Nagbharat – (Rann Parv)

नागभारत – ‎रण पर्व

युद्ध की रणभेरी बज चुकी थी। योद्धाओं ने तैयारियाँ भी कर ली थी। अब आरम्भ होने वाला था – रण।

स्थान- असम।

‎सारे ब्रह्मांड रक्षक कालक्षेत्र में जाने के लिए तैयार थे । पर अभी भी कई ऐसे प्रश्न थे जिनका उत्तर सबको जानना था।

डोगा- पर अभी भी मुझे कुछ शक है। नरकपाशा पिछली बार की तरह इस बार भी आश्वस्त है। कहीं उसके पास फिर तो कोई हथियार नहीं आ गया।

‎ध्रुव-ऐसा कुछ नहीं है , वह केवल नीलमणि की शक्तियों पर घमंड कर रहा है , पर वह जानता नहीं हमारे पास भी दिव्यास्त्रों की शक्तियाँ है।

‎तिरंगा- मुझे भी ऐसा ही लगता है , पर कालक्षेत्र की कुंजी उन्हें कैसे मिली यह अवश्य चिंता की बात है।

‎नागराज- कालक्षेत्र की कुंजी जहाँ भी रही होगी , उसकी सुरक्षा की चिंता किसी ने नहीं की होगी । अवश्य वह किसी ऐसे जगह रही होगी जहाँ किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था नहीं होगी। क्योंकि कालक्षेत्र कभी किसी के काम नहीं आ सकता। पर मुझे पता है नरक पाशा ने कालक्षेत्र को क्यों चुना है? वह जानता है कि वह अमर है , कभी मर नहीं सकता इसीलिए उसका दल कभी पूर्ण रूप से नहीं मरेगा । ऐसी हालत में हम ब्रह्मांड रक्षक ही मृत्यु को प्राप्त होंगे और वो विजयी होगा ।

‎नागराज कुछ क्षणों के लिए रुका , फिर बोलने लगा- पर ऐसा बिल्कुल नहीं होगा , नरक पाशा के जीवन का यह अंतिम युद्ध होगा।

‎स्टील-पर परमाणु के ऐसे व्यवहार से कुछ समझ नहीं आया ।

‎ध्रुव- यह तो परमाणु ही हमें बता सकता है। अब हमें चलना चाहिए , शक्ति और धनजंय भी आते ही होंगे।

नागराज और ध्रुव के अलावा बाकियों ने द्वार में प्रवेश कर लिया।ध्रुव विचारों में खो गया ।

‎नागराज- क्या बात है ध्रुव कहाँ खो गए ?

‎ध्रुव- कही नही । बस यही सोच रहा था क्या होने वाला है , कहीं इस बार भी परिस्थियां हमारे विपरीत हो गयी तब क्या होगा।

‎नागराज- ऐसा क्यों सोचते हो ध्रुव , तुम हमारे साथ चल रहे हो……

‎ध्रुव- मैं उसी बारे में बात कर रहा था नागराज । तुम तो जानते हो कि मैंने प्रतिज्ञा ली है कि कभी किसी इंसान की जान नहीं लूँगा। इसके विपरीत दूसरी ओर कालक्षेत्र में हमारा लक्ष्य यही होगा की कोई भी जीवित ना बचे । इसीलिए मैंने निर्णय लिया है कि मैं कालक्षेत्र में न जाऊँ।वैसे भी तुम सब और बाकी के विस्तृत ब्रह्मांड रक्षक है ही। तुम लोगों के पास दिव्यास्त्र भी तो हैं।

‎नागराज- ऐसी बात नहीं है ध्रुव, कोई भी दिव्यास्त्र किसी के इच्छाशक्ति से बड़ा नहीं होता । तुमने हमेशा से इस बात को सिद्ध किया है। और रही बात तुम्हारी प्रतिज्ञा की तो तुम्हे कोई किसी के प्राण लेने को बाध्य नहीं करेगा। तुम्हें हमारे साथ चलना होगा।

‎ध्रुव ने एक गहरी साँस ली ,- ठीक है मैं चलूँगा।शायद मैं अपने कर्तव्य से भाग रहा था । पर अब नहीं , मैं चलूँगा।

‎कुछ ही देर में शक्ति , धनजंय और अन्य लोग भी आ गए । धीरे धीरे सब कालक्षेत्र में प्रवेश कर गए।

‎नरक पाशा , नागेन्द्र और गुरुदेव गुप्त द्वीप को तरफ बढ़ रहे थे।नागेंद्र की हालत अब पहले से बेहतर थी , नागराज ने जो घाव उसे दिए थे वो अब धीरे धीरे भर रहे थे। पर जो घाव उसके आत्मविश्वास पर लगा था वो और बढ़ रहा था। नागराज से मिली हार के बाद वो किसी भी हाल में नागराज को मार डालना चाहता था।

‎नागेन्द्र- कालक्षेत्र में मैं स्वयं अपने हाथों से उस नागराज का वध करूँगा ।

गुरुदेव- अवश्य ! वहीं पर बाकियो की भी समाधियाँ भी बनेंगी।

नरकपाशा-एक बार फिर परिस्थितियाँ हमारे अनुकूल हैं । जब पाँच वर्षों पूर्व मुझे कालक्षेत्र की कुंजी मिली थी तो मैंने नहीं सोचा था की यही एक दिन मेरी जीत को सुनिश्चित करेगा।

नागेन्द्र- पर मैंने सुना है कि नागराज के पास दशम अस्त्र भी तो है , वह जब चाहे कालक्षेत्र से भाग सकता है?

गुरूदेव- मुझे भी पता है नागेन्द्र , पर नागराज कायरों की भांति भागने वालों में से नही है । वैसे भी दशम अस्त्र की सहायता से केवल एक ही मनुष्य कहीं आ जा सकता है । यदि नागराज भाग भी जाता है तो बाकियों को नहीं बचा पायेगा ।

‎तीनों गुप्त द्वीप के स्थित अपने प्रयोगशाला में पहुँच चुके थे। लगभग सारी नर्कशत सेना पहले ही कालक्षेत्र में जा चुकी थी। पर कुछ लोग अभी भी प्रयोगशाला में ही थे जैसे प्रोबॉट , रोबो और मिस किलर।

गुरुदेव-अब हमें भी शीघ्र ही चलना चाहिए। यहाँ का भी कार्य पूरा हो गया होगा।हमारा एक और अस्त्र तैयार हो चुका होगा।

‎रोबो- सही कहा नरकपाशा , वो भी अब तैयार है।

‎रोबो ने एक रोबॉट की तरफ इशारा किया , यह कोई और नहीं Probot version 2 था जिसने ब्रह्मांड रक्षकों को दिव्यास्त्रों की शिक्षा दी थी।नागेन्द्र इसे भी प्रोबॉट के साथ ही लाया था जब उसने ध्रुव को घायल किया था।

(जानने के लिए पढ़े एंथोनी पर्व)

‎मिस किलर- प्रोबॉट ने इसे नष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी पर हमने बहुत मुश्किल से इसके कुछ डेटा(data) को रिकवर किया है।

‎नागेन्द्र- यह प्रोबोट है बहुत चालाक जब मैं दिल्ली में इसकी प्रयोग शाला में पहुँचा तो इसने खतरा जानकर इसकी मेमोरी नष्ट करने की कोशिश की बहुत मुश्किल से मैं इसे बचाकर अपने साथ ला पाया था।

रोबो – हमने probot version 2 के कुछ मेमोरी को रिकवर किया है , यह दिव्यास्त्र तो नहीं बना सकता परंतु जिस हिस्से में दिव्यास्त्रों की विपरीत ऊर्जा की जानकारी थी वह सुरक्षित है , यह अभी भी दिव्यास्त्रों की काट बना सकता है।

‎गुरुदेव- इतना भी काफी है हमारे लिए , केवल दिव्यास्त्र ही हैं जिनसे हमे सावधान रहने की जरूरत थी पर अब उसकी काट हमारे पास है।

मिस किलर- पर इसका लॉजिक सिस्टम भी खराब हो चुका है यह अपने आप से कुछ सोच नहीं सकता। यह केवल हमारी मदद ही कर सकता है इसीलिए अब से इसका नाम होगा – हेल्पर।

गुरुदेव- हेल्पर! बढिया है ,पर क्या हम दुबारा से इसका लॉजिक सिस्टम नहीं बना सकते?

रोबो- नहीं , इसको बनाया ही इस तरह से गया है कि कुछ छेड़ छाड़ करने से यह पूरी तरह से नष्ट हो जाएगा।

नरकपाशा – कोई बात नही , अब हमें शीघ्र ही चलना चाहिए , कालक्षेत्र का द्वार बंद होने में केवल कुछ ही देर बचे है। जो यंत्र हमें ले जाना है उन्हें भी साथ ले चलो।
‎कुछ देर बाद वो सब भी कालक्षेत्र में चले गए।

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कालक्षेत्र- जहाँ एक ऐसा युद्ध होने वाला था , जो इस ब्रह्मांड का भविष्य निर्धारित करने वाला था।

कालक्षेत्र पथरीली भूमि से बना था , जहाँ दिन में तेईस घंटे सूर्य का प्रकाश पहुंचता था , बाकी बचे एक घंटे वहाँ गहन अंधकार रहता था।

सबसे पहले परमाणु वहाँ पहुँचा । जिस के पीछे वह कालक्षेत्र में आया था वो कोई और नही प्रोफेसर कमलाकांत थे – परमाणु के मामा, जिन्होंने विनय को एक पहचान दी थी । जिन्होंने विनय को परमाणु बनाया था।

‎परमाणु ने उन्हें रोकना चाहा पर वह रुके नहीं ।परमाणु ने जबरदस्ती रोका उन्हें ,उनकी आँखें पथराई हुई थीं। उनको कोई होश नहीं था।

धीरे धीरे सारे लोग कालक्षेत्र में पहुँच गए। दोनों दलों ने अपनी शक्तियों से छोटे छोटे शिविर का निर्माण कर लिया।

अब दोनों दल रणनीतियाँ बनाने में लग गए।

‎रोबो- मुझे अभी भी समझ नहीं आया नरकपाशा तुमको यह कमलकांत कहाँ से मिल गया , जहाँ तक मुझे याद है ये तो परमाणु को मारना चाहता था पर कुछ सालों पहले गायब हो गया था।

‎नरकपाशा- हाँ , उसी सिलसिले में ये मुझसे मिला था , यह कोई प्रयोग करना चाह रहा था और मैंने इसे प्रयोग की जगह उपलब्ध करा दी पर बीच में ही प्रयोग असफल हो गया और इसे होश आ गया । पर आखिर यह था तो मेरे गुप्त स्थान पर ही , यह वापस जाना चाहता था पर मैंने उसे कैद कर लिया , मैं इससे कुछ वैज्ञानिक जानकारियाँ लेना चाहता था पर इसने मना कर दिया , तबसे यह मेरी कैद में ही सड़ रहा था , यहाँ आने से पहले मैंने उसे सम्मोहित कर दिया है अब उसे कुछ भी याद नहीं होगा।

‎मिस किलर- अब हमें आगे की तैयारी करनी चाहिए , क्या हम किसी योजना के अन्तर्गत उनपे हमला करेंगे?

गुरुदेव- हाँ , हमलोग अभी भी संख्या में लगभग उनसे दुगने हैं। हमलोग पहले ऐसे लोगों पर हमला करेंगे जिनके पास दिव्यास्त्र या कोई विशिष्ट शक्तियाँ नहीं है। जब भी ब्रह्मांड रक्षक दिव्यास्त्रों का उपयोग करेंगे हेल्पर तुरंत वहाँ पहुँच जायेगा और उन्हें निष्क्रिय कर देगा।

मिस किलर- पर हेल्पर को यह सब पता कैसे चलेगा कि उसे कहाँ जाना है।

‎गुरुदेव- सबसे पहली बात तो यह है कि हमसब कालक्षेत्र में एक दूसरे से मानसिक रूप से जुड़े रहेंगे।और रही बात हेल्पर की तो उसे आदेश प्रोबोट ही देगा।प्रोबोट का दिमाग मशीनी है , वो एक साथ कई समस्याओं को देख और हल कर सकता है वो हर समय सारी स्थितियों का विश्लेषण करता रहेगा।

‎नरकपाशा-और हाँ , किस भी दुविधा की स्थिति में सब लोग प्रोबोट की बात मानेंगे।

‎रोबो- ये बात मेरे समझ में नही आयी।

‎नरकपाशा- वो इसलिए कि हो सकता है कई बार दुश्मन हमारा भेष बनाकर एक दूसरे को बेवकूफ बनाने की कोशिश करे ऐसे समय में हमें समझदारी से निर्णय लेना पड़ेगा।

नागेन्द्र- कुल मिलाकर बात यह है कि हम उनके दल पर सीधा आक्रमण करेंगे , जैसे ही वो दिव्यास्त्रों का प्रयोग करेंगे हेल्पर हमारी मदद के लिए आ जायेगा ।

‎नागेन्द्र ने प्रोबोट की तरफ इशारा करते हुए कहा- और ये प्रोबोट हमारे कैप्टेन यानी दल प्रमुख की तरह काम करेगा।

‎गुरुदेव- सही समझे।

धीरे धीरे सारे लोग शिविर से बाहर युद्ध में जाने लगे।नागेन्द्र भी जाने लगा कि गुरुदेव में उसे रोक लिया।

‎गुरुदेव- नागेन्द्र, मैं चाहता हूँ कि तुम सीधा नागराज से ना लड़ो।

‎नागेन्द्र- इसका क्या मतलब हुआ , क्या आपको मेरे क्षमताओं पर विश्वास नही…

गुरुदेव-समझने का प्रयत्न करो नागेन्द्र , पहले हमारा लक्ष्य कमजोर लोग होंगे , धीरे धीरे जब नागराज थकने लगेगा और उसके दल के कई लोग मारे जा चुके होंगे तब सही मौका होगा उस पर वार करने के लिए।

‎नागेन्द्र ने गुरुदेव की बात सुनी और बिना कुछ कहे बाहर जाने लगा।

गुरुदेव- मुझे आशा है कि तुम मेरी बात मानोगे।

‎नागेन्द्र- कोशिश करूँगा।

इधर नागराज ध्रुव और अन्य अपनी रणनीति बनाने में लगे हुए थे।परमाणु कमलकांत को लेकर चिंतित था , उसे समझ नहीं आ रहा थी कि कमलकांत नरकपाशा के पास कैसे पहुंच गए थे।

धनजंय ने अपनी शक्तियों से एक शिविर जैसे भवन का निर्माण कर दिया था ।परमाणु ने कमलकांत को वही बैठा दिया था।बड़ी मुश्किल से बस इतना पता चल पाया था कि उनका दिमाग निष्क्रिय है जिसे सक्रिय करने के लिए किसी तेज झटके की आवश्यकता है। परमाणु भी अब बाकियों के साथ मिलकर योजना बनाने लगा ।

ध्रुव ने अपने हाथों में रखे हुए छोटे यंत्रो की तरफ इशारा करते हुए कहा- हमसब लोग इन यंत्रो के माध्यम से एक दूसरे से जुड़े रहेंगे। ये तंत्र ऊर्जा से चलेंगे जिसे लोरी ने धनजंय की सहायता से बनाया है।

परमाणु- ठीक है , हमलोगों को यही प्रयास रहेगा कि जैसे ही कोई उनके दल का हमारे सामने आए हम उन्हें मृत्यु के घाट उतार दें।

‎डोगा अपने शब्दों पर जोर देता हुआ बोला – हमें दया वया सब भूल जाना है , हमारी कोई भी गलती उन्हें एक मौका दे सकती है।

नागराज- पर अभी भी एक समस्या है , नीलमणि की शक्तियों के कारण उन्हें साधारण अस्त्रों से नहीं मारा जा सकता , इसलिए बाकी लोग जिनके पास दिव्यास्त्र नहीं है वो केवल सावधानी से उन्हें रोकने का प्रयास करेंगे।

‎शीना- तो हमे केवल उन्हें रोके रखना है जब तक कोई दिव्यास्त्र धारी आकर उन्हें मार नही देता।

स्टील- और हमें यह करना है कि हमें उन्हें देखते ही मार देना है , और उसके तुरंत बाद अपने नजदीक में अपने दल के किसी भी अन्य सदस्य जिसने नरक शत सेना के किसी भी सदस्य को रोक रखा है , उसके पास जाना है और नरक शत सेना के सदस्य को मार देना है।

नागराज- हाँ और ये युद्ध तब तक चलेगा जब तक उनके दल का एक भी सदस्य जीवित है।

सारी बातें समझने के बाद सारे लोग धीरे धीरे बाहर निकलने लगे । नताशा ध्रुव के पास आई , वह ध्रुव से कुछ कहना चाहती थी पर कह नहीं पाई , आखिरकार ध्रुव ने ही बात शुरू की-
तुम्हें अपनी जगह चंडिका को यहाँ भेजना चाहिए था , नताशा।

‎नताशा-(मन में)[अगर तुम्हें पता होता ध्रुव कि चंडिका कोई और नही बल्कि तुम्हारी ही बहन श्वेता है तो तुम ऐसा बिल्कुल नहीं कहते।]

“कहाँ खो गयी नताशा?”

“चंडिका ने आने से मना कर दिया था ध्रुव पर मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूँगी नरकशत सेना को रोकने की।”- ‎नताशा ध्रुव से बोली और बाहर चली गयी।

शक्ति ने दोनों की बातें सुनी और नताशा के जाने के बाद ध्रुव के पास आई।

शक्ति- बात क्या है ध्रुव , क्या तुम्हें नताशा पर भरोसा नहीं?

ध्रुव- बात वो नही है शक्ति । तुम तो जानती हो कि रोबो भी यहाँ मौजूद है ,और ना तो नताशा रोबो को मरता हुआ देख सकती है ना ही रोबो नताशा को।मुझे डर है कि कही बाद में कोई समस्या ना खड़ी हो जाये।

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एक दूसरे की योजनाओं से अनभिज्ञ दोनों दलों ने अपनी तैयारियाँ पूरी कर ली थी।

अब आरम्भ होने वाला था -रण।

कालक्षेत्र की भूमि सबसे बड़े ‘रण’ की ‘ भूमि ‘ बनने वाली थी।

मिस किलर ने ब्रह्मांड रक्षको के दल को देखते ही अपनी किरण शक्तियों से हमला कर दिया । मिस किलर को रोका शक्ति ने ।शक्ति की शक्तियों का मिस किलर पर कुछ खास असर नहीं हो रहा था। इसके विपरीत मिस किलर के वारों की तीव्रता अब बढ़ रही थी।

शक्ति(मन में)- मुझे अपनी पूरी शक्ति से वार करना होगा।

शक्ति का प्रचंड ऊष्मा वार मिस किलर को अपने आगोश में लेता चला गया।

मिस किलर भागते हुए शक्ति के पास पहुंच गयी , शक्ति द्वारा किया हुआ वार अब शक्ति को ही झुलसाने लगा।

शक्ति ने ऊष्मा वार वापस लिया और अपनी शक्तियों से कालक्षेत्र की भूमि में मौजूद धातुओं को पिघला कर मिस किलर की तरफ वार किया मिस किलर ने उस वार को रोक लिया पिघली हुई धातु जमीन पर गिर गयी उनदोनों के बीच एक दीवार बन गयी ।

उसी समय मिस किलर के कानों में प्रोबोट कई मशीनी आवाज गूँजी- शक्ति से लड़ने में समय मत बरबाद करो मिस किलर , तुमसे कुछ ही दूरी पर लोमड़ी हैमर से लड़ रही है पहले उसको खत्म करो।

शक्ति ने अपना भरपूर वार किया और धातु की दीवार टूट गयी , पर मिस किलर वहाँ से जा चुकी थी।

‎लोमड़ी हैमर से लड़ रही थी । पर इस लड़ाई में हैमर लोमड़ी पर हावी हो रहा था ।

‎लोमड़ी ने अपने ट्रांसमीटर में व्यंगात्मक रूप से कहा- अगर कोई यहाँ आ सकता है तो आ जाये, वरना मेरी जान तो अब गयी लगती है ।

‎तिरंगा कुछ ही देर में वहाँ पहुँचा। फरसा भी कुछ ही देर में वहाँ पहुँच गया। अब तिरंगा फरसा और हैमर दोनों से लड़ने लगा।दोनों के हाथ बहुत तेजी से चल रहे थे , कोई भी घातक वार तिरंगा को नुकसान पहुँचा सकता था।

‎तिरंगा ने अपने दंड से दिव्यास्त्रों का वार किया और दोनों के आस पास की वायु सघन हो गयी।

(तिरंगा और बाकी ब्रह्मांड रक्षक अपने हथियारों से दिव्यास्त्रों का वार कर सकते है, जानने के लिए पढ़े – काल पर्व।)

अब दोनों के हाथ बहुत धीरे चल रहे थे । तिरंगा ने आखिरी वार करने के लिए दंड उठाया। ये वार उन दोनों की जान ले सकता था और तिरंगा के दल को पहली विजय दिल सकता था ।
‎परंतु बिजली की गति से हेल्पर वहाँ आया और तिरंगा पर प्रति ऊर्जा का वार कर दिया । तिरंगा का वार खाली चला गया और कुछ समझ पाने से पहले ही वो दोनों वहाँ से हेल्पर के साथ भाग चुके थे।

‎Probot version 2 को इस नए रूप में देख कर तिरंगा भी दंग रह गया । उस ने जल्द ही यह खबर सबको दी। सभी लोग इस खबर से आश्चर्य चकित हो गए।
‎उधर अब लोमड़ी मिस किलर से लड़ रही थी । कुछ ही देर में शक्ति भी लोमड़ी के मदद के लिए आ गयी। शक्ति ने मिस किलर पर तीसरी आँख से वार किया , मिस किलर दर्द से चिल्ला उठी । उसी समय हेल्पर वहाँ आया और उसने अग्नि ऊर्जा की विपरीत ऊर्जा जल ऊर्जा से वार किया और अधमरी मिस किलर को वहाँ से बचाकर ले गया।

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‎प्रोबोट शीना से लड़ रहा था । शीना प्रोबोट को देखकर चोंक गयी। शीना ने ट्रांसमीटर पर यह खबर सबको दी। हेल्पर की खबर के बाद अब इस खबर से सभी आश्चर्य चकित रह गए।
‎ध्रुव वहाँ पहुंच गया और प्रोबोट से लड़ने लगा।

‎साथ ही साथ वह सबसे बात भी कर रहा था।

‎ध्रुव-पहले Probot version 2 और अब प्रोबोट ,, आखिर नरकशत सेना की योजना क्या है?

‎परमाणु- मुझे तो कुछ समझ ही नही आ रहा आखिर नरकपाशा ने सबको वश में कैसे कर लिया है?

‎ध्रुव-याद करो जब मैं नागेन्द्र से दिल्ली में टकराया था तब प्रोबोट के साथ वह एक बक्सा भी ले गया था , वो कोई और नही Probot vesrion 2 ही रहा होगा। और उसने जरूर किसी तरह उनको अपने काबू में किया है , आखिर वो दोनों है तो मशीन ही।पर ऐसा किया क्यों है उसने?

‎शक्ति- मुझे कुछ कुछ समझ आ रहा है। पहली बात तो अब Probot version 2 अब हेल्पर बन चुका है ……

‎तिरंगा बीच मे ही बोल पड़ा- और जैसे ही हम दिव्यास्त्रों का प्रयोग कर रहे है वो उनकी काट बना कर हमें रोक दे रहा है।

इधर प्रोबोट ध्रुव को बराबर की टक्कर दे रहा था और उधर-‎नागराज एक साथ तीन लोगों से लड़ रहा था , पर वो तीनों नागराज पर तीन तरफ से वार कर रहे थे और नागराज के वार करने से पहले भाग जा रहे थे ,‎तभी एंथोनी आया और तीनों को ठंडी आग से जकड़ लिया ।तीनो दर्द से चिल्लाने लगे।


‎एंथोनी-जल्दी करो नागराज इनके भागने से पहले दिव्यास्त्र चलाओ।

नागराज ने तीन मुखों वाला ऊर्जा बाण छोड़ा पर उसी समय हेल्पर आ गया और दो को छुड़ा ले गया बाकी बचा एक मृत्यू को प्राप्त हो गया।बाकी दोनों के बच जाने से नागराज और एंथोनी दोनों क्रोधित हो उठे।

‎नागराज- पहले हमें हेल्पर का कुछ करना पड़ेगा।

‎तिरंगा- हमें ऐसा करना होगा कि दो लोगो को एक ही समय पर दिव्यास्त्र चलाना होगा तब हेल्पर एक ही साथ दो जगह नही रह पाएगा और हम कमसे कम एक को तो मार ही देंगे।

‎ध्रुव- मेरे पास एक बेहतर उपाय है। सुनो परमाणु तुम्हें वापस शिविर की तरफ जाना होगा।

‎उसके बाद ध्रुव सारी योजना समझाता चला गया और खुद भी प्रोबोट से लड़ते हुए शिविर की तरफ बढ़ने लगा।

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‎परमाणु शिविर में पहुंचा । शिविर में कमलकांत के अलावा और कोई नहीं था। उनकी आँखें अभी भी शून्य में टिकी हुई थी।

‎ परमाणु के पहुंचते ही बौना वामन और चुम्बा दोनो शिविर में ही पहुँच गए।

‎बौना वामन- और वंडर मैन आशा करता हूँ तुम हमारी पिछली मुलाकात भूले नहीं होगे।

‎चुम्बा- और इस प्रोफेसर कमलकान्त की चिंता तो बिल्कुल मत करना क्योंकि तुम्हारे बाद हम इसे भी तुम्हारे पास ही पहुँचा देंगे।

‎परमाणु- कौन कहाँ जाएगा ये तो मैं बताऊँगा तुम दोनों को।

‎इसी के साथ परमाणु ने उन दोनों पर परमाणु ब्लास्ट का वार कर दिया , परमाणु ब्लास्ट का कुछ खास असर उन दोनों पर नहीं हुआ , उन दोनों के शरीर को हल्का सा झटका बस लगा और वो संभल गए।

‎ब्रह्मांड रक्षक अभी भी अपने ट्रांसमीटर्स पर बातें कर रहे थे।

‎नागराज – तुम्हारी योजना काम कर रही है ध्रुव।

‎ध्रुव- हाँ , बस ये योजना आगे भी कम कर तो प्रोबोट को कोई नहीं बचा सकता। मैं भी प्रोबोट को शिविर की ही तरफ खींच रहा हूँ।

‎शिविर में—-

‎बौना वामन- च च च, बेचारा परमाणु , लगता है भूल गया है कि हम पर इन तुच्छ वारों का कोई असर नहीं होगा ।

‎चुम्बा- पर मेरा ये वार तुम्हें नही छोड़ेगा परमाणु। मेरा ये वार तुम्हारे रक्त कणों में मौजूद लौह तत्वों को बाहर खींच लेगा और तुम्हारी नसें फट जाएगी , और तुम्हारी ये एबेस्ट्स की पोशाक भी तुम्हें नहीं बचा पाएगी।

‎चुम्बा ने एक शक्तिशाली वार किया और परमाणु चीखने लगा । उसने बचने के लिए दिव्यास्त्रों का भी प्रयोग नहीं किया । तभी किसी ने चुम्बा के सर पर कोई चीज फेंक कर मारी ।

तीनों ने पीछे मुड़ कर देखा तो कमलकांत शिविर के खंभों के सहारे खड़ा था।यह वार भी उसी ने किया था।

‎ आश्चर्य से चुम्बा की आँखे फटी रह गयीं , उसके हाथ से चुम्बकीय वार भी निकलना बंद हो गए।

‎चुम्बा- ये…ये कैसे हो सकता है। इसे होश कैसे आ गया?

‎कमलकान्त ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया , उनके गले से एक हल्की घुटी हुई आवाज निकली-क्या कर रहे हो परमाणु , क्या मैंने तुम्हें इतना कमजोर बनाया है , क्या तुम इन दोनों से हार जाओगे?वार करो परमाणु।

‎बौना वामन उसकी बातें सुन कर बौखला उठा- चुप कर बुड्ढे ! अभी अभी होश आया है और तुरंत ही परलोक जाना चाहता है।

परमाणु ने अब दोनों पर दिव्यास्त्र साध लिए पर इससे पहले ली दिव्यास्त्र उन दोनों तक पहुँच पाता हेल्पर दोनों को बचा कर भाग गया।

‎परमाणु खीझ उठा , ट्रांसमीटर में उसने बोला – ये हेल्पर फिर उन दोनों को बचा कर ले गया।

‎ध्रुव- हाँ , मैंने देखा कि मुझसे लड़ते वक़्त प्रोबोट कुछ क्षणों पहले कुछ बड़बड़ा रहा था , पर अब मुझे पता चला कि वह क्या कर रहा था। सबसे पहले इस प्रोबोट का कुछ करना पड़ेगा।

‎परमाणु- प्रोबोट…। अगर ये प्रोबोट मेरे सामने भी आ गया तो जिंदा नहीं बचेगा।

‎कमलकान्त ने प्रोबोट के बारे में सुना तो चोंक उठे।

‎कमलकान्त- मुझे ले चलो प्रोबोट के पास , मैं… मैं समझाऊँगा उसे।

‎परमाणु- पर प्रोफेसर अब वो हमारा प्रोबोट नहीं रह गया है वो अब…

‎कमलकान्त ने उसकी बात अनसुनी कर दी और खुद शिविर से बाहर चलने लगे।- कोई बात नही मैं समझाऊँगा उसे वो मेरी बात अवश्य मानेगा।

तब तक ध्रुव भी प्रोबोट को खींचता हुआ शिविर के बाहर तक ले आया।परमाणु भी अपने मामा के पीछे शिविर से बाहर निकाला।

‎प्रोबोट को देखते ही कमलकान्त बोल उठे -यह तुम क्या कर रहे हो प्रोबोट मैंने तुम्हें किस लिए बनाया था और तुम क्या कर रहे हो।

‎प्रोबोट- मुझे कोई नही बना सकता मैं सर्व शक्तिमान हूँ।

‎कमलकान्त ने बोलना जारी रखा- मैंने सोचा था कि तुम मेरे अनुपस्थिति में हमेशा परमाणु की मदद करोगे पर तुम तो इसकी ही जान के दुश्मन बन बैठे।

प्रोबोट की आंखों से ये सारा दृश्य गुरुदेव और बाकी की नरकशत सेना देख रही थी।

‎गुरुदेव- क्या कर रहे हो प्रोबोट , वार करो और खत्म कर दो इस बुड्ढे को।

‎प्रोबोट ने वार करने के लिए धीरे से अपना हाथ उठाया।

‎परमाणु ने भी प्रोबोट पर वार करने के लिए अपने हाथ साध लिए।

ध्रुव जो कि परमाणु के पास पहुँच गया था , उसने इशारे से परमाणु को रोक दिया । ध्रुव ने एक बड़ा दांव खेला था जो सफल होता दिख रहा था, प्रोबोट ने अपना हाथ नीचे कर लिया।

कमलकान्त अभी भी बोल रहे थे-मैंने तुम्हें अपना रूप दिया अपनी सारी मेमोरी तुम्हारे अंदर भरी और……

ध्रुव परमाणु से बोला – यही समय है परमाणु एक वार करो ताकि ये प्रोबोट हमेशा के लिए खत्म हो जाये।

परमाणु- पर…ध्रुव मैं कैसे।

ध्रुव – ये तुम क्या कह रहे हो परमाणु , जब तक कोई और यहाँ तक आएगा हो सकता है तब तक प्रोबोट संभल जाए।

परमाणु ने हाथ उठाया पर वार नहीं कर पाया।

ध्रुव- जल्दी करो परमाणु , तुम भूल रहे हो कि प्रोबोट सिर्फ एक मशीन है , तुमको परमाणु कमलकांत ने बनाया है , अगर प्रोबोट संभल गया तो शायद वो भी ना बचें।

परमाणु में प्रचंड अग्नि शक्ति का आवाहन किया और प्रोबोट पर वार कर दिया । प्रोबोट का धातु का शरीर वाष्प बन कर हवा में विलीन हो गया
‎ अपनी मदद के लिए प्रोबोट हेल्पर को भी नहीं बुला पाया।

‎हेल्पर अब बिना प्रोबोट के आदेश के असहाय से रणक्षेत्र के बीच में खड़ा था। इससे पहले की गुरुदेव कुछ कर पता , नागराज ने उसको भी विखण्डित कर दिया , उसके छोटे छोटे टुकड़े पूरे काल क्षेत्र में फैल गए।

‎प्रोबोट और हेल्पर के नष्ट होने की खबर सुन कर ब्रह्मांड रक्षकों के दल में खुशी की लहर दौड़ गई।

‎नागराज – आखिर तुम्हारी योजना काम कर गयी ध्रुव।

‎ध्रुव- हां नागराज पर ऐसा सबके सम्मिलित प्रयास से ही हुआ है। मुझे पता था कि परमाणु को अपने सामने मरता देख कमलकान्त के दिमाग को जरूर झटका लगेगा और वैसा ही हुआ।और क्योंकि प्रोफेसर कमलकान्त ने ही प्रोबोट को बनाया था तो उनको देख कर प्रोबोट का आश्चर्यचकित होना भी स्वाभाविक था , हालांकि ऐसा मैंने बहुत बार देखा है कि मशीन भी भावनाओं से हार जाती है पर इस बार ऐसा होगा या नहीं इसमें मुझे शक था। पर आखिरकर ऐसा कुछ हुआ नहीं और हमारी योजना सफल हो गयी।

‎नागराज – अब देखते है की वो लोग अब कौन सी चाल चलेंगे।

परमाणु कमलकान्त को वापस शिविर में पहुंचा कर वापस रणभूमि में पहुँच चुका था।


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ब्लैक कैट रोबो से लड़ रही थी , रोबो अपनी लेजर आई से ब्लैक कैट को मारना चाह रहा था। रोबो की लेजर आई अब और भी विध्वंसक हो गयी थी , उसका स्पर्श भी जानलेवा साबित हो सकता था।

‎पर ब्लैक कैट मदद की उम्मीद में अभी अकेले ही रोबो का सामना कर रही थी।

‎मदद उससे ज्यादा दूर नहीं थी। कुछ ही दूर पर नागराज और नताशा काल पहेलिया और वायरस से लड़ रहे थे। काल पहेलिया खतरनाक बमों का सहारा ले कर दोनों पर वार कर रहा था और वायरस खतरनाक जैविक हथियारों से हमला कर रहा था जो कि जमीन पर छोटे छोटे रेंगने वाले जानवरों के रूप में जमीन पर रेंग रहे थे।

‎इस बार जैसे ही वायरस ने हमला किया नागराज ने नताशा को इशारा किया और नताशा ने काल पहेलिया द्वारा फेंके गए बम को वायरस द्वारा फेंके गए जीवाणुओं के ऊपर उछाल दिया और दोनों नष्ट हो गए।

‎उधर ब्लैक कैट रोबो को अपने पूँछ में जकड़ना चाह रही थी , पर रोबो की लेजर आई का वार उसकी पूंछ पर लगा और वो दर्द से चिल्ला उठी।

‎नागराज ने उसकी चीख सुनी और गुस्से से एक दिव्यास्त्र का आवाहन किया और उसी दिशा में बढ़ गया । तभी वायरस ने अपने जीवाणुओं का एक बक्सा नागराज के ऊपर फेंका ।

‎ नागराज – शायद तुम्हे पता नही की मेरे विष के प्रभाव से ये कुछ ही क्षणों में मर जाएँगे।

‎वायरस- तुम्हे गलतफहमी है नागराज ये तुम्हारे ही विष के अनुरूप बनाये गए है , ये मरेंगे तो पर इतने जल्दी नहीं।

धीरे धीरे सारे विषाणु अपना आकार बढा कर नागराज को ढकने लगे , इससे पहले कि नागराज कुछ करता उसके कानों में ब्लैक कैट की एक और चीख गूँजी।

‎नागराज ने दिव्यास्त्र नताशा की तरफ फेंका- जल्दी करो नताशा इन्हें मैं संभालता हूँ तुम ब्लैक कैट के पास जाओ। बस इस दिव्यास्त्र को रोबो पर साधना और ये अपने आप चल जाएगा क्योंकि मैंने इनका पूर्ण आव्हान कर दिया है।


दिव्यस्त्र को लेकर नताशा बढ़ चली और जीवाणुओं का खोल नागराज को पूरी तरह ढँकने लगा।

‎काल पहेलिया वहाँ से चला गया जबकि वायरस अभी भी खोल को ही देख रहा था।

‎” मैं यहाँ हूँ वायरस” वायरस ने पीछे मुड़ कर देखा , नागराज उसके पीछे खड़ा था।

‎”जब तुम मेरी मृत्यु देखने मे व्यस्त थे तब मैं इच्छाधारी कणों में बदल कर तुम्हारे पीछे पहुंच गया था”

‎नागराज ने दिव्यस्त्र का आवाहन किया और वायरस पर चला दिया।

‎”अब तुमको कोई नही बचा सकता वायरस” नागराज का वार वायरस की जान लेता चला गया।

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गुरुदेव ,मिस किलर और नागेन्द्र अपने आगे की रणनीति बना रहे थे।मिस किलर ने नागेन्द्र के दाहिनी कलाई पर लगे यंत्र में कुछ और लगाने के बाद कहा-मैंने इसमें डार्ट्स जैसा सिस्टम लगा दिया है , अब तुम्हारे एक ही इशारे से इसमें से ऐसी डार्ट्स निकलेंगी जो तुम्हारे विष से भरपूर रहेंगी और सामने वाले को कुछ ही क्षणों में गला देंगी।
‎अब तुम्हे ब्रह्मांड रक्षको के दल को देखते ही यह डार्ट्स उनकी तरफ फेंकनी है ताकि उन्हें संभलने का मौका न मिले।

‎नरक शत सेना की रणनीति एक बार फिर तैयार थी।

‎उधर-

‎रोबो ब्लैक कैट पर आखिरी वार करने ही वाला था कि नताशा की आवाज गूँज उठी- रुको रोबो।

‎इस जानी पहचानी आवाज को सुनकर रोबो ठिठक गया।

‎रोबो- वाह ! तो अब मेरी बेटी ही अपने पिता की जान लेगी ।शाबाश नताशा मुझे इसी दिन का इंतज़ार था।

‎पर नताशा के हाथों से वार नही हुआ।

‎ब्लैक कैट- क्या कर रही हो नताशा वार करो।

‎रोबो- हाँ हाँ करो वार अपने बाप पर।

‎इससे पहले कि नताशा कुछ कर पाती नागेन्द्र वहाँ आ गया और उसने नताशा पर डार्ट्स का वार कर दिया और रोबो को लेकर भाग गया।

उसी क्षण नागराज वहाँ आया और उसने नताशा के शरीर से सारा जहर फैलने से पहले निकाल दिया। नताशा अब खतरे से बाहर थी।

ध्रुव चिंतित था , उसे जिस बात का डर था वही हुआ।

नागेन्द्र अब सीधी लड़ाई नही लड़ रहा था , वह ब्रह्मांड रक्षको पर अचानक से हमला कर रहा था , नागराज अपने दल को बचाने का प्रयास करने लगा।

नागराज की आवाज कालक्षेत्र में गूँज उठी -अगर हिम्मत है तो सामने आओ नागेन्द्र , यूं छुप कर कायरों जैसे वार क्यो कर रहे हो।

नागेन्द्र (मन में)- आऊँगा नागराज , पर सही समय पर । पहले तुम्हारी सेना को खत्म तो कर दूँ।

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कालक्षेत्र का यह महारण पृथ्वी पर भी देखा जा रहा था।

स्थान- महानगर ।

वेदाचार्य धाम।

भारती और वेदाचार्य तिलिस्म की सहायता से सारा दृश्य देख रहे थे।

भारती- दादा जी क्या नागेन्द्र के विष को खत्म नही किया जा सकता।

वेदाचार्य- किया जा सकता है भारती पर अमृत ऊर्जा से , पर इस ऊर्जा को धारण करने वाला व्यक्ति भी ऊर्जा में बदल जायेगा।

पर हम इस जानकारी को उन तक नहीं पहुंचा सकते।पर आशा करता हूँ वे नागेन्द्र को नष्ट करने का कोई न की तरीका अवश्य निकाल लेंगे।

अब तुम भी आराम कर लो भारती।

मनुष्य की छठी इन्द्रिय हमेशा उसे आने वाले खतरे का आभास दे देती है पर शायद वेदाचार्य की छठी इन्द्रिय भी आज उन्हें धोखा देने वाली थी , क्योंकि उनकी छठी इन्द्रिय भी भारती के विचारों को नहीं भाप सकी।

अकेले कमरे में भारती खुद से ही बोलने लगी-

जानकारी न सही पर अमृत ऊर्जा तो कालक्षेत्र अवश्य पहुँच सकती है।

———-【समाप्त】———-

■गाथा जारी है – अंतिम पर्व में – विनाश पर्व■

Written By – Akash Pathak for Comic Haveli

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10 Comments on “Nagbharat – (Rann Parv)”

  1. वाह बहुत खुब कहानी काफी अच्छी थी लेकिन जैसे-जैसे कहानी में रोमांच और अधिक बढ़ने लगा कहानी का यह पार्ट खत्म हो गया अब अब बेसब्री से अगले पार्ट का इंतजार रहेगा ।
    कहानी की शुरुआत में थोड़ी ग्रामर मिस्टेक थी लेकिन शायद यह सब कभी कबार हो जाता है

  2. बहुत उम्दा।
    सारी लड़ाई काफी अच्छी दिखाई है आपने।
    कुछ scene वैसे छोटे भी लग रहे थे।
    लेकिन इससे कहानी की सुंदरता पर कोई फर्क नही पड़ा।
    मुझे बहुत इंतज़ार रहेगा अगले पार्ट का।

    1. धन्यवाद देवेंद्र जी ,अगला भाग भी जल्द ही प्रस्तुत होगा।

  3. बहुत अच्छी जा रही है कहानी। नागेंद्र और नागराज के युद्ध की प्रतीक्षा रहेगी। प्रोबोट और हेल्पर का नष्ट होना भी बहुत अच्छे तरीके से दर्शाया गया। अब आगे की कहानी की प्रतीक्षा रहेगी।

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