NaagBharat – (Aarambh Parv)

# नागभारत#

Year 2030
स्थान-एक निर्जन द्वीप
ऊपर से सब कुछ शांत। पर द्वीप के अंदर बहुत हलचल थी । सारे महाखलनायक आज वहाँ मौजूद थे। रोबो ,मिस किलर ,नागदंत , काल पहेलिया , प्रोफेसर , थोडांगा इत्यादि ।
एक मंच पर कुर्सी रखी है जोकि खाली है ।
रोबो – इस नागपाशा ने हमें यहाँ क्यूँ बुलाया है ?
मिस किलर- हमें ही नहीं लगभग 100 लोगों को बुलाया है ।
नागदंत – लगता है फिर से नागराज को मारने का कोई प्लान है ।
थोडांगा – बेचारा नागपाशा , एक ही काम करके बोर नहीं होता ?
मिस किलर – तुम भी तो बोर नहीं होते , सबसे पहले तुम्हीं आए हो ।
थोडांगा- वो क्या है मैं जंगलों में बैठा बोर हो रहा था तो सोचा थोड़ा घूम ही लूँ ।
तभी मंच पर गुरुदेव आता है ।
“आप सभी का स्वागत है । आप सबको पता ही है कि मैं नागपाशा पर एक गुप्त प्रयोग कर रहा था ।”
रोबो – और इस प्रयोग में नागपाशा मारा गया ।
और हम लोगों को उसकी फोटो पर फूल चढ़ाना है ।
गुरुदेव- नहीं । धैर्य रखो रोबो । इस प्रयोग से मैं ने उसके दुर्गुणों को निकाल दिया है ।और जो बचा है वो है नरकपाशा।
“तो हम लोगों को यहाँ उसके दर्शन के लिये बुलाया है ।”
तभी नरकपाशा आता है ।
नरकपाशा – बिल्कुल नहीं आप सबको यहाँ नर्कशत सेना बनाने के लिये बुलाया गया है ।
आप और मैं मिलाकर यहाँ 100 लोग हैं । हम मिलकर बनायेंगे नर्कशत सेना , जिसके आगे ब्रह्मन्ड रच्छक भी नहीं टिक पायेंगे ।
नगीना- ये ख्वाब तो हम वर्षों से देख रहे हैं ।
रोबो – इस बार ऐसा क्या खास है ।
नरकपाशा – वजह तो बहुत है पर एक खास वजह है।
“क्या” सबने एक साथ पूछा ।
” सुपर कमांडो ध्रुव गायब है ।”

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” कहाँ गायब है ध्रुव ” डोगा बोला ।
( एक कमरे में नागराज , तिरंगा , डोगा ,परमाणु , इं० स्टील और प्रोबॉट बैठे हैं । )
स्टील- ध्रुव इस पूरे ब्रह्मान्ड में नहीं है ।
तिरंगा – केवल ध्रुव ही नहीं शक्ति व सारे विस्तृत ब्रह्मान्ड रच्छकों का कुछ पता नहीं है ।
परमाणु – उन सबको आखिरी बार ध्रुव के साथ ही देखा गया था ।
नागराज-पर ध्रुव आखिरी बार तुम्हारे पास आया था । है ना प्रोबॉट?
प्रोबॉट-हाँ । और उसी ने मुझे कहा था मुझे ढूँढना मत। लगभग 1 महीने पहले की बात है। मैंने पूछा भी तो उसने कहा मैं एक असंभव कार्य करने जा रहा हूँ । लौटकर आना मुश्किल है। उसीने मुझे अागे क्या करना है सब बताया।
स्टील-पर हमें यहाँ क्यूँ बुलाया है तुमने।
प्रो-विसर्पी की शादी के लिये।तुम सबको नागद्वीप जाना है।
नागराज-पर उसमें तो अभी 1हफ्ता है।
प्रो-हाँ।पर उससे पहले तुम लोगों की 1ट्रेनिंग होगी
ति-कुछ समझ में नहीं आया।
प्रो-जब ध्रुव आया था तो उसने कहा था कि नागद्वीप जाने से पहले तुम लोगों को इससे ट्रेनिंग लेनी होगी।
(प्रोबॉट 1बटन दबाता है। एक रोबॉट प्रकट हो जाता है)
प्रोबॉट-ये probot version- 2  है ,एक जैविक रोबॉट।
डोगा-ध्रुव इसको साथ ही लाया था क्या?
प्रोबॉट-नहीं। उसने केवल आइडिया दिया था ।बनाया मैंने है।
नागराज-ठीक है ,हम तैयार हैं ।ट्रेनिंग कब से शुरू करनी है ।
“अभी से।”
ठीक उसी समय उस द्वीप पर –
रोबो-ठीक है हम तैयार है ।
नरकपाशा-तो ठीक है।सारी तैयारियाँ पूरी कर लो ।ठीक 1 हफ्ते बाद हम सब नागद्वीप के लिए निकलेंगे।

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समय बीतता गया ।
प्रोबोट 2  ने उन सबको आयुध का प्रशिक्षण दिया।
छः दिन बीत गये।
डोगा- आज प्रोबोट 2 ने हम सबको क्यूँ बुलाया है।
नागराज -शायद आज कोई परीक्षा हो। आज आखिरी दिन जो है।
सब एक मैदान में पहुँचते हैं। 1 तस्वीर रखी है जोकि पूरी काली है बीच में एक सफेद बिंदु है।

प्रोबोट 2 – क्या दिख रहा है?
“एक काली तस्वीर”-नागराज के अलावा सब बोल उठे।
नागराज-नहीं।एक सफेद बिंदु । जोकि प्रतीक है कि एक सफेद बिंदु भी पूरी तरह अंधकार को अपना सम्राज्य फैलाने से रोक सकता है।
द्रोण-शाबाश!अब तुम लोगों की शिक्षा पूर्ण हुई।
तुम लोग अब जा सकते हो।
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स्थान – नागद्वीप
“आप समझ क्यों नहीं रहे हैं अमात्य! महात्मा कालदूत के बिना मैं ये विवाह नहीं कर सकती।”-विषर्पी लगभग चिल्लाते हुए बोली।
अमात्य-महात्मन् तो ध्रुव के साथ गये हैं कुमारी। परन्तु उनका आदेश था कि ये स्वंयवर ना रोका जाए। और अब तो सारे लोग भी आ चुके हैं।
विषर्पी ने खिड़की से नीचे देखा ।एक तरफ नर्कशत सेना और एक तरफ नागराज और उसके मित्र बैठे थे।
परन्तु एक अन्य पुरूष उन सबसे अलग बैठा था। लगभग नागराज जैसा ही शरीर ,पर शरीर का रंग नीला था जबकि नागराज का रंग हरा था।
बिल्कुल शांत। विसर्पी की नजरें स्वतः ही उसपे टिक गयीं।
______
कुछ देर बाद स्वंयवर शुरू हुआ।
दरबार के बीचोंबीच एक दंड रखा था ।
अमात्य-क्या आपको लगता है कुमारी कोई इस शर्त को पूरा कर पायेगा ।
विसर्पी-पता नहीं अमात्य पर ध्रुव ने ऐसा ही कहा था । और महात्मन् भी उससे सहमत थे।
कुछ देर बाद अमात्य ने घोषणा की
“जो भी इस दंड को उठा कर तोड़ देगा , वही इस स्वंयवर का विजेता होगा । परंतु याद रहे यह दंड देव कालजयी के विष से निर्मित है।”
धीरे धीरे सब प्रतियोगी आते गए ,परन्तु कोई भी उसे उठा न सका ।
फिर नरकपाशा की बारी आयी ।परन्तु दंड को उठाते ही वह दर्द से कराहने लगा । कुछ देर तक उसने दंड को थामे रखा परन्तु ज्यादा देर तक नहीं । वह वापस बैठ गया ।विसर्पी यह देख कर मुस्कुराइ।
फिर वह रहस्यमयी नीला मानव उठा । उसने दंड के उठा लिया ,बिना किसी पीड़ा के । वह दंड को तोड़ने ही वाला था कि विसर्पी चिल्लाइ “रूको”
सब विसर्पी की तरफ देखने लगे ।
विसर्पी-रूको! पहले अपना परिचय दो । कौन हो तुम?
” मेरा नाम नागेन्द्र है ।”
विसर्पी- और!
नागेन्द्र-क्षमा कीजिए इससे ज्यादा मुझे नहीं पता
अमात्य-अपने माता पिता अपने कुल के बारे में बताओ ।
नागेन्द्र-इस बारे में मुझे कुछ नहीं पता । मुझे बस इस स्वंयवर को जीतने का आदेश दिया गया था
अमात्य-किसने दिया था आदेश?
नागेन्द्र-मुझे नहीं पता ।
विसर्पी-माफ करिये अमात्य । मैं किसी ऐसे पुरुष से विवाह नहीं कर सकती जिसे स्वंय के बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं।
अमात्य-परंतु कुमारी…..
अमात्य के कुछ और बोलने से पहले ही नागेन्द्र सभा से बाहर चल पड़ा । बहुत ही विचलित, परंतु शांत। गुरूदेव यह सब बहुत ध्यान से देख रहा था। उसने नरकपाशा को इशारे से कुछ समझाया। नरकपाशा भी नागेन्द्र के पीछे सभा से बाहर चल दिया।
सभा से बाहर जाते ही ..
नरकपाशा-रुको मित्र ! कहाँ जा रहे हो?
नागेन्द्र-पता नहीं।
नरकपाशा-मतलब?
नागेन्द्र-मतलब यह कि जिसे स्वंय अपने अस्तित्व का कुछ पता ही न वह कहाँ जाएगा।
नरकपाशा-अतीत का तो पता नहीं परंतु मैं तुम्हारे भविष्य को जरूर प्रारब्ध दे सकता हूँ। क्या तुम्हें नहीं लगता जो कुछ भी अंदर चल रहा था वो सब एक छल था ।
नागेन्द्र कुछ विचलित हुआ । यह देखकर नरकपाशा ने अंतिम चाल चली -“क्या तुम मेरे मित्र बनोगे । क्या तुम उनके विरुद्ध मेरा साथ दोगे ?” यह कहकर नरकपाशा ने हाथ बढ़ाया । नागेन्द्र ने पहले कुछ सोचा फिर उसने भी हाथ बढ़ाया ।
गठबंधन हो चुका था ।
ऐसा गठबंधन जो भविष्य में सबकुछ बदलने वाला था ।
इधर नागराज दंड की तरफ बढ़ चुका था।
डोगा-क्या लगता है? कौन जीतेगा ।
स्टील-नागराज ही जीतेगा ।क्योंकि उसके अंदर भी देव कालजयी का विष है ।उसके अलावा कोई और इस दंड को नहीं उठा सकता।
परमाणु-और नरकपाशा , उसके अंदर भी तो देव कालजयी का विष है।
तिरंगा-हाँ है तो ,परंतु उसके अंदर अमृत भी तो है, शायद विष और अमृत के अधिक मात्रा में मिलने के कारण ही वह तड़पने लगा था ।और दंड को अधिक समय तक उठा नहीं पाया ।
डोगा-और नागेन्द्र उसके बारे में क्या ख्याल है?
तिरंगा-उसके अंदर भी देव कालजयी का विष अवश्य है , परंतु इस समय और अधिक अनुमान नहीं लगाया जा सकता ।
तिरंगा ने बिल्कुल सही अनुमान लगाया था ।
उधर नागराज ने दंड को सिर तक ऊपर उठाया । और एक झटके से दंड को तोड़ दिया । एक घोर गर्जना हुई । कुछ देर तक सन्नाटा छा गया । फिर सभा तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठी ।

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स्थान – महानगर
“यानि बिना किसी समस्या के विषर्पी का स्वंयवर सम्पन्न हुआ । ” – भारती ने फोन पे पूछा ।
“जी मैडम ” -उधर से आवाज आई ।
“अच्छा ही हुआ ” -यह कहकर भारती ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया , और दादा वेदाचार्य को ढूँढ़ने लगी ।
“दादाजी ”
“दादाजी ! कहाँ हैं आप ।”
दादा वेदाचार्य एक अंधेरे कमरे में बैठे हुए थे।
भारती-क्या बात है दादाजी आप यहाँ क्यूँ बैठे हैं।
“मुझसे एक बड़ी भूल हो गयी भारती”
“क्या? ”
“नागेन्द्र नागराज का भाई है”
भारती-क्या? वही जिसे विषर्पी ने स्वंयवर से….
“हाँ”
भारती-पर आप ये सब कैसे जानते हैं
“क्यूँकि नागेन्द्र को मैंने बनाया है ”
भारती-परंतु क्यूँ । और सबसे बड़ा सवाल कैसे।
वेदाचार्य-ये तो तुम जानती ही हो कि मैं तक्षकनगर का राजज्योतिषी भी था ,और मैंने ही नागराज के खजाने के लिए तिलिस्म का भी निर्माण किया था । इन्हीं सब बातों से प्रसन्न होकर देव कालजयी ने मुझे वरदान माँगने को कहा , परंतु उस समय मैंने वरदान नहीं माँगा ।परंतु कल मैंने उनका आह्वान किया और एक ऐसे शिशु की माँग की जिसमें नागराज की तरह उनका विष हो। उन्होंने एक भ्रूण मुझे दिया जिससे मैंने तिलिस्म की सहायता से कुछ ही घंटों में नागेन्द्र को विकसित किया। मेरे ही अनुरोध पर स्वंय देव कालजयी ने उसको शिक्षा भी दी। फिर उसको मैंने विषर्पी का स्वंयवर जीतने के लिये भेज दिया इसके अतिरिक्त उसे कुछ भी ज्ञात नहीं।
भारती -परंतु आपने एसा किया ही क्यों दादाजी?
“तुम्हारे लिए मेरी बच्ची ”
भारती-मेरे लिए ?
भारती चौंक पड़ी ।
“हाँ तुम्हारे लिए । इस प्रकार नागेन्द्र स्वंयवर जीत जाता और नागराज तुमसे विवाह कर लेता।”
भारती को काटो तो खून नहीं ।उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।
भारती-पर आपने नागेन्द्र को इतना शक्तिशाली क्यूँ बनाया?
” क्योंकि मैं जानता था विषर्पी का होने वाला पति ही नागद्वीप का राजा होगा। इस प्रकार नागद्वीप को एक उपयुक्त शासक भी मिल जाता ”
भारती-पर मुझे ऐसा क्यूँ लग रहा है कि आपकी चिंता का कारण कुछ और भी है?
“क्योंकि नागेन्द्र अब नरकपाशा के साथ है। भविष्य में कुछ अशुभ घटित होने वाला है।”
परिशिष्ट अध्याय 
एक घना जंगल ।
चारों तरप सन्नाटा ।
तभी सन्नाटे को चीरती हुयी किसी के कदमों का आहट सुनाई दी । कोई अपनी जान बचाने के लिये भाग रहा था । खून से लथपथ ये कोई और नहीं ध्रुव था । चारों तरफ लाशें बिखरी हुई थी । पैर रखने तक की जगह नहीं थी। अचानक किसी ने ध्रुव का पैर पकड़ लिया ।
ध्रुव सँम्भाल नहीं पाया और गिर पड़ा । ये नागराज था । तिरंगा ,डोगा ,परमाणु, स्टील की लाशें पडी़ थी ।
कराहते हुए नागराज बोला – भाग जाओ ध्रुव ।कोइ नहीं बचेगा ।यही हमारा अंत है।
तभी किसी के आने की आहट हुई ।
ध्रुव फिर भागने लगा । पर भागते हुए एक जगह रूका , तीनों तरफ पेड़ । ध्रुव ने पीछे मुड़ कर देखा प्रोबॉट खड़ा था ,उसके हाथ में एक भाला था । उस घने सन्नाटे में भी ध्रुव की धड़कन साफ सुनी जा सकती थी।
प्रोबॉट एक सेकेंड रूका , उसका हाथ घूमा ,ध्रुव ने बचने की कोशिश भी नहीं की , भाला ध्रुव के दिल के आरपार हो गया ।
ध्रुव के गले से एक हृदयविदारक चीख निकली । पूरा जंगल गूँज उठा ।
कुछ देर बाद जंगल में फिर सन्नाटा छा गया , मरघट सा सन्नाटा ।

Written By – Akash Pathak for Comic Haveli 

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14 Comments on “NaagBharat – (Aarambh Parv)”

  1. अच्छा प्रयास है पर पढ़ते हुए नागयन वाली फील आ रही है,देखते है अगले पार्ट में शायद कुछ अलग पढ़ने को मिले ,एक जगह तो प्रोबोट 2 की जगह द्रोण ही लिख दिया है

  2. Nice attempt..amit Kumar ji ne sahi kaha, padte waqt Nagayan wali feel aa rahi thi but kahani mahabharat se prerit Hai..visarpi draupdi, nagendra karan, nagraj arjun etc

  3. Akash Pathak ji aapne bahot hi behtareen tareeke se is story ki shuruat ki h… isme mahabharata waali feeling aa rhi h.. Nagendra ko karna ka role diya aapne bahot hi gazab ki soch h aapki…
    is story mein nagayan jesa jhalak dekhne ko mila….
    Dhruv ko bhala laga yh pdh kr bura lga..
    but is story ko abhi se suspense aur thriller se bhara hua bana diya
    next part k liye wait kr rha hn.

  4. बहुत अच्छी स्टोरी है।
    पूरी महाभारत की तरह नागभारत लिखी जा रही है।
    ध्रुव गायब हैं।
    उसने प्रोबोट को अपने दोस्तों को शिक्षा देने कहा।
    नागेन्द्र नागराज को भाई निकला।
    उसे इसलिए बनाया गया कि नागराज भारती से शादी कर सके ।लेकिन दांव उल्टा पैड पाया।
    वो नरकपाशा से मिल गया।
    इसे कर्ण के रखकर रोल दिया गया है।
    जो इस कहानी में एक महत्वपूर्ण कार्य करेगा।
    ध्रुव आखिर कहाँ गया है।
    और प्रोबोट ने ध्रुव पर भाला फेंक कर क्यों मारा ।

  5. आपने इस कथा की विषय वस्तु वस्तु बहुत ही उपयुक्त चुनी है मगर आपने ईस विषय वस्तु को जिस भव्यता या कहूँ की जिस गहनता से दिखाना चाहिए आप इस भाग में वैसा नही कर पाए है। आप इस कहानी को बहुत तेज़ी से भगा रहे है जो कि इस कहानी के साथ अन्याय करना होगा। आपको इस भाग में स्वयंवर का भाग, उनके प्रशिक्षण का भाग वविस्तार से दिखाना चाहिए था। मुझे जल्दबाज़ी लगी।

    आपने इस कहानी को बहुत ही अच्छे ढंग से सोचा है। इसके लिए आप को बधाई ।

    मगर आपको इस कहानी में शब्दो की संरचना पर भी दघ्यान देना चाहिए। क्योंकि बहुत से शब्द ऐसे मिले जो कहानी के tone को match नही कर रहे थे।

    आपने ध्रुव के गायब होने के रहस्य को बहुत ही अच्छे को दिखाया है। उत्सुकता बढ़ी है। अंत का भाग वाकई काबिले तारीफ है।

    उत्सुक्ता बढ़ी है। अगला भाग जल्दी लाएं।

  6. Bahut hi rahasyamayi story banai hai
    Aapka pahla prayas hi jaadumayi hai bilkul
    Bahut hi adbhut
    Ek naya kirdar nagendra dekhne ko mila
    Aur uski utpatti bhi ajib tarike se hui
    But yaha usko nagraj ka bhai btana galat tha
    Kyun ki uska to raja takshak ya rani lalita se koi relation nahi tha
    Wo sirf dev kalj dwara paida kiya gya ek bhroon hai
    Ab aage nagpasha ki chaal thodi to samjh aa rahi hai
    Ab aate hain sabse bade sawal par
    Kaha hai is mahabharat ka ‘Krishna’ Super Commando Dhruv?
    Use ye sab kaise pata tha pahle se
    Use aisa kya abhas hua jo wo sare vistrit brahmand rakshako sahit gayab hai?
    Bahut sare sawal hain

    Ek kami hai jo main btana chahunga pathak ji
    Aapne story ki shuruat to achhi ki hai but koi bhi prologue nhi diya
    Visarpi ka swanyavar achanak se kaise
    Dhruv ki story to next parts me samjh me aa jaygi parantu ye event ho chuka hai to iska explanation nahi mil payega
    Bas meri nazar me itna hi tha

    Aur aapko bahut bahut badhai pahle hi prayas me itni shandar kahani k liye.
    All the best for the next parts.

    1. apke sujhavo k liye dhanyabad pradip ji .
      nagedra ko nagraj ka bhai batane wali bat ek alankar (अलंकार) ki tarah prayog ki hai maine.
      Kyu ki uska janm bhi dev kaljayi ke vish se hua hai.

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