Nagbharat (Anthony Parv)

नागभारत

‎सप्तम पर्व

‎एंथोनी पर्व

स्थान- रूपनगर
शाम के समय ।
आज रूपनगर के श्मशान में बहुत भीड़ थी।
चारों तरफ डर का माहौल था।
एंथोनी का शरीर उसके कब्र से थोड़ी दूर ऊपर हवा में उड़ रहा था।
उसके चारों तरफ काले साये मँडरा रहे थे ।
एंथोनी के चेहरे पर क्रोध था। रात का अंधकार उसे और भी भयानक बना रहा था।तभी एंथोनी की भयानक आवाज गूँजी।

एंथोनी- ये दुनिया कभी मेरे लायक नहीं थी, मैं इस दुनिया को किसी के भी लायक नहीं छोडूँगा।
इतना सुनते ही जो लोग अभी तक श्मशान में थे वे भी भागने लगे । केवल कुछ लोग ही वहाँ रुके थे जिनमें से इतिहास भी एक था।
इतिहास – ये तुम क्या कर रहे हो एंथोनी , बंद कर दो इस मुर्दो की दुनिया के दरवाजे को।
पर एंथोनी ने इतिहास की बातों पर ध्यान नहीं दिया।
तभी ध्रुव वहाँ पहुँचा , ध्रुव ने इतिहास को देखा और सीधा उसी के पास पहुँचा।
इतिहास-अच्छा हुआ ध्रुव तुम आ गए।
ध्रुव-पर ये सब हुआ कैसे , तुमने तो कहा था एंथोनी वापस नहीं आएगा, और …और एंथोनी का इतना वीभत्स रूप तो मैंने भी नहीं देखा कभी।
इतिहास-किंग। जिसकी वजह से एंथोनी वापस गया था उसी की वजह से वापस आया है।
【कुछ समय पूर्व】
स्थान – रूपनगर साइंस सेन्टर।
नागेन्द्र साइंस सेन्टर में रखे ऊर्जा क्रिस्टल की तरफ बढ़ रहा था।
उसको रोकने की कोशिश करने वाले कर्मचारी या तो सर्प रस्सियों से बंधे थे या विष फुंकार की वजह से बेहोश थे।
ऊर्जा क्रिस्टल अब उसके सामने ही था।
“जहाँ खड़े हो वही रूक जाओ, और क्रिस्टल को ले जाने का स्वप्न देखना भी छोड़ दो।”
नागेन्द्र ने पीछे मुड़कर देखा , किंग दरवाजे पर ही खड़ा था।
नागेन्द्र-मूर्ख मानव , यहाँ आते हुए रास्ते में पड़े हुए लोगों की हालत नहीं देखी?
किंग- देखी है , इसीलिए तो तैयारी के साथ आया हूँ।

इसी के साथ किंग ने नागेन्द्र पर एक एन्टी वेनॉम गन से वार किया।

नागेन्द्र-शायद तुम जानते नहीं कि मेरे विष को काटने वाला कोई एन्टी वेनॉम आज तक नहीं बना।

पर इसी के साथ नागेन्द्र थोड़ा लड़खड़ाने लगा।

किंग-ये कोई साधारण एन्टी वेनोम नहीं, ये अत्यंत जहरीले सर्पो के लिए ही बनाया गया है।ये हर विष की तीव्रता को कम कर सकता है।
नागेन्द्र-पर मेरे विष की तीव्रता को नहीं।
नागेन्द्र ने थोड़ा संभालते हुए किंग पर विष फुंकार से वार किया।
किंग ने तुरंत ही पास में पड़े वैक्यूम क्लीनर को चालू कर दिया। विष के प्रभाव से वह भी गलने लगा।

किंग-जब तक ये विष मुझ तक पहुँचेगा तब तक इसकी तीव्रता तो कुछ कम हो ही जाएगी । और वैसे भी मैंने नाक में फ़िल्टर लगा रखे हैं।

इसी के साथ किंग ने एक बार फिर गन से वार किया।

नागेन्द्र-[मन में](ये मानव भले ही मुझे रोक न पाए परंतु मेरे कार्य में विलंब अवश्य कराएगा वैसे भी क्रिस्टल के इतना पास आ के मैं कोई विलंब नहीं चाहता।)
नागेन्द्र-वैसे तो ये विष तेरे रोम छिद्रों से भी होकर तेरे शरीर को गला देगा परंतु उसमें विलंब लगेगा , तेरे लिए मेरे पास एक दूसरा विकल्प भी है।
नागेन्द्र ने सर्प रस्सी फेंकी और वो किंग को जकड़ती चली गयी।
नागेन्द्र ने क्रिस्टल को उठा लिया और अपनी दाहिनी कलाई पर लगे यंत्र के एक छिद्र में उसे डाल दिया।
यंत्र में एक हल्की सी आवाज हुई , और यंत्र चमकने लगा। थोड़ी देर बाद यंत्र सामान्य हो गया।
तब तक किंग ने अपना दाहिना हाथ आजाद करके एन्टी वेनॉम गन से सर्प रस्सी के सर्पों पर वार किया और आज़ाद हो गया।
नागेंद्र ने किंग को देखा , परन्तु जैसे उसे किंग के आज़ाद हो जाने से कोई फर्क नहीं पड़ा ।

अपने यंत्र की तरफ देखते हुए नागेन्द्र बोला- जानते हो यह क्या है? एक ऐसा यंत्र जो मेरे विष की तीव्रता को और भी बढ़ा देगा और उसे विभिन्न प्रकार की उर्जाओं में भी बदल सकता है और ये क्रिस्टल इसको ऐसा करने के लिए ऊर्जा प्रदान करेगा ।

“मैं सोच ही रहा था कि वो कौन भाग्यशाली होगा जो इसकी तीव्रता का सर्वप्रथम स्वाद चखेगा , परंतु नियति ने तुम्हें स्वयं ही भेज दिया।” इतना कहते हुए नागेन्द्र ने किंग पर वार किया।

परंतु किंग नागेन्द्र की मंशा समझ चुका था और पास में ही रखी एक लोहे की अलमारी के पीछे कूद गया। लोहे की अलमारी बहुत ही मोटे लोहे की बनी थी परंतु एक ही वार से गल गयी । किंग नागेन्द्र के सीधे वार से तो बच गया परन्तु फिर भी वार की उस बची हुई तीव्रता को नहीं झेल पाया और गिर पड़ा ।
नागेन्द्र बिना यह देखे कि , किंग जीवित है अथवा मृत वहाँ से बाहर निकल गया।
———
【वर्तमान समय-रूपनगर】

इतिहास-ये सब बातें हमे साइंस सेन्टर में लगे CCTV कैमरे से पता चली और वो रहस्यमयी नीला सर्प मानव कोई नागेन्द्र है जिसको कल महानगर मे फेसलेस से लड़ते हुए देखा गया था।
ध्रुव-नागेन्द्र??और किंग…किंग जीवित है…या…
इतिहास- हाँ , किंग अभी जीवित ही है , परंतु कोमा में है और डॉक्टरों के अनुसार उसे कब तक होश आएगा कुछ कहा नहीं ना सकता।
ध्रुव-ओह! शायद इसी कारण से एंथोनी वापस आया है।जिस किंग के कारण उसने वापस जाने का फैसला लिया था आज उसी के कारण वो वापस आ गया है।

उधर एंथोनी अभी भी हवा में ही था। काले साये अब धीरे धीरे लोगों को परेशान करने लगे थे।

एन्थोनी-कोई भी जीवित नहीं बचेगा।
ध्रुव-रूक जाओ एंथोनी , तुम एक रक्षक हो , भक्षक मत बनो।
एंथोनी- हाँ। हाँ मैं बन गया हूँ भक्षक , ये दुनिया इसी के लायक है, जो रक्षा करते है उनकी परवाह कोई नहीं करता ।
ध्रुव- पगलों जैसी बातें मत करो एंथोनी , क्या तुम भूल गए हमने साथ मिलकर कितनी बार इस दुनिया को बचाया है , एक साथ लड़ते हुए मासूमों की रक्षा की है?

तब तक किंग की माँ और एंथोनी की बेटी मारिया भी पहुंच गई।

मारिया-रूक जाइये पापा।
एंथोनी- नहीं मारिया , तुम लौट जाओ।
मारिया -नहीं पापा अगर किंग के लिए आप सबको मार देंगे तो ये कैसा न्याय होगा। एक किंग के लिए न जाने आप कितने मासूम किंग को मार देंगे।
ध्रुव- जिसने किंग को इस हालत में पहुँचाया है असली गुनाहगार वो है, सजा का असली हकदार वो है।मेरे साथ चलो एंथोनी हमको तुम्हारी जरूरत है। हम उसको उसके किये की सज़ा अवश्य देंगे।
मारिया – हाँ पापा ध्रुव सही कह रहा है, हमारी बात मान लीजिए वरना मैं आपको कभी माफ नहीं कर पाऊँगी।

इन सब बातों का असर एंथोनी पर होने लगा।
उसका शरीर धीरे धीरे हवा से वापस जमीन की तरफ आने लगा।

एंथोनी- शायद तुम लोग सही हो।किसी एक कि गलती की सजा सबको नहीं दी जा सकती।
एंथोनी की आवाज अब कुछ नर्म हो गयी। काले साये धीरे धीरे गायब होने लगे।
ध्रुव ने एंथोनी को कुछ दिन पूर्व घटी सारी घटनायें विस्तारपूर्वक बताई।
———————-
स्थान- मुम्बई।
बंदरगाह के किनारे के एक गोदाम में कुछ लोग बैठे थे। कुछ लोग गोदाम से उठा कर सामान एक ट्रक में भर रहे थे।

उनमें से एक बोला – डोगा के ना होने से अपना काम तो कुछ आसान हुआ है बॉस पर वो लड़की , क्या नाम है… लो…
दूसरा बोला-लोमड़ी।
पहला-हाँ।लोमड़ी …उसने नाक में दम कर रखा है।
दूसरा -इसीलिए तो माल मैंने यहाँ मँगाया है , और अगर वो यहाँ आ भी गयी तो वापस नहीं जा पाएगी। पिछले बार तो आइस(ICE) से बच गयी थी , पर इस बार नहीं।
“आइस हो या क्रीम(CREAM) इस बार तुमलोगों को कोई नहीं बचा पायेगा। यहाँ से तुमलोग सीधा पुलिस स्टेशन जाओगे।”
सबने आवाज की तरफ देखा। गत्तों के ऊपर लोमड़ी खड़ी थो।

‘तुम तैयार हो ना’-लोमड़ी ने अपने कान में लगे ट्रांसमीटर में धीरे से बोला।

‘हाँ , मैं तैयार हूँ।’धीरे से जवाब आया।
तब तक सब संभल चुके थे।
दूसरा आदमी चिल्लाया -‘आइस’
इस आवाज को सुनते ही एक आदमी बाहर आया जो देखने में बर्फ से बना हुआ लग रहा था।
तब तक लोमड़ी नीचे छलाँग लगा चुकी थी।
कुछ आदमी लोमडी को पकडने आये पर लोमड़ी ने एक जहरीले स्प्रे से उन्हें रोक दिया।
आइस अब नजदीक आ चुका था।

आइस- पिछली बार तो तू बच गयी थी , पर इस बार मैं तेरे शरीर को जिंदा जमा दूँगा।
लोमड़ी ने धीरे से ट्रांसमीटर में कहा-‘यही समय है वार करो शीना।’
तभी आइस के बगल में एक धमाका हुआ।

‘बगल में नहीं शीना , उसके शरीर पे धमाका करो।’
‘कर रही हूँ ,मुझे ध्यान तो लगाने दो।’
‘तो लगाओ ना ध्यान , किसने रोका है तुम्हें।’
तब तक आइस लोमड़ी को अपने हाथों से जकड़ चुका था। लोमड़ी ने स्प्रे से वार किया पर आइस पे कोई फर्क नहीं पड़ा।
‘क्या कर रही हो शीना, जल्दी करो।’
‘रुको मैं सामने आ रही हूँ वहाँ से अच्छे से निशाना लगा सकूंगी।’
‘जो भी करना है जल्दी करो।’
तब तक शीना बाहर आ चुकी थी।
‘पकड़ो उसे’-दूसरा चिल्लाया , कुछ आदमी शीना को पकड़ने के लिए दौड़े पर शीना ने मानसिक धमाकों से उन्हें रोक दिया।
शीना ने आइस के शरीर पे धमाके किये पर उसे कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ा।
लोमड़ी-[मन में](उफ !लगता है वार उल्टा पड़ गया , धमाकों से इसे कुछ खास फर्क नहीं पड़ा उल्टे इतनी ठंड से मेरे शरीर का रक्त जमने लगा है)
तभी एक अग्नि वार आइस को लगा और लोमड़ी उसके पकड़ से आजाद हो गई।
अगला वार और भी भीषण था , कुछ ही पलों में आइस का शरीर वाष्प बनकर हवा में विलीन हो गया।
सबने पीछे मुड़कर देखा , ये वार शक्ति ने किया था।

शक्ति को देखकर बचे हुए आदमी भी भाग गए।
शक्ति- जो काम दूसरों के लिए है उसको खुद नहीं करना चाहिए , अगर मैं यहाँ नहीं आती तो तुम दोनों भारी मुसीबत में पड़ जाती।
लोमड़ी- हाँ , मुझे लगा नहीं था कि ये काम इतना कठिन होगा इसीलिए मैंने दिल्ली से शीना को भी बुलाया था। ये गैंग बहुत दिनों से आइस के जरिये मुम्बई में लोगों को परेशान कर रहा था।
शीना- खैर ये सब छोड़ो , तुम यहाँ कैसे आई शक्ति?
शक्ति- लोमड़ी से मिलने , वैसे मुझे तुमसे भी काम था शीना।
इसके बाद शक्ति ने दोनों को चल रही घटनाओं के बारे में बताया और भविष्य में हो सकने वाले महायुद्ध की आशंकाओं से भी अवगत कराया।
“ठीक है हम सब तुम्हारे साथ है।”-लोमड़ी और शीना एक साथ बोल उठीं।
शक्ति-ठीक है मै समय आने पर तुम लोगों को बुला लूँगी।
——————————
ध्रुव और एंथोनी दिल्ली की तरफ बढ़ रहे थे।

एंथोनी- तुम्हे पक्का पता है ना कि वो दिल्ली में ही है।
‎ध्रुव- हाँ। उसका नाम नागेन्द्र है और मुझे पता चला है कि उसको रूपनगर से दिल्ली की तरफ आते हुए देखा गया है।कुछ देर पहले ही उसे प्रोबॉट के लैब में जाते हुए देखा गया है। पर मुझे समझ नहीं आ रहा वो वहां क्यों गया है?

कुछ देर बाद दोनों प्रोबॉट के लैब में थे । सारे तरफ मशीनें टूट कर बिखरी हुई थीं। नागेन्द्र एक बड़े से बक्से को अपने हाथ में उठाकर जाने वाला था।
नागेन्द्र को देखते ही एंथोनी ने उसपर वार कर दिया।
ध्रुव ने देखा प्रोबॉट एक तरफ खड़ा था।

ध्रुव (प्रोबोट से)-यह सब क्या है प्रोबॉट , और ये नागेन्द्र इस बक्से में क्या ले जा रहा है।
परंतु जैसे प्रोबोट ने ध्रुव की बातों पर ध्यान ही नहीं दिया। एंथोनी और ध्रुव नागेन्द्र को रोकने में लग गए।प्रोबोट ध्रुव के पीछे ही खड़ा था।
अचानक से प्रोबोट ने एक ६ फुट का एक बड़ा सा मशीन का पुर्जा उठा लिया और देखते ही देखते ध्रुव के ऊपर फेंक दिया। ध्रुव इन बातों से बेखबर नागेन्द्र को रोकने में लगा था।

अचानक से एंथोनी की नजर प्रोबोट पर पड़ी।
एंथोनी चीखा- ध्रुव।
ध्रुव ने पीछे मुड़कर देखा , पर तब तक देर हो चुकी थी।इस अप्रत्याशित घटना से ध्रुव भी आश्चर्यचकित रह गया।यह बिल्कुल उसके स्वप्न से मिलता जुलता था।
एंथोनी तुरंत ट्रांसमिट होकर ध्रुव के पीछे पहुँचा। मशीन का टुकड़ा ध्रुव के सर से मात्र कुछ इंच की दूरी पर था जिससे टकराकर ध्रुव का सिर कुचला जाता।
(एंथोनी जहाँ तक देख सकता है वहाँ तक ट्रांसमिट भी हो सकता है)
अब बारी नागेन्द्र की थी। उसने मशीन पर वार किया । मशीन के छोटे छोटे टुकड़े ध्रुव के ऊपर गिरने लगे । एंथोनी के संभालने से पहले और ध्रूव के बचने से पहले ही एक टुकड़ा ध्रुव के सिर पर गिरा ।
इस अफरा तफरी का फायदा उठा कर नागेन्द्र वहाँ से भाग गया। उसके पीछे पीछे प्रोबोट भी चला गया।एंथोनी विवश था।
इधर ध्रुव के सर से लगातार खून गिर रहा था।

ध्रुव- मेरी चिंता मत करो एंथोनी , उसके पीछे जाओ, और सबसे कहना मेरी चिंता …न…और अपना कार्य…
ध्रुव अभी अपनी बात पूरी भी नही कर पाया था कि वह बिल्डिंग ढह गई। दोनों मलबों के नीचे दब गए।
नागेन्द्र ने जाते जाते एक भीषण वार किया था।
“ध्रुव”- एंथोनी खूब जोर से चीखा और कुछ ही पलों में ध्रुव के साथ मलबे से बाहर आ गया।
ध्रुव की सांसें अभी भी चल रही थी।
एंथोनी नागेन्द्र और प्रोबोट के पीछे जाना चाहता था परंतु विवश था।
—————
【कुछ घंटों बाद】
ध्रुव दिल्ली हॉस्पिटल के ICU में कोमा में था।
ध्रुव के पिता राजन ,उसकी माँ रजनी, नताशा और उसकी बहन श्वेता ICU के बाहर ही थे।
रजनी का रो रोकर बुरा हाल था।
एंथोनी भी पास में ही खड़ा था। उसकी आंखें क्रोध से जल रहीं थी।केवल एक दिन के भीतर ही उसके दो प्रिय लोग कोमा में थे , और वो भी केवल एक व्यक्ति की वजह से- नागेन्द्र।
नताशा और श्वेता भी क्रोधित थी पर विवश थी।
————————–
इन सब बातों से अनजान डोगा , परमाणु , स्टील और तिरंगा आने वाले महायुद्ध की तैयारियों में व्यस्त थे।
सारे ब्रह्मांड रक्षक , भेड़िया और विसर्पी फूजो बाबा के आश्रम में ही थे।

परमाणु- मैंने निर्णय लिया है कि अब हम दिव्यास्त्रों की ऊर्जा को अपने अपने अस्त्रों से भी नियंत्रित करना सीखेंगे।
स्टील – हाँ जैसे मैं अपने मेगा गन से, डोगा अपने गन से , परमाणु अपने ब्रेसलेट से और…
तिरंगा- और मैं अपने न्याय स्तम्भ से। इस प्रकार हमें दिव्यास्त्रों का संधान करने की भी आवश्यक्ता नहीं।
डोगा-पर तिरंगा तुमने कभी बताया नहीं तुम्हारा न्याय स्तम्भ किस प्रकार कार्य करता है।
तिरंगा- सामने वाले की ऊर्जा से। हर प्रकार के प्राणी की एक विशिष्ट ऊर्जा होती है , उसी प्रकार पापियों की एक विशिष्ट ऊर्जा होती है। जैसे ही पाप ऊर्जा वाले मनुष्य इस स्तम्भ के आस पास आते है ये स्तम्भ उनकी ही ऊर्जा की सोख कर दूसरी उर्जाओं में बदलने लगता है , जिनको मैं नियंत्रित करता हूँ।
स्टील- वाह। यह तो बहुत कमाल की विधि है।
भेड़िया-ठीक है अब तुम लोगों को अभ्यास आरम्भ कर देना चाहिए ।मैं भी तुमलोगों के साथ ही रहूँगा।
विसर्पी- और मैं भी।
【धीरे धीरे वन में गए हुए दस दिन बीत गए। शक्ति नारी शक्तियों को एकत्रित कर रही थी। ध्रुव अभी भी कोमा में ही था। एंथोनी ने नागेन्द्र को ढूंढने की कोशिश की परन्तु सफल नहीं हो सका। अन्य ब्रह्मांड रक्षक अपने अपने अस्त्रों को साधने में लगे थे। नागराज अपनी काल मृत्यु आराधना में लीन था। इस दौरान वन पर भी कोई आक्रमण नहीं हुआ।】
———————–
ग्यारहवें दिन-
नरकपाशा के द्वीप पर गुप्त लैब में।
प्रोबोट कुछ मशीनी कलपुर्जो को जोड़ रहा था ।
नागेन्द्र और गुरुदेव पास ही खड़े थे।

नागेन्द्र – बहुत की कमाल के हैं ये अस्त्र तो।
गुरुदेव- हाँ , इनमें से कुछ अदृश्य भी रह सकते हैं।प्रोबोट ने बहुत जल्दी ही इन्हें बना दिया।

नागेन्द्र-पर असली कमाल तो आप का ही था। आपके ही दिए हुए यंत्रो से ये प्रोबोट हमारे अधीन हो गया।आपका यांत्रिक ज्ञान बहुत ही लाभकारी है।
गुरुदेव- हाँ। पिछले दस वर्षो में मैंने अपना यांत्रिक और साथ ही साथ तिलिस्मी ज्ञान भी खूब बढ़ाया है।
इन अस्त्रों को मैंने प्राचीन विज्ञान की मदद से ही बनवाया है, और इसके लिए इस प्रोबोट की हमें जरूरत थी। नीलमणि की शक्तियाँ हमें प्रतिरोधक क्षमता तो देंगी परंतु मारक क्षमता नहीं , और ये अस्त्र हमें मारक क्षमता प्रदान करेंगे।
‎नागेन्द्र- परंतु क्या केवल इतने से कार्य के लिए प्रोबोट को यहाँ लाना जरुरी था?
‎गुरुदेव- नहीं , आने वाले महायुद्ध में प्रोबोट ही हमारी सबसे अधिक सहायता करेगा । केवल वही है जो सारे ब्रह्मांड रक्षकों की ताक़तों और कमज़ोरियों को जानता है।कोई भी बात उससे छिपी नहीं है ,और वो मशीन है और मशीन कभी छल नहीं करती।
‎नागेन्द्र- तब ठीक है , मैं अब असम के वन के लिए निकलता हूँ।मैं पूरा प्रयास करूँगा कि उस वन में ही सारे ब्रह्मांड रक्षकों की समाधि बन जाये।
‎——————————–
‎दिल्ली हॉस्पिटल-
‎ध्रुव अभी भी ICU में कोमा में था।
‎एक साये ने भीतर प्रवेश किया। परंतु किसी ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया । वो साया अदृश्य था।
‎ICU के बाहर राजन मेहरा और श्वेता बैठे हुए थे।अदृश्य साया भीतर चला गया , बिना दरवाजा खोले जैसे वो दरवाजा वहाँ था ही नहीं।
‎ICU के भीतर एंथोनी भी अदृश्य रूप में मौजूद था।वो साया एंथोनी के लिए अदृश्य नहीं था।
‎एंथोनी- मुझे यकीन था तुम जरूर आओगे।
‎”परंतु क्या तुम वही चाहते हो एंथोनी जो तुमने कहा है मुझसे।”
‎”हाँ मैं वही चाहता हूँ , और वो कार्य केवल तुम्हीं कर सकते हो । क्योंकि एकमात्र  तुम्हीं हो जो काल के नियमों को बदल सके।”
‎——————- ————-
स्थान- असम।
‎भेड़िया और सारे ब्रह्मांड रक्षक अपने अस्त्रों का अभ्यास कर रहे थे।पिछले कुछ दिनों में कोई अप्रत्याशित घटना नहीं घटी थी इसीलिए वे निश्चिन्त भी थे।

‎मंदिर में नागराज अपनी काल मृत्यु आराधना कर रहा था।
‎तभी एक तेज़ गति से आता हुआ तीर नागराज की छाती के आर पार हो गया। भयंकर पीड़ा से उसकी आंख खुल गई।
‎उसकी आराधना भँग हो गयी।
‎क्रोध में नागराज ने पीछे देखा एक आदिवासी धनुष लिए खड़ा था।
‎”मूर्ख मनुष्य तुम यहाँ क्यों बैठे थे, तुम्हारे कारण मेरा शिकार बच गया। अब तुम जीवित नही बचोगे।” इतना कहते हुए उसने नागराज पर एक और तीर चला दिया।
‎नागराज ने इस बार तीर को अपने हाथों से रोक लिया।
‎नागराज-मूर्ख तो तुम हो जिसको इतना बड़ा मनुष्य नही दिखा।
‎नागराज ने विष फुंकार छोड़ी पर उसका उस आदिवासी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
‎नागराज ने सर्प रस्सी फेंकी , परंतु सर्प रस्सी बिना उसको छुए दूर निकल गयी।
‎नागराज आश्चर्य चकित रह गया
नागराज- आखिर कौन हो तुम?
‎”काल”
‎—————(समाप्त)———-
‎गाथा जारी है -【अष्टम् पर्व -काल पर्व 】में।

 

Written By Akash Pathak for Comic Haveli 

Disclaimer – These stories are written and published only for entertainment. The story is intellectual property of comic haveli and copying without permission will bring copyright issues. comic haveli and writers had no intent to hurt feeling of any person , community or group. If you find anything which hurt you or should not be posted here please highlight to us so we can review it and take necessary action. comic haveli doesn’t want to violent any copyright and these contents are written and created by writers themselves. the content doesn’t carry any commercial profit, as fan made dedications for comic industry.  if any name , place or any details matches with anyone then it will be only a coincidence.

10 Comments on “Nagbharat (Anthony Parv)”

  1. वाह अंत में जबरदस्त सस्पेंस है।
    अदृश्य मानव जो अभी अंथोनी को दिखा वो और अंत मे काल नामक आदिवासी वाह…. सुपर सस्पेंस।
    एन्थोनी का शांत होना जमा नहीं।
    बहुत जल्दी शांत हो गया वो।
    और एन्थोनी टेलीपोर्ट होता है ट्रांसमिट परमाणु होता है।
    शायद अगर मैं सही हूँ तो।
    इस कहानी में कोई भी लड़ाई लंबी नही चली जो मुझे कमी सी लगी।
    वैसे आपने इतने जबरदस्त पार्ट दिए है कि आपसे उम्मीद भी उतनी ही ऊपर हो गयी है।
    बाकी नेक्स्ट पार्ट जबरदस्त हो यही उम्मीद है।
    All the best

    1. धन्यवाद देवेंद्र जी।
      अगले भागों में कहानी में और एक्शन देखने को मिलेगा।

  2. Wow
    Suspence badh gaya ab to
    Dhruva in coma sad
    Nagraaj ko jaldi layo active mode ye naagendra bht uchhal raha hai.
    Iski pitaai karwayo pls

  3. Nice bro…
    Mera naam roshan kr rhe ho …
    With double a..
    Ab aate he kahani pr…
    Har part ki tarah ye part bhi bahut accha tha or ending to lajawab thi…
    Kahani khatm hote hote bahut se sawal chhod diye picche suspense bad gya he ab next part la intezar bahut jhoro se h

  4. बहुत बहुत बहुत खूब हर भाग की तरह यह भाग भी धांसू रहा। आकाश भाई ने कहा था इस बार एक्शन ज़्यादा देखने को मिलेगा वो देखने को मिला ।

    शुरुआत रूपनगर से हुई। ज़ाहिर है यह एंथोनी पर्व है तो रूपनगर से ही शुरुआत होनी थी। रूपनगर के कब्रिस्तान वाला सीन मस्त था, एंथोनी को भयानक तरीके से सामने लाया गया अच्छा लगा। पर एक बात मुझे नही सही लगी। एंथोनी को बड़ी आसानी से और बड़ी जल्दी पिघला दिया आपने, थोड़ी तबाही मचाने देनी चाहिए थी। इन सब चीजों की वजह से कहानी भागती हुई लगती है कभी कभी।

    फिर रूपनगर साइंस सेंटर का दृश्य दिखाया गया जहाँ पहुंचकर नागेंद्र ने वो कृस्टल हासिल कर लिया और किंग को भी घायल कर दिया। अब भाई नागेंद्र जैसे शक्तिशाली इंसान से भला एक आम इंसान कैसे बच सकता है।

    उसके बाद मुम्बई में लोमड़ी और शीना का एक्शन सीन भी देखने को मिला जो बहुत ही अच्छा था, आइस नाम के विलेन का रोल अच्छा लगा।

    प्रोबोट अब गुरुदेव और नरकपाषा के कब्जे में आ गया है । नागेंद्र ने ध्रुव को कोमा में पहुंचा दिया।

    एक बात तो है। यह नागेंद्र कुछ ज़्यादा ही हवा में उड़ रहा है। इतना ज़्यादा उत्पात तो क्रूरपाशा भी नही मचा रहा है जितना उसने मचा रखा है।

    लास्ट में फिर असम के दृश्य दिखाया गया जहां एक रहस्यमय व्यक्ति आ चुका है काल जिसने नागराज की आराधना भंग कर दी है। कौन है ये काल? इस सवाल का जवाब जानने के लिए मुझे काल पर्व का इंतज़ार है।

    और हाँ नागेंद्र को मैं अच्छे से पिटते देखना चाहता हूँ हीही।

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