Nagbharat (Nagdweep Parv)

नागभारत
नागद्वीप पर्व
अध्याय -1
स्थान – एक निर्जन आयाम में एक ग्रह ।
मरू ग्रह।
किसी भी प्रकार की हरियाली का दूर तक कोई नामोंनिशान नहीं ।
चाराें ओर बड़े बड़े चिमनियों के आकार के संयंत्र लगे हैं । बीच में कुछ तंबू की तरह अस्थायी निवास भी बने हैं।
इसी प्रकार के एक निवास में ध्रुव , धनंजय , शक्ति और महात्मा कालदूत हैं ।
शक्ति – तो प्रोबॉट का भाला लगने के बाद तुम्हारी नींद खुल गयी?
ध्रुव-नहीं ! इसके बाद भी सपने में कुछ और विचित्र हुआ ।
“भाला लगने के बाद मेरी चेतना विलुप्त हो गयी। मुझे लगा मेरी आत्मा मेरे शरीर से निकलकर शून्य में विलीन हो रही है । उसके बाद मैंने अपने आप को ऐसी जगह पाया जहाँ चारों ओर महाखलनायक थे , नरकपाशा , रोबो , थोडांगा इत्यादि। कुछ देवदूत जैसे लोग उनको कोड़े से पीट रहे थे । कुछ के हाथ बँधे हुए थे । पूरी जगह उनकी हृदयविदारक चीखों से गूँज रही थी ।
‎वो शायद नर्क था ।
‎मुझे वहाँ देखते ही सब मेरे ऊपर चिल्लाने लगे ।
‎” आखिर तुमने अपना वादा तोड़ दिया ध्रुव। तुम्हीं ने मारा है हम सबको । तुम एक हत्यारे हो “
‎”हत्यारे !”
‎जिनके चेहरे अभी तक वेदना से भरे हुए , वे अब घृणा से भरे थे । उनकी चीखें कानों से होते हुए मेरे हृदय को बेध रहीं थी । मैं ये सब नहीं सुन पा रहा था । मैंने अपने हाथों से अपने कानों को ढ़क लिया। पर फिर भी उनकी आवाजों को नहीं रोक पाया ।
‎तभी एक तेज रोशनी का धमाका हुअा । मेरे आसपास का सारा दृश्य बदल गया । उसी पल मेरे सामने एक दिव्य पुरूष प्रकट हुए ।
‎वो समस्त नागों के इष्ट देव थे ।
‎देव कालजयी ।”
‎__________
अध्याय -२
‎स्थान – नागद्वीप ।
‎नागराज के स्वंयवर जीतने के बाद धूमधाम से उसका विवाह आयोजित किया गया था । बहुत ही सुंदर ढ़ंग से उसका विवाह मंडप सजा था । मंडप में बैठे नागराज और विसर्पी की जोड़ी साक्षात शिव पार्वती की जोड़ी लग रही थी । परमाणु ,डोगा , तिरंगा , स्टील मंडप के पास खड़े थे ।
‎स्वंयवर में आए प्रतिभागी या तो वापस लौट गये थे या नागद्वीप में ही रहकर इस भव्य विवाह का आनंद ले रहे थे ।
‎गुरूदेव और नर्कशत सेना अभी नागद्वीप में ही मौजूद थी । नरकपाशा मंडप के पास ही था । गुरूदेव अपने यान में बैठकर सारे स्थिति का अवलोकन कर रहा था । नर्कशत सेना की आँखों से वह सारा दृश्य देख रहा था ।
‎गुरूदेव ने एक यंत्र में कहा- समय हो गया है नरकपाशा। जिसके लिये हम सब नागद्वीप पर हैं , उसका समय हो चुका है।
‎नरकपाशा – जी गुरूदेव !
नर्कशत सेना के सभी लोग मानसिक रूप से जुड़े थे। नरकपाशा ने उन सबसे कहा- सब लोग ध्यान से सुनो । “नीलमणि” के प्रकट होने का समय आ गया है , अब सब लोग धीरे धीरे पूरे नागद्वीप पर फैल जाओ , और जैसा समझाया गया था वैसा ही करो ।
नर्कशत सेना धीरे धीरे पूरे नागद्वीप पर फैलने लगी । वे नागद्वीप के अनअधिकृत क्षेत्रों में जबरदस्ती घुसने लगे ।और रोका जाने पर रक्षकों से विवाद करने लगे और उन्हें मारने लगे । कुछ ने जलाशयों में खतरनाक रसायन मिला दिये । थोड़ी ही देर में उन्होंने उत्पात मचा दिया ।
इधर नागराज और विसर्पी का विवाह संपन्न हुआ।
‎अमात्य-विवाह सम्पन्न हुआ । प्रातः काल विदाई का शुभ मुहुर्त है । तब तक विसर्पी अपने कक्ष में कुछ रस्मों को पूरा करेंगी । और नागराज आप अपने मित्रों के साथ अतिथिगृह में विश्राम करें।
‎नागराज- जैसा आप उचित समझें ,अमात्य।
अमात्य ने एक द्वारपाल को संकेत से बुलाया ।
‎अमात्य-सर्पक !इनको अतिथिगृह तक ले जाओ।
पाँचो अतिथिगृह की तरफ बढ़ने लगे । तभी रास्ते में नागराज रूका ।
‎नागराज-रूको ! कुछ गड़बड़ है ।
‎डोगा-क्या हुआ?
‎नागराज- मुझे विभिन्न सर्पों के मानसिक संकेत मिल रहे हैं । नर्कशत सेना पूरे नागद्वीप पर उत्पात मचा रही है ।
‎परमाणु – ये लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आयेंगे।
‎तिरंगा- इनको फिर एक बार सबक सिखाना पड़ेगा ।
‎स्टील- तुम चलो नागराज । हम अभी आते हैं।
‎नागराज- नहीं स्टील । नागद्वीप की रक्षा करना मेरा भी कर्तव्य है । मैं भी चलूँगा ।
‎तिरंगा- ठीक है । तो फिर हम पाँचों अलग अलग दिशाओं में चलते हैं।
‎नागराज- ठीक है । सब लोग अपने ट्रांसमीटर ऑन कर लो । हम ब्रह्माण्ड रक्षकों की फ्रीक्वेंसी पर लगातार संपर्क में रहेंगे।
‎_______
मरू ग्रह।
‎धनंजय- तुमको कैसे पता चला वो देव कालजयी थे?
‎ध्रुव- मैंने नागद्वीप पर उनकी मूर्तियाँ देखीं थी ।
और उनका तेज और उनके आसपास का वातावरण भी इसकी पुष्टि कर रहा था ।
‎महात्मा कालदूत- फिर उसके बाद क्या हुआ ।
‎ध्रुव- उन्होंने कहा –
‎” घबराओ मत ध्रुव । यह मात्र एक स्वप्न है । ”
‎मैंने पूछा-“परंतु देव यह किस प्रकार का स्वप्न है ?
 ‎ क्या निकट भविष्य में मेरे साथ एसा ही होगा?”

‎”भविष्य में क्या होने वाला है ,यह तो कोई नहीं बता सकता । हम भी केवल अनुमान ही लगा सकते हैं।
‎भविष्य कभी भी पूर्व निर्धारित नहीं होता । विभिन्न परिस्थितियों में हमारे द्वारा लिए गये निर्णय ही हमारा भविष्य निर्धारित करते हैं । और निकट भविष्य में एक ऐसी ही महायुद्ध की परिस्थिति उत्पन्न होने वाली है । एक ऐसा महायुद्ध जो पूरी पृथ्वी का भविष्य निर्धारित करेगी ”
‎ ” तो क्या ये महायुद्ध ही सबकी नियति है । क्या इस महायुद्ध को टाला नहीं जा सकता?”
‎ “जो परिस्थितियाँ उत्पन्न होने वाली है उनको नहीं टाला जा सकता । परन्तु अपने निर्णयों से उनके परिणामों को अवश्य निर्धारित किया जा सकता है।”
कक्ष में उपस्थित शक्ति , धनंजय और महात्मा कालदूत बड़े ध्यान से सब सुन रहे थे ।
‎ध्रुव ने बोलना जारी रखा – उसके बाद उन्होंने मुझे नीलमणि के बारे में बताया ।फिर मेरी नींद खुल गयी । अब परिस्थितियाँ मेरे सामने थीं और निर्णय मुझे लेना था ।
‎और फिर मैं आप सबके साथ धनंजय की सहायता से इस आयाम में आ गया । अब बस कुछ ही क्षणों में नीलमणि इस ग्रह से विलुप्त होकर पृथ्वी पर प्रकट होने वाली है । तब हम शक्ति और सामरी की अग्नि शक्तियों से उन संयंत्रो को क्रियान्वित कर देंगे जिनको हमने पिछले एक महीनों में बनाया है ।
‎शक्ति-परंतु यह कार्य इतना सरल नहीं है । संयंत्रो को क्रियान्वित करने के बाद हमारे पास केवल कुछ ही क्षण होंगे इस ग्रह को छोड़ कर वापस पृथ्वी पर लौटने के लिये , क्योंकि उसके बाद इनका ताप हमें भी भस्म कर देगा ।
‎ धनंजय-और वही कुछ क्षण हमारे जीवन या मृत्यु का निर्धारण करेंगे ।
‎ ध्रुव-अगर मृत्यु हमारा वरण भी कर लेगी तो भी हम कम से कम अपने उद्देश्य को पूर्ण तो कर ही लेंगे। हमारा जीवन उद्देश्यहीन नहीं रहेगा।
‎_________
अध्याय -३
‎नागद्वीप।
बौना वामन एक वर्जित क्षेत्र की ओर बढ़ रहा था । रक्षकों ने उसे रोका पर वह नहीं मान रहा था ।
‎”रूक जाओ बौना वामन ।” बौना वामन ने पीछे मुड़कर देखा ,परमाणु वहाँ पहुँच चुका था ।
‎ बौना वामन -परमाणु । वंडरमैन परमाणु । बहुत दिन हो गये थे तुम्हारे ‘वंडरफुल’ कारनामों को देखे हुए ।
‎परमाणु- मत भूलो बौना वामन तुम मेहमान हो । और मेहमानों की भी एक सीमा होती है ।
‎बौना वामन-अरे रे रे । मैं तो बस खेलना चाह रहा था । पर कोई मेरे साथ खेलता ही नहीं । पर लगता है तुम खेलोगे । लो यह गेंद पकड़ो ।
इतना कहते ही उसने एक गेंद परमाणु के मुँह पर फेंका। परमाणु ने फुर्ती से उसे पकड़ लिया । परंतु तुरंत ही वह गेंद फूट गयी । उसमें से एक चिपचिपा पदार्थ निकलकर परमाणु को ढ़कने लगा ।परमाणु के कुछ समझने से पहले ही वह कैद हो गया । उसके हाथ बेल्ट तक नहीं पहुँच रहे थे ।ना ही उसके गले से आवाज निकल रही थी ।
‎बौना वामन-अलविदा परमाणु । जिंदा बचना तो उस टीन के डब्बे प्रोबॉट को मेरा हॉय जरूर कहना । मैं चला ।
परमाणु को कुछ समझ नहीं आ रहा था । वह छटपटाने लगा । अचानक उसे जैसे कुछ याद आया। उसने आँखे बंद की और ध्यान लगाने लगा । कुछ ही क्षणों में उसका शरीर चमकने लगा । यह दिव्यास्त्रों की ऊर्जा थी । चिपचिपा पदार्थ पिघलने लगा और परमाणु आजाद हो गया ।
‎_______
‎नागद्वीप के एक प्रमुख जलाशय में डाक्टर वायरस कुछ मिला रहा था ।
‎तभी स्टील वहाँ पहुँचा ।
‎स्टील – ये तुम क्या मिला रहे हो , जलाशयों में ?
‎वायरस- कुछ खास नहीं । कुछ दवाँए है । नागद्वीप वासियों को और सेहतमंद बनाँएगी । तुम्हारे लिए भी है ।
इसी के साथ वायरस ने एक इंजेक्ट गन का ट्रिगर दबा दिया, एक इंजेक्शन स्टील के शरीर में धँस गया।
‎स्टील-तुम सच में एक मूर्ख हो वायरस , तुम्हारे ये जैविक विषाणु मेरे ऊपर कोई असर नहीं कर पायेंगे क्योंकि मैं तो एक मशीन ह… हू…हूँ…।
इसी के साथ स्टील नीचे गिर पड़ा
‎वायरस-मूर्ख मशीन । तुझको पता नहीं इसमें जैविक विषाणु नहीं थे, मशीनी विषाणु भी थे । तैयारी करके आना हमेशा काम आता है ।
वायरस पीछे मुड़ कर बात करता है ।
‎वायरस-हैलो । हाँ मैंने स्टील का काम तमाम कर दिया है ।
तब तक स्टील सँभल चुका होता है ।
‎स्टील- काम पूरा करने से पहले पुष्टि तो कर लेते । मुझे सँभलने में कुछ पल का समय जरूर लगा , पर इसका यह मतलब नहीं कि मैं हार गया ।
‎वायरस(आश्चर्य से)- पर कैसे मैंने तुम पर कोई साधारण वार नहीं किया था ।
तब तक स्टील वायरस को स्टील रोप से बाँध चुका था ।
‎_____
थोडांगा नागद्वीप की प्राचीन धरोंहरों को तोड़ रहा था । तभी डोगा वहाँ पहुँचता है ।
‎डोगा -रूक जाओ थोडांगा ।
पर थोडांगा नहीं रूकता । डोगा थोडांगा पर गोलियों की बारिश कर देता है । पर थोडांगा पर कोई असर नहीं होता । तभी डोगा को महसूस होता है कि किसी अदृश्य शक्ति ने उसे जकड़ लिया है ।
‎तभी वहाँ चुंबा आता है।
‎चुंबा-घबराओ मत डोगा मैंने ही तुमको कैद किया है। अपनी बढ़ी चुंबकीय शक्तियों से मैंने तुम्हारे सीने पर मौजूद लौह कवच को अपने वश में कर लिया है।
‎अब तुम हिल नहीं सकते ।
‎थोडांगा-शाबाश । अब इससे पहले यह कुछ और करे मैं इसकी चटनी बना देता हूँ ।
इसी के साथ थोडांगा डोगा पर एक लंबी छलांग लगा देता है ।
‎थोडांगा एक निश्चित मृत्यु की तरह डोगा पर छलाँग लगाता है । डोगा एक लंबी साँस लेता है और अपनी आँखे बंद कर लेता है । एक ऊर्जा कवच डोगा को घेर लेता है। थोडांगा उस कवच से टकराकर दूर चुंबा पर गिरता है और दोंनो बेहोश हो जाते है ।
‎________
काल पहेलिया सभागृह के स्तंभों पर विस्फोटक बाँध रहा था । तभी तिरंगा की ढ़ाल काल पहेलिया से टकराती है और वह गिर पड़ता है ।
‎काल पहेलिया – आओ तिरंगा । चलो मेरे एक सवाल का जवाब दो । दिल्ली वासियों के जीवन और मृत्यु का रंग एक ही है बताओ वह क्या है?
‎तिरंगा -सफेद क्योंकि कफन का रंग और मेरे वस्त्र दोनों का रंग वही है ।
‎काल पहेलिया -शाबाश ।
‎तिरंगा – अब तुम मेरे एक सवाल का जवाब दो ।
जिनपे तुम विस्फोटक बाँध रहे थे और तुम्हारी हार का कारण एक ही है । बताओ वह क्या है।
‎काल पहेलिया कुछ समझ नहीं पाता । तभी तिरंगा न्याय स्तंभ से एक भीषण प्रहार कर देता है । काल पहेलिया बेहोश हो जाता है।
‎तिरंगा -इसका जवाब था स्तंभ ।
‎____
पाँचो ब्रह्माण्ड रक्षक ट्रांसमीटरों पर बातें कर रहे थे।
‎तिरंगा – स्थिति बहुत गंभीर है नागराज । वे सब पूरी तैयारी के साथ आये हैं ।
‎परमाणु – हाँ । हमारे दिव्यास्त्रों की ऊर्जा ने हमें बचाया है।
‎डोगा -लगता है हमें भी दिव्यास्त्रों का प्रयोग करना पड़ेगा ।
‎नागराज-नहीं। अभी नहीं कुछ देर और देखते हैं । परंतु इन सबका प्रमुख नरकपाशा कहाँ है?
गुरूदेव नरकपाशा से बात करता है ।
‎गुरूदेव-सावधान रहना नरकपाशा , नागराज ने तुम्हारी खोज शुरू कर दी है ।
‎नरकपाशा- बस कुछ पल और फिर नीलमणि मेरे पास होगी ।
‎गुरूदेव-हाँ । परंतु तब तक उसको रोके रखना होगा । ‎इतनी तैयारियों के बाद भी कोई उसे रोक नहीं पा रहा है ।
‎नरकपाशा-रूकेगा । और नागराज को रोकेगा नागेन्द्र।
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अध्याय-४(परिशिष्ट )
‎मरू ग्रह
‎महात्मा कालदूत -परंतु देव कालजयी ने तुम्हें क्यों चुना ।
‎ध्रुव-इस प्रश्न का उत्तर तो मेरे पास भी नहीं है ।
‎शक्ति – मेरे मन भी अभी भी कुछ प्रश्न हैं । जैसे कि ब्रह्माण्ड रक्षकों को प्रशिक्षण की आवश्यकता क्यों पड़ गयी ।
ध्रुव-क्योंकि शायद बाद में इसका समय नहीं मिलता ।
तभी वहाँ सामरी आता है।
‎सामरी-समय हो गया है ध्रुव । नीलमणि यहाँ से विलुप्त हो गयी है ।
‎ध्रुव-ठीक है । अब तुम और शक्ति जा के संयंत्रो को अग्नि शक्ति से क्रियान्वित कर दो । और धनंजय तुम सबको यहाँ एकत्रित करो इन दोनो के वापस आने के पश्चात हम तुरंत ही वापस लौट चलेंगे ।
कुछ ही देर में सब एकत्रित हो जाते हैं । शक्ति अपने विभिन्न रूपों में विभक्त होकर अपना कार्य करती है ।
कुछ ही पल में अग्नि की विशाल लपटें उठने लगती हैं । सामरी और शक्ति वापस आ जाते हैं ।
ध्रुव- अब जल्दी करो धनंजय , द्वार खोलो।
धनंजय कुछ करता है परंतु द्वार नहीं खुलता ।
शक्ति-क्या हुआ धनंजय? जल्दी करो।
धनंजय-पता नहीं । पता नहीं क्यों यह द्वार नहीं खुल रहा । शायद यही हमारा अंत है।
_____
नागद्वीप
नरकपाशा एक खंडहर जैसे जगह पर खड़ा है ।आस पास सन्नाटा है ।
तभी पूरा आकाश बिजलियों से चमक उठा । पूरा खंडहर एक नीली रोशनी से भर उठा । एक नीली मणि वहाँ प्रकट हो गयी ।
नररपाशा ने नीलमणि को उठा लिया । नीलमणि उसकी हथेली में समा गयी । आकाश में बादल गरजने लगे।
“नीलमणि । आखिरकार नीलमणि मेरी हुयी । अब इस संसार में कोई भी मुझे नहीं रोक सकता । मैं अजेय हूँ ।” 

नमस्कार मित्रों
आशा करता हूँ नागभारत का यह द्वितीय पर्व आपको पसंद आया होगा । ध्रुव ने जो सपना देखा उसका एक खास अर्थ है जो अगले भागों में पता चलेगा । ध्रुव कहाँ है यह तो पता चल गया पर वह क्या कर रहा है यह भी अगले भागों में पता चलेगा । और भी अन्य किरदार इस कहानी में आने वाले हैं। तब तक हवेली की अन्य कहानियों का लुत्फ उठाएँ । आपके सुझावों का स्वागत है । 

Written By – Akash Pathak for Comic Haveli 

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13 Comments on “Nagbharat (Nagdweep Parv)”

  1. bahut hi badhiya concept hai. Suspense bhi bahut achcha banaya hai. Kahin bhi kahani kam nahi pad rahi. Sirf 1 request hai ki jyada badi kahani prakashit karein jisse kahani achchi tarah samajh aayegi, maza bhi bana rahega aur jaldi samapan bhi hoga.

  2. Wow this is some story.
    There were so many significant things that happened.
    And those significant things make this part a must read part.
    Tiranga ka kirdar achha laga bahut. Kalu ko usi k style me harane ka.
    Doga kaise bacha ye ek rahasya hai aur wahi rahasya steel k sath bhi h.
    Chaliye dhruv aur baki logo ka pata chal gya. But dhruv ka kathan bhi sahi hai k aakhir use hi kyun chuna gya.
    Khair wo hamara captain hai. Hihihi. Uski jagah kisi aur ko chuna jata to maza bhi nahi aata.
    Now coming to the story.
    Sabse badi fault k pichhle part me nagendra ko itna bada role diya aur is part me wo hai hi nahi. The readers won’t like thing. Ye ho sakta hai chhote parts release karne k karan bhi ho.
    Dhananjay se dwaar kyun nahi khula aur dhruv tatha vistrit brahmand rakshako ka kya hua ye to agle part me hi pata chalega.
    Sawal ye hai k agar dev kaljai sab jante the to unhonne direct narakpasha ko hi kyun ni roka
    Aur ye nagpasha narak pasha kaise ban gya?
    Un sanyantro ka kya kaam hai jo shakti aur samari ne active kiye?
    Nilamani kya hai aur wo narak pasha k hath me kyun sama gayi?
    Doga ka kawach metallic nahi hai, ye ek hard elastic material se bana hai. Reference- aath ghante
    Nagendra ko nagraj ka bhai btana bhi sahi nahi hai kyun ki wo sirf dev kaljai k aashirwad se paida hua hai, raja takshak ya rani lalita se koi matlab nahi hai new hi nagpasha se
    Is tarah se bankelal ganesha bhagwan ka bhai ho jayega
    One more question,
    Dhruv ko to sab pta tha fir bhi nilamani prithvi par kyun bheji narakpasha k kabze me karne k liye.?
    Khair in sabka jawab aane wale parts me milega
    Bahut hi damdar storyline ja rahi hai
    Nagendra ki shaktiya bhi unknown hai
    Akash ji bas fight scenes thodi si lambi kijiye
    Wo superheroes ki story ki jaan hoti hai
    Baki mujhe ye part bahut hi behatreen laga
    Pichhle part se bahut jyada damdar
    Parts thode se lambe kijiye
    Itna intezaar karwana bhi thk nahi
    All the best for next parts

    1. Dhanyabad pradip ji.
      sabse pahle …nagpasha ka narakpasha banana pahle part me batay gaya hai.
      doga ke case me thoda elaborate karna chaiye tha mujhe , baki doga ,parmanu aur baki sab divyastro ki urja ke karan bache hai ye maine story me bhi bataya hai.

  3. bhai story bahut achi h…keep it up…apne busy schedule m se time nikalkar apne passion k liye time dena aur itna acha karna k har koi appreciate kare…really kabile tarif h…story line bahut achi h…waiting for 3rd part…..best of luck Akash bhai….

  4. बहुत आकाश भाई बहुत ही अच्छी है यह। आप तो कमाल लिखते हैं भाई मन कर रहा था सारा पार्ट एक ही बार में पढ़। और सस्पेंस बनाने में तो आप कमाल के निकाल। सच में बहुत ही बढ़िया सिरीज़ है यह।

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