कमर प्रेम-भाग 1- प्रेम अंकुरण

कमर प्रेम- भाग 1- प्रेम अंकुरण –

भेड़िया : साले तू सुबह सुबह नाश्ता करके क्यों नही आता है।मैं बता रहा हूँ आज तेरे पापड़ी के चक्कर में हम लोग क्लास के लिए लेट हो जाएंगे। आज फिर मेरे पिछवाड़े पे वो बेंत लगेगी। हाय हाय। भाई बहुत ज्यादा लाल हो जाता है। अभी कल की ही लाली नही जा पाई है ढंग से।

कलुआ भेड़िया : अबे तू कितना रोता है यार। मैं भी तो रोज़ बेंत खाता हूं। मुझे तो कोई दिक्कत नही है।

भेड़िया : ते साले फौलाद का पिछवाड़ा लेकर पैदा हुआ है तो मैं क्या करूँ। भाई सच कह रहा हूँ आज सुबह टट्टी करने में पेशाब निकल आई। इत्ती जोर से मारा था कल उस बूढ़े ने। हाय।

कलुआ भेड़िया : मेरी तो रोज़ निकल जाती है। उसमें क्या नई बात है।

भेड़िया कलुआ को एक कंटाप मारता है।

भेड़िया : भावनाओ को समझ साले।

कलुआ भेड़िया : अबे रोना बंद कर और चल बैठ । चलते है स्कूल।

दोनो जल्दी से जल्दी स्कूल पहुंचते है और फिर अपनी क्लास की तरफ दौड़ लगाते है। क्लास मैं उनके शिक्षक Mr. फूज़ों पहले से मौजूद रहते है। वो उन दोनो की तरफ देखते है और एक काइयां वाली मुस्कान देते है।

Mr. फूज़ों : आ जाओ मेरे सपूतों, मेरे जिगर के टुकड़ों , प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के समान उज्ज्वल लौंडो। आ जाओ।

तभी क्लास के अंदर से एक छात्र गाना गाता है।

” आइये , आपका , इंतज़ार था। देर लगी आने में तुमको शुक्र है फिर भी आये तो।”

Mr. फूज़ों : ओहहो वाह। नही नही वाह। अरे अपनी क्लास में तो शानू दा भी है। भाई लफ़ंडर, टुच्चे, कामचोर, आलसी, मलिच्छ ही सही मगर टैलेंट है लौंडो मैं। बाहर आओ जरा तुम्हारा सा रे गा मा , पा धा नी सा करता हूँ अभी। आ जाओ बेटा। शरमाओ नही। और तुम दोनों( भेड़िया और कलुआ भेड़िया की तरफ देखकर)। सच बता रहा हूँ मैं तुम दोनों की लत लग चुकी है मुझे। तुम दोनों को कूटे बिना चैन नही पड़ रहा था। अपच सी हो गई थी। अब आ गए हो तो सब सही हो जाएगा।

भेड़िया : सॉरी सर। आज जरा बाइक का तेल खत्म हो गया था इसलिए लेट हो गई।

Mr. फूज़ों : अरे कोई नही बेटा। होता रहता है। तुम ऐसा करो जरा वो सामने जो बेंत रक्खी है वो लाओ जरा। उसकी मजबूती जांचनी थी मुझे।

कलुआ भेड़िया दौड़ कर जाता है और बेंत ले आता है।

Mr. फूज़ों : वाह। बड़ी जल्दी है तुम्हे लगता है। आओ पहले तुम ही आओ प्रसाद ले जाओ।

कलुआ भेड़िया मज़े में बेंत खाकर अपने सीट पर जाकर बैठ जाता है।

Mr. फूज़ो उसको हैरत भरी निगाहों से देखते हैं। क्या बे कोई फर्क ही पड़ा इसको तो। बेंत खा खा कर नशेड़ी हो गया है एकदम।

Mr. फूज़ों : आओ भेड़िया बेटा। तुम्हारी बारी आ गई।

भेड़िया धीरे धीरे आगे बढ़ता है ।

Mr . फूज़ों : क्या हुआ बेटा। पैर उठ नही रहे क्या जल्दी जल्दी।

तबतक क्लास के शानू दा फिर गाना गाने लगते है।

” पैरों में बंधन है,पायल ने मचाया शोर। सब दरवाज़े कर लो बंद देखो आये आये चोर।”

Mr. फूज़ो : अरे शानू दा ने तो एक और गाना पेल दिया। अब तो और ऊंचा सुर निकलेगा। (भेड़िया की तरफ देखकर) अरे तुम खड़े हो गए। चलो इधर आओ जल्दी से। और भी काम है मुझे ।

तभी दूर से कुछ छात्रों का झुंड आता हुआ दिखाई पड़ता है। कोबी उस झुंड के सबसे आगे चल रहा था और वो Mr. फूज़ो की क्लास की तरफ ही बढ़ रहा था।

Mr. फूज़ो : ओहहो। आज तो इनके दीदार हो गए। ईद का चांद हो गए थे। रास्ता भटक गए क्या कोबी।

कोबी : अरे आप ऐसा क्यों कहा रहे है सर।

Mr. फूज़ो : आज क्लास में कैसे आना हो गया। पिछली बार कब देखा था याद नही। मगर अब आ गए हो तो तुम भी प्रशाद ले जाओ। आओ लग जाओ लाइन मैं।

कोबी : हां सर बिल्कुल। मैं तैयार हूँ।

Mr. फूज़ो : इस लौंडे की डेडिकेशन देखकर आँखों से आँसू निकल आये। तुझे तो एक एक्स्ट्रा दूंगा मेरे लाल। आ जा।( भेड़िया की तरफ देखकर) कित्ता समय लेगा भाई तू खड़ा होने मैं। अब हो भी जा। और न तड़पा।

भेड़िया दीवार की तरफ मुँह करके खड़ा हो जाता है Mr. फूज़ो मारने के लिए बेंत उठाते है तभी भेड़िया चीख पड़ता है।

Mr. फूज़ो : अबे पागल है क्या बे। डरा दिया। इत्ता तेज़ चिल्लाता है कोई। मैंने तो अभी मारा भी नही।

भेड़िया : फील आ गई सर।

Mr. फूज़ो : तुझे रियल फील देता हूँ। तू खड़ा हो।

Mr. फूज़ो मारने वाले होते है तभी एक प्यारी सी आवाज़ उनका ध्यान अपनी और खींच लेती है।

” Excuse me sir. क्या ये 10th क्लास है।”

Mr. फुज़ो : जी बेटी। ये 10th क्लास है। तुम कौन हो ?

” मैं जेन हूँ। इस स्कूल मैं नई आई हूँ। आज मेरा पहला दिन है।”

Mr. फूज़ो : अच्छा अच्छा। हां बताया था प्रिंसिपल मैम ने। आ जाओ बेटी। जाओ क्लास में बैठो। आज पहला दिन है इसलिए ठीक है । कल से समय से आना।

जेन : जी सर। थैंक यू सर।

जेन क्लास के अंदर चली जाती है और इधर भेड़िया और कोबी की आँखें और मुँह खुले के खुले रह जाते है। इत्ती खूबसूरत लड़की उन्होंने आजतक नही देखी थी। अब तक तो दोनों के मन मे जेन को पटाने की तरकीब भी आनी शुरू हो गई थी। कि तभी Mr. फूज़ो की आवाज़ उनके ध्यान को भंग कर देती है।

“अरे तनिक इधर भी ध्यान देइ दो मालिक। तब से खड़े है।”, Mr. फूज़ो

कोबी और भेड़िया दोनों का ध्यान अभी भी जेन से हट नही रहा था। वो क्लास के अंदर जाकर आगे वाली सीट पर बैठ गई थी।

Mr. फूज़ो से अब रहा नही गया और उन्होंने लपेट कर एक एक बेंत रसीद की कोबी और भेड़िया को।

दोनों एक साथ चीख पड़े “अरे मोरी मइया।”

Mr. फूज़ो : मज़ा आया। बताओ यार कोई इज़्ज़त ही नही रह गई है। तब से खड़ा हूँ मारने को कोई ध्यान ही नही दे रहा है। पढाई में तो कभी नही लगा इन सब का मन अब कुटने में भी नही लग रहा है। हद्द ही हो गई है एकदम। अरे किसी काम लायक तो बन जाओ ससुरो। जाओ अपनी अपनी सीट पर बैठो।

कोबी और भेड़िया क्लास के अंदर घुसे। दोनों लगातार जेन को ही घूरे जा रहे थे और इसी चक्कर मे दोनों दीवार से टकराए और धम्म देना गिर पड़े।

Mr. फूज़ो(हाथ पर सर मारते हुए): अरे मतलब अंधे भी हो गए है ससुरे। का रे एकदमे डिफेक्टेड ही पैदा हुए रहे का तुम दोनों। कुछ बोलो तो सुनाई नही पड़ता है , कुछ लिखने को कहो तो लिखा भी नही जाता है , दिमाग तो हैय्ये नही है और अब देखो अंधे भी हो गए । बताओ सुबह – सवेरे भक्क रौशनी में औंधे मुँह गिरे जा रहे हैं। साला क्लास को कॉमेडी शो बनाकर रख दिया है यार। बताओ रोज़ क्लास का 15-20 मिनट कॉमेडी ही होती रहती है।

गुस्से में फूज़ो बाबा ने डस्टर से ब्लैक बोर्ड मिटाया और आज के पढाये जाने वाले पाठ का नाम लिखा।

Mr. फूज़ो : अच्छा तो मैने कल तुम लोगो को जो पाठ पढ़ने को बोला था वो पढ़ के आये तुम सब।

कोई कुछ जवाब दे पाता उससे पहले ही Mr. फूज़ो बोल पड़े।

“कोई पढ़ के नही आया। नालायक ही रह जाओगे तुम सब।”

Mr. फूज़ो: तो आज का पाठ पढ़ेंगे असम के जंगल की सबसे पुरानी प्रजाति ‘बौड़म प्रजाति’ के बारे में। ये प्रजाति यहां की मूल निवासी नही थी। ये यहां पर ऐसे ही एक दिन रात का खाना खाकर ऐवें ही टहलने निकले और इन्होंने इस जगह की खोज कर दी। उनके इस भर्मण मात्र से ही यहां के कई जीवो और वनस्पतियों का अंटा गफिल हो गया। उस रात दरसल इन्होंने एक जबर पार्टी रक्खी थी और ख़ूब भर भर कर खाना पेला था। उसी खाने को पचाने वो यहां पर टहलते टहलते पहुंच गए और फिर यहां आकर इन्होंने जो दुर्गंध मचाई ना मतलब की एकदमे कहर ढा दिया था उस रात। यहां के सारे जीव और वनस्पतियां तुरन्ते टपक गए। पाद पाद कर मौत का तांडव मचा डाला था इन लोगो ने। एकदम हरे भरे जंगल को पाद पाद कर बंजर बना डाला। ऐसी दैवीय शक्ति थी इनके पाद में।फिर जब इनका पेट हल्का हुआ और दिमाग काम करने लायक हुआ तो इन्होंने देखा कि अरे हमने तो एक नई जगह की खोज कर डाली। इन्होंने आस पास घूम कर देखा तो जीवो और वनस्पितियो को मरा पाया। इनको जरा भी अंदाज़ा नही था कि ये मौत का तांडव इन्होंने मचाया था। धीरे धीरे ये लोग इस जंगल में बसने लगे और इस तरह ये प्रजाति हमारे जंगल की पहली प्रजाति बना।

कोबी और भेड़िया अभी भी एक टक जेन को निहारे जा रहे थे। Mr.फूज़ो की नज़र उनपर पड़ी और वो एकदम भन्ना गए।

Mr. फूज़ो ( कोबी और भेड़िया के ऊपर चिल्लाते हुए): बैठ जाओ। उसके सर पे कुंडली मार कर बैठ जाओ।

कोबी और भेड़िया ने अभी भी उनकी ओर ध्यान नही दिया और एकटक जेन को घूरते रहे। Mr. फूज़ो का दिमाग अब हाइपर भन्ना गया था। उन्होंने आव देखा ना ताव भेड़िया को डस्टर फेंककर मारा।

भेड़िया बिल्कुल हड़बड़ा उठा और Mr. फूज़ो की तरफ देखने लगा। मगर कोबी पर अभी भी जूं तक नही रेंगी थी।

Mr. फूज़ो(गुस्से में) : एक तो इन स्कूल वालो से कहता हूँ कि एक से ज्यादा डस्टर दिया करो। बताओ एक समय मे 2-3 लड़को को कूटना हो तो डस्टर कम पड़ जा रहे हैं। ए चमगादड़ (भेड़िया की और इशारा करते हुए) वो डस्टर लाओ जो अभी फेंक कर मारा मैंने तुम्हें।

भेड़िया के कुछ बोलने से पहले ही कलुआ बड़ी मासूमियत से बोल पड़ा।

“फूज़ो सर, वो चमगादड़ नही भेड़िया है ।”

Mr. फूज़ो : ओ हो हो हो। वाह, नही नही वाह। कोई नोबल पुरस्कार ले आओ भाई। पहली बार मेरे लाल के मुँह से कुछ फूटा है। अच्छा मेरे लाल ये बता की चमगादड़ कैसे होते है ?

कलुआ(काफी देर सोचने के बाद): वो रात में जागते है पेड़ो से उल्टा लटकते हैं ऐसे कुछ हीहोते है।

Mr. फूज़ो: तो सोच मेरे लाल की तुम सब चमगादड़ों में और उन सब चमगादड़ों में कोई अंतर है। नही ना।(भेड़िया की तरफ देखकर) एक तो इस कामचोर से एक काम नही होता है। का बे, तुमसे कब से कहे है डस्टर लाने को। का कर का रहे हो तुम ?

भेड़िया(इधर उधर नज़र घुमाते हुए): अरे फूज़ो सर हेरा गया डस्टर।

Mr. फूज़ो (दहशत में जाते हुए): अबे ऐसा ना बोलो यार। अबे ढूंढ दे भाई। अरे वो प्रिंसिपल जान ले लेगी मेरी। बड़ी खूंखार है यार। खून सुखा देगी मेरा। पिछली बार जब चॉक खोया था तो (Mr. फूज़ो सोच में डूब गए और उन्हें प्रिंसिपल का डरावना चेहरा याद आने लगा और वो अचानक ही चिल्लाये) उइ माँ। अरे वो मार डालेगी, मार डालेगी। अबे कहाँ खोआ दिया यार। सालो सलीके से मार भी नही खा पाते हो। अरे बड़ी जालिम औरत है यार। सुखा देगी यार मुझे मार मार के।

तभी क्लास के सानू दा के मुँह से गाना फूट पड़ा।

“जिंदगी मौत ना बन जाये संभालो यारो, जिंदगी मौत ना बन जाए संभालो यार, खो रहा चैनों अमन…..”

Mr. फूज़ो(क्लास के शानू दा को बीच मे ही टोकते हुए):अरे मेरे लाल,मेरे पीले। कुछ दूसरा गाना गा ले। हैं, मौत मौत गाना जरूरी है।

शानू दा(क्लास वाले):जी सर।

“मौत आनी है आएगी एक दिन,अरे जान जानी है जाएगी एक दिन, मुस्कुराते हुए दिन बिताना यहां कल क्या हो किसने जाना।”

Mr. फूज़ो ( पींपिनाते हुए बोले): अरे यार। तुझे मौत पे ही गाना याद है क्या बे। कुछ ढंग का गाना गा दे। यहां मेरी जान ऐसे ही सूखी जा रही है।कुछ ढंग का गाना गा दे।

शानू दा(क्लास वाले):जी सर।

“मौत से क्या डरना,क्या डरना, क्या डरना। मौत से क्या डरना, उसे तो आना है, दो पल की जिंदगी है,हमे अपना फर्ज निभाना है।”

Mr. फूज़ो( झल्लाते हुए बोले):चुप। एकदम चुप हो जा अब तू। अब एक शब्द ना निकलियो अपने मुँह से। ससुर पनौती कहीं का। एक ढंग का गाना नही गया जा रहा है। तबसे मौत मौत लगाया हुआ है ससुरा। अच्छे खासे जवान आदमी को मारा जा रहा है। अभी मेरी उम्र ही क्या हुई है

पूरी क्लास एक साथ बोलती है: जंगल के बुजुर्ग क्लब के सबसे बुजुर्ग मेंबर हो आप।

Mr. फूज़ो: चुप करो बेहुदो। एक काम तो होता नही है। चपड़ चपड़ जबान बहुत तेज़ चलती है।

तभी बीच मे कलुआ भेड़िया बड़ी मासूमियत से बोला।

“मगर प्रिंसिपल मैडम तो आपकी पत्नी हैं फूज़ो सर। फिर क्या डर”

Mr. फूज़ो(जिनकी जान अभी तक डस्टर ना मिलने से सूख चुकी थी): तू साले डरा रहा है मुझे। याद दिला दिला कर डरा रहा है मुझे तू। डस्टर खोज जल्दी से। अगर आज मेरी मौत आई तो तुम दोनों को मार डालूंगा। जानता भी है कि पत्नी माने होता क्या है ?

कलुआ भेड़िया :नही सर। मैं नही जानता।

Mr. फूज़ो: ‘पत्नी’। ये शब्द एक शब्द नही अपने मे पूरा वाक्य है। एक ऐसा वाक्य जो जब किसी की जिंदगी में आता है तो अपने सारे वाक्य भूल जाता है। क्योंकि ‘पत्नी’ के आने के बाद उसके जीवन में उसके मुंह से निकले किसी भी वाक्य का कोई मतलब नही रह जाता है। ‘पत्नी’ के आने के बाद उसके समस्त वाक्य गलत ही होते है और अगर ईश्वर ना करे कि कभी उसका कोई वाक्य सही हो जाये तो उसे जिंदगी भर उस एक वाक्य के लिए न जाने कितने वाक्य सुनने पड़ते हैं।

‘पत्नी’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बनता है ‘पता’ और ‘नी’। अर्थात की ‘पता नही’। मतलब तुम देख रहे हो कि ससुर ये बिचारा शब्द को भी ‘पता नही’ चला कि इस बला को क्या कह कहकर संबोधित किया जाए । इस सृष्टि के निर्माण से आजतक कोई इस ‘पत्नी’ नामक बला को समझ नही पाया है। तो ससुर हम किस खेत की मूली हैं।

ये ढाई शब्द तुझे बहुत छोटे लग रहे होंगे मगर ये है बड़े डरावने। तुझे क्या लगता है कि यमराज ने ‘सत्यवान’ की जान क्यों बक्श दी। ‘सावित्री’ के कहने से। भक्क। अबे यमराज ने देखा कि ससुरा ये इंसान तो बड़ी चालाकी दिखा रहा है। मरकर बड़ी जल्दी पीछा छुड़ा रहा है अपनी पत्नी से। और साला यहां हम जन्म जन्मांतर से रेले जा रहे है । ऐसे कैसे ससुर। इसको तो जिंदा करके ही छोड़ेंगे। बहुत चालाकी पेल रहा है ये मनुष्य। और बताओ कि हनुमान जी ने विवाह क्यों नही किया। श्री राम की सेवा तो वो ऐसे भी कर लेते। असल कारण में बताता हूँ। याद है हनुमान जी को एक बार सभी देवी और देवता आशीर्वाद देने आए थे।पता है आशीर्वाद देते हुए समस्त देवताओं ने उनसे क्या कहा। ” बेटा हनुमान अगर तुम्हें जीवन मे खुश रहना है तो कभी शादी मत करना। हमारी हालात देखकर समझ जाओ की शादीशुदा मर्द की क्या दुर्दशा होती है। और हाँ हमारी पत्नियों से कुछ मत कहना मेरे लाल वरना हमारी मौत निश्चित है । अमृत वमृत कुछ काम नही आएगा। ”

इस पत्नी नामक बला के कुछ प्रमुख लक्षण बताना चाहूंगा। ध्यान से सुनना ।

1. इनका प्रमुख कार्य होता है पतियों का जीना हराम करना। इन्ही से इनको जीने लायक प्राणऊर्जा मिलती है।

2. हमारे पुराणों में कहा गया है कि ये गृह कार्य मे बिल्कुल दक्ष रहतीं है। बिल्कुल सही लिखा है। ये बिल्कुल गृह कार्य मे दक्ष रहती है। इन्हें भली भांति पता होता है कि कब किस गृह कार्य मे पति को काम पे लगाना है। कैसे उनको बिना पगार वाला मज़दूर बनाना है।

3. इन्हें भी जोर से बोलना, कलह करना और झगड़ा करना अति प्रिय होता है। इनके प्रमुख हथियार भयंकर रूदन, अत्यधिक तीव्र स्वर में चिल्लाना और बात बात पर धमकी देकर अपने घरवालों को बुलाना होता है।

4.ये अपने पैसे को बस अपना पैसा समझती है और तुम्हारै पैसे को भी बस अपना ही पैसा समझती है। पैसों से कोई भेदभाव वाला व्यवहार नही करती है क्या। ये जबरन में फालतू की चीज़ें खरीदती है और तुम्हारा सारा पैसा उड़ा देती है। मज़ाल तुम्हारी जो तुम चूं भी कर दो।

5.इस बला की विशेषता कर्कश स्वर में चीखना, आक्रमक शैली में धमकाना और समय आने पर तेज प्रहार होता है। इनके प्रमुख हथियार बेलन, झाडू और तुम्हारी चप्पल होती है। बिल्कुल ये अपना चप्पल तुम्हे मारने में जाया नही करेगी कभी।

इनके इस प्रकोप से बचने के निम्न उपाय हैं जिनका दृढ़ता से पालन करना होता है।

1. इनके सामने कभी अपना मुँह ना खोलो। सही सुने। बिल्कुल सन्नाटा मार कर बैठो इनके सामने। एक चूं की तुमने और तुम्हारी जान गई समझो।

2.ये जो बोले वही सत्य है। बिल्कुल यही बात है। ये जो भी बोले वही सत्य होता है। इनके सामने ज्यादा ज्ञान मत पेलना कभी वरना तुम्हे पिलाये जाओगे।

3. जब मौका मिले इसके घर वालो की तारीफ कर दिया करो। जब भी लगे कि तुम्हारी जान खतरे में है तुरन्त तारीफों के पल बांधना शुरू कर दो। जीवन बच जाएगा।

4. समय समय पर इसको कुछ ना कुछ उपहार देकर इसको शांत रक्खा करना वरना तुम्हारे ऊपर चढ़ बैठेगी और कोई ससुर कुछ कर ना पायेगा।

बाकी तुम शादी कर लो बेटा। बाकी ज्ञान अपने आप ही हो जाएगा।

इतना सुनना था कि कोबी हदस के चिल्ला उठा: अबे ढूंढ दे भेड़िये। ढूढ दे। क्या कर रहा है बे। अरे जान लेगा क्या अब इस बिचारे बुड्ढे की। ढूढं साले ढूंढ।

कलुआ भेड़िया(बिल्कुल सकपका कर रोते हुए चिल्लाया): खोज दे भाई। खोज दे। क्या जान लेकर ही मानेगा।

तभी मोटू भेड़िया बोल उठा।

” फूज़ो सर आपने डस्टर को जिस कोण पे फेंका था ?”

Mr. फूज़ो (आश्चर्य से): अबे इतना कौन सोचता है भाई फेंकने से पहले।

“सोचना चाहिए था ना फूज़ो सर।”

Mr. फूज़ो: अरे कर्मजले । चुप चाप ढूंढ दे। यहां मेरा इतिहास मिटने की नौबत आ गई है और तुझे गणित की पड़ी है।

तभी इस आपाधापी में कोबी अचानक से दौड़कर Mr. फूज़ो के पास आया।

“सर सर। ये रहा डस्टर।”

उस डस्टर को देखना ही था कि Mr. फूज़ो के आँखों से आँसू निकल आये। उस डस्टर को प्यार से सहलाया और अपने हाथों में लेते हुए बोले।

“तुझे कितना ढूंढा रे पगले। कहां छुप कर बैठा हुआ था। एक बार फेंक कर मार क्या दिया। इतना नाराज़ हो गया। नही रे ऐसे नाराज़ नही होते है। मेरी साँसें अटक गई थी । अब ऐसा मत करना।”

सभी Mr. फूज़ो को बड़े ध्यान से देख रहे थे। उन्हें यकीन हो रहा था कि Mr. फूज़ो का दिमागी संतुलन हिल चुका है। तभी घण्टी बज गई और छुट्टी का एलान हो गया। सभी बच्चे भाग कर क्लास के बाहर निकले। कोबी और भेड़िया जेन के पीछे पीछे उसको निहारते हुए बढ़े चले जा रहे थे।

कोबी: अब देखो तुम सब । मैं जा रहा हूँ जेन से दोस्ती करने। अब देखो तुम लोग की कैसे एक सुंदर लड़की से दोस्ती की जाती है।

कोबी के जयकारे लगाते हुए उसके चेले चपाटे उसके पीछे जा रहे थे। कोबी भी बड़ी भौकाली में जेन से बात करने आगे बढ़ा जा रहा था। जेन भी कुछ दूरी पर खड़ी कुछ लड़कियों से बात कर रही थी। कोबी अब उसके सामने पहुंच चुका था। उसनें मुँह खोलकर उससे हेलो बोलना चाहा मगर मुँह से केवल हवा निकली। उसने थोड़ी हिम्मत बांधी और बोला।

“जेन वो मैं तुमसे….”

उसके आगे बोलने से पहले ही उसके पीछे खड़ा उसका चेला बोल पड़ा ।

“अबे ये गधे की आवाज़ में कौन बोला अभी।”

कोबी ने एक कसकर कोहनी मारी उसको।

“अरे सरदार आप। माफी देइ दयो। मैं समझा कि कोई गधा बोला।”

कोबी ने उसको एक नज़र घूरा और फिर जेन की तरफ बोलने को मुड़ा। मगर उसके कुछ बोल पाने के पहले ही एक आवाज़ जेन के पीछे से आई और जेन उस ओर देखने लगी।

“जेन । तुम आ गई। पहला दिन कैसा रहा तुम्हारा।”

कोबी(अपने चेले के बाल नोचते हुए): कौन है बे ये। क्या कर रहा है यहां पर।

चेला: सरदार ये हमसे एक साल सीनियर है। ये भी आज ही आया है स्कूल में।

जेन उस व्यक्ति को देखकर बहुत खुश हुई और बोली।

“अरे तुम आ गए। तुम्हारा ही इंतज़ार कर रही थी मैं। कहां रह गए थे।”

“अरे बस थोड़ा घूम टहल रहा था । आओ चलो बाहर एक चचा की चाट की दुकान लगी है। चलो वहां चाट खाते है।”

“हाँ चलो।”

जेन खुशी खुशी उसके साथ चाट खाने चली गई और कोबी गुस्से में अपने चेले चपाटों का बाल नोचने लगा।

क्रमशः।

कौन है ये व्यक्ति? जेन इसे कैसे जानती है? कोबी और भेड़िया अब आगे क्या क्या गुल खिलाएंगे ? इन सभी सवालों के जवाब आपको मिलेंगे ‘कमर प्रेम’ के अगले भाग में। इंतज़ार करे।

लेखक : दिव्यांशु त्रिपाठी

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19 Comments on “कमर प्रेम-भाग 1- प्रेम अंकुरण”

  1. हाहाहाहा बहुत जबरदस्त मजा आ गया एकदम।
    ये इतने कितने भेड़िये ला दिए हाहाहा।
    कुछ पंचेस शानदार बन पड़े हैं।
    जेन पर सभी लट्टू हैं और कौन है ये नया हीरो?
    मजा आ ही रह था कि स्टोरी का ये पार्ट खत्म। आशा है अगला पार्ट काफी जल्दी आ जाये।

    1. धन्यवाद देव भाई। आप जैसे बड़े लेखक को ये कहानी पसंद आई ये जानकर बहुत अच्छा लगा। कहानी पर आते है तो स्कूल था तो भेड़ियों को तो लाना ही था। आगे और भी मज़ेदार लोग आएंगे। बस ििइंतजार कीजिये अगले भाग का।

  2. सानू दा के गाने
    अरी मोरी मईया
    प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसे उज्ज्वल लौंडों
    जैसे संवाद
    सरकारी स्कूल है पक्का

    Total मस्ती

    आप की इस कहानी को like रूपी प्रसाद दिया जाता है ।

    शुभकामनाएं

    1. बहुत बहुत धन्यवाद भाई। आपको कहानी मज़ेदार लगी जानकर बड़ा अच्छा लगा। अगला भाग जल्द ही आएगा।

  3. hahaha…mujy nahi pata aapne yeh kahani kya soch kar likhi..par ma kasam mjaa aa gyaa pad kar…has has kar mera tho pichwada hi dard krne lga hai …..kobi aur bhediye ki bhut hi interesting story utaayi hai aapne. …punch m jo mjaa aapne daala wo kaabile taarif thaa….iska second part jb chahy tb post kijiye …kyunki is part ka hi mjaa shaayd zindgi bar nhi utrne wala

    1. अरे बहुत बहुत धन्यवाद भाई। बड़ा समय लग गया इस कहानी को लिखने में मेरी पिछली कहानी के बाद। मगर सबको पसंद आई ये देख कर अच्छा लगा। अगला भाग जल्द ही आएगा।

  4. बहुत ही शानदार कहानी की शुरुआत. इतना बढ़िया comic timing है कि हर लाइन बिल्कुल जगह पे पड़ती है और अपना असर छोड़ जाती है. Divyanshu जी की कॉमेडी बहुत उम्दा लगी. अगले पार्ट का इंतजार रहेगा.

    1. अरे बड़े लेखक साहब को मेरी कहानी अच्छी लगी जानकर मज़ा ही आ गया। बहुत बहुत धन्यवाद साहब। अगला भाग बहुत जल्द होगा आपके समक्ष।

  5. अरे गुरूजी!!

    क्या कमाल ही कर डाला है आपने, उज्ज्वला योजना की तरह उज्ज्वल कुँवारों की जिंदगी को ,विवाह कर पत्नी के हाथों अमावस्या की रात न बनाने देने की अच्छी ,बल्कि बहुत ही अच्छी कोशिश की है आपने।

    बस ये बताने का कष्ट कीजिये, ये स्कूल है कहाँ ??
    मुझे भी पढ़ने जाना है, हीहीही ……………

    वैसे आपने “पत्नी” नामक जीव का बहुत सही से विस्तृत वर्णन किया है, और Mr. फूजो जी अपनी पत्नी से इतना खौफ खाते है, बाप रे………..
    वैसे ये प्रिंसिपल मैम हैं कौन???
    मतलब Mr. फूजो की पत्नी कौन है,
    और जेन भी आ गयी वाह , अभी तो और मज़ा आने वाला है, अगले भाग का इंतेज़ार रहेगा, आशा है आप शीघ्र प्रस्तुत करेंगे।

    वैसे क्या कॉमेडी लिखते है आप, शानदार पंचेस, हरेक लाइन में हँसी छूट जा रही है और भेड़िया – कोबी जंगल के जल्लाद से , जंगल के एक जल्लाद के हाथों बेत की मार का स्वाद चख रहे है वाह वाह.……….
    और जल्लाद को भी अपने से किसी बड़े जल्लाद का बहुत भयंकर वाला डर है।

    सानू दा (क्लास वाले) ने तो बीच बीच मे गानो के माध्यम से कमाल ही कर दिया है, ये आपके लिए भी है कि भले देर भई आने में मगर शुक्र है स्टोरी तो बड़ी कमाल की लाये। हँसते हँसते तो सबका ही पेट फूल जा रहा होगा, मेरा भी यही हाल है।

    वैसे दूसरे दल का लीडर यानी कोबी भी लड़की से डरता है, और सरप्राइज एंट्री वाले लौंडे को मैं अच्छी तरह से जानता हूँ…… हीहीही……..….(मजाक था भई मज़ाक)

    कमबख्त हँसी रोके न रुक रही है,अब तो हमेशा हँसी का डोज चाहिए और वो मिलेगा आपकी कहानियों के माध्यम से।
    पूरी कहानी एकदम सॉलिड है, अगले भाग का बेसब्री से इंतज़ार है।
    और आपके अपने एरिया वाले जो वर्ड यूज़ किये है वो एकदम कमाल के है।।

    1. धन्यवाद भाई। सबसे लंबा रिव्यु तुम्हारा ही रहा। अभी आगे और बहुत लोगो का बैंड बजना बाकी है। बस अगले भाग का ििइंतजआर करो।

  6. वाह ! जबरदस्त,शानदार बहुत ही अच्छी कॉमेडी स्टोरी जो शुरुआत से लेकर अंत तक बांधे रखती है और पेट पकड़ कर हसने पर मजबूर भी करती है काफी समय के बाद ऐसी स्टोरी आई है।
    स्टोरी, कॉमेडी , और लास्ट का सस्पेंस बढ़िया है ।
    आप ऐसे ही लिखते रहिये और हमें हँसाते रहिये ।

    1. बहुत बहुत धन्यवाद भाई आपका। और बिल्कुल ऐसे ही आप सभी का मनोरंजन करता रहुंगा मै। अगला भाग जल्द ही आएगा।

  7. बहुत ही धमाकेदार शुरुआत की है स्टोरी की फुजो का अलग ही जलवा देखने को मिला है और बुड्ढे thudde को भी किसी का डर है और इतना डर मज़ा आ गया और फूजो और डस्टर की प्रेम तड़प ने तो पेट को दर्द से तड़पा दिया भाई साब

    1. हा हा हा। धन्यवाद सागर भाई। जानकर अच्छा लगा कि आपको कहानी पसंद आई। आपने ही तो सुझाव दिया था कमर प्रेम लिखने का। आगे अभी बहुत धमाल होगा।

  8. sunny apki story ka intzaar to kab se tha kareeb 1saal se
    per jab aai hai to ek dum jabra waiting for next part

    1. बहुत बहुत धन्यवाद मोनी जी। आप सही कह रही हैं। काफी समय बाद लिखी मैंने कोई कहानी। और इस कहानी पे आप सबके द्वारा दिये गए प्यार को देखकर में गद गद हूँ। अगला भाग जल्द आएगा।

  9. Bahut badhiya shuruat rahi, Fuzo baba ka teacher wala roop achcha laga. Unka dukhda padhkar hasi bhi aayi hai aur gam bhi hua. Agli baar unki wife ka tagda role rakhna. Kala bhediya ka role badhiya raha. Kala bhediya bhi jane ke prem main pade to aur bhi maza aajaaye. Kuch kuch typo dikhe lekin hasi ke aage ignore ho gaye. Has has kar pet dard karne laga kahani padhte waqt. Aaspaas ke log pagal samajh rahe honge mujhe. Aise hi badhiya kahani likhte rehna.

    Chetavani: Kahin koyi mahila mandal patni ka vivran padhkar aap par case na thok dein. Dhyaan rakhiyega.

    Sirf 1 sujhav: Ashleel shabdo ka prayog band karein. Unke doosre roop jaise pant gili hona/peeli hona ya phir kuch aur jo aam bolchaal main sahi lage unka istemaal karein. Baaki jo aapko sahi lage waise hi likhiyega. Bahut badhiya laga padhkar.

    Agle bhaag ka intezaar rahega.

  10. Kahani ko shuruat bahut badhiya hai,,, sath hi kobi, bhediya , Jen aur fujo ke naye roop bhi bahut majedar hai…
    sath me singers wala punch bhi gajab hai..
    kai jagah to hansi nahi rok rahi thi…

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