड़ी और एक कोआ पिछले 3 सालों से रह रहे हैं । चिड़िया घर के बाहर का काम करती है तो कोआ घर के अंदर का । एक दिन चिड़ी ने कोए से कहा चलो क्यों ना हम आज जाकर खेती का काम करें । पर कोआ काम करने के मामले में बहुत आलसी और ढिठ होता है उसने कहा ठीक है तुम चलो मैं आता हूं और मैं तुम्हारे लिए खाने पीने का सामान भी लाता हूं । चिड़िया बोली मैं इतनी भी भोली नहीं हूं पिछले 3 सालों से तुम यही कह कह कर मुझ अकेले से ही खेती करवा रहे हो आज तो तुम्हें साथ चलना ही होगा । काफी जिद करने पर कोवा साथ चलने के लिए मान जाता है ।

अब चिड़ी और कोआ दोनों रास्ते पर चलते जा रहे हैं कि अचानक उनकी गाड़ी खराब हो जाती है । कोआ चिड़ी से कहता है तुम रुको मैं देखता हूं गाड़ी को क्या हुआ है और कुछ देर बाद कहता है कि गाड़ी में तो पानी खत्म हो चुका है । अब क्या करें ? चिड़ी ने कहा करना क्या है चलो पानी ढूंढे और कौवा और चिड़िया पास ही के जंगलों में पानी ढूंढने चले जाते हैं । लेकिन उन्हें पानी नहीं मिलता । पानी ढूंढते-ढूंढते रात हो जाती है और चलते-चलते वह इतनी दूर आ जाते हैं कि उन्हें वापस जाने का रास्ता भी नहीं मालूम होता । अंत में वह दोनों वहीं पर रात रुकने की सोचते हैं । कोआ जैसे-तैसे करके एक तंबू अपने लिए लगाता है और एक ही तंबू चिड़ी के लिए और दोनों अपने अलग-अलग तंबू में जाकर सोने की तैयारी करते हैं लेकिन तभी वहां पर शेर आ जाता है । दोनों शेर को देखते ही डर जाते हैं और चिल्लाने लग जाते हैं बचाओ बचाओ तभी शेर उनके ओर पास आ जाता है और कहता है कि क्या हुआ, तुम लोगों को किस से बचाना है , तुम चिंता मत करो मेरे होते हुए तुम लोगों को यहां कोई कुछ भी नहीं कर सकता, डरने की कोई बात नहीं । इतना कहने के बाद चिड़ी और कोआ और भी डर जाते हैं और और जोर-जोर से चिल्लाने लग जाते हैं । बेचारा शेर भी उनके इस चिलाने से घबरा जाता है और वहां से भाग जाता है । लेकिन भागते-भागते उसकी जेब से रुमाल गिर जाता है और कोआ इस गिरते रुमाल को देख लेता है और पीछे से शेर को कहता है कि तुम्हारा रुमाल गिर गया लेकिन शेर उसकी बिल्कुल नहीं सुनता उसका ध्यान तो बस भागने पर होता है । चिड़ी वहां जाकर उस रुमाल को उठाती है और ध्यान से देखती है । देखने से पता लगता है कि यह कोई रुमाल नहीं बल्कि किसी खजाने का नक्शा है । कोआ भी इस नक्शे को ध्यान से देखता है और कहता है कि वाह यह तो बहुत बड़ा खजाना लगता है क्यों ना इस की तलाश की जाए । और कौवा और चिड़िया निकल जाते हैं खजाने की तलाश में लेकिन खजाना ढूंढना इतना भी मुश्किल काम नहीं था पर फिर भी उन्हें बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ा ।

उस नक्शे के आधार पर चलने से पहले तो उन्होंने जंगल पार किया लेकिन जंगल पार करने के बाद उनके सामने एक पहाड़ी आ खड़ी जो कि बहुत ही ऊंची थी । और आज तक इस पहाड़ी को कोई पार नहीं कर पाया , कोई भी नहीं । चिड़ी ने कहा अब क्या करें यह पहाड़ी तो बहुत बड़ी है लेकिन चिड़ी भी कहां हिम्मत हारने वाली थी उसने कहां हम अपनी कठिन मेहनत से इस पहाड़ को गिरा देंगे और दोनों उस पहाड़ को गिराने की प्लानिंग करने लगते हैं । पूरी प्लानिंग करने के बाद उन्हें इस बात का एहसास होता है कि उनके पास फावड़ा तो है ही नहीं इस पहाड़ को गिराने के लिए , दोनों चिंता में डूब जाते हैं तभी कौवा चिड़ी से कहता है कि तुम रूको यही, मैं जाकर फावड़ा लेकर आता हूं और उड़ कर एक गांव में चला जाता है । जहां वह एक किसान को देखता है और उस किसान को जाकर कहता है कि किसान किसान मुझे फावड़ा चाहिए । क्या तुम मुझे फावड़ा दोगे । किसान ने पूछा तुम फावड़े का क्या करोगे? कोए ने कहा मुझे पहाड़ गिराना है और किसान उसकी यह बात सुनकर हंसने लगता है और उसे कहता है कि तुम्हें मुफ्त में फावड़ा नहीं मिलेगा जाओ जाकर पहले कुछ पैसे लेकर आओ । और कोआ एक पेड़ पर जाकर सोचने लगता है कि अब मैं पैसे कहां से लेकर आऊं । मैं चोर तो हूं नहीं जो किसी बैंक में डाका डाल लूं । बस इतना ही सोचना था कि वह बैंक में डाका डालने चला जाता है बैंक में जाकर वह सभी को कहता है कि इस बैंक में जितने भी पैसे हैं सब के सब मेरे इस बैग में डाल दो और बेग को पैसों से भरकर बैंक से बाहर निकल आता है और जाकर किसान को पैसे दे देता है। और उससे वह फावड़ा ले लेता है ।

इतनी मुश्किलों का सामना करने के बाद कोआं फावड़ा लेकर चिड़ी के पास आता है लेकिन चिड़ी वहां पर नहीं होती । कोवा इधर-उधर देखता है काफी ढूंढने की कोशिश करता है लेकिन उसे चिड़ी नहीं मिलती थोड़ा और ढूंढने पर उसे एक कागज का टुकड़ा मिलता है । देखने से पता चला की यह कागज का टुकड़ा नहीं चिड़ी का लिखा हुआ खत है । खत में लिखा था डियर कोऐ मुझे पता है जब तुम्हें यह खत मिलेगा तो मैं यहां नहीं होंगी । मुझे पहाड़ पर फिरते फिरते पानी मिल गया था और वह पानी लेकर मैं घर चली गई । अब वह पानी में गाड़ी में डालूंगी और खेत जाऊंगी जहां जाकर बुवाई करूंगी । तुम भी आ जाना । इसे पढ़कर कोऐ को गुस्सा आ जाता है और उसने कहा चिड़ी कितनी आलसी है । इस पहाड़ को गिराने के काम से बचने के लिए वह खेतों में बुवाई करने चली गई लेकिन मैं ऐसा नहीं करने वाला हूं । मैं इस पहाड़ को गिरा कर ही रहूंगा और वह पहाड़ को गिराने लग जाता है । 3 दिन लगातार मेहनत करने के बाद वह पहाड़ को गिराने में कामयाब हो जाता है और उस पहाड़ को गिराकर पहाड़ के दूसरी तरफ चला जाता है । जहां पर वह देखता है उसकी साथी चिड़ी पहले से ही वहां पर है और वह खेतों में बुवाई कर रही है । दोनों एक दूसरे को देख कर हैरान हो जाते हैं और उन्हें कुछ समझ में नहीं आता काफी सोचने के बाद उन्हें पता चला कि उनका खेत ही इस पहाड़ के दूसरी तरफ है । अब वह दोनों खेतों में बुवाई करने लग जाते हैं । बुवाई करने के बाद वह सोचते हैं कि क्यों ना अब इस खजाने को ढूंढा जाए और दोनों अब आगे के सफर को तय करने का सोचते हैं ।

अब दोनों आगे चलते हैं चलते चलते उन्हें प्यास लग जाती है । लेकिन उनके पास फिर पीने के लिए पानी नहीं होता । कोआ कहता है कि प्यास के मारे मेरी तो जान ही निकलती जा रही है और इतना कहकर वह मर जाता है । चिड़ी भी कोए को मरते हुए देखती है लेकिन उसने कहा मैं तुम्हें मरने नहीं दूंगी । मैं तुम्हारे लिए यमराज से भी लड़ जाऊंगी और कोऐ के आसपास पहरा देने लगती है और यमराज का इंतजार करती है । कुछ देर बाद यमराज वहां पर आता है और वह कहता है कि हट जाओ मेरे रास्ते से मुझे कोऐ की आत्मा अपने साथ लेकर जानी है । लेकिन चिड़ी कहां मानने वाली थी उसने कहा अगर तुम्हें कोऐ की लाश लेकर जानी है तो पहले तुम्हें मेरी लाश के ऊपर से जाना होगा। यह सुनकर यमराज भावुक हो जाता है और उस कोऐ की जान को बख्श देता है और उसे वापस जिंदा कर देता है । अपने आप को जिंदा देखकर वह बहुत खुश होता है और चिड़ी से कहता है कि अगर आज तुम ना होते तो मैं तो कब का मर चुका होता । और अब दोनों आगे चलने लगते हैं ।

चलते चलते फिर से रात हो जाती है लेकिन इस बार वह आग जला लेते हैं और रात को भी सफ़र जारी रखते हैं । लगातार चलते चलते वह खजाने के पास पहुंच जाते हैं और उनके सामने एक अंधेरी गुफा आती है । खजाने को पाने के लिए उन्हें इस गुफा से गुजरना पड़ेगा लेकिन यह गुफा बहुत ही खतरनाक होती है । हमम कहते हैं कि जो भी आज तक इसके अंदर गया है वह कभी लौटकर नहीं आया । पास खड़े एक बुजुर्ग उल्लू ने कहा मत जाओ वहां मत जाओ वहां मौत तुम्हारा इंतजार कर रही है , इस गुफा में लाखों सालों से डरावने भूत रहते हैं जो कि अंदर जाते ही तुम्हें मार देंगे । लेकिन कोआ और चिड़ी को इस बात से डर नहीं लगता क्योंकि वह दोनों बहुत बहादुर होते हैं और दोनों गुफा के अंदर चले जाते हैं ।

अंदर जाते ही कुछ चमकादड़ेे उड़ती हुई उनके सामने आती हैं और वह दोनों डर जाते हैं । लेकिन कुछ ही देर में सभंल जाते हैं और वापिस अंदर चलते हैं ।आगे जाकर गुफा दो रास्तों में बंट जाती है एक दाई तरफ और एक बाई तरफ । चिड़ी और कौवा दोनों कंफ्यूज हो जाते हैं कि किस तरफ जाया जाए । कौवा कहता है कि दाएं तरफ तो चिड़ी कहती है बाए तरफ दोनों ने सोचा क्यों ना ठोस कर लिया जाए और दोनों का सिक्का उछालते हैं और दाएं ओर जाने का निर्णय करते हैं । चिड़ी और कौवा दोनो दाई ओर चले जाते हैं चलते चलते काफी दिन बीत जाते हैं लेकिन खजाने का कोई अता-पता नहीं होता । और कुछ ही समय बाद मैं वापस अपने आप को उसी जगह पर पाते हैं जिस जगह से उन्होंने सफर शुरू किया था । दोनों हैरान काफी सोचने के बाद उन्हें पता चला कि यह दोनों गुफाएं एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं दाएं जाओ चाहे बाय हम घूम फिर कर वापस उसी जगह पर आ जाएंगे लेकिन वह दाई और की गुफा देख चुके थे । अब वह दोनों भाई दूसरी गुफा की तरफ जाते हैं।

कुछ चलने के बाद उन्हें सामने एक बड़ा दरवाजा दिखाई देता है जो कि पिछले कुछ सालों से इस तरह से बंद है कि उसे कोई ना खोल पाए । दोनों उस दरवाजे को खोलने की कोशिश करते हैं लेकिन कामयाब नहीं हो पाते । तभी कौवा ने सोचा कि क्यों ना इस दरवाजे को तोड़ दिया जाए और वह एक बड़ी सी लक्कड़ लाकर उस दरवाजे पर जोर से मारता है । मार इतनी जबरदस्त होती है कि दरवाजा पल में ही टूट जाता है । अब वह आगे बढ़ते हैं आगे बढ़ने पर उनकी मुलाकात एक भूत से होती है जो कि काफी खतरनाक होता है । भूत ने कहा कि चले जाओ यहां से वरना मैं तुम दोनों को मारकर खा जाऊंगा लेकिन कोऐ ने उसकी बात नहीं सुनी और उस पर झपट्टा मारकर उस भूत को मार दिया । उस भूत को मारने के बाद वह दोनों आगे बढ़ते हैं।

कुछ और चलने के बाद उन्हें आगे खाई दिखाई देती है जिसमें पानी की जगह लावा बह रहा होता है और उसका पार करने के लिए एक छोटा सा फूल बना होता है । चिड़िया और कौवा दोनों उस पुल को पार करने की कोशिश करते हैं लेकिन बीच में ही चिड़ी की नियत बिगड़ जाती है और वह कोऐ को इस खाई में गिराने की प्लानिंग बनाती है ताकि वह खजाने पर अकेले राज कर सके । जैसे ही चिड़ी उस पुल को पार करती है वह चाकू से उस फूल की रस्सी को काटने की कोशिश करती है ताकि कोआ उस लावा में गिर जाए और गिर कर जल जाए और कामयाब भी हो जाती है । लेकिन कोआ भी बहुत होशियार होता है जैसे ही पुल टूट कर लावा में गिर जाता है वह अपने पंख फड़फड़ा कर उड़ने लग जाता है और उड़ कर वापिस चिड़ी के पास आ जाता है और उसे कहता है कि यह क्या कर रही थी तुम। चिड़ी भी होशियार होती है और वह कहती है कुछ नहीं मैं तो अपने चाकू की धार देख रही थी क्या पता आगे इसकी जरुरत पड़ जाए और दोनों आगे बढ़ने लगते हैं । आगे बढ़ते बढ़ते सुबह हो जाती है लेकिन गुफा का कोई अंत आने को नहीं
वह दोनों हैरान परेशान हो जाते हैं और थोड़े थोड़े निराश होना भी शुरू हो जाते हैं । अब निराशा उनके चेहरे पर साफ देखी जा सकती थी । तभी उन्हें एक बूढ़ा बाबा मिलता है जो काफी पहुंचे हुए होते हैं । और उस चिड़ी और कोए को कहते हैं कि अगर तुम लोग ऐसे ही चलते रहे तो तुम्हें खजाना कभी नहीं मिलेगा अगर तुम्हें खजाना चाहिए तो तुम्हे इस जमीन को खोदना होगा और और इतना कहकर संत बाबा गायब हो जाता है

दोनों जमीन को खोजने की कोशिश करते हैं लेकिन 8 साल तक खोदने के बाद भी उन्हें कोई सफलता नहीं मिलती क्योंकि इसके लिए उसे बहुत गहराई तक जाना होता है । वह थक हार कर बैठ जाते हैं और उस संत बाबा को फिर से याद करते हैं । बाबा आ जाते हैं और वह दोनों बाबे को अपना हाल बताते हैं । बाबा ने कहा कोई बात नहीं और इतना कहकर उनकी आंख से एक रोशनी निकलती है और उस गड्ढे को पूरा खोद देती है और कहते है जाओ अब तुम आगे जा सकते हो ।

दोनों अब धरती के अंदर गहराई में जाने लगते हैं वह इतनी गहराई के अंदर जाते हैं कि आधी धरती को पार कर जाते हैं । वहां पर उन्हें कुछ लिखी हुई चीजें मिलती है जिस पर लिखा होता है कि अगर तुम्हें खजाना चाहिए तो और नीचे जाओ और वह दोनों वैसे ही करते हैं । वह और गहरा जाना शुरु करते हैं इतना गहरा इतना गहरा कि वह धरती के दूसरे सिर पर आ जाते हैं और धरती को आर पार पार कर जाते हैं । वहां पर आकर देखते हैं कि वहां बर्फ के सिवाय और कुछ नहीं जिधर देखो उधर उधर बर्फ और आगे उन्हें एक पत्थर मिलता है जिस पर खजाने के बारे में कुछ लिखा होता है लेकिन वह किसी और भाषा में होता है । लेकिन काफी मशक्कत करने के बाद मैं उसे पढ़ने में सफलता हासिल कर लेते हैं और उन्हें पता चलता है कि आज से 5 साल पहले ही इस खजाने को कोई यहां से उठाकर ले गया पर कहां ? थोड़ा और पड़ने पर उन्हें मालूम पड़ता है कि वह खजाना कोई चांद पर ले जा चुका है । अगर उन्हें खजाना हासिल करना है तो उन्हें चांद पर जाना होगा और दोनों चांद पर जाने की तैयारी करने लगते हैं लेकिन वह जाए तो जाए कैसे । पास में ही एक साईंस लैब होती है जहां पर एक रॉकेट चांद की ओर जाने की तैयारी कर रहा होता है दोनों भाग कर उस पर बैठ जाते हैं और उस रॉकेट के साथ ही स्पेस में चले जाते हैं ।

स्पेस के जीरो ग्रेविटी में उन्हें बहुत मजा आता है और वह इधर उधर गोते लगाते हैं लेकिन इस गोते लगाने के दौरान वह स्पेस में अकेले ही रह जाते हैं और रॉकेट बहुत आगे निकल जाता है । अब वे स्पेस में ना तो दाएं और जा सकते हैं ना ही बाई और बेचारे दोनों बीच में फस गए । तभी धरती पर पता लगता है कि एक चिड़ी और एक कोआ स्पेस में फंसे हुए हैं और वह भी उनकी वजह से तब वह उनको बचाने का प्रोग्राम बनाते हैं । और एक और रॉकेट उनकी तरफ भेजते हैं जिसमें खाने पीने का सामान और कुछ कपड़े होते हैं ताकि कहीं वह दोनों स्पेस में भूख से ना मर जाए । कुछ दिनों में वह रॉकेट उन दोनों तक पहुंच जाता है और उन्हें खाने पीने का सामान देता है । खाना-पीना पूरा कर दोनों चिड़ी ओर कां अब आगे के सफर पर निकलते हैं और चलते चलते मतलब उड़ते-उड़ते चांद तक पहुंच जाते हैं लेकिन चांद पर जा कर उन्हें प्यास लग जाती हैं और वह दोनों इधर उधर पानी की तलाश करने लग जाते हैं लेकिन उन्हें पानी कहीं नहीं मिलता क्योंकि चांद पर पानी तो है ही नहीं । फिर उन्होंने सोचा कि अगर जमीन पर पानी नहीं तो जमीन के अंदर ही खोज लिया जाए और वह दोनों चांद को खोदना शुरू करते हैं और पूरे चांद को खोद डालते हैं लेकिन उन्हें पानी कहीं नहीं मिला । प्यास के मारे उनके गले और सूखने लग जाते हैं फिर उन्होंने सोचा कि क्यों ना मंगल ग्रह पर जाया जाए वहां तो पानी जरूर मिल जाएगा और दोनों मंगल ग्रह की ओर निकल पड़ते हैं ।

कुछ ही दिनों में वह दोनों मंगल ग्रह पर पहुंच जाते हैं लेकिन वहां आकर देखते हैं कि जहां पर तो रेत के सिवाय और कुछ नहीं । बीच-बीच में कुछ पहाड़िया है फिर आसपास काफी ढूंढने पर उन्हें पानी का नामोनिशान नहीं मिलता । वह दोनों हताश हो जाते हैं और फिर से उस संत बाबा को याद करते हैं जिन्होंने उनकी मदद धरती पर की थी याद करने पर संत महात्मा तुरंत प्रकट हो जाते हैं दोनों उन्हें अपनी समस्या बताते हैं और संत महात्मा कहते हैं कि तुम चिंता मत करो और इतना कहकर उनकी आंख से एक रोशनी निकलती है की मंगल ग्रह पर पानी ही पानी हो जाता है ।

इतना पानी कि वह दोनों ढूंबने लग जाते हैं और डूबते-डूबते मैं फिर से मरने की हालत तक पहुंच जाते हैं तभी कोऐ ने कहा क्यों ना हम एक किश्ती बना लें ताकि इस पानी बचा रहा जा सके और दोनों एक लकड़ी की किश्ती बनाते हैं और उस पानी पर तैरने लगते हैं । दूर दूर देखने पर पानी के सिवाय और कुछ नहीं दिखाई देता जिधर देखो उधर पानी ही पानी । पूरा मंगल ग्रह पानी से भरा पड़ा था अब उनके सामने बस एक ही समस्या थी किसी तरह सतह की खोज की जा सके ताकि वे लोग वहां पर रह सके । पानी में जहां पर ना तो खाने को कुछ है और ना ही पीने को , बचना नामुमकिन है । सतह को ढूंढते-ढूंढते वह बहुत आगे निकल आते हैं और और उन्हें पता चलता है कि मंगल ग्रह पर कहीं भी सतह नहीं है । उन्हें किसी और ग्रह पर जाना होगा लेकिन कौन से ग्रह पर । तब उन्होंने अपनी जेब से उस खजाने का नक्शा निकालना जिसके दूसरी तरफ स्पेस का नक्शा बना था उस नक्शे को काफी देखने के बाद उन्होंने बुध ग्रह पर जाने की प्लानिंग बनाई ।

वह दोनों बुध ग्रह की ओर निकल जाते हैं । उड़ते-उड़ते अंधेरा और भी घना हो जाता है और रास्ते में कोई ठहरने की जगह भी नहीं थी । तभी उन्होंने एक सेटेलाइट पर कुछ देर के लिए आश्रय लिया वहां से खाना-पीना कर आगे के सफर में निकल गए । कुछ ही दिनों में वह बुध ग्रह पर पहुंच गए लेकिन बुध ग्रह तो बहुत ही गर्म ग्रह हैं और वहां पर पीघली हुई गैसों के सिवाय और कुछ नहीं । गेंसें इतनी सघन थी कि दोनों का दम घुटने लगा और ऑक्सीजन की कमी से मरने के कगार पर आ गऐ । वह मरने ही वाले थे कि तभी वह संत महात्मा को याद करते हैं । सच्चे मन से याद करने पर संत महात्मा तुरंत ही प्रकट हो जाते हैं और संत महात्मा आ कर उनकी हालत देखते हैं । इससे पहले कि दोनों कुछ कहते संत महात्मा की आंख से एक रोशनी निकलती है और बुध ग्रह की गेसिंय सतह ठोस हो जाती है और वहां पर ऑक्सीजन भी प्राप्त मात्रा में आ जाता है । जिससे दोनों ज़िंदा रह सके । अब बुध ग्रह पर सब कुछ था जो जीने के लिए चाहिए था ‌। दोनों हंसी खुशी अपना जीवन वही बिताते हैं
कुछ महीनों बाद उनके दो बच्चे होते हैं एक का नाम वह हीरा रखते हैं और एक का सुस्त रखते हैं । हीरा पढ़ने में काफी होशियार और मेहनती होता है जबकि सुस्त बिल्कुल आलसी । पिता उन दोनों बच्चों को उस खजाने के बारे में बताते हैं जिन्हें वह दोनों ढूंढने की कोशिश कर रहे थे । तभी हीरा ने कहा कि पापा आपका सपना मैं पूरा करुंगा उस खजाने को अब मैं ढूढु गा और उसे ढूंढ कर आपके पास ले कर आऊंगा यह मेरा आपसे वादा रहा । और इतना कहकर दोनों सो जाते हैं

चलो बेटा अब तुम भी सो जाओ आगे की कहानी मैं तुम्हें कल सुनाऊंगा क्योंकि खजाना ढूंढना अभी बाकी है

पास में ही खड़ी बेटी की मां कहानी सुनकर अपनी सुध-बुध खो देती है और कहती है कि यह क्या था

झूठ बोलने की भी हद होती है

बेटी के पिता – भाई कहानी थी

अभी इसका एक पार्ट और बाकी है वह इसे कल सुनाऊंगा

 

आपको हिना के पापा की कहानी कैसे लगी और आप इसे 10 में से कितने पॉइंट देना चाहेंगे कमेंट कर हमें जरूर बताएं

धन्यवाद

Written By – Aman for Comic Haveli

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12 Comments on “झूठ बोलने की भी हद होती है”

  1. कहानी बहुत मस्त है।
    मैं इसे 9 points देता हूँ।
    एक कौए को पूरा ब्रह्मांड घुमा दिया।
    बचपन मे पढ़ी पंचतंत्र की कहानियां याद आ गयी। पर बिल्कुल अलग ही ढंग से।
    अगला भाग भी जल्दी ही लाओ।

  2. हाहाहा।
    बहुत ही शानदार कहानी।
    पढ़ कर सच मे बहुत ही ज्यादा मजा आया।
    बेसिर पैर की कहानी का अपना ही अलग मजा है।
    हाहाहा।
    अमन जी बहुत ही अच्छी कहानी।
    वो बाबा कहीं मिल जाये तो बताना

    1. जी धन्यवाद जरूर बताऊंगा पर पहले to मुझे उसकी तलाश है क्योंकि मैं उससे तीन चार कहानियां और लूंगा

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