Nagbharat (Neelmani Parv)

नागभारत
‎(नीलमणि पर्व)
“जैसा कि हम सब जानते है यह ब्रह्मांड अनंत है ।
पर उसके साथ ही ये बहुत ही संतुलित भी है ।
यहाँ हर ऊर्जा की एक विपरीत ऊर्जा है ।देवता हैं तो दानव भी हैं। पाप है तो पुण्य भी है।
इसी प्रकार ब्रह्मांड के प्रारंभिक वर्षों में विषयुक्त पाप ऊर्जा पूरे ब्रह्माण्ड में फैली हुई थी। इस ऊर्जा की विपरीत पुण्य ऊर्जा जहाँ देवताओं के अनुकूल थी और उन्हें सृष्टि का विस्तार करने में सहायक थी , वहीँ विषयुक्त पाप ऊर्जा की सहायता से दानव हमेशा देवताओं से युद्ध करते थे और उनकी सृष्टि का विध्वंस कर देते थे।
तब देवताओं ने उस ऊर्जा को कैद करने का निर्णय लिया। उन्होंने एक यंत्र बनाया जिससे उस ऊर्जा को एकत्र करके उसे एक दूसरे आयाम में भेज दिया । परन्तु दानवों ने उस आयाम में जाने का मार्ग भी खोज लिया और फिर से देवताओं को परेशान करने लगे। तब सब देवताओं ने निर्णय लिया और निर्माण किया नीलमणि का।”- ध्रुव ने कहा।

सर्प नौका महानगर की तरफ बढ़ रही थी । सब ध्यान से ध्रुव की बातें सुन रहे थे।
‎ध्रुव ने बोलना जारी रखा-
‎ “नीलमणि से उन्होंने उस आयाम द्वार को बंद कर दिया । नीलमणि किसी भी प्रकार की ऊर्जा को नियंत्रित कर सकती थी। अब नीलमणि उस आयाम के लिए एक कुंजी थी। यदि कोई नीलमणि प्राप्त भी कर लेता तो उस असीमित ऊर्जा का इस्तेमाल नही कर सकता था। क्योंकि नीलमणि ने ऊर्जा के बहाव को नियंत्रित कर दिया था । जब तक कोई अधिक ऊर्जा लेने की कोशिश करता तब तक देवताओं को पता चल जाता और वे दानवों को रोक देते । फिर नीलमणि की सुरक्षा के लिए चुना गया मरु ग्रह को।
‎ मरु ग्रह पहले हमारे सौर मंडल में ही था। परंतु उसके एक भूल वश अपराध के कारण उसे निष्कासित कर दिया गया । उसे एकल आयाम में भेज दिया गया ।एकल आयाम में केवल एक सूर्य है । मरु की यही सजा थी कि वो अनंत काल तक उसी आयाम में उसी सूर्य की परिक्रमा करता रहे।

‎ पर प्रायश्चित करने के उद्देश्य से उसने नीलमणि की रक्षा करने का कार्य माँगा । देवताओं ने उसे ये कार्य दे दिया और नीलमणि को मरु की गुरूत्व शक्ति से बांध दिया। अब नीलमणि एकल आयाम में सुरक्षित थी।”

‎ नागराज- इस प्रकार वो विषयुक्त पाप ऊर्जा सुरक्षित हो गयी होगी। क्योंकि उसको पाने के लिए पहले एकल आयाम में जाना पड़ता । वहाँ यदि कोई नीलमणि प्राप्त भी कर लेता तो उस ऊर्जा को अधिक मात्रा में प्राप्त करने से पहले ही देवताओं को पता चल जाता।

‎ध्रुव-शुरू में तो ऐसा ही हुआ। परन्तु फिर एक नई समस्या उत्पन्न हो गई। नीलमणि के प्रभाव से मरु ग्रह की सतह विष की बन गयी । उसकी सतह पर केवल विष की धूल और चट्टाने ही थी केवल । नीलमणि को धारण करना अब मरु के लिए मुश्किल था । तब हमारे सौरमंडल के ग्रहों एवं अन्य ग्रहों ने निर्णय लिया कि वे भी बारी बारी से नीलमणि को धारण करेंगे और  एक नियम बनाया गया । विभिन्न योगों और नक्षत्रो के अनुरूप नीलमणि भिन्न भिन्न ग्रहो पर स्वयं प्रकट हो जाती ।

‎परन्तु मरु के गुरूत्व से बंधे होने के कारण वह एक अवधि के बाद वापस मरु पर प्रकट हो जाती। युगों से ये चक्र चल रहा है । नीलमणि बारह वर्षों तक मरु पर रहती है और बारह वर्षों तक किसी अन्य ग्रह पर । इस चक्र को कोई नही बदल सकता।

‎ तिरंगा-तब तो फिर वही समस्या आ गयी होगी । मरु ग्रह से विलुप्त होते ही दानवों ने उसे पाने का प्रयत्न शुरू कर दिया होगा ।

‎ध्रुव-नहीं। जैसा कि मैंने बताया नीलमणि विभिन्न योगों और नक्षत्रो के अनुरूप ही एकल आयाम से बाहर आती है तो सब कोई उसका प्रयोग नही कर सकता ।

‎डोगा-तो फिर इस बार नरकपाशा ने नीलमणि को कैसे प्राप्त कर लिया।

‎ध्रुव-क्योंकि युगों से इस चक्र को दुहराते हुए नीलमणि इस बार पृथ्वी पर अमृत योग में प्रकट हुई है।

‎विसर्पी-अमृत योग?

‎नागराज-और नरकपाशा के शरीर मे पहले से ही अमृत के अंश हैं। इसी कारण वो नीलमणि का प्रयोग कर सकता है।

‎ध्रुव -हाँ। परंतु यह केवल एक संयोग है ।

परमाणु-पर तुम्हें नीलमणि के बारे में इतना सब कैसे पता है?

ध्रुव-देव कालजयी ने मुझे बताया।

इसी के साथ ध्रुव ने अपने स्वप्न की बात पूरे विस्तार से बात दी।

‎परमाणु-पर ये प्रोबॉट तुम्हारे सपने में क्या कर रहा था?

‎ध्रुव-मुझे नही पता और न ही देव कालजयी ने मुझे कुछ बताया।

इसी के साथ सर्प नौका महानगर के तट पर पहुँच गयी।
‎——————–—-–-
‎सब तट पर उतर गए । सर्प नौका नागराज के शरीर मे समा गयी ।

‎ध्रुव-मैंने अपना प्लेन मंगा लिया है । उससे हम सब आधे घंटे में असम पहुँच जाएँगे।

‎नागराज-पर ध्रुव तुम और शक्ति असम क्यों जा रहे हो । तुमलोग तो किसी वचन से नही बंधे हो?

‎ध्रुव-बताता हूँ । वैसे भी कहानी अभी बाकी है।

‎सब प्लेन में बैठ कर असम की तरफ बढ़ चले ।ध्रुव ने प्लेन को ऑटो पायलट पर किया और अपनी आगे की कहानी बताने लगा।

‎ध्रुव- नीलमणि का पृथ्वी पर बारह वर्षों के लिए आना तय था और संयोग से वो अमृत योग में प्रकट होने वाली थी । यानी नरकपाशा उसे पूर्ण रुप से प्रयोग कर सकता था । तब मैंने ऐसा कुछ करने का सोचा कि नीलमणि पृथ्वी पर आए ही नहीं।

‎तिरंगा-पर ये तो असंभव था।

‎ध्रुव-असम्भव तो था , पर जहाँ चाह है वहाँ राह है।
‎मैं स्वर्ण नगरी गया और वहाँ से मरु ग्रह के बारे में मुझे पूरी जानकारी मिल गयी। और मैनें निर्णय कर लिया कि मुझे क्या करना है।
‎नियम के अनुसार नीलमणि केवल बारह वर्षों तक मरु ग्रह से दूर रहती । यदि मैं मरु ग्रह की गति बढ़ा देता तो मरु ग्रह जल्दी जल्दी अपनी परिक्रमा पूरी कर लिया और 12 वर्ष बहुत जल्दी बीत जाते । और मरु के गुरूत्व से बँधे होने के कारण नीलमणि वापस मरु ग्रह पहुँच जाती।

‎डोगा-एक मिनट एक मिनट , क्या कर देते ? ग्रह की रफ्तार बढ़ा देते। वो कोई चाभी वाला खिलौना है क्या जिसकी चाभी घुमाई और रफ्तार बढ़ गयी।

‎ध्रुव-नहीं। जानते हो एक वर्ष किसको कहते हैं ।

‎डोगा-पता है। जितने समय मे एक ग्रह अपने सूर्य की परिक्रमा करता है वही अवधि उसके लिए एक वर्ष के बराबर होती है।

‎ध्रुव-सही है।अब पूरी बात सुनो।मरु ग्रह एक मध्यम आकार का ग्रह है । क्षेत्रफल के अनुसार वह पृथ्वी का एक दँसवा हिस्सा है । नीलमणि के प्रभाव से उसकी सतह पूरी विष से बन गयी है। और विष ज्वलनशील होता है ये भी तुम सब जानते ही हो।

‎विसर्पी-जानते हैं । अब तुम बातों को गोल गोल घुमाना बंद करो और बताओ तुमने क्या किया?

‎ध्रुव-मैनें मरु ग्रह के आधे सतह पर संयंत्रों का निर्माण करने का फैसला किया । जिस दिशा में मरु ग्रह अपनी परिक्रमा करता है उसकी विपरीत दिशा मे । मरु ग्रह की ही चट्टानों से चिमनियों के आकार के संयंत्र , जिसमे मरु ग्रह की सतह पर फैली विष का प्रयोग ईंधन के रूप में होता ।
 ‎‎उन संयंत्रों को रॉकेट के आकार का बनाया जाना था जिनको अग्नि के दहन से शुरू करने से एक तीव्र ऊर्जा निकलती जिसके प्रतिक्रिया स्वरूप मरु ग्रह पर दबाव पड़ता और उसकी गति बढ़ जाती।

‎तिरंगा-यह तो साधारण सी रॉकेट साइंस है।

‎स्टील-परंतु पूरे आधे ग्रह पर । और इस ऊर्जा के दबाव से तो वह अपनी कक्षा भी छोड़ सकता था। उससे तो समस्या और बढ़ जाती।

‎ध्रुव- इन्ही सब बातों के लिए मुझे जरूरत पड़ी विस्तृत ब्रह्मांड रक्षको की । धनंजय के मदद से मैंने उन संयंत्रो का एक नक्शा तैयार किया । उन्हें ऐसे बनाया जाना था की मरु ग्रह अपनी चक्रीय गति पे स्थिर रहता और अपनी कक्षा में ही रहता। फिर मैं विस्तृत ब्रह्मांड रक्षकों के पास गया और उनको इस योजना के बारे में बताया। और वो सब इस काम में मेरा सहयोग देने के लिए मान गए । फिर धनंजय ने ब्रह्मपाश से उस आयाम का द्वार खोला और थोड़ी बहुत तैयारियों के साथ हम मरु ग्रह पर चले गए।

‎विसर्पी-पर ये ब्रह्मपाश क्या है?

‎ध्रुव-जैसा कि मैंने बताया था एकल आयाम नीलमणि की सुरक्षा के लिए बनाया गया था तो उसके द्वार को सब कोई नही खोल सकता था। ब्रह्मपाश स्वयं ब्रह्मा द्वारा दिया गया स्वर्णपाश है जो उन्होंने धनंजय के पूर्वजों को उपहार स्वरूप दिया था। ‎उसके बाद हम सब ने एक महीने के अंदर ही संयंत्रों का निर्माण किया और शक्ति एवं सामरी की अग्नि शक्तियों से उन्हें क्रियान्वित किया और वापस पृथ्वी पर आ गए । अब शीघ्र ही मरु ग्रह पे बारह वर्ष बीत जाएंगे और नीलमणि वापस वही पहुच जाएगी। तब तक मरु की सतह पर जो विष है वो दाह के कारण समाप्त हो जाएगा और सब कुछ फिर सामान्य हो जाएगा।

‎नागराज-परंतु यह सब तुमने हमें क्यों नही बताया?

‎ध्रुव धीरे से मुस्कुराया और बोला- यदि बता देता तो तुम क्या करते ?

‎नागराज-तुम्हारे साथ चलता और क्या ।

‎ध्रुव-इसीलिये । बस इसीलिये नही बताया तुम सबको । पहली बात यह कि ये एक लगभग असंभव कार्य था। यदि सारे ब्रह्मांड रक्षक नहीं लौट पाते तो फिर आने वाले खतरों से पृथ्वी की रक्षा कौन करता।

‎डोगा- परन्तु फिर भी तुमको हमें एक बार बताना चाहिए था।

‎ध्रुव-समझने का प्रयत्न करो डोगा । मैं खतरे को रोक नही सकता था। केवल उसको कम कर सकता था।उस बचे हुए खतरे से कौन बचाता पृथ्वी को।

‎तिरंगा -पर हमें दिव्यास्त्रों का प्रशिक्षण ….

‎तिरंगा की बात पूरी होने से पहले ही ध्रुव बोल पड़ा-क्योंकि फिर इसके लिए समय नही मिलता । इसीलिए ये जरूरी था।जो युद्ध होने वाला है उसको साधारण अस्त्रों से नही लड़ा जा सकता।

डोगा-परंतु इन सबका क्या लाभ ‎। नीलमणि तो अभी भी नरकपाशा के पास है।

‎ध्रुव-लाभ हुआ है परंतु प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नही दे रहा ।‎मैंने सोचा नरकपाशा नीलमणि प्राप्त करते ही युद्ध की घोषणा कर देगा परन्तु ऐसा नही हुआ । सब कुछ हमारे सोच के अनुरूप नही हो सकता। नरक पाशा कुछ और ही सोच रहा है। वह पहले उस ऊर्जा को पर्याप्त मात्रा में संचित कर लेना चाहता है। इसीलिये उस अवधि में उसने हम लोगों को वन में भेजने की चाल चली जिससे हम उसके कार्यों में किसी प्रकार का विघ्न ना डाल सकें।

‎नागराज-ओह। शायद इसी कारण नागद्वीप की सभा मे नरक पाशा इतना ज्यादा सुनिश्चित था अपनी जीत के प्रति।

‎परमाणु-पर यदि नरकपाशा के पास इतनी शक्ति थी तो उसने नागराज का वध क्यो नही कर दिया?

‎ध्रुव-क्योंकि यदि वह नागराज को मार भी देता तो उसके पास ज्यादे शक्ति नही बचती । फिर नागद्वीप में ही एक युद्ध शुरू हो जाता जिसको जीतना नरकपाशा के लिए भी उस समय आसान नहीं होता।

‎शक्ति-जिस प्रकार तुम अपने शरीर मे सर्पों को रख सकते हो वैसे ही नरकपाशा भी नीलमणि को अपने शरीर मे धारण कर सकता है।

 

‎स्टील-पर अब नरकपाशा का आगे उद्देश्य क्या है?

‎ध्रुव-यदि नीलमणि बारह वर्षो तक पृथ्वी पर रहती तो वो उस ऊर्जा से सबको अपना ग़ुलाम बना सकता था। परंतु अब तक तो उसको पता चल गया होगा की नीलमणि बारह दिनों में विलुप्त हो जाएगी और फिर युगों के बाद ही पृथ्वी पर वापस आएगी।

‎परमाणु-तो फिर वो उस ऊर्जा का क्या इस्तेमाल करेगा।

‎नागराज – नर्कशत सेना । नरक पाशा उस ऊर्जा का प्रयोग नर्कशत सेना को और शक्तिशाली बनाने के लिए करेगा।

‎ध्रुव-हाँ।

‎डोगा-पर हम अब क्या कर सकते है। नियमो से बंधे होने के कारण हम वन में रहने को विवश हैं और न ही हम दिव्यास्त्रों का प्रयोग कर सकते हैं।

‎ध्रुव-तैयारी । हम आने वाले युद्ध के लिए तैयारी करेंगे । क्योंकि मेरे अनुसार बारह दिनों तक नरकपाशा कोई उत्पात नही मचाएगा परंतु उसके बाद वह जरूर सबकुछ अपने वश में करने की कोशिश करेगा । बारह दिनों के बाद एक महायुद्ध होना लगभग निश्चित ही है।ये महायुद्ध कहाँ और किस प्रकार होगा ये तो मुझे भी नहीं पता पर ये महायुद्ध होगा जरूर।
‎———— —— —————
उसी समय ‎एक गुप्त द्वीप के अंदर।
नरकपाशा और नर्कशत सेना मौजूद थी, थोड़ी ही दूर पर गुरुदेव और नागेंद्र भी थे।

‎नरक पाशा – ये सब क्या हो गया गुरूदेव , लोग इसीलिए ध्रुव को शैतान की औलाद कहते हैं।

‎गुरुदेव-कोई बात नही नरकपाशा , नीलमणि अभी भी तुम्हारे पास है । परिस्थितियाँ अभी भी हमारे अनुकूल हैं।
गुरुदेव ने सबको संबोधित करते हुए कहा-

-कुछ ही देर में मैं अनुष्ठान शुरू करने वाला हूँ , नीलमणि की ऊर्जा नरक पाशा के माध्यम से अब आप सब के अंदर जाएगी । आप सब उस विषयुक्त पाप ऊर्जा को अपने भीतर महसूस करेंगे जिसके बल पर दानवों ने देवताओं तक को लगभग परास्त कर दिया था।

‎नागेंद्र- तब तक मैं महानगर जाऊँगा क्योंकि जो व्यक्ति मेरे विष से प्रयोग होने वाले एक विध्वंसक अस्त्र का निर्माण कर सकता है वो इस समय महानगर में ही है । फिर मैं असम में ऐसा कहर ढाऊँगा की ब्रह्मांड रक्षक दिव्यास्त्रो का प्रयोग करने को विवश हो जाएंगे और उन्हे सदा के लिए वन में रहना पड़ेगा।

‎नागमणि-पर महानगर में कौन है ऐसा?

‎नागेंद्र-मुझे पता चला है कि जिस प्रकार तुम विष से जैविक अस्त्र बनाने के विशेषज्ञ हो उसी प्रकार वो विष से यांत्रिक अस्त्र बनाने का विशेषज्ञ है।

‎नागमणि-पर वो है कौन?

‎नागेंद्र-करुणाकरन । डॉक्टर करुणाकरन।

‎नरकपाशा- असम की चिंता मत करो नागेन्द्र , वहाँ मैंने उचित व्यवस्था कर दी है तुम पहले महानगर जाओ अपना कार्य करो और फिर तुमको दिल्ली जाना है मेरा एक कार्य करने।
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स्थान-महानगर ।
‎वेदाचार्य धाम।

‎भारती और वेदाचार्य एक कक्ष में बैठे हैं। सभी स्थितियों से अवगत दोंनो चिंतित हैं।

‎भारती-ये सब क्या हो रहा है दादाजी , अभी नागेंद्र की समस्या का कोई समाधान नहीं मिला था और अब ये सब ?

‎वेदाचार्य-कुछ समझ नही आ रहा है ये सब क्या हो रहा है भारती , ब्रह्मांड रक्षक भी नरक पाशा की चाल का शिकार हो गए । अब नागराज की अनुपस्थिति में महानगर की सुरक्षा कौन करेगा ?

‎भारती-महानगर अभी अनाथ नही हुआ है दादाजी , क्योंकि नागराज की अनुपस्थिति में फेसलेस महानगर की सुरक्षा करेगा। महानगर की तरफ बढ़ने वाले हर खतरे को फेसलेस से हो कर गुजरना पड़ेगा।
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‎नागराज , विसर्पी ,ध्रुव , शक्ति और अन्य ब्रह्मांड रक्षक ध्रुव के प्लेन में असम की तरफ बढ़ रहे थे।

‎तिरंगा-परंतु अब हम कौन सी तैयारी करेंगे ? दिव्यास्त्रों का प्रशिक्षण तो हम पहले ही ले चुके हैं।

‎नागराज- ज्ञान हमेशा असीमित होता है तिरंगा। हम चाहे जितना भी ज्ञान प्राप्त कर लें परन्तु फिर भी हम सम्पूर्ण ज्ञान नहीं प्राप्त कर सकते ।

‎ध्रुव-सही कहा नागराज । परन्तु उससे भी महत्वपूर्ण तुमको दशम अस्त्र प्राप्त करना होगा।

‎नागराज-दशम अस्त्र? जो कि दस आयामों का द्वार एक साथ खोल सकता है। वो तो केवल महादेव के पास है। उसको प्राप्त करने के लिए तो काल मृत्यु आराधना करनी पड़ेगी।

‎ध्रुव-हाँ । और वो आराधना तुमको ही करनी पड़ेगी । तब तक मैं इस युद्ध में सम्मिलित होने के लिए नारी शक्ति को एकत्रित करूंगा क्योंकि विस्तृत ब्रह्मांड रक्षकों को मैंने इस स्थिति से पहले ही अवगत करा दिया है और नारी शक्ति को इससे अवगत कराना बाकी है।

शक्ति-नारी शक्ति यानी की ……

ध्रुव-नताशा ,भारती जो कि तिलिस्म की ज्ञाता है ,लोमड़ी , लोरी , काल कुंडला , शीना और अन्य भी हैं। इन्होने हमेशा हमारा साथ दिया है । और आने वाले युद्ध मे इनका कार्य भी निर्णायक एवं अहम होगा।

नागराज -यह कार्य शक्ति कर देगी, परन्तु तुमको एक और महत्वपूर्ण कार्य करना होगा।

ध्रुव-क्या?

नागराज-तुमको एंथोनी को लाना होगा।

ध्रूव-एंथोनी? उसको तो पाँच वर्षों से किसी ने नहीं देखा । कुछ लोग कहते हैं कि वो मुर्दो की दुनिया मे वापिस चला गया है। उसका वापस आना तो अब असम्भव है।
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रूपनगर
समय-10:00pm
इस समय सब अपने काम से घर लौटते है।
इसी प्रकार के एक रास्ते पर अनुज घर वापस जा रहा था। तभी दो नकाबपोशों ने उसका रास्ता रोक लिया।

“अगर जिंदा रहना है तो जो भी तुम्हारे पास है हमें दे दो।” उनमें से एक बोला।

“वरना इस लेज़र गन से तेरा शरीर छेदों से भर दूँगा”-दूसरे ने अपने हाथ में पकड़े गन की तरफ इशारा करते हुए कहा।

अनुज कुछ बोल नहीं सका।
“अगर जिंदा रहना है तो तुरंत भाग जाओ। वरना ऐसी हालत करूँगा की फिर मरने की भीख माँगोगे।”

दोनों ने पीछे मुड़कर देखा । अंधेरे में कोई खड़ा था।

“कौन है”-इसी के साथ दूसरे नकाबपोश ने गन चला दी।

साया गन से बचने के लिए कूद कर सामने आ गया । अब उसका चेहरा साफ दिख रहा था।

“इंस्पेक्टर किंग”-पहला वाला लगभग चिल्लाते हुए बोला।

“हाँ , मैं “-किंग ने बोला ।इसी के साथ उसने अपनी रिवाल्वर चला दी। दूसरे नकाबपोश के हाथ मे गोली लगी। उसके हाथ से लेजर गन नीचे गिर पड़ी।दोनो दौड़ते हुए भाग गए।

अनुज-शुक्रिया इंस्पेक्टर।

किंग-कोई बात नही । आइए मैं आपको घर तक छोड़ दूँ।

अनुज-नहीं कोई बात नहीं । मैं चला जाऊँगा मेरा घर पास में ही है।

किंग-जैसा आप ठीक समझे।

इसी के साथ दोनो अपने रास्तों पे वापस चले गए।
उसी जगह थोड़ी दूर पर एक बूढ़ा आदमी खड़ा था।
इतिहास।
रूपनगर का भूतपूर्व DSP इतिहास।
उसकी आँखों मे आज एक चमक थी।
उसने आकाश की तरफ देखा और बोला-
देखो एंथोनी अब तुमको वापस आने की जरूरत नही है।तुम्हारा नाती किंग अब तुम्हारा काम पूरा कर रहा है।मैंने किंग को एक काबिल पुलिस इंस्पेक्टर बना कर अपना काम पूरा किया । तुमसे किया हुआ अपना वादा पूरा किया। रूपनगर में अब जुर्म की कोई जगह नही है।
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Written By – Akash Pathak for Comic Haveli 

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17 Comments on “Nagbharat (Neelmani Parv)”

  1. Akash Pathak ji, pahli baat to ye ki aapko RC ke liye kahaani likhna ab shuru kar dena chahiye aur doosri baat ye ki ye part bahut hi behatreen likha gaya hai. Maru grah ka rahasya bahut hi achche se bataya gaya hai, ab dekhna hai ki aage kya hota hai.

  2. Bahut hi accha bhai …Padhna start krne pr rukhne ka mann hi nhi kr rha tha har baat ko acche se explain kiya gya he. ..Just awsm
    Soch rha hu me bhi apni story lekr aau

  3. Wowwwwww आकाश भाई इस बार तो आपने विस्फोटक पार्ट लिख डाला पढ़ कर विस्फोट होने लगे अगल बगल। मैं कहता हूँ इस स्टोरी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए बहुत ही धाँसु लिखा। आपने तो ऐसा लिख डाला जैसा RC भी नही लिखती।

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