Nagbharat (Bhediya Parv)

नागभारत
भेड़िया पर्व
वन ।
इस पृथ्वी पर जीवन का आधार हैं वन ।
फिर भी मानव हमेशा से स्वयं के लाभ के लिए वनों को नष्ट करता रहता है।
इसी कारण से प्रकृति चुनाव करती है वन रक्षक का।
ऐसा ही एक वन रक्षक है-कोबी।भेड़िया मानव कोबी।
कुछ लोग उसे भेड़िया के नाम से ही जानते हैं।
अपने कर्तव्य के लिए उसने अपनी पत्नी जेन की भी बलि दे दी , परंतु वह अपने कर्तव्य पर अटल रहा।
स्थान-असम।
फूजो बाबा के आश्रम के पास बहुत भीड़ जमा थी। भेड़िया एक कबीले वाले को बहुत बेरहमी से पीट रहा था।
‎फूजो -रुको भेड़िया , इतने बेरहमी से इसे पीटोगे तो यह मर जायेगा।
‎भेड़िया-इसने कार्य ही ऐसा किया था फूजो बाबा , अपनी पत्नी को छोड़ कर दूसरी स्त्री से विवाह करना चाह रहा था।
‎फूजो -अच्छा । अब छोड़ दो इसे , आश्रम की तरफ चलो तुम्हे कुछ महत्वपूर्ण बात बतानी है।

‎दोनो आश्रम की तरफ बढ़ने लगे।
‎फूजो-तुमने उसे कुछ ज्यादा ही दंड दे दिया , यह कोई बड़ी बात नही थी ।कई कबीलों में तो एक से अधिक पत्नी रखना मान्य भी है।
‎भेड़िया-परंतु…
इसके आगे भेड़िया ने इस संदर्भ में कुछ नही बोला।
‎भेड़िया-आप मुझे कुछ महत्वपूर्ण बताने वाले थे।
‎फूजो-हाँ। अभी कुछ चिड़ियों ने मुझे खबर दी है कि नागराज,ध्रुव और बाकी के ब्रह्मांड रक्षक इधर ही आ रहे हैं।
‎भेड़िया-सारे ब्रह्मांड रक्षक एक साथ? जरूर कुछ महत्वपूर्ण बात होगी।
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‎भेड़िया का संदेह सही था।
‎जो भी होने वाला था वो बहुत ही महत्वपूर्ण था।
‎सभी ब्रह्मांड रक्षक ध्रुव के प्लेन में असम पहुँच गए थे।
‎नागराज-एंथोनी कहाँ है , इसका पता किसी को नही है ध्रुव। इसी बात का पता लगाना है तुमको । और यदि वो वापस आ सकता है तो उसको वापस भी लाना होगा क्योंकि वो आने वाले महायुद्ध में हमारी बहुत सहायता कर सकता है।

‎ध्रुव-ठीक है। हम असम पहुंच चुके हैं । मैं प्लेन को यहीं रोकता हूँ। फिर भेड़िया से मिलकर वापस भी जाना है।
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‎सब फूजो बाबा के आश्रम पहुँच गए । भेड़िया और फूजो पहले से ही उन सबका इंतज़ार कर रहे थे।
‎भेड़िया-तुम सबको देख कर अत्यंत प्रसन्ता हो रही है । परंतु मन में संदेह भी हो रहा है कि आखिर तुम सब एक साथ क्यों आये हो ? कही कुछ अशुभ तो नहीं हो गया।
‎नागराज-तुम्हारा संदेह बिल्कुल सत्य है भेड़िया । जो भी हुआ है वो बहुत ही अशुभ है।
‎उसके बाद नागराज ने भेड़िया को सारी बात बता दी।
‎भेड़िया -उफ ! यह तो बहुत ही बुरा हुआ।
‎फूजो-हाँ! परंतु दशम अस्त्र को प्राप्त करना भी बहुत ही दुस्कर कार्य है।
‎नागराज -दुष्कर है परंतु असम्भव तो नहीं फूजो बाबा। मैं काल मृत्यु आराधना करूँगा और दशम अस्त्र को प्राप्त करूँगा।

‎शक्ति-ठीक है , नागराज अब हम भी चलते हैं , शीघ्र ही मुलाकात होगी।
‎ध्रुव-हाँ चलो।
‎भेड़िया-तुम निश्चिंत हो कर जाओ ध्रुव , यहाँ की चिंता छोड़कर अपना कार्य करो।
‎ ध्रुव और शक्ति पैदल ही जंगल से बाहर प्लेन की तरफ बढ़ने लगे।
‎शक्ति – क्या लगता है ध्रुव , एंथोनी कहाँ होगा?
‎ध्रुव- पता नही शक्ति पहले कुछ लोगों से पूछताछ करनी पड़ेगी जो एंथोनी को थोड़ा बहुत जानते थे उनसे। इसीलिए मैं पहले रूपनगर जाऊँगा। ‎और तुम कहाँ जाओगी ?
‎शक्ति-मुझे तो सम्पूर्ण भारत भ्रमण करना है। ‎पर सोच रही हूँ सबसे पहले मैं राजनगर जाऊँ नताशा के पास।
‎ध्रुव सोचने लगा । जैसे उसे कुछ भूला हुआ याद आ गया हो।
‎ध्रुव-ओह हाँ । इन सब घटनाओं के बीच तो मैं उसे भूल ही गया था । उससे कहना मैं शीघ्र ही उससे मिलूँगा।

शीघ्र ही दोनों जंगल के बाहर पहुँच गए ।
‎शक्ति-ठीक है ध्रुव मिलते हैं फिर।
‎ध्रुव-अ .. शक्ति…………
‎शक्ति-क्या हुआ, तुम यही कहना चाहते हो ना कि मैं शांति चिल्ड्रेन होम भी जाऊँ।
‎ध्रुव-ओह यानी कि तुम जानती हो कि……
‎शक्ति-……रिचा ही शांति है।उस घटना के बाद से सब जानते हैं कि रिचा ही ब्लैक कैट थी। तबसे रिचा शांति बनके वो चिल्ड्रेन होम चलाती है।
‎ध्रुव-हाँ । उसका भी हमारे साथ आना जरूरी है , क्योंकि हमारे पास वैसे ही बहुत कम लोग हैं।
‎शक्ति-मैं जाऊँगी जरूर पर क्या तुमको लगता है वो वापस आयेगी। ब्लैक कैट अब दुनिया के लिए मर चुकी है।
‎ध्रुव- इंसान अपनी आदत बदल सकता है पर अपनी फितरत नहीं , मुझे यकीन है वो जरूर वापस आएगी।
‎———————————–
इधर जंगल में फूजो बाबा के आश्रम में सब अपने आप को व्यवस्थित करने में लगे थे।

‎डोगा-माफ करना विसर्पी , हमलोगों के कारण तुम्हें जंगलों में रहना पड़ रहा है।
‎विसर्पी -इसमें तुमलोगों की कोई गलती नहीं है । मैं भी कभी जंगलो में नही रही हमेशा से नागद्वीप पर ही रही , कभी कभार महानगर भी आना जाना हो जाता था । अब थोड़े दिन मैं भी वन में प्रकृति के समीप ही रहूँगी।
‎तिरंगा-सही कहा विसर्पी वैसे भी मनुष्य को हर प्रकार की परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।
‎परमाणु-पर ये मनुष्य कहाँ है?
सब हँसने लगते हैं।
‎तभी नागराज आता है।
‎नागराज- मैने पता किया है , यहाँ से एक कोस की दूरी पर शिवजी का एक पुराना मंदिर है , मैं वहीं पर काल मृत्यु आराधना करुँगा।
‎भेड़िया-ठीक है , मैं ऐसी व्यवस्था कर दूँगा कि कोई भी मनुष्य या जानवर उधर नहीं जाएगा।
‎तिरंगा-ठीक है तब तक हम सब भी तैयारी करते हैं।
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‎स्थान-महानगर।
‎स्नेक पार्क के लैब में करुणाकरन कुछ कार्य कर रहा था। तभी वहाँ नागेन्द्र पहुँच जाता है।
‎करुणाकरन- क क… कौन हो तुम ? और यहाँ तक कैसे आ गए । किसी ने रोका नहीं तुमको।
‎नागेन्द्र- रोकना तो चाहा परन्तु मेरी आँखों मे देखने के बाद किसी में हिम्मत नहीं बची।
‎करुणाकरन- परन्तु तुम मुझसे चाहते क्या हो?
‎नागेन्द्र- मैं तुम्हे ले जाने आया हूँ ।
‎इसी के साथ नागेन्द्र ने करुणाकरन को भी सम्मोहित कर लिया।
‎नागेन्द्र करुणाकरन को लेकर जाने लगा , तभी वहाँ फेसलेस आ गया।
‎फेसलेस- तुम जो कोई भी हो। करुणाकरन को वहीं छोड़ दो वरना अंजाम बहुत बुरा होगा।
‎नागेन्द्र- मैं कोई भी काम करने से पहले अंजाम की परवाह नहीं करता।
इसी के साथ नागेन्द्र ने फेसलेस पर विषैले सर्पो का वार कर दिया । पर फेसलेस ने तंत्र से सुरक्षा कवच बना कर उन्हें रोक दिया ।

‎फेसलेस-/मन में/(आज कल सर्पों को हथियार बनाना बहुत ही आसान हो गया है, परंतु यह है कौन? शायद नागराज का कोई पुराना शत्रु होगा जिससे मैं अनभिज्ञ हूँ)
फेसलेस ने नागेन्द्र को तिलिस्मी कवच में कैद करने के लिए वार किया ।
नागेन्द्र -मुझे अपने कार्य मे इतना व्यवधान बिल्कुल भी नही पसंद है।
‎नागेन्द्र ने कंटीले सर्पों का वार किया , जो कि कुछ कुछ नागराज के नागफनी सर्पों जैसे ही थे । ये सर्प बहुत तेजी से तिलिस्मी कवच को बेधते हुए फेसलेस की तरफ बढ़ने लगे। फेसलेस ने उनमें से एक को अपने हाथों से पकड़ लिया ।
‎फेसलेस-/मन में/(ये…ये इनमें तो देव कालजयी का विष है। वो तो नागराज के शरीर में है , इसका मतलब ये नागराज …नही नहीं ये नागराज नही हो सकता फिर ये कौन …)
‎फेसलेस-नागेन्द्र …त…तुम नागेन्द्र हो ना।
‎फेसलेस थोड़ा विचलित हुआ इसका फायदा उठाते हुए नागेन्द्र ने फेसलेस पर वार किया और थोड़ी देर के लिए उसकी चेतना विलुप्त हो गयी।

‎फिर नागेन्द्र करुणाकरन को लेकर महानगर से निकलकर दिल्ली की तरफ बढ़ गया ।
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‎गुप्त द्वीप में नागेन्द्र के द्वारा गुरुदेव ये सब देख रहा था। नरकपाशा नीलमणि के द्वारा शक्तियों को नरकशत सेना में स्थानांतरित कर रहा था।
‎गुरुदेव स्वयं से ही बात करने लगा।
‎” अच्छा हुआ नागेन्द्र ने जल्द ही फेसलेस को परास्त कर दिया , वरना और भी विलंब होता । इन ब्रह्मांड रक्षको का भी इंतजाम कर दिया है, सोच रहे होंगे कि बारह दिनों तक वन में चैन से रहेंगे , परंतु ऐसा होगा नहीं , हा हा हा…
‎ पर इस ध्रुव का भी कुछ करना पड़ेगा पता नही अब कहाँ जा रहा है क्या करने जा रहा है। न खुद चैन से रहता है ना हमें चैन से रहने देता है।”
‎गुरुदेव ने कुछ सोचा और कीबोर्ड पर कुछ बटन दबाने लगा । फिर मुस्कुराते हुए बड़बड़ाने लगा
‎-“कहते हैं मनुष्य का शरीर पंचतत्वों से मिलकर बना होता है। अब ध्रुव का शरीर भी इन्ही पंचतत्वों में विलीन होगा। ‎”
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ध्रुव अपने प्लेन में तेज़ी से रूपनगर बढ़ रहा था। तभी अचानक से हवा में एक द्वार बनने लगा।
‎ध्रुव -अरे ये तो किसी तरह का तिलिस्मी द्वार लगता है। परन्तु यह हवा में अचानक से कैसे प्रकट हो गया । जरूर ये किसी प्रकार का षड्यंत्र है। इससे बचना होगा।
पर ध्रुव के संभलने और प्लेन को मोड़ने से पहले ही ध्रुव प्लेन सहित उस द्वार में समा गया।
‎द्वार के उस पार एक अजीब सी जगह थी । चारों तरफ मरुस्थल की भांति रेत फैली हुई थी। ध्रुव ने धीरे धीरे अपना प्लेन नीचे उतारा और बाहर निकला । चारों ओर रेत के टीले थे । कहीं कहीं बीच में नागफनी के छोटे छोटे पेड़ भी थे । पर वो पेड़ हरे नही थे बल्कि पत्थरों की भाँति निर्जीव थे। चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ था।
‎ध्रुव-कौन है। किसने मुझे यहाँ पहुँचाया । कौन सी जगह है ये।
‎तभी अचानक से पीछे से आवाज आई। -“यह तिलिस्म है मूर्ख । और अवश्य तेरी मृत्यु ने ही तुझको यहाँ पहुँचाया होगा।”

ध्रुव ने पीछे मुड़ कर देखा । पाँच आकृतियाँ वहाँ खड़ी थी। पांचों के शरीर अलग अलग पदार्थों के बने थे। एक का शरीर मिट्टी का बना था , एक का शरीर जल, एक का शरीर अग्नि, एक का शरीर बादलों का , एक का शरीर वायु का बना था। ये पाँचो क्रमशः पंचतत्त्वों -पृथ्वी, जल, अग्नि ,नभ और वायु का प्रतीक लग रहे थे। यह उन्ही की सम्मिलित आवाज थी। पांचों फिर से एक साथ बोल पड़े-
‎” यह पंचतत्वों का क्षेत्र है। यहाँ जो भी आता है पंचतत्वों में विलीन हो जाता है।”
‎इसी के साथ नभ ने ध्रुव पर तड़ित वार कर दिया।
‎ध्रुव कूदकर प्लेन के पीछे छिप गया।
‎वायु-क्या समझते हो मानव, इस यंत्र के पीछे छुप कर तुम कब तक बचोगे ।
‎तभी वायु ने बवंडर पैदा कर प्लेन को हवा में उठा लिया। अग्नि ने वार करके उस प्लेन को ध्वस्त कर दिया । प्लेन के छोटे बड़े टुकड़े चारों ओर फैल गए। ध्रुव बहुत मुश्किल से उनसे बचा । जल ने ध्रुव पर प्रहार किया , एक तेज़ बौछार लगने पर ध्रुव उछल कर दूर जा गिरा।

‎नभ ने फिरसे ध्रुव पर तड़ित वार किया। ध्रुव ने पास ही पड़े एक टुकड़े को उछाल दिया । तड़ित वार उस धातु में समा गया ।
‎ध्रुव-उफ! इस तरह इनसे ज्यादा देर तक बचना मुश्किल है । कुछ और ही सोचना पड़ेगा।
‎तभी पृथ्वी ने अपना हाथ उठाया और ध्रुव उसकी तरफ खिंचने लगा।
‎ध्रुव-ये क्या है , लगता है ये अपनी गुरूत्व शक्ति का प्रयोग कर राह है। इनको रास्ते से हटाने के लिए इनको एक एक करके परास्त करना होगा।
ध्रुव खिंचते हुए उनके पास पहुँच गया। ध्रुव ने पास ही पड़े इंजन के एक भारी टुकडे को उठाया और पृथ्वी की तरफ उछाल दिया। परन्तु पृथ्वी की तरफ पहुंचने से पहले ही वायु ने उसे दूर उछाल दिया। वो टुकड़ा एक नागफनी के निर्जीव पेड़ पर गिरा । नागफनी का पेड़ टूटकर अलग हो गया और उसमें से एक अजीब सी रोशनी निकली।
‎ध्रुव -ये क्या था?
‎जल की बौछारों ने फिर ध्रुव को धकेल दिया।

‎ध्रुव-उफ !ये जल का प्रहार तो बिल्कुल पत्थर की भांति लग रहा है। इनसे बचने के चक्कर में मैं केवल अपना समय गवाऊंगा और रूपनगर समय से नहीं पहुँच पाउँगा। कहीं इस तिलिस्म में ही मैं इनके हाथों से न मर जाऊँ।
तिलिस्म ……ओह …यस । तिलिस्म , अगर यह तिलिस्म है तो इसकी कुंजी भी यहीं होगी । क्योंकि तिलिस्म में ही उसको तोड़ने की कुंजी भी होती है। पर कहाँ , यहाँ तो दूर दूर तक रेत के अलावा कुछ भी नहीं है…है है ये नागफनी के वृक्ष जरूर इन्ही से कुछ होगा। शायद इनके प्रहार से ये नष्ट हो जाएं।
‎परन्तु मैं प्रहार किसपे करूँ । इसमें से प्रमुख कौन है।
‎अग्नि ने ध्रुव पर अग्नि शक्ति से प्रहार किया , पर ध्रुव रेत के टीलों में कूदकर बच गया ।
‎ध्रुव बचते हुए सोच भी रहा था।-पृथ्वी । इन पंचतत्वों में पृथ्वी ही सबसे प्रमुख होती है। बाकी के चार तत्व नभ , जल , वायु और अग्नि पृथ्वी के बिना अस्तित्व हीन हैं। इसीलिए मुझे पृथ्वी पे प्रहार करना चाहिए।

ध्रुव ने पास ही एक नागफनी को उखाड़ने के लिए जैसे ही छुआ , दर्द से कराह उठा।
‎ध्रुव-आ आह…इनमें तो शायद विद्युत प्रवाह हो रहा है। इनको उखाड़ना तो बहुत ही दुष्कर है। ओह …याद आया अभी कुछ देर पहले एक नागफनी टूटा था । शायद उससे कुछ मदद मिले। पर उसके लिए फिर उनके पास जाना पड़ेगा।
‎ध्रुव बचते हुए उनके तरफ बढ़ने लगा।
‎अग्नि-लगता है तू समझ गया है , कि हमसे बचना असंभव है। इसिलिए स्वयं अपनी मृत्यु की तरफ़ बढ़ा चला आ रहा है।
‎सबके वारों से बचते हुए ध्रुव बढ़ रहा था कि अग्नि का एक वार उसे लग गया । इससे पहले की अग्नि पूर्ण रूप से उसके शरीर को जला पाती ध्रुव जमीन फार फैली हुई रेत में लुढ़क गया। इससे उसकी अग्नि भी बुझ गयी। लुढकते हुए ही उसने टूटे हुए नागफनी को उठा लिया और किसी के कुछ समझने से पहले ही पृथ्वी पर पूरी तेज़ी से फेंक दिया। नागफनी रूपी शस्त्र पृथ्वी के सीने में धँस गया। बाकी के अन्य प्रतिरूप भी गायब होकर पृथ्वी के शरीर में सामने लगे।

‎अंततः पृथ्वी का प्रतिरूप भी गायब होने लगा।
‎ध्रुव-मैं सही था । पृथ्वी ही इन सबमें प्रमुख थी। यानी कि अब तिलिस्म टूट गया है और मैं बाहर जाने वाला हूँ।
‎पृथ्वी के गायब होते ही ध्रुव वापस वहीं पहुंच गया।
‎ध्रुव-इन सब चक्करों में मेरा प्लेन आखिरकार नष्ट हो गया। अब जब तक मैं स्टार ट्रांसमीटर से कोई मदद बुलाऊँगा तब तक आगे का रास्ता पैदल ही नापना पड़ेगा । चल बेटा ध्रुव दिमाग की कसरत बहुत हुई अब थोड़ी पैरों की भी कसरत कर ली जाए।
‎————————–
‎स्थान-असम।
‎शाम का समय है। पूरा जंगल चिड़ियों और जानवरों की आवाजों से गूँज रहा था।
‎नागराज काल मृत्यु आराधना शुरु कर चुका था ।
‎फूजो बाबा के आश्रम में –
‎विसर्पी – कितनी मधुर है ना ये ध्वनि।
‎भेड़िया – हाँ । क्योंकि यह प्रकृति की शुद्ध ध्वनि है।
‎डोगा- यह ध्वनि किसी के भी विचलित मन को कितना सुकून पहुँचायेगी।

‎स्टील-हाँ! मेरा पेसमेकर भी इस ध्वनि को सुनकर धीरे धीरे बहुत ही सुकून से चल रहा है।
परमाणु- हाँ ! सही कहा दिल्ली में तो प्रदूषण ही इतना अधिक है कि हमेशा वाहनों की ही ध्वनि सुनाई पड़ती है।।
‎दिल्ली से याद आया , तिरंगा कही नही दिख रहा है।
‎भेड़िया- मैंने उसे बाहर जाते हुए देखा था, रुको मैं देखता हूँ।
‎अंधेरा घिर चुका था। तिरंगा मंदिर के बाहर ही खड़ा था।
‎भेड़िया- क्या बात है तिरंगा । तुम यहाँ क्या कर रहे हो। मैंने व्यवस्था कर दी है, अब इधर कोई नही आयेगा।
‎तिरंगा-मुझे तुम पर और तुम्हारी सुरक्षा प्रणाली पर पूर्ण विश्वास है भेड़िया , परंतु हाल ही में हुई घटनाओं को ध्यान में रखते हुए सावधानी भी अति महत्वपूर्ण है । इसीलिए मैने सोचा कि क्यों ना आस पास देख लूँ एक बार।

‎ भेड़िया-तुम सही कह रहे हो तिरंगा।मैं भी देखता हूँ आस पास ।
‎भेड़िया पास ही टहलने लगा । तभी एक आकृति उसके सामने से गुजरी ।
‎भेड़िया-/मन में/(ये तो एक जानी पहचानी सी आकृति है)
भेड़िया तेजी से उस आकृति की तरफ बढ़ता है , और उसको देखते ही आश्चर्य से जड़ हो जाता है।
‎उसके मुख से स्वतः ही निकलता है -“जेन।”
‎जेन तेजी से जंगल की तरफ बढ़ने लगी। भेड़िया भी उसके पीछे चला गया।
‎——–
‎ आश्रम में –
‎परमाणु-ये विसर्पी बाहर कुँए से जल भरने गयी थी कहाँ रह गयी ? 
‎तभी फूजो बाबा आते है।
‎फूजो-बेटा। विसर्पी नहीं मिल रही । जिस पात्र में वो जल भरने गयी थी वो बाहर पड़ा हुआ है।
डोगा-क्या कहा।नहीं मिल रही । आखिर कहाँ जाएगी।



मंदिर के बाहर-
तिरंगा- अब ये भेड़िया भी पता नहीं कहा चला गया।

तभी तिरंगा को अपने पीछे किसी की आहट सुनाई पड़ती है। वह पीछे मुड़कर देखता है परंतु वहाँ कोई नहीं था।
तिरंगा आगे देखता है और चौक जाता है। नागराज अपने जगह पर नही था।
तिरंगा-नागराज! नागराज कहाँ गया? उफ!जिसका डर था वही हुआ।
————–पंचम पर्व-समाप्त—————-

नागराज कहाँ गायब हो गया?
क्या जेन सच में वापस आ गयी है?
विसर्पी कहाँ गायब हो गयी?
क्या नागराज काल मृत्यु आराधना कर पायेगा?
क्या ध्रुव समय से रूपनगर पहुँच पायेगा?
नमस्कार मित्रों , आशा करता हूँ यह भाग आपको पसंद आया होगा।
इस भाग में आपको क्या अच्छा लगा?
संवाद कैसे थे?
कहानी में बुने हुए रहस्य कैसे हैं?
एक्शन सीन कैसे थे?
जरूर बताइयेगा।

written by – Akash Pathak for Comic Haveli.

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10 Comments on “Nagbharat (Bhediya Parv)”

  1. वाह मजा आ गया बहुत ही अच्छा।
    ध्रुव vs पांच तत्व मजा आया ।
    नागेंद्र और फेसलेस की लड़ाई थोड़ा छोटी रही।
    जेन की वापसी !
    अगर ऐसा है तो मजेदार रहेगा।
    संवाद काफी सही है कहानी के साथ पूरा न्याय कर रहे हैं।
    रहस्य काफी है जो मजबूर कर रहे हैं कि आगला पार्ट पढ़ना ही होगा जो एक कहानी का सबसे मजबूत पक्ष होता है।
    कहानी पता ही नही लगा कब खत्म हो गयी…

    अंत मे एक ही वर्ड जबरदस्त

  2. बहुत बढ़िया आकाश जी, एकदम बढ़िया स्टोरी चल रही है। उम्मीद है कि आगे ध्रुव एंथोनी को ढूंढ पायेगा और नागराज अपनी आराधना पूरी कर सकेगा।

    1. धन्यवाद हर्षित जी।
      आशा करता हूँ नागराज और ध्रुव दोनों अपने कार्य में सफल हों।☺️

  3. Bht hi jabarjast
    Mai ti fan banti ja rahi hu akash ki writting ki .
    RC walo ko bhejo ye story .
    Unki sarvnayak se bht behtaer hai ye

    1. धन्यवाद मोनी जी।
      आशा करता हूँ आगे के भाग भी आपको अवश्य पसंद आएं।

  4. Lajawab aakahs ji maza aagya read krke aap yaar jaldi jaldi story post kiya kro q ki aapki story ka wait krna zara mushkil sa lagta hai mere liye

  5. बहुत बढिय़ा आकाश जी।जबरदस्त स्टोरी है।वाकई आप के पास गाड गिफ्ट है। कहानी पढकर ऐसा लग रहा है कि सब कुछ आखों के आगे ही घटित हो रहा है।आगे के पार्ट का इंतजार रहेगा।
    धन्यावाद और शुभ कामनाएँ।

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